Tuesday, October 24, 2023

महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि


 



।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।।


इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पहले सुरक्षा घेरे से बाहर न आये । इस मंत्र को प्रतिदिन 11 माला जाप करे । माला कोई भी ले सकते है ।

https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


चौमुखा तेल का दीपक जलाए और अंत में 11 आहुतियाँ बकरे की कलेजी की और गुग्गल की अग्नि में दे । अग्नि गोबर के कंडे की होनी चाहिए । यह क्रिया आपको 41 दिन तक करनी है । इस साधना में भैरव जी प्रत्यक्ष दर्शन देते है । साधना के दौरान ब्रह्मचारी रहे, ब्रह्मचर्य खंडित हो जाने पर व्यक्ति साधना का फल कम हो जाता है ।


https://t.me/+dchYOwUCAL5mZjM1


।। प्रयोग विधि ।।


जब भी कोई कार्य करवाना हो तो इस मंत्र की 1 माला जप करे और अग्नि में 11 आहुतियाँ देकर भैरव जी से प्रार्थना करे , कार्य सिद्ध हो जायेगा अथवा कपूर का काजल अपनी हथेली पर लगाये और हथेली को देखते हुए मंत्र का जाप करे , भैरव जी हथेली में दर्शन देंगे और जो भी कार्य कहा जायेगा , वह कर देंगे ।


।। मंत्र ।।


।। काला भैरो काला बाण

खप्पर खाए चढ़े समान ,

जिन्दे को मारे , मुए की खबर ले आये

कढ कलेजा मुख विच पाए

चोटी मार तली ते आये

ता काला भैरो कहलाये ।।


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Saturday, October 21, 2023

सूर्य ग्रह अगर किसी का अच्छा होता है तो ऐसे जातक राजा समान जिंदगी जीते हैं किंतु


 


सूर्य ग्रह अगर किसी का अच्छा होता है तो ऐसे जातक राजा समान जिंदगी जीते हैं किंतु


सूर्य कमजोर जातक हर जगह अपमान पाते है और मान सम्मान में कमी होती हैं


सूर्य कमजोर की पहचान


https://t.me/+dchYOwUCAL5mZjM1


1.ऐसे जातक के पेट में गैस संबंधी परेशानी बनी रहेगी


2. ऐसे जातक की पढ़ाई में अवरोध होगा और सरकारी कामकाज में कार्य पूरे नही होंगे


3.पिता से नही बनेगी और पिता का अपमान करेंगे


4. ऐसे जातक की आंखे हल्की सी पीली हो सकती है हफ्ते में 2 बार


5.मान सम्मान प्राप्त नही होता है चाहे कितनी ही। तारिक्की कर ले


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


नुकसान


1.राहु सूर्य साथ हो तो जातक 

अच्छे पद पर होने के बावजूद बेइज्जत होता है


2.सूर्य केतु साथ हो तो ऐसे जातक को आत्म सम्मान पर बहुत ठेस पहुंचती हैं|


 3.सूर्य अगर अगर पंचम भाव में शनि के साथ होता है तो ऐसे जातक अपने भविष्य खुद तबाह कर लेते है


4.सूर्य बुध केतु के साथ युति कर छठे आठवें या द्वादश भाव में बैठता है तो जातक की सर्जरी हो सकती है


5.अगर सूर्य लग्न में केतु हो तो ऐसे जातक को हृदय संबधी रोग काफी हद तक हो सकता है


उपाय 


1.सूर्य के लिए तांबे का दान करना चाहिए 


2.सूर्योदय के साथ इस मंत्र का जप करें 


" ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः "


 उसके बाद 21 बार आदित्य स्त्रोत के पाठ करे


3. गाय को गेहूं की रोटी खिलाएं उसमे थोड़ा सा गुड़ भी रख दे


4.सूर्य सहस्त्रनाम के जप भी कर सकते हैं


5.सूर्यदेव को कुमकुम और गुड़ मिलाकर अर्ध दे


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


दक्षिणा  -  501  मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  महायोगी अघोराचार्य   》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्   9958417249

Saturday, October 7, 2023

सूर्य ग्रह अगर किसी का अच्छा होता है तो ऐसे जातक राजा समान जिंदगी जीते हैं किंतु


 



सूर्य ग्रह अगर किसी का अच्छा होता है तो ऐसे जातक राजा समान जिंदगी जीते हैं किंतु


सूर्य कमजोर जातक हर जगह अपमान पाते है और मान सम्मान में कमी होती हैं


सूर्य कमजोर की पहचान


https://t.me/+dchYOwUCAL5mZjM1


1.ऐसे जातक के पेट में गैस संबंधी परेशानी बनी रहेगी


2. ऐसे जातक की पढ़ाई में अवरोध होगा और सरकारी कामकाज में कार्य पूरे नही होंगे


3.पिता से नही बनेगी और पिता का अपमान करेंगे


4. ऐसे जातक की आंखे हल्की सी पीली हो सकती है हफ्ते में 2 बार


5.मान सम्मान प्राप्त नही होता है चाहे कितनी ही। तारिक्की कर ले


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


नुकसान


1.राहु सूर्य साथ हो तो जातक 

अच्छे पद पर होने के बावजूद बेइज्जत होता है


2.सूर्य केतु साथ हो तो ऐसे जातक को आत्म सम्मान पर बहुत ठेस पहुंचती हैं|


 3.सूर्य अगर अगर पंचम भाव में शनि के साथ होता है तो ऐसे जातक अपने भविष्य खुद तबाह कर लेते है


4.सूर्य बुध केतु के साथ युति कर छठे आठवें या द्वादश भाव में बैठता है तो जातक की सर्जरी हो सकती है


5.अगर सूर्य लग्न में केतु हो तो ऐसे जातक को हृदय संबधी रोग काफी हद तक हो सकता है


उपाय 


1.सूर्य के लिए तांबे का दान करना चाहिए 


2.सूर्योदय के साथ इस मंत्र का जप करें 


" ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः "


 उसके बाद 21 बार आदित्य स्त्रोत के पाठ करे


3. गाय को गेहूं की रोटी खिलाएं उसमे थोड़ा सा गुड़ भी रख दे


4.सूर्य सहस्त्रनाम के जप भी कर सकते हैं


5.सूर्यदेव को कुमकुम और गुड़ मिलाकर अर्ध दे


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


दक्षिणा  -  501  मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  महायोगी अघोराचार्य   》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Thursday, September 28, 2023

स्वर्णप्रभा यक्षिणी मंत्र साधना


 



स्वर्णप्रभा यक्षिणी मंत्र साधना 


स्वर्णप्रभा यक्षिणी मंत्र यक्षिणी को प्रकट करने की एक दिव्य साधना है। यक्षिणी स्वभाव से बहुत सुंदर, सौम्य और सरल है। वह सोलह वर्ष की युवती के रूप में सुन्दर वस्त्रों से सुसज्जित रहती है। वह सदैव युवा है.


स्वर्णप्रभा बस अपने शरीर के पास सुनहरे रंग की आभा बिखेरती है। वह अद्भुत और आकर्षक दिखती हैं।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


उसके शरीर से एक अनोखी गंध आती रहती है, जो किसी भी पुरुष को सम्मोहित करने के लिए काफी है। वह साधक के इच्छित कार्य को पूर्ण करने के लिए पूर्णतया समर्पित रहती है. यक्षिणी साधक को धन, ऐश्वर्य और सुख प्रदान करती रहती है।


https://t.me/+dchYOwUCAL5mZjM1


'यक्ष' शब्द एक ऐसी विशेष जाति को दर्शाता है और यह जाति स्वयं धन, ऐश्वर्य, संप्रभुता और समृद्धि की स्वामी है। देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर हैं, जिनकी दिवाली के अवसर पर लक्ष्मी के साथ पूजा की जाती है। कुबेर 'यक्ष' जाति के हैं और रावण ने भी कुबेर साधना करके ऐश्वर्य प्राप्त किया था।


यक्षिणी साधना लक्ष्मी साधना से भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यक्षिणी साधना से हम वह सब कुछ हासिल कर सकते हैं, जो हमारे जीवन का उद्देश्य है। यक्षिणी साधना को निम्नलिखित पाँच कारणों से अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है:


1. यह साधना सरल है और इसमें अधिक जटिल अनुष्ठान नहीं हैं।


2. यह साधना न्यूनतम समय की है और इसमें साधक को अधिक समय भी बर्बाद नहीं करना पड़ता है।


3. यह साधना अत्यंत सफल और तुरंत फल देने वाली मानी जाती है।


4. यक्षिणी साधना से साधक को किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती, बल्कि लाभ ही होता है।


5. यक्षिणी साधना पूरी करने के बाद यक्षिणी जीवन भर सौम्य रूप में साधक के वश में रहती है और उसके इच्छित कार्य को पूरा करती रहती है।


यक्षिणी साधना के लाभ


 साधना पूरी होने के बाद, यक्षिणी शारीरिक रूप से सुंदर-फिट कपड़ों में साधक से मिलती है और उसकी ही बनकर रह जाती है।


ऐसी यक्षिणी जीवन भर साधक की आज्ञा का पालन करती रहती है।


आदेश मिलने पर साधक जो भी चाहता है, यक्षिणी उसे प्रदान करती रहती है। यह धन, ऐश्वर्य, वस्त्र, सोना, शारीरिक सुख और मानसिक संतुष्टि आदि प्रदान करता है।


ऐसी यक्षिणी सलाहकार के रूप में साधक को निरंतर सलाह और मार्गदर्शन देती है। मुसीबत के समय वह जी-जान से सेवा करती है।


यक्षिणी सिद्ध होने पर साधक को शारीरिक एवं मानसिक रूप से संतुष्टि प्रदान करती है।


ऐसी यक्षिणी साधक को प्रत्यक्ष दिखाई देती है और कभी धोखा नहीं देती।


 किसी भी प्रकार की साधना या पूजा करने वाला साधक ऐसी साधना कर सकता है।


यक्षिणी साधना जीवन में धन-संपत्ति प्रदान करती रहती है। ऐसे साधक को बुढ़ापा नहीं घेरता। यक्षिणी के प्रभाव से साधक स्वयं निरंतर युवा बना रहता है।


यह सर्वोत्तम साधना है क्योंकि योगियों, यति और संन्यासियों ने भी इसमें सफलता प्राप्त की है और जंगल और पहाड़ों में भी सौभाग्य बनाए रखा है। ऐसी साधना एक गृहस्थ भी कर सकता है। इसे कोई भी पुरुष या महिला कर सकता है.


