यदि आप मुझसे कुछ सीखना चाहते है तो परिश्रम तो करना ही होगा। किसी को दो दिन में तारा चाहिए,तो किसी को ९ दिन में छिन्नमस्ता,किसी को ५ दिन में मातंगी सिद्ध करना है तो,किसी को ११ दिन में भुवनेश्वरी। कितनी बचकानी बात है. मेरा उद्देश्य किसी के ह्रदय को पीड़ित करना नहीं है.अगर किसी को दुःख हुआ हो तो हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थी हु.परन्तु कभी कभी व्यर्थ का रोग मिटाने के लिए कड़वे वचनो कि औषधि आवश्यक हो जाती है.
Friday, November 9, 2018
Wednesday, November 7, 2018
प्रत्यंगिरा और विपरीत प्रत्यंगिरा म॔त्र
प्रत्यंगिरा और विपरीत प्रत्यंगिरा म॔त्र
रक्षा व शत्रुनाश में बेजोड़
शत्रु की प्रबल से प्रबलतम तांत्रिक क्रियाओं को वापस लौटने वाली एवं रक्षा करने वाली दिव्य शक्ति है प्रत्यंगिरा। विरोधियों/दुश्मनों के प्रयोग तथा किये-कराये को नाश करने के लिए इस तंत्र का प्रयोग किया जाता है। यह स्वत: सिद्ध है।
अत: इसके प्रयोग के लिए इसे पुन: सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। बेहतर परिणाम के लिए इसके प्रयोग से पूर्व एक बार ग्यारह हजार मंत्रों का जप कर लिया जाए तो अच्छा होगा।
इस मंत्र से कई कठिन और मारक प्रयोग किए जा सकते हैं लेकिन बिना कुशल गुरु के निर्देश व देखरेख के ऐसा कदापि न करें, अन्यथा भारी नुकसान हो सकता है।
इसलिए सामान्य साधक इसका प्रयोग सिर्फ आत्मरक्षा के लिए करें। प्रतिदिन 21 मंत्रों का जप करने से विरोधी कभी आप पर हावी नहीं हो सकेंगे। आइये प्रत्यंगिरा के कुछ मंत्रों को जानें एवं अपनी रूचि अनुसार इनको साधें :
ध्यान
नानारत्नार्चिराक्रान्तं वृक्षाम्भ: स्त्रवर्युतम।
व्याघ्रादिपशुभिर्व्याप्तं सानुयुक्तं गिरीस्मरेत।।
मत्स्यकूर्मादिबीजाढ्यं नवरत्न समान्वितम।
घनच्छायां सकल्लोलम कूपारं विचिन्तयेत।।
ज्वालावलीसमाक्रान्तं जग स्त्री तयमद्भुतम्।
पीतवर्णं महावह्निं संस्मरेच्छत्रुशान्तये।।
त्वरा समुत्थरावौघमलिनं रुद्धभूविदम्।
पवनं संस्मरेद्विश्व जीवनं प्राणरूपत:।।
नदी पर्वत वृक्षादिकालिताग्रास संकुला।
आधारभूता जगतो ध्येया पृथ्वीह मंत्रिणा।।
सूर्यादिग्रह नक्षत्र कालचक्र समन्विताम्।
निर्मलं गगनं ध्यायेत् प्राणिनामाश्रयं पदम।।
माला मंत्र
ॐ ह्रीं नम: कृष्णवाससे शतसहस्त्रहिंसिनि सहस्त्रवदने महाबलेअपराजितो प्रत्यंगिरे परसैन्य परकर्म विध्वंसिनि परमंत्रोत्सादिनि सर्वभूतदमनि सर्वदेवान् वंध बंध सर्वविद्यां छिन्दि छिन्दि क्षोभय क्षोमय परयंत्राणि स्फोटय स्फोटय सर्वश्रृंखलान् त्रोटय त्रोटय ज्वल ज्वालाजिह्वे करालवदने प्रत्यंगिरे ह्रीं नम:।
विनियोग
अस्य मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषि अनुष्टप् छंद: देवीप्रत्यंगिरा देवता ॐ बीजं, ह्रीं शक्तिं, कृत्यानाशने जपे विनियोग:ढ्ढ
ध्यान
सिंहारुढातिकृष्णांगी ज्वालावक्त्रा भयंकरराम।
