Friday, March 31, 2017

भुताकर्षण गोलक निर्माण विधि

सामग्री: पीपल के निचे की मिट्टी,लाल चन्दन,सिंदूर,काले तील,गुलाबजल और सादा जल।

विधि:

 निर्माण आपको अमावस्या की रात्रि में करना है. समय रात्रि दस बजे के बाद हो,दिशा दक्षिण हो ,आसन वस्त्र लाल या काले हो. अपने सामने एक पात्र में मिटटी रखे और और उसमे लाल चन्दन मिलाये,याद रखे मिटटी में कंकर न हो इसलिये उसे पहले ही सुखाकर छान कर रखे.

 अब गुलाब जल और सादा जल मिलाये।यह सब प्रक्रिया करते वक़्त" भ्रं भ्रं भूतेश्वराय " का जाप करते रहे.जब सारी सामग्री मिल जाए ,तब उसका एक गोला बना ले लड्डू की तरह।और उसे सुखा ले.जब वो सुख जाये तो उस पर सिंदूर का लेप कर दे.

अब किसी भी शनिवार की रात्रि में सामने लाल वस्त्र बिछा कर,उसपर ताम्र पात्र स्थापित करे. और उसमे सिंदूर या शमशान भस्म से बीज मंत्र ' हूं ' लिखे. और उस पर गोलक को स्थापित करे. और उसका सामान्य पूजन करे.

 भोग में गुड रखे. अब निरंतर बिना किसी माला के, मंत्र जाप करते जाये और काले तील गोलक पर अर्पण करते जाये।याद रखे इसमें तील के तेल का दीपक जलता रहे जब तक क्रिया पूर्ण न हो जाये .

अगर कोई अनुभव हो तो डरे नहि. सदगुरुदेव रक्षक है तो कैसा डर ?अगले दिन गोलक को संभाल कर रख ले.

 जब भी आप भूत साधना करे इसे सामने रखे और इसका पूजन कर मंत्र का एक सौ आठ बार जाप करे और साधना शुरू करे. लाल कपडा ,तील, भोग का गुड सभी को शमशान में फेक दे.

ताम्र पात्र को धो ले उसे उपयोग किया जा सकता है.एक बात और याद रखे आपको जिस दिन भी भूत साधना में सफलता मिल जाएगी,ये गोलक उसी वक़्त तेज हिन हो जायेगा,तब इसे अपने पास न रखे इसे भी शमशान में फेक दे कुछ दक्षिणा के साथ।जब तक सफलता न मिले इसका उपयोग किया जा सकता है. उसके बाद नहीं।जय माँ

मंत्र:

 ॐ हूं भ्रं भ्रं भ्रं भूतेश्वराय भूताकर्षण कुरु कुरु भ्रं भ्रं भ्रं हूं फट

राज गुरु जी

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Tuesday, March 28, 2017

सम्मोहन काजल निर्माण विधि-

यह प्रयोग दिवाली की रात्रि को करे। रात्रि 9 बजे के माँ के सामने एक घी का दीपक जलाये और उसकी लो को देकते हुए निम्न मंत्र की 11 माला रुद्राक्ष माला से करे।

 11 माला हो जाने के बाद उस दीपक पर एक कटोरी को इस तरह सेट कर दे की सारा काजल उस कटोरी में आ जाये। याद रखे ये दीपक रात्रि 9 से सुबह 4 बजे तक जलना चाहिए।

फिर सुबह सरे काजल को किसी शीशी में रख ले। और जब भी आपको सम्मोहन करना हो तब मंत्र का 11 बार जाप करके काजल को आँख में लगा ले। इस काजल से सभी आपके अनुकूल हो जायेंगे।

यहाँ तक जब आप कोई देवी देवता की साधना करे तब भी आप इसे आँखों में लगा ले ये दिव्या काजल उन्हें भी आपकी और आकर्षित करेगा। नोकरी के इंटरव्यू में जाना हो तब भी लगा सकते है।

