Tuesday, May 5, 2020

बुध देव ग्रहो के युवराज






बुध देव ग्रहो के युवराज 


1) बुध ग्रह राजकुमार है।

2) राशि स्वामी – मिथुन और कन्या राशी

3) दृष्टि – 7th भाव पर

4)उच्च राशी  -कन्या राशी उच्चतम डिग्री @15 डिग्री कन्या राशी

5) नीच राशि –  मीन राशी, निचतम डिग्री 15डिग्री मीन राशी

6) बुध की मूलत्रिकोना राशि 16 से 20 डिग्री कन्या राशी है। मिथुन राशी और शेष कन्या राशी अपना राशी है।

7) बुध एक राजसिक (रजो) गुण वाला ग्रह है।

8)बुध वैश्य  जाति (वर्ण )के अंतर्गत आता है।

9) बुध एक भू तत्व प्रधान ग्रह है।

10) बुध जीव के अंतर्गत आता है (पशु / जीवित चीजों)।

11) बुध  पक्षी की तरह उड़ान प्राणियों (अधिक) का स्वामी है।

12) बुध भाषा, मानसिकता, त्वचा, संचार, मित्र, सोच का कारक ग्रह है।

13) बुध बुधवार दिन का स्वामी है।

14) आयु-
आयु अवधि -5 के 14 साल,
परिपक्वता आयु – 32 साल,
व्यक्तिगत आयु – युवा व्यक्ति

15) दोष- वात्त, पित्त, कफ

16) शरीर के अंग- त्वचा,कुल्हो

17) वस्त्र -स्वच्छ वस्त्र

18) रंग- घास के समान हरा

19) दिशा-उत्तर

20) दूरी-  मध्यम (8 योजन)

21) स्वाद -मिश्रित स्वाद

22) पुष्प – / हरा फूल / जंगली फूल फूल-पत्तियां

23) वृक्ष – बिना फल वाले पेड़ / छोटे पेड़ / खाद्य जड़ जो फल में प्रयोग किया जाता है/ खास कर हरा दूव की घास

24) खाद्य भोजन- हरा मूंग ,और अन्य हरी खाद्य वस्तु

25) आकार – त्रिभुजाकार

26) किनारे से निकल जाने की प्रवृति

27) कद – छोटा कद

28) धातु – पीतल और रत्न- पन्ना

29) उदय विधि- सिरसोदय विधि

30) नीति – भेद नीति

31) संबधि – मामा, मित्र

32) मौसम – शरद

33) लिंग – नपुंसक

34) संगत -बुध कारीगरों / कुशल / ट्रिकी लोगों के साथ संगत देना

35) स्वाभव – अस्थिर और बहुमुखी

36) मित्र ग्रह – सूर्य और शुक्र

37) तटस्थ ग्रह -मंगल,बृहस्पति, शनि

38) शत्रु- चंद्रमा

39) रोग – मानसिक समस्या, (बुद्धि समस्या), त्वचा की समस्या, स्नायु समस्या

40) स्थान – खेल कूद की जगह, बिना हिंसा वाले खेल मैदान, पार्क, स्टेडियम, खेल का मैदान, व्यापारिक जगह, परिवहन जगह, सामुदायिक जगह, संचार से संबंधित क्षेत्र, प्रकाशन स्थान, किताब की दुकान, पुस्तकालय, सार्वजनिक विधानसभाओं, डाकघर, हवाई अड्डे, स्टेशन, टेलीग्राफ जगह, लेखा कार्यालय, बैंक कार्यालय, सार्वजनिक क्षेत्र की जगह जहां कोई हिंसा न हो

41) मनोविज्ञान- बुद्धिमानी, कौशल, चतुराई, मानसिक क्षमता, समझदारी कौशल, मौखिक क्षमता, अलगाव,अनैतिकता, अवसरवादिता, स्मार्ट