शूलखड्गकरां वस्त्रे दधतीं नूतने भजे।।
अन्य मंत्र
1-ॐ ह्रीं कृष्णवाससे नारसिंहवदे महाभैरवि ज्वल-ज्वल विद्युज्जवल ज्वालाजिह्वे करालवदने प्रत्यंगिरे क्ष्म्रीं क्ष्म्यैम् नमो नारायणाय घ्रिणु: सूर्यादित्यों सहस्त्रार हुं फट्।
2-ॐ ह्रीं यां कल्ययन्ति नोस्रय: क्रूरां कृत्यां वधूमिव तां ब्रह्मणास्पानिर्नुद्म प्रत्यक्कर्त्तारमिच्छतु ह्रीं ॐ
ध्यान
खड्गचर्मधरां कृष्णाम मुक्तकेशीं विवाससम्।
दंष्ट्राकरालवदनां भीषाभां सर्वभूषणाम्।
ग्रसन्तीं वैरिणं ध्यायेत् प्रेरीतां शिवतेजसा।।
विपरीत प्रत्यंगिरा
शत्रु द्वारा बारम्बार तन्त्र क्रियाओं के किये जाने पर शत्रु यदि रुकने की बजाए और गहरे तन्त्र आघात देने लगें, प्राण हरण पर ही उतर आएँ अर्थात मानव संवेदनाओं की सीमा को लाँघ कर घिनौनी हरकतों पर उतर आएँ तो उसकी क्रिया को उस पर वापस इस तरह से लौटना की शत्रु को आपके दर्द का एहसास हो इसे विपरीत प्रत्यंगिरा कहा जाता है ढ्ढ प्रत्यंगिरा और विपरीत प्रत्यंगिरा में ये भेद है की प्रत्यंगिरा शक्ति तो सिर्फ वापस लौटती है किन्तु विपरीत प्रत्यंगिरा शत्रु को ही वापस चोट पहुंचाती है और खुद की निश्चित रूप से रक्षा करती है।
इस प्रयोग के बाद शत्रु आप पर दोबारा यह प्रयोग कभी नहीं कर सकता। उसकी वह शक्ति खत्म हो जाती है।
मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भंजय भंजय फें हुं फट् स्वाहा।
विनियोग :
अस्य श्री विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्रस्य भैरव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, श्री विपरीत प्रत्यंगिरा देवता ममाभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोग:।
मालामंत्र
ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ कुं कुं कुं मां सां खां पां लां क्षां ॐ ह्रीं ह्रीं ॐ ॐ ह्रीं बां धां मां सां रक्षां कुरु ढ्ढ ॐ ह्रीं ह्रीं ॐ स: हुं ॐ क्षौं वां लां धां मां सा रक्षां कुरु ढ्ढ ॐ ॐ हुं प्लुं रक्षा कुरु ढ्ढ ॐ नमो विपरीतप्रत्यंगिरायै विद्याराज्ञी त्रैलोक्य वंशकरि तुष्टिपुष्टिकरि सर्वपीड़ापहारिणि सर्वापन्नाशिनि सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिनि मोदिनि सर्वशस्त्राणां भेदिनि क्षोभिणि तथा ढ्ढ परमंत्र तंत्र यंत्र विषचूर्ण सर्वप्रयोगादीन् अन्येषां निवर्तयित्वा यत्कृतं तन्मेस्स्तु कपालिनि सर्वहिंसा मा कारयति अनुमोदयति मनसा वाचा कर्मणा ये देवासुर राक्षसास्तिर्यग्योनि सर्वहिंसका विरुपकं कुर्वन्ति मम मंत्र तंत्र यन्त्र विषचूर्ण सर्वप्रयोगादीनात्म हस्तेन।
प्रत्यंगिरा और विपरीत प्रत्यंगिरा म॔त्र
साधना प्रयोग को करने के लिए आप सभी साधक
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राज गुरु जी
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Tuesday, November 6, 2018
संकटा योगिनी साधना.
