Tuesday, February 9, 2021

महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच और महावशीकरण मन्त्र


 



महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच और महावशीकरण मन्त्र


मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या ,,वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं |यह सरस्वती ही हैं और वाणी ,संगीत ,ज्ञान ,विज्ञान ,सम्मोहन ,वशीकरण ,मोहन की अधिष्ठात्री हैं |त्रिपुरा ,काली और मातंगी का स्वरुप लगभग एक सा है |यद्यपि अन्य महाविद्याओं से भी वशीकरण ,मोहन ,आकर्षण के कर्म होते हैं और संभव हैं किन्तु इस क्षेत्र का आधिपत्य मातंगी [सरस्वती] को प्राप्त हैं |यह जितनी समग्रता ,पूर्णता ,निश्चितता से इस कार्य को कर सकती हैं कोई अन्य नहीं क्योकि सभी अन्य की अवधारणा अन्य विशिष्ट गुणों के साथ हुई है |


उन्हें वशीकरण ,मोहन के कर्म हेतु अपने मूल गुण के साथ अलग कार्य करना होगा जबकि मातंगी वशीकरण ,मोहन की देवी ही हैं अतः यह आसानी से यह कार्य कर देती हैं |मातंगी के तीन विशिष्ट स्वरुप हैं श्यामा मातंगी ,राज मातंगी और वश्य मातंगी |श्यामा मातंगी स्वरुप मातंगी का उग्र स्वरुप है और वशीकरण ,मोहन, आकर्षण को तीब्रता से करता है |इनका मात्र अति विशिष्ट है ,जिसमे माया [देवी] ,सरस्वती [मातंगी ],लक्ष्मी ,त्रिपुरसुन्दरी[श्री विद्या]और काली के बीज मन्त्रों का विशिष्ट संयोग है जिससे मातंगी की मुख्यता के साथ इन सभी शक्तियों की शक्ति भी सम्मिलित होती है जिससे यह विद्या सब कुछ देने के साथ वशीकरण ,आकर्षण में निश्चित सफलता देती है |


मातंगी ,या श्यामा मातंगी का मंत्र ,मातंगी साधक ही प्रदान कर सकता है ,अन्य किसी महाविद्या का साधक इनके मंत्र को प्रदान करने का अधिकारी नहीं है |स्वयं मंत्र लेकर जपने से महाविद्याओं के मंत्र सिद्ध नहीं होते ,अतः जब भी मंत्र लिया जाए मातंगी साधक से ही लिया जाए ,यद्यापि मातंगी साधक खोजे नहीं मिलते जबकि अन्य महाविद्या के साधक मिल जाते हैं |इनके मंत्र और यंत्र का उपयोग अधिकतर प्रवचनकर्ता ,धर्म गुरु ,tantra गुरु ,बौद्धिक लोग करते हैं जिन्हें समाज-भीड़-लोगों के समूह का नेतृत्व अथवा सामन करना होता है ,ज्ञान विज्ञानं की जानकारी चाहिए होती है |मातंगि के शक्ति से इनमे सम्मोहन -वशीकरण की शक्ति होती है |


मातंगी का यन्त्र इसमें अतिरिक्त ऊर्जा का कार्य करता है जिसे मातंगी साधक निर्मित करता है भोजपत्र पर |मातंगी का यन्त्र बाजार में धातु का मिल जाता है किन्तु श्यामा मातंगी का मिलना मुश्किल होता है |धातु के यन्त्र की प्रभावित भी संदिग्ध होती है जबकि मातंगी साधक द्वारा निर्मित श्यामा मातंगी के यन्त्र में साधक की शक्ति ,मुहूर्त की शक्ति ,भोजपत्र की पवित्रता ,अष्टगंध की विशिष्टता ,मंत्र की शक्ति ,प्राण प्रतिष्ठा की शक्ति सम्मिलित होती है जिससे यह यन्त्र निश्चित प्रभावकारी हो जाता है |धारण करने पर इससे उत्पन्न विशिष्ट तरंगे व्यक्ति और वातावरण को प्रभावित करती हैं जिससे खुद व्यक्ति में भी परिवर्तन आता है और आसपास के लोग भी प्रभावित होते हैं |इसके वाशिकारक प्रभाव में संपर्क में आने वाले लोग बांध जाते हैं |यद्यपि यन्त्र किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए भी बनाया जा सकता है किन्तु व्यक्ति केन्द्रित न रखा जाए तो यह सब पर प्रभाव डालता है |


