Wednesday, June 12, 2019

शत्रु को नष्ट करने का तंत्र प्रयोग





शत्रु को नष्ट करने का तंत्र प्रयोग




दोेस्तो,इस दुनिया में कोई विरला हीं होगा जिस के कोई शत्रु न हों
इस लिए मेरा ये उपाय सभी की लिए हैं


कहते है की क़ामयाबी की साथ शत्रु फ्री मैं मिलते हैं , हम यदि अच्छा जीवन यपान कर रहे है, तो लोग अनायास हीं शत्रु बन जाते है.


शत्रु चाहें केसा भी हों.., वो आपके विरूद अपना 100% देता हैं ....


कोई तंत्र प्रयोग करता हैं , कोई किसी ना किसी तरह का सडयंत्र रचता हैं

आज की इस प्रयोग से आप अपने शत्रु पर हर तरह से लगाम लगा सकती  हैं

प्रयोग पर आने से पहले एक चेतावनी दे रहा हुँ

" सिर्फ आजमाने वाले.., और  व्यर्थ में किसी को परेशान करने के उद्देस्य से इस प्रयोग को न करे., अन्यथा  भगवती कुपिेत हो कर  उसी का भक्षण  कर लेती हैं
अब प्रयोग पर आते है


बुधवार की रात्रि में ११ नींबू लेकेर माँ के तस्वीर के सामने  सिंदुअर  में सरसो का तेल मिला कर सभी ११ नीम्बुओं पर 
किसी कील  से अपने शत्रु का नाम लिखे ओर  इस मंत्र की ३ माला जाप करें ., 

जाप के बाद इन नीम्बुओं कों कहि खाली ज़मीन मैं गाड़ देवे
इससे शत्रु आपका कुछ नही बिगाड़ पायेगा 



मंत्र:

 " ओम क्रीं शत्रु नाशिनी  क्रीं फट "





और ज्यादा जानकारी समाधान और उपाय या रत्न या किसी भी प्रकार की विधि या मंत्र प्राप्ति के लिए संपर्क करें और समाधान प्राप्त करें 

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

.
किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

                     08601454449

व्हाट्सप्प न०;- 9958417249


श्री हनुमान जी का अद्द्भुत प्रयोग






श्री हनुमान जी का अद्द्भुत प्रयोग






कल मैंने एक प्रयोग के बारे में बात की थी , यह प्रयोग यदि पारद हनुमान पर किया जाए तो इसका फल सर्वोत्तम और मूंगे की हनुमान प्रतिमा पर उत्तम प्राप्त होता है .इस प्रयोग में हनुमान जी की पूजन की तांत्रिक विधि जो गुप्त आदि गुप्त है , उजागर की गयी है
किसी हनुमान मंदिर में भी ये किया जा सकता है  .परन्तु ऐसे हनुमान जी की फोटो के समक्ष न करे .


आलोकिक शक्ति , भक्ति और क़र्ज़ मुक्ति के लिए ये प्रयोग अति उत्तम है .



अपने कार्य का संकल्प लेकर यह प्रयोग सप्ताह में २ बार , मँगल एवं शनिवार को करते रहे .


सिद्ध पारद हनुमान प्रतिमा , मूंगे की प्रतिमा या किसी हनुमान प्रतिमा के सामने मन में हनुमान जी का ध्यान करे और दाए हाथ में लाल पुष्प , सिंदूर एवं चावल लेकर संकल्प करे ! सर्सो के तेल का आटे का दीपक जलावें , यह दीपक चावल के आसान पे रखे !

 गुग्गल की धूप देवे .

अब प्रतिमा को गंगाजल से स्नान करवाये , और अपना पाठ आदि करे ! ५ माला रुद्राक्ष की माला पर यह मंत्र जापे !

" हं हनुमंते रुद्रात्मकाय हुम फ़ट "


जाप के बाद हाथ मैं गंगाजल लेकर अपना सम्पूर्ण फल हनुमान जी को अर्पित कर देवे .और हाथ
का जल धरती पर छोड देवे !


अब ऊपर लिखा मंत्र बोलकर ज़ोर से ताली बजावै और दोनों हाथो से ज़ोर से ही चुटकी बजा कर अपने दोनों कानो का स्पर्श करे .