संकटा योगिनी साधना.
पूरी साधना कर सकेतो ही प्रारम्भ करना अन्यथा और कोई साधना करो,जिनमे क्षमता हो वही साधना करे क्युके आज मै पहीले बार येसा इस लिख रहा हु "यह साधना तीव्र है".
योगिनियों का तंत्र में क्या महत्व ये तो सभी जानते है.अप्सरा और यक्षिणियों से भी ऊपर है योगिनिया,माँ का ही दूसरा स्वरुप माना जाता है इन्हे और यह सिद्धि दात्री भी मानी गयी है. इनकी साधनाए अत्यंत क्लिष्ट होती है,क्युकी योगिनिया पूर्ण समर्पण मांगती है और समर्पण ही
सफलता की कुंजी है.कभी कभी तो वर्षो साधना करने के पश्चात इनकी कृपा प्राप्ति होती है.किन्तु कुछ पाने के लिए परिश्रम तो करना ही होता है.आज हम ब्लॉग के माध्यम से आप सभी के मध्य संकटा योगीनी की एक लघु साधना रख रहे है.
ये
साधना मात्र एक दिवस की ही है.इसके माध्यम से संकटा योगिनी की साधक पर कृपा होती है तथा जीवन में आकस्मिक रूप से आने वाले संकटो का अंत हो जाता है तथा वर्तमान में चल रहे संकटो का भी
योगिनी धीरे धीरे करके अंत कर देती है.
यह साधना साधक किसी भी अष्टमी की रात्रि में,शुक्रवार की रात्रि में अथवा योगिनी सिद्धि दिवस की रात्रि में भी कर सकता है.रात्रि 10 बजे स्नान कर लाल वस्त्र धारण करे तथा लाल आसन पर उत्तर की
और मुख कर बैठ जाये।सर्व प्रथम साधना कक्ष के चारो कोनो में एक एक सरसो के तेल का दीपक जलाकर रख दे और दीपक में २ लौंग, और एक इलाइची भी डाल दे.ये दीपक साधना समाप्त होने तक जलते
रहना चाहिए।अब आसन पर बैठकर भूमि पर लाल वस्त्र बिछा दे.
वस्त्र पर किसी भी धातु का लोटा रखे ताम्बे का हो तो उत्तम है.इस लोटे को पूरा अक्षत से भर दे.अब इस लोटे पर एक कटोरी गेहू अथवा चने की दाल से भरकर रखे.और एक गोल बड़ी सुपारी को हल्दी से रंजीत कर कटोरी में स्थापित करे.जिन साधको के पास दस महाविद्या सिद्धि गोलक है,वे
लोग गोलक को हल्दी से रंजीत कर स्थापित करे और जिनके पास गोलक ना हो वह दस मुखी रुद्राक्ष का इस्तेमाल करे.
अब गोलक अथवा सुपारी का सामान्य पूजन करे.कुमकुम,हल्दी,अक्षत लाल पुष्प अर्पित करे.कोई भी मिष्ठान्न अर्पित करे.यदि घर का बना हुआ हो तो और भी उत्तम होगा।शुद्ध घृत का दीपक प्रज्वलित करे.धुप आदि भी अर्पित करे.हाथ में जल
लेकर संकल्प ले की जीवन के समस्त संकटो के निवारण हेतु में यह साधना कर रहा हु.
माँ संकटा योगिनी आप मेरे जीवन से समस्त संकटो का अंत कर दीजिये तथा भविष्य में आने वाले सभी संकटो से मेरी रक्षा करे. जल भूमि पर छोड़ दे.
