Monday, June 8, 2020

श्यामा भैरवी साधना







श्यामा भैरवी साधना


काली महाकाली कालिके परमेश्वरी । 
सर्वानन्दकरी देवी नारायणि नमोऽस्तुते ।।

स्त्री केवल वासनापूर्ति का एक माध्यम ही नहीं, वरन शक्ति का उदगम भी होती है और यह क्रिया केवल सदगुरुदेव ही अपने निर्देशन में संपन्न करा सकते हैं।

💃 भैरवी साधना इसी श्रेणी की साधना है, किन्तु श्यामा पीठ साधना से कुछ कम स्तर की। वस्तुतः जब भैरवी साधना का संकेत सदगुरुदेव से प्राप्त हो जाय, तब साधक को यह समझ लेना चाहिए, कि वे उसे तंत्र की उच्च भावभूमि पर ले जाने का मन बना चुके हैं। 

💃भैरवी साधना, भैरवी साधना के उपरांत श्यामा साधना और तब वास्तविक तंत्र की साधना का प्रारम्भ होता है, जहां साधक अपने ही शरीर के तंत्र को समझता हुआ, अपनी ही अनेक अज्ञात शक्तियों से परिचय प्राप्त करता हुआ न केवल अपने ही जीवन को धन्य कर लेता है, वरन सैकडों-हजारों के जीवन को भी धन्य कर देता है।

व्यक्ति के अनेक बंधनों में से सर्वाधिक कठिन बंधन है उसकी दैहिक वासनाओं का - और तंत्र इसी पर आघात कर व्यक्ति को एक नया आयाम दे देता है। वास्तविक तंत्र केवल वासना पर आघात करता है, न कि व्यक्ति की मूल चेतना पर। 

इसी कारणवश एक तांत्रिक किसी भी अन्य योगी या यति से अधिक तीव्र एवं प्रभावशाली होता है।

'भैरवी' के विषय में समाज की आज जो धारणा है, उसे अधिक वर्णित करने की आवश्यकता ही नहीं, किन्तु मैंने अपने जीवन में भैरवी का जो स्वरुप देखा, उसे भी वर्णित कर देना अपना धर्म समझता हूं। 

शेष तो व्यक्ति की अपनी भावना पर निर्भर करता है, कि वह इसे कितना सत्य मानता है अथवा उसे अपनी धारणाओं के विपरीत कितना स्वीकार्य होता है।

आज से कई वर्ष पूर्व मैं अपने सन्यस्त जीवन में साधना के कठोर आयामों से गुजर रहा था, उसी मध्य मुझे भैरवी-साहचर्य का अनुभव मिल सका। संन्यास का मार्ग एक कठोर मार्ग तो होता ही है, साथ ही उसकी कुछ ऐसी जटिलताएं होती हैं, जिसे यदि मैं चाहूं, तो वर्णित नहीं कर सकता, क्योंकि वे भावगत स्थितियां होती हैं, जिन्हें योग की भाषा में आलोडन-विलोडन कहते हैं।

 संन्यास केवल बाह्य रूप से ही एक कठोर दिनचर्या नहीं है, वरन उससे कहीं अधिक आतंरिक कठोरता की दूःसाध्य स्थिति भी है। कब किस समय गुरुदेव का कौन सा आदेश मिल जाय और बिना किसी हाल-हवाले या ना-नुच के उसे तत्क्षण पूर्ण भी करना पड़े, इसको तो केवल सन्यस्त गुरु भाई-बहन समझ सकते हैं।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

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पिशाच बाधा का पितृदोषों से संबंध







पिशाच बाधा का पितृदोषों से संबंध


कभी कभी बुरी आत्मायें संतानहीनता के अलावा जातक के भाग्य के विकास पर।

 भी बुरा प्रभाव डालती हैं।ज्योतिष् शास्त्र में पिशाच बाधा से संबंधित योग निम्नलिखित हैं।

●किसी भी जन्मकुंडली में राहु या केतु सप्तम भाव में होने पर पिशाच बाधा होती है

●किसी जातक की कुंडली में लग्न में राहु ग्रस्त चंद्रमा होनेऔर पंचम अथवा नवम में पापग्रस्त शनि एवं मंगल होने पर पिशाच बाधा होती है।

