Saturday, February 29, 2020

लक्ष्मी सम्मोहन साधना प्रयोग




लक्ष्मी सम्मोहन  साधना प्रयोग 


आर्थिक पिछड़ेपन के शिकार इसे जरूर करें

घर से साधना करने वाले मंत्र को अनाहत चक्र में साथपित करना न भूले
साधना के समय अपने अनाहत चक्र को मां लक्ष्मी के साथ जोड़ दें

सभी साधकों को राम राम,  आज

 साधक ग्रुप में आज एक साधक ने सवाल पूछा है कि लक्ष्मी सम्मोहन साधना किसको करनी चाहिये, इसकी विधि क्या है. क्या इसे घर बैठे भी किया जा सकता है.

गुरू जी ने जवाब में बताया कि जो लोग फाइनेंस में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं, योग्यता और क्षमता के बाद भी जिनकी आर्थिक स्थिति वैसी नही हो पा रही जिसके वे हकदार हैं. भगवान शिव ने उनके लिये लक्ष्मी सम्मोहन साधना का सटीक विधान बनाया है.

*विधि….*

इस साधना के तहत धन की देवी लक्ष्मी को आकर्षित किया जाता है. अनाहत चक्र मन की गति से काम करता है. साथ ही उसमें सम्मोहन का दैवीय गुण होता है. हमारे ऋषि- मुनि वेदकाल से इस दैवीय गुण का उपयोग करके इंशान ही नही देवी देवताओं का भी अपने प्रति सम्मोहन करते आये हैं. लक्ष्मी सम्मोहन साधना में भी इसी का उपयोग किया जाता है.

गुरू जी ने बताया कि साधक के अनाहत चक्र को सक्रिय करके माता लक्ष्मी के अनाहत चक्र के साथ जोड़ दिया जाता है. साथ ही अनाहनत चक्र की प्रोग्रामिंग की जाती है कि वह मां लक्ष्मी को साधक के लिये सम्मोहित करे. और सदैव उन्हें साधक के प्रति सम्मोहित बनाये रखे.
इस सम्मोहन का मुख्य आधार साधक और माता लक्ष्मी की उर्जायें होती हैं. 

मां लक्ष्मी की उर्जाओं में धन को आकर्षित करते रहने की विशेष प्राकृतिक क्षमता होती है. इसलिये उनकी उर्जायें आकर्षित होकर जब साधक के आभामंडल में स्थापित हो जाती हैं तो मानों मां लक्ष्मी साक्षात् साधक के जीवन में स्थापित हो जाती हैं.

साधक के अनाहत चक्र को माता लक्ष्मी के अनाहत चक्र से जोड़कर उन्हें सम्मोहित करने की कई सक्ष्म विधियां उपलब्ध हैं.

जो साधक बहुत नियम संयम का पालन करते हैं और वर्षों धैर्य के साथ साधना करने की क्षमता वाले हैं वे मंत्रों के विधान से इस क्रिया को पूरा करते हैं. इस विधि में कुछ साल लगते हैं. सिद्धी होने पर साधक कुबेर की तरह धनवान बन जाता है.

जो साधक सीधे उर्जाओं का उपयोग करने में सक्षम होते हैं वे अपने अनाहत चक्र को सक्रिय करके उसे माता लक्ष्मी के अनाहत चक्र की उर्जाओं से कनेक्ट कर लेते हैं. फिर अपना उद्देश्य पूरा कर लेते हैं. इस विधि में पहले की अपेक्षा बहुत कम समय लगता है. लक्ष्मी सम्मोहन होत ही साधक धनपति बन जाते हैं.

*लक्ष्मी बूटी….*

इन दोनों ही विधियों में अधिकांश साधक लक्ष्मी बूटी का उपयोग करते हैं. ये एक पहाड़ी जगंली पेड़ का फल होता है. साधक इसे साधना बूटी के नाम से भी जानते हैं. इसमें साधना के समय साधक की उर्जाओं को संगठित रखने और अनाहत चक्र को एक्टिव बनाये रखने का प्राकृतिक गुण होता है. तांत्रिक इसे दिल की बीमारियों को ठीक करने के लिये टोने के रूप में भी उपयोग में लाते हैं. ये बूटी कई तरह की साधनाओं में उपयोग की जाती है.लक्ष्मी साधना करने वाले साधक अक्सर इसकी मदद से अपना अभीष्ट सिद्ध कर लेते हैं.

*लक्ष्मी बूटी की कीमत…..*

वैसे तो ये साधकों के लिये अनमोल है. सामान्य रूप से मिल जाये तो लोग पहाड़ी जंगलों से इसे फ्री में इकट्ठा कर लेते हैं. कई साधु संत अपने अनुयायियों को घर में रखने के लिये आशीर्वाद के रूप में दे देते हैं. इसे घर के मंदिर में स्थापित किया जाये तो घरेलू पूजा पाठ फलित होने लगते हैं. उपलब्धता कम हो तो साधक इसकी कीमत 2100/- तक देकर इसे प्राप्त कर लेते हैं.

गुरू जी द्वारा कराई जा रही लक्ष्मी सम्मोहन साधना में भी लक्ष्मी बूटी का उपयोग होगा. ताकि साधकों को लक्ष्मी सम्मोहन साधना का लाभ लम्बे समय तक मिलता रहे.

*क्या लक्ष्मी सम्मोहन साधना घर से भी की जा सकती है……*

इस बारे में गुरू जी ने बताया कि जो साधक उच्च कोटि की साधना में सक्षम हैं वे अपने स्थान से ही लक्ष्मी सम्मोहन साधना करते हैं. मगर इसके लिये जरूरी है कि साधना की पद्धति और विधान का सम्पूर्ण ज्ञान हो. जीवन में धन और अनाहन चक्र दोनों की अत्यत्न संवेदनशील बिंदु हैं. इस कारण इस साधना में चूक भारी पड़ती देखी गई है. बहुत अच्छा होगा कि साधक इस साधना को मार्गदर्शक गुरू की देखरेख में ही करें.

 सामूहिक साधना के रूप में अनाहत चक्र का उपयोग अत्यधिक प्रभावशाली होता है. इसलिये जहां कहीं भी करें वहां 40 साधकों से अधिक लोग मिलकर करें तो परिणाम बहुत ही शानदार देखे गये हैं. एेसे में रिस्क फैक्टर बहुत कम हो जाता है. क्योंकि सभी साधकों की सकारात्मकता मिलकर हर तरह की नकारात्मकता को साधना स्थल से ढ़केलकर ब्रह्मांड में भेज देती है.