इसके पश्चात रुद्राक्ष माला उपलब्ध हो
उससे निम्न मंत्र की 51 माला जप करे.वैसे इस साधना में मूंगा अथवा रुद्राक्ष माला श्रेष्ठ रहती है.प्रत्येक माला के बाद सुपारी अथवा गोलक पर हल्दी की एक बिंदी अवश्य लगाये। इस प्रकार 51
माला पूर्ण करे.माला जाप के बाद अग्नि प्रज्वलित कर मात्र 108 आहुति घृत एवं काली मिर्च से प्रदान करे.
मंत्र:-
ll ॐ ह्रीं क्लीं चण्डे प्रचण्डे हूं हूं हूं संकटा योगिन्यै नमः ll
Om Hreem Kleem Chande Prachande Hoom Hoom Hoom Sankata Yoginyayi Namah
साधना में अर्पित किया गया मिष्ठान्न अगले दिन गाय को खिला दे.कटोरी में रखा अनाज और सुपारी जल में विसर्जित कर दे.गोलक का प्रयोग किया हो तो,उसे धोकर सुरक्षित रख ले.
लोटे में भरा हुआ अक्षत किसी भी मंदिर में भूमि पर बिछे हुए
लाल वस्त्र में बांध कर अर्पित कर दे.इस प्रकार ये एक दिवसीय साधना पूर्ण होगी तथा साधक पर देवी योगिनी की कृपा होगी।इस मंत्र का एक प्रयोग और है यदि अचानक कोई ऐसी समस्या आ जाये जिसका हल न दिखाई दे रहा हो तो गाय के गोबर का कंडा जलाये और उस पर घी तथा गुड मिलाकर 108 आहुति उत्तर मुख होकर प्रदान कर दे.
योगिनी कृपा से कोई न कोई हल निकल जायेगा परन्तु इसके
पहले उपरोक्त साधना अवश्य करे तभी ये मंत्र प्रभाव में आ पायेगा।
आप सभी की साधना सफल हो इसी कामना के साथ.
मैने यहा पर सत्य और प्रामानिक विधान दिया हुआ है जो अन्य कही दिया गया नही है.इस बात को साधक अपनी समजदारी से समझ सकते है .
राज गुरु जी
तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान अनुसंधान संस्थान
महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट
(रजि.)
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*_ll दीपोत्सव अर्थात दीपावली पर क्या करें ll_*
*_ll दीपोत्सव अर्थात दीपावली पर क्या करें ll_*
दीपावली को अवश्य अमावस्या होती हैl यदि आप अपने मित्रों को प्रसन्न रखना चाहते हैं, लक्ष्मी जी की कृपा पाना चाहते हैं तो यह विधि अपनाएं - देवताओं पित्रों और लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए प्रातः स्नान करके परिवार की प्रमुख महिला चावल की खीर बनाएं, उसमें घी व मेवा डालेंl खीर के 11 भाग करेl
सबसे पहला भाग गाय को,दूसरा भाग कन्या को, तीसरा भाग बालक को, चौथा भाग चिड़ियाओं को,पांचवा भाग कौए को,छठा भाग कुत्ते को परोसेंl सातवां भाग मंदिर में रखे, आठवां भाग परांडे मटकी रखने का स्थान पर रखें, नवां भाग तुलसी थान पर रखें, दसवां भाग बिल्ली कोऔर 11 वा भाग पीपल को अर्पित करें l
धर्म ग्रंथों में इन सभी में श्री लक्ष्मी का निवास बताया गया है l कहा गया है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है, और वर्ष भर उस घर में निवास करती है ll
*ll ध्यान रहे खीर परिवार वाले नहीं खाएं क्योंकि यह दान स्वरूप है ll*
*llदीपावली के दिन यह अवश्य करें ll*
