Saturday, June 30, 2018

जब भी किसी को प्रेम करें तो याद रखें कि संयम और प्रतीक्षा सबसे उत्तम उपाय है

जब भी किसी को प्रेम करें तो याद रखें कि संयम और प्रतीक्षा सबसे उत्तम उपाय है (1) लड़के को प्रेम में सफलता के लिए पन्ना (एमरल्ड) की अंगूठी धारण करना चाहिए इससे प्रेयसी के मन में प्रबल आकर्षण बना रहता है । (2) प्रेमी युगल को शनिवार और अमावस्या के दिन नहीं मिलना चाहिए। इन दिनों में मिलने से आपस में किसी भी बात पर विवाद हो सकता है …एक दूसरे की कोई भी बात बुरी लग सकती है तथा प्रेम संबंधो में सफलता मिलने में संदेह हो सकता है। (3) प्रेमी युगल को यह प्रयास करना चाहिए कि शुक्रवार और पूर्णिमा के दिन अवश्य मिलें। जिस शुक्रवार को पूर्णिमा हो वह दिन अत्यंत शुभ रहता है इस दिन मिलने से परस्पर प्रेम व आकर्षण बढ़ता है। (4) सफ़ेद वस्त्र धारण करके किसी भी धार्मिक स्थान पर लाल गुलाब व चमेली का इत्र अर्पित करके अपने प्रेम की सफलता के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें निश्चय ही लाभ होगा। वशीकरण मन्त्र – काम व आकर्षण बीज मंत्र का जाप करें। मंत्र- ऊँ क्लीं नम:। आकर्षण शक्ति बड़ाने के लिए इस मंत्र का जाप करें । ॐ क्लीं कृष्णाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा: राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राज योग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Friday, June 29, 2018

ऋण हर्ता गणेश मंत्र प्रयोग

ऋण हर्ता गणेश मंत्र प्रयोग कर्ज से मुक्ति हेतु गणेश मंत्र, मन्त्र जप से ऋण मुक्ति, रिण मुक्ति हेतु मन्त्र, गणपति मन्त्र से कर्ज मुक्ति, गणेश जी का कर्ज मुक्ति मन्त्र, ऋण हर्ता गणेश मंत्र प्रयोग यह ऋण हर्ता मंत्र हैं। इस मंत्र का नियमित जाप करना चाहिए। इससे गणेश जी प्रसन्न होते है और साधक का ऋण चुकता होता है। कहा जाता है कि जिसके घर में एक बार भी इस मंत्र का उच्चारण हो जाता है है उसके घर में कभी भी ऋण या दरिद्रता नहीं आ सकती। मंत्र: ॐ श्री गणेश ऋण छिन्धि वरेण्य हुं नमः फट । विधि: किसी योग्य ब्राह्मण से गणेश प्राण-प्रतिष्ठित करवाले। (विशेष नोट : कर्ज मुक्ति हेतु मंगल गणेश (मूंगा गणेश) प्रतिमा उत्तम फलदायी होती हैं।) यदि कर्ज से हैं परेशान तो मास की किसी भी चतुर्थी या मंगलवार के दिन प्रातःकाल स्नानआदि नित्यकर्म से शीघ्र निवृत्त होकर। भगवान गणेश की प्राण-प्रतिष्ठित मंत्र सिद्ध गणेश प्रतिमा स्थापित करें। उस मूर्ति का पंचोपचार या षोड़शोपचार पूजन-आरती आदि से विधि-वत पूजन करें। · गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। · यदि संभव हो तो गणेशजी का मंत्र बोलते हुए 21 दुर्वा दल चढ़ाएं। · श्री गणेशजी को लड्डुओं का भोग लगाएं। · स्थापना वाले दिन ब्राह्मण भोजन कराएं और ब्राह्मणों को दक्षिणा प्रदान करने के पश्चात् संध्या के समय स्वयं भोजन ग्रहण करें, यदि ब्राह्मणों को भोजन करवाना संभव न हो तो उसके निमित्त दान किसी भी मंदिर मे कर सकते हैं। · स्थापना के पश्चयात प्रतिदिन गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं और ऋण मुक्ति हेतु मूंगे की माला से गणेश मंत्र की 1, 3, 5, 7, 11 जप करें। · इस तरह पूजन करने से भगवान श्रीगणेश अति प्रसन्न होते हैं और जल्द ही कर्ज मुक्ति के मार्ग प्रसस्थ होने लेगते हैं। राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राजयोग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Thursday, June 28, 2018

श्री कुबेर यंत्र

श्री कुबेर यंत्र यह धन अधिपति धनेश कुबेर का यंत्र है,इस यंत्र के प्रभाव से यक्षराज कुबेर प्रसन्न होकर अतुल सम्पत्ति की रक्षा करते हैं। यह यंत्र स्वर्ण और रजत पत्रों से भी निर्मित होता है,जहां लक्ष्मी प्राप्ति की अन्य साधनायें असफ़ल हो जाती हैं,वहां इस यंत्र की उपासना से शीघ्र लाभ होता है। कुबेर यंत्र विजय दसमीं धनतेरस दीपावली तथा रविपुष्य नक्षत्र और गुरुवार या रविवार को बनाया जाता है। कुबेर यंत्र की स्थापना गल्ले तिजोरियों सेफ़ व बन्द अलमारियों में की जाती है। लक्ष्मी प्राप्ति की साधनाओं में कुबेर यंत्र अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आपकी कुंडली से आपको कौन सा यंत्र फ़ायदा देगा आप हमसे पूछ सकते है राज गुरु जी महाविद्या आश्रम ( राज योग पीठ ) ट्रस्ट . किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Tuesday, June 26, 2018