42) पेशे – ज्योतिष, कारीगर , गणितज्ञ, काव्य  लेखक और ऐसे लेखांकन , प्रकाशन, पुस्तक से संबंधित काम, बैंकिंग से संबंधित नौकरियों, लिपिक नौकरियों, अध्ययन के रूप में संबंधित काम ,लेखन से संबंधित काम ,वक्ता, मास्टर ऑफ बिजनेस(M.B.A.) से संबंधित कार्य, शिक्षण, पवित्र और मौखिक ज्ञान, संख्या से सम्बन्धित,धोखाधड़ी से काम, चतुराई से सम्बन्धित काम , मंत्र की पुनरावृत्ति, संचार / भाषण / त्वचा / सोच /मन से संबंधित अन्य काम

43)देवता-महा विष्णु

44) दसावतार- बुद्ध अवतार

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जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 

दक्षिणा  -  201  मात्र .

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विशेष

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राजगुरु जी

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

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ॐ ह्रीं क्लीं रक्तचामुंडे स्वप्ने कथ्य कथ्य शुभाशुभम ॐ फट स्वाहा !







ॐ ह्रीं     क्लीं   रक्तचामुंडे स्वप्ने कथ्य कथ्य शुभाशुभम ॐ फट स्वाहा !


।। विधि ।।

इस साधना को आप किसी भी दिन से शुरू कर सकते हैं ! रात्रि  को सोते समय अपने बिस्तर पर बैठ कर इस मंत्र का 1100 बार जप करें ! 

माला कोई भी इस्तेमाल कर सकते हैं और यदि माला न हो तो हाथो पर भी  कर सकते हैं !

 यह क्रिया 21  दिन करनी हैं और यह साधना पूर्णत: गुप्त रहनी चाहिए !

 माता से प्रार्थना करे कि स्वप्न में मुझे दर्शन दे और सिद्धि प्रदान करें ! अंतिम दिन ( 22वे दिन ) किसी कंवारी कन्या को भोजन कराएं और दक्षिणा दें ,मन्त्र सिद्ध हो जाएगा ! कन्या की उम्र 10 साल से कम होनी चाहिए !



।। प्रयोग ।।

जब भी इस मंत्र का प्रयोग करना हो तो 1100 मंत्र जप अपने बिस्तर पर बैठ कर करें और देवी से प्रार्थना करें , आपको स्वप्न में उत्तर मिल जाएगा ! 

माँ स्वप्नेश्वरी आप सब पर कृपा करे और आप सब को सिद्धि प्रदान करे !  इसी आशा के साथ …………………………………!

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

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Monday, May 4, 2020

भूत लगे व्यक्ति की पहिचान





भूत लगे व्यक्ति की पहिचान


अक्सर लोगों के अन्दर भूत प्रेत घुस जाते है और वे व्यक्ति के जीवन को तबाह कर देते है,भूत-डामर तंत्र में उनकी पहिचान जिस प्रकार से बताई गयी है वह निम्न लिखित है।

भूत लगे व्यक्ति की पहिचान
जब किसी व्यक्ति को भूत लग जाता है तो वह बहुत ही ज्ञान वाली बातें करता है,उस व्यक्ति के अन्दर इतनी शक्ति आजाती है कि दस दस आदमी अगर उसे संभालने की कोशिश करते है तो भी नही संभाल पाते हैं।

देवता लगे व्यक्ति की पहिचान

जब लोगों के अन्दर देवता लग जाते है तो वह व्यक्ति सदा पवित्र रहने की कोशिश करता है,उसे किसी से छू तक जाने में दिक्कत हो जाती है वह बार बार नहाता है,पूजा करता है आरती भजन में मन लगाता रहता है,भोजन भी कम हो जाता है नींद भी नही आती है,खुशी होता है तो लोगों को वरदान देने लगता है गुस्सा होता है तो चुपचाप हो जाता है,धूपबत्ती आदि जलाकर रखना और दीपक आदि जलाकर रखना उसकी आदत होती है,संस्कृत का उच्चारण बहुत अच्छी तरह से करता है चाहे उसने कभी संस्कृत पढी भी नही होती है।

