Wednesday, February 10, 2016

वशीकरण यन्त्र - वशीकरण सामग्री










वशीकरण यन्त्र किसी को वश में करने के सबसे प्रमुख तरीकों में से है ! जो भी व्यक्ति चाहें वो स्त्री हो या पुरुष आपके संपर्क में आता है यह यन्त्र उसके दिमाग में एक गहरी छाप छोड़ देता है ! यह यन्त्र आपके अन्दर लोगों के मन पर नियंत्रण पाने की शक्ति पैदा कर देता है जिसके बाद आप उस व्यक्ति से जो चाहें वो करवा सकते हैं ! वशीकरण यन्त्र का फल प्राप्त करने के लिए इसे गले, बाजू में पहना जा सकता है या अपने पर्स, जेब आदि में भी रखा जा सकता है ! हर वशीकरण यन्त्र को उसे धारण करने वाले व्यक्ति के अनुरूप बनाया जाता है ताकि उसे इसका अधिकतम फायदा मिल सके!
यन्त्र को तैयार करने मैं 3-5 दिनों का समय लगता है !
वशीकरण यन्त्र को किसी निश्चित व्यक्ति को वश में करने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है ! वशीकरण मंत्र का निरंतर प्रयोग इसकी शक्ति को और बढ़ा देता है !
राजगुरु जी
महाविद्या आश्रम
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टोना टोटका और तांत्रिक आक्रमण









येह सच है कि इस तरह के आक्रमण कोई करीबी सदस्य या घर में आने जाने वाला कोई ऐसा व्यक्ति ही कर सकता है जो बिना रोक टोक घर में आ जा सके | अधिकतर मामले ऐसे ही होते हैं जब कोई अपना ही किसी निजी स्वार्थ के लिए काले जादू या टोने टोटके का प्रयोग करता है | यहाँ पर यह जानना आवश्यक है कि वह व्यक्ति कौन है और आपकी क्या चीज ऐसी है जो कि शरीर पर आप पहनते थे और अब आपके पास नहीं है | जूता, चप्पल, कपडा या कुछ और, कुछ भी हो सकता है | अब कोई मदद करे इससे पहले देखिये कि काले जादू, तांत्रिक आक्रमण की तीव्रता क्या है | यदि कम है तो इलाज हो सकता है और यदि अधिक है और समय भी बहुत हो गया है तो बेहद मुश्किल | जो भी मदद करेगा वह भी चपेटे में आ जायेगा | यह सर्वविदित है |
क्या लक्षण हैं
आपको काले जादू से ग्रस्त व्यक्ति के पास बैठने से ही डर लगने लगेगा | यदि तीव्रता कम है तो स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है या कोई गंभीर बीमारी लग जाती है और टेस्ट में कुछ भी नहीं आता | मेडिकल विज्ञान असहाय सा मालूम होता है | कल्पना कीजिये कि किसी ठीक ठाक व्यक्ति को यदि heavy dose दे दी जाए तो उस पर क्या असर पड़ेगा | लेकिन जिस के शरीर पर किसी बुरी आत्मा का प्रकोप है उसे इन दवाइयों का असर उस समय बिलकुल नहीं होता | असर होता है तब जब बुरी आत्मा कुछ समय के लिए ग्रस्त व्यक्ति के शरीर से बाहर आती है | इस विषय में यदि मेडिकल कुछ न कर पाए तो यह मान लेना चाहिए कि कुछ न कुछ supernatural है | कुछ भी सामान्य नहीं लगता है | आवाज बदल जाए तो वह काले जादू का चरम होता है | कम से कम विज्ञान के पास तो इसका कोई जवाब नहीं है |
बचाव या कोई उपाय
सबसे आसान उपाय है कि पता लगाइए कि कौन व्यक्ति इस के लिए उत्तरदायी है | यदि आप उस व्यक्ति को खोज पायें तो सबसे आसान ये है कि वही व्यक्ति इस मुश्किल से निकलने में आपकी सबसे अधिक सहायता कर सकता है | आसान तो नहीं है परंतु सच यही है |