●लग्न में शनि राहु की युति हो तो पिशाच बाधा होती है।

●लग्न में केतु किसी भी पापी ग्रह से युत या दृष्ट होने पर पिशाच बाधा होती है

●लग्न में शुक्र हो और  सप्तम भाव में शनि हो एवं किसी भी भाव में पापी ग्रह दृष्ट चन्द्र होने से भूत-प्रेत पिशाच बाधा का योग होता ह

●शनि से युक्त चन्द्रमा अष्टम भाव में होने पर पिशाच बाधा का योग बनता है।

●किसी भी पाप ग्रह से चन्द्रमा छठे  भाव में हो और सप्तम में राहु या केतु हो तो ऐसे जातक को पिशाच बाधा का योग बनता है।

●किसी भी जातक की कुंडली में शनि, राहु द्वितीय भाव में हों तो पिशाच बाधा होती है।

●किसी जन्म कुंडली में छठे स्थान पर पापी ग्रह दृष्ट राहु या केतु हो तो पिशाच बाधा होती है

●किसी जातक की कुंडली में अष्टम भाव में क्षीण चंद्रमा मंगल या राहु से युत हो तो पिशाच बाधा होती है।

●किसी जातक की कुंडली में लग्न में बुध केतु पापी ग्रह से दृष्ट हों तो पिशाच बाधा होती है।

●शिव-शक्ति या विष्णु, सूर्य की उपासना करें मंदिर नियमपूर्वक जायें।पीपल वृक्ष की सेवा करें।गुरुजनो के चरण छूकर आशीर्वाद लें।

और जादा जानकारी और समाधान और उपाय या रत्न विश्लेषण समाधान प्राप्त के लिए सम्पर्क करे।

 जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 

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राजगुरु जी

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Sunday, June 7, 2020

भैरवी साधना और कामाख्या तंत्र







भैरवी साधना और कामाख्या  तंत्र  


तंत्र में अगर एक महिला है तो भैरवी बनेगी और उसका मार्ग संभोग से हो कर जाता - ये वो ज्ञान जो आज कल हर नई साधिका से दी जाती है।

परंतु ये अर्ध सत्य है, या ये बोला जाए कि ये सत्य से काफ़ी दूर है।

आज साधना के विषय मे कुछ गुड़ रहस्य बताता हूँ।
कौन सा साधक भैरवी साधना कर सकता है?
१. जिससे वज्रोली साधना आती हो।

२. जो काम नही साधना भाव से भैरवी साधना कर पाए।
भैरवी को तीन तरीके से सिद्ध किया जा सकता है।

१. माँ के रूप में।

२. कुमारी या बेटी के रूप में।

३. अर्धग्नि या लाता भैरवी के रूप में।

जब भैरवी के 3 स्वरूप है ।तो लोग उसे माँ या बेटी के स्वरूप में क्यों नही अपनाते।उनको लता भैरवी ही क्यों चाहिए।मतलब वो अपनी काम के रूप में  उपयोग  ही करना चाहते है ।

लता भैरवी साधना 12 पहर यानी 36 घंटे की साधना है जिसमे भैरव और भैरवी दोनों उच्य कोटि के साधक होने चाहये। भैरव का काम होता है साधना पर ध्यान देना और भैरवी का काम है इस प्रक्रिया में सहायक होना। एक भी बीच मे साधना छोड़ नही सकता  ।

कोई नई कन्या लता भैरवी नही बन सकती। और कोई साधक जो वज्रोली न जानता हो वो भैरव नही हो सकता। 

  वैसे ओर भी बहुत बातेहै भैरवी साधना को ले कर पर इस मंच की मर्यादा देखते हुवे ज्यादा नही कह सकता ।

(क्रिया का मंत्र व तंत्र यहां नही बता रहा कियूंकि इसका दुरुपयोग होता है)

विशेष चेतावनी

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उपरोक्त साधना पद्धति मात्र जानकारी के उद्देश्य से दिया जा रहा है |जैसा की शास्त्रों में ,किताबों में भैरवी की साधना दी हुई है ,हम भी ब्लॉग और पेज पर मात्र जानकारी देने के उद्देश्य से इसे प्रकाशित कर रहे हैं |

मात्र इस लेख के आधार पर साधना न करें |साधना पूर्व अपने गुरु से अनुमति लें और किसी सिद्ध काली साधक से सुरक्षा कवच बनवाकर जरुर धारण करें ,जो ऐसा हो की सुरक्षा भी करे औए पिशाचिनी के आगमन को रोके भी नहीं |

योग्य ग्यानी से समस्त प्रक्रिया और मंत्रादी समझ लें ,जांच लें |किसी भी हानि अथवा परेशानी के लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे |

धन्यवाद.