देवशत्रु लगना
देव शत्रु लगने पर व्यक्ति को पसीना बहुत आता है,वह देवताओं की पूजा पाठ में विरोध करता है,किसी भी धर्म की आलोचना करना और अपने द्वारा किये गये काम का बखान करना उसकी आदत होती है,इस प्रकार के व्यक्ति को भूख बहुत लगती है।उसकी भूख कम नही होती है,चाहे उसे कितना ही खिला दिया जाये,देव गुरु शास्त्र धर्म परमात्मा में वह दोष ही निकाला करता है। कसाई वाले काम करने के बाद ऐसा व्यक्ति बहुत खुश होता है।

गंधर्व लगना

जब व्यक्ति के अन्दर गन्धर्व लगते है तो उसके अन्दर गाने बजाने की चाहत होती है,वह हंसी मजाक वाली बातें अचानक करने लगता है,सजने संवरने में उसकी रुचिया बढ जाती है,अक्सर इस प्रकार के लोग बहुत ही मोहक हंसी हंसते है और भोजन तथा रहन सहन में खुशबू को मान्यता देने लगते है,हल्की आवाज मे बोलने लगते है बोलने से अधिक इशारे करने की आदत हो जाती है.

यक्ष लगने पर व्यक्ति शरीर से कमजोर होने लगता है,लाल रंग की तरफ़ अधिक ध्यान जाने लगता है,चाल में तेजी आजाती है,बात करने में हकलाने लगता है,आदि बातें देखी जाती है,इसी प्रकार से जब पितर दोष लगता है तो घर का बडा बूडा या जिम्मेदार व्यक्ति एक दम शांत हो जाता है,उसका दिमाग भारी हो जाता है,उसे किसी जडी बूटी वाले या अन्य प्रकार के नशे की लग लग जाती है,इस प्रकार के व्यक्ति की एक पहिचान और की जाती है कि वह जब भी कोई कपडा पहिनेगा तो पहले बायां हिस्सा ही अपने शरीर में डालेगा,अक्सर इस प्रकार के व्यक्ति के भोजन का प्रभाव बदल जाता है वह गुड या तिल अथवा नानवेज की तरफ़ अधिक ध्यान देने लगता है। अक्सर ऐसे लोगों को खीर खाने की भी आदत हो जाती है,और खीर को बहुत ही पसंद करने लगते हैं।

नाग दोष लगने पर

लोग पेट के बल सोना शुरु कर देते है,अक्सर वह किसी भी चीज को खाते समय सूंघ कर खाना शुरु भी करता है,दूध पीने की आदत अधिक होती है,एकान्त जगह में पडे रहना और सोने में अधिक मन लगता है,आंख के पलक को झपकाने में देरी करता है,सांस के अन्दर गर्मी अधिक बढ जाती है,बार बार जीभ से होंठों को चाटने लगता है,होंठ अधिक फ़टने लगते है।

 राक्षस लगने पर

भी व्यक्ति को नानवेज खाने की अधिक इच्छा होती है,उसे नानवेज खाने के पहले मदिरा की भी जरूरत पडती है,अक्सर इस प्रकार के लोग जानवर का खून भी पी सकते है,जितना अधिक किसी भी काम को रोकने की कोशिश की जाती है उतना ही अधिक वह गुस्सा होकर काम को करने की कोशिश करता है,अगर इस प्रकार के व्यक्ति को जंजीर से भी बांध दिया जाये तो वह जंजीरों को तोडने की कोशिश भी करता है अपने शरीर को लोहू लुहान करने में उसे जरा भी देर नही लगती है।

वह निर्लज्ज हो जाता है,उसे ध्यान नही रहता है कि वह अपने को माता बहिन या किस प्रकार की स्त्री के साथ किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिये.