यदि किसी कारणवश यह साधना विफल भी हो जाए तो भी साधक को कोई हानि नहीं होती है। कई साधकों के लिए यह साधना पहली बार में ही सिद्ध हो जाती है।


स्वर्णप्रभा यक्षिणी मंत्र साधना मुहूर्त


यदि यह साधना दीपावली के आसपास की जाए तो अधिक उचित है। इस साधना को करने का सबसे शुभ समय दीपावली के बाद दूसरा दिन होता है।


साधना सामग्री


 जल का लोटा, कुमकुम, केसर और चावल,

यक्षिणी माला जिसके माध्यम से मंत्र का जाप करना होता है।


पहनने को पीला आसन और पीली धोती;

दिव्यांगना स्वर्णप्रभा यक्षिणी सिद्धि गुटिका ।

रात्रि के दस बजे के बाद साधक को पीला आसन बिछाकर उस पर शांत मन से बैठना चाहिए।


उपर्युक्त सामग्रियों के अलावा, कुछ गुलाब भी लें। फूलों की एक माला भी रखें, ताकि जब यक्षिणी दिखाई दे तो माला उसे पहना दी जाए और उससे यह वचन लें कि वह जीवन भर आपके वश में रहेगी और आप जो आदेश देंगे वही करेगी।


साधक को दिव्यांगना स्वर्णप्रभा यक्षिणी सिद्धि गुटिका को गले या दाहिनी भुजा पर धारण करना चाहिए। एक स्टील की थाली पर केसर से स्वस्तिक और श्री लिखें। साधक को अपने शरीर पर कोई इत्र लगाना चाहिए।


फूल और दूध से बनी मिठाई समर्पित करें. पास में तेल का दीपक और अगरबत्ती जला लें। साधक को स्वयं उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए और उसी रात्रि को माला से 21 माला मंत्र का जाप पूरा करना चाहिए। इस मंत्र साधना को 21 दिनों तक करें।


स्वर्णप्रभा यक्षिणी मंत्र


ॐ ऐं श्रीं ह्रीं दिव्यांगना आगच सिद्धिं देहि देहि फट्


स्वर्णप्रभा यक्षिणी साधना सिद्धि मंत्र


ॐ ऐं श्रीं ह्रीं विलक्षणना आगच्छ सिद्धिं देहि देहि फट |


मंत्र जाप के बाद एक अत्यंत मधुर सुगंध वाली षोडशी दिव्यांगना यक्षिणी पास आती है। जब यक्षिणी के प्रत्यक्ष दर्शन हो या ऐसा अनुभव हो कि कोई स्त्री बैठी है तो साधक को माला उसके गले में डाल देनी चाहिए और वचन लेना चाहिए कि दिव्यांगना यक्षिणी उसके वश में रहेगी तथा वह जो भी आदेश देगी, उसका पालन करेगी। उसके शेष जीवन के लिए.


इस साधना के पूरा होने के बाद गुटिका को अपनी बांह पर बांध लें। ऐसा करने से साधक को पूर्ण सिद्धि प्राप्त होती है।


आवश्यक साधना सामग्री :


यक्षिणी माला


दिव्यांगना स्वर्णप्रभा यक्षिणी सिद्धि गुटिका ।


साधना समाग्री दक्षिणा === 2100


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

चौसठ महा कृत्या मन्त्र साधना


 


चौसठ महा कृत्या मन्त्र साधना


यह साधना अत्यंत गोपनीय,दुर्लभ और प्राचीन है।यह कृत्या शरीर से उत्पन्न होती है।यह वशीकरण ,मोहन,मारण,उच्चाटन का प्रबल अस्त्र है।जब भगवान् शिव को क्रोध आया और उनके सैनिक परास्त होकर आ गए थे तब उन्होंने अपने शरीर से कृत्या का निर्माण किया था और यज्ञ का नाश किया था,


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


बड़े बड़े ऋषि मुनियो के तंत्र मन्त्र भी कृत्या शक्ति के आगे काम नही कर पाये अर्थात फैल हो गए।कृत्या मानव शरीर से उत्पन्न एक देवी शक्ति है।जिस तरह मनुष्य अपने शरीर से मन्त्र साधना से अपने तीन हमजाद सिद्धि करता है उसी तरह कृत्या सिद्ध हो जाती है। 


https://t.me/+dchYOwUCAL5mZjM1


मन्त्र की कृत्या तंत्र की कृत्या से 100 गुना ज्यादा तीव्र कार्य करती है।कुछ ही सेकंडो में मात्र। प्राचीन काल में चौसठ महा कृत्या गुरुदेव शुक्राचार्य जी को सिद्ध थी।यह चौसठ कृत्या तीनो लोको के कार्य संपन्न करती है।


अगर साधक अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ आकाश में करके चौसठ कृत्या का मन्त्र जप कर कार्य कहे तो स्वर्ग में हा हा कार हो जाय, पृथ्वी पर करे तो मानव में हलचल हो जाये,भूमि की तरफ देखकर करे तो पाताल लोक में।


 अर्थात चौसठ कृत्या साधक किसी भी देव देवी ,अप्सराआदि को वशीभूत कर सकता है।घर बैठे उनको दण्डित कर सकता है,इतर योनि को मारण कर सकता है।इसी शक्ति मन्त्र के बल पर रावण ने लंका में बैठे हुए ही स्वर्गलोक में नृत्य करने वाली अप्सरा का शक्ति उच्चाटन किया था जिससे वह बेहोश होकर गिर गयी थी।


 जब चौसठ कृत्या देवी आती है तब मारण के लिये तो भूत प्रेत,ब्रह्म राक्षस ,पिशाच,जिन,कर्णपिशाचिनी आदि शक्तियाँ भाग जाती है नही तो कृत्या कालग्रास बना देती है सबको और एक बबूले अर्थात बवंडर में लपेटकर सबको अंतरिक्ष में विलीन हो जाती हैं। 


कृत्या सिद्ध होने पर साधक मन्त्र से जल पड़कर रोगी को पिलाय तो रोगी रोगमुक्त हो जाता है।कोई तंत्र साधक को हानि नही पहुंचा सकता है।साधक मन में असीम बल धारण कर लेता है।चार कर्म सिध्द हो जाते हैं।


वर्तमान में 26 योग्य साधको को चौसठ कृत्या प्रदान करायी गयी है।जो सफलता पूर्वक मानव भलाई के कार्य कर रहे हैं। कृत्या एक सात्विक साधना है।मांस मदिरा का सेवन वर्जित है। कृत्या साधना गुरुकृपा ,शिवकृपा से ही प्राप्त होती है।कृत्या साधना का पूर्ण विधान यहाँ नही दिया गया है,केवल साधको के ज्ञानार्थ है। 


चौसठ कृत्या सिद्धि किसी भी मंगलवार या अमावस्या से शुरू की जा सकती है।काले वस्त्र धारण करके तेल का दिया जलाकर सिद्ध की जाती है,इसमें सभी कर्म बांये हाथ से करने होते है जैसे दिशाबन्धन,देह रक्षा आदि। 


चौसठ कृत्या सिद्ध साधक सेकड़ो अधर्मी तांत्रिको पर भारी पड़ जाता है।(यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब कोई मारण ,बन्धन,तांत्रिक परयोग का शिकार आदमी हमारे पास आता है और इलाज के लिये बोलता है,तब ऑनलाइन माध्यम से उस का फ़ोटो ,माता का नाम पिता का नाम,पूरा पता लिया जाता है,,


तब पीड़ित को आत्मिक रूप से संपर्क करके यदि उसके ऊपर तांत्रिक प्रयोग होता है तो उसको उच्चाटन कर दिया जाता है।किसी भी तरह की आत्मा होती है तो उसका मारण या मुक्ति कर दिया जाता है 


या कोई चोकी लाट देवी या देवता की होती है तो उसको वापस् उठा कर उसके स्थान पर भेज दिया जाता है जिससे रोगी के प्राण बच जाते है।अपना शेष जीवन व्यतीत करता है ।उस तांत्रिक को शक्तिहीन कर दिया जाता है बन्धन से ,,


यदि वो अपने गुरुओ के पास जाता है और उनके गुरु भी उसकी गलती नही मानते ,उसकी हेल्प करते है तो उनको भी बंधन कर दिया जाता है।) 


मन्त्र 


ॐ ब्रह्मसूत्रसमस्त मम देह आवद्ध आवद्ध वज्र देह फट् ॐ ऐम् क्लीम् ह्रीम् क्रीम ॐ फट ॐ चौसठ शिवकृत्या प्रयोगाय दस दिशा बंधाये क्रीम क्रोम फट् ॐ रम् देहत्व रक्षा य फट्। 


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Monday, September 25, 2023

सर्व संकट नाशक मंत्र..


 



सर्व संकट नाशक मंत्र..