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तारां संसारसारां त्रिभुवनजननीं सर्वसिद्धिप्रदात्रीं |







तारां संसारसारां त्रिभुवनजननीं सर्वसिद्धिप्रदात्रीं |


भगवती श्री महाविद्या तारा देवी के संदर्भ में कुछ भी लिखना या कहेना सूर्य को दीप दिखाने के सामान ही है. आदि काल से ही अपने साधको के मध्य देवी के हर एक स्वरुप का प्रचनल उनके स्नेह एवं प्रेम के कारण तंत्र क्षेत्र में वृहद रूप से विद्यमान है.

 देवी की साधना आदि ऋषि वसिष्ठ विश्वामित्र गोरक्षनाथ तथा भगवान श्री तथागत ने भी की थी. क्यों की भगवती तारा ही तारण करने वाली अर्थात भोग से मोक्ष की तरफ ले जानी वाली है.

 उन्ही को ही तंत्र ग्रंथो में शक्ति के मूल रूप में मानकर अभ्यर्थना की है की हे भगवती तारा आप ब्रह्मांडीय संसार अर्थात सभी भोग एवं मोक्ष कारक तत्त्व का सार है, आप ही त्रिभुवन की स्वामिनी जन्मदात्री है तथा आपके माध्यम से ही सर्व सिद्धि की प्राप्ति होती है. 

और इसी लिए देवी की साधना सभी तंत्र मत्तो में सामान रूप से होती रही है. देवी से सबंधित कई प्रकार के प्रयोग एवं अनुष्ठान आदि प्रसिद्द है लेकिन गुप्त रूप से भी कई ऐसे विधान है जो की सिर्फ सिद्धो के मध्य प्रचलित रहते है. 

ऐसे ही कई विधान देवी के पारद विग्रह के माध्यम से संपन्न किये जाते है.

 आज हमारे कई भाई बहेनो के पास यह अति दुर्लभ ‘पारद तारा’ विग्रह विद्यमान है जो की आप सब ने जिस तीव्रता एवं उत्साह के साथ स्वीकार किया था. 

इसी विग्रह के सबंध में कई दिव्य प्रयोग आप सब के मध्य रखने के लिए बराबर प्रयास किया लेकिन कई प्रकार की योजना में व्यस्तता की वजह से यह प्रयोग आप से के मध्य प्रस्तुत करने में विलम्ब होता रहा है, कुछ दिन पूर्व ही इस विग्रह के माध्यम से संपन्न होने वाला एक अद्भुत तारा विधान प्रस्तुत किया गया था, अब इसी कड़ी में और दो विशेष प्रयोगों को आप सब के मध्य रखा जा रहा है जिनमे आकस्मिक धनप्राप्ति से सबंधित भगवती तारा प्रयोग एवं नीलतारा मेधा सरस्वती प्रयोग शामिल है.

 यह दोनों अद्भुत एवं तीव्र विधान है जो की साधक को शिघ्रातीशीघ्र फल प्रदान करने में समर्थ है. विधान सहज होने के कारण कोई भी साधक इसे संपन्न कर सकता है. आशा है की निश्चय ही साधकगण इन देव दुर्लभ प्रयोगों से लाभ की प्राप्ति करेंगे.

आकस्मिक धन प्राप्ति भगवती तारा प्रयोग –

प्रस्तूत प्रयोग आकस्मिक धन प्राप्ति से सबंधित भगवती तारा का विशेष प्रयोग है. इस प्रयोग को सम्प्पन करने पर साधक को विशेष धनलाभ की प्राप्ति होती है, वस्तुतः हमारे जीवन में हम कई प्रकार के दोषों के कारण एवं प्रारब्ध जन्य कारणों के कारण कई बार भोग लाभ की प्राप्ति से वंचित रहते है.