रोज़ चाहे तो रोज़ लगाये इससे हर मिलने वाला व्यक्ति आपके अनुकूल हो जायेगा। मात्र एक दिवस का प्रयोग आपके लिए अत्यंत ही लाभकारी होगा।

मेरा अनुभूत है ये प्रयोग,ये काजल खासकर अप्सरा साधना में बहुत अच्छे परिणाम देता है।ऐसा कई साधको का अनुभव रहा है।अतः आप भी इससे लाभान्वित हो

मंत्र:

||ॐ ह्री सर्व सम्मोहिनी स्वाहा ||

||om hreem sarva sammohini swahaa||

राज गुरु जी

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Monday, March 27, 2017

विजय प्राप्ति बगलामुखी साधना (न्यायालय में विजय प्राप्ति हेतु )

अक्सर विरोधी हमें कोर्ट के चक्कर में उलझा देते है।अकारण ही हम उसमे इतना उलझते जाते है की,सम्पूर्ण जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है।और हम चाहकर भी उस परेशानी से निकल नहीं पाते है।

तब आवश्यकता है की हम साधना कर जगदम्बा से सहायता प्राप्त करे।माँ पीताम्बरा अत्यंत करुणामयी है। आप अपनी प्यारी माँ से सहायता मांगे और माँ आप पर कृपा न करे ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता है।

प्रस्तुत साधना इसी विषय पर है,जिसे संपन्न करने पर मुक़दमे से सम्बंधित परेशानियों में शीघ्र ही लाभ मिलता है।जिस पर भी केस चल रहा हो वो इस प्रयोग को कर सकता है अन्यथा उस व्यक्ति के लिये संकल्प लेकर कोई भी इसे कर सकता है।

साधना किसी भी रविवार रात्रि १० के बाद आरम्भ करे,आसन वस्त्र पीले हो,दिशा उत्तर या पूर्व हो।सामने बजोट पर पिला वस्त्र बिछा दे,और उस पर बगलामुखी यन्त्र या चित्र स्थापित करे।

अब भोज पत्र पर हल्दी की स्याही से बीज मंत्र

" ह्लीं "

लिखे और उसे यन्त्र के सामने रख दे।अब सरसों के तेल का दीपक जलाये और यन्त्र तथा भोज पत्र का सामान्य पूजन करे।भोग में कोई पिली वस्तु अर्पण करे जिसे केस वाले व्यक्ति को नित्य खा लेना है।

अब निम्न मंत्र पड़ते हुए एक चुटकी हल्दी यन्त्र तथा भोज पत्र पर अर्पण करे।इसी प्रकार हर मंत्र को ३६ बार पड़ना है और हल्दी अर्पण करना है।याद रखे एक मंत्र को ३६ बार पड़े और एक चुटकी हल्दी अर्पण करे।

ॐ बगलामुखी देव्ययी नमः

ॐ पीताम्बरा देव्ययी नमः

ॐ पीतवर्णा देव्ययी नमः

ॐ सर्व स्तंभिनी देव्ययी नमः

ॐ सर्व शत्रु नाशिनी देव्ययी नमः

ॐ सर्व उपद्रव नाशिनी देव्ययी नमः

ॐ सर्व रक्षिणी बगला देव्ययी नम:

इसके बाद निम्न मंत्र की हल्दी माला पिली हकिक माला या रुद्राक्ष माला से ११ माला जाप करे।इस प्रकार साधना नित्य ११ दिनों तक करे।

संकल्प अवश्य ले की आप ये साधना क्यों कर रहे है।साधना के बाद भोज पत्र को किसी तावीज़ में धारण कर ले।

जो हल्दी का चूर्ण नित्य अर्पण किया था उसे एकत्र करके रख ले और मस्तक पर लगाये माँ आपको अपनी गोद में उठाकर बचा लेगी।बस माँ के समक्ष करुण पुकार करना न भूले।

मंत्र:

 ॐ हूं ह्लीं हूं फट

 ( OM HOOM HLEEM HOOM PHAT)

जय पीताम्बरा

राज गुरु जी

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Friday, March 24, 2017

!! प्रचंड वीरभद्र साधना !!