*घर से साधना करने वालों को सलाह…..*

जो साधक घर से ही लक्ष्मी सम्मोहन करना चाहते हैं, उन्हें गुरू जी ने सलाह दी है कि लक्ष्मी बूटी को साधना स्थल पर जरूर स्थापित करें. ताकि उर्जाओं के असंतुलन और अनहोनी की आशंका से बच सकें. जिस मंत्र का उपयोग करें उसे पहले अपने आभामंडल और अनाहत चक्र में स्थापित जरूर कर लें.

मां लक्ष्मी की सब पर कृपा हो, यही हमारी कामना है.

लक्ष्मी सम्मोहन साधना हेल्पलाइन

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

राजगुरु जी

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

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.किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249'

                     

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।।पिशाच बाधा का पितृदोषों से संबंध।।



।।पिशाच बाधा का पितृदोषों से संबंध।।


कभी कभी बुरी आत्मायें संतानहीनता के अलावा जातक के भाग्य के विकास पर।

 भी बुरा प्रभाव डालती हैं।ज्योतिष् शास्त्र में पिशाच बाधा से संबंधित योग निम्नलिखित हैं।

●किसी भी जन्मकुंडली में राहु या केतु सप्तम भाव में होने पर पिशाच बाधा होती है

●किसी जातक की कुंडली में लग्न में राहु ग्रस्त चंद्रमा होनेऔर पंचम अथवा नवम में पापग्रस्त शनि एवं मंगल होने पर पिशाच बाधा होती है।

●लग्न में शनि राहु की युति हो तो पिशाच बाधा होती है।

●लग्न में केतु किसी भी पापी ग्रह से युत या दृष्ट होने पर पिशाच बाधा होती है

●लग्न में शुक्र हो और  सप्तम भाव में शनि हो एवं किसी भी भाव में पापी ग्रह दृष्ट चन्द्र होने से भूत-प्रेत पिशाच बाधा का योग होता ह

●शनि से युक्त चन्द्रमा अष्टम भाव में होने पर पिशाच बाधा का योग बनता है।

●किसी भी पाप ग्रह से चन्द्रमा छठे  भाव में हो और सप्तम में राहु या केतु हो तो ऐसे जातक को पिशाच बाधा का योग बनता है।

●किसी भी जातक की कुंडली में शनि, राहु द्वितीय भाव में हों तो पिशाच बाधा होती है।

●किसी जन्म कुंडली में छठे स्थान पर पापी ग्रह दृष्ट राहु या केतु हो तो पिशाच बाधा होती है

●किसी जातक की कुंडली में अष्टम भाव में क्षीण चंद्रमा मंगल या राहु से युत हो तो पिशाच बाधा होती है।

●किसी जातक की कुंडली में लग्न में बुध केतु पापी ग्रह से दृष्ट हों तो पिशाच बाधा होती है।

●शिव-शक्ति या विष्णु, सूर्य की उपासना करें मंदिर नियमपूर्वक जायें।पीपल वृक्ष की सेवा करें।गुरुजनो के चरण छूकर आशीर्वाद लें।

और जादा जानकारी और समाधान और उपाय या रत्न विश्लेषण समाधान प्राप्त के लिए सम्पर्क करे।

 जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 

दक्षिणा  -  201 मात्र .

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Friday, February 28, 2020

कुंडली के इस योग में होती है लव मैरिज ...







कुंडली के इस योग में होती है लव मैरिज ...


ज्योतिष शास्त्र में सप्तम स्थान विवाह का होता है। हिंदू धर्म में 8 प्रकार के विवाह माने गये है ब्रह्मा विवाह को सर्वश्रेष्ट तथा पैशाच विवाह को निकृष्ट विवाह की श्रेणी में रखा गया है। इन में गंधर्व विवाह भी विवाह का एक प्रकार है। 

गंधर्व विवाह को ही प्रेम विवाह कहा जाता है। प्रेम विवाह में वर कन्या अपनी मर्जी से विवाह करते है। जन्म कुंडली का सप्तम स्थान विवाह स्थान होता है। 

जब सप्तम या सप्तमेष का सम्बंध 3,5,9,11 और 12वें भाव के मालिक के साथ बनता हैं तब जातक प्रेम विवाह करता है। इन सम्बंधों में दृष्टी युति के अतिरिकत त्रिकोण तथा केंद्र सम्बंधों को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। 

सप्तमेश यदि पंचम स्थान के मालिक के साथ 3, 5 ,7,11 और 12वें भाव में स्थित हो तो जातक प्रेम विवाह अवश्य करता है।

 पंचम स्थान प्रेम सम्बन्ध तथा मित्रों का माना जाता है ऐसे में सप्तमेष का सम्बंध पंचमेश से हो जाये तो व्यक्ति के प्रेम विवाह करने के योग बनते है....!!

                     

अगर आप भी अपनी कुंडली के माध्यम से अपने जीवन साथी का स्वभाव और रूप जानना चाहते है तो संपर्क करे.

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मै यहां देखता हूं कि, कितने सारे तंत्रशास्त्र के मंत्रविधी..





मै यहां देखता हूं कि, कितने सारे तंत्रशास्त्र के मंत्रविधी.. 


सार्वजनिक हो रहे हैं!.. 

जिन्हें भगवान् शिव ने माँ पार्वती को कहा था कि, "जीस तरह स्त्री, अपने योनी को सबसे छुपाकर रखती है, उसीप्रकार इन्हें गुप्त रखना!"...

यह मंत्र -तंत्र, बच्चों के खिलौने नहीं है!.. 

कोई भी जिज्ञासु यदी सच्चे मन से इसका पठन करता है, तो यथासमय यह अपनी शक्ति प्रकट करते हैं!.. 

और यदि उस साधक को सही गुरु और सही जानकारी नहीं होती है,.. 

साथ ही  इस साधना के प्रति, स्वयं में कोई, गम्भीर भाव और प्रयास नहीं होता है!.. 

तो उसे और गुरु को भी, अनिष्ट परीनाम भुगतना अवश्यंभावी है!.. 

तो साधक / साधीकाओंने पहले इस शास्त्र के बारे अच्छे से समझकर, सही गुरु के मार्गदर्शन में बहोत ही सम्भलकर आगे बढना चाहिए!.. 

साथ ही मैं यह भी बता दूँ... 

जीन साधकों में, कामवासना की बजाय,.. उस अतींन्द्रीय शक्ति को जानने की चेष्टा हो... 
उन्हें हानी का डर नहीं है.. 
क्योंकि,.. 