पता लगाइए कि काला जादू किया गया है या किसी बुरी आत्मा ने व्यक्ति के शरीर में प्रवेश किया है | जन्मकुंडली से केवल यह पता चल सकता है कि भूत प्रेत से या जादू टोने से आपको जीवन में कब और कितने समय तक जूझना पड़ सकता है | आप बच पाएंगे या नहीं यह भी पता लगाया जा सकता है परंतु दुर्भाग्य से ज्योतिष भी एक हद तक ही आपकी मदद कर पायेगा |
तो क्या किया जाये | कुछ भी करें परंतु उम्मीद मत छोडें | मनोबल को बढाकर और उस मूल कारण या स्त्रोत तक पहुंचकर बहुत कुछ किया जा सकता है | यही सबसे छोटा रास्ता है और कारगर भी |
मेरी दृष्टि में तो एहतियात ही सबसे बड़ा उपाय है | काले जादू से बचा जा सकता है यदि आपको पहले से मालूम हो कि यह आक्रमण आप पर हो सकता है परंतु अभी हुआ नहीं है तो इससे बचा जा सकता है | गोमेद और फिरोजा दोनों ही शत्रुओं से बचाव करने में सक्षम हैं | यदि
कोई आप पर इस तरह का आक्रमण करने की कोशिश भी करेगा तो पकड़ा जाएगा |
रुद्राक्ष भी मददगार सिद्ध हो सकता है यदि आपने पहले से पहन रखा है |
सबसे बड़ा उपाय है आप अपना मनोबल बढाइये | मनोबल बढ़ाने के लिए नीचे मन्त्र दिया जा रहा है | अधिक से अधिक प्रयोग कीजिये
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः
अब जब आपको लगे कि आपका मनोबल बढ़ गया है और आप किसी भी समस्या के आने पर अब पहले की तरह हताश नहीं होते अपितु साहस में भी वृद्धि हुई है तो शक्ति प्रयोग कीजिये |
शक्ति प्रयोग एक ऐसा माध्यम है जिसके बल पर आप अपने शत्रु पर विजय प्राप्त ही नहीं करेंगे अपितु उसका सच समाज के सामने ला सकते हैं | शक्ति प्रयोग में आपको केवल मनोबल की आवश्यकता रहती है | गूढ़ विद्या है जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता | केवल वही व्यक्ति शक्ति प्रयोग करे जो असहाय है, दुर्बल है और सबसे बढ़कर सच की राह पर है
राजगुरु जी
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काला जादू हटाने के उपाय-भूत-प्रेत निवारक - ज्योतिषीय सामग्री








मनुष्य जब भूत-प्रेत अथवा नजर, हाय या किसी दुष्ट आत्मा के जाल में फंस जाता है तब उसकी समस्या का समाधान करना दुष्कर कार्य होता है। ऐसे में बाधित व्यक्तियों को ज्योतिषीय सामग्रियों के धारण या पूजन से अवश्य लाभ मिलता है। नजर सुरक्षा लाॅकेट स्वास्थ्यवर्द्धक और जीवन की बाधाओं को हटाने वाला लाॅकेट है। बुरी नजर से बचाव करता है। तंत्र-मंत्र-जादू, टोने के दुष्प्रभाव को काटता है व शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या की अवधि में, विशेष रूप से शुभ रहता है। नजर दोष निवारक लाॅकेट पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से धारण करने पर धारक की सभी पराबाधाओं का निवारण होता है। इसके चमत्कारिक प्रभाव से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में वृद्धि होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार धारक को आशा और उन्नति की ओर लेकर जाता है। बाधामुक्ति कवच बाधामुक्ति कवच पांचमुखी, तेरहमुखी तथा गणेश रुद्राक्ष के संयुक्त मेल से बनाया गया है। तेरह मुखी रुद्राक्ष विश्वेश्वर का प्रतीक होने के कारण सभी बाधाओं को नष्ट करता है। पांचमुखी रुद्राक्ष, महारुद्र