हम चाहे कितना भी सावधानी से जीवन व्यतीत करे.किन्तु जाने अनजाने हमारे शत्रु बन ही जाते है.इसका कोई भी कारण हो सकता है.परन्तु शत्रुता कैसी भी हो वो कष्ट का कारण बनती ही है.

शत्रु के कारण सतत मानसिक,तथा आर्थिक कष्ट का अनुभव होता रहता है.

तो क्या हम शत्रु से हार मान  ले ?

नहीं कदापि नहीं 

जो हार मान  जाये वो साधक नहीं हो सकता।साधक तो पाषाण को तोड़कर जलधार प्रगट करने की क्षमता रखता है.

शत्रु आपको विचलित कर सकता है किन्तु परास्त नहीं।क्युकी आपके पास साधना की शक्ति है.इस विषय पर आपके समक्ष वीरभद्र साधना प्रस्तुत है.

इस साधना के माध्यम से आप शत्रु के हर षड़यंत्र को विफल कर सकते है.साथ ही उसे स्वयं से दूर जाने पर विवश कर सकते है.

प्रस्तुत साधना से केवल आप शत्रु पर विजय प्राप्त करे,किसी का अनर्थ करने की चेष्टा न करे अन्यथा प्रयोग की तीव्रता से आपका अनिष्ट हो सकता है.अतः संकल्प केवल विजय प्राप्ति का हो इसके सिवा और कोई नहीं।

साधना आप किसी भी रविवार या अमावस्या की रात्रि ११ के बाद आरम्भ कर सकते है.आपका मुख दक्षिण की और हो.अपने सामने बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर शिवलिंग स्थापित करे.

वीरभद्र शिव का ही रौद्र रूप है अतः आपको किसी अन्य विग्रह आदि की आवश्यकता नहीं है.आपके आसन वस्त्र लाल होना आवश्यक है। भगवान  शिव का सामान्य पूजन करे.तील के तेल का दीपक लगाये।तथा भोग में कोई भी मिठाई अर्पण करे.

भगवान  शिव के समक्ष प्रार्थना करे वे वीरभद्र रूप धारण कर हमारे जीवन से शत्रु का नाश करे तथा उसे पराजित करे.इसके बाद वीरभद्र मंत्र की २१ माला जाप रुद्राक्ष माला से करे.

मंत्र में जहा अमुक आया है वहा  शत्रु का नाम ले। जाप के बाद पूर्ण ह्रदय से प्रार्थना करे तथा प्रसाद स्वयं ग्रहण करे.यह क्रम तीन दिनों तक अवश्य करे.

अंतिम दिन अग्नि प्रज्वलित कर घी तथा काली  मिर्च को मिलाकर  १०८ आहुति प्रदान करे.बाद में यज्ञ की भस्म को जल प्रवाह कर दे,थोड़ी सी भस्म संभाल  कर रख ले,और शत्रु के द्वार पर मंत्र पड़कर भस्म फेक आये.

अगर ये संभव न हो तो उसके घर की और मुख करके भस्म फुक मारकर मंत्र पडत हुए उड़ा  दे.इस प्रकार ये साधना पूर्ण होती है,तथा साधक को शत्रु से मुक्ति प्रदान कर सुखी करती है.

मंत्र : ॐ ह्रौं हूं वीरभद्राय अमुक शत्रु नाशय नाशय हूं ह्रौं फट 

OM HROUM HOOM VEERBHADRAAY AMUK SHATRU NAASHAY NAASHAY HOOM HROUM PHAT

माँ आप  सबका कल्याण करे तथा आप सभी को साधना में सफलता प्रदान करे,इसी कामना के साथ 

राज गुरु जी

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Thursday, March 23, 2017

शिव शक्ति महाअघोर कवच

और लघु प्रयोग

मित्रो जिन साधको ने " शिव शक्ति महाअघोर कवच " मंगवाए थे,कवच निर्मित होते ही उन्हें कवच भेजने कि क्रिया आरम्भ कर दी जायेगी।

आपको कवच प्राप्ति के बाद साधना के लिए अधिक प्रतीक्षा न करना पड़े इसलिए यहाँ महाअघोर कवच पर किये जाने वाले कुछ लघु प्रयोग दिए जा रहे है,ताकि आप कवच प्राप्त होते ही उस पर प्रयोग कर सके.अतः आपकी सेवा में कुछ लघु प्रयोग प्रस्तुत है.