 एसी स्थिति में दीनता युक्त स्थिति से बाहर निकलने के लिए आदि काल से हमारे सिद्धो एवं ऋषियों ने भगवती तारा की साधना उपासना के सन्दर्भ में एक मत्त में स्वीकृति दी है.

 यूँ भगवती तारा को धनवर्षिणी, स्वर्णवर्षिणी आदि नामो से संबोधित किया गया है तो उसके पीछे यह तथ्य है की निश्चय ही देवी साधक की धन सबंधित सर्व अभिलाषा को पूर्ण करने में समर्थ है अगर प्राण प्रतिष्ठित पारद तारा विग्रह के सामने देवी के मूल मन्त्र को ही साधक पूर्ण समर्पण से युक्त हो कर जाप कर ले तो सभी समस्याओ से उसे मुक्ति मिलती है यह सिद्धो का कथन है.

 फिर भी कई बार विशेष प्रयोग आदि से भी लाभ प्राप्ति के लिए साधक प्रयत्न कर सकता है. देवी के पारद विग्रह से सबंध में सिद्धो के मध्य गुप्त रूप से प्रचलित जो प्रयोग है उनमे धन प्राप्ति के विशेष एवं उच्चकोटि के प्रयोग शामिल है. लेकिन इनमे से तीव्र एवं गृहस्थ साधको के लिए उपयुक्त विधान निम्न रूप से है.

 यह विधान सहज है एवं साधक अपने घर में यह विधान कर सकता है. साथ ही साथ यह प्रयोग अल्प मन्त्र जाप एवं साधना काल की अवधि में भी राहत है क्यों की आज के युग में सभी साधको के लिए मंत्रो के पूर्ण अनुष्ठान करना संभव नहीं है अतः इस प्रकार के दुर्लभ प्रयोग को प्रथम बार यहाँ पर प्रस्तुत किया जा रहा है. 

इस प्रयोग को पूर्ण करने पर साधक को अपनी समस्या में राहत मिलती है, साधक अपने जीवन में उन्नति को प्राप्त करता है, धन प्राप्ति के नूत नविन स्त्रोत उसके सामने आते रहते है या फिर देवी नाना प्रकार से उसकी सहायता करती रहती है.

यह प्रयोग साधक किसी भी शुभ दिन शुरू कर सकता है. साधक को यह प्रयोग रात्री काल में ही संपन्न करना चाहिए.

साधक को स्नान कर साधना को शुरू करना चाहिए. साधक लाल रंग के वस्त्र को धारण करे तथा लाल रंग के आसन पर बैठे. साधक का मुख उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए.

साधक प्रथम गुरुपूजन करे तथा गुरु मन्त्र का जाप करे. इसके बाद साधक गणपति एवं भैरव देव का पंचोपचार पूजन करे. अगर साधक पंचोपचार पूजन न कर पाए तो साधक को मानसिक पूजन करना चाहिए.

साधक अपने सामने ‘पारद तारा’ विग्रह को स्थापित करे तथा निम्न रूप से उसका पूजन करे.

ॐ श्रीं स्त्रीं गन्धं समर्पयामि |
ॐ श्रीं स्त्रीं पुष्पं समर्पयामि |
ॐ श्रीं स्त्रीं धूपं आध्रापयामि |
ॐ श्रीं स्त्रीं दीपं दर्शयामि |
ॐ श्रीं स्त्रीं नैवेद्यं निवेदयामि |

साधक को पूजन में तेल का दीपक लगाना चाहिए तथा भोग के रूपमें कोई भी फल या स्वयं के हाथ से बनी हुई मिठाई अर्पित करे. इसके बाद साधक निम्न रूप से न्यास करे. इसके अलावा इस प्रयोग के लिए साधक देवी विग्रह का अभिषेक शहद से करे.