दीन बनकर अपना कार्य कपिराज से दोहराये ! और अपना आसान छोड देवे .


माँ आप सभी की मनोकामना पूर्ण करे .....




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सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

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Tuesday, June 11, 2019

कृत्या तंत्र साधना





कृत्या  तंत्र साधना


कृत्या साधना, एक उच्चकोटि का साधना है।शत्रु नाशक, हर आपद नाशक और जो भी आपद बिपद सब का नाश होता है।कारोबार और किसी भी चिज पर वाधा आ रही हो तो कृत्या का उपासना से हर वाधा दुर होता है।

कृत्या सिद्धि होने पर धन की कमी नही रहता है।देवी साधक का रक्षा के साथ उसका परिवार का भी रक्षा करती है।जीसको कृत्या का कुपा प्राप्त हो उसका अपमूत्यु नही होता है।कृत्या साधना सिद्धि होने पर शत्रुओँ पर विजय प्राप्त करने वाला और मन से ,तान से अतिवालसाली हो जाता है।

देवी को जो काम करने को बोला जाए वह खुशि खुशि उस काम को कर देती है,चाहे वह बुरा काम हो या अच्छा काम हो।साधक जीस तरहा का नौकरी या जीस वश्तू का चाहत करता है,देवी उस मनोकामना को मिनटो मेँ पुर्ण कर देती है।

देवी के कुपा प्राप्ति के बाद साधक भोगविलास का जीवन जीने के बाद ही, कृत्या देवी के शरीर मेँ विलिन हो जाता है।

साधना करने के लीए साधक कला वस्त्र का उपयोग करेँ और दक्षिण देशा के और मुँह कर बैठ जाए।आसन मेँ, काले कपडा ले।कडवे तेल का एक दीपक जालाकर अपने आगे रखे।

साधना पुर्ण होने तक बह्मचर्य का पालन करेँ।साधना 21 दिन चालेगा।जब साधना पुर्ण होगा तब देवी दर्शन देगी।।

 मंत्र-

ॐ कृत्या सर्व शत्रुणाँ मारय मारय हन हन ज्वालय ज्वालय जय जय साधक प्रिये ॐ स्वाहा॥

मात्र इस लेख के आधार पर साधना न करें |साधना पूर्व अपने गुरु से अनुमति लें और किसी सिद्ध काली साधक से सुरक्षा कवच बनवाकर जरुर धारण करें ,जो ऐसा हो की सुरक्षा भी करे 

योग्य ग्यानी से समस्त प्रक्रिया और मंत्रादी समझ लें ,जांच लें |किसी भी हानि अथवा परेशानी के लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे |

धन्यवाद.

 .................................................................

विशेष -

 किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें 

राजगुरु जी

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परकृत बाधा नाशक यन्त्र






परकृत बाधा नाशक यन्त्र:


यंत्र श्रंखला में एक और गोपनीय यंत्र प्रस्तुत है। यह यंत्र जहाँ भी रहता है वहाँ किसी तरह का तंत्र प्रयोग काम नही करता। बुरी नज़र नही लगती। दुश्मनो के षड्यंत्र नही चलते। घर में सदा मंगल रहता है।

                 ||यन्त्र निर्माण विधि||

निचे यंत्र का स्वरूप दिया गया है। ठीक इसी प्रकार से यंत्र का निर्माण होगा। किसी भी शनिवार को रात्रि 10 बजे के बाद भोजपत्र पर निर्माण करे। अनार की कलम एवम् रक्त चंदन की स्याही से यंत्र लिखे।

यंत्र लिखने का कर्म अंको के बढ़ते कर्म से होगा
यथा....पहले खाने बना लेवे और फिर सबसे पहले अंक भरे 1, फिर 9,पुनः9, अब 11, फिर 25, इसके बाद 27,33,37,45,49,49,72,81,82 और अंत में 91

इस प्रकार यंत्र लिखने का कर्म पूर्ण होता है। यंत्र के सूखने के बाद इसका पूजन कर लेवे और अब जिस प्रकार अंक भरे थे उसी प्रकार हर अंक पर अपनी दाहिने हाथ की अनामिका को रख कर 11 बार ये मन्त्र बोले