१ निरंतर धन लाभ हेतु

आप ये प्रयोग अपनी नित्य पूजा में सम्मिलित कर सकते है.अपने सामने " शिव शक्ति महाअघोर कवच " को स्थापित करे और आपको कवच के साथ जो " सिद्धिप्रद रुद्राक्ष " दिया जा रहा है.उस रुद्राक्ष को कवच के ऊपर रखे या कवच के पास उससे सटाकर रख दे रुद्राक्ष इस प्रकार रखे कि वो कवच से स्पर्श होता रहे.अब सिद्धिप्रद रुद्राक्ष पर त्राटक करते हुए,

हूंहूं धनलक्ष्मी आकर्षय आकर्षय हूंहूं

मंत्र का जाप करे त्राटक आपको नित्य ५ मिनट  तक करना है,या आप रुद्राक्ष माला से जाप करते हुए एक माला करे और त्राटक करते रहे.इस प्रयोग से आपके जीवन में कभी भी धन कि रूकावट नहीं आएगी।

२  तंत्र बाधा निवारण

किसी भी समय ये प्रयोग किया जा सकता है.अपने बाये हाथ में कवच और रुद्राक्ष को रखकर मुट्ठी बांध ले.मुट्ठी जितनी हो सके कसकर बांधे।और अपने सामने एक पात्र में थोडा जल रखे.अब रुद्राक्ष माला से

रं रं हूं हूं फट

५ माला जाप करे.इसके बाद जल में फुक मार दे और कवच तथा रुद्राक्ष को पात्र से स्पर्श कराते  हुए ११ बार पुनः उपरोक्त मंत्र का जाप करे.फिर ये जल जिसे पिलाया जायेगा उस पर किया गया तंत्र प्रयोग तुरंत नष्ट हो जायेगा।आप इस जल को घर में भी छिट सकते है इससे घर नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षित हो जायेगा।

३ बुरे सपनो के नाश हेतु

बाये हाथ में कवच और एक सुपारी रखे और दाये हाथ से ह्रदय मुद्रा का प्रदर्शन करते हुए. " ॐ हूं वज्रेश्वर हूं " मंत्र का २१ बार जाप करे.इसके बाद इस सुपारी को जिसे बुरे स्वप्न  आते हो उसके तकिये के निचे रात  को सोते समय रख दे.और अगले दिन इस सुपारी को घर के बाहर फिकवा दे.समस्या का निवारण हो जायेगा।

४ उदर रोग नाश हेतु

किसी लाल वस्त्र पर एक पात्र स्थापित करे और उसे भस्म से भर दे.इस भस्म पर कवच स्थापित कर दे.और बाये हाथ में सिद्धिप्रद रुद्राक्ष रखे,अब

" ॐ ह्रीं शूलधारिणी ह्रीं फट "

मंत्र का रुद्राक्ष माला से २१ माला जाप करे प्रत्येक माला के बाद रुद्राक्ष को कवच से स्पर्श कराये।जब जाप पूर्ण हो जाये रुद्राक्ष और कवच संभाल  कर रख दे.और भस्म जिसे उदर रोग हो उसे नित्य एक चुटकी  सेवन कराये तथा कुछ भस्म पेट पर भी लगाये धीरे धीरे उदर रोग समाप्त होने लगेगा।

५ विपदा नाश हेतु

कभी कभी जीवन में एक के बाद एक विपदा आती रहती है.ऐसी समस्या के निवारण हेतु रविवार रात्रि १० के बाद कवच को लाल वस्त्र पर स्थापित करे.कवच का सामान्य  पूजन करे.और ११ माला रुद्राक्ष माला से

" ॐ हूं ह्लीं हूं फट "

 मंत्र कि ११ माला संपन्न करे.जाप के बाद अग्नि प्रज्वलित कर,सरसो के तेल और काली मिर्च से २५१ आहुति प्रदान करे.