करन्यास

ॐ श्रीं स्त्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ॐ महापद्मे तर्जनीभ्यां नमः
ॐ पद्मवासिनी मध्यमाभ्यां नमः
ॐ द्रव्यसिद्धिं अनामिकाभ्यां नमः
ॐ स्त्रीं श्रीं कनिष्टकाभ्यां नमः
ॐ हूं फट करतल करपृष्ठाभ्यां नमः

हृदयादिन्यास

ॐ श्रीं स्त्रीं हृदयाय नमः
ॐ महापद्मे शिरसे स्वाहा
ॐ पद्मवासिनी शिखायै वषट्
ॐ द्रव्यसिद्धिं कवचाय हूं
ॐ स्त्रीं श्रीं नेत्रत्रयाय वौषट्
ॐ हूं फट अस्त्राय फट्

न्यास के बाद साधक को देवी तारा का ध्यान करना है.
ध्यायेत कोटि दिवाकरद्युति निभां बालेन्दु युक् शेखरां
रक्ताङ्गी रसनां सुरक्त वसनांपूर्णेन्दु बिम्बाननाम्
पाशं कर्त्रि महाकुशादि दधतीं दोर्भिश्चतुर्भिर्युतां
नाना भूषण भूषितां भगवतीं तारां जगत तारिणीं 
     
इस प्रकार ध्यान के बाद साधक देवी के निम्न मन्त्र की 31 माला मन्त्र जाप करे. 

साधक यह जाप शक्ति माला, मूंगामाला से या तारा माल्य से करे तो उत्तम है.

 अगर यह कोई भी माला उपलब्ध न हो तो साधक को स्फटिक माला या रुद्राक्ष माला से जाप करना चाहिए.

ॐ श्रीं स्त्रीं महापद्मे पद्मवासिनी द्रव्यसिद्धिं स्त्रीं श्रीं हूं फट

(OM SHREENG STREEM MAHAAPADME PADMAVAASINI DRAVYASIDDHIM STREEM SHREENG HOOM PHAT)

जाप पूर्ण होने पर साधक मन्त्र जाप को देवी के चरणों में योनीमुद्रा के साथ प्रणाम कर समर्पित कर दे.

ॐ गुह्याति गुह्यगोप्ता त्वं गृहाणाऽस्मत कृतं जपं सिद्धिर्भवतु मे देवि! तत् प्रसादाना महेश्वरी||

साधक यह क्रम 11 दिन तक करे.

 11 दिन   जाप पूर्ण होने पर साधक शहद से इसी मन्त्र की १०८ आहुति अग्नि में समर्पित करे.

 इस प्रकार यह प्रयोग 11 दिन में पूर्ण होता है. साधक की धनअभिलाषा की पूर्ति होती है.

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Friday, June 5, 2020

बात शुक्र ग़ह और बहुत खूबसूरत दिखने वाली स्फटिक की माला की







बात शुक्र ग़ह और बहुत खूबसूरत दिखने वाली स्फटिक की माला की 


मित्रो शुक्र ग़ह जिस इंसान का अछा होता है उसे जीवन में धन,वैभव,सुख साधन की अनेक वस्तुओ का सुख , प्रेमी प्रेमिका पति पत्नी का सुख , चेहरे पर बहुत खूबसूरत चमक ये सब सुख उसको प्राप्त होते है जो इंसान शुक्र ग़ह को मजबूत करले उसे ऊपर लिखे सब सुख प्राप्त होते है,

 शुक्र को मजबूत करने के लिए सबसे सरल उपाय है हाथ में शुक्र वार को ब्रेसलेट की तरहा जहा कंगन पहने जाते है वहा स्फटिक की माला पहन ले आपको जीवन बहुत जल्दी ऊपर लिखे सुख प्राप्त होंगे 
स्फटिक की माला धारण करने के लाभ 

(1) शुक्र ग़ह मजबूत होता है 

(2) जीवन में धन ,वैभव ,समृद्धि प्राप्त होती है 

(3) प्रेमी प्रेमिका पति पत्नी को वश में करके प्यार को बहुत तेज़ गति से बढ़ाता है

(4) वीर्य को बढ़के चेहरे पर खूबसूरती , आकर्षण पैदा करके वशीकरण करता है

(5) सुब्हे से रात तक काम करके न थकने वाली चुस्ती फुर्ती देता है 

ईसी कैसे प्राप्त करे इसकी कीमत 751 रुपये है जोकि आप हमारे  बैंक अकाउंट में जमा करके हमे घर की aadres बताय ये माला 5 दिन के अन्दर आपके घर भेज दी जायगी

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Tuesday, June 2, 2020

सर्व रोग निवारण महाकाली साधना








सर्व रोग निवारण महाकाली साधना


 माँ के श्री चरणोमे मेरा कामना है,इस संसार में ऐसा कोई बीमारी ही नहीं है जो इस साधना से ठीक ना हो सके इसलिये आपकी सुविधा  यह दिव्य साधना प्रस्तुत है. 

