Sunday, June 26, 2016

सर्व दोष NASHAK भगवती दुर्गा PRAYOG

भगवती दुर्गा का रूप अपने आप मे साधको के मध्य हमेशा से ही अत्याधिक प्रचलित रहा है. बुराई पर अच्छाई की जित का प्रतीक है देवी. दुर्गा के कई रूपों की साधना तन्त्र ग्रंथो मे निहित है. देवी नित्य कल्याणमई है तथा अपने साधको पर अपनी अमी द्रष्टि सदैव रखती है. भगवती की साधना करना जीवन का एक अत्यधिक उच्च सोपान है. व्यक्ति अपने कर्म दोषों से जब तक मुक्त नहीं होता तब तक उन्नति की गति मंद रूप से ही चलती है चाहे वह भौतिक क्षेत्र हो या आध्यात्मिक क्षेत्र हो. भौतिक रूप मे चाहे हम कर्मफलो को प्राप्त कर दोषों का निवारण एक बार कर भी ले लेकिन मानसिक दोषों तथा मन मे जो उन दोषों का अंश रह गया है उसका शमन भी उतना ही ज़रुरी है जितना भौतिक दोषों का निवारण. कई बार व्यक्ति अपने अत्यधिक परिश्रमो के बाद भी सफलता को प्राप्त नहीं कर सकता है. या फिर कोई न कोई बाधा व्यक्ति के सामने आ जाती है, या फिर परिवारजनो से अचानक ही अनबन होती रहती है. इन सब के पीछे कही न कही व्यक्ति के वे दोष शामिल होते है जो की पाप कर्मो के आचरण से उन पर हावी हो जाते है. चाहे वह इस जन्म से सबंधित हो या पूर्व जन्म के संदर्भ मे. कर्म की गति न्यारी है लेकिन साधना का भी अपने आप मे एक विशेष महत्व है, साधना के माध्यम से हम अपने दोषों की समाप्ति कर सकते है, निवृति कर सकते है. इस प्रकार की साधनाओ मे भगवती की साधनाए आधार रूप रही है. भगवती की साधना मात्रु स्वरुप मे ही ज्यादातर की जाती है. इस महत्वपूर्ण साधना को सम्प्पन करने पर साधक की भौतिक तथा आध्यात्मिक गति मंद से तीव्र हो जाती है, समस्त बाधाओ का निराकारण होता है तथा व्यक्ति अपने दोषों से मुक्त हो कर निर्मल चित युक्त बन जाता है. आगे के सभी कार्यों मे देवी साधक की सहायता करती है तथा साधक का सतत कल्याण होता रहता है.
इस साधना को करने के लिए साधक के पास शुद्ध पारद दुर्गा विग्रह हो तो ज्यादा अच्छा है, लेकिन यह संभव नहीं हो तो साधक को देवी दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति को अपने सामने स्थापित करना चाहिए. साधक इस साधना को रविवार से शुरू करे. रात्री काल मे ११ बजे के बाद इस साधना को शुरू करना चाहिए. साधक लाल वस्त्र पहन कर लाल आसान पर बैठ कर देवी का पूजन करे तथा उसके बाद निम्न मंत्र की मूंगामाला से २१ माला जाप करे. साधक चाहे तो ५१ माला भी जाप कर सकता है. दिशा उत्तर रहे.

ओम दुं सर्वदोष शमनाय सिंहवासिनि नमः

यह क्रम ११ दिनों तक रहे. संभव हो तो ११ वे दिन साधक को मंत्रजाप के बाद शुद्ध घी की १०८ आहुति यही मन्त्र से अग्नि मे प्रदान करे. साधना काल मे कमल की सुगंध आने लगती है तथा सौभाग्यशाली साधको को देवी बिम्बात्मक रूप से दर्शन भी देती है. साधना के दिनों मे ही उत्तरोत्तर साधक का चित निर्मलता की और अग्रसर होता रहता है जिसे साधक स्पष्ट रूप से अनुभव कर पाएगा.

राजगुरु जी

महाविद्या आश्रम

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Saturday, June 25, 2016

मुकदमे मे विजय प्राप्ति यन्त्र प्रयोग)

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इस  गुप्त शत्रुता   वाले  युग   मे  कौन सा  शत्रु कब  घात प्रतिघात  कर दे कहा नही जा सकता हैं  एक बार सामने के आघात  तो सहन किये जा सकते हैं  पर  छुप कर या विभिन्न षडयंत्र बनाकर किये गए आघात के बारे  मे क्या कहा जाए  ... यह  सब  तो आज  के  युग की निशानी हैं   इन्ही मे  एक  तरीका   जो सर्वाधिक  उपयोग होता हैं  वह हैं सामने वाले  को किसी भीझूठे   मुकदमो मे फसवा  दो , अब  व्यक्ति कितना भी निर्दोष  हो  इस चक्कर से निकलते निकलते  उसका  बहुत संमय उर्जा और धन नष्ट  हो जाता हैं मानसिक प्रताडना  जो झेलनी पड़ती हैं  वह तो  बिलकुल ही अलग  होती हैं.