ॐ ह्रीं बगुला मुखी, सर्व दुष्टानाम वाचं मुखंपदम् स्तम्भय, जिहवाम् कीलय, कीलय बुद्धि विनाशाय ह्रीं ॐ स्वाहा।


 (साधक का नाम अवश्य अंत में जोड़ा जाये और जय बगुला मुखी भी अन्त में कहा जाये)


https://t.me/+dchYOwUCAL5mZjM1


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


समस्या- किसी भी प्रकार की समस्या हो, चाहे सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, राजनैतिक व झगड़ा-फसाद, नौकरी का न मिलना या प्रमोशन पाना, मुकद्दमे में विजय, परीक्षा में सफलता, विवाह शादी न होना या पति-पत्नी का आपस न निभ पाना, फिल्म या किसी प्रकार व्यापार, क्रिया कलाप, बीमारी शत्रु रक्षा सभी के लिये अचूक राम बाण है यह मंत्र ।


विधि विधान-


 बगुलामुखी देवी या किसी भी देवी का उपलब्ध चित्र सामने रखकर, फूलों से, धूप दीप जलाकर, प्रतिमा या चित्र के सामने अपना मनोरथ स्पष्ट प्रकट करे और प्रतिदिन 31 से 51 बार मंत्र जप करें। जितनी शुद्धता व मन में पवित्रता आती जायेगी, उतनी ही शीघ्रता से बगुलामुखी साधक की मनोकामना पूर्ण करती है।


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


दक्षिणा  -  501  मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  महायोगी अघोराचार्य   》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Tuesday, September 12, 2023

इन्द्राक्षी साधना


 



इन्द्राक्षी साधना 


माँ इन्द्राक्षी की साधना सम्पूर्ण वैभव देने वाली तथा रोगों का नाश करने वाली मानी जाती है।साधक के जीवन में आर्थिक अनुकूलता आने लगती है तथा समाज में उसे मान सम्मान की प्राप्ति होती है।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


इन्द्राक्षी साधना के बारे में ये भी कहा जाता है की जो साधक इसे पूर्ण निष्ठां तथा समर्पण के साथ करता है माँ उसे इंद्र की ही तरह सम्पूर्ण वैभव तथा आरोग्यता प्रदान कर देती है।साधक के समस्त आतंरिक तथा बाहरी भय का नाश हो जाता है।तथा वो साधनाओ में सफलता की और बढता है


https://t.me/+dchYOwUCAL5mZjM1


 विशेषकर लक्ष्मी साधना में।माँ इन्द्राक्षी की साधना से सम्बंधित कई प्रयोग है अभी केवल एक साधना यहाँ दे रहा हु।आशा करता हु आप इसे संपन्न कर माँ की कृपा के पात्र बनेंगे।


विधि:


यह साधना किसी भी शुक्रवार से आरम्भ की जा सकती है।साधक समय स्वयं निर्धारित करे।पर प्रतिदिन समय एक ही हो।और ऐसे समय का चुनाव करे जब आप शांति के साथ साधना कर सके।आसन तथा वस्त्र आपके पीले हो,तथा मुख उत्तर या पूर्व की और हो।


अब अपने सामने एक बजोट रखे और उस पर एक पिला वस्त्र बिछा दे।अब एक कागज़ पर या भोजपत्र पर इन्द्राक्षी यन्त्र बनाये।इसमें अष्टगंध की स्याही का उपयोग होगा तथा कलम होगी दडिम की।यन्त्र बनाने के बाद उसे स्थापित कर उसका पूजन करे।


शुद्ध घी का दीपक हो तथा भोग में खीर या पञ्च मेवा चड़ाए।एक कोई भी फल अर्पण करे।तथा माँ से सफलता की प्रार्थना करे।अब स्फटिक माला से,निम्न मंत्र की 51 माला करे।ये क्रम 10 दिन तक रखे।आखरी दिन घी तथा पञ्च मेवा मिलाकर कम से कम 1008 आहुति प्रदान करे


।इस तरह ये साधना संपन्न होती है।साधक चाहे तो सवा लाख मंत्रो को अनुष्ठान भी कर सकता है।साधन के बाद यन्त्र को पूजा घर में स्थापित करदे।प्रसाद स्वयं तथा परिवार वाले ग्रहण करे।कम से कम एक कन्या को भोजन कर दक्षिणा दे संतुष्ट करे।


आप स्वयं इस साधन का प्रभाव अपने जीवन में अनुभव करने लगेंगे।अगर इसके साथ की इन्द्राक्षी कवच का पाठ भी नित्य किया जाये तो परिणाम और अनुकूल होते है।


मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं इन्द्राक्षी नमः .


om shreem hreem kleem aim indrakshi namah


साधना समाग्री दक्षिणा === 1750


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Saturday, September 9, 2023

प्रेम लव मैरिज अरेंज मैरिज कोर्ट मैरिज या वैवाहिक सुख या शादी सुख प्राप्ति के लिए ओपल धारण करें ...


 


प्रेम लव मैरिज अरेंज मैरिज कोर्ट मैरिज या वैवाहिक सुख या शादी सुख प्राप्ति के लिए ओपल धारण करें ...


सौंदर्य प्रसाधनों से जुड़ा व्यापार या व्यवसाय कर रहें व्यक्तियों को ओपल रत्न धारण करने से लाभ बेहतर होते हैं।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


https://t.me/+dchYOwUCAL5mZjM1


दूध और दूध से बनी वस्तुओं जैसे- डेयरी उत्पादों, मिठाई और इसी प्रकार के व्यवसायों में कार्यरत व्यक्तियों को ओपल रत्न धारण करने से लाभ होता हैं।


प्रेम संबंधों में सफलता पाने के लिए भी ओपल रत्न धारण किया जाता हैं।


कला जगत, कलात्मक कॄतियों के निर्माता, रचनात्मक विषयों से जुड़े व्यक्तियों का रत्न धारण करना शुभ और अनुकूल फलदायक साबित होता हैं।


चिकित्सा क्षेत्र में ओपल का उपयोग हार्मोनल स्त्राव को संतुलित करने के लिए किया जाता हैं।


यह माना जाता है कि यह रत्न अपने धारक की भावनाओं को दर्शाता हैं। इसमें किसी भी प्रकार का कोई असंतुलन होने पर यह भावनाओं को संतुलित करने का कार्य भी करता हैं।


सबसे अच्छी बात यह है कि ओपल रत्न को वफादारी, सच्चाई और सहजता का प्रतीक रत्न हैं। मन की चंचलता में स्थिरता लाने का कार्य यह करता हैं।


अपनी मनमोहक छ्टा से यह व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति को बेहतर करता हैं और जीवन में शांति लाता हैं।

नेत्र चिकित्सा में इसका उपयोग किया जाता हैं।


दांपत्य जीवन में किसी भी प्रकार की कोई समस्या चल रही हों तो ओपल रत्न धारण करने से वैवाहिक जीवन के सु्खों में बढ़ोतरी होती हैं।


ओपल रत्न शुक्र का उपरत्न होने के कारण इसे प्रेम, स्नेह और विपरीत लिंग संबंधों को मजबूत करने के लिए धारण किया जाता हैं।


धन की देवी लक्ष्मी जी की शुभता प्राप्ति के लिए भी ओपल रत्न को धारण किया जा सकता हैं।

यह रत्न अपने धारक को सुख-शांति और सहजता देता हैं।


यदि कुंडली में शुक्र रत्न बलवान हों, शुभ भावों का स्वामी होकर, शुभ भाव में स्थित हों तो यह रत्न धारण करना धारक को स्वास्थ्य, संतान और भाग्य सभी कुछ दे सकता हैं।


ओपल रत्न वॄषभ राशि वृषभ लग्न, तुला राशि तुला लग्न और मिथुन लग्न, कन्या लग्न, मकर लग्न और कुम्भ लग्न वालों को विशेष रुप से ओपल रत्न धारण करना चाहिए। कुम्भ लग्न और कन्या लग्न वालों के लिए तो यह भाग्य रत्न होता हैं।


ओपल रत्न कैसे धारण करें / ओपल रत्न धारण विधि

ओपल रत्न को स्वर्ण धातु शुक्रवार के दिन धारण करना चाहिए।


 स्वर्ण धातु लेना संभव न हों तो चांदी या वाईट गोल्ड् में भी इस रत्न को धारण किया जा सकता हैं। यह रत्न अनामिका अंगूली में धारण करना चाहिए। 


धारण और अंगूठी में रत्न धारण करने के लिए शुक्ल पक्ष के शुक्रवार का प्रयोग करना चाहिए।


और अधिक जानकारी या कुंडली परामर्श या रत्न परामर्श से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्याओं का समाधान निराकरण उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न के लिए संपर्क करें ..


 


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


दक्षिणा  -  501  मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  महायोगी अघोराचार्य   》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249


Tuesday, September 5, 2023

पंचागुली साधना


 



पंचागुली साधना 


पंचांगुली मूल मन्त्र है -- 


" ॐ ह्रीं श्री पंचांगुली देवी मम शरीरे सर्व अरिष्टान निवारणाय नमः स्वाहा ठ : ठ : " 


इसका सवा लाख जप का विधान है . जैन तंत्र के  भी पंचांगुली कल्प साधना हस्तरेखा पंडितों और भविष्य वक्ताओं के लिए वरदान है इसका मूलमंत्र है -


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


 " ॐ ठं ठं ठं पंचांगुलि भूत भविष्यं दर्शय ठं ठं ठं स्वाहा "


विधान


साधना के लिए पंचांगुली यंत्र , पंचांगुली चित्र तथा प्राण प्रतिष्ठित स्फटिक माला होना चाहिए साधना शुक्ल पक्ष की द्वितीया , पंचमी , सप्तमी या पूर्णमासी में से किसी भी दिन की जा सकती है सात दिन की साधना है .ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पीले वस्त्र पहिन , पीले आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुँह करके बैठे .


एक बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाकर शिवजी और पंचांगुली देवी का चित्र तथा ताम्र प्लेट में पंचांगुली यंत्र रखें गणपति का ध्यान करें ॐ नमः शिवाय की एक माला जपें .


यंत्र पर कुमकुम से स्वस्तिक का चिन्ह बनाकर षोडशोपचार पूजन करें संकल्प लें स्फटिक माला से मन्त्र की एक माला का जाप करें.ऐसा सात दिन तक करें .