वह साधक अपना सही मार्ग चुन ही लेगा!.. 

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Tuesday, February 25, 2020

हनुमान जी के ये 5 चमत्कारी उपाय आपको जीवन में सफलता पाने में मदद करेंगे ...







हनुमान जी के ये 5 चमत्कारी उपाय आपको जीवन में सफलता पाने में मदद करेंगे ...


ऐसा कहा जाता हैं कि हनुमान जी जिस काम में अपना आशीर्वाद दे देते हैं वो काम चुटकी बजा के हो जाता हैं. यही कारण हैं कि भक्तजनों में हनुमान जी सबसे अधिक पॉपुलर हैं.

 हिन्दू शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी अमर हैं और अभी भी इस युग में कहीं रह रहे हैं. यही कारण हैं कि अक्सर सुन्दरकाण्ड के समय भक्त लोग उनकी मौजूदगी को महसूस कर सकते हैं.

आज हम आपको हनुमान जी से सम्बंधित कुछ ऐसे टोटके बताएंगे जिन्हें करने से आपके जीवन की सारी कठिनाइयाँ तो दूर होगी ही साथ ही आपको जीवन में सफलता भी जल्दी मिलेगी.

हनुमान जी के ये टोटके जीवन में दिलाएंगे सफलता

1. कई बार आपकी राशि पर शनि भारी होता हैं जिसके चलते बनते काम भी बिगड़ जाते हैं. ऐसी स्थिति में आप शनिवार को हनुमान जी को चोला चढ़ाए. इसके साथ ही हर शनिवार को तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करे और हनुमान जी पर सिन्दूर और चमेली का तेल अर्पित करे. 

इसके बाद आपको हनुमान चालीसा का पाठ करना होगा. ऐसा यदि आप 7 शनिवार तक करोगे तो आपके ऊपर से शनि की बुरी दशा तो हटेगी ही साथ ही आपके सभी रुके काम समय पर पुरे होंगे.

2. यदि आपके उपर मंगल की दशा भारी हैं और ये आपको सफलता पाने से रोक रही हैं तो यह उपाय करे. मंगलवार के दिन हनुमान जी को चमेली का तेल, सिन्दूर, चना और सूरजमुखी का फूल चढ़ाए. 

अब पीपल के पेड़ की 9 पत्तियां ले और उस पर चन्दन की सहायता से श्री राम लिखे. अब श्री राम लिखी इन पत्तियों को हनुमान जी को अर्पित कर दे. इसके बाद हनुमान मूर्ति की 108 बार परिकृमा करते हुए जय श्री राम और जय हनुमान जा जाप करे. ऐसा करने से आपके ऊपर का भारी मंगल चला जाता हैं और आपके सारे काम बिना किसी रुकावट के फटाफट होने लगते हैं.

3. यदि सफलता पाने के रास्ते में शत्रु बाधा उत्पन्न कर रहे हैं तो यह उपाय करे. मंगलवार के दिन अपनी उंचाई के आकार का सफ़ेद नाड़ा ले और उसे सिन्दूर में रंग दे. 

अब इसे नारियल पर लपेट कर हनुमान चालिसा का पाठ करे और हनुमान जी को नारियल अर्पित कर दे. ऐसा करने से आपके शरीर के आस पास एक सुरक्षा कवच बन जाएगा और शत्रु आपका बाल भी बाका नहीं कर पाएगा.

4. यदि आपको किसी काम को शुरू करने में डर लगता हैं और ये डर आपको सफलता पाने से रोक रहा हैं तो यह उपाय करे.

 7 मंगलवार तक हनुमान मंदिर में सुबह शाम हनुमान चालीसा का पाठ करे और एक नारियल भी चढ़ा दे. ध्यान रहे आपको आधा नारियल मंदिर में चढ़ाना होगा और बाकी का आधा अकेले ही खाना होगा.

5. यदि सफलता पाने के रास्ते में पैसा दिक्कत बना हुआ हैं तो ये उपाय करे. 7 मंगलवार तक एक पीपल के पेड़ के नीचे दक्षिण दिशा की ओर मुख कर बैठे और हनुमान चालीसा का पाठ करे. ऐसा करने से धन आगमन के नए द्वार खुल जाएंगे.

और भी बहुत सारे प्रयोग विधि है हमारे ज्योतिष शास्त्र में आप भी जीवन में किसी भी प्रकार की समस्याओं में फंसे हुए हैं या उलझन में फंसे हुए हैं या आपके कारोबार बिजनेस सही नहीं चल पा रहे हैं तो संपर्क करें और खास प्रयोग विधि करके लाभ प्राप्त करें ...

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राजगुरु जी

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Saturday, February 22, 2020

काली वीर साधना






काली वीर साधना


वीर साधना सदा से साधको के मध्य प्रचलित रही है।वीर कई प्रकार के होते है।उनमे से ही एक है महाकाली वीर।इस वीर की उत्पत्ति महाकाली से ही होती है तथा ये उन्ही में विलीन हो जाता है।ये कई कार्य संपन्न कर सकता है

 जैसे साधक को सुरक्षा प्रदान करना,कई प्रकार की जानकारी लाकर देना,कई गोपनीय साधनाओ के विषय में बताना आदि सभी कार्य कर सकता है जो साधक आदेश देता है।

वास्तव में इस वीर की अपनी कोई शक्ति नहीं होती है।ये महाकाली से शक्ति प्राप्त करता है,अतः इससे कभी कोई अनेतिक कार्य नहीं करवाया जा सकता है अन्यथा ये साधक को छोड़कर पुनः महाकाली में समां जाता है,और दुबारा कभी सिद्ध नहीं होता है।

साधना जितनी रोचक है उतनी ही उग्र भी है अतः निडर व्यक्ति ही इसे करे।तथा गुरु आज्ञा से ही साधना की जाये।साधना में यदि कोई हानि होती है तो उसके लिये हम जिमीदार नहीं है,अतः स्वयं के विवेक का प्रयोग करे.

