Friday, January 3, 2020

माँ तारा":-(ममतामयी माँ सबको तारने वाली






"माँ तारा":-(ममतामयी माँ सबको तारने वाली)


क्या आप भी साधना करना चाहते हैं? तो आज ही अपने गुरु से सम्पर्क कर किसी साधना की शुरुवात करें। Tara MahaVidya - करोडपति बनना है आसान 

यह विद्या साधकों को बुद्धि, ज्ञान, शक्ति, जय एवं श्री देने वाली तथा भय, मोह एवं अपमृत्यु का निवारण करने वाली मानी गयी हैं।  

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्ववस्थां गतोऽपि वा | य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि: || 
इस पानी को अपने उपर छिड्क ले

अचमन, स्थान शुद्धि, आदि करने के बाद गणपति और गुरु की पुजा शुरु करे। 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः । गुरु साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः ॥ 

प्रत्यालीढ पदार्पितांगघ्रिशवहृद घोराट्टहासा परा,खडगेन्दीवरकर्तृं खर्परभुजा हूंकार-बीजोद-भवा खर्वानील विशालपिंगल जटा जूटैकनागैर्युता,जाड्य न्यस्य कपालिके त्रिजगतां हन्त्युग्रतारास्वयम

सीधे हाथ मे जल लेकर कहे  - ‘ॐ अस्य श्रीतारांमन्त्रस्य अक्षोभ्यऋषिः बृहतीछन्दः तारादेवता ह्रीं बीजं हुं शक्तिः आत्मनोऽभीष्टसिद्धयर्थ तारामन्त्रजपे विनियोगः । जल छोड दे 

फिर करन्यास और अन्य न्यास को करने के बाद मे नीचे लिखा प्रक्रिया करे।

ऋष्यादिन्यास - 

‘ॐ अक्षोभ्यऋषये नमः शिरसि        
ॐ बृहतीछन्दसे नमः मुखे,
ॐ तारादेवतायै नमः हृदि,        
ॐ ह्रीं (हूँ) बीजाय नमः गुह्ये,
ॐ हूँ (फट्) शक्तये नमः पादयोः    
ॐ स्त्रीं कीलकाय नमः सर्वाङ्गे

कराङ्गन्यास -    

ॐ ह्रां अङ्‌गुष्ठाभ्यां नमः,        
ॐ ह्रीं तर्जनीभ्या नमः,
ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः,        
ॐ ह्रैं अनकामिकाभ्यां नमः,
ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः        
ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः, 

मुल मंत्र 

“ॐ ह्रीं स्त्री हुं फट” 

की 39 माला रोज करें।  घी के दीपक से आरती करें जो भी कर सकते हैं चाहे अम्बे की करें फिर नमस्कार करें और कहे। 

ॐ गुह्यातिगुह्या गोप्ती त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम,सिद्धिर्भवतु मे महादेवी त्वत प्रसादान्देवी 
मंत्र जप समाप्ति पर साधक साधना कक्ष में ही सोयें।  

सभी सामन को पुजा वाले कपडे मे लपेट कर कलवा से बांध कर नदी में प्रवाहित कर दें। । कुछ सिक्के भी पानी मे डाल दे। हाथ जोडकर घर आये किसी से बात ना करें और पीछे मुडकर ना देखे तो ज्यादा अच्छा हैं। 

वरना प्रभाव कम हो जाता हैं। घर पहुँचते ही साधना सिद्धि हो चुकी होगी। धन पाने के नये मार्ग स्वयं माँ खोलती जायेगी इसके अलावा आपके स्वास्थ, बुद्धि, वाणी का ध्यान रखेगी

साधना के दौरान थोड़ी भयावह स्थिति बन सकती है, पदचाप सुनाई दे सकती है, साधना से उच्चाटन हो सकता है, तीव्र ज्वर और तीव्र दर्द का अनुभव हो सकता है परन्तु साधक यदि इन् स्थितियों को पार कर लेता है तो उसे स्वयं ही धीरे धीरे उपरोक्त लाभ प्राप्त होने लगते हैं.

साधना काल के दौरान आपको कुछ आश्चर्य जनक अनुभव हो सकते हैं, पर इनसे न परेशान या बिचलित न हो , ये तो साधना सफलता के लक्षण हैं .