ज्वाला शत्रु स्तम्भन ”साधना

ज्वाला शत्रु स्तम्भन ”साधना जीवन मे निरंतर पग पग पर समस्या तथा बाधाए आना स्वाभाविक है. आज के युग मे जब चारो तरफ अविश्वास और ढोंग का माहोल छाया हुआ है तब ज्यादातर व्यक्तियो का समस्या से ग्रस्त रहना स्वाभाविक है. और व्यक्ति कई प्रकार के षड्यंत्रो का भोग बनता है. यु एक हस्ते खेलते परिवार का जीवन अत्यधिक दुखी हो जाता है. कई बार व्यक्ति के परिचित ही उसके सबसे बड़े शत्रु बन जाते है और यही कोशिश मे रहते है की किसी न किसी रूप मे इस व्यक्ति का जीवन बर्बाद करना ही है. चाहे इसके लिए स्वयं का भी नुक्सान कितना भी हो जाए. आज के इस अंधे युग मे मानवता जैसे शब्दों को माना नहीं जाता है. और व्यक्ति इसे अपना भाग्य मान कर चुप हो जाता है. अपने सामने ही खुद की तथा परिवार की बर्बादी को देखता ही रहता है और आखिर मे अत्यधिक दारुण परिणाम सामने आते है जो की किसी के भी जीवन को हिलाकर रख देते है. एसी परिस्थिति मे गिडगिडाने के अलावा और कोई उपाय व्यक्ति के पास नहीं रह जाता है. लेकिन हमारे ग्रंथो मे जहा एक और नम्रता को महत्व दिया है तो दूसरी और व्यक्ति की कायरता को बहोत बड़ा बाधक भी माना है. एसी परिस्थितियो मे शत्रु को सबक सिखाना कोई मर्यादाविरुद्ध नहीं है. यह ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार व्यक्ति अपनी और परिवार की आत्मरक्षा के लिए हमलावर को हावी ना होने दे और उस पर खुद ही हावी हो जाए. हमारे तंत्र ग्रंथो मे इस प्रकार के कई महत्वपूर्ण प्रयोग है जिसे योग्य समय पर उपयोग करना हितकारी है. लेकिन मजाक मस्ती मे या फिर किसी को गलत इरादे से व्यर्थ ही परेशान करने के लिए इस प्रकार की साधनाओ का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए वरना इसका भयंकर विपरीत परिणाम भी आ सकता है. शत्रुओ के द्वारा निर्मित षड्यंत्रो का किसीभी प्रकार से कोई असर हम पर ना हो और भविष्य मे वह हमारे विरुद्ध परेशान या नुकसान के इरादे से कोई भी योजना ना बना पाए इस प्रकार से साधक का चिंतन हो तो वह यथायोग्य है. तन्त्र के कई रहस्यपूर्ण और गुप्त विधानों मे से एक विधान है “ ज्वाला शत्रु स्तम्भन ”. यह अत्यधिक महत्वपूर्ण विधान है जिसे पूर्ण सात्विक तरीके से सम्प्पन किया जाता है लेकिन इसका प्रभाव अत्यधिक तीक्ष्ण है. देवी ज्वाला अपने आप मे पूर्ण अग्नि रूप है, और शत्रुओ की गति मति स्तंभित कर के साधक का कल्याण करती है. साधक को इस प्रयोग के लिए कोई विशेष सामग्री की ज़रूरत नहीं है. इस विधान को साधक किसी भी दिन से शुरू कर सकता है तथा इसे ८ दिन तक करना है, इन ८ दिनों मे साधक को शुद्ध सात्विक भोजन ही करना चाहिए, लहसुन तथा प्याज भी नहीं खाना चाहिए. यह जैन तंत्र साधना है इस लिए इन बातो का ध्यान रखा जाए. इस प्रयोग मे वस्त्र तथा आसान सफ़ेद रहे. दिशा उत्तर रहे. साधक रात्री काल मे १० बजे के देवी ज्वाला को मन ही मन शत्रुओ से मुक्ति के लिए प्रार्थना करे. इसके बाद निम्न मंत्र की १००८ आहुतिय शुद्ध घी से अग्नि मे प्रदान करे. औम झ्राम् ज्वालामालिनि शत्रु स्तम्भय उच्चाटय फट् आहुति के बाद साधक फिर से देवी को प्रार्थना करे तथा भूमि पर सो जाए. इस प्रकार ८ दिन नियमित रूप से करने पर साधक के समस्त शत्रु स्तंभित हो जाते है और साधक को किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी नहीं होती. शत्रु के समस्त षडयंत्र उन पर ही भारी पड जाते है. राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राज योग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Monday, June 25, 2018