             ॐ चैतन्य गोरक्षनाथ नमः

अब फिर से यंत्र को धुप-दीप दिखाए और इस यंत्र को अपने घर की किसी भी दीवार पर पूर्व की और लगा देवे। प्रतिदिन सुबह शाम यंत्र के धुप करते रहे और चमत्कार देखे।

आपका प्रयोग पूर्ण हुआ अब मैं अपनी बात पर आता हु।
मैंने फिर से आप सभी के लिए तंत्र का गोपनीय विधान उजागर कर दिया है। मेरे समस्त प्रयोग,मन्त्र,यंत्र आदि वहीँ होते है जिनके लिए आप कहि न कहि अत्यधिक पैसा ख़र्च कर चुके है। 

आज का प्रयोग भी ऐसा ही है कुछ। अनेक साधक इस यंत्र के नाम पर हजारो रुपये ले लेते है और होता कुछ है नही उससे।

निःसन्देह मैं पागल नही हु की आपको इतना सब कुछ बता रहा हु। यदि मैं आपके लिए इतना सोच रहा हु, इतना कर रहा हु तो बदले में मुझे भी आपसे कुछ चाहिए।

कहते है की बिना स्वार्थ के कोई कुछ काम नही करता।मैं भी नही कर रहा। तो मैं बताता हु की मुझे आपसे क्या चाहिए

मुझे चाहिए की आप इस यंत्र का निर्माण करे और अपने घर पर इसे स्थापित करे। मैं चाहता हु की आप सभी के घर पूर्णतया सुरक्षित रहे। मैं चाहता हु की मेरी बहने,बेटियां, छोटे बच्चे हमेशा खुश रहे। इस ग्रुप के हर मेम्बर का घर मेरा घर है और आर्यन के घर में कभी कोई परेशानी नही रह सकती।

आर्यन के घर में,आर्यन में,स्वयं भगवती का वास है। तो वहाँ किसी समस्या का क्या काम?

अतः सभी इस यन्त्र का निर्माण करे और सुखी रहे।
सभी आनंद में रहे, सुखी रहे।

बाकी बाते अगली पोस्ट में

अभी के लिए आज्ञा

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Sunday, June 9, 2019

शिव कृत्या साधना






शिव कृत्या साधना


 विधि- यह साधना अत्यंत दुर्लभ है।

 ॐ  क्लीम क्लीम शत्रुणाम मोहये उच्चाटये मारये वचन सिद्धि मम आज्ञा पालय पालय कृत्याम सिद्धि फट ।

विधि-

यह साधना अत्यंत दुर्लभ है।इसका सिद्धि विधान अमावस्या या मंगलवार या होली या दीपावली से शुरू किया जाता है।काले वस्त्र,काला आसन ,शिव पूजन आदि सम्पन्न करके सिद्ध की जाती है।

इस सिद्धि में साधक के सामने 3 देवी कृत्याय प्रकट होती है,एक मारण कृत्या,दूसरी मोहन कृत्या, तीसरी उच्चाटन कृत्या।।

इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद साधक घर बैठे हजारो मील दूर के कार्य को भी मन की गति से सम्पन्न कर लेता है।सभी तरह के उपद्रव आत्माओ जनित,सभी रोग,बंधन आदि को समाप्त कर देता है।

विशेष चेतावनी

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उपरोक्त साधना पद्धति मात्र जानकारी के उद्देश्य से दिया जा रहा है |जैसा की शास्त्रों में ,किताबों में भैरवी की साधना दी हुई है ,हम भी ब्लॉग और पेज पर मात्र जानकारी देने के उद्देश्य से इसे प्रकाशित कर रहे हैं |

मात्र इस लेख के आधार पर साधना न करें |साधना पूर्व अपने गुरु से अनुमति लें और किसी सिद्ध काली साधक से सुरक्षा कवच बनवाकर जरुर धारण करें ,जो ऐसा हो की सुरक्षा भी करे औए पिशाचिनी के आगमन को रोके भी नहीं |

योग्य ग्यानी से समस्त प्रक्रिया और मंत्रादी समझ लें ,जांच लें |किसी भी हानि अथवा परेशानी के लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे |

धन्यवाद.