साधना विधि:-

यह साधना रात्रिकालीन है,सामने कोई भी बाजोट रखिये और बाजोट पर लाल रंग का वस्त्र स्थापित करे,वस्त्र पर महाकाली जी का चित्र स्थापित करे,मंत्र जाप काली हकीक माला या फिर रुद्राक्ष माला से कर सकते है,

आसान और वस्त्र भी लाल रंग के हो,मन्त्र जाप से पूर्व गणेश और गुरु पूजन करे,संकल्प ले "हे माँ आप मुज़े इस साधना में पूर्ण सफलता प्रदान करे",मंत्र जाप का समय रात्रि में ९ बजे का है,नित्य मंत्र का ९ दिनों तक १६ माला मंत्र जाप करना है.

दशमी तिथि को सुबह ११ बजे से हवन करे,हवन में ११ माला काले तिल का आहुति समर्पित करे और एक अनार का बलि प्रदान करे. 

यह विधान संपन्न करने से मंत्र सिद्धि होता है. 



मंत्र:-

।। ॐ ह्रीं ह्रीं क्लीं क्लीं कंकाली महाकाली खप्परवाली अमुकस्य अमुकं व्याधि नाशय शमनय स्वाहा ।।  

जब भी किसी रोगी को ठीक करना हो तो मंत्र में अमुकस्य के जगह रोगी का नाम ले और अमुकं के जगह रोग का नाम उच्चारित करे.

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Monday, June 1, 2020

शनिवार को तांत्रिक क्रियाओं को करें बेअसर





शनिवार को तांत्रिक क्रियाओं को करें बेअसर


1  घर में हमेशा लक्ष्मी का वास रहे तो गेंहू हमेशा शनिवार को ही पीसवाए और उसमें थोड़े से काले चने जरूर मिला लें। उस आटे की सबसे पहली रोटी गाय को खिलाएं और अन्तिम रोटी पर सरसों तेल लगा कर कुत्ते को खिलाएं।

2 सात शनिवार तक एक नारियल किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें और इस मंत्र का जाप करें ऊँ रामदूताय नम: लगातार सात शनिवार इस प्रकार करने से समस्याओं का प्रभाव कम हो जाएगा और हनुमान जी के साथ ही शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होगी।

3 मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने से हनुमान जी के भक्तों पर शनिदेव का कुप्रभाव नहीं होता।

4 अगर ऐसा लगे की कोई शत्रु आपकी दूकान या ऑफिस में तांत्रिक क्रिया करके आपको हानि पंहुचाने का प्रयास कर रहा है तो शनिवार प्रातः पांच पीपल के पत्ते और आठ पान के साबुत डंडीदार पत्ते लेकर लाल धागे में पिरोकर दूकान में पूर्व की तरफ बांध दें और ऐसा अगर आप हर शनिवार करें तो तांत्रिक क्रिया बेअसर हो जाएगी तथा आपका लाभ बढ़ जाएगा।

5 शनिवार के दिन गरीब व्यक्ति को एक जोड़ी जूते दान करें।

6  सुबह उठकर अपनी हथेलियों को तीन बार चुंबन करें। यह उपाय शनिवार से शुरू करें।

7 कमाई अच्छी है मगर आप संचय नहीं कर पा रहें है तो प्रत्येक शनिवार को काले कुत्ते को तेल के साथ चुपड़ कर चपाती दें।

8 बुरी नजर से बचाने के लिए शनिवार को थोड़ा कच्चा दूध लें और प्रभावित व्यक्ति के सिर के चारों ओर इसको 7 बार घुमाएं और उस के बाद काले कुत्ते को पिलाएं।

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...