मुकदमे मे विजय प्राप्ति यन्त्र प्रयोग

मुकदमे मे विजय प्राप्ति यन्त्र प्रयोग) ==================================================== इस गुप्त शत्रुता वाले युग मे कौन सा शत्रु कब घात प्रतिघात कर दे कहा नही जा सकता हैं एक बार सामने के आघात तो सहन किये जा सकते हैं पर छुप कर या विभिन्न षडयंत्र बनाकर किये गए आघात के बारे मे क्या कहा जाए ... यह सब तो आज के युग की निशानी हैं इन्ही मे एक तरीका जो सर्वाधिक उपयोग होता हैं वह हैं सामने वाले को किसी भीझूठे मुकदमो मे फसवा दो , अब व्यक्ति कितना भी निर्दोष हो इस चक्कर से निकलते निकलते उसका बहुत संमय उर्जा और धन नष्ट हो जाता हैं मानसिक प्रताडना जो झेलनी पड़ती हैं वह तो बिलकुल ही अलग होती हैं. यूँ तो गुप्तशत्रुओं और समस्त प्रकार के षड्यंत्रो को निष्फल करने मे भगवती बल्गामुखी और अन्य महाविद्याओ का नाम आता हैं पर इनकी साधनाए इतनी सरल भी तो नही हैं , इनसे सबंधित प्रयोग अवश्य किये जा सकते हैं पर व्यक्ति भी कुछ संशय की अवस्था मे रहता हैं की कहीं कुछ गलत न हो जाए या उसे पूरा विधान ठीक से मालुम भी नही होता , इस समय यंत्र विज्ञान के सरलतम तरीके जिन पर भले ही एक पल विस्वास न हो पर बहुत लाभदायक सिद्ध हुये हैं . वेसे भी कानूनी जब लड़ाई प्रारंभ होती हैं तो एक व्यक्ति ,कानूनी दाव पेंच से उसका कोई वास्ता नही होता और वह परेशां होता जाता हैं और किसी तरह मुकदमो मे विजय भी चाहता हैं की फिर से व ह आरामदायक जीवन व्यतीत कर सके . यह कहा भी गया हैं की कमजोरी ही पाप हैं और बलयुक्त होना ही पुण्य हैं और जीवन ऐसे रो रो कर घिसट घिसट कर तो काटा नही जा सकता हैं यह तो आप हम सभी जानते हैं की आज के युग मेसाधना के लिए समय न मिल पाना एक बहुत बड़ी समस्या हैं ,हलाकि सदगुरुदेव जी ने यह भी कहा हैं की अगर ध्यान से देखें तो स्वयं ही पता चल जाएगा की दिन का कितना समय यूँ ही बेकार के कामो मे जा ता हैं अगर वहां समय बचाया जा सके तो. अगर भौतिक जीवन मे उच्चता प्राप्त कर ली हैं तो इस तंत्र जगत मे भी कुछ उपलब्धिया भी प्राप्त करें यही तो जीवन की उच्चता हैं .तो इसके लिए समय निकालना ही पड़ेगा . ठीक इसी तरह अगर समस्या बहुत गंभीर न हुयी हो तो आप इस प्रयोग को करें और पुरे मनो योग से करने मे सफलता आपको प्राप्त होगी बशर्ते आपका पक्ष सही होना चहिये .इतना तो व्यक्ति का स्वयं के लिए निष्पक्ष आकलन होना ही चाहिये. यन्त्र विज्ञानं का यह बहुत ही सरल सा प्रयोग हैं अनेको द्वारा प्रशंशित भी हैं . आप सभी को यंत्र विधान के सामन्य नियम ज्ञात हैं ही , अनेको बार लिखे जा चुके हैं तो बार बार उन्ही का उल्लेख उचित नही हैं , इस यंत्र को भोजपत्र पर कुकुम से बना ले . जिस व्यक्ति के विरुद्ध आपका मुकदमा हो उसका नाम यंत्र के मध्य मे पहले से लिखना न भूले ,यंत्र का पूजन और अन्य सामान्य विधान जो की यन्त्र सबंधित विगत कई पोस्ट मे दिए जा चुके हैं . आप उन्हें करे और जिस दिन आपका मुकदमा हो कोर्ट मे जाना हो इस यन्त्र को त्रिलोह धातु के तावीज़ मे बंद करके दूध मे डा ल दे .. बस इतना विधान हैं . राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राजयोग ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

नायिका साधना

नायिका साधना : यक्षिणियां तथा अप्सराओं की उपजाति में नायिकाएं आती हैं। यह भी यक्षिणियों और अप्सराओं की तरह मन मुग्ध करने वाले सौन्दर्य से परिपूर्ण होती है। इनकी साधना वशीकरण तथा सुंदरता प्राप्ति हेतु की जाती हैं। माना जाता है कि नारियों को आकर्षित करने का हर उपाय इनके पास हैं। ये मुख्यतः 8 हैं- 1. जया 2. विजया 3. रतिप्रिया 4. कंचन कुंडली 5. स्वर्ण माला 6. जयवती 7. सुरंगिनी 8. विद्यावती। इन नायिकाओं का भी इस्तेमाल देवता लोग ऋषि-मुनियों की तपस्या भंग करने के लिए किया करते थे। राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राजयोग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Sunday, June 24, 2018

इच्छित व्यक्ति स्तम्भनं प्रयोग

इच्छित व्यक्ति स्तम्भनं प्रयोग घात प्रतिघात तो जीवन का खासकर आज के , तो एक अंग वह भी आवश्यक बन गयी हैं वह समय कहीं कोसों दूर चला गया जब लोग सामने चुनौती दे कर लड़ना पसंद करते थे . अब तो गुप्त रूप से आपको नुक्सान पहुचना ही एक मात्र मकसद रह गया हैं, यूँ तो शास्त्रों मे लोगों की अनेक प्रकार की श्रेणियाँ उल्लेखित हैं . उनमे से कुछ ये भी हैं की अकारण ही दूसरे को परेशां करने वाले ... किसी की जमीन पर या किसी को सिर्फ कुछ धन के लिए नुक्सान पहुचने वाले . या आपकी उन्नति से जल कर आपके लिए तरह तरह के षड्यंत्र का निर्माण करने वाले . तंत्र क्षेत्र का साधक इन सभी समस्यायों को कैसे निपटा जाये यह भली भांति जानता हैं पर जानने और करने मे कोसो की दुरी होती हैं ,षट्कर्म मे से एक कर्म स्तम्भंन्न भी हैं और स्तम्भनं की प्रमुख देवी भगवती बल्गामुखी के स्वरुप से कौन नही परिचित होगा , जिसे कोई भी उपाय ना सूझे तो विधिवत ज्ञान ले कर इस विद्या का प्रयोग अपने रक्षार्थ करें निश्चय ही उसे लाभ होगा . पर न तो इस विद्या का ज्ञान देने वाले और न ही उचित प्रकार से प्रयोग करने वाले आज प्राप्त हैं .और् सबसे बड़ी समस्या यह हैं की इन प्रयोगों को करने के लिए कैसे समय निकाला जाए .आज समय की कितनी कमी हैं यह तो हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं ही . साधना क्षेत्र मे दोनों तरह के विधान हैं लंबे समय वाले और कम समय वाले भी ..साधारणतः यह कहा जाता हैं की सबसे पहले कम समय वाले विधानों की तरफ गंभीरता से देखा जाना चाहिये और जब परिणाम उतने अनुकूल ना हो जितनी आवशयकता हैं तब बृहद साधना पर ध्यान दे यह उचित भी है क्योंकि जहाँ सुई का काम हो वहां तलवार की क्या उपयोगिता .. और तंत्र मंत्र के आधारमे एक महत्वपूर्ण अंग या विज्ञानं हैं यन्त्र विज्ञानं ..अभी भी इसका एक अंश मात्र भी सामने नही आया हैं . एक से एक अद्भुत गोपनीय और दाँतों तले अंगुली दवा लेने वाले रहस्यों से ओत प्रोत रहा हैं यह विज्ञानं. हमारे द्वारा अनेक प्रयोग जो दिए जाते रहे हैं वह अनेको मनिशियों ,तंत्र आचार्यों और उच्च तांत्रिक ग्रंथो मे बहुत प्रशंषित रहे हैं और सैकडो ने उनके प्रयोग किये हैं और लाभ भी उठाया हैं , आवश्यकता बस इस बात की हैं की यदि समय हो तो क्यों न इन प्रयोगों की करके भी देखा जाये जो अनुभूत और सटीक रहे हैं . इन सरलतम विधानों का अपना एक महत्त्व हैं.इस यन्त्र का निर्माण करें . · किसी भी शुभ दिन प्रातः काल मे कर सकते हैं . · यन्त्र निर्माण के लिए अनार या जो भी उचित लकड़ी प्राप्त हो उसका उपयोग कर सकते हैं . · यन्त्र लेखन मे स्याही सिर्फ कुकुम और गोरोचन को मिलाकर बना ना हैं . · वस्त्र पीले और आसन का रंग पीला हो तो कहीं जयादा उचित होगा . · प्रयोग के शुरुआत मे संकल्प ले . · यह ध्यान रखे की यन्त्र के बीच मे उस व्यक्ति का नाम लिखे जिसने आपको परेशां कर् रखा हो · यन्त्र निर्माण मतलब उस व्यक्ति का नाम लिखने के बाद पुरे एक दिन इस यंत्र को एक मिटटी के वर्तन मे रखना हैं और धूप दीप और नैवेद्य अर्पित करना हैं . · बाद मे मतलब दूसरे दिन इसके ऊपर (मिटटी के वर्तन) जिसमे यह यन्त्र निर्माण के बाद रखा हैं किसी अन्य मिटटी की प्लेट उसके ऊपर रख दे और अच्छी तरह से इस पात्र कोकिसी कपडे से बाँध कर .किसी दूर निर्जन स्थान पर रख दे . ऐसा करने से वह व्यक्ति फिर आपके लिए कोई हानि का रक योजना नही बना पाता हैं . इसके बाद गुरुजी का पूजन और गुरू मंत्र का जप यथाशक्ति करे औरसफलता के लिए प्रार्थना करें ... राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राजयोग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