श्यामा मातंगी का मंत्र और यन्त्र प्रकृति की सभी शक्तियों में सर्वाधिक शक्तिशाली वाशिकारक और मोहक प्रभाव रखता है क्योकि यह इसी की शक्ति हैं ही |यद्यपि इनका यन्त्र काफी महंगा पड़ जाता है ,जबकि अन्य वशीकरण के यन्त्र बाजार में बहुत सस्ते मिल जाते हैं ,यह अलग है की अन्य भले असफल हो जाए इनका यन्त्र प्रभाव जरुर देता है |उदाहरण के लिए ,श्यामा मातंगी का मंत्र केवल इनका साधक ही जप सकता है और वाही अभिमंत्रित कर सकता है यन्त्र को जबकि अगर वह दिन में 5 घंटे लगातार जप करे तो भी तीन हजार मंत्र से अधिक जप नहीं कर सकता ,कारण मंत्र बड़ा और क्लिष्ट होता है |ऐसे में यन्त्र को २१ हजार अभिमंत्रित करने के लिए कम से कम 7 दिन चाहिए ,पूजा प्राण प्रतिष्ठा और बाद में हवन के लिए दो दिन अतिरिक्त चाहिए अर्थात ९ दिन लगेंगे एक यन्त्र बनाने में अर्थात 2000 /- रु ,,500 अन्य पूजा पाठ और हवन आदि के खर्च अर्थात कुल 2500 रु. |इस प्रकार केवल २१ हजार मंत्र से अभिमंत्रित यन्त्र भी 2500 रु. का पड़ जाता है |कम से कम अभिमंत्रित यन्त्र भी 7000 से कम में नहीं आएगा यदि वास्तविक प्रभाव लानी है ,क्योकि बहुत कम अभिमन्त्रण अपेक्षित परिणाम नहीं देगा |इस तरह सबके लिए तो नहीं किन्तु जरूरतमंद के लिए यह यन्त्र लाभदायक होता है |


श्यामा मातंगी यन्त्र का प्रभाव और उपयोग


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१. यन्त्र धारण करने से वशीकरण की शक्ति बढती है |व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ता है |

२. अधिकारी वर्ग को अपने कर्मचारियों पर नियंत्रण और उन्हें वशीभूत रखने में आसानी होती है |

३.कर्मचारी को अपने अधिकारियों को अनुकूल रखने में मदद मिलती है |

४.पति को पत्नी की और पत्नी को पति की अनुकूलता अपने आप प्राप्त होती है और धारण करने वाले का पति या पत्नी वशीभूत होता है |

५.सेल्स ,मार्केटिंग ,पब्लिक रिलेसन का कार्य करने वालों को लोगों का अपेक्षित सहयोग मिलता है |

६.व्यवसायी को ग्राहकों की अनुकूलता मिलती है और अपरोक्त उन्नति में सहायत मिलती है |

७.रुष्ट परिवार वालों को इससे अनुकूल करने में मदद मिलती है |

८.वाद-विवाद ,मुकदमे ,बहस ,समूह वार्तालाप ,आपसी बातचीत में सामने वाले की अनुकूलता प्राप्त होती है |

९. चूंकि यह महाविद्या यन्त्र है और काली की शक्ति से संयुक्त है अतः नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है |

१०. किसी पर पहले से कोई वशीकरण की क्रिया है तो यन्त्र भरे हुए चांदी कवच को सुबह शाम कुछ दिन एक गिलास जल में डुबोकर वह जल व्यक्ति को पिलाने से वशीकरण का प्रभाव उतरता है |

११.किसी भी तरह के इंटरव्यू में परीक्षक पर सकारात्मक प्रभाव देता है |

१२. व्यक्ति विशेष के लिए बनाया गया यन्त्र धारण और मंत्र जप निश्चित रूप से सम्बंधित व्यक्ति को वशीभूत करता है |

१३.दाम्पत्य कलह ,पारिवारिक कलह ,मनमुटाव ,विरोध में लोगों को प्रभावित करता है और व्यक्ति के अनुकूल करता है |

१४.सामाजिक संपर्क रखने वालों को लोगों की अनुकूलता प्राप्त होती है |

१५.ज्ञान-विज्ञानं-अन्वेषण-परीक्षा-प्रतियोगिता ,प्रवचन ,भाषण से समबन्धित लोगों को सफल होने में मदद करता है |


इस प्रकार ऐसा कोई क्षेत्र लगभग नहीं जहाँ इस यन्त्र से लाभ न मिलता हो क्योकि लोगों की अनुकूलता की जरुरत सबको होती है और लोग या व्यक्ति प्रभावित हो अनुकूल हों ,वशीभूत हों तो व्यक्ति को लाभ अवश्य होता है |अतः श्यामा मातंगी साधक द्वारा बनाया गया श्यामा मातंगी यन्त्र ,अन्य किसी यन्त्र से अधिक लाभकारी होता है |यदि कोई श्यामा मातंगी साधक श्यामा यन्त्र को रविपुष्य योग में


कवच दक्षिणा 2500


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Saturday, February 6, 2021

सुलेमानी हकीक रत्न के लाभ




 