स्वरूप है और पाप, ताप आदि अशुभ बाधाओं से रक्षा करता है। गणेश रुद्राक्ष विघ्नेश्वर का स्वरूप होने के कारण जीवन में आने वाली सभी विघ्न-बाधाओं को दूर करता है। इस बाधामुक्ति कवच को धारण करने से धारणकर्ता के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं का निराकरण होता है। काले घोड़े की नाल घर में मुख्य दरवाजे पर काले घोड़े की नाल लगाने से नजर दोष दूर होता है। जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि की ढैय्या, शनि की साढ़ेसाती, शनि की दशा चल रही हो, उन व्यक्तियों के लिए शनि उपाय करना विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है। घोड़े की नाल शीघ्र सफलता प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। मोटर वाहन में सामने लगाकर प्रतिष्ठित किया जाये, तो दुर्घटना की आशंका कम होती है। काले घोड़े की नाल की अंगूठी काले घोड़े की नाल की अंगूठी नीच कर्मों से दूर रखती है तथा भूत-प्रेत, टोना, टोटका, नजर दोष आदि से बचाती है। एवं परिवार में कलह-पीड़ा नहीं होती। यह नौकरी पेशावालों के लिए भी उपयोगी है। ज्योतिष के अनुसार शनि जीवन में कई बार ढैय्या, साढ़ेसाती, महादशा व अंतर्दशा के रूप में प्रभावी होते हैं। इस स्थिति में काले घोड़े की नाल अंगूठी में धारण करना शनि दोषों का निवारण करता है। काले हकीक की माला घर से दरिद्रता दूर करने के लिए काले हकीक की माला को पूजा घर में स्थित माता लक्ष्मी के चित्र पर चढ़ा दें। ऐसा करने से साधक की आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होना शुरू हो जाएगा। काले हकीक की माला पर हनुमान मंत्र का जप करने से शत्रु बाधा और प्रेत बाधा का निवारण होता है। जन्म पत्रिका में शनि अकारक होने पर तथा शनि से संबंधित वस्तुओं के व्यापारियों को शनि उपासना नियमित रूप से करनी चाहिए। काले हकीक की माला पर शनि के मंत्र का जप करना अत्यंत लाभकारी रहता है। बगलामुखी यंत्र बगलामुखी यंत्र द्वारा शत्रुओं पर विजय व वांछित सफलता प्राप्त हो सकती है। बगलामुखी यंत्र बुरी शक्तियों से बचाव के लिए अचूक यंत्र है। बगलामुखी यंत्र अकाल मृत्यु, दंगा फसाद, आपरेशन आदि से बचाव करता है। इसे गले में पहनने के साथ-साथ पूजा घर में रख सकते हैं। अपनी सफलता के लिए कोई भी व्यक्ति इस यंत्र का उपयोग कर सकता है।
भैरव यंत्र के सहयोग से आप भैरव जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। भैरव यंत्र भूत-प्रेत, काले जादू के प्रभाव को दूर करने में सहयोग करता है, तंत्र-मंत्र की नकारात्मक शक्तियों से व्यक्ति को बचा कर रखता है तथा सकारात्मक शक्तियों की शुभता बनाए रखता है। श्री भैरव यंत्र स्वास्थ्य सुख देने वाला यंत्र है। इस यंत्र से आप अपने ऋण, रोग पर विजय प्राप्त करने में सफल हो सकते है। व्यावसायिक समस्याओं का निवारण करने में भी भैरव यंत्र लाभकारी सिद्ध होता है। श्री भैरव यंत्र के सभी शुभ फल प्राप्त करने के लिए इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी चाहिए। संपूर्ण बाधामुक्ति यंत्र शत्रुओं पर विजय, मुकद्दमे में जीत, रुके कार्यों में सफलता और बुरी नजर से बचाव के