विधि :

 साधना शमशान,निर्जन स्थान,या नदी तट पर करे अगर ये संभव न हो तो किसी ऐसे कक्ष में करे जहा कोई साधना पूर्ण होने तक न आये।आपके आसन वस्त्र काले हो तथा दिशा दक्षिण हो।।

सामने एक नीला वस्त्र बिछाये,उस पर महाकाली का कोई भी चित्र स्थापित करे,गुरु तथा गणेश पूजन संपन्न करे,तथा सुरक्षा घेरा खीच ले।

अब महाकाली का सामान्य पूजन करे,सरसों के तेल का दीपक लगाये।

लोबान की अगरबत्ती जलाये,भोग में गुलाबजामुन रखे,ये नित्य साधना स्थल पर ही छोड़ कर आ जाना है,यदि आप घर में कर रहे है तो नित्य गाय को खिला दे,उत्तम रहेगा यदि आप नित्य भोग भैरव मंदिर में रख आये।

माँ से प्रार्थना करे की वे अपने वीर को भेजे।और रुद्राक्ष माला या काली हकिक माला से पहले निम्न मंत्र की ११ माला संपन्न करे .

मंत्र : 

||जंत्र काली मंत्र काली तंत्र काली||

अब निचे दिए गए मंत्र को लगातार माँ के चित्र की और देखते हुए एक घंटे तक जाप करे बिना किसी माला के।

मंत्र : 

||वीर वीर महाकाली को वीर,आवो टूटे मेरो धीर,महाकाली की दुहाई दू,तुझको काली मिठाई दू,मेरो हुकुम पूरण करो,जो यहाँ न आओ तो महाकाली को खडग पड़े,तू चटक कुआँ में गिर मरे ,आदेश आदिनाथ को आदेश आदेश आदेश||

साधना ४१ दिन करे,वीर माँ के चित्र से ही प्रत्यक्ष होता है।जब सामने आये तो डरे नहीं भोग की मिठाई उसे दे दे,और वचन ले ले की में जब तुम्हे बुलाऊंगा तब आना और मेरे कार्य पूर्ण करना।

स्मरण रहे कोई गलत कार्य न करवाना अन्यथा सिद्धि समाप्त,और पुनः कभी सिद्ध होगी भी नहीं अतः

 सावधान रहे।कभी कभी वीर साधना पूर्ण होने के पहले ही आ जाता है,तब भी उससे बोले नहीं जाप करते रहे।यदि जाप के बाद भी वो वही रहे और आपसे बात करे तो मिठाई देकर वचन ले ले।और साधना को वही समाप्त कर दे।माँ आपका कल्याण करे

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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गाड़ी नंबर और रंग




गाड़ी नंबर और रंग


यदि आप अपनी गाड़ी का नंबर और रंग, अंक ज्योतिष के अनुसार रखें तो भविष्य में होने वाली दुर्घटनाएं टल जाती है। जानिए अंक ज्यातिष के अनुसार कैसा होना चाहिए आपका गाड़ी नंबर और रंग..

अंक- 1 आपको अपने वाहन के नंबर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 रखना चाहिये। पीले, सुनहरे, अथवा हल्के रंग के वाहन खरीदना चाहिए। आप 6 या 8 नंबर वाला वाहन न रखें साथ ही नीले, भूरे, बैंगनी या काले रंग के वाहन न खरीदें।

अंक- 2 आपके लिए वो वाहन अनुकूल है जिनका कुल योग 1, 2, 4 या 7 हो। 9 नंबर वाले वाहन ना रखें। आप सफेद अथवा हल्के रंग का वाहन खरीदें। लाल अथवा गुलाबी रंग की वाहन न लें।

अंक-3 आपकी गाड़ी नंबर का कुल योग 3,6, या 9 होना चाहिये। 5 या 8 नंबर वाला वाहन आपके लिए अच्छा नही रहेगा। पीले, बैंगनी, या गुलाबी रंग का वाहन खरीदें। हल्के हरे, सफेद ,भुरे रंग के वाहनों से बचें।

अंक-4 इस अंक वालों की गाड़ी नंबर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 होना चाहिये। इनको 9, 6 या 8 नंबर वाले वाहन से हानि हो सकती है। नीले या भूरे रंग के वाहन खरीदें और गुलाबी या काले रंग की वाहन न खरीदें।

अंक-5 अगर आपका मूलांक 5 है तो आपको गाड़ी नंबर का कुल योग 5 रखना चाहिये। 3, 9 या 8 नंबर वाला वाहन ना रखें। हल्के हरे, सफेद अथवा भुरे रंग का वाहन खरीदें। पीले, गुलाबी या काले रंग की वाहन से हानि हो सकती है।

अंक-6 मूलांक 6 वालों को गाड़ी नंबर का कुल योग 3, 6, या 9 रखना चाहिये। 4 या 8 नंबर से बचें। आपको हल्के नीले, गुलाबी, अथवा पीले रंग का वाहन खरीदना चाहिए। काले रंग का वाहन क्रय करने से बचें।

अंक -7 आपकी गाड़ी नंबर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 होना चाहिए। 9 या 8 नंबर वाला वाहन नही होना चाहिए। नीले, या सफेद रंग का वाहन खरीदें।

अंक-8 इस अंक वालों को अपना गाड़ी नंबर का कुल योग 8 रखना चाहिये। 1 या 4 नंबर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आपका अंक शनि का अंक है। इसलिए आप काले, नीले, अथवा बैगनी रंग के वाहन खरीदें।

अंक-9 मूलांक 9 वाले लोग आपनी गाड़ी नंबर का कुल योग 9, 3, या 6 रखे तो उन्हे अच्छा लाभ मिलता है। 5 या 7 नंबर वाले वाहन से नुकसान हो सकता है। बेहतर होगा आप लाल, या गुलाबी रंग का वाहन खरीदें।

यदि आपने कोई नया वाहन खरीदा हैं और आपके मन में हमेशा यही डर बना रहता है कि आपके या आपके परिवार के किसी भी सदस्य की थोड़ी सी भी लापरवाही से कहीं आपकी नए वाहन का एक्सीडेंट न हो जाए।

 कई बार हमारे साथ ऐसा होता है कि नए वाहन खरीदने के कुछ दिनों के भीतर ही कोई एक्सीडेंट हो जाता है। वाहन में खराबी आ जाती है। आपको भी चोट लगती है।

 आपकी अशुभ ग्रहों की दशा या अंतरदशा चल रही हैं या अनजाने में आपने अशुभ मुहूर्त में वाहन खरीद लिया हैं, तो घबराए नहीं नीचे लिखे उपाय को अपनाकर आप किसी भी तरह की वाहन दुर्घटना को टाल सकते हैं।-

 शनिवार को काले रंग की एक पोटली में काले तिल, सुपारी और सिन्दूर रखकर उसे अपने वाहन पर आगे की ओर बांध दें। इस उपाय को अपनाकर आप अपने वाहन को किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा सकते हैं।