सुलेमानी हकीक रत्न के लाभ 


1. काला जादू ख़त्म करता है और बुरी नज़र से बचाव

करता है |


2 .नौकरी और व्यवसाय में आ रही अड़चनो को दूर करता

है ।


3 . सुलेमानी हकीक को धारण करने के बाद लोग आपकी

तरफ आकर्षित होने लगते है और आपको महत्त्व देने लगते

है ।


4 . सुलेमानी हकीक एक ऐसा चमत्कारी पत्थर है जो

आपको लोगो की बुरी नजर से बचा कर रखता है ।


5. आपका व्यवसाय काला जादू या टोना - टोटका की

वजह से मंदा चल रहा है तो सुलेमानी हकीक पत्थर

उसका काट कर देता है और व्यवसाय में बढ़ोतरी होती

है 


6 . अगर घर में बरकत नही होती है तो बरकत होने लगती है |


7 . अगर आपके शत्रु ज़्यादा है या आपका शत्रु आपको

परेशान करता है या आप पर जादू टोना करवाता है तो

आपका उसके किए हुए जादू टोना से बचाव करता है

और आपके शत्रु को परास्त करता है | आपका शत्रु आपके

सामने शक्तिहीन हो जाता है |


8. अगर आपकी सेहत सही नही रहती है आप बार बार

बीमार होते है तो आपको सुलेमानी हकीक धारण

करना चाहिए उस से आपकी सेहत में काफ़ी अच्छा

सुधार होगा


9. सुलेमानी हकीक राहु, केतु और शनि द्वारा आ रही

बाधाओ को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता

मिलने लगती है |


10. आपको सुलेमानी हकीक शनिवार को धारण करना है


व मध्यमा उंगली (middle finger) में धारण करना है व

चाँदी की अंगूठी में धारण करना है व सीधे हाथ में

करना है |


अगर आप उंगली में धारण नही करना चाहते है तो चाँदी

के लॉकेट में भी गले में धारण कर सकते है शनिवार के

दिन |


सुलेमानी हकीक को कोई भी व्यक्ति

धारण कर सकता है

आपको सुलेमानी हकीक कोरियर सर्विस या स्पीड पोस्ट से भेजा जायगा और ट्रॅकिंग नंबर दिया जायगा |

सवाल और उनके जवाब :-

सवाल: सुलेमानी हकीक को कैसे धारण करें ?

जवाब: आपको सुलेमानी हकीक  शनिवार को चाँदी की अंगूठी में बनवा के सीधे हाथ की मध्यमा उंगली (middle finger) में धारण करना है |


 

सवाल: क्या   सुलेमानी हकीक को कोई भी राशि या लग्न वाला व्यक्ति धारण कर सकता है ?


जवाब : हाँ ।


विशेष जानकारी या कुण्डली/हस्तरेखा विश्लेषण या हस्तलिखित कुण्डली संपूर्ण विवरण सहित बनवाने हेतु या किसी भी प्रकार की समस्याओं के ज्योतिषीय एवं तांत्रिकीय सहायता एवं परामर्श हेतु हमारे प्रोफाइल नम्बर पर संपर्क कर सकते हैं।


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Monday, February 1, 2021

धूमावती प्रचंड साधना कर के या करवाकर सम्मोहनी कवच धारण करके उक्त लाभ प्राप्त कर सकते हैं , 9958417249



 



धूमावती प्रचंड साधना कर के या  करवाकर सम्मोहनी कवच धारण करके उक्त लाभ प्राप्त कर सकते हैं , 9958417249


यह देवी साधक के सभी शत्रुओ को समाप्त कर देती हैं . इस देवी का सिद्ध साधक निर्भय हो जाता हैं .


प्रचंड भगवती धूमावती तंत्र की सातवी महाविद्या के रूप जगत में प्रसिद्धि हैं .  माँ भगवती धूमावती का साधना प्रयोग इस प्रकार हैं .


धूमावती मुखं पातु धूं धूं स्वाहास्वरूपिणी |

ललाटे विजया पातु मालिनी नित्यसुन्दरी ||

कल्याणी ह्रदयपातु हसरीं नाभि देशके |

सर्वांग पातु देवेशी निष्कला भगमालिना ||

सुपुण्यं कवचं दिव्यं यः पठेदभक्ति संयुतः |

सौभाग्यमयतं प्राप्य जाते देवितुरं ययौ ||


॥ धूं धूं धूं धूमावती स्वाहा॥


मंत्र जाप संख्या : - सवा लाख

दिशा :- दक्षिण

स्थान :- शमशान , शिवालय , सिद्धि पीठ , या निर्जन स्थान ,

समय :- रात्रि

दिन ;- शनिवार / या धूमावती जयंती

आसन :- सफ़ेद

वस्त्र :- काले रंग की धोती , कला वस्त्र , काला कम्बल ,

हवन :- ( दशांश ) हवन


विधि :-


मोहनी एकादशी या किसी भी शुक्रवार को स्नान आदि से निवित्र होकर कांशे की थाली में समस्त तांत्रिक पूजन सामग्री स्थापित करके पंचोपचार पूजन करना चाहिए व्यक्ति विशेष को वश में करने का अथवा सिद्धि का संकल्प लेते हुए , विधि - विधान पूर्वक गुरु - गणेश वंदना करके , मूल मंत्र का जाप करे , . जाप की पूर्णता पर दशांश हवन करके ब्राह्मण , एवं पांच कुवारी कन्यायो को भोजन सहित उपयुक्त दान - दक्षिणा देकर साधना को पूरा करे .