पंचांगुली ( पांच अंगुलियां इसमें अंगूठा भी शामिल है , याने हथेली ) को देवी माना गया है .गृहस्थों के लिए ब्राह्ममुहूर्त में उठकर यह मन्त्र बोलते हुए अपना हाथ देखने का विधान है 


और मन्त्र जप करके हाथ को देखना

-कराग्रे वसते लक्ष्मी : करमध्ये सरस्वती करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते कर दर्शनम ( हाथों के अग्रभाग में लक्ष्मी , मध्य में सरस्वती और मूल में ब्रह्मा हैं .अतः सुबह उठते ही माथों का दर्शन करें ) 


 देवी का चित्र भी हथेली के बीच में बिराजमान अवस्था में है पंचांगुली देवी की मन्त्र साधना से किसी का भी भूत भविष्य , वर्तमान जाना जा सकता है .


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Sunday, September 3, 2023

सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रम् ॥


 



सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रम् ॥


श्री गणेशाय नमः।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


     विनियोग:- 


ॐ अस्य श्रीसिद्धिलक्ष्मी स्तोत्रस्य हिरण्यगर्भ ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः सिद्धि लक्ष्मीर्देवता मम समस्त दुःख क्लेश पीडादारिद्र्य विनाशार्थं सर्वलक्ष्मी प्रसन्न करणार्थं महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती देवताप्रीत्यर्थं च सिद्धिलक्ष्मी स्तोत्र जपे विनियोगः।


कर न्यास:-


ॐ सिद्धिलक्ष्मी अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।

ॐ ह्रीं विष्णुहृदये तर्जनीभ्यां नमः ।

ॐ क्लीं अमृतानन्दे मध्यमाभ्यां नमः ।

ॐ श्रीं दैत्यमालिनी अनामिकाभ्यां नमः।

ॐ तं तेजःप्रकाशिनी कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।

ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ब्राह्मी वैष्णवी माहेश्वरी

करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः। 


हृदयादिन्यास:-


ॐ सिद्धिलक्ष्मी हृदयाय नमः ।

ॐ ह्रीं वैष्णवी शिरसे स्वाहा ।

ॐ क्लीं अमृतानन्दे शिखायै वौषट् ।

ॐ श्रीं दैत्यमालिनी कवचाय हुम् ।

ॐ तं तेजःप्रकाशिनी नेत्रद्वयाय वौषट् ।

ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ब्राह्मीं वैष्णवीं फट् ॥ 


अथ ध्यानम् ॥


ब्राह्मीं च वैष्णवीं भद्रां षड्भुजां च चतुर्मुखाम्।

त्रिनेत्रां च त्रिशूलां च पद्मचक्रगदाधराम् ॥१॥


पीताम्बरधरां देवीं नानालङ्कार भूषिताम्।

तेजःपुञ्जधरां श्रेष्ठां ध्यायेद्बाल कुमारिकाम्॥२॥


ॐकारलक्ष्मीरूपेण विष्णोर्हृदयम व्ययम्।

विष्णुमानन्दमध्यस्थं ह्रींकारबीज रूपिणी॥३॥


ॐ क्लीं अमृतानन्दभद्रे सद्य आनन्ददायिनी।

ॐ श्रीं दैत्यभक्षरदां शक्तिमालिनी शत्रुमर्दिनी॥४॥


तेजःप्रकाशिनी देवी वरदा शुभकारिणी।

ब्राह्मी च वैष्णवी भद्रा कालिका रक्तशाम्भवी॥५॥


आकारब्रह्मरूपेण ॐकारं विष्णुम व्ययम्।

सिद्धिलक्ष्मि परालक्ष्मि लक्ष्यलक्ष्मि नमोऽस्तुते॥६॥


सूर्यकोटिप्रतीकाशं चन्द्रकोटिसमप्रभम्।

तन्मध्ये निकरे सूक्ष्मं ब्रह्मरूप व्यवस्थितम्॥७॥


ॐकारपरमानन्दं क्रियते सुखसम्पदा ।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके॥ ८॥


प्रथमे त्र्यम्बका गौरी द्वितीये वैष्णवी तथा ।

तृतीये कमला प्रोक्ता चतुर्थे सुरसुन्दरी॥ ९॥


पञ्चमे विष्णुपत्नी च षष्ठे च वैएष्णवी तथा ।

सप्तमे च वरारोहा अष्टमे वरदायिनी॥ १०॥


नवमे खड्गत्रिशूला दशमे देवदेवता ।

एकादशे सिद्धिलक्ष्मीर्द्वादशे ललितात्मिका ॥ ११॥


एतत्स्तोत्रं पठन्तस्त्वां स्तुवन्ति भुवि मानवाः ।

सर्वोपद्रवमुक्तास्ते नात्र कार्या विचारणा ॥१२॥


एकमासं द्विमासं वा त्रिमासं च चतुर्थकम् ।

पञ्चमासं च षण्मासं त्रिकालं यः पठेन्नरः ॥१३॥


ब्राह्मणाः क्लेशतो दुःखदरिद्रा भयपीडिअताः ।

जन्मान्तरसहस्त्रेषु मुच्यन्ते सर्वक्लेशतः ॥ १४॥


अलक्ष्मीर्लभते लक्ष्मीमपुत्रः पुत्रमुत्तमम्।

धन्यं यशस्यमायुष्यं वह्निचौरभयेषु च ॥ १५॥


शाकिनीभूतवेतालसर्वव्याधिनिपातके ।

राजद्वारे महाघोरे सङ्ग्रामे रिपुसङ्कटे ॥ १६॥


सभास्थाने श्मशाने च कारागेहारि बन्धने।

अशेषभयसम्प्राप्तौ सिद्धिलक्ष्मीं जपेन्नरः॥१७॥


ईश्वरेण कृतं स्तोत्रं प्राणिनां हितकारणम! ।

स्तुवन्ति ब्राह्मणा नित्यं दारिद्र्यं न च वर्धते ॥ १८॥


या श्रीः पद्मवने कदम्बशिखरे राजगृहे कुञ्जरे

श्वेते चाश्वयुते वृषे च युगले यज्ञे च यूपस्थिते।


शङ्खे देवकुले नरेन्द्रभवनी गङ्गातटे गोकुले

सा श्रीस्तिष्ठतु सर्वदा मम गृहे भूयात्सदा निश्चला॥१९॥


॥इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे ईश्वरविष्णु संवादे दारिद्र्य नाशनं सिद्धिलक्ष्मी स्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

`~~~~~~````````~~~~~`````~~~~~~


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

राक्षसी बगलामुखी प्रयोग


 


राक्षसी बगलामुखी प्रयोग


शत्रुओं का पूर्णत: शमन


यह एक विशेष उच्च कोटि का तंत्र प्रयोग है। जब भगवती असुरों का वध करते-करते उनके संघार हेतु क्रोधित हुईं तब असुरों ने भगवती का क्रोध को जान कर ब्रह्मा, विष्णु, महेश, रूद्र, सदाशिव, पाँचों का पंच अस्त्रों के रूप में आह्वान किया तब भगवती भयानक रूप धारण कर आसुरी बगला के विराट रूप में प्ररकट हो गयीं।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


 वे ब्रह्मा, विष्णु, महेश, रूद्र, और सदाशीव अस्त्र-रूपों को पकड़ अपना कमला आसन बना कर बैठ गयीं अंत: पंच प्रेत आसन पर बिराजमान होकर कलल असुर की जिह्वा पकड़ बज्र से प्रहार कर उसका सघारं कर दिया। 


उस समय माँ स्वयं ही असुर की समस्त शक्तियों को छीनकर आसुरी रूप में प्रकट हुयीं और उसे मार पंच-प्रेत- आसन विराजित भगवती आसुरी बगलामुखी कहलाईं कुछे एक दुष्ट साधक ब्रह्मा, विष्णु, महेश आदि का आह्वान कर स्वयंम् का बचाव कर लेते है, तथा दूसरों को शैतानी विद्या के माध्यम से कष्ट पहुँचाते हैं। इसके लिए वे आसुरी बगलामुखी का विशेष व उच्चकोटि के तंत्र अस्त्र का प्रयोग करते हैं जिसके प्रभाव से बचना असंभव है।


 इसे ही अभिचार कर्म की संज्ञा दी गयी है। अभिचार कर्म से मुक्ती हेतु आसुरी बगलामुखी प्रयोग को सबमे श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह अघोरी, शमशानी, आदि का भी नाश कर देतीं है।


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249



Thursday, August 31, 2023

विपरीत प्रत्यंगिरा तन्त्र


 


विपरीत प्रत्यंगिरा तन्त्र


शत्रु द्वारा बारम्बार तन्त्र क्रियाओं के किये जाने पर शत्रु यदि रुकने की बजाए और गहरे तन्त्र आघात देने लगें, प्राण हरण पर ही उतर आएँ अर्थात मानव संवेदनाओं की सीमा को लाँघ कर घिनौनी हरकतों पर उतर आएँ तो उसकी क्रिया को उस पर वापिस इस तरह से लौटना की शत्रु को आपके दर्द का एहसास हो इसे विपरीत प्रत्यंगिरा कहा जाता है I


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


 प्रत्यंगिरा और विपरीत प्रत्यंगिरा में ये भेद है की प्रत्यंगिरा शक्ति तो सिर्फ वापिस लौटती है किन्तु विपरीत प्रत्यंगिरा शत्रु को ही वापिस चोट पहुंचाती है और खुद की निश्चित रूप से रक्षा करती है I 


इस प्रयोग के बाद शत्रु आप पर दोबारा यह प्रयोग कभी नहीं कर सकता I उसकी वह शक्ति खत्म हो जाती है I


मन्त्र : 


ॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भंजय भंजय फें हुं फट् स्वाहा I


विनियोग :


 अस्य श्री विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्रस्य भैरव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, श्री विपरीत प्रत्यंगिरा देवता ममाभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोग: I

                                   


|| माला मन्त्र II


ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ कुं कुं कुं मां सां खां पां लां क्षां ॐ ह्रीं ह्रीं ॐ ॐ ह्रीं बां धां मां सां रक्षां कुरु I ॐ ह्रीं ह्रीं ॐ स: हुं ॐ क्षौं वां लां धां मां सा रक्षां कुरु I ॐ ॐ हुं प्लुं रक्षा कुरु I


 ॐ नमो विपरीतप्रत्यंगिरायै विद्याराज्ञी त्रैलोक्य वंशकरि तुष्टिपुष्टिकरि सर्वपीड़ापहारिणि सर्वापन्नाशिनि सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिनि मोदिनि सर्वशस्त्राणां भेदिनि क्षोभिणि तथा I 


परमंत्र तंत्र यंत्र विषचूर्ण सर्वप्रयोगादीन् अन्येषां निवर्तयित्वा यत्कृतं तन्मेSस्तु कपालिनि सर्वहिंसा मा कारयति अनुमोदयति मनसा वाचा कर्मणा ये देवासुर राक्षसास्तिर्यग्योनि सर्वहिंसका विरुपकं कुर्वन्ति मम मंत्र तंत्र यन्त्र विषचूर्ण सर्वप्रयोगादीनात्म 


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Wednesday, August 23, 2023

ना पहनें दो से ज्यादा रत्न नहीं तो अनेक प्रकार की बाधाएं आएगी ....