इन प्रयोगो में सभी जाप वाचिक या उपांशु होंगे।मित्रो भविष्य में भी कई प्रयोग समय समय पर दिए जायेंगे।साधनाओ से सम्बंधित किसी भी प्रश्न के उत्तर हेतु आप सादर आमंत्रित है.

राज गुरु जी

महाविद्या आश्रम

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Wednesday, March 22, 2017

सिद्ध योगिनी साधना

तंत्र में सदा से योगिनीयो का अत्यंत महत्व रहा है.तंत्र अनुसार योगिनी आद्य शक्ति के सबसे निकट होती है.माँ योगिनियो को आदेश देती है और यही योगिनी शक्ति साधको के कार्य सिद्ध करती है.मात्र लोक में यही योगिनिया है जो माँ कि नित्य सेवा करती है.

योगिनी साधना से कई प्रकार कि सिद्धियाँ साधक को प्राप्त होती है.प्राचीन काल में जब तंत्र अपने चरम पर था तब योगिनी साधना अधिक कि जाती थी.परन्तु धीरे धीरे इनके साधको कि कमी होती गयी और आज ये साधनाये बहुत कम हो गयी है.

इसका मुख्य कारण है समाज में योगिनी साधना के प्रति अरुचि होना,तंत्र के नाम से ही भयभीत होना,तथा इसके जानकारो का अंतर्मुखी होना।इन्ही कारणो से योगिनी साधना लुप्त सी होती गयी.परन्तु आज भी इनकी साधनाओ के जानकारो कि कमी नहीं है.आवश्यकता है कि हम उन्हें खोजे और इस अद्भूत ज्ञान कि रक्षा करे.

मित्रो आज हम जिस योगिनी कि चर्चा कर रहे है वो है " सिद्ध योगिनी " कई स्थानो पर इन्हे सिद्धा योगिनी या सिद्धिदात्री योगिनी भी कहा गया है.ये सिद्दी देने वाली योगिनी है.

जिन साधको कि साधनाये सफल न होती हो,या पूर्ण सफलता न मिल रही हो.तो साधक को सिद्ध योगिनी कि साधना करनी चाहिए।इसके अलावा सिद्ध योगी कि साधना से साधक में सतत प्राण ऊर्जा बढ़ती जाती है.और साधना में सफलता के लिए प्राण ऊर्जा का अधिक महत्व होता है.

विशेषकर माँ शक्ति कि उपासना करने वाले साधको को तो सिद्ध योगिनी कि साधना करनी ही चाहिए,क्युकी योगिनी साधना के बाद भगवती कि कोई भी साधना कि जाये उसमे सफलता के अवसर बड़ जाते है.साथ ही इन योगिनी कि कृपा से साधक का गृहस्थ जीवन सुखमय हो जाता है.

जिन साधको के जीवन में अकारण निरंतर कष्ट आते रहते हो वे स्वतः इस साधना के करने से पलायन कर जाते है.आइये  जानते है इस साधना कि विधि।

आप ये साधना किसी भी कृष्ण पक्ष कि अष्टमी से आरम्भ कर सकते है.इसके अलावा किसी भी नवमी या शुक्रवार कि रात्रि भी उत्तम है इस साधना के लिए.साधना का समय होगा रात्रि ११ के बाद का.आपके आसन तथा वस्त्र लाल होना आवश्यक है.

इस साधना में सभी वस्तु लाल होना आवश्यक है.अब आप उत्तर कि और मुख कर बैठ जाये और भूमि पर ही एक लाल वस्त्र बिछा दे.वस्त्र पर कुमकुम से रंजीत अक्षत से एक मैथुन चक्र का निर्माण करे.