इस महत्व पूर्ण सम्मोहनी साधना से साधक का व्यक्तित्व अत्यंत सम्मोहक और आकर्षक हो जाता हैं .उसके संपर्क में आने वाला कोई भी व्यक्ति प्रभावित हुए बिना नहीं रहता . यदि कोई साधना करने में असमर्थ हो , तो योग्य विद्द्वान द्वारा या साधना सम्पन्न करा के करवाकर सम्मोहनी कवच धारण करके उक्त लाभ प्राप्त कर सकता हैं .


साधना सामग्री :-


सिद्धि अधेर मंत्रो से अभिमंत्रित धूमावती यन्त्र . काले हकीक की या रुद्राक्ष की माला , गुड़हल के फूल , तेल का दीपक नैवेद्य , कपूर ,एवं पूजन की अन्य आवश्यक सामग्री ,. विधि :- भय रहित ह्रदय से नदी या तालाब में स्नान आदि से निवृत होकर पूर्ण विधि - 


विधान से एकाग्र भाव से साधना करें . मंत्र जाप की समाप्ति पर दशांश यज्ञ हवन करना चाहिए . किसी विशेष प्रयोजन हेतु यदि आप धूमावती साधना अनुष्ठान करने के इच्छुक हैं तो अपनी मनोकामना का स्पष्ट शब्दों में संकल्प करें . यह देवी साधक के सभी शत्रुओ को समाप्त कर देती हैं . इस देवी का सिद्ध साधक निर्भय हो जाता हैं .


.दक्षिणा शुल्क - 1100


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Sunday, January 24, 2021

अगर बिजनेस में हो रहा है नुकसान तो राशि के अनुसार जरूर करें ये छोटा सा उपाय, अगले ही दिन से दिखेगा प्रत्यक्ष असर


 



अगर बिजनेस में हो रहा है नुकसान तो राशि के अनुसार जरूर करें ये छोटा सा उपाय, अगले ही दिन से दिखेगा प्रत्यक्ष असर 


तेजी से बढ़ती तकनीकि ने नौकरी और बिजनेस दोनों में ही कॉम्पीटिशन लाकर खड़ा कर दिया है। कई बार देखा जाता है कि लोगों का बिजनेस बहुत अच्छा चल रहा होता है लेकिन एकदम से पता नहीं क्या हो जाता है कि सब कुछ तहस-नहस हो जाता है।


 कई बार जलन कि भावना से लोग दूसरे के बिजनेस को बंद कराने के लिए कई ऐसे टोटके करते है जो सफल हो जाते है और आपको परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


अगर आपका बिजनेस भी ठीक नहीं चल रहा है और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है। 


शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित ओम दीक्षित आपको राशि के अनुसार कुछ आसान से उपाय बताने जा रहे हे जिसकी मदद से आप अपने बिजनेस को फिर से एक नई राह दे सकते हो, हो रही बिजनेस में हानि से बहुत जल्द ही उभर सकते है।


मेष- बारह गोमती चक्र लेकर उसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर दुकान या अपने ऑफिस के बाहर मुख्य दरवाजे पर लटका दें। दुकान ठीक से चलने लगेगी।


वृषभ- अगर किसी ने आपके व्यवसाय में टोटका कर दिया है तो उसे दूर करने के लिए रविवार के दिन दोपहर में पांच नींबू काटकर व्यापारिक प्रतिष्ठान में रख दें। इसके साथ एक मुट्ठी काली मिर्च और एक मुट्ठी पीली सरसों रख दें। सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।


मिथुन- इस राशि के लोग अपने व्यापार को सही करने के लिए कांसे के छोटे से बर्तन में कपड़ा बांधकर दुकान की पूर्व दिशा की ओर रख दें।


कर्क- एक एकाक्षी नारियल लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठान में पूजा स्थान पर रखें। नियमित इस नारियल को धूप-दीप दिखाएं इससे व्यापार में उन्नति होती है।


सिंह- इस राशि के लोग चांदी के बर्तन में सेंधा नमक का एक छाटा सा टुकड़ा लेकर पूजा स्थान की पूर्व दिशा में रखें।


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कन्या- इस राशि के लोग कपूर के पांच टुकड़ों को एक कटोरी में रखकर दुकान की पूर्व दिशा की ओर रखें।


तुला- इस राशि के लोग अपने ऑफिस में सफेद रंग की किसी भी भगवान की मूर्ति को पूर्व दिशा में रख दें।


वृश्चिक- इस राशि वालों को शहद की शीशी लाल कपड़े में लपेट कर घर या दुकान के दक्षिणी कोने में रखनी चाहिए।


धनु- इस राशि के लोग पीले कपड़े में कोई भी धार्मिक पुस्तक लपेट कर घर, दुकान या फैक्टरी के पूर्वी कोने में रखें।


मकर- इस राशि के लोग नारियल तेल में काले तिल एवं नारियल पर काला धागा बांध कर दोनों चीजें घर या दुकान के पूर्वी कोने में रखें।


कुंभ- नारियल के दो सूखे गोलों में अनाज भरकर एक का दान कर दें और दूसरा घर या दुकान में रखें।


मीन- इस राशि के लोग चांदी के सिक्के को लाल कपड़े में लपेटकर व्यापारिक स्थान की दक्षिण दिशा में टांग दे।


और भी अनेक प्रकार के समस्याओं में फंसे हुए हैं तो संपर्क करें और खास विधि प्रयोग करके जीवन में होने वाले हर प्रकार के समस्याओं का समाधान प्राप्त करें ...