चेतावनी - 

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

चेतावनी - 

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ । बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है 

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

राजगुरु जी

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

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शुभ-अशुभ राहु के लक्षण




शुभ-अशुभ राहु के लक्षण


ज्योतिष के जनक महर्षि पराशर के अनुसार राहु ग्रह को पितामह (दादा), समाज एवं जाती से अलग लोग (विद्रोही भी), सर्प, सामाजिक जहर का फैलाना, क्रानिक बीमारियां, भय, विधवा, दुर्वचन, तीर्थ यात्रायें, निष्ठुर वाणी, विदेश में जीवन, त्वचा पर दाग, सरीसृप, महामारी, किसी महिला से अनैतिक संबन्ध, नानी, व्यर्थ के तर्क, भडकाऊ भाषण, बनावटीपन, दर्द और सूजन, डूबना, अंधेरा, दु:ख पहुंचाने वाले शब्द, निम्न जाति, दुष्ट स्त्री, जुआरी, विधर्मी, चालाकी, संक्रीण सोच, पीठ पीछे बुराई करने वाले, पाखण्डी, बुरी आदतों के आदी, जहाज के साथ जलमग्न होना, डूबना, रोगी स्त्री के साथ आनन्द लेना, अंगच्छेदन होना, डूबना, पथरी, कोढ, बल, व्यय,आत्मसम्मान, शत्रु, मिलावट दुर्घटना, नितम्ब, देश निकाला, विकलांग, खोजकर्ता, शराब, झगडा, गैरकानूनी, तरकीब से सामान देश से अन्दर बाहर ले जाना, जासूसी करना, आत्महत्या, विषैला, विधवा, पहलवान, शिकारी, दासता, शीघ्र उत्तेजित होने इत्यादि का कारक होता है।

कौन कौन से दोष आ जाते हैं, राहु खराब होने पर :-

जैसे की कहा जाता है, पीपल की छाया में सोने वाले को किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता परंतु यदि बबूल की छाया में सोते रहें तो श्वास रोग या चर्म रोग हो सकता है।

इसी प्रकार ग्रहों की छाया का भी हमारे जीवन पर प्रभाव पढ़ता है। नवग्रहों में राहु ग्रह हमारी बुद्धि भ्रमित करता है, लेकिन जो चतुराई हमारी बुद्धि में पैदा होती है, उसका कारक भी राहु ही है। ज्योतिष शास्त्र में राहु के दोषपूर्ण या खराब होने पर जातक चतुराई से घोटाले तो करता है, परंतु एक दिन अपने ही बुने जाल में बुरी तरह फंस जाता है।

क्यों होता है राहु खराब ? :-

1 :- यदि कोई व्यक्ति अपने गुरु या फिर अपने धर्म का अपमान करता है, तो उस व्यक्ति का राहू ग्रह अवश्य बुरा फल देता है।

2 :- यदि कोई व्यक्ति शराब का सेवन नियमित करता है, या फिर पराई स्त्री के साथ सम्बन्ध बनाने की इच्छा रखता है, तो उसका राहू ग्रह अवश्य बुरा फल देता है।

3 :- यदि कोई व्यक्ति ब्याज वाले पैसों का प्रयोग घर में करता है तो, उस व्यक्ति का राहू ग्रह अवश्य बुरा फल देता है।

4 :- यदि कोई व्यक्ति चतुराई से किसी को धोखा देता है, और झूठ बोलने की आदत को नहीं छोड़ता तो उस व्यक्ति का राहू ग्रह बुरा फल देता है।

5 :- यदि कोई व्यक्ति हमेशा तामसिक भोजन करता है तो, उस व्यक्ति का राहू ग्रह बुरा फल देता है।

6 :- यदि कोई व्यक्ति खाना हमेशा घर से बाहर खाता है, या बाहर का खाना हमेशा खाता है तो, उस व्यक्ति का राहू ग्रह बुरा फल देने लगता है।

खराब राहु को कैसे पहचानेगे ? :-

1 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके ससुर, साले या साली से झगडा बढ़ने लगेगा।

2 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके सोचने की ताकत कम हो जायेगी।

3 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके जीवन में शत्रु बढ़ जायेंगे, और सोचने की क्षमता कम होने लगती है।

4 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके साथ दुर्घटना, पुलिस केस, या पत्नी के साथ लड़ाई झगडे में बढ़ोत्तरी हो जायेगी।

5 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो वो व्यक्ति छोटी छोटी बातों पर गुस्सा होने लगता है, और लोगों के साथ सही तालमेल नहीं बिठा पाता है।