अक्सर इस प्रकार के लोग अचानक बार करते है और अपने कपडे तक फ़ाडने में उनको कोई दिक्कत नही होती है,आंखे जरा सी देर में लाल हो जाती है अथवा हमेशा आंखे लाल ही रहती है,हूँ हूँ की आवाज निकालती रहती है।

 पिशाच लगने के समय

भी व्यक्ति नंगा हो जाता है अपने मल को लोगों पर फ़ेंकना चालू कर देता है,उसे मल को खाते तक देखा गया है,वह अधिकतर एकान्त मे रहना पसंद करता है,शरीर से बहुत ही बुरी दुर्गंध आने लगती है,स्वभाव में काफ़ी चंचलता आजाती है,एकान्त में घूमने में उसे अच्छा लगता है,

अक्सर इस प्रकार के लोग घर से भाग जाते है और बियावान स्थानों में पडे रहते है,वे लोग अपने साथ पता नही कितने कपडे लाद कर चलते है,सोने का रहने का स्थान कोई पता नही होता है। इस प्रकार के व्यक्ति को भी भूख बहुत लगती है,खाने से कभी मना नही करता है। सती लगने वाला व्यक्ति अक्सर स्त्री जातक ही होता है,उसे श्रंगार करने में बहुत आनन्द आता है,मेंहदी लगाना,पैरों को सजाना,आदि काम उसे बहुत भाते है,सती लगने के समय अगर पेट में गर्भ होता है तो गिर जाता है,और सन्तान उत्पत्ति में हमेशा बाधा आती रहती है,

आग और आग वाले कारणों से उसे डर नही लगता है,अक्सर इस प्रकार की महिलायें जल कर मर जाती है। कामण लगने पर उस स्त्री का कंधा माथा और सिर भारी हो जाता है,मन भी स्थिर नही रहता है,शरीर दुर्बल हो जाता है,गाल धंस जाते है,स्तन और नितम्ब भी बिलकुल समाप्त से हो जाते है,नाक हाथ तथा आंखों में हमेशा जलन हुआ करती है।

 डाकिनी या शाकिनी लगने पर

 उस स्त्री के पूरे शरीर में दर्द रहता है,आंखो में भारी दर्द रहता है,कभी कभी बेहोसी के दौरे भी पडने लगते है,खडे होने पर शरीर कंपने लगता है,रोना और चिल्लाना अधिकतर सुना जा सकता है,भोजन से बिलकुल जी हट जाता है। इसी प्रकार से क्षेत्रपाल दोष लगने पर व्यक्ति को राख का तिलक लगाने की आदत हो जाती है,उसे बेकार से स्वपन आने लगते है,पेट में दर्द होता रहता है,जोडों के दर्द की दवाइयां चलती रहती है लेकिन वह ठीक नही होता है।

ब्रह्मराक्षस का प्रभाव

भी व्यक्ति को अथाह पीडा देता है,जो लोग पवित्र कार्य को करते है उनके बारे में गलत बोला करता है,अपने को बहुत ऊंचा समझता है,उसे टोने टोटके करने बहुत अच्छे लगते है,अक्सर इस प्रकार के लोग अपनी संतान के भी भले नही होते है,रोजाना मरने की कहते है लेकिन कई उपाय करने के बावजूद भी नही मरते है,डाक्टरों की कोई दवाई उनके लिये बेकार ही साबित होती है। जो लोग अकाल मौत से मरते है उन्हे प्रेत योनि में जाना पडता है ऐसा गरुड-पुराण का मत है,इस प्रकार की आत्मायें जब किसी की देह में भरती है तो वह रोता है चीखता है चिल्लाता है,भागता है,कांपता है,सांस बहुत ही तीव्र गति से चलती है,किसी का भी किसी प्रकार से भी कहा नही मानता है,कटु वचनों के बोलने के कारण उसके परिवार या जान पहिचान वाले उससे डरने लगते है।

 चुडैल

अधिकतर स्त्री जातकों को ही लगती है,नानवेज खाने की आदत लग जाती है,अधिक से अधिक सम्भोग करने की आदत पड जाती है,गर्भ को टिकने नही देती है,उसे दवाइयों या बेकार के कार्यों से गिरा देती है। कच्चे कलवे भी व्यक्तियों को परेशान करते है,अक्सर भूत प्रेत पिशाच योनि में जाने वाली आत्मायें अपना परिवार बसाने के लिये किसी जिन्दा व्यक्ति की स्त्री और और पुरुष देह को चुनती है,फ़िर उन देहों में जाकर सम्भोगात्मक तरीके से नये जीव की उत्पत्ति करती है,उस व्यक्ति से जो सन्तान पैदा होती है उसे किसी न किसी प्रकार के रोग या कारण को पैदा करने के बाद खत्म कर देती है और अपने पास आत्मा के रूप में ले जाकर पालती है,जो बच्चे अकाल मौत मरते है और उनकी मौत अचानक या बिना किसी कारण के होती है अक्सर वे ही कच्चे कलवे कहलाते है।