 

और साथ में आपकी शनि की साढ़े साती की दशा , ढैया कब कब चलेगी और उनमे आपके साथ क्या क्या होगा तथा उसके उपाय भी बताते है और आपका भाग्य रतन भी.


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Friday, January 22, 2021

जानें कैसे होता है सियार सिंगी से व्यापार और नौकरी में लाभ या प्रमोशन…


 




जानें कैसे होता है सियार सिंगी से व्यापार और नौकरी में लाभ या प्रमोशन…


 सियार सिंगी (Siyar Singhi) बहुत ही चमत्कारी वस्तु होती है इसे घर में रखने से सकारात्मक उर्जा (Positive Energy) का अनुभव होता है, सियार सिंगी बालों के एक गुच्छे कि तरह होती है, असल में सियार के सींग नहीं होते परन्तु कुछ सियारों के नाक के ऊपर बालो का एक गुच्छा बन जाता है। 


धीरे-धीरे वह कड़ा और बड़ा हो जाता है और सींग जैसा बन जाता है इसे सियार सिगी कहते है और यह हजारों में से किसी एक के नाक पर होता है, इसमें वशीकरण की अद्भुत शक्ति होती है। 


यदि इसे सिद्ध कर लिया जाए तो यह शक्ति हजारों गुना बढ़ जाती है। इसके द्वारा आप किसी से भी अपना मनोवांछित काम करवा सकते है।


इसे सिद्ध करने की अनेकों विधियां है पर यदि इसे होली या दीपावली के दिन निम्न विधि से सिद्ध किया जाए तो इसका चमत्कार बड़ी जल्दी नजर आता है।


 आपके सबके लिए एक आसान और प्रमाणिक विधि जो बहुत प्रयासों के बाद मिल सकी है उसका उल्लेख हम यहां कर रहे है, और उम्मीद करते है कि यह आप लोगों के लिए उपयोगी होगी, यह विधि दीपावली से पहले धन तेरस बाले दिन शुरू की जाती है मतलब दीपावली तक रोज होना चाहिए।


सियार सिंगी को सिद्ध करने का अचूक मंत्र


ॐ चामुण्डाये नमः


सियार सिंगी को सिद्ध करने की विधि


दीपावली से पहले धन तेरस को एक सियार सिंगी का एक जोड़ा लें। उसे लाल कपडे पर स्थापित करे। लाल आसन बिछा कर लाल वस्त्र धारण कर बैठ जाएं। सरसों के तेल का दीपक जलाएं। 


सियार सिंगी पर गंगा जल छिड़कें। चावल चढ़ाएं और पांच लौंग साबुत और पांच चोटी इलायची चढ़ाये। उपरोक्त मंत्र 2100 बार जप करे। जप समाप्ति के बाद अग्नि में 21 आहुति गुग्गल की दे। ऐसा रोज दीपावली तक करें। दीपावली वाली रात पूजा के बाद इस नीचे लिखे मंत्र का सियार सिंगी के सामने 1100 बार जाप करें।


सियार सिंगी सिद्ध मंत्र


ॐ नमो भगवते रुद्राणी चमुन्डानी घोराणी सर्व पुरुष क्षोभणी सर्व शत्रु विद्रावणी। ॐ आं क्रौम ह्रीं जों ह्रीं मोहय मोहय क्षोभय क्षोभय, मम वशी कुरुं वशी कुरुं क्रीं श्रीं ह्रीं क्रीं स्वाहा।


इस मंत्र को जपने के बाद सियार सिंगी को किसी चांदी या ताम्बे की डिब्बी में मीठा सिन्दूर डाल कर उसमें पांच लौंग पांच इलायची और एक कपूर का छोटा सा टुकड़ा डाल कर रख ले


सियार सिंगी प्रयोग विधि


जब किसी पर प्रयोग करना हो तो इस डिब्बी को खोल कर सियार सिंगी के सामने दोनों मंत्रों का एक एक माला जाप करे और उस व्यक्ति का नाम बोल कर चामुंडा मां से उसे अपने अनुकूल करने की प्रार्थना करे और डब्बी को अपनी जेब में रखकर चले जाएं आपका कार्य सिद्ध हो जायेगा।


सियारसिंगी में असली या नकली की पहचान कैसे करें?