6 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उस व्यक्ति का एक तरह से दिमाग खराब होने लगता है, और उस व्यक्ति के सर में फालतू में छोटी छोटी चोट लगने लगती है या चक्कर आते हैं।

7 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो वह व्यक्ति अधिक मदिरापान या फिर सम्भोग/हस्तमैथुन की तरफ भागने लगता है।

8 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो व्यक्ति नीच हरकते करने लगता है, और निर्दयी हो जाता है।

राहु ग्रह खराब होने से होने वाले रोग :-

1 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो सबसे पहले उसको गैस से सम्बन्धित शिकायत बढ़ने लगती है।

2 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके बाल झड़ने लगते हैं, तथा बवासीर से सम्बन्धित भी समस्या होने लगती है।

3 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो वो जातक पागलों की तरह व्यवहार करेगा और लगातार मानसिक तनाव में रहेगा।

4 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके नाखून अपने आप ही टूटने लगते हैं और व्यक्ति के सर में पीड़ा या दर्द बनी रहती है।

5 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उस व्यक्ति को अचानक पता चलेगा की मुझे कोई बीमारी है और उस पर पैसा भी खूब खर्चा होगा तथा व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।

राहु के शुभ होने पर 

व्यक्ति दौलतमंद होगा। कल्पना शक्ति तेज होगी। रहस्यमय या धार्मिक बातों में रुचि लेगा। राहु के अच्छा होने से व्यक्ति में श्रेष्ठ साहित्यकार, दार्शनिक, वैज्ञानिक या फिर रहस्यमय विद्याओं के गुणों का विकास होता है। इसका दूसरा पक्ष यह कि इसके अच्छा होने से राजयोग भी फलित हो सकता है। आमतौर पर पुलिस या प्रशासन में इसके लोग ज्यादा होते हैं।

राहु को प्रसन्न करने के उपाय

राहु बीज मन्त्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम: (108 बार)

दुर्गा चालीसा का पाठ करें.

पक्षियों को प्रतिदिन बाजरा खिलाएं.

एक नारियल ग्यारह साबुत बादाम काले वस्त्र में बांधकर बहते जल में प्रवाहित करें.

शिवलिंग पर जलाभिषेक करें.

अपने घर के नैऋत्य कोण में पीले रंग के फूल अवश्य लगाएं.

तामसिक आहार व मदिरापान बिल्कुल न करें.

अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए. सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है. प्रतिदिन

सुबह चन्दन का टीका भी लगाना चाहिए. अगर हो सके तो नहाने के पानी में चन्दन का इत्र डाल कर नहाएं.

शिव साहित्य जैसे- शिवपुराण आदि का पाठ करना चाहिए.

शिव साहित्य जैसे- शिवपुराण आदि का पाठ करना चाहिए.

हाथी को हरे पत्ते, नारियल गोले या गुड़ खिलाएं.

ध्यान रखें तांत्रिक उपाय करते समय किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी का परामर्श अवश्य लें।

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राजगुरु जी

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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः,








ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः,

ॐ एतत् ते वदनं सौम्यं लोचनत्रय भूषितम् ।
पातु नः सर्वभूतेभ्यः कात्यायनि नमोस्तुऽते,
मः न च्चे वि यै डा मुं चा क्लीं ह्रीं ऐं ॐ ।। १ ।।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः,
ज्वालाकराल मृत्युग्रमशेषासुर सूदनम् ।
त्रिशूलं पातु नो भीतेर्भद्रकालि नमोस्तुऽते,
मः न च्चे वि यै डा मुं चा क्लीं ह्रीं ऐं ॐ ।। २ ।।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः,
हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ।
मः न च्चे वि यै डा मुं चा क्लीं ह्रीं ऐं ॐ ।। ३ ।।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः,
असुरास्रग् वसापंकचर्चितस्ते करोज्ज्वलः ।
शुभाय खड्गो भवतु चण्डिके त्वां नता वयम् ,
मः न च्चे वि यै डा मुं चा क्लीं ह्रीं ऐं ॐ ।। ४ ।

चेतावनी -

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प्रेत बाधाओं से बचने का उपाय