 भूत-डामर तंत्र में जो बातें लिखी गयीं है वे आज के वैज्ञानिक युग में अमाननीय है। लेकिन जब किसी व्यक्ति से इन बातों के बारे में सुना जाता है तो सुनकर यह भी मानना पडता है कि वास्तव में कुछ तो सत्यता हो सकती है,सभी बातों को झुठलाया तो नही जा सकता है

चेतावनी -

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महा विद्या आश्रम का उद्देश्य और आज की पीढ़ी की सोच






महा विद्या आश्रम का उद्देश्य और आज की पीढ़ी की सोच  


आने वाली पीढ़ी हमें और हमारी कूप मण्डूकता को धिक्कारेगी कि कायरता के साथ हमने इस विद्या को समाप्त कर हमने अपने आप को मृत्यु के मुह में डाल दिया . आने वाला समय हम में से किसी को भी क्षमा नहीं करेगा, आवश्यकता इस बात कि है कि हम इस चुनौती को स्वीकार करे और एक ऐसी पीढ़ी का निर्माण करे जो कि इस प्रकार के ज्ञान से पूर्ण हो जिनमे मंत्रो को सीखने, समझने और उनके प्रयोग में रूचि  लेने कि ललक हो और जो पूर्ण रूप से मंत्रो के प्रति समर्पित हो वे युवक आगे आवे या ऐसे युवकों कि खोज कि जाये जो कि इस प्रकार के कार्य  के लिए पूर्णतः समर्थ हों . 

भारत वर्ष कि भूमि नपुंसक नहीं है सौ करोड़ जनता में कम से कम सौ युवक ऐसे प्राप्त हो सकते है जिन्हे परिश्रम करने की और मंत्रो को जीवित बनाये रखने की रूचि हो और जो सरे सुखो का त्याग कर इस क्षेत्र में कुछ कर गुजरने का हौसला  रखते हो 
                                                    

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Sunday, May 3, 2020

तंत्र की महारानी गुंजा






तंत्र की महारानी गुंजा


आज मे आप को बता रहा हु वह अचुक तांत्रिक महाअसरदायक अचुक व स्वअनुभूत गुुंजा का रहस्यमयी राम बाण वशीकरण प्रयोग*

1-कभी सोने की तौल में उपयोग की जाने वाली गुंजा यानी गुंचू के बीजों में गजब की वशीकरण शक्ति होती है। इसका उपयोग तांत्रिक क्रियाओं में किया जाता है। हम बता रहे हैं आपको गुंजा की उस शक्ति के बारे में जिससे दुश्मनों को भी वश में किया जा सकता है। यह प्रकार की लता का बीज है जिसका प्रयोग प्राचीन काल से तांत्रिक क्रियाओं में होता आ रहा है।*

2-यह बीज लाल और काले रंग का होता है । बीज के अलावा गुंजा की जड़ भी बहुत उपयोगी होती है। गुंजा की माला धारण करने से आप सामूहिक वशीकरण भी कर सकते हैं। अगर आप किसी सभा में या भाषण देने जा रहे हैं तो आपको गुंजा की माला धारण करनी चाहिए। यह दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। ऐसा व्यक्ति जो बहुत ही जल्दी बुरी नजर की चपेट में आ जाता है उसे गुंजा का ब्रेसलेट धारण करना चाहिए। आप जिस भी व्यक्ति को वशीभूत करना चाहते हैं उसके कपड़ों में गुंजा के दाने अभिमंत्रित करके रख दें। जब तक वे दाने उस व्यक्ति के कपड़े से बंधे रहेंगे वह वशीकरण के प्रभाव में रहेगा। जानकारों के अनुसार ये एक ऐसा प्रयोग है जिसे करने से शत्रु भी वश में हो जाते हैं।*