विशेष जानकारी या कुण्डली/हस्तरेखा विश्लेषण या हस्तलिखित कुण्डली संपूर्ण विवरण सहित बनवाने हेतु या किसी भी प्रकार की समस्याओं के ज्योतिषीय एवं तांत्रिकीय सहायता एवं परामर्श हेतु हमारे प्रोफाइल नम्बर पर संपर्क कर सकते हैं।

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Thursday, February 20, 2020

श्वेतार्क गणेश साधना



श्वेतार्क गणेश साधना


हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को अनेक रूप में पूजा जाता है इनमें से ही एक श्वेतार्क गणपति भी हैं. धार्मिक लोक मान्यताओं में धन, सुख-सौभाग्य समृद्धि ऐश्वर्य और प्रसन्नता के लिए श्वेतार्क के गणेश की मूर्ति शुभ फल देने वाली मानी जाती है. श्वेतार्क के गणेश आक के पौधे की जड़ में बनी प्राकृतिक बनावट रुप में प्राप्त होते हैं. 

इस पौधे की एक दुर्लभ जाति सफेद श्वेतार्क होती है जिसमें सफेद पत्ते और फूल पाए जाते हैं  इसी सफेद श्वेतरक की जड़ की बाहरी परत को कुछ दिनों तक पानी में भिगोने के बाद निकाला जाता है तब इस जड़ में भगवान गणेश की मूरत दिखाई देती है.

इसकी जड़ में सूंड जैसा आकार तो अक्सर देखा जा सकता है. भगवान श्री गणेश जी को ऋद्धि-सिद्धि व बुद्धि के दाता माना जाता है. इसी प्रकार श्वेतार्क नामक जड़ श्री गणेश जी का रुप मानी जाती है. श्वेतार्क सौभाग्यदायक व प्रसिद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है. श्वेतार्क की जड़ को तंत्र प्रयोग एवं सुख-समृद्धि हेतु बहुत उपयोगी मानी जाती है. गुरू पुष्य नक्षत्र में इस जड़ का उपयोग बहुत ही शुभ होता है. यह पौधा भगवान गणेश के स्वरुप होने के कारण धार्मिक आस्था को ओर गहरा करता है.

श्वेतार्क गणेश पूजन | Shwetark Ganesha Pujan

श्वेतार्क गणपति की प्रतिमा को पूर्व दिशा की तरफ ही स्थापित करना चाहिए तथा श्वेत आक की जड़ की माला से यह गणेश मंत्रों का जप करने से सर्वकामना सिद्ध होती है. श्वेतार्क गणेश पूजन में लाल वस्त्र, लाल आसान, लाल पुष्प, लाल चंदन, मूंगा अथवा रूद्राक्ष की माला का प्रयोग करनी चाहिए.  

नेवैद्य में लड्डू अर्पित करने चाहिए. "ऊँ वक्रतुण्डाय हुम्" मंत्र का जप करते हुए श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ श्वेतार्क की पूजा कि जानी चाहिए पूजा के प्रभावस्वरुप प्रत्यक्ष रूप से इसके शुभ फलों की प्राप्ति संभव हो पाती है.

तन्त्र शास्त्र में भी श्वेतार्क गणपति की पूजा का विशेष विधान बताया गया है. तन्त्र शास्त्र  अनुसार घर में इस प्रतिमा को स्थापित करने से ऋद्धि-सिद्धि  कि प्राप्ति होती है. इस प्रतिमा का नित्य पूजन करने से भक्त को धन-धान्य की प्राप्ति होती है तथा लक्ष्मी जी का निवास होता है. इसके पूजन द्वारा शत्रु भय समाप्त हो जाता है. श्वेतार्क प्रतिमा के सामने नित्य गणपति जी का मन्त्र जाप करने से गणश जी  का आशिर्वाद प्राप्त होता है तथा उनकी कृपा बनी रहती है.

श्वेतार्क गणेश महत्व | Significance of Shwetark Ganesha

दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन के साथ ही श्वेतार्क गणेश जी का पूजन व अथर्वशिर्ष का पाठ करने से बंधन दूर होते हैं और कार्यों में आई रुकावटें स्वत: ही दूर हो जाती हैं. धन की प्राप्ति हेतु श्वेतरक की प्रतिमा को दीपावली की रात्रि में षडोषोपचार पूजन करना चाहिए. श्वेतार्क गणेश साधना अनेकों प्रकार की जटिलतम साधनाओं में सर्वाधिक सरल एवं सुरक्षित साधना है .

श्वेतार्क गणपति समस्त प्रकार के विघ्नों के नाश के लिए सर्वपूजनीय है. श्वेतार्क गणपति की विधिवत स्थापना और पूजन से समस्त कार्य साधानाएं आदि शीघ्र निर्विघ्न संपन्न होते हैं. श्वेतार्क-गणेश के सम्मुख मन्त्र का प्रतिदिन 10 माला ‘जप’ करना चाहिए तथा "ॐ नमो हस्ति-मुखाय लम्बोदराय उच्छिष्ट-महात्मने आं क्रों ह्रीं क्लीं ह्रीं हुं घे घे उच्छिष्टाय स्वाहा" साधना से सभी इष्ट-कार्य सिद्ध होते हैं.

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

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राजगुरु जी

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

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Wednesday, February 19, 2020

धूं धूं धूमावती ठ: ठ:





धूं धूं धूमावती ठ: ठ:


इस मंत्र से काम्य प्रयोग भी संपन्न किये जाते हैं व देवी को पुष्प अत्यंत प्रिय हैं इसलिए केवल पुष्पों के होम से ही देवी कृपा कर देती है,आप भी मनोकामना के लिए यज्ञ कर सकते हैं,जैसे-

1. राई में सेंधा नमक मिला कर होम करने से बड़े से बड़ा शत्रु भी समूल रूप से नष्ट हो जाता है

2. नीम की पत्तियों सहित घी का होम करने से लम्बे समस से चला आ रहा ऋण नष्ट होता है

3. जटामांसी और कालीमिर्च से होम करने पर काल्सर्पादी दोष नष्ट होते हैं व क्रूर ग्रह भी नष्ट होते हैं

4. रक्तचंदन घिस कर शहद में मिला लेँ व जौ से मिश्रित कर होम करें तो दुर्भाग्यशाली मनुष्य का भाग्य भी चमक उठता है

5. गुड व गाने से होम करने पर गरीबी सदा के लिए दूर होती है

6 . केवल काली मिर्च से होम करने पर कारागार में फसा व्यक्ति मुक्त हो जाता है

7 . मीठी रोटी व घी से होम करने पर बड़े से बड़ा संकट व बड़े से बड़ा रोग अति शीग्र नष्ट होता है