कुछ जानकारी है जिसके आधार पर आप लोग असली और नकली की पहचान कर सकते हैं। परन्तु उसके लिए कुछ समय की जरुरत होती है – पहचान :सियारसिंगी के बाल बढ़ते हैं। सियारसिंगी के छोटे-छोटे सीग होते है जों बढ़ते हैं। सियारसिंगी का आकार भी बढ़ता है और उन का जों हिस्सा जहा बाल नहीं होते सिंदूर के साथ गीला रहता है


कैसे करें सियार सिंगी से वशीकरण


सियार सिंगी का प्रयोग, सियार सिंगी की पहचान/फायदे, सियार सिंगी मंत्र- सियार सिंगी के बारे मे माना गया है इसको अपने घर मे रखने से जातक के घर मे हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। साथ ही ये तंत्र-मंत्र साधना व विधि का एक बड़ा चमत्कारी रूप है।


 सियार सिंगी नाम को सुनकर व्यक्ति कल्पना करता है की ये सियार के सिर पर उगा वो सिंग है, जिसका प्रयोग साधना के लिए किया जाता है, पर दरअसल उनके सिंग नहीं होते, बस नाक के ऊपर बालों का गुच्छा उग आता है, जो वक़्त के साथ बड़ा होने के साथ-साथ कड़ा हो जाता है और यही सियार सिंगी कहलता है। जिसका इस्तेमाल वशीकरण के लिए होता है।


सियार सिंगी वशीकरण मंत्र और सिद्ध करने की विधि


“ॐ ह्रीं गं जूं सः (जिसको वश में करना हो उसका नाम ले) में वश्य वश्य कुरु स्वाहा”


इस साधना को करने की विधि कुछ इस प्रकार है- शनिवार के दिन इसको प्रारम्भ करके 7 दिनों तक करे और हर दिन 21 माला जाप करना होगा। मंत्र जप के लिए मुंगे की माला का इस्तेमाल करके सूर्यास्त के बाद साधना शुरू करे। ये साधना करते हुए पश्चिम दिशा की तरफ मुह रखे और आपका वस्त्र लाल रंग का होना चाहिए।


 आसान भी उसी प्रकार लाल रंग का रखे। मंत्र सिद्ध होने पर आप जिस व्यक्ति को वश मे करना चाहते है, उसके सामने जाकर बताए मंत्र को 5 बार जप करे। ध्यान रहे की आप सिंगी को अपनी जेब में रखे या लॉकेट में धारण करके पहन सकते है


सियार सिंगी से व्यापार और नौकरी में लाभ या प्रमोशन


सियार सिंगी का प्रयोग लोग कई बार उस हालत मे भी करते है जब उनकी प्रगति नहीं हो रही होती या किसी कारण से व्यापार सही नहीं चल रहा होता। ऐसे मे एक असरदार मंत्र है-


“ॐ नमो भगवती पद्मा श्रीम ॐ हरीम, पूर्व दक्षिण उत्तर पश्चिम धन द्रव्य आवे , सर्व जन्य वश्य कुरु कुरु नमः”


इसे आप बुधवार के दिन शुरू करे और सियार सिंगी को किसी एक स्टील की प्लेट में स्थापित करले। ध्यान रखे 21 दिनों तक इसी सियार सिंगी के सामने आपको रोज 108 बार बताए मंत्र का जप करना होगा। मंत्र जप से पहले सियार सिंगी स्थापित करके उसके ऊपर कुमकुम या केसर से तिलक लगाना होगा और चावल व फूल भी आपको अर्पित करने होंगे।


 21 दिन तक जप करके अब आप इसे एक डिब्बी में ध्यान से रख दे। फिर इसे अपनी दूकान मे किसी सुरक्षित जगह रखे और फिर 21 बार उसी मंत्र का जप करे। ऐसा करने के बाद साधक स्वय अपने व्यापार मे होने वाली तरक्की को देख सकता है।


ऐसे करें सिद्ध सियारसिंगी को


गीदड़ एक वन्य प्राणी है जिसे सियार भी कहा जाता है इस प्रजाति के बहुत सी नस्ले होती है और एक नस्ल ऐसी भी होती है जिसके माथे के ऊपर एक बहुत छोटा सा सींघ होता है जो थोड़ा सख्त होता है और उसके ऊपर भूरे और काले रंग के बाल होते हैं ||


 इसको गीदड़ सिंघी कहा जाता है मगर सींग वाला गीदड़ बहुत हे दुर्लभ नस्ल है। गीदड़ सिंघी की ज्योतिष में बहुत ही महत्वता है क्यूंकि इसमें नकारात्मक ऊर्जाओं को खत्म करने और सकारत्मक ऊर्जाओं को अपनी तरफ आकर्षित करने की शक्ति होती है। गीदड़ सिंघी के उपयोग से इंसान बहुत ही भाग्यशाली बन सकता है और बहुत सारा धन प्राप्त कर सकता है ।


अगर गीदड़ सिंघी को अभिमंत्रित कर लिया जाये तो इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। गीदड़ सिंघी को सिन्दूर की डिब्बी में बंद करके रखा जाता है। नीचे दी हुई विधि को कृपा उसे इस्तेमाल करने से पहले उसे ध्यान से पढ़ लें क्योंकि इस विधि में गलती की कोई गुंजाइश नहीं है।


गीदड़ सिंघी के उपयोग


(1) धन और सम्पति प्राप्त करने के लिए


(2) भाग्यशाली बनने के लिए


(3) किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने ले लिए


(4) पति पत्नी के बीच की अनबन ख़त्म करने के लिए


(5) व्यवसाय में अधिक मुनाफा कमाने के लिए


(6) मनचाहा प्यार पाने के लिए


(7) किसी को भी अपने तरफ आकर्षित करने के लिए


(8) क़र्ज़ मुक्त होने के लिए


(9) कोर्ट केस में जीत हासिल करने के लिए


कैसे करते है गीदड़ सिंघी का प्रयोग??