इस चक्र के मध्य सिंदूर से रंजीत कर " दिव्याकर्षण गोलक " स्थापित करे  जिनके पास ये उपलब्ध न हो वे सुपारी का प्रयोग करे.इसके बाद सर्व प्रथम गणपति तथा अपने द्गुरुदेव का पूजन करे.

इसके बाद गोलक या सुपारी को योगिनी स्वरुप मानकर उसका पूजन करे,कुमकुम,हल्दी,कुमकुम मिश्रित अक्षत अर्पित करे,लाल पुष्प अर्पित करे.

भोग में गुड का भोग अर्पित करे,साथ ही एक पात्र में अनार का रस अर्पित करे.तील के तेल का दीपक प्रज्वलित करे.इसके बाद एक माला नवार्ण मंत्र कि करे.जाप में मूंगा माला का ही प्रयोग करना है या रुद्राक्ष माला ले.

नवार्ण मंत्र कि एक माला सम्पन करने के बाद,एक माला निम्न मंत्र कि करे,

ॐ रं रुद्राय सिद्धेश्वराय नमः

इसके बाद कुमकुम मिश्रित अक्षत लेकर निम्न लिखित मंत्र को एक एक करके पड़ते जाये और थोड़े थोड़े अक्षत गोलक पर अर्पित करते जाये।

ॐ ह्रीं सिद्धेश्वरी नमः

ॐ ऐं ज्ञानेश्वरी नमः

ॐ क्रीं योनि रूपाययै नमः

ॐ ह्रीं क्रीं भ्रं भैरव रूपिणी नमः

ॐ सिद्ध योगिनी शक्ति रूपाययै नमः

इस क्रिया के पूर्ण हो जाने  के बाद आप निम्न मंत्र कि २१ माला जाप करे.

ॐ ह्रीं क्रीं सिद्धाययै सकल सिद्धि दात्री ह्रीं क्रीं नमः

जब आपका २१ माला जाप पूर्ण हो जाये तब घी में अनार के दाने मिलाकर  १०८ आहुति अग्नि में प्रदान करे.ये सम्पूर्ण क्रिया आपको नित्य करनी होगी नो दिनों तक.आहुति के समय मंत्र के अंत में स्वाहा  अवश्य लगाये।

अंतिम दिवस आहुति पूर्ण होने के बाद एक पूरा अनार जमीन पर जोर से  पटक कर फोड़ दे और उसका रस अग्नि कुंड में निचोड़ कर अनार उसी कुंड में डाल दे.अनार फोड़ने से निचोड़ने तक सतत जोर जोर से बोलते रहे,

सिद्ध योगिनी प्रसन्न हो।

साधना समाप्ति के बाद अगले दिन गोलक को धोकर साफ कपडे से पोछ ले और सुरक्षित रख ले.कपडे का विसर्जन कर दे.

नित्य अर्पित किया गया अनार का रस और गुड साधक स्वयं ग्रहण करे.सम्भव हो तो एक कन्या को भोजन करवाकर दक्षिणा दे,ये सम्भव न हो तो देवी मंदिर में दक्षिणा के साथ मिठाई का दान कर दे.

इस प्रकार ये दिव्य साधना पूर्ण होती है.निश्चय ही अगर साधना पूर्ण मनोभाव और समर्पण के साथ कि जाये तो साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते है.और जीवन को एक नविन दिशा मिलती ही है.तो अब देर कैसी आज ही संकल्प ले और साधना के लिए आगे बड़े.

राज गुरु जी

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अघोर महालक्ष्मी दरिद्रता नाशक प्रयोग

जिन साधको ने " शिवशक्ति महाघोर कवच " मंगवाए थे उन सभी को कवच प्राप्त हो चुके है.अतः कवच पर कि जाने वाली साधना अब ब्लॉग पर आरम्भ कि जा  रही है.

मित्रो लक्ष्मी का जीवन में क्या महत्व है ये तो सभी जानते है.परन्तु परिश्रम के बाद भी यदि लक्ष्मी दूर रहे तो मनुष्य को साधना मार्ग का आश्रय लेना ही चाहिए।

क्युकी एक साधक पूर्णता प्राप्त करना चाहता है.और संसार में घुट घुट कर जीना एक साधक का काम नहीं है.साधक तो हर समस्या कि छाती पर पैर रखकर आगे निकल जाता है.और समस्त संसार का भोग करते हुए अंत में अपने इष्ट में लीन  हो जाता है.