२-   धूमावती गायत्री मंत्र:-

ओम धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात।

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सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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छिन्नमस्ता






छिन्नमस्ता 


यह विद्या बहुत ही तीव्र है। ऐसा मैने कई बार अनुभव किया है। यह देवी शत्रु का तुरंत नाश करने वाली, वाक देने वाली, रोजगार में सफलता, नौकरी पद्दोंन्ति के लिए, कोर्ट के कैस से मुक्ति दिलाने मे सक्षम है और सरकार को आपके पक्ष मे करने वाली, कुंडिली जागरण मे सहायक, पति-पत्नी को तुरंत वश मे करने वाली चमत्कारी देवी है।

 इसकी साधना सावधान होकर करनी चाहिए क्योकि तीव्र होने के कारण रिजल्ट जल्दी ही मिल जाता है। इसके लिए आप रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से कम से कम ग्यारह माला या बीस माला मंत्र जप करना चाहिए 

मंत्र-

 “श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीयै हूं हूं फट स्वाहा:” 




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कृपा बिना यंत्र, माला और ज्ञान आदि के बिना किसी भी देवी की उपासना ना करे। जब भी किसी देवी की पुजा करें सदैव यही सोचे कि यह छोटी सी बच्ची या कोई मासूम सा मेहमान मानना चहिए, लेकिन यह बात भी  कदापि ना भूले कि यह छोटी से बच्ची अनेको अमोघ शक्ति से युक्त है। 

जिस प्रकार बच्चे के सेवा करी जाती है उसी प्रकार हर चीज का समय से ध्यान रखे तो 7-10 दिनों मे ही देवी की कृपा अवश्य मिल जाती है और हर कार्य पूर्ण होता है। दस महाविद्या मे कई ऐसी देवीयाँ है जोकि तीसरे दिन ही साधना का परिणाम दे देती है। 
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Tuesday, February 18, 2020

भैरव भैरवी लिंग योन तंत्र विद्या








भैरव भैरवी  लिंग योन तंत्र विद्या


भगवती उन्हें सद्बुद्धि दे जो योनि पूजा को हेय दृष्टि से देखते हैं ,उन्हें पता नहीं कि वह जननी शक्ति ,श्रृष्टि शक्ति को हेय दृष्टि से देख रहे हैं | महादेव उनपर कोप न करें जो योनि पूजा नहीं करते हैं ,वह नहीं जानते की इसके बिना कोई साधना पूर्ण नहीं है 

| भगवती और महादेव की अति कृपा है की उन्होंने हमें यह ज्ञान दिया और हम शक्ति साधक हुए |हमें गर्व है की हम योनिपूजक हैं ,हम भैरवी साधक हैं ,हम शक्ति साधक हैं और हम उनकी शक्ति से कुंडलिनी साधना मार्ग पर अग्रसर हो सके |इस हेतु हम उनके कृतज्ञ हैं

लिंग पूजा पूरे विश्व में होती है ,सभी बड़ी ख़ुशी से छू छू कर करते हैं , पर योनिपूजा के नाम पर नाक भौं सिकुड़ता है ,जबकि मूल उत्पत्ति कारक यही है |  इसे मूर्खता और छुद्र मानसिकता नहीं तो और क्या कहेंगे |

जो लोग काम भावना से परेशान हैं। कामुकता से पीड़ित हैं ।सदैव न चाहते हुए भी दिमाग इस ओर ही जाता है ।पूजा पाठ में भी भावना शुद्ध नहीं तह पाती ।कामुकता जगती है ।अपराधबोध उपजता है ।वह मुक्ति चाहते है ।साधना करना चाहते हैं ।

शक्ति पाना चाहते हैं ।उनके लिए भैरवी तंत्र मार्ग सर्वोत्तम है ।प्राकृतिक नियमो पर आधारित ऐसी साधना जो वह दे सकती है जो अन्य कोई साधना मुश्किल से दे पाती है ।काम उर्जा मोक्ष तक दिला सकती है ।

स्कन्द पुराण में भगवान् शिव ने ऋषि नारद को नाद ब्रह्म का ज्ञान दिया है और मनुष्य देह में स्थित चक्रों और आत्मज्योति रूपी परमात्मा के साक्षात्कार का मार्ग बताया है .स्थूल,सूक्ष्म और कारण शरीर प्रत्येक मनुष्य के अस्तित्व में हैं .

सूक्ष्म शारीर में मन और बुद्धि हैं .मन सदा संकल्प -विकल्प में लगा रहता है ;बुद्धि अपने लाभ के लिए मन के सुझावों को तर्क -वितर्क से विश्लेषण करती रहती है .कारण या लिंग शरीर ह्रदय में स्थित होता है जिसमें अहंकार और चित्त मंडल के रूप में दिखाई देते हैं .

अहंकार अपने को श्रेष्ठ और दूसरों के नीचा दिखने का प्रयास करता है और चित्त पिछले अनेक जन्मोंके घनीभूत अनुभवों,को संस्कार के रूप में संचित रखता है .आत्मा जो एक ज्योति है इससे परे है किन्तु आत्मा के निकलते ही स्थूल शरीर से सूक्ष्म और कारण शरीर अलग हो जाते हैं .कारण शरीर को लिंग शरीर भी कहा गया हैं क्योंकि इसमें निहित संस्कार ही आत्मा के अगले शरीर का निर्धारण करते हैं .

आत्मा से आकाश आकाश से वायु ;वायु से अग्नि 'अग्नि से जल और जल से पृथ्वी की उत्पत्ति शिवजी ने बतायी है पिछले कर्म द्वारा प्रेरित जीव आत्मा, वीर्य जो की खाए गए भोजन का सूक्ष्मतम तत्व है, के र्रूप में परिणत हो कर माता के गर्भ में प्रवेश करता है जहाँ मान के स्वभाव के अनुसार उसके नए व्यक्तित्व का निर्माण होता ह. 

गर्भ में स्थित शिशु अपने हाथों से कानों को बंद करके अपने पूर्व कर्मों को याद करके पीड़ित होता और और अपने को धिक्कार कर गर्भ से मुक्त होने का प्रयास करता है .जन्म लेते ही बाहर की वायु का पान करते ही वह अपने पिछले संस्कार से युक्त होकर पुरानी स्मृतियों को भूल जाता है . 