किन्नर और किन्नरियां साधना

किन्नर और किन्नरियां साधना प्राचीनकाल में देवाताओं के साथ जहां गंधर्व रहते थे वहीं एक दूसरे क्षेत्र में किन्नर जाति के लोग भी रहते थे। किन्नर जाति के लोग पहाड़ी क्षेत्र में रहते थे। ये लोग अपने अनुपम तथा मनमोहक सौन्दर्य के लिए प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध हैं। किन्नरों को मृदुभाषी तथा गायन में निपुण माना गया है। हिन्दू तंत्र ग्रंथों में किन्नरियों को विशेष स्थान प्राप्त है। किन्नरियों में रूप परिवर्तन की अद्भुत काला होती है। गायन तथा सौंदर्यता हेतु इनकी साधना विशेष लाभप्रद हैं। परिणामस्वरूप प्राचीन काल से किन्नरियों की साधना ऋषि मुनियों द्वारा की जाती हैं। किन्नरियों का वरदान अति शीघ्र तथा सरलता से प्राप्त हो जाता हैं। माना जाता है कि प्रमख रूप से छह किन्नरियों का समूह है- 1. मनोहारिणी किन्नरी 2. शुभग किन्नरी 3. विशाल नेत्र किन्नरी 4. सुरत प्रिय किन्नरी 5. सुमुखी किन्नरी और 6. दिवाकर मुखी किन्नरी। राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राजयोग पीठ ) फाउंडेशन ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Saturday, June 23, 2018

सर्व रोग निवारण महाकाली साधना माँ के श्री चरणोमे मेरा कामना है,इस संसार में ऐसा कोई बीमारी ही नहीं है जो इस साधना से ठीक ना हो सके इसलिये आपकी सुविधा यह दिव्य साधना प्रस्तुत है. साधना विधि:- यह साधना रात्रिकालीन है,सामने कोई भी बाजोट रखिये और बाजोट पर लाल रंग का वस्त्र स्थापित करे,वस्त्र पर महाकाली जी का चित्र स्थापित करे,मंत्र जाप काली हकीक माला या फिर रुद्राक्ष माला से कर सकते है, आसान और वस्त्र भी लाल रंग के हो,मन्त्र जाप से पूर्व गणेश और गुरु पूजन करे,संकल्प ले "हे माँ आप मुज़े इस साधना में पूर्ण सफलता प्रदान करे",मंत्र जाप का समय रात्रि में ९ बजे का है,नित्य मंत्र का ९ दिनों तक १६ माला मंत्र जाप करना है. दशमी तिथि को सुबह ११ बजे से हवन करे,हवन में ११ माला काले तिल का आहुति समर्पित करे और एक अनार का बलि प्रदान करे. यह विधान संपन्न करने से मंत्र सिद्धि होता है. मंत्र:- ।। ॐ ह्रीं ह्रीं क्लीं क्लीं कंकाली महाकाली खप्परवाली अमुकस्य अमुकं व्याधि नाशय शमनय स्वाहा ।। जब भी किसी रोगी को ठीक करना हो तो मंत्र में अमुकस्य के जगह रोगी का नाम ले और अमुकं के जगह रोग का नाम उच्चारित करे. राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राजयोग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Monday, June 18, 2018