 .................................................................

विशेष चेतावनी

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उपरोक्त साधना पद्धति मात्र जानकारी के उद्देश्य से दिया जा रहा है |जैसा की शास्त्रों में ,किताबों में भैरवी की साधना दी हुई है ,हम भी ब्लॉग और पेज पर मात्र जानकारी देने के उद्देश्य से इसे प्रकाशित कर रहे हैं |

मात्र इस लेख के आधार पर साधना न करें |साधना पूर्व अपने गुरु से अनुमति लें और किसी सिद्ध काली साधक से सुरक्षा कवच बनवाकर जरुर धारण करें ,जो ऐसा हो की सुरक्षा भी करे औए पिशाचिनी के आगमन को रोके भी नहीं |

योग्य ग्यानी से समस्त प्रक्रिया और मंत्रादी समझ लें ,जांच लें |किसी भी हानि अथवा परेशानी के लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे |

धन्यवाद.

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Saturday, June 8, 2019

भैरवी साधना और कामाख्या तंत्र






भैरवी साधना और कामाख्या  तंत्र  


तंत्र में अगर एक महिला है तो भैरवी बनेगी और उसका मार्ग संभोग से हो कर जाता - ये वो ज्ञान जो आज कल हर नई साधिका से दी जाती है।

परंतु ये अर्ध सत्य है, या ये बोला जाए कि ये सत्य से काफ़ी दूर है।

आज साधना के विषय मे कुछ गुड़ रहस्य बताता हूँ।
कौन सा साधक भैरवी साधना कर सकता है?
१. जिससे वज्रोली साधना आती हो।

२. जो काम नही साधना भाव से भैरवी साधना कर पाए।
भैरवी को तीन तरीके से सिद्ध किया जा सकता है।

१. माँ के रूप में।

२. कुमारी या बेटी के रूप में।

३. अर्धग्नि या लाता भैरवी के रूप में।

जब भैरवी के 3 स्वरूप है ।तो लोग उसे माँ या बेटी के स्वरूप में क्यों नही अपनाते।उनको लता भैरवी ही क्यों चाहिए।मतलब वो अपनी काम के रूप में  उपयोग  ही करना चाहते है ।

लता भैरवी साधना 12 पहर यानी 36 घंटे की साधना है जिसमे भैरव और भैरवी दोनों उच्य कोटि के साधक होने चाहये। भैरव का काम होता है साधना पर ध्यान देना और भैरवी का काम है इस प्रक्रिया में सहायक होना। एक भी बीच मे साधना छोड़ नही सकता  ।

कोई नई कन्या लता भैरवी नही बन सकती। और कोई साधक जो वज्रोली न जानता हो वो भैरव नही हो सकता। 

  वैसे ओर भी बहुत बातेहै भैरवी साधना को ले कर पर इस मंच की मर्यादा देखते हुवे ज्यादा नही कह सकता ।

(क्रिया का मंत्र व तंत्र यहां नही बता रहा कियूंकि इसका दुरुपयोग होता है)

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Monday, June 3, 2019

हम तो एक भिच्छुक ब्राह्मण हैं






हम तो एक भिच्छुक ब्राह्मण हैं , भिच्छा मांगना हमारा कर्म भी हैं , और धर्म भी हैं , इसमे ना  ही  कोई शर्म की बात हैं और न ही किसी प्रकार की हीनता का बोध ही मुझे महसूस हो रहा हैं ,रही बात महाविद्या की तो महाविद्या का मतलब धन सम्पदा , ऐश्वर्या , शक्ति , नहीं होता , .


महाविद्या तो जीवन जीने की एक कला हैं अपने आप को जानने का एक माध्यम हैं अपने आप को पहचानने का एक साधन हैं कि में कौन हूँ , क्या कर रहi हूँ  , इस धरती पे मेरे आने का कारन क्या हैं , , .

महाविद्या चमत्कार नहीं है , वरन एक मार्ग हैं , जिसके द्वारा मानव के अंदर का मोह , माया , काम , वासना , इर्षा , द्वेष , लालच का नास होता हैं , जिससे मानव अपने जीवन का आनंद प्राप्त करता हैं .



चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...