शरीर में सात धातु हैं त्वचा ,रक्त ,मांस वसा ,हड्डी ,मज्जा और वीर्य(नर शरीर में ) या रज (नारी शरीर में ). देह में नो छिद्र हैं ,-दो कान ,दो नेत्र ,दो नासिका ,मुख ,गुदा और लिंग .स्त्री शरीर में दो स्तन और एक भग यानी गर्भ का छिद्र अतिरिक्त छिद्र हैं .

स्त्रियों में बीस पेशियाँ पुरुषों से अधिक होती हैं . उनके वक्ष में दस और भग में दस और पेशियाँ होती हैं .योनी में तीन चक्र होते हैं तीसरे चक्र में गर्भ शैय्या स्थित होती है .लाल रंग की पेशी वीर्य को जीवन देती है .शरीर में एक सो सात मर्म स्थान और तीन करोड़ पचास लाख रोम कूप होते हैं .जो व्यक्ति योग अभ्यास में निरत रहता है वह नाद ब्रह्म और तीनों लोकों को सुखपूर्वक जानता और भोगता है . 

मूल आधार           स्वाधिष्ठान ,मणिपूरक ,अनाहत ,विशुद्ध ,आज्ञा और सहस्त्रार नामक साथ ऊर्जा केंद्र शरीर में है जिन पर ध्यान का अभ्यास करने से देवीय शक्ति प्राप्त होती है .

सहस्रार में प्रकाश दीखने पर वहां से अमृत वर्षा का सा आनंद प्राप्त होता है जो मनुष्य शरीर की परम उपलब्धि है .जिसको अपने शरीर में दिव्य आनंद मिलने लगता है वह फिर चाहे भीड़ में रहे या अकेले में ;चाहे इन्द्रियों से विषयों को भोगे या आत्म ध्यान का अभ्यास करे उसे सदा परम आनंद और मोह से मुक्ति का अनुभव होता है .

 मनुष्य का शरीर अनु -परमाणुओं के संघटन से बना है . जिस तरह इलेक्ट्रौन,प्रोटोन ,सदा गति शील रहते हैं किन्तु प्रकाश एक ऊर्जा मात्र है जो कभी तरंग और कभी कण की तरह व्यवहार करता है उसी तरह आत्म सूर्य के प्रकाश से भी अधिक सूक्ष्म और व्यापक है .

 यह इस तरह सिद्ध होता है की सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक आने में कुछ मिनट लगे हैं जब की मनुष्य उसे आँख खोलते ही देख लेता है .

अतः आत्मा प्रकाश से भी सूक्ष्म है जिसका अनुभव और दर्शन केवल ध्यान के माध्यम से होता है . जब तक मन उस आत्मा का साक्षात्कार नहीं कर लेता उसे मोह से मुक्ति नहीं मिल सकती . 

मोह मनुष्य को भय भीत करता है क्योंकि जो पाया है उसके खोने का भय उसे सताता रहता है जबकि आत्म दर्शन से दिव्य प्रेम की अनुभूति होती है जो व्यक्ति को निर्भय करती है क्योंकि उसे सब के अस्तित्व में उसी दिव्य ज्योति का दर्शन होने लगता है |

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   महायोगी  राजगुरु जी

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श्रीविचित्र-वीर-हनुमन्-माला-मन्त्र





श्रीविचित्र-वीर-हनुमन्-माला-मन्त्र


श्री हनुमान जी का माला मंत्र सभी प्रकार की आसुरी शक्तियों का नाश करने वाला है और शत्रु समूह को नष्ट करने वाला है ।

सभी प्रकार  की पैशाचिक बाधाओं को दूर करने वाला है और आप हमारा अनुभूत प्रयोग है आप भी इस प्रयोग को करके अनुभव करें.

प्रस्तुत 'विचित्र-वीर-हनुमन्-माला-मन्त्र' दिव्य प्रभाव से परिपूर्ण है। इससे सभी प्रकार की बाधा, पीड़ा, दुःख का निवारण हो जाता है। शत्रु-विजय हेतु यह अनुपम अमोघ शस्त्र है।

पहले प्रतिदिन इस माला मन्त्र के ११०० पाठ १० दिनों तक कर, दशांश गुग्गुल से 'हवन' करके सिद्ध कर ले।

 फिर आवश्यकतानुसार एक बार पाठ करने पर 'श्रीहनुमानजी' रक्षा करते हैं। सामान्य लोग प्रतिदिन केवल ११ बार पाठ करके ही अपनी कामना की पूर्ति कर सकते हैं।

 विनियोग, ऋष्यादि-न्यास, षडंग-न्यास, ध्यान का पाठ पहली और अन्तिम आवृत्ति में करे।

विनियोगः-

ॐ अस्य श्रीविचित्र-वीर-हनुमन्माला-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्रो भगवान् ऋषिः। अनुष्टुप छन्दः। श्रीविचित्र-वीर-हनुमान्-देवता। ममाभीष्ट-सिद्धयर्थे माला-मन्त्र-जपे विनियोगः।

ऋष्यादि-न्यासः-

श्रीरामचन्द्रो भगवान् ऋषये नमः शिरसि। अनुष्टुप छन्दसे नमः मुखे। श्रीविचित्र-वीर-हनुमान्-देवतायै नमः हृदि। ममाभीष्ट-सिद्धयर्थे माला-मन्त्र-जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे।

षडङ्ग-न्यासः-

ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः (हृदयाय नमः)। ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः (शिरसे स्वाहा)। ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः (शिखायै वषट्)। ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः (कवचाय हुं)। ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः (नेत्र-त्रयाय वौषट्)। ॐ ह्रः करतल-करपृष्ठाभ्यां नमः (अस्त्राय फट्)।
ध्यानः-
वामे करे वैर-वहं वहन्तम्, शैलं परे श्रृखला-मालयाढ्यम्।
दधानमाध्मातमु्ग्र-वर्णम्, भजे ज्वलत्-कुण्डलमाञ्नेयम्।।