 


ना पहनें दो से ज्यादा रत्न नहीं तो अनेक प्रकार की बाधाएं आएगी ....


रत्नों का ग्रहों की राशियों से केवल गहरा संबंध ही नहीं है, अपितु यदि उनका सही ढंग से चुनाव किया जा सके तो वे धारण करने वाले व्यक्ति के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाने में सक्षम होते हैं और विरोधी शक्तियों का डटकर सामना करने की शक्ति और जीवन ऊर्जा से भरपूर बनाने में सामर्थ्य देते हैं।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


रत्न धारण से जो ग्रह शुभ स्थानों के स्वामी होकर अशुभ स्थानों में स्थित हो जाता है तो वह निर्बल हो जाता है तो इससे संबंधित रत्न धारण से ग्रह को शक्ति मिलती है और जो अशुभ स्थान का स्वामी हो, पाप ग्रहों की संगत में बैठा हो, उनसे देखा जाता हो या अन्य कारण से दूषित हो तो उससे संबंधित रत्न पहने का अर्थ होगा कि उसकी विघटनकारी, अमंगलकारी शक्ति को उत्प्रेरित करना है।


इसके साथ जो शुभ ग्रह है और अन्य कारणों से भी शुभ है तो उसका रत्न पहनना निःसंदेह उपयोगी होगा, क्योंकि उसकी प्रखरता में वृद्धि होने से संभावित अवरोध भी दूर होंगे। सही रत्न का चुनाव कर शुभ मुहूर्त में अँगूठी बनवाकर व शुभ मुहूर्त में सही उँगली में अँगूठी धारण करने पर ही रत्न लाभकारी होता है।


रत्नों का ग्रहों की राशियों से केवल गहरा संबंध ही नहीं है, अपितु यदि उनका सही ढंग से चुनाव किया जा सके तो वे धारण करने वाले व्यक्ति के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाने में सक्षम होते हैं।


कई बार एक व्यक्ति दो या दो से अधिक रत्न धारण कर लेते हैं। आजकल तो पाँचों उँगलियों में और एक से अधिक रत्न एक ही उँगली में धारण कर लेते हैं। इससे रत्नों का फल निष्फल या विपरीत भी हो जाता है।  


ज्योतिष शास्त्रानुसार दो या दो रत्नों को धारण करते समय अति सावधानी रखना चाहिए। समान तत्व वाली राशियों के स्वामी के तथा मित्र ग्रहों के रत्नों को ही एकसाथ धारण करना चाहिए। शत्रु ग्रहों के रत्नों को धारण करना निषेध है। निम्नांकित सारिणी से भली-भाँति जानकारी मिल सकती है कि कौन-से रत्न एकसाथ धारण करना चाहिए एवं कौन-से रत्न धारण नहीं करना चाहिए।


ग्रहों के लिए निर्धारित उँगलियों में ही रत्न धारण करना चाहिए तभी प्रभावशाली होता है।


रत्न धारण का प्रभाव तभी होता है, जब 'कौन-सा रत्न धारण करना' का सही निर्णय आवश्यक है। रत्न निर्दोष होना चाहिए। सही वजन का होना चाहिए। सही धातु में अँगूठी बनवाकर शुभ मुहूर्त में सही उँगली में निषेध रत्नों के साथ न पहनने से ही लाभकारी होता है।


 अभी बहुत सारे तरीका है हमारे ज्योतिष शास्त्र में यदि आपको भी अपने भाग्य के अनुसार कुंडली के अनुसार ओरिजिनल रत्न धारण करना चाहते हैं तो संपर्क करें और रत्न की जानकारी और रत्न प्राप्त करें 


  


और भी बहुत कुछ कहती है आपकी जन्मकुंडली आपके जीवन और भविष्य जुड़े हुए कुछ संकेत जिसके बारे में आप जानना चाहते हैं ..


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


दक्षिणा  -  501  मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  महायोगी अघोराचार्य   》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249


Monday, August 21, 2023

माँ धूमावती सत्रु विनासक प्रयोग


 



माँ धूमावती सत्रु विनासक प्रयोग


यह प्रयोग अत्यंत भय कारक है। विचार पूर्वक इस मंत्र का जप करना चाईए।। बिना गुरु के इस प्रयोग को करना अत्यंत नुकसान पहुचा सकता है।।।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


मंत्र:::---


धूम धूम धूमावती। मसान में रहती मरघट जगाती। सूप छानती जोगनियो के संग नाचती। डाकनियो के संग मास खाती। मेरी बैरी -------का भी तू मास खाये।कलेजा खाये,लहू पिये प्यास भुजाएँ। मेरी बैरी तड़पा तड़पा मार।ना मारे तो तोहू को माता पारवती के सिंदूर की दुहाई। कनिपा औघड़ की आन।


विधि विधान::::---


एक छोटा सुप ले। थोड़ा सा  शराब और बकरे का कच्चा मास ले। अमावस्या की रात्रि में समशान जाए। वही एक कफन का टुकड़ा ले तथा जलती चिता के समक्ष बैठे । सुरक्षा घेरा लागये।।।


इस मंत्र की 11 माला करे। जप के बाद मंत्र को पढ़ते हुए चिता की राख को मुठी मे ले।


राख में थोड़ी शराब मिलाए तथा उसका एक लेप बना ले उसके बाद कफन के टुकड़े पे अपनी तर्जनी उंगली से मंत्र लिखे । 


रिक्त स्थान पे सत्रु का नाम लिखना है। फिर उसपर बकरे के मास का टुकड़ा रखें। चार तह बना ले फिर सूप मे मास रख कर उसमे बाकी शराब डाल दे। 


और मंत्र बोल कर सूप को चिता पे रख दे और कफन का टुकड़ा लेकर सत्रु के यह डाल दे या घर के बाहर डाल दे छोटी सी टुकड़ा बना कर। सत्रु नाश उसी दिन से हो जाएगा।।


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Saturday, August 19, 2023

यदि शत्रु से परेशानी बढ़ गई हो तो हर रोज रात को लाल आसान पर बैठे,


 



यदि शत्रु से परेशानी बढ़ गई हो तो हर रोज रात को लाल आसान पर बैठे,


अपना मुह दक्षिण दिशा की ओर रखकर तेल का दिया और कोई फल


( बिना कटा ) प्रसाद रख कर ५ बार हनुमान चालीसा और ५ बार 


बजरंग बाण का पाठ करके प्रसाद खुद खाले .राहत मिल ने लगेगी.


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


और भी बहुत कुछ कहती है आपकी हस्तरेखा आपके बारे में आप के जीवन से जुड़े हुए हैं हर पहलू के बारे में आप भी अपने जीवन में कुछ करना चाहते हैं 


कुछ पाना चाहते हैं तो संपर्क करें और हस्तरेखा की पूर्ण विश्लेषण के पश्चात हर प्रकार की सफलताएं प्राप्त करें


और भी बहुत कुछ कहती है आपकी जन्मकुंडली आपके जीवन और भविष्य जुड़े हुए कुछ संकेत जिसके बारे में आप जानना चाहते हैं ..


या कुंडली का विश्लेषण चाहते हैं या हस्तरेखा अंक ज्योतिष वास्तु या अन्य प्रयोग विधि उपाय प्राप्त करना चाहते हैं तो संपर्क करें और खास प्रयोग विधि और कुंडली का विश्लेषण प्राप्त करें ..


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


दक्षिणा  -  501  मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  महायोगी अघोराचार्य   》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Friday, August 11, 2023

महाकाली दुर्गा भैरवी शाम्भवी साधना प्रयोग


 


महाकाली दुर्गा भैरवी शाम्भवी साधना प्रयोग 


साधक मित्रो को एक विशेष  भगवती की साधना दे रहा हूँ ,जो अपने आप में दिव्य हैं , इस साधना को करने के बाद कुछ शेष नहीं रह जाता

ये  आसान भी है और इसके लाभ भी बहुत हैं |


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


 दुर्गा अपने साधको  को किसी भी कठिन परिस्थिति से निकाल देती हैं और साधक के  दुर्भाग्य  का नाश करती हैं | उस पर आने वाले हर संकट को पल में दूर कर देती है, है और अपनी दिव्य शक्ति  से साधक के चक्षु  दिव्य दृष्टि देती हैं 


राज राजेश्वरी हर प्रकार काऐश्वर्य और उच्च पद देने में सक्षम है | सरकारी नौकरी भी दे देती है या बेरोजगारी दूर कर  दरिद्रता का नाश कर उसे विलासी  जीवन प्रदान करती है |महाकाली जो चंडिका का स्वरुप है उसे हर प्रकार के शत्रु से सुरक्षा प्रदान कर भय मुक्त जीवन देती है.


 |भगवती चामुंडा उसे मुक्ति प्रदान कर हर प्रकार के सुख प्रदान करती है और उसकी साधना की सफलता में सहायक होती है |  |भगवती के इन् दिव्य स्वरूपों की साधना कर नवरात्रि में  या अन्य किसी भीशुक्ल पक्ष के प्रतिपदा से शुरू कर के अपने जीवन से अमंगल को हमेशा हमेशा  के लिए दूर करें और भगवती की कृपा प्राप्त कर उसके दिव्य दर्शनों से अपने अपने जीवन को सक्षम बना सकते हैं 


इस साधना के लिए सर्व प्रथम गुरु आज्ञा , गुरु का आशीर्वाद गुरु को दान पुण्य अवश्य करे , तभी साधना की शुरुवात करे।।।।  .