लिए संपूर्ण बाधामुक्ति यंत्र बहुत प्रभावशाली है। इससे जातक का चोट, दुर्घटना, दुर्भाग्य आदि से बचाव होता है। जातक का प्रभामंडल उज्जवल होता है। संपूर्ण बाधामुक्ति यंत्र में महामृत्युंजय यंत्र, बगलामुखी यंत्र, नवग्रह यंत्र, वशीकरण यंत्र, वाहन दुर्घटना नाशक यंत्र, शनि यंत्र, राहु और केतु यंत्र, वास्तु दोष निवारण यंत्र, गणपति यंत्र और कालसर्प यंत्र सम्मिलित हैं। गीता यंत्र संपूर्ण जगत में श्रीमदभगवत गीता का पाठ अति लाभप्रद है। गीता पाठ करने वालों को यह यंत्र अवश्य ही अपने पास रखना चाहिए। यंत्र के सम्मुख गीता पाठ करने से सहस्त्रोगुण से अधिक फल मिलता है। पाठ करने में असमर्थता होने पर यंत्र के सम्मुख शुद्ध मन से तुलसी या पंचमुखी रूद्राक्ष की माला पर जप करना विशेष लाभ देता है। गीता यंत्र पर प्रतिदिन ग्यारह की संख्या में बिल्वपत्र अर्पण करने से लक्ष्मी जी संतुष्ट होकर लाभवृद्धि करती हैं। घर में शांति का वातावरण बना रहता है। गीता यंत्र की उपासना से भूत-प्रेत एवं पितृ दोष की शांति होती है तथा गीता यंत्र की उपासना से विद्या प्राप्ति होती है। श्री हनुमान जी कृपा यंत्र जो व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना चाहता है। उसे प्रतिदिन इस यंत्र का पूजन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों की कुंडली में मांगलिक योग हो, उन व्यक्तियों के लिए इस यंत्र का पूजन करना लाभकारी सिद्ध हो सकता है। श्री हनुमान कृपा यंत्र के नियमित पूजन से सभी प्रकार की ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। ऊपरी बाधा, नजर, टोना-टोटका, भूत-प्रेत आदि की शांति एवं इनसे होने वाले कष्टों से बचने के लिए लोबान, गंधक, राई एवं काली मिर्च को हनुमान यंत्र के ऊपर से 7 बार फेर कर घर के प्राणियों के पास रखने से ऊपरी बाधाएं नष्ट होती हैं। ग्यारहमुखी रुद्राक्ष साक्षात रुद्र है। यह 11 रुद्रों एवं भगवान शंकर के ग्यारहवें अवतार संकटमोचन महावीर बजरंगबली का प्रतीक है। इसे धारण करने वाले व्यक्ति को सांसारिक ऐश्वर्य और संतान सुख प्राप्त होता है और उसकी सारी ऊपरी बाधाएं दूर होती हैं। तेरहमुखी रुद्राक्ष साक्षात इंद्र का स्वरूप है। यह कार्तिकेय के समान समस्त प्रकार के ऐश्वर्य देता है और कामनाओं की पूर्ति करता है। इसे धारण करने से व्यक्ति सभी प्रकार की धातुओं एवं रसायनों की सिद्धि का ज्ञाता हो जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार कामदेव को भी तेरहमुखी रुद्राक्ष का देवता माना गया है। इसका प्रभाव शुक्र ग्रह के समान होता है। यह निःसंतान को संतति प्रदान करने वाला, सुख, शांति, सफलता एवं आर्थिक समृद्धि प्रदायी रुद्राक्ष है। पंद्रहमुखी रुद्राक्ष भगवान पशुपतिनाथ का स्वरूप माना गया है। यह धारक के आर्थिक एवं आध्यात्मिक स्तर को उठाकर उसे सुख, संपदा, मान- सम्मान-प्रतिष्ठा एवं शांति प्रदान करता है। पंद्रहमुखी रूद्राक्ष विशेष रूप से नजर दोष और भूत बाधा से मुक्ति प्राप्ति के लिए धारण किया जाता है। बीसमुखी रुद्राक्ष को जनार्दन स्वरूप कहा गया है। इसे धारण करने से भूत, पिशाच आदि का भय नहीं रहता। साथ ही क्रूर ग्रहों का अशुभ प्रभाव भी नहीं पड़ता है। वह श्रद्धा एवं तंत्र विद्या के जरिए विशेष सफलता प्राप्त करता है। उसे सर्पादि विषधारी प्राणियों का भी भय नहीं होता है।