3-तांत्रिक औघड कहते हैं यह प्रयोग दीपावली, ग्रहण काल, होली, पूर्णिमा, अमावस्या पर करना सबसे ज्यादा प्रभावकारी होता है। अगर आप अपने पति को आकर्षित करना चाहती हैं तो पति का नाम अन्यथा पत्नी का नाम लेकर मिट्टी के एक दीपक में शहद डालकर उसमें गुंजा के पांच दाने डालकर रख दें। काले रंग की गुंजा बहुत खास मानी गई है। जिस भी व्यक्ति के पास यह गुंजा होती है, अगर उस पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो इसका रंग स्वत: ही बदलने लगता है।*

4- गुंजा(Gunja)आपने देखा होगा पहले के जमाने में स्वर्णकार लोग इसे रत्ती की जगह प्रयोग करते थे इसलिए इसे कही-कही रत्ती के नाम से भी जाना जाता है गुंजा(Gunja)एक प्रकार की लता का बीज है जिसका प्रयोग तांत्रिक क्रियाओं में भी किया जाता है यह लाल और काले रंग का मिलता है इसके बीज के अलावा गुंजा की जड़ भी बहुत उपयोगी होती है ये सफ़ेद रंग की भी पाई जाती  है जो कही -कही देखने को मिलती है-इसको चिरमिटी और घुमची के नाम से भी जाना जाता है-*

*👉🏿5- इनमे से काले रंग की गुंजा बहुत खास प्रकार की होती है जिस भी व्यक्ति के पास यह गुंजा होती है अगर उस पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो इसका रंग स्वत: ही बदलने लगता है -*

6- आप अपने जीवन साथी को हमेशा के लिए आकर्षित(Attractions)करना चाहती या चाहते है तो आप लाल-काले रंग की गुंजा के पांच दाने लें और अपनी पत्नी या पति का नाम स्मरण करते हुए एक मिटटी के दीपक में शहद डाल कर शहद में पांचो दाने डालकर डुबो कर किसी सुरक्षित जगह रख दें-इस प्रयोग से पति-पत्नी के बीच में Attractions-आकर्षण बना रहता है-ये  प्रयोग पति और पत्नी दोनों एक दूसरे के लिए कर सकते है-*

7- आप किसी भी सामूहिक स्थान पर मीटिंग या भाषण के लिए जा रहे है तो आपको गुंजा(Gunja) की माला धारण करनी चाहिए यह दूसरों पर अच्छा प्रभाव डालता है-वैसे आप चाहे तो हमेशा भी इसे धारण कर सकते है-*
8- यदि आप या आपके बच्चे बार-बार आप किसी की नजर लगने के शिकार होते है तो चिन्ता की बात नहीं बुरी नजर से बचाने के लिए गुंजा का ब्रेसलेट(Bracelet)धारण करना चाहिए ये आपको बुरी नजर से बचाएगा -*

9- यदि आप किसी व्यक्ति को वशीभूत करना चाह रहे है तो उसके कपड़ों में गुंजा के दाने अभिमंत्रित करके रख दें जब तक वे दाने उस व्यक्ति के कपड़े से बंधे रहेंगे वह वशीकरण के प्रभाव में रहेगा-अभिमंत्रित मन्त्र यहाँ सुरक्षा की द्रष्टि से नहीं लिख रहा हूँ क्युकि लोग इसका दुरूपयोग न करे-इसका प्रयोग दिवाली,ग्रहण,होली, पूर्णिमा और आमवस्या के दिन ही करा जाना सबसे उत्तम प्रभाव देता है-*

10- आप यदि गुंजा की माला धारण करते  है तो आप सामूहिक सम्मोहन भी कर सकते है इसे किसी शुभ मुहूर्त में आप इसे गले में धारण कर सकते है इसके लिए किसी मन्त्र की आवश्यकता नहीं है-*

11- इसके उपयोग की इक्छा रखने वाले मनुष्य का सकारात्मक पहलू हो तो इसका उपयुक्त प्रभाव शीघ्र होता है लेकिन किसी के अनिष्ट की आकांक्षा रखने पर ये प्रयोग असफल ही रहता है       

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सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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धूमावती एक एसी महाविद्या है







धूमावती एक एसी महाविद्या है


धूमावती एक एसी महाविद्या है जिनके बारे मे साहित्य अत्यधिक कम मात्र मे मिलता है. इस महाविद्या के साधक भी बहोत कम मिलते है. 