सिद्धकाली इतरयोनि वशीकरण प्रयोग

सिद्धकाली इतरयोनि वशीकरण प्रयोग हम कई बार इतर योनि साधना करते है।कई बार सफल तो कई बार असफल होते है।उसके कई कारण हो सकते है। जैसे उर्जा की कमी ,एकाग्रता की कमी,किन्तु उसका एक कारण ये भी है की हमारे अन्दर आकर्षण नहीं है।किसी को अपने वशीभूत करने की क्षमता का विकास हुआ ही नहीं। प्रस्तुत साधना प्रयोग इसी विषय पर है।देखने में भले ही यह अत्यंत छोटा प्रयोग लगता हो।किन्तु अपने अन्दर ये कई प्रकार की शक्तियां लिये हुए है।प्रस्तुत प्रयोग माँ सिद्धकाली से सम्बंधित है जो की सिद्धियों की दात्री है। इस प्रयोग को यदि किसी भी इतर योनि साधना के पहले कर लिया जाये तो,सफलता के अवसर बड जाते है।क्युकी इस प्रयोग के माध्यम से आपके अन्दर उस इतर योनि को वशीभूत करने की क्षमता उतपन्न हो जाती है।यह प्रयोग मात्र एक दिवसीय है। इसे आप किसी भी अमावस्या,रविवार,कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कर सकते है,या आप जिस इतरयोनि की साधना करने जा रहे है,उस साधना के आरम्भ करने के ठीक एक दिन पहले भी इस प्रयोग को किया जा सकता है। समय रात्रि ११ बजे के बाद का हो।आसन वस्त्र लाल। उत्तर दिशा की और मुख कर बैठ जाये।सामने बजोट पर लाल वस्त्र बिछा दे।अब नारियल का सुखा गोला ले,जो की पूरा हो।अब इसे ऊपर से थोडा सा काट ले और इसके अन्दर एक मावे का पेड़ा,थोडा सा गुड और थोड़े से काले तील भर दे। इसके बाद पुनः कटे हुए हिस्से को गिले आटे की सहायता से बंद कर दे।इसके बाद तील के तेल में सिंदूर मिलाकर,गोले पर बीज मंत्र " क्रीं " का अंकन करे।और उसे बजोट पर स्थापित कर दे।इस प्रयोग में माँ के चित्र या विग्रह आदि की आवश्यकता नहीं है। आपको इसी गोले को माँ सिद्धकाली मानकर पूजना है।सामान्य पूजन करे,कुमकुम ,हल्दी,सिंदूर,अक्षत तथा लाल पुष्पों से पूजन करे।तील के तेल का दीपक जलाये।तथा भोग में गुड अर्पण करे।समस्त सामग्री अर्पण करते समय सतत निम्न मंत्र का जाप करते रहे। क्रीं क्रीं सिद्ध कालिके क्रीं क्रीं फट kreeng kreeng siddh kalike kreeng kreeng phat इसके बाद आप किस इतरयोनि की साधना में सफलता के लिये यह प्रयोग कर रहे है इसका संकल्प ले।माँ सिद्ध कलि से प्रार्थना करे।इसके बाद मूंगा माला,रुद्राक्ष माला या काले हकिक की माला से निम्न मंत्र का २१ माला जाप करे। ॐ क्रीं क्रीं सिद्धि दात्री सिद्धकाली अमुकं इतरयोनि वश्यं कुरु कुरु क्रीं क्रीं फट om kreeng kreeng siddhi datri siddhkaali amukam itaryoni vashyam kuru kuru kreeng kreeng phat अमुकं की जगह उस इतर योनि का नाम ले जिसकी आप साधना करने वाले है।जाप के बाद घी में काले तील मिलाकर १०८ आहुति प्रदान करे,इस प्रकार यह एक दिवसीय प्रयोग संपन्न होता है।साधना के बाद या अगले दिन। नारियल के गोले को उसी लाल वस्त्र में लपेट कर ले जाये।और किसी पीपल के पेड़ के निचे गाड़ दे।और एक तेल का दीपक प्रज्वलित कर माँ सिद्ध कलि से प्रार्थना कर लौट आये। पीछे मुड़कर न देखे।अगर ये संभव न हो तो आप ये क्रिया किसी अन्य निर्जन स्थान में भी करके आ सकते है।तो विलम्ब कैसा अब समय आ गया है की माँ की कृपा प्राप्त की जाये,क्युकी अभी नहीं तो कभी नहीं। राज गुरु जी महाविद्या आश्रम ( राजयोग पीठ ) ट्रस्ट . किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Wednesday, June 13, 2018

घोर रूपिणी वशीकरण साधना - यह साधना बहुत ही तीक्ष्ण प्रवाभ रखती है | इसका उपयोग शत्रु वशीकरण के लिए और रूठी हुई पत्नी जा पति को वश में करने के लिए किया जाता है |यह भी ध्यान रखे के किसी भी अनुचित कार्य के लिए यह प्रयोग न करे अथवा आपको हानि होगी | यहा सिर्फ जिज्ञाशा के लिए यह प्रयोग दे रहा हु इसे अपने उच्च अधिकारी पत्नी अथवा पति को अनुकूल बनाने के लिए प्रयोग करे | साधना विधि – किसी भी अमावश ,ग्रहण काल ,दीपावली आदि शुभ महूरत में शुरू कर इसका जाप 7 दिन में 11000 कर के सिद्ध कर ले फिर किसी भी ख्द्य पदारथ भोजन आदि जब भी आप करने बैठे उसे 7 वार अभिमंत्रिक कर जिसका भी नाम लेकर खाया जाता है उसका निहचय ही वशीकरण हो जाता है और वह आपके अनुकूल कार्य करने लगेगा और आपकी आज्ञा का पालन करेगा | १. किसी बेजोट पे एक लाल कपड़ा विशा दे उसके उपर एक नारियल तिल की ढेरी पे स्थाप्त करे | २. नारियल का पूजन करे उस पे सिंदूर का तिलक करे धूप दीप आदि से घोर रूपिणी को स्मरण करते हुये पूजन करे | ३. भोग मिठाई का लगाए | ४. दिशा दक्षिण की तरफ मुख रखे | ५. आसन कंबल का ले जा कोई भी ऊनी आसन ले ले | ६. माला काले हकीक जा रुद्राक्ष की ठीक रहती है | ७. वस्त्र किसी भी तरह के पहन ले |इस साधना को शाम 8 से 10 व्जे के बीच कभी भी शुरू कर ले | ८. मंत्र जाप पूरा हो जाए तो नारियल किसी भी शिव मंदिर जा काली के मंदिर में कुश दक्षणा के साथ चढ़ा दे और सफलता के लिए प्रार्थना करे | ९. गुरु पूजन और गणेश पूजन हर साधना में अनिवार्य होता है इसका ध्यान रखे | मंत्र--- || ॐ नमः कट विकट घोर रूपिणी स्वाहा || राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राजयोग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 99584172490