गीदड़ सिंघी को उपयोग में लाने से पहले उसको अभिमंत्रित किया जाता है जिससे उसकी शक्ति कई गुना हो जाती है फिर आप उसके इस्तेमाल से अपने मन की कोई भी इच्छा पूरी कर सकते है।


चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


 


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


राजगुरु जी


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


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Wednesday, January 20, 2021

तूफानों से टक्कर लेने वाली बगुलामुखी देवी


 



तूफानों से टक्कर लेने वाली बगुलामुखी देवी 


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संसार में कोई साधना प्रयोग सफल हो न हो मगर बगुलामुखी देवी की साधना आज भी  उतनी ही तीव्र है जितनी कि हजारो वर्ष पूर्व थी समय 

के साथ साथ सभी साधना प्रयोगो में कुछ ना कुछ अंतर अवश्य आता है 


और उनके मंत्रो में सुधार करना पड़ता है मगर कहना ही पड़ता है कि ये 

साधना आज भी उतना ही पैनापन लिए हुए है इसमें रत्तीभर का फर्क न- ही पड़ा है हमारे जीवन में कोई न कोई परेशानी अवश्य ही लगीरहती है 


कोई न कोई शत्रु नया पैदा होता ही रहता है और हम  प्रयास करके  भी 

छुटकारा प्राप्त नहीं कर सकते लिहाजा दिन पर दिन अंदर ही अंदर घुटते 

रहते है कभी किसी तांत्रिक ,मांत्रिक ,ज्योतिषी के चक्कर लगाते रहते है ले -

किन हमें कही सफलता नहीं मिलती आज के वैज्ञानिक युग में  सोचते  है 

कि मन्त्र,तंत्र जैसा कुछ होता नहीं है मगरअपने पडोसी को या अपने नज -दीक पहचान वालो को आगे बढ़ता हुआ देख जलने लगते है और किसी भी प्रकार उनको नुकसान करने कीकोशिश करते है ऐसे में वे किसी टोना टोटका 

करने वाले  व्यक्ति से कुछ ख़राब क्रियाएँ या कहे टोना ,टोटका करा देते है 


यह  टोना, टोटका करना -कराना तो बहुत ही आसान होता है  मगर इस

तरह की क्रियाओ को समाप्त करना काफी कठिन होता है इस सब के चक्कर

में व्यक्ति  उलझता जाता है कि उसका तन, मन , धन तीनो नष्ट होते रहते 

है औरउसको  मानसिक रूप से भी परेशानी रहने लगती है वह बेचारा ऐसे कुचक्र में फस जाता है मगर खुद उसे ही कुछ भी पता नहीं चलता शत्रु भी  हमेशा पीठ पीछे वार पे वार किया करता है और हमें पता ही नहीं चलता ऐसे में हम करे भी तो क्या करे किस पर दोषारोपड करेकुछ समझ  में नहीं आता ऐसे में लोग अक्सर किसी झड़ फूक करने वाले व्यक्ति में पद जाते है  


और वह भी धीरे धीरे धन ऐंठता रहता है क्योकि सच बात यह है कि ऐसी  

क्रियाओ को  करना तो बहुत आसान है मगर पूर्णरूप से निदान कर पाना 

इतना आसान काम नहीं है ऐसे में हमारे पास एक ही रास्ता बचता है कि

 हम ऐसे सिद्धपुरुष को ढूढे जिसे बंगलामुखी  सिद्ध हो मगर ऐसे योगी  

सन्यासीमिलना बहुत कठिन कार्य है मुझे याद है किजब में साधक के रूप में साधना करता था तब गुरु मुख से सुनने को मिला था कि ऐसी साधना सीखने के लिए जीवन के पूरे दस साल लगा दिए मगर कोई भी पूर्णता से जानने वाला कोई सिद्ध पुरुष नहीं नहीं मिला साधना को प्राप्त करने के लिए हिमा- लय ,जंगलो ,पहाड़ो ,नगर -नगर गांवो मतलब  कि कहा -कहा  नहीं  ढूढ़ा  मगर निराशा ही  हाथ लगी तब कही जाकर एक सिद्ध पुरुष से मुलाकात  हुई यह सिद्धपुरुष ,झाँसी के पास दतिया के रहने वाले थे जब गुरू जी ने प्रमाण माँगा तो वे दूर एक खाली स्थान पर ले गए एक खम्बे पर कौआ बैठा था उन सिद्ध नेउस कौआ की औरदेखा कौआ भटाक से नीचे आ गिरा कहने का मतलब ये साधना इतनी तीव्र होती है  कि कोई भी शत्रु आपके  सामने  खड़ा नहीं रह सकता इसी शक्ति के माध्यम से किसी भी प्रकार का तांत्रिक प्रयोग को या टोना टोटके को दूर किया जा सकता है इसके माध्यम से अनेक कार्य किये जा सकते है शेष आगे --------- 


Note:-


अगर आप योग से सम्बंधित किसी भी विषय पर जानना चाहते तो      नीचे लिखे दिए दिये पते पर संपर्क करे | 


साधना प्रायोग से सम्बंधित जानकारी के लिए फ़ोन पर बात करें .