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खोया हुआ प्यार को वापिस पाने का उपाय








जीवन में कई बार ऐसा लगने लगता है कि आपके साथी की रूचि प्यार में और आप में कम हो गई है। ऐसे समय में निराश होने की बजाय कुछ सामान्य टोटके भी आजमा सकते हैं। यह ऐसे टोटके हैं जिन्हें प्राचीन काल से आजमाया जाता रहा है।
केला में गोरोचन मिलाकर लेप बनाएं। इस लेप को सिर पर लगाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति में आकर्षण शक्ति आ जाती है। नारियल, धतूरे के बीज, कपूर को पीस लें। इसमें शहद मिलाएं। नियमित इसका तिलक करने से जिसे आप प्यार करते हैं वहआपको छोड़कर नहीं जाता है।
पति की रूचि पत्नी में कम हो गयी हो तो दोनों साथ भोजन करें और भोजन के समय चुपके से पत्नी पति के खाने में अपनी थाली से थोड़ा भोजन रख दे। इससे पति फिर से पत्नी में रूचि लेने लगता है।
ज्योतिषशास्त्र का सिद्धान्त है कि जो ग्रह शुभ फल नहीं दे रहे हैं उनका शुभ फल पाने के लिए उन्हें आकर्षित करके अपने लिए शुभ बनाना चाहिए। इसके लिए ज्योतिषशास्त्र में कई उपाय बताए गये हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार प्रेम और सेक्स का कारक शुक्र ग्रह है और प्रेम के देवता कामदेव हैं।
बहुत से ज्योतिषी बताते हैं कि, अगर व्यक्ति किसी को अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है या अपनी सेक्स पावर बढ़ाना चाहता है तो उसे शुक्र एवं कामदेव को प्रसन्न करना चाहिए। इसके लिए कई ज्योतिषी शुक्र और कामदेव के मंत्र जप करने की सलाह देते हैं।
कामदेव मंत्र
‘ऊँ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्।’ इस मंत्र के जप से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है और सुयोग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है। कामदेव का एक शाबर मंत्र है ‘ऊँ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यस्य यस्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा।’ माना जाता है कि इस मंत्र के जप से व्यक्ति में आकर्षण और सेक्स क्षमता बढ़ती है।
शुक्र मंत्र
ओम द्राँ द्रीँ द्रौँ स: शुक्राय नम:।
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इंटरव्यू (साक्षत्कार) में सफलता प्राप्त करने की साधना :





• सामग्री : स्फटिक मणिमाला (108 मनकों की)
• माला : उपर्युक्त
• समय : दिन का कोई भी समय 
• आसन : सफेद आसन
• दिशा : पूर्व दिशा, इक्कीस बार प्रतिदिन
• अवधि : ग्यारह दिन
मंत्र : ऊँ ह्रीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्यसिद्धि करि करि फट् स्वाहा।
प्रयोग : यह प्रयोग स्फटिक मणिमाला पर किया जाता है। सामने पीला वस्त्र बिछाकर उस पर 108 मनकों की मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठा युक्त स्फटिक मणिमाला रख दें और केसर से उसका पूजन करें। सामने अगरबत्ती या दीपक जला दें। यह दीपक शुद्ध घृत का हो। फिर उपर्युक्त मंत्र का इक्कीस बार उच्चारण करें। इस प्रकार 11 दिन तक करने से वह माला ‘विजय माला’ में परिवर्तित हो जाती है। जब किसी इंटरव्यू या साक्षात्कार में जायें तो उस माला को बुशर्ट अथवा कुर्ते के नीचे पहनकर जायें, ऐसा करने पर साक्षात्कार में अवश्य ही सफलता प्राप्त होती है।