प्रेत बाधाओं से बचने का उपाय


प्रायः आपने सुना होगा कि अमुक प्राणी अथवा स्त्री, युवा युवतियों पर भूत-प्रेत की छाया है। यह सत्य है आपको विश्वास आये या न आये परंतु जब आत्माएं किसी को अपने चंगुल मंे जकड़ लेती हंै तो बड़ी कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। 

यह तो सत्य है कि शरीर का ही अंत होता है जीवात्मा का नहीं। जो मकान खंडहर हो जाते हैं, तालाबों के किनारों पर अथवा जंगल में बरगद के पेड़ पर इनका डेरा मिलेगा। भूतप्रेत, जिन्न, चुडै़ल व ब्रह्म राक्षस आदि विनाशकारी आसुरी शक्तियां हैं जो प्राणियों के पीछे लग जाती हैं। बहुत सी आत्माएं तो अपना पुराना बदला भी लेती हैं। उस घर पर अचानक आक्रमण करती रहती हैं। घर वालों को हानि पहुंचाना, बनते हुए कामों को बिगाड़ना आदि समस्याएं उत्पन्न करती हैं।

उपाय:

शनिवार के दिन दोपहर को सवा दो किलो बाजरे का दलिया तैयार करके उसमें गुड़ मिला दें। इस दलिया को मिट्टी की एक हाँडी में डालकर सूर्यास्त के समय उस हाँडी को रोगग्रस्त पुरूष अथवा स्त्री पूरे शरीर पर बाएं से दायें सात बार घुमाकर किसी चैराहे पर रख दें। आते समय पीछे मुड़कर न देखें।

 यदि कोई मिल जाय व पूछना चाहे तो उससे बात न करें। यह क्रिया करते समय किसी को सामने नहीं करके धूप देकर सीधे हाथ में बांध दें। ऊँ हं हनुमते नमः मंत्र से जाप करने से ऊपरी बाधा से मुक्ति मिल जायेगी।

ऊँ नमो भगवते रुद्राय नमः कोशेश्वरस्य नमो ज्योति पतंगाय नमो रुद्राय नमः सिद्धि स्वाहा।

उपरोक्त मंत्र का स्नान करके शु़द्ध कपड़े पहनकर 1 माला का जाप प्रातः-सायं करने से प्रेतबाधा से मुक्ति मिल जाती है। हनुमान चालीसा का पाठ बजरंग बाण सहित करने से घर से ऐसी आत्माएं चली जाती हैं। उपरोक्त मंत्र से हनुमान जी का हवन भी करें। साथ ही गायत्री मंत्र से भी हवन करें। घर में सुख शांति हो जायेगी।

धूनिया:

प्रेतात्माओं को घर से भगाने के लिए घर में प्रतिदिन सुबह शाम धूनी दें। गाय के उपलों पर कोपलों की आग बनाकर उसपर लोहबान, गुग्गल- लाख दंत सर्प की कंेचुली, पीड़ित व्यक्ति या महिला के सिर का बाल लेकर सबको पीसकर तब अग्नि पर डालकर भुक्त भोगी को सूंघाते रहना चाहिए।

अश्विनी नक्षत्र में घोड़े के पैरों के नाखून को अग्नि में जलाकर धूनी दें उक्त मंत्र बोलते हुए- मंत्र - ऊँ नमः श्मशान वासिने भूतादीनां कुरू कुरू स्वाहा। उक्त मंत्र को सिद्ध कर लेना चाहिए। शीघ्र लाभ हो जाएगा।

चेतावनी - 

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Thursday, January 2, 2020

उर्वशी साधना - सौन्दर्य, सुख प्रेम की पूर्णता हेतु





उर्वशी साधना - सौन्दर्य, सुख प्रेम की पूर्णता हेतु


रम्भा, उर्वशी और मेनका तो देवताओं की अप्सराएं रही हैं, और प्रत्येक देवता इन्हे प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील रहा है। यदि इन अप्सराओं को देवता प्राप्त करने के लिए इच्छुक रहे हैं, तो मनुष्य भी इन्हे प्रेमिका रूप में प्राप्त कर सकते हैं।

 इस साधना को सिद्ध करने में कोई दोष या हानि नहीं है तथा जब अप्सराओं में श्रेष्ठ उर्वशी सिद्ध होकर वश में आ जाती है, तो वह प्रेमिका की तरह मनोरंजन करती है, तथा संसार की दुर्लभ वस्तुएं और पदार्थ भेट स्वरुप लाकर देती है।