Tuesday, June 12, 2018

क्‍या आप नौकरी को लेकर बेहद परेशान हैं? क्‍या आप कड़ी मेहनत करते हैं, फिर भी परिणाम अच्‍छे नहीं मिलते? क्‍या आप शादी को लेकर परेशान हैं, या आपकी शादी अच्छी नहीं चल पा रही है? यदि ऐसा है, तो आप अपनी जन्मकुंडली देखें, कहीं उसमें काल सर्प योग तो नहीं? यहाँ से जानिये आपकी कुंडली में कालसर्प योग है या नहीं - अगर है, तो निश्चित तौर पर आप किसी न किसी परेशानी से जरूर जूझते रहेंगे। ज्योतिष की भाषा में कालसर्प दोष तब बनता है, जब राहु और केतु के मध्य समस्त ग्रह आ आते हैं। कुंडली में बनने वाला कालसर्प कितना दोष पूर्ण है यह राहू और केतु की अशुभता पर निर्भर करता है ! कहा जाता है जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में कालसर्प दोष होता है तो उसके जीवन में कुछ भी व्यवस्थित नहीं चलता। वह जीवन भर अनेक प्रकार की कठिनाइयों से जूझता रहता है ! और उसे सफलता उसके अंतिम जीवन में प्राप्त हो पाती है, उसको जीवन भर घर, बहार, काम काज, स्वास्थ्य, परिवार, विवाह, कामयाबी, नोकरी, व्यवसाय आदि की परेशानियों से सामना करना पड़ता है ! बैठे बिठाये बिना किसी मतलब की मुसीबते उसे जीवन भर परेशान करती है ! यह योग कुण्‍डली के सभी अच्‍छे योगों को नष्‍ट कर देता है। कालसर्प योग मुख्यत: बारह प्रकार के माने गये हैं।जैसे की अन्नंत काल सर्प योग यह तब बनता है जब जातक के जन्‍मांग के प्रथम भाव में राहु और सप्‍तम भाव में केतु हो , इसकी वजह से जातक के घर में कलह होती रहती है। मानसिक रूप से व्‍यक्ति परेशान रहता है. यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी कुंडली में काल सर्प योग है या नहीं।अगर है तो कौन सा है तो कौन सा है और आप इसका क्या उपाय करे. राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राज योग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Monday, June 4, 2018

धूमावती

धूमावती एक एसी महाविद्या है धूमावती एक एसी महाविद्या है जिनके बारे मे साहित्य अत्यधिक कम मात्र मे मिलता है. इस महाविद्या के साधक भी बहोत कम मिलते है. मूल रूप से इनकी साधना शत्रु स्तम्भन और नाशन के लिए की जाती है. लेकिन इस महाविद्या से सबंधित कई ऐसे प्रयोग है जिनके बारे मे व्यक्ति कभी सोच भी नहीं सकता. चरपटभंजन नाम धूमावती के उच्चकोटि के साधको के मध्य प्रचलित रहा है, चरपट भंजन को ही चरपटनाथ या चरपटीनाथ कहा गया है. चरपटनाथ ने अपने जीवन काल मे धूमावती सबंधित साधनाओ का प्रचुर अभ्यास किया था और मांत्रिक धूमावती को सिद्ध करने वाले गिने चुने व्यक्ति मे इनकी गणना होती है, वे कालजयी रहे है और आज भी वे सदेह है. उनके बारे मे ये प्रचलित है की वह किसी भी तत्व मे अपने आप को बदल सकते है चाहे वह स्थूल हो या सूक्ष्म, जैसे मनुष्य पशु पक्षी पानी अग्नि या कुछ भी. ७५०-८०० साल पहले धूमावती साधना के सबंध मे फैली भ्रान्ति को दूर करने के लिए इस महान धूमावती साधक ने कई ग्रंथो की रचना की जिसमे धूमावतीरहस्य, धूमावतीसपर्या, धूमावती पूजा पध्धति जैसे अत्यधिक रोचक ग्रंथ सामिल है. कई गुप्त तांत्रिक मठो मे आज भी यह ग्रन्थ सुरक्षित है. लेकिन यह साधना पद्धतिया लुप्त हो गयी और जन सामान्य के मध्य कभी नहीं आई. धूमावती अलक्ष्मी होते हुए भी लक्ष्मी प्राप्ति से लेके वैभव ऐश्वर्य तथा जीवन के पूर्ण भोग प्राप्त करने के लिए भी धूमावती साधना के कई विधानों का उन्होंने प्रचार किया था. लेकिन ये साधनाओ को गुप्त रखने की पीछे का मूल चिंतन सायद तब की परिस्थिति हो या कुछ और लेकिन इससे जन सामान्य के मध्य साधको का हमेशा ही नुक्सान रहा है. चरपटभंजन ने जो कई गुप्त पध्धातियो का विकास किया था उनमे से एक साधना एसी भी थि जिसको करने से व्यक्ति अपने सामने वाले व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे मे कुछ भी जान लेता है. जैसे की चरित्र कैसा है, इस व्यक्ति की प्रकृति क्या है, इसके दिमाग मे इस वक्त कौनसे विचार चल रहे होंगे? इस प्रकार की साधना अत्यधिक दुस्कर है क्यों जीवन के रोज ब रोज के कार्य मे ऐसी साधनाओ से कितना और क्या विकास हो सकता है कैसे फायदा हो सकता है ये तो व्यक्ति खुद ही समज सकता है. मानसिक शक्तियो के विकास की अत्यधिक दुर्लभ साधनाओ मे यह साधना अपना एक विशेष स्थान लिए हुए है. चरपटनाथ द्वारा प्रणित धूमावती प्रयोग आप सब के मध्य रख रहा हू. इस साधना को करने से पूर्व साधक अपने स्थान का चुनाव करे. साधक के साधना स्थल पर और आसान पर साधक की जब तक साधना चले कोई और व्यक्ति न बैठे. इस साधना मे साधक को ११ माला मंत्र जाप एक महीने (३० दिन) तक करना है. माला काले हकीक की रहे. वस्त्र काले रहे. समय रात्रि काल मे ११ बजे के बाद का हो. धूमावती का यन्त्र चित्र अपने सामने स्थापित करे. तेल का दीपक साधना समय मे जलते रहना चाहिए. यन्त्र चित्र का पूजन कर के विनियोग करे विनियोग: अस्य श्री चरपटभंजन प्रणित धूमावती प्रयोगस्य पूर्ण विनियोग अभीष्ट सिद्धियर्थे करिष्यमे पूर्ण सिद्धियर्थे विनियोग नमः इसके बाद निम्न मंत्र का ११ माला जाप करे ओम धूमावती करे न काम, तो अन्न हराम, जीवन तारो सुख संवारो, पुरती मम इच्छा, ऋणी दास तमारो ओम छू मंत्र जाप के बाद साधक धूमावती देवी को ही मंत्र जाप समर्पित कर दे. ये अत्यधिक दुर्लभ विधान सम्प्पन करने के बाद व्यक्ति यु कहा जाए की अजेय बन जाता है तो भी अतिशियोक्ति नहीं होगी. राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राज योग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Sunday, June 3, 2018