 अन्यथा लाभ की गुंजाईश मत रखना। ..क्यों की दुनिया की हर वो डोर गुरु से बंधी हैं  जिससे ज्ञान मिलता हैं सिख मिलती हैं  वो सब  गुरु देते हैं , जीवन में सफलता पाना चाहते हो तो हमेशा गुरु जनो को खुश रखना उनका आदर सम्मान अवश्य करे , यहीं सफलता का सूत्र हैं। ... 


यह साधना सात दिन की है |  |  इस साधना को तुम नौरात्रि में  प्रथमा से शुरू कर अष्टमी तक भीकर सकते हो ,


. शुद्ध घी की ज्योत लगाकर लाल फूल, कुमकुम और लाल फल, धूप, नैवेद्य, अक्षत से पूजन करें| पहले गुरु पूजन और श्री गणेश जी का पूजन करें | फिर माँ भगवती से प्रार्थना कर इन् सर्व शक्तियों का   पूजन करें, या फिर पंचौप्चार पूजन कर सकते हैं |


माला .  रुद्राक्ष की या हकीक की कोई भी ले लें |


पूजन आवाहन --


प्रार्थना करें कि हे चामुंडा आदि शक्ति भगवती आप मेरे सभी पापो  का नाश कर मुझे वर प्रदान करें |


फिर नीचे दिया मंत्र 11 माला जपें और अष्टमी के दिन आम्र की समिधा की लकड़ी जला कर 108 आहुति शुद्ध घी कीआहुतिया  दें और कन्या पूजन करें | सप्त कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन दक्षिणा प्रदान करे | अगर घर में संभव न हो तो किसी मंदिर में हलवा आदि कन्याओं को देकर दक्षिणा दें आशीर्वाद लें | 


इस तरह यह साधना पूर्ण हो जाती है और जीवन के सभी बंद दरवाजे खुल जाते हैं ये अनुभव हैं | इस साधना के पूर्ण होते ही आप के जीवन में परिवर्तन आना शुरू हो जायेगा , ये सत्य अटल हैं।  एक बार अवश्य इस साधना काअनुभव कर के देख लीजिये। .. 


मंत्र-


|| ॐ नमो दुर्गे भगवती राज राजेश्वरी महाकाली भैरवी शाम्भवी स्वाहा || 


दक्षिणा  -  2100 ,  मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249



Thursday, August 10, 2023

तांबे की अंगूठी पहनने से स्वास्थ्य लाभ -


 


तांबे की अंगूठी पहनने से स्वास्थ्य लाभ -


कॉपर यानी तांबा एक ऐसी प्राचीन धातु है जिसका इस्तेमाल कई सालों से होता आ रहा है।


तांबे में पानी के कीटाणुओं को खत्म करने का एक विशेष गुण है इसलिए ताबें के बर्तन में रखे हुए पानी को पीने की सलाह भी दी जाती है।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


तांबे से बनी अंगूठी को उंगलियों में धारण करने से होनेवाले फायदे।


उंगलियों में तांबे की अंगूठी धारण करने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है. इसके अलावा ब्लड सर्कुलेशन की कमी से होनेवाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है।


तांबे की अंगूठी पहनने से रक्त की अशुद्धियां दूर होती है और शरीर का इम्युन सिस्टम मजबूत होता है।


तांबे की अंगूठी शरीर की गर्मी को कम करने में मदद करता है ।शारीरिक और मानसिक तनाव कम होता है। अंगूठी तन और मन दोनों को शांत रखने मे मदद करती है 


तांबे की अंगूठी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करती है।  आप शरीर कीसूजन को भी कम कर सकते हैं।


तांबे की अंगूठी पेट से संबंधित सभी समस्याओं में काफी फायदेमंद है ।यह पेट दर्द, पाचन में गड़बड़ी और एसिडिटी की समस्याओं में फायदा पहुंचाती है। 

तांबे के बरतन मे रखा हुआ जल पीने से कभी बिमारी पास   नही आयेगी।


त्वचा की समस्या में फायदा मिलेगा।

ज्‍योतिष 1शास्त्र के मुताबिक एक तांबे की अंगूठी पहनने से सूर्य से संबंधित सारे रोग मे लाभ होगा ।


एक छोटी सी अंगूठी आपको इतने सारे फायदे पहुंचा

 सकती है ।


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


दक्षिणा  -  501  मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Wednesday, August 9, 2023

आकाश परी साधना


 


आकाश परी साधना :-


एँकात कुँतु रमणीक स्थान मे रात्रि 10 बजे से बारह बजे तक एक स्वर मे उपयुक्त मँत्र जपे।एक कलश स्थापित कर सुगँधीत धुप दीप जला कर ईसे दीवाली या नवरात्री से शुरु करे।और तीस दीन जाप करे नित्य।जाप करते समय पान का बिङा.लौँग,और मिठाई हाथ मे ही रखे।जब परी प्रकट हो उक्त वस्तुएँ उसे देकर साष्टाँग प्रणाम कर माँ,बहीन,या पत्नी का सँबन्ध कायम कि वचनबद्दता करा ले।प्रसन्न परि जो साधक कि वाँछा होगी देगी।मँत्र अनुभुत सिद्द है।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


मँत्र :-


आकाश परि के पाँव घुँघरा नाचति आवे बजाती आवे सोति हो तो जग के आवे जगती हो तो जल्दी आवे छमा छम करे बादल मे घोर करे मेरा हुकुम नही माने तो परि लोक से नीचे जगत लोक मे गीरे हजार साल नरक भोगे लाख लाख विच्छुन कि पिङा भोगे आन गौरा पार्वति कि दुहाई शाबर बाबा कि हिँगलाज की मेरि भक्ति गुरु कि शक्ति।


इस जाप मे माला कि आवश्यकता नही,आसन कोई भी उनी,उत्तर दीशा ।


आज  मुंबई  में ,  6/8/2022


दक्षिणा  -  2100 मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249


Monday, July 31, 2023

* संपूर्ण भारत में हमारी सेवाएं*


 



* संपूर्ण भारत में हमारी सेवाएं*


हमारे द्वारा अगले महीने से *पूरे भारत देश में अपनी सेवाएं शुरू की जा रही है* जिसके अंतर्गत *🕊️यदि आपके घर में कोई नेगेटिव एनर्जी है


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


 या 🕊️आपके परिवार के किसी सदस्य के शरीर में कोई नेगेटिव एनर्जी है या 🕊️आपके घर या दुकान पर किसी ने कोई नेगेटिव एनर्जी छोड़ रखी है जिसके कारण आपका पारिवारिक और व्यापारिक जीवन तहस नहस हो गया है 


🕊️ या आप अपने घर में पितृ शांति🕊️,वस्तु दोष निवारण,🕊️लक्ष्मी हवन🕊️,दस महाविद्या हवन🕊️,बगलामुखी हवन,🕊️कुल देवी स्थापना,🕊️अपने देवताओं को मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा,🕊️लक्ष्मी हवन* और आप चाहते हैं कि हम खुद आपके शहर ,आपके घर आकर उसका निवारण करें तो यह सेवा अगले महीने से शुरू की जा रही है


पूरे भारत में किसी भी शहर किसी भी राज्य किसी भी गांव में आप रहते हैं *हम वहां आकर आपकी सभी समस्याओं का निवारण करेंगे* 


कई ऐसी समस्या होती है जो दूर बैठकर हल नहीं हो पाती इसके लिए हमें आपके घर आकर ही उसका निवारण करना होगा 


9958417249 पर whatsapp करें 


*🪴शुल्क👇* 


*आने जाने का किराया ( /निजी वाहन /ट्रेन /फ्लाइट  )+ शुल्क समस्या के अनुसार + सामग्री का शुल्क* ( जो सामग्री लगेगी वो आपको बता दी जाएगी आप खुद भी ला सकते हैं कुछ विशेष तांत्रिक सामग्री होगी वो हमारी होगी उसका शुल्क आपको आपकी समस्या के अनुसार बता दिया जाएगा )


*हमारे द्वारा दी जाने वाली सेवा निम्न राज्यों में दी जाएगी👇*


राजस्थान, महाराष्ट्र ,गुजरात ,मध्य प्रदेश ,उत्तर प्रदेश ,दिल्ली ,गाजियाबाद ,हिमाचल प्रदेश ,पंजाब ,तमिलनाडु कर्नाटक,

हैदराबाद ,केरल ,गोवा ,कलकत्ता, नेपाल ,जम्मू कश्मीर ,हरियाणा,

दमन दीप ,आंध्र प्रदेश ,बिहार,

झारखंड, उड़ीसा ,उत्तराखंड


साधना समाग्री दक्षिणा === 


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

शाबर धूमावती साधना :


 


शाबर धूमावती साधना :


=================


दस महाविद्याओं में माँ धूमावती का स्थान सातवां है और माँ के इस स्वरुप को बहुत ही उग्र माना जाता है ! माँ का यह स्वरुप अलक्ष्मी स्वरूपा कहलाता है किन्तु माँ अलक्ष्मी होते हुए भी लक्ष्मी है ! एक मान्यता के अनुसार जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया तो उस यज्ञ में शिव जी को आमंत्रित नहीं किया !