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व्यापार में या रोजगार में सफलता पाने के उपाय







सात्त्विक टोटका :
तीन सौ ग्राम काले उड़द का आटा लेकर, बिना छाने इसको गूंथकर खमीर उठा लें। तत्पश्चात् इसकी एक-एक रोटी तैयार करके मामूली-सी आंच पर सेंक लें, ताकि इसकी आसानी से गोलियां बन सकें। इस रोटी में से एक चौथाई भाग तोड़कर काले रंग के कपड़े में बांध लें, शेष पौन रोटी की 101 छोटी-छोटी गोलियां बनाकर, किसी ऐसे जलाशय के पास जायें, जिसमें मछलियां हों। जलाशय में एक-एक कर सारी गोलियां मछलियों को खिला दें। अब कपड़े में बंधी रोटी को मछलियों को दिखाते हुए एक साथ पानी में प्रवाहित कर दें। इस प्रकार 40 दिनों तक नियमित रूप से यह क्रिया करें। इससे बेरोजगारी अवश्य दूर होगी तथा कोई नौकरी, व्यापार अथवा उदर-पूर्ति के लिए कुछ न कुछ व्यवस्था जरूर हो जायेगी।
दूसरा टोटका :
बृहस्पतिवार (जुमेरात) को एक नर कौए को पकड़कर कर ले आयें, पिंजरे में बंद कर दें। खाने के लिए दाना-पानी दें। रविवार की सुबह उसे दही में चीनी मिलाकर खिलाएं और दोपहर को चावलों के भात में दूध व दही मिलाकर खाने को दें। इसके बाद सोमवार के दिन, जहां से काम हासिल करने का खयाल हो, वहां जायें। उस जगह के मुखय दरवाजे में दाखिल होते वक्त दायें पांव को पहले रखें। इस तरह से वहां पहुंचने के साथ ही आपको काम मिल जायेगा।
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Tuesday, February 9, 2016

इतर योनि अवलोकन साधना







मित्रों !!!! इस अनन्त ब्रह्मांड में मनुष्य अकेला नहीं है जिसका निर्माण भगवान द्वारा किया गया है । पेड़-पौधे, पशु- पक्षियों के इलावा कोई और भी है जो हमारी ही दुनिया में रहतीं हैं पर हमें दिखतीं नहीं । उनका हमें ज्ञान तो है पर प्रमाण नहीं । परंतु!! यदा-कदा वो किसी के सामने आ भी जाएँ , तो कौन यकीन करता है भाई!! क्योंकि दुनिया कहती है आँखों से देखी बात ही सत्य है । लेकिन आज की प्रस्तुत साधना आपको पूरा यकीन दिलाने के लिए है की हमारे इलावा और भी कोई है जो अगर हमारे वश में हो जाए तो वो अपनी शक्तिओं द्वारा पूरा जहान हमारे कदमों में लाकर रख सकती हैं । वो हैं इतर योनिआँ । मनुष्य को भगवान ने उसके कर्मों के अनुसार मृत्यु उपरांत कई योनिओं मे विभक्त किया है
जैसे : -
भूत , प्रेत , पिशाच , राक्षस , ब्रह्मराक्षस , देव , यक्ष , गन्धर्व , किन्नर , पितृ , अप्सरा , परि , जिन्नात आदि ॥
साधकों के लिए इन्हें सिद्ध करना किसी भयंकर चुनौती से कम नहीं होता क्योंकि इस संसार में कोई किसी का गुलाम बनकर नहीं रहना चाहता । हर कोई अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित करना चाहता है तो ये योनिआँ कैसे यूं ही आपके वश में हो जाएँ । ये योनिआँ खुद को आपके वश से बचाने के लिये किसी भी हद तक जा सकतीं हैं । परंतु!! एक बार साधक इन्हें सिद्ध करले तो ये आजीवन साधक को वो सब कुछ देतीं रहती हैं जो साधक चाहता है । आपका वफ़ादार कुत्ता आपको एक बार काट सकता है पर ये योनिआँ अपनी शक्ति का प्रयोग आपके खिलाफ कभी नहीं करतीं । ये अपनी जान पर खेलकर भी आपके उपर आई मुसीबत खुद पर ले लेती हैं ।