मूल रूप से इनकी साधना शत्रु स्तम्भन और नाशन के लिए की जाती है. लेकिन इस महाविद्या से सबंधित कई ऐसे प्रयोग है जिनके बारे मे व्यक्ति कभी सोच भी नहीं सकता. 

चरपटभंजन नाम धूमावती के उच्चकोटि के साधको के मध्य प्रचलित रहा है, चरपट भंजन को ही चरपटनाथ या चरपटीनाथ कहा गया है. चरपटनाथ ने अपने जीवन काल मे धूमावती सबंधित साधनाओ का प्रचुर अभ्यास किया था और 

मांत्रिक धूमावती को सिद्ध करने वाले गिने चुने व्यक्ति मे इनकी गणना होती है, वे कालजयी रहे है और आज भी वे सदेह है. उनके बारे मे ये प्रचलित है की वह किसी भी तत्व मे अपने आप को बदल सकते है चाहे वह स्थूल हो या सूक्ष्म, जैसे मनुष्य पशु पक्षी पानी अग्नि या कुछ भी.

 ७५०-८०० साल पहले धूमावती साधना के सबंध मे फैली भ्रान्ति को दूर करने के लिए इस महान धूमावती साधक ने कई ग्रंथो की रचना की जिसमे धूमावतीरहस्य, धूमावतीसपर्या, धूमावती पूजा पध्धति जैसे अत्यधिक रोचक ग्रंथ सामिल है. 

कई गुप्त तांत्रिक मठो मे आज भी यह ग्रन्थ सुरक्षित है. लेकिन यह साधना पद्धतिया लुप्त हो गयी और जन सामान्य के मध्य कभी नहीं आई. धूमावती अलक्ष्मी होते हुए भी लक्ष्मी प्राप्ति से लेके वैभव ऐश्वर्य तथा जीवन के पूर्ण भोग प्राप्त करने के लिए भी धूमावती साधना के कई विधानों का उन्होंने प्रचार किया था

. लेकिन ये साधनाओ को गुप्त रखने की पीछे का मूल चिंतन सायद तब की परिस्थिति हो या कुछ और लेकिन इससे जन सामान्य के मध्य साधको का हमेशा ही नुक्सान रहा है.

 चरपटभंजन ने जो कई गुप्त पध्धातियो का विकास किया था उनमे से एक साधना एसी भी थि जिसको करने से व्यक्ति अपने सामने वाले व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे मे कुछ भी जान लेता है. जैसे की चरित्र कैसा है, इस व्यक्ति की प्रकृति क्या है, इसके दिमाग मे इस वक्त कौनसे विचार चल रहे होंगे?

 इस प्रकार की साधना अत्यधिक दुस्कर है क्यों जीवन के रोज ब रोज के कार्य मे ऐसी साधनाओ से कितना और क्या विकास हो सकता है कैसे फायदा हो सकता है ये तो व्यक्ति खुद ही समज सकता है. 

मानसिक शक्तियो के विकास की अत्यधिक दुर्लभ साधनाओ मे यह साधना अपना एक विशेष स्थान लिए हुए है. चरपटनाथ द्वारा प्रणित धूमावती प्रयोग आप सब के मध्य रख रहा हू.

इस साधना को करने से पूर्व साधक अपने स्थान का चुनाव करे. साधक के साधना स्थल पर और आसान पर साधक की जब तक साधना चले कोई और व्यक्ति न बैठे.

 इस साधना मे साधक को ११ माला मंत्र जाप एक महीने (३० दिन) तक करना है. माला काले हकीक की रहे. वस्त्र काले रहे. समय रात्रि काल मे ११ बजे के बाद का हो.