आपको कहीं भी नहीं मिलने वाली अगर आप को कहीं मिल भी जाती है तो उसकी सही  विधि और सही विधान नहीं मिलेगा यह साधना केवल गुरु मुख और गुरुद्वारा ही मिल सकता है 


चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।


 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है


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राजगुरु जी


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Tuesday, January 19, 2021

अघोरेश्वर प्रत्यक्षीकरण साबर प्रयोग


 




अघोरेश्वर प्रत्यक्षीकरण साबर प्रयोग -------


साबर साधनाओ के अद्बुध करिश्मो के बारे मे तो सब परिचित ही है. अघोर मार्ग का उद्धार करने वाले भगवान श्री दत्तात्रेय और साबर मंत्रो का सबंध अपने आप मे अटूट है. श्री दत्तभगवान की प्रेरणा तथा आशीर्वचन से नाथ योगियो द्वारा साबर मंत्रो का प्रचार प्रसार हुआ था.


 इस प्रकार अघोर साधनाओ मे भी साबर मंत्रो का प्रयोग प्रचुरमात्रा मे होने लगा था. अघोरी के लिए भगवान अघोरेश्वर मुख्य देव है, जिनके मुख से समस्त तन्त्रो का सार निकलता रहता है. जो शिवतत्व को अपने अंदर स्थापित कर सदा शिव आनंद से युक्त हो कर अपने आप मे ही लिन रहता है वही अघोरी है. 


सिद्ध अघोरी की यही पहचान है जो अघोरेश्वर की तरह ही निर्लिप्त रहता है समस्त विकारों भेदभाव तथा पाशो के बंदन से छूट गया है. ज़रुरी नहीं की वह स्मशान भष्म से युक्त हो, नग्न रहे या घृणा पर विजय होने का प्रदर्शन करे. जो इन सब से ऊपर उठ चूका हो, जिसके लिए ये भेद ही न हो, वही तो है अघोरी. 


किसी समय मे इनका घर मे आना, स्वयं शिव के आने जितना सौभाग्यदायक माना जाता था लेकिन कुछ स्वार्थपरस्तो ने तो कुछ हमारी अवलेहना भ्रम और कुतर्क ने इस मार्ग का ग्रास कर उसे भय का रूप दे दिया. खेर, अघोरी के लिए यह ज़रुरी है की वह अघोरेश्वर के चिंतन मे लिन रहे. 


भगवान अघोरेश्वर स्मशान मे बिराजमान है, सर्पो से लिप्त वह स्मशान भस्म को धारण किये हुए है. जिनके चेहरे पर आनंद ही है तथा और कोई भाव हे ही नहीं. ऐसे अघोरेश्वर के श्रेष्ठ रूप का ध्यान करना साधक के लिए उत्तम है. 


प्रस्तुत साधना भगवान अघोरेश्वर के इसी रूप के दर्शन प्राप्त करने की साधना है. वस्तुतः यह अपने आप मे अत्यधिक महत्वपूर्ण साधना है जिसको करने के बाद साधक का चित हमेशा निर्मल रहता है, भेद से मुक्ति मिलती है 


तथा सर्वसर्वात्मक भाव का उसमे उदय होता है. साथ ही साथ अघोरेश्वर के वरदान से साधक अष्टपाशो से मुक्त होने लगता है. इस प्रकार की भावभूमि प्राप्त होते साधक को विविध प्रकार की साधनाओ मे सफलता प्राप्त होने लगती है. 


वैसे भी अघोरी के लिए यह एक अत्यधिक महत्वपूर्ण क्रम है की साधनामार्ग के इष्ट के दर्शन कर उनके आशीर्वाद प्राप्त करना.


साधक को चाहिए की वह इस साधना को स्मशान मे ही सम्प्पन करे. रात्री मे ११:३० के बाद इस साधना को शुरू करना चाहिए. साधना को सोमवार से शुरू करे. साधक को स्नान कर अघोर गुरु पूजन सम्प्पन कर विशेष शाबर मन्त्र का ५१ माला जाप करना चाहिए. 


मंत्र जाप के लिए साधक को रुद्राक्ष माला का प्रयोग करना चाहिए. आसान तथा वस्त्र काले हो. आसान के निचे चिता भष्म को बिछा देना चाहिए. इस क्रम को ११ दिन तक करने पर विविध अनुभूतिया होने लगती है, साधक जब इसे २१ दिन कर लेता है तब उसे भगवान अघोरेश्वर के दर्शन होते है.


ॐ अघोर अघोर प्रत्यक्ष वाचा गुरु की अघोरनाथ दर्शय दर्शय आण सिद्धनाथ की


साधक को भयभीत ना हो कर वीर भाव से यह साधना करनी चाहिए.


चेतावनी -


 सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है


राजगुरु जी


महाविद्या आश्रम


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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...