 जीवन भर यह अप्सरा साधक के अनुकूल बनी रहती है, वास्तव में ही यह साधना जीवन की श्रेष्ठ एवं मधुर साधना है तथा प्रत्येक साधक को इस सिद्धि के लिए प्रयत्नशील होना चाहिए।

किसी भी शुक्रवार से प्रारम्भ किया जा सकता है। यह रात्रिकालीं साधना है। स्नान आदि कर पीले आसन पर उत्तर की ओर मुंह कर बैठ जाएं। सामने पीले वस्त्र पर 'उर्वशी यंत्र' (ताबीज) स्थापित कर दें तथा सामने पांच गुलाब के पुष्प रख दें। फिर पांच घी के दीपक लगा दें और अगरबत्ती प्रज्वलित कर दें।

॥ ॐ उर्वशी प्रिय वशं करी हुं ॥

इस मंत्र के नीचे केसर से अपना नाम अंकित करें। फिर उर्वशी माला से निम्न मंत्र की १०१ माला जप करें -

मंत्र

॥ ॐ ह्रीं उर्वशी मम प्रिय मम चित्तानुरंजन करि करि फट ॥

यह मात्र सात दिन की साधना है और सातवें दिन अत्यधिक सुंदर वस्त्र पहिन यौवन भार से दबी हुई उर्वशी प्रत्यक्ष उपस्थित होकर साधक के कानों में गुंजरित करती है कि जीवन भर आप जो भी आज्ञा देंगे, मैं उसका पालन करूंगी।

तब पहले से ही लाया हुआ गुलाब के पुष्पों वाला हार अपने सामने मानसिक रूप से प्रेम भाव उर्वशी के सम्मुख रख देना चाहिए। 

इस प्रकार यह साधना सिद्ध हो जाती है और बाद में जब कभी उपरोक्त मंत्र का तीन बार उच्चारण किया जाता है तो वह प्रत्यक्ष उपस्थित होती है तथा साधक जैसे आज्ञा देता है वह पूरा करती है।

साधना समाप्त होने पर 'उर्वशी यंत्र (ताबीज)' को धागे में पिरोकर अपने गलें में धारण कर लेना चाहिए। सोनवल्ली को पीले कपड़े में लपेट कर घर में किसी स्थान पर रख देना चाहिए, इससे उर्वशी जीवन भर वश में बनी रहती है।

चेतावनी - 

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ । बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है 

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माँ महाकाली की साधना








माँ महाकाली की साधना ----


आज के युग में माँ महाकाली की साधना कल्पवृक्ष के समान है क्योकि ये कलयुग में शीघ्र अतिशीघ्र फल प्रदान करने वाली महाविद्याओं में से एक महा विद्या है. जो साधक महाविद्या के इस स्वरुप की साधना करता है उसका मानव योनि में जन्म लेना सार्थक हो जाता है क्योकि एक तरफ जहाँ माँ काली अपने साधक की भौतिक आवश्कताओं को पूरा करती है वहीँ दूसरी तरफ उसे सुखोपभोग करवाते हुए एक-छत्र राज प्रदान करती है.

वैसे तो जब से इस ब्रह्मांड की रचना हुई है तब से लाखों करोडों साधनाओं को हमारे ऋषियों द्वारा आत्मसात किया गया है पर इन सबमें से दस महाविद्याओं, जिन्हें की “ मात्रिक शक्ति “ की तुलना दी जाती है, की साधना को श्रेष्टतम माना गया है. जबसे इस पृथ्वी का काल आयोजन हुआ है तब से माँ महाकाली की साधना को योगियों और तांत्रिको में सर्वोच्च की संज्ञा दी जाती है.

 साधक को महाकाली की साधना के हर चरण को पूरा करना चाहिए क्योकि इस साधना से निश्यच ही साधक को वाक्-सिद्धि की प्राप्ति होती है. वैसे तो इस साधना के बहुतेरे गोपनीय पक्ष साधक समाज के सामने आ चुके है परन्तु आज भी हम इस महाविद्या के कई रहस्यों से परिचित नहीं है.