यूँ तो गुप्तशत्रुओं और समस्त प्रकार के  षड्यंत्रो को निष्फल करने मे  भगवती बल्गामुखी  और अन्य महाविद्याओ का नाम आता  हैं पर इनकी साधनाए इतनी सरल भी  तो नही   हैं , इनसे सबंधित प्रयोग अवश्य किये जा सकते हैं  पर व्यक्ति  भी कुछ संशय की अवस्था  मे  रहता   हैं की  कहीं कुछ  गलत न  हो जाए   या  उसे पूरा विधान ठीक  से मालुम  भी नही होता ,  इस  समय   यंत्र विज्ञान के   सरलतम तरीके  जिन पर भले  ही एक पल  विस्वास न हो पर बहुत लाभदायक सिद्ध  हुये हैं .
वेसे भी कानूनी  जब लड़ाई प्रारंभ होती हैं   तो  एक व्यक्ति ,कानूनी दाव  पेंच  से  उसका कोई वास्ता   नही होता  और  वह परेशां   होता जाता हैं  और  किसी तरह मुकदमो मे  विजय भी  चाहता हैं की फिर से  व ह  आरामदायक जीवन   व्यतीत  कर सके .

यह कहा भी  गया हैं की कमजोरी  ही पाप  हैं और बलयुक्त होना   ही पुण्य हैं और जीवन ऐसे  रो रो कर   घिसट घिसट  कर तो काटा  नही जा सकता  हैं यह तो आप हम सभी जानते हैं की  आज के  युग  मेसाधना के लिए  समय  न मिल पाना   एक बहुत बड़ी समस्या हैं ,हलाकि सदगुरुदेव जी ने यह भी कहा हैं की अगर ध्यान से देखें   तो स्वयं ही पता  चल जाएगा की   दिन का  कितना समय   यूँ ही  बेकार  के कामो मे जा ता हैं अगर वहां  समय बचाया जा सके  तो.

अगर भौतिक जीवन मे उच्चता प्राप्त  कर ली  हैं  तो  इस  तंत्र जगत मे  भी कुछ  उपलब्धिया  भी प्राप्त करें यही  तो  जीवन की उच्चता   हैं .तो इसके लिए समय निकालना ही पड़ेगा .ठीक इसी तरह अगर समस्या  बहुत गंभीर  न हुयी  हो तो आप  इस प्रयोग को करें  और पुरे मनो योग से करने मे   सफलता आपको प्राप्त होगी  बशर्ते आपका पक्ष   सही होना चहिये .इतना   तो व्यक्ति का  स्वयं के लिए  निष्पक्ष  आकलन होना ही चाहिये.

यन्त्र  विज्ञानं   का यह बहुत ही सरल  सा प्रयोग हैं अनेको  द्वारा   प्रशंशित भी हैं .

आप  सभी को यंत्र विधान  के सामन्य नियम ज्ञात हैं ही , अनेको बार लिखे  जा  चुके हैं तो बार बार उन्ही का उल्लेख उचित  नही   हैं , इस यंत्र को भोजपत्र पर   कुकुम से बना ले . जिस व्यक्ति  के विरुद्ध  आपका मुकदमा  हो  उसका  नाम यंत्र के मध्य  मे पहले से लिखना  न भूले ,यंत्र का  पूजन और अन्य सामान्य विधान जो की यन्त्र सबंधित विगत कई पोस्ट मे  दिए जा चुके हैं आप उन्हें करे  और   जिस  दिन आपका मुकदमा  हो कोर्ट मे  जाना  हो इस यन्त्र को त्रिलोह   धातु के तावीज़ मे बंद करके   दूध मे डा ल  दे .. बस इतना  विधान हैं .

राजगुरु जी

महाविद्या आश्रम

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Monday, June 20, 2016

महाकाली सबंधित पूर्ण काल ज्ञान के लिए

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निकटत्तम भविष्य को जानने के लिए एक सामान्य विधान इस रूप से है जो की व्यक्ति को भविष्य के ज़रोखे मे जांक कर देखने के लिए शक्ति प्रदान करता है
किसीभी शुभदिन से यह साधना शुरू की जा सकती है ।

इसमें महाकाली का विग्रह या चित्र अपने सामने स्थापित करे और रात्री काल मे उसका सामान्य पूजन कर के निम्न मंत्र की २१ माला २१ दिन तक करे । यानि रोज 21 माला प्रतिदिन जाप करना हे ।

मंत्र :-

काली कंकाली प्रत्यक्ष क्रीं क्रीं क्रीं हूं

साधना काल मे लोहबान का धुप व् घी का दीपक जलते रहना चाहिए ।

यह जाप रुद्राक्ष या काली हकीक माला से किया जा सकता है ।

साधना के कुछ दिनों मे साधको को कई मधुर अनुभव हो सकते है.

राजगुरु जी

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...