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


 माँ सती ने इसे शिव जी का अपमान समझा और अपने शरीर को अग्नि में जला कर स्वाहा कर लिया और उस अग्नि से जो धुआं उठा )उसने माँ धूमावती का रूप ले लिया ! इसी प्रकार माँ धूमावती की उत्पत्ति की अनेकों कथाएँ प्रचलित है जिनमे से कुछ पौराणिक है और कुछ लोक मान्यताओं पर आधारित है !


नाथ सम्प्रदाय के प्रसिद्ध योगी सिद्ध चर्पटनाथ जी माँ धूमावती के उपासक थे ! उन्होंने माँ धूमावती पर अनेकों ग्रन्थ रचे और अनेकों शाबर मन्त्रों की रचना भी की !


यहाँ मैं माँ धूमावती का एक प्रचलित शाबर मंत्र दे रहा हूँ जो बहुत ही शीघ्र प्रभाव देता है !


कोर्ट कचहरी आदि के पचड़े में फस जाने पर अथवा शत्रुओं से परेशान होने पर इस मंत्र का प्रयोग करे !


माँ धूमावती की उपासना से व्यक्ति अजय हो जाता है और उसके शत्रु उसे मूक होकर देखते रह जाते है !


|| मंत्र ||


ॐ पाताल निरंजन निराकार


आकाश मंडल धुन्धुकार


आकाश दिशा से कौन आई


कौन रथ कौन असवार


थरै धरत्री थरै आकाश


विधवा रूप लम्बे हाथ


लम्बी नाक कुटिल नेत्र दुष्टा स्वभाव


डमरू बाजे भद्रकाली


क्लेश कलह कालरात्रि


डंका डंकिनी काल किट किटा हास्य करी


जीव रक्षन्ते जीव भक्षन्ते


जाया जीया आकाश तेरा होये


धुमावंतीपुरी में वास


ना होती देवी ना देव


तहाँ ना होती पूजा ना पाती


तहाँ ना होती जात न जाती


तब आये श्री शम्भु यती गुरु गोरक्षनाथ


आप भई अतीत


ॐ धूं: धूं: धूमावती फट स्वाहा !


|| विधि ||


41 दिन तक इस मंत्र की रोज रात को एक माला जाप करे ! तेल का दीपक जलाये और माँ को हलवा अर्पित करे ! इस मंत्र को भूल कर भी घर में ना जपे, जप केवल घर से बाहर करे ! मंत्र सिद्ध हो जायेगा !


|| प्रयोग विधि १ ||


जब कोई शत्रु परेशान करे तो इस मंत्र का उजाड़ स्थान में 11 दिन इसी विधि से जप करे और प्रतिदिन जप के अंत में माता से प्रार्थना करे –


“ हे माँ ! मेरे (अमुक) शत्रु के घर में निवास करो ! “


ऐसा करने से शत्रु के घर में बात बात पर कलह होना शुरू हो जाएगी और वह शत्रु उस कलह से परेशान होकर घर छोड़कर बहुत दुर चला जायेगा !


|| प्रयोग विधि २ ||


शमशान में उगे हुए किसी आक के पेड़ के साबुत हरे पत्ते पर उसी आक के दूध से शत्रु का नाम लिखे और किसी दुसरे शमशान में बबूल का पेड़ ढूंढे और उसका एक कांटा तोड़ लायें ! फिर इस मंत्र को 108 बार बोल कर शत्रु के नाम पर चुभो दे !


ऐसा 5 दिन तक करे , आपका शत्रु तेज ज्वर से पीड़ित हो जायेगा और दो महीने तक इसी प्रकार दुखी रहेगा !


नोट – इस मंत्र के और भी घातक प्रयोग है जिनसे शत्रु के परिवार का नाश तक हो जाये ! किसी भी प्रकार के दुरूपयोग के डर से मैं यहाँ नहीं लिखना चाहता ! इस मंत्र का दुरूपयोग करने वाला स्वयं ही पाप का भागी होगा !कोई भी जप-अनुष्ठान करने से पूर्व मंत्र की शुद्धि जांचा लें ,विधि की जानकारी प्राप्त कर लें तभी प्रयास करें |


गुरु की अनुमति बिना और सुरक्षा कवच बिना तो कदापि कोई साधना न करें |उग्र महाशक्तियां गलतियों को क्षमा नहीं करती कितना भी आप सोचें की यह तो माँ है |उलट परिणाम तुरत प्राप्त हो सकते हैं |


अतः बिना सोचे समझे कोई कार्य न करें |पोस्ट का उद्देश्य मात्र जानकारी उपलब्ध करना है ,अनुष्ठान या प्रयोग करना नहीं |अतः कोई समस्या होने पर हम जिम्मेदार नहीं होंगे


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Sunday, July 30, 2023

पन्द्रिया यंत्र साधना -- साबर विधि से


 




पन्द्रिया यंत्र साधना -- साबर विधि से


जरुरी है| अतः इस साधना को उसी साधक को शुरू करना चाहिए जो इस साधना के नियम का पूर्ण शुद्धि से पालन करऔर जन कल्याण किया है | यह बहुत ही तीव्र  साधना है | इस में शुद्धि का 


खास ध्यान ख़ास तौर पर  रखा जाता है।। अन्यथा तकलीफ हो सकती है ..| 


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


हर  उस व्यक्ति का बहुत ही सौभाग्य उदय होता है जब ऐसी साधना प्राप्त होती है | मेरी नजर में ऐसा कोई काम  ही नहीं है।। जो इस साधना से पूरा ना हो | हिन्दू और इस्लामिक दोनों मतो में यह साधना की जाती

है|


मैंने कई मुसलमानी मौलवियों को भी इस यंत्र का प्रयोग करते हुए देखा है |


यह मैं स्वयं भी इस साधना का प्रयोग बहुत बार करके इसे परख चुका हूँ| और कई संतो ने भी इसे समय-समय पर सिद्ध किया है


यह साधना अगर शारदीय,चैत्र अथवा गुप्त नवरात्री में की जाये तो और भी फल मिलता है | 

इसे सिद्ध करने के


लिए समय तो अवश्य ही लगेगा लेकिन अगर आप इसे सिद्ध कर ले तो किसी सिद्धि के

पीछे

भागने की आवश्कता नहीं है | इस में धैर्य बहुत जरुरी है और ब्रह्मचर्य  का

पालन भी

सके |


नियम  --- 


१. एक समय शुद्ध भोजन करे, फलाहार कभी भी ले सकते हैं |


२.ब्रह्मचर्य अनिवार्य है |


३.सत्य बोलने की

कोशिश करे |


४.किसी से व्यर्थ

में ना उलझें |


५.बड़ों का हमेशा सम्मान करें !


विधि


-- शुद्ध धुले हुये वस्त्र  पहने सिले हुए ना हो तो जयादा बेहतर है (जैसे 

धोती, चादर) | पीले लाल या सफ़ेद रंग के कपडे ज्यादा बेहतर है | लाल रंग

विशेष फल दाई  है !


२.शुद्ध घी का दीपक लगाये और एक बेजोट पर लाल वस्त्र बिछा कर  माता जगदम्बा का 

सुन्दर चित्र स्थापत करें हर रोज पूजन करे और गुरु पूजन करे

और पूर्ण समर्पित भाव से साधना शुरू करे !


३.मन को विचलित ना


होने दे माता का दर्शन होने के बाद कन्या पूजन करे जा साधना पूर्ण होने के बाद

कन्या पूजन जरुरी है |


५.माता की हलवे का भोग लगा कर कन्या पूजन किया जा सकता है !


६. इस यंत्र को


निम्न मन्त्र पड़ते हए सवा लाख बार लिखना है और जितने रोज लिखो आटे में मिक्स कर के

गोलिया बना ले और मछलियों को डाल दे किसी तालाब या नदी पर जाकर |


इस यंत्र को जैसे नीचे दिया है बना ले |


साबर मंत्र ---


ॐ  सात पूनम काल का बारह  बरस क्वार ,एको देवी जानिए चौदह भुवन द्वार द्वि पक्षे निर्मलिये तेरह देवन देव अष्ट भुजी परमेशवरी ग्यारह रूद्र सेव ,सोलह कला समपुरनी तिन नयन भरपूर दसो द्वारी तुही माँ , पांचो बाजे नूर ,नव निधि षट दर्शनी पन्द्रह तिथि जान चारो युग में कालका कर काली कल्याण ......!


ये मन्त्र थोडा उग्र  का है ..इसलिए सात्विकता बरतिए ..और इसे प्रयोग में  लाइए 


 इस मन्त्र का जप करते हुए उपर वाला यन्त्र लिखे और जब  साधना पूरी हो जाती है साधक के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता |


प्रयोग  --


जिस किसी व्यक्ति पर कैसी भी प्रेत बाधा या किसी का किया तंत्र प्रयोग 


(जैसे-मूठ) हो, तो इस यन्त्र को अष्ट गंध से लिख कर उस व्यक्ति को पहना 

दिया जाये तो बाधा शांत हो जाती है | 


कार्य सिद्धि के लिए इस यन्त्र को अपने साथ ले कर कार्य के लिए जा सकते है | मुक़दमे में विजय पाने के लिए  है और घर छोड़  कर

गये व्यक्ति  को


वापिस लाने के लिए इसका अचूक असर होता है वशीकरण  के लिए भी इसका प्रयोग  किया 


जाता है आप पहले इसे सिद्ध कर ले इसके प्रयोग  तो सैकड़ो है उसे फिर

कभी दे दूंगा | यंत्र सिद्ध करते करते माँ का दर्शन हो जाता है ऐसा मेरा और

कई लोगो का अनुभव है |


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

क्या आपके हाथ में है अधिक शत्रु षड्यंत्र दुश्मन आपको परेशान करने वाला तथा बर्बाद करने का योग जाने ..


 



क्या आपके हाथ में है अधिक शत्रु षड्यंत्र दुश्मन आपको परेशान करने वाला तथा बर्बाद करने का योग जाने ...