दीपावली के दिन प्रात ही गुड़ की भेली खरीद कर लाए l उसे पूजा स्थल पर रखें l रोली से भेली पर 21 स्वस्तिक बनाएं और एक नारियल को मेरी पर रखकर मन से इसकी पूजा करें l
गुड में श्री गणेश व लक्ष्मी का वास होता है l क्योंकि यह गन्ने से बनता है,अतः यह शुभ कार्य अवश्य करें l गुड़ को प्रसाद के रूप में उपयोग में लेl
*ll दीपावली के दिन यह नहीं करें ll*
ll किसी को भीख नहीं दें,उधार नहीं दे,भूमि -भवन -वाहन ,अन्न व गाय नहीं खरीदे l विवाह आदि के लिए संबंध पक्के नहीं करें l
खास ध्यान रहे कि इस दिन दही नहीं जमाए और नहीं खाएं श्री लक्ष्मी को हाथ न जोड़ें बल्कि खुले हाथ से उनका आह्वान करें l पूजा में काले नीले हरे व गहरे रंग के वस्त्र नहीं पहने ll
राजगुरु जी
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Sunday, November 4, 2018
आप सभी को धनतेरस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं
आप सभी को धनतेरस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं
।आज के दिन भगवान धन्वंतरी जी का अवतरण हुआ था।भगवान धन्वंतरि जी 13 वस्तुएँ के बाद आये इसलिए धनतेरस नाम प्रसिद्ध हुआ।आप सभी निरोगी रहें
इसलिए आप
ॐ धन्वंतराये नमः॥
मंत्र अथवा
आरोग्य प्राप्ति हेतु धन्वंतरि देव का पौराणिक मंत्र :-
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥
मंत्र का जप 13 बार अवश्य करें।
धनतेरस के दिन हमें क्या खरीदना चाहिए जिससे कि हमारे लक्ष्मी का आगमन हो।आज के दिन कुबेर लक्ष्मी की पूजा की जाती है।आज धनतेरस के दिन हमें एक नई झाड़ू खरीदनी चाहिए अगर हो सके तो यह झाड़ू 3 खरीदनी चाहिए एक झाड़ू घर पर रखनी है एक झाड़ू दीपावली के दिन सूर्योदय होने से पहले महालक्ष्मी मंदिर में या अपने घर के आसपास के मंदिर हो उसमें अपर्ण करनी है।
धनतेरस के दिन हमें कोई भी लोहे एलुमिनियम का बर्तन नहीं खरीदना चाहिए इससे हमारे घर में राहु का प्रवेश हो जाता है और धन विनाश की ओर जाता है। धनतेरस के दिन साबुत धनिया खरीद कर रखना चाहिए।
पुराने जमाने में मिठ्ठी की हांडी में से मसालेरखे जाते थे।जिसे मसाले दानी कहा करते थे।आज के दिन इसी खरीद कर लाते थे। इस मसाले दानी में नई मसाले भरे जाते थे लेकिन अब जमाना बदल गया है इसलिए हमारी जो मसाले दानी है हम उसे साफ करें और उसमें नई मसाले भरे।
आज के दिन मिठ्ठी के दीपक अवश्य खरीदने चाहिए।यदि आप साबुत धनिया पीले कपड़े में बांधकर पूजा स्थान में रखें और इसको दीपावली दिन मां लक्ष्मी के आगे रखें तो फिर गोमती चक्र के साथ रखे तो धन बढ़ने के रास्ते खुल जाते हैं।
धनतेरस के दिन अगर आप नमक खरीद कर लेकर आते हैं और उस दिन भोजन में वह नया नमक प्रयोग करते हैं तो परिवार में प्रेम के साथ ऐश्वर्य भी बढ़ता है। धनतेरस के दिन आप हरसिंगार के पुष्प या पत्ते अवश्य खरीदेंया फिर पेड़ से मांगकर लवें।
आपको श्री की प्राप्ति होगी। धनतेरस के दिन हल्दी की गांठ चांदी का बर्तन कमलगट्टे की माला और कमल का पुष्प अवश्य खरीदे।