संसार के भोग के लिए निश्चय ही लक्ष्मी कि कृपा कि आवश्यकता है.क्युकी जिस पर लक्ष्मी प्रसन्न न हो उसे धन तो मिल ही नहीं सकता साथ ही धन के अभाव के कारण मनुष्य कुण्ठा भाव से भी ग्रसित हो जाता है.और रही सही कसर  हमारा समाज पूरी कर देता है.

निरंतर आपको आपकी निर्धनता के बारे में कह कह कर.परन्तु आप स्मरण रखे प्रकृति ने यदि आपके भाग्य में कोई दुःख लिखा है तो उस दुःख को सुख में परिवर्तित करने का मार्ग भी इसी प्रकृति में ही है.

तंत्र में शिव कहते है कि मनुष्य को वही दुःख प्राप्त होता है जिसका हल पहले से निकाला  जा चूका है.बस मनुष्य उस हल को खोज नहीं पाता  है और फिर उसे भाग्य मानकर बैठ जाता है.कितनी सुलझी हुई बात कही है शिव ने.और एक साधक कभी भाग्य का रोना नहीं रोता है.

साधक तो भाग्य को परिवर्तित करने कि क्षमता रखता है.आपके हाथो में तंत्र रूपी कुंजी है जिसके माध्यम से आप भाग्य पर लगे ताले बड़ी सरलता से खोल सकते है.बस आवश्यकता है परिश्रम कि और समर्पण कि.

मित्रो आज जो आपको साधाना दी जा रही है.इस साधना के माध्यम से आपके जीवन में धन आगमन के मार्ग स्वतः खुल जायेंगे।साथ ही यदि किसी ने आपके रोजगार पर कोई बंधन कर दिया है तो वो भी स्वतः ही दूर हो जायेगा।धन कि समस्या का हल होगा एवं आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

प्रस्तुत प्रयोग  अघोर मार्ग का तीव्र प्रयोग है जिसका प्रभाव होता ही है.यहाँ एक बात  और कहना चाहूंगा कि आप जब भी कोई साधना करे.अपने द्वारा जपे जा रहे मंत्र पर और कि जा रही क्रिया पर पूर्ण विश्वास रखे.तील मात्र भी शंका हो तो सारी  क्रिया और जप व्यर्थ चला जाता है.

अतः साधना में विश्वास रखे.आईये अब हम  विधि कि और चलते है.

ये साधना आप किसी भी शुक्रवार से कर सकते है जो कि आपको अगले शुक्रवार तक अर्थात ८ दिनों तक करनी होगी।साधना के एक दिन पहले आप लाल कनेर अथवा नीम वृक्ष को निमंत्रण दे आये ये क्रिया आपको गुरूवार कि शाम को करनी होगी।

दोनों में से किसी एक वृक्ष के पास जाये अब वृक्ष का सामान्य पूजन करे और एक लोटा जल अर्पित करे और कुछ मिठाई का भोग रख तेल का दीपक लगाये अब हाथ में हल्दी मिश्रित अक्षत ले और कहे

 " है वृक्ष राज में कल से अघोर महालक्ष्मी दरिद्रता नाशक प्रयोग  आरम्भ करने जा रहा हु.मुझे उस प्रयोग में आपकी एक टहनी कि आवश्यकता है अतः में कल आपकी टहनी लेने आउंगा,और अक्षत वृक्ष पर अर्पित कर दे.अगले दिन प्रातः कोई अच्छी सी टहनी तोड़ लाये साथ ही वृक्ष के हाथ जोड़कर आर्शीवाद भी ले.अब इस लकड़ी को धोकर इसका सामान्य पूजन करे.