परंतु कई मेरे भाई साधक एसे भी हैं जो लाख कोशिश करते हैं किसी इतर योनि को वश में करने की और अन्य साधनाएँ भी करते हैं और बाद में थक हार कर बैठ जाते हैं जब उन्हें कोई अनुभूति नहीं होती । पर आज की यह साधना इतर योनिओं के दर्शन करने के लिए है जिसे अगर कोई नास्तिक भी करे तो वो भी इतर योनिओं के दर्शन कर अपना विश्वास इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड की इन गुप्त शक्तिओं पे दृढ़ कर सकता है । आप खुद इस साधना को करके देखिए और अवलोकन कीजिए उन शक्तिओं का जिनका अस्तित्व अति दिव्य होने के साथ - साथ गोपनीय भी है । पूरी कर लीजिए अपने मन की कामना विभिन्न प्रकार की इतर योनिओं के दर्शन करके क्योंकि तंत्र में शंका का कोई स्थान नहीं है ।" तंत्र निर्मल है , स्वच्छ है और सबसे महत्वपूर्ण बात कि तंत्र प्रत्यक्ष है । जो भी इसका अनुसरण करेगा वो निश्चित ही समस्त भौतिक सुखों को भोगते हुए अंततः मुझमें विलीन हो जाएगा "॥ एसा भगवान शिव ने कहा है ।
इन योनिओं से आपको भय खाने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि जो खुद भगवान शिव के सान्निधय में रहती हों और बेचैन होकर और किसी के बस में होकर अपनी मुक्ति के लिए तत्पर हों उनसे भय कैसा!!!!!
॥ साधना विधि ॥
दिन - अमावस्या
साधना अवधि - 16 दिन
दिशा - उत्तर
वस्त्र एवं आसन - सफेद
माला - रूद्राक्ष की
साधना समय - रात 10 बजे
साधक को चाहिये कि वो वट वृक्ष की थोड़ी सी जटा जो लमक रही होती है तोड़कर ले आए और उसे अपने साधना कक्ष में बाजोट पर रख दे । याद रखिए उसे धोना बिल्कुल नहीं है । इसके बाद स्नान करे और अपने साधना कक्ष में उत्तर की ओर मुख करके बैठे । गुरु पूजन एवं गणेश पूजन सम्पन्न करके उस जटा को अपने बाएँ हाथ में और माला दायें हाथ में पकड़ कर निम्न मंत्र की 11 माला संपन्न करे । इसके बाद किसी से बात किए बिना उस जटा को अपने तकिए के नीचे रखिए और सो जाइये । इससे आपको सपने में एसी - एसी इतर योनिओं के दर्शन होंगे जिनके बारे में आपने किसी किताब में ही पढ़ा या किसी से सिर्फ सुना होगा ॥
॥ मन्त्र ॥
ॐ हूं हूं फट
( OM HOOM HOOM PHAT )
साधक को अगले दिन उस जटा को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए और माला को पुनः प्राण प्रतिष्ठित कर देना चाहिए ताकि भविष्य में अन्य साधनाओं में इसका उपयोग किया जा सके ।
॥ मेरा अनुभव ॥
जब मैंने ये साधना की थी तब एसी - एसी इतर योनिआँ मेरे सामने आ रहीं थी जिनमें से कई के मुँह में से आग निकल रही थी और कई एक छोटे Pipe के समान मुख में लगातार खून और मांस डालतीं जा रहीं थी । इसके पश्चात मुझे अप्सरा , परि और यक्ष एवं अन्य योनिओं के भी दर्शन हुए जो उग्र के साथ - साथ सौम्य भी थीं ।
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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...