तारा महाविद्या

तारां संसारसारां त्रिभुवनजननीं सर्वसिद्धिप्रदात्रीं | भगवती श्री महाविद्या तारा देवी के संदर्भ में कुछ भी लिखना या कहेना सूर्य को दीप दिखाने के सामान ही है. आदि काल से ही अपने साधको के मध्य देवी के हर एक स्वरुप का प्रचनल उनके स्नेह एवं प्रेम के कारण तंत्र क्षेत्र में वृहद रूप से विद्यमान है. देवी की साधना आदि ऋषि वसिष्ठ विश्वामित्र गोरक्षनाथ तथा भगवान श्री तथागत ने भी की थी. क्यों की भगवती तारा ही तारण करने वाली अर्थात भोग से मोक्ष की तरफ ले जानी वाली है. उन्ही को ही तंत्र ग्रंथो में शक्ति के मूल रूप में मानकर अभ्यर्थना की है की हे भगवती तारा आप ब्रह्मांडीय संसार अर्थात सभी भोग एवं मोक्ष कारक तत्त्व का सार है, आप ही त्रिभुवन की स्वामिनी जन्मदात्री है तथा आपके माध्यम से ही सर्व सिद्धि की प्राप्ति होती है. और इसी लिए देवी की साधना सभी तंत्र मत्तो में सामान रूप से होती रही है. देवी से सबंधित कई प्रकार के प्रयोग एवं अनुष्ठान आदि प्रसिद्द है लेकिन गुप्त रूप से भी कई ऐसे विधान है जो की सिर्फ सिद्धो के मध्य प्रचलित रहते है. ऐसे ही कई विधान देवी के पारद विग्रह के माध्यम से संपन्न किये जाते है. आज हमारे कई भाई बहेनो के पास यह अति दुर्लभ ‘पारद तारा’ विग्रह विद्यमान है जो की आप सब ने जिस तीव्रता एवं उत्साह के साथ स्वीकार किया था. इसी विग्रह के सबंध में कई दिव्य प्रयोग आप सब के मध्य रखने के लिए बराबर प्रयास किया लेकिन कई प्रकार की योजना में व्यस्तता की वजह से यह प्रयोग आप से के मध्य प्रस्तुत करने में विलम्ब होता रहा है, कुछ दिन पूर्व ही इस विग्रह के माध्यम से संपन्न होने वाला एक अद्भुत तारा विधान प्रस्तुत किया गया था, अब इसी कड़ी में और दो विशेष प्रयोगों को आप सब के मध्य रखा जा रहा है जिनमे आकस्मिक धनप्राप्ति से सबंधित भगवती तारा प्रयोग एवं नीलतारा मेधा सरस्वती प्रयोग शामिल है. यह दोनों अद्भुत एवं तीव्र विधान है जो की साधक को शिघ्रातीशीघ्र फल प्रदान करने में समर्थ है. विधान सहज होने के कारण कोई भी साधक इसे संपन्न कर सकता है. आशा है की निश्चय ही साधकगण इन देव दुर्लभ प्रयोगों से लाभ की प्राप्ति करेंगे. आकस्मिक धन प्राप्ति भगवती तारा प्रयोग – प्रस्तूत प्रयोग आकस्मिक धन प्राप्ति से सबंधित भगवती तारा का विशेष प्रयोग है. इस प्रयोग को सम्प्पन करने पर साधक को विशेष धनलाभ की प्राप्ति होती है, वस्तुतः हमारे जीवन में हम कई प्रकार के दोषों के कारण एवं प्रारब्ध जन्य कारणों के कारण कई बार भोग लाभ की प्राप्ति से वंचित रहते है. एसी स्थिति में दीनता युक्त स्थिति से बाहर निकलने के लिए आदि काल से हमारे सिद्धो एवं ऋषियों ने भगवती तारा की साधना उपासना के सन्दर्भ में एक मत्त में स्वीकृति दी है. यूँ भगवती तारा को धनवर्षिणी, स्वर्णवर्षिणी आदि नामो से संबोधित किया गया है तो उसके पीछे यह तथ्य है की निश्चय ही देवी साधक की धन सबंधित सर्व अभिलाषा को पूर्ण करने में समर्थ है अगर प्राण प्रतिष्ठित पारद तारा विग्रह के सामने देवी के मूल मन्त्र को ही साधक पूर्ण समर्पण से युक्त हो कर जाप कर ले तो सभी समस्याओ से उसे मुक्ति मिलती है यह सिद्धो का कथन है. फिर भी कई बार विशेष प्रयोग आदि से भी लाभ प्राप्ति के लिए साधक प्रयत्न कर सकता है. देवी के पारद विग्रह से सबंध में सिद्धो के मध्य गुप्त रूप से प्रचलित जो प्रयोग है उनमे धन प्राप्ति के विशेष एवं उच्चकोटि के प्रयोग शामिल है. लेकिन इनमे से तीव्र एवं गृहस्थ साधको के लिए उपयुक्त विधान निम्न रूप से है. यह विधान सहज है एवं साधक अपने घर में यह विधान कर सकता है. साथ ही साथ यह प्रयोग अल्प मन्त्र जाप एवं साधना काल की अवधि में भी राहत है क्यों की आज के युग में सभी साधको के लिए मंत्रो के पूर्ण अनुष्ठान करना संभव नहीं है अतः इस प्रकार के दुर्लभ प्रयोग को प्रथम बार यहाँ पर प्रस्तुत किया जा रहा है. इस प्रयोग को पूर्ण करने पर साधक को अपनी समस्या में राहत मिलती है, साधक अपने जीवन में उन्नति को प्राप्त करता है, धन प्राप्ति के नूत नविन स्त्रोत उसके सामने आते रहते है या फिर देवी नाना प्रकार से उसकी सहायता करती रहती है. यह प्रयोग साधक किसी भी शुभ दिन शुरू कर सकता है. साधक को यह प्रयोग रात्री काल में ही संपन्न करना चाहिए. साधक को स्नान कर साधना को शुरू करना चाहिए. साधक लाल रंग के वस्त्र को धारण करे तथा लाल रंग के आसन पर बैठे. साधक का मुख उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए. साधक प्रथम गुरुपूजन करे तथा गुरु मन्त्र का जाप करे. इसके बाद साधक गणपति एवं भैरव देव का पंचोपचार पूजन करे. अगर साधक पंचोपचार पूजन न कर पाए तो साधक को मानसिक पूजन करना चाहिए. साधक अपने सामने ‘पारद तारा’ विग्रह को स्थापित करे तथा निम्न रूप से उसका पूजन करे. ॐ श्रीं स्त्रीं गन्धं समर्पयामि | ॐ श्रीं स्त्रीं पुष्पं समर्पयामि | ॐ श्रीं स्त्रीं धूपं आध्रापयामि | ॐ श्रीं स्त्रीं दीपं दर्शयामि | ॐ श्रीं स्त्रीं नैवेद्यं निवेदयामि | साधक को पूजन में तेल का दीपक लगाना चाहिए तथा भोग के रूपमें कोई भी फल या स्वयं के हाथ से बनी हुई मिठाई अर्पित करे. इसके बाद साधक निम्न रूप से न्यास करे. इसके अलावा इस प्रयोग के लिए साधक देवी विग्रह का अभिषेक शहद से करे. करन्यास ॐ श्रीं स्त्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ॐ महापद्मे तर्जनीभ्यां नमः ॐ पद्मवासिनी मध्यमाभ्यां नमः ॐ द्रव्यसिद्धिं अनामिकाभ्यां नमः ॐ स्त्रीं श्रीं कनिष्टकाभ्यां नमः ॐ हूं फट करतल करपृष्ठाभ्यां नमः हृदयादिन्यास ॐ श्रीं स्त्रीं हृदयाय नमः ॐ महापद्मे शिरसे स्वाहा ॐ पद्मवासिनी शिखायै वषट् ॐ द्रव्यसिद्धिं कवचाय हूं ॐ स्त्रीं श्रीं नेत्रत्रयाय वौषट् ॐ हूं फट अस्त्राय फट् न्यास के बाद साधक को देवी तारा का ध्यान करना है. ध्यायेत कोटि दिवाकरद्युति निभां बालेन्दु युक् शेखरां रक्ताङ्गी रसनां सुरक्त वसनांपूर्णेन्दु बिम्बाननाम् पाशं कर्त्रि महाकुशादि दधतीं दोर्भिश्चतुर्भिर्युतां नाना भूषण भूषितां भगवतीं तारां जगत तारिणीं इस प्रकार ध्यान के बाद साधक देवी के निम्न मन्त्र की 31 माला मन्त्र जाप करे. साधक यह जाप शक्ति माला, मूंगामाला से या तारा माल्य से करे तो उत्तम है. अगर यह कोई भी माला उपलब्ध न हो तो साधक को स्फटिक माला या रुद्राक्ष माला से जाप करना चाहिए. ॐ श्रीं स्त्रीं महापद्मे पद्मवासिनी द्रव्यसिद्धिं स्त्रीं श्रीं हूं फट (OM SHREENG STREEM MAHAAPADME PADMAVAASINI DRAVYASIDDHIM STREEM SHREENG HOOM PHAT) जाप पूर्ण होने पर साधक मन्त्र जाप को देवी के चरणों में योनीमुद्रा के साथ प्रणाम कर समर्पित कर दे. ॐ गुह्याति गुह्यगोप्ता त्वं गृहाणाऽस्मत कृतं जपं सिद्धिर्भवतु मे देवि! तत् प्रसादाना महेश्वरी|| साधक यह क्रम 11 दिन तक करे. 11 दिन जाप पूर्ण होने पर साधक शहद से इसी मन्त्र की १०८ आहुति अग्नि में समर्पित करे. इस प्रकार यह प्रयोग 11 दिन में पूर्ण होता है. साधक की धनअभिलाषा की पूर्ति होती है. राजगुरु जी महाविद्या आश्रम ( राज योग पीठ ) ट्रस्ट किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