हस्तरेखा शास्त्र ज्योतिष शास्त्र की ही एक शाखा है। इसमें हथेलियों में बनी रेखाओं और चिन्हों का आकलन करके व्यक्ति जीवन के विषय में जानकारी दी जाती है।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


 हस्तरेखा शास्त्र में रेखाओं और हाथों में बने चिन्हों को देखकर उसके भविष्य या जीवन के बारे में केवल मूल्यांकन किया जा सकता है, भविष्य को लेकर इसकी सटीकता प्रमाणित नहीं होती है 


क्योंकि हाथ की रेखाएं समय-समय पर बदलती रहती हैं। जीवन में कोई भी लक्ष्य हासिल करने के लिए कर्मों का प्रभाव सबसे अधिक मायने रखता है।  हस्तरेखा शास्त्र में हमारे हाथों में बनी रेखाएं देखकर जीवन में आने वाले शुभ और अशुभ प्रभावों के बारे में बताया जाता है।


 ज्योतिष शास्त्र में कुछ बहुत शुभ रेखाओं के बारे में बताया गया है तो वहीं कुछ रेखाएं ऐसी भी होती हैं जिनकी वजह से आपके जीवन में एक के बाद एक परेशानियां बनी रहती हैं। 


हस्तरेखा शास्त्र में ऐसी कुछ रेखाएं और चिन्हों के बारे में बताया गया है, जिन्हें दुर्भाग्य का कारण माना जाता है। तो चलिए जानते हैं कौन सी हैं वे रेखाएं और चिन्ह।


जीवन  रेखा को काटती हुई रेखाएं

अगर किसी की हथेली में कई छोटी-छोटी रेखाएं जीवन रेखा को काटती हैं, तो इन्हें शुभ नहीं माना जाता है। इन रेखाओं के संबंध में कहा जाता है 


कि जिस स्थान पर ये रेखाएं जीवन रेखा को काटती हैं, उसी आयु में व्यक्ति को रोग-व्याधि और दुर्घटना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन्हें दुर्भाग्य का सूचक माना जाता है।


द्वीप का निशान होना


यदि किसी व्यक्ति की हथेली में पर्वत या फिर रेखा पर द्वीप का निशान बना हुआ है तो यह शुभ नहीं माना जाता है लेकिन प्रत्येक रेखा और पर्वत पर बने हुए द्वीप का अलग-अलग अर्थ होता है।


 जिस रेखा या पर्वत पर द्वीप का चिन्ह बनता है यह उसके प्रभाव को कमजोर करता है। जिसके कारण आपको अपने जीवन में धन, स्वास्थ, मान-प्रतिष्ठा आदि से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।


अनामिका उंगली पर क्षैतिज रेखाएं


यदि किसी व्यक्ति की अनामिका उंगली पर बहुत सारी क्षैतिज रेखाएं बनी हुई हैं तो इन्हें दुर्भाग्य का संकेत माना जाता है।


 इससे व्यक्ति के मान-सम्मान की हानि का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति के हाथ में काले धब्बे हो तो यही भी शुभ संकेत नहीं माना जाता है।


और अधिक जानकारी हस्तरेखा से जुड़ा हुआ परामर्श उपाय विधि प्रयोग या किसी तरह के विशेष परेशानियों में फंसे हुए हैं तो संपर्क करें और हस्तरेखा दिखाकर जानकारी प्राप्त करें संपर्क करें कॉल करें 


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


दक्षिणा  -  351  मात्र .


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249


अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच


 



अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच


चेहरे पर निखार, आकर्षक शरीर और एक सेहतमंद शरीर की कामना भला आज कौन नहीं करता है। हर कोई आकर्षक नज़र आना चाहता है। तो इस मनोकामना को पूरा  करने के लिए व्यक्ति आमतौर पर अप्सरा वशीकरण मंत्र  और साधना का इस्तेमाल करता है, जिसे काफी कारगर व असरदार भी माना गया है। 


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


इसके बारे मे ये भी कहां गया है कि अप्सरा साधना की मदद से अप्सरा के जैसा  सौंदर्य व समृद्धि प्राप्त किया जा सकता है और ऐसा नहीं है की सिर्फ इसका इस्तेमाल स्त्रिया ही कर सकती है, क्यूकी सुंदर शरीर और खूबसूरत चेहरे की लालसा पुरुष भी रखता है।


तो अब हम आपको बताते है अप्सरा साधना के बारे मे की किस प्रकार आप इसे कर सकते है। जैसा की हमेशा से यह मान्यता रही है कि अप्सराओ को गुलाब, चमेली, रजनीगंधा और रातरानी जैसे फूलों की सुगंध काफी पसंद आती है। 


अप्सरा साधना करने के दौरान उस व्यक्ति को खास तौर पर अपनी यौन भावनाओं पर संयम रखना पड़ता है। ऐसा न कर पाने से साधना सिद्ध नहीं हो पाती है। 


साधक पूरे विश्वास और संकल्प व मंत्र की सहायता से अगर इस साधना को करता है, तो माना गया है कि अप्सरा प्रकट होती है और उस समय वो साधक उसे गुलाब के साथ इत्र भेंट करता है। साथ ही उसे दूध से बनी मिठाई व पान आदि भेंट देता है और उससे  जीवन भर साथ रहने का वचन लेता है।


 इन अप्सराओ मे चमत्कारिक शक्तिया होती है जो साधक की जिंदगी को सुंदर बनाने की योग्यता रखती है।

अब हम आपको रंभा अप्सरा साधना के बारे मे जानकारी देते हुए बताएँगे की इस साधना को करने के लिए आपको इस मंत्र का जप करना होता है, जोकि इस प्रकार है, 


मंत्र:


ऊँ दिव्यायै नमः! ऊँ वागीश्वरायै नमः!


ऊँ सौंदर्या प्रियायै नमः! ऊँ यौवन प्रियायै नमः!


ऊँ सौभाग्दायै नमः! ऊँ आरोग्यप्रदायै नमः!


 ऊँ प्राणप्रियायै नमः! ऊँ उजाश्वलायै नमः! ऊँ देवाप्रियायै  नमः!


 ऊँ ऐश्वर्याप्रदायै नमः! ऊँ धनदायै रम्भायै नमः!


बाकी साधना के जैसे इसमे भी साधक को पूजा-अर्चना के बाद  रम्भेत्किलन यंत्र के सामने बताए मंत्र का जप करना होता है। 


साधना हो जाने के बाद साधक की इक्छा पूर्ण होने के साथ उसके जीवन मे खुशियों आ जाती है।


अप्सरा साधना विधि को करने के लिए साधक के लिए जरूरी होता है कि वो कोई एक शांत जगह चुन ले। फिर उस जगह पर सफ़ेद रंग का एक कपड़ा बिछाकर, पीले चावल के इस्तेमाल से एक यंत्र का निर्माण करे। 


इसके बाद साधक के लिए जरूरी है कि वो अपने वस्त्र पर इत्र लगा ले जिससे वो  सुगन्धित हो जाये और मखमल को अपना आसन बनाए। 


केवल शुक्रवार के दिन, आधी रात को आप इस साधना करे। ध्यान जरूर रखे की साधना करते वक़्त आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो और फिर बनाए हुए यंत्र का पंचोपकर पूजन करे।


 जिस एकांत जगह या कमरे मे साधक बैठा है वो वहाँ गुलाब के इत्र का प्रयोग करे। आस-पास एक सुगन्धित माहोल बना ले।


 इन सबके बाद आप गुरु गणपति का ध्यान करके स्फटिक मणिमाला का मंत्र के साथ 51 जप करे। 


मंत्र:


 “ऊँ उर्वशी प्रियं वशं करी हुं! ऊँ ह्रीं उर्वशी अप्सराय आगच्छागच्छ स्वाहा!!” 


इस अनुष्ठान को आप कुल 7, 11 या 21 दिनों तक करे और आखिरी दिन 10 माल का जाप करे। बताए मंत्र के नीचे अपना नाम लिखकर उर्वशी माला की मदद से बताए मंत्र का 101 बार जप करे,


 मंत्र:  


“ऊँ ह्रीं उर्वशी मम प्रिय मम चित्तानुरंजन करि करि फट”।


अप्सरा वशीकरण साधना से जुड़े एक शाबर मंत्र के बारे मे भी हम आपको बताते है। जिसको करने के लिए जरूरी है की आप एक बाजोट पर लाल रंग का कपड़ा बिछा ले और उस पर एक चावल से ढेरी बना ले, जो कुम्कुम से रंगे हो।


 आप जिस आसान पर बैठे वो भी लाल रंग का ही हो। इसके बाद उन चावल पर “पुष्पदेहा आकर्षण सिद्धि यंत्र” स्‍थापित कर दे और स्फटिक की माला से मंत्र जाप करे।


 मंत्र: 


“ॐ आवे आवे शरमाती पुष्पदेहा प्रिया रुप आवे आवे हिली हिली मेरो कह्यौ करै,मनचिंतावे,कारज करे वेग से  आवे आवे,हर क्षण साथ रहे हिली हिली पुष्पदेहा अप्सरा फट् ॐ ”।


 शुक्रवार के दिन इस साधना को शुरू करे जो 7 दिनों तक चलती है। आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो इसका खास ध्यान रखे और मंत्र का रोज 11 माला जप करना होगा। बनाए हुए यंत्र पर रोज गुलाब का इत्र चढाये और 5 गुलाब भी चढा दे।


 घी का दीपक जला दे, जो साधना विधि के समय जलता रहे। आप जो धूप इस्तेमाल करे वो गुलाब का ही हो। जब मंत्र का जप किया जा रहा हो उस समय नजर  यंत्र की ओर होनी चाहिए। इसी यंत्र के माध्यम से साधक को अप्सरा से वचन प्राप्त करने का मंत्र प्राप्त होता है।


तो यकीन है की रूप-रंग व यौवन की चाहत रखने वाले लोगों के लिए ऊपर बताई गई बाते मददगार होंगी, जिनके उपयोग से साधक अपनी मनोकामना को पूर्ण कर सकता है।


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...