और

" ॐ अघोरेश्वराय हूं फट "

 मंत्र का जाप करते हुए लकड़ी पर सिन्दूर मिश्रित अक्षत अर्पित करे.ये क्रिया १०८ बार करे और लकड़ी को सुरक्षित रख दे.

अब शुक्रवार रात्रि ११.३० बजे के करीब आप साधना आरम्भ कर सकते है.स्नान कर लाल वस्त्र धारण करे,तथा उत्तर कि और मुख करके लाल आसन पर बैठ जाये।भूमि पर बाजोट रखे तथा उस पर लाल वस्त्र बिछा दे.इस पर

" शिव शक्ति महाअघोर कवच रखे "

अब कवच के ऊपर ही हल्दी मिश्रित अक्षत के एक ढेरी  बनाये।ढेरी  इतनी बड़ी होनी चाहिए कि कवच पूरा ढक जाये।अब इस ढेरी पर एक सुपारी स्थापित करे सुपारी को सिंदूर से रंजीत करके ही स्थापित करे.

अब सर्व प्रथम सद्गुरु तथा गणपति का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करे.इसके बाद सुपारी का लक्ष्मी मानकर सामान्य पूजन करे.कुमकुम,हल्दी अक्षत अर्पित करे.खीर अथवा किसी भी मिष्ठान्न का भोग अर्पित करे.तील के तेल  का दीपक जलाये।अब

 " आओ लक्ष्मी विराजो कष्ट हरो आदेश अघोरेश्वर को "

 बोलते हुए २१ बार  सुपारी पर सफ़ेद तील अथवा अक्षत अर्पित करे.इस क्रिया के बाद जो लकड़ी आप लाये थे उसे अपने दाहिने हाथ में रखे और पास में ही एक कटोरी में अक्षत भरकर उस कटोरी में सिद्दीप्रद रुद्राक्ष स्थापित कर दे.

अब निम्न लिखित अघोर शाबर मंत्र को एक बार पड़े,पड़ते समय लकड़ी को सिद्धिप्रद रुद्राक्ष से स्पर्श कराकर रखे और जैसे ही मंत्र पूर्ण हो लकड़ी को सुपारी से स्पर्श कराये।

बस यही क्रिया आपको बार बार सतत २ घंटे करनी होगी।मंत्र को पड़ना है और सुपारी से स्पर्श कराना है.जब ये क्रिया पूर्ण हो जाये तो भगवान अघोरेश्वर और लक्ष्मी से दरिद्रता दूर करने कि प्रार्थना करे.

नित्य ये क्रिया आपको करनी होगी।साधना के अंतिम दिन जाप पूर्ण हो जाने के बाद.घृत में गूगल,तथा सफ़ेद तील मिलाकर २१ आहुति अग्नि में प्रदान करे.

आहुति पूर्ण हो जाने के बाद एक बार पुनः मंत्र पड़े और निम्बू काटकर अग्नि में निचोड़ दे.इस प्रकार ये साधना पूर्ण होती है.

अगले दिन रुद्राक्ष और कवच को रख ले.वस्त्र तथा अक्षत विसर्जित कर दे.आप जो लकड़ी लाये थे पुनः उसी वृक्ष के पास जाकर रख आये वृक्ष का पूर्व कि  भाती  ही पूजन करे भोग अर्पित करे तथा टहनी प्रदान करने के लिए धन्यवाद दे.

मंत्र

लागी लागि लागी अघोर धुन लागी,आयी धनलछमी भागी भागी भागी,घर मोय आईके दरिद्रता मिटाये,ना करे कहा तो अघोर दंड खाये,आदेश अघोरेश्वर को आदेश

इस प्रकार आपकी ये दिव्य साधना पूर्ण होती है जो कि आपके जीवन को बदलकर रख देने में सक्षम है.आवश्यकता है कि आप साधना को पूर्ण निष्ठा से करे.

किसी भी प्रश्न के लिए मेल करे.तथा अपनी और से मंत्र में कोई परिवर्तन ना करे.जैसा लिखा गया है वैसा ही करे.

राज गुरु जी

महाविद्या आश्रम

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...