Saturday, June 2, 2018

बात शुक्र ग़ह और बहुत खूबसूरत दिखने वाली स्फटिक की माला की

बात शुक्र ग़ह और बहुत खूबसूरत दिखने वाली स्फटिक की माला की मित्रो शुक्र ग़ह जिस इंसान का अछा होता है उसे जीवन में धन,वैभव,सुख साधन की अनेक वस्तुओ का सुख , प्रेमी प्रेमिका पति पत्नी का सुख , चेहरे पर बहुत खूबसूरत चमक ये सब सुख उसको प्राप्त होते है जो इंसान शुक्र ग़ह को मजबूत करले उसे ऊपर लिखे सब सुख प्राप्त होते है शुक्र को मजबूत करने के लिए सबसे सरल उपाय है हाथ में शुक्र वार को ब्रेसलेट की तरहा जहा कंगन पहने जाते है वहा स्फटिक की माला पहन ले आपको जीवन बहुत जल्दी ऊपर लिखे सुख प्राप्त होंगे स्फटिक की माला धारण करने के लाभ (1) शुक्र ग़ह मजबूत होता है (2) जीवन में धन ,वैभव ,समृद्धि प्राप्त होती है (3) प्रेमी प्रेमिका पति पत्नी को वश में करके प्यार को बहुत तेज़ गति से बढ़ाता है (4) वीर्य को बढ़के चेहरे पर खूबसूरती , आकर्षण पैदा करके वशीकरण करता है (5) सुब्हे से रात तक काम करके न थकने वाली चुस्ती फुर्ती देता है ईसी कैसे प्राप्त करे इसकी कीमत 650 रुपये है जोकि आप हमारे बैंक अकाउंट में जमा करके हमे घर की aadres बताये ये माला 5 दिन के अन्दर आपके घर भेज दी जायगी राज गुरु जी महाविद्या आश्रम ( राज योग पीठ ) ट्रस्ट . किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें : मोबाइल नं. : - 09958417249 08601454449 व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...