 धूमावती का यन्त्र चित्र अपने सामने स्थापित करे. तेल का दीपक साधना समय मे जलते रहना चाहिए.
यन्त्र चित्र का पूजन कर के विनियोग करे

विनियोग: 

अस्य श्री चरपटभंजन प्रणित धूमावती प्रयोगस्य पूर्ण विनियोग अभीष्ट सिद्धियर्थे करिष्यमे पूर्ण सिद्धियर्थे विनियोग नमः

इसके बाद निम्न मंत्र का ११ माला जाप करे
ओम धूमावती करे न काम, तो अन्न हराम, जीवन तारो सुख संवारो, पुरती मम इच्छा, ऋणी दास तमारो ओम छू

मंत्र जाप के बाद साधक धूमावती देवी को ही मंत्र जाप समर्पित कर दे.

ये अत्यधिक दुर्लभ विधान सम्प्पन करने के बाद व्यक्ति यु कहा जाए की अजेय बन जाता है तो भी अतिशियोक्ति नहीं 

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

                    

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इष्ट देवता बटुकभैरव है तो सब कुछ सम्भव है






इष्ट देवता बटुकभैरव है तो सब कुछ सम्भव है


श्री बटुक भैरवनाथ जी की साधना एक दुर्लभ साधना है , जिनके साधक को कभी भयभीत नहीं होना चाहिए। ब्रह्माण्ड में बटुक भैरव साधना जैसी कोई साधना नहीं और यदि आप साधना के करीब आजाते है तो बाबा हर पल आपके साथ ही रहते है। 

एक परछाईं की तरह अपने भक्त का मार्ग दर्शन करते है। और किसी भी अरिष्ट शक्ति को वो अपने भक्त के समक्ष नहीं आने देते, किसी भी प्रकार का तन्त्र बटुक साधक पे काम नहीं करता। उसके बिपरीत जो इनके पीछे पड़ते है उनका सर्वश्व नष्ट हो जाता है । 

बटुक भैरव की साधना के लिए सबसे जरुरी और उपयोगी तुरीय यानी मध्य रात्रि का समय 12am से 3:59 am तक का होता है।  इस समय को सिद्ध काल कहते है, यदि इस समय साधना नहीं हो पाती  तो रात्रि 9 pm से 3:59am तक के मध्य का समय ग्रहण करें, इस समय को रात्रि पूजा में ग्रहण कर लिया जाता है । वैसे तो बाबा की पूजा में तुरीय संध्या का सबसे बड़ा स्थान है जिससे प्राणनाथ बाबा बटुकनाथ बहुत प्रशन्न हो जाते है । 
बाबा भाव पूर्ण पूजा या साधना के प्रेमी है । जो इनकी साधना मात्र स्वार्थ निमित्त करते है उनको सावधनी से करनी चाहिए । स्वार्थ निमित्त का अभिप्राय है कि कोई काम नहीं बन रहा मात्र उसके लिए या कोई और साधना कर रहे उसमें कोई दिक्कत या रुकावट आरही, कोई प्रेतबाधा आपके पीछे पड़ी है  

इस लिए कर रहे तो सावधानी से करें। जिस बात को लोग ज्यादा बोलते है कि बटुक भैरव या 64 भैरव में कोई भी भैरव बहुत क्रोधी है । वो ऐसे लोगों के लिए ही है । जो स्वार्थ निमित्त साधना करते है । और जो भगवान शिव के साधक है जो शिव के इस बाल रूप को आराध्य या कहें तो इष्ट मानते है उनको किन्चित मात्र नहीं डरना चाहिए उनपे बाबा कभी रुष्ट नहीं होते । यदि श्री बटुकभैरावनाथ इष्ट है तो आपके लिए जीवन में सब कुछ सम्भव है कोई भी चीज दुर्लभ नहीं है ।

विशेष :- 

रात्रि पूजा कभी खण्डित न हो इसपे विशेष ध्यान रखें । और जब भी कुछ खायें पियें कोशिश पूरी करें की वो सामग्री आपकी नजर में साफ हो, जूँठी न हो तब उसे मन से बाबा को समर्पित करें तभी खायें । ये दो सावधानी बटुक साधना में बहुत जरुरी है ।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...