राजगुरु जी
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Saturday, November 3, 2018
देवी छिन्नमस्ता का शत्रु नाशक मंत्र
देवी छिन्नमस्ता का शत्रु नाशक मंत्र
स्तुति
छिन्न्मस्ता करे वामे धार्यन्तीं स्व्मास्ताकम,प्रसारितमुखिम भीमां लेलिहानाग्रजिव्हिकाम,
पिवंतीं रौधिरीं धारां निजकंठविनिर्गाताम,विकीर्णकेशपाशान्श्च नाना पुष्प समन्विताम,
दक्षिणे च करे कर्त्री मुण्डमालाविभूषिताम,दिगम्बरीं महाघोरां प्रत्यालीढ़पदे स्थिताम,
अस्थिमालाधरां देवीं नागयज्ञो पवीतिनिम,डाकिनीवर्णिनीयुक्तां वामदक्षिणयोगत:,
पंचोपचार पूजन करें-धूप,दीप,फल,पुष्प,जल आदि चढ़ाएं
देवी के शिव को कबंध शिव के नाम से पूजा जाता है
ॐ कबंध शिवाय नम:
इस मंत्र का 21 बार जाप करे
मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं ह्रीं वज्र वैरोचिनिये फट
लाल रंग के वस्त्र और पुष्प देवी को अर्पित करें
नवैद्य प्रसाद,पुष्प,धूप दीप आरती आदि से पूजन करें
रुद्राक्ष की माला से 6 माला का मंत्र जप करें
काले रग का वस्त्र आसन के रूप में रखें या उनी कम्बल का आसन रखें
दक्षिण दिशा की ओर मुख रखें
अखरो व अन्य फलों का फल प्रसाद रूप में चढ़ाएं
15….मंत्र :
ॐ मलयाचल बागला भगवती माहाक्रूरी माहाकराली
राज मुख बन्धनं , ग्राम मुख बन्धनं , ग्राम पुरुष बन्धनं ,
काल मुख बन्धनं , चौर मुख बन्धनं , व्याघ्र मुख बन्धनं ,
सर्व दुष्ट ग्रेह बन्धनं , सर्व जन बन्धनं , वाशिकुरु हूँ फट स्वाहः ||
विधान :
इस मंत्र का जाप माता बागला के सामान्य नियमो का पालन करते हुए १ माला प्रतिदिन करें ११ दिनों तक और दसांश हवन करें और नित्य १ माला जाप करते रहें मंत्र जागृत हो जाए गा |
किसी भी प्रयोग को करने के लिए संकल्प लें (इछित गिनती का कम से कम ३ माला) और हवन कर दें प्रयोग सिद्ध होगा | रक्षा के लिए ७ बार मंत्र पढ़ के छाती पे और दसो दीशाओ मैं फुक मार दें , किसी भी चीज़ का भये नहीं रहे गा |
नियमित जाप से मंत्र मैं लिखे सभी कार्य स्वम सिद्ध होते हैं अलग से प्रयोग की अवशाकता नहीं है | मंत्र का ग्रहन , दिवाली आदी पर्व में जाप कर पूर्णता जागृत कर लें | नज़र दोष के लिए मंत्र को पढ़ते हुए मोर पंख से झाडे | पिला नवद्य ज़रोर अर्पित करे | ध्यान मग्न होकर जाप करने से जल्दी सिद्ध हो |
16……बन जाएगा हर बिगड़ा काम इस मंत्र से
ऐसा कई बार होता है कि हमारा कोई काम बनते-बनते बिगड़ जाता है। ऐसे में हमें काफी निराशा होती है। कई बार ऐसा भी होता है कि हमारे कार्य की सफलता उन लोगों पर टिकी होती है जिनके हमारी बिल्कुल नहीं बनती। ऐसे समय अगर नीच लिखे मंत्र का विधि-विधान से जप किया जाए तो हर बिगड़ी हुई बात बन जाती है और कार्य सिद्धि हो जाता है।
मंत्र–
ओम् श्रीं श्रीं ओम् ओम् श्रीं श्रीं हुं फट् स्वाहा।
जप विधि
सुबह जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद एकांत में कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करें। कुछ ही दिनों में इस मंत्र का असर दिखने लगेगा और आपके कार्य बनते जाएंगे।