माला-मन्त्रः-

"ॐ नमो भगवते, विचित्र-वीर-हनुमते, प्रलय-कालानल-प्रभा-ज्वलत्-प्रताप-वज्र-देहाय, अञ्जनी-गर्भ-सम्भूताय, प्रकट-विक्रम-वीर-दैत्य-दानव-यक्ष-राक्षस-ग्रह-बन्धनाय, भूत-ग्रह, प्रेत-ग्रह, पिशाच-ग्रह, शाकिनी-ग्रह, डाकिनी-ग्रह ,काकिनी-ग्रह ,कामिनी-ग्रह ,ब्रह्म-ग्रह, ब्रह्मराक्षस-ग्रह, चोर-ग्रह बन्धनाय, एहि एहि, आगच्छागच्छ, आवेशयावेशय, मम हृदयं प्रवेशय प्रवेशय, स्फुट स्फुट, प्रस्फुट प्रस्फुट, सत्यं कथय कथय, व्याघ्र-मुखं बन्धय बन्धय, सर्प-मुखं बन्धय बन्धय, राज-मुखं बन्धय बन्धय, सभा-मुखं बन्धय बन्धय, शत्रु-मुखं बन्धय बन्धय, सर्व-मुखं बन्धय बन्धय, लंका-प्रासाद-भञ्जक। सर्व-जनं मे वशमानय, श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सर्वानाकर्षयाकर्षय, शत्रून् मर्दय मर्दय, मारय मारय, चूर्णय चूर्णय, खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया प्रज्ञया मम कार्य-सिद्धिं कुरु कुरु, मम शत्रून् भस्मी कुरु कुरु स्वाहा। ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् श्रीविचित्र-वीर-हनुमते। मम सर्व-शत्रून् भस्मी-कुरु कुरु, हन हन, हुं फट् स्वाहा।।"

ओं रां रामाय नम:.

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

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ग्रहों को अपने अनुकूल बनाये





ग्रहों को अपने अनुकूल बनाये


कहा जाता हैं ’’ ग्रहा धिंन जगत सर्वम ’’ अर्थात प्रत्येक मनुष्य ग्रह के अधीन रहकर कार्य करता हैं और सांसारिक सुख एवं दुखः को भोगता हैं। 

किन्तु मनुष्य अपने सुख का समय तो आराम से बिता लेता हैं और जैसे ही कष्ट प्राप्त होते हैं उस समय उसे ईश्वर के शरणागत होना पड़ता हैं। अपने पूज्य श्रेष्ठ लोगों से राय मशवरा लेकर समय बिताना होता हैं। 

उसी परेशानी के हल हेतु जब वह किसी विज्ञ ज्योतिषी के पास जाता हैं तो ग्रहों के प्रतिकूल होने की जानकारी प्राप्त करता हैं।

 उन्हें अनुकूल बनाने हेतु उसे कई उपाय करना होते हैं इस हेतु आप निम्न उपाय कर ग्रहों का प्रतिकूल से अनुकूल बना सकते हैं। ये उपाय परिक्षती हैं और सहजता से कम खर्च में स्वंय के द्वारा अथवा सामान्य सहयोग लेकर किये जा सकते हैं।

सूर्य के प्रतिकूल होने पर: -

1. भगवान सूर्य नारायण को ताँबे के लौटे से सूर्योदय काल में जल चढ़ावें व 3ाोहम सूर्याय नमः का जाप करें।
2. भगवान सूर्य के पुराणोक्त, वेदोक्त अथवा बीच मंत्र से किसी एक का 28000 बार जाप करें अथवा योग्य ब्राह्मण से करवायें।

3. सूर्य यंत्र को अपने दाहिने हाथ बांधे।
4. रविवार को भोजन में नमक का सेवन न करें।
5. सूर्योदय पूर्व उठकर पवित्र हो सूर्य नमस्कार करें।

चन्द्र के प्रतिकूल होने पर: -

1. भगवान शिव की अराधना सूर्योदय काल में करें।
2. भगवान शिव के स्त्रोत पाठ करें।
3. चन्द्र के पुराणोक्त, वेदाक्त अथवा बीज मंत्र में से किसी एक का 44000 बार जाप करें अथवा जाप करवायें।
4. सोमवार का व्रत करें।
5. मोती, दूध, चांवल अथवा सफेद वस्तु का दान करें।

मंगल ग्रह के प्रतिकूल होने पर: -

1. मंगलवार का व्रत करें।

2. भगवान हनुमान जी की अराधना करें।
3. मंगल के पुराणोक्त, वेदोक्त, तंत्रोक्त अथवा बीज मंत्र का 40000 बार जाप करें।
4. मसूर की दाल, लाल वस्त्र, मूंगा आदि का दान करें।
5. हनुमान चालीसा अथवा सुन्दर काण्ड का पाठ प्रातः काल में करें।

बुध ग्रह के प्रतिकूल होने पर: -

1. भगवान गणेश जी की अराधना करें।
2. आप कोई भी बुध मंत्र 34000 बार जाप करें।
3. बुध स्त्रोत का पाठ करें।
4. मूंग की दाल, हरे वस्त्र, पन्ना आदि का दान करें।
5. विद्वानों को प्रणाम करें व सम्मान करें।

गुरू के प्रतिकूल होने पर: -

1. सूर्योदय पूर्व पीपल की पूजा करें।
2. भगवान नारायण (विष्णु) की आराधना करें व सन्तों का सम्मान करें।

शुक्र के प्रतिकूल होने पर: -

1. शुक्र स्त्रोत का पाठ करें।
2. नारीजाति का सम्मान करें।
3. सफेद चमकीले वस्त्र एवं सुगन्धित तेल आदि वस्तुओं का दान करें।
4. 3ाोम शुक्राय नमः या अन्य किसी शुक्र मंत्र का 64000 बार जाप करें।
5. औदुम्बर वृक्ष की जड़ को दाहिने हाथ पर सफेद डोरे में बाँधे।

शनि के प्रतिकूल होने पर: -

1. शनि स्त्रोत का पाठ करें एवं किसी भी शनि मंत्र का 92000 बार जाप करें।
2. जूते, चप्पल, लोहे, तेल आदि का दान करें।
3. शनिवार का व्रत करें एवं रात्रि में भोजन करें।
4. हनुमान चालीसा अथवा सुन्दर काण्ड का पाठ करें।
5. नित्य हनुमान जी के दर्शन कर कार्य प्रारम्भ करें।

राहू के प्रतिकूल होने पर: -

1. भगवान शिव की अराधना करें।
2. राहू के मंत्र का जाप करें।
3. गरीब व निम्न वर्ग के लोगों की मदद करें।
4. राहू स्त्रोत का पाठ करें।
5. सर्प का पूजन करें।

केतु के प्रतिकूल होने पर: -

1. भगवान गणेश जी की अराधना करें।
2. प्रतिदिन स्वास्तविक के दर्शन करें।
3. केतु के मंत्र का जाप करें।
4. गणेश चतुर्थी का व्रत करें।
5. लहसुनियां का दान करें।

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

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