राज गुरु जी
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मुक़द्दमे मे विजय हेतु टोटके
मुक़द्दमे मे विजय हेतु टोटके
आजकल की भागती हुयी ज़िंदगी मे कोई भी व्यक्ति कोर्ट कचहेरी अथवा मुक़द्दमे बाजी के चक्कर मे पड़कर अपना धन व वक़्त खराब करना नहीं चाहता परंतु ना चाहते हुये भी किसी ना किसी प्रकार से यदि जातक विशेष अथवा उसका परिवार इन चक्करों मे पड गया हो तो वह नीचे दिये गए कुछ उपायो को कर राहत प्राप्त कर सकता हैं |
1)अपने बच्चे का पहना हुआ पहला कपड़ा लेकर मुक़द्दमे मे जाने से मुक़द्दमा हारने की संभावना नहीं रहती हैं |
2)प्रात: काल बजरंग बाण के सात पाठ करके हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाए साथ ही देसी कपूर पर पाँच अखंडित लौंग जलाकर उसकी भस्म का तिलक अपने माथे पर लगाकर जाने से मुक़द्दमा अपने पक्ष मे होने की संभावना बढ़ जाती हैं |
3)अपने वजन के बराबर कच्चा कोयला जलप्रवाह करने से निर्दोष व्यक्ति मुक़द्दमे से बरी हो जाता हैं
4)भैरव मंदिर मे 12 किलो इमरती मिठाई का भोग लगाकर गरीबो मे बाँट देने से झूठे मुक़द्दमे से छुटकारा मिल जाता हैं |
5)झूठे आरोप के मुक़द्दमे से बचने के लिए पीली कनेर का फूल घिसकर उसका तिलक लगाकर कोर्ट परिसर मे जाने से मुक़द्दमे मे सफलता मिलती हैं |
6)कोर्ट जाने से पहले 5 अभिमंत्रित गोमती चक्र जेब मे रखने से मुक़द्दमे से राहत मिल जाती हैं |
7)कुंडली के अनुसार द्वादशेश व द्वादश भाव मे स्थित ग्रह की वस्तुए उचित मात्रा मे दान करते रहने से मुक़द्दमे संबंधी योग समाप्त हो जाते हैं |
8)दुर्गा सप्तसती के 108 पाठ करने अथवा शतचंडी पाठ करवाने से भी मुक़द्दमों व बंधनो से मुक्ति मिलती हैं |
9)माता बगलामुखी देवी का जाप,अनुष्ठान किसी योग्य ब्राह्मण के द्वारा कराने से शत्रुओ पर विजय पाकर मुक़द्दमे से राहत पायी जा सकती हैं जातक स्वयं भी बगलामुखी मंत्र के 36000 जाप कर शत्रुओ पर विजय पा सकता हैं |
10)मध्य प्रदेश दतिया मे स्थित माँ पीतांबरा देवी शक्ति पीठ पर अनुष्ठान व हवन कराने से मुक़द्दमों आदि मे राहत प्राप्त होती हैं |
11)हनुमान जी के मंदिर मे हनुमान प्रतिमा के सम्मुख प्रतिदिन एक निश्चित मात्रा मे निम्न मंत्र का सवा लाख जाप करने से निश्चय ही मुक़द्दमे मे विजय प्राप्त होती हैं |
मंत्र-
“हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट “
12)विजय प्राप्ति यंत्र के सम्मुख नियत मुहूर्त के दिन निम्न पूजन मंत्र से पूजन कर इस यंत्र को अपने संग रखने से मुक़द्दमा अपने पक्ष मे हो जाता हैं |
मंत्र-
“ ॐ नीली नीली महानीली (शत्रु पक्ष/जज का नाम ) जीभि तालु सर्वखिली,सही खिलो तत्क्षणाय स्वाहा “
13)कोर्ट केस मे जाने से पूर्व अंध आश्रम मे गुलाबजामुन
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