काम कला काली, गुह्य काली, अष्ट काली, दक्षिण काली, सिद्ध काली आदि के कई गोपनीय विधान आज भी अछूते ही रह गए साधकों के समक्ष आने से,जितना लिखा गया है ये कुछ भी नहीं उन रहस्यों की तुलना में जो की अभी तक प्रकाश में नहीं आया है और इसका महत्वपूर्ण कारण है इन विद्याओं के रहस्यों का श्रुति रूप में रहना,अर्थात ये ज्ञान सदैव सदैव से गुरु गम्य ही रहा है,मात्र गुरु ही शिष्य को प्रदान करता रहा है और इसका अंकन या तो ग्रंथों में किया ही नहीं गया या फिर उन ग्रंथों को ही लुप्त कर दिया काल के प्रवाह और हमारी असावधानी और आलस्य ने.

अघोर साधनाओं का प्रारंभ शमशान से ही होता है और होता है तीव्र साधनाओं का प्रकटीकरण भी,तभी तो साधक पशुभाव से ऊपर उठकर वीर और तदुपरांत दिव्य भाव में प्रवेश कर अपने जीवन को सार्थक कर पाता है.

किसी भी शक्ति का बाह्य स्वरुप प्रतीक होता है उनकी अन्तः शक्तियों का जो की सम्बंधित साधक को उन शक्तियों का अभय प्रदान करती हैं, अष्ट मुंडों की माला पहने माँ यही तो प्रदर्शित करती है की मैं अपने हाथ में पकड़ी हुयी ज्ञान खडग से सतत साधकों के अष्ट पाशों को छिन्न-भिन्न करती रहती हूँ, उनके हाथ का खप्पर प्रदर्शित करता है

ब्रह्मांडीय सम्पदा को स्वयं में समेट लेने की क्रिया का,क्यूंकि खप्पर मानव मुंड से ही तो बनता है और मानव मष्तिष्क या मुंड को तंत्र शास्त्र ब्रह्माण्ड की संज्ञा देता है,अर्थात माँ की साधना करने वाला भला माँ के आशीर्वाद से ब्रह्मांडीय रहस्यों से भला कैसे अपरिचित रह सकता है.

इन्ही रूपों में माँ का एक रूप ऐसा भी है जो अभी तक प्रकाश में नहीं आया है और वह रूप है माँ काली के अद्भुत रूप “महा घोर रावा” का,जिनकी साधना से वीरभाव,ऐश्वर्य,सम्मान,वाक् सिद्धि और उच्च तंत्रों का ज्ञान स्वतः ही प्राप्त होने लगता है,अद्भुत है माँ का यह रूप जिसने सम्पूर्ण ब्रह्मांडीय रहस्यों को ही अपने आप में समेत हुआ है और जब साधक इनकी कृपा प्राप्त कर लेता है तो एक तरफ उसे समस्त आंतरिक और बाह्य शत्रुओं से अभय प्राप्त हो जाता है वही उसे माँ काली की मूल आधार भूत शक्ति और गोपनीय तंत्रों में सफलता की कुंजी भी तो प्राप्त हो जाती है.

वस्तुतः ये क्रियाएँ अत्यंत ही गुप्त रखी गयी हैं और सामन्य साधको को तो इन स्वरूपों की जानकारी भी नही है परन्तु हमारी सद्गुरु परम्परा में हमें सहजता से सभी रहस्यों का परिचय प्राप्त होता है.

इनकी मूल साधना अत्यधिक ही दुष्कर मानी गयी है और श्मशान,पूर्ण तैयारी और कुशल गुरु मार्गदर्शन के बिना इसका अभ्यास भी नहीं करना चाहिय अन्यथा स्वयं के प्राण तीव्रता के साथ बाह्य्गामी होकर ब्रह्माण्डीय प्राणों के साथ योग कर लेते है और पुनः लौट कर साधक के मूल शरीर मैं नहीं आते हैं.

 अतः वह विधान तो यहाँ पर देना उचित नहीं होगा परन्तु उनका एक सरल क्रम जो घर में एकांत में किया जा सकता है और उपरोक्त सभी लाभों को प्राप्त किया जा सकता है यहाँ पर दिया जा रहा है. अभी तक ये साधना प्रकाश में नहीं आई थी परन्तु सदगुरुदेव की कृपा से हमे सभी को इसे जानने का सौभाग्य मिला है.

१. इसे किसी भी रविवार से प्रारम्भ किया जा सकता है.

२. लाल वस्त्र और आसन अनिवार्य है.

३. रात्रि का तीसरा पहर और दक्षिण दिशा की प्रधानता कही गयी है.

४. महाकाली के चैतन्य चित्र या विग्रह के सामने बैठ कर इस मंत्र का २१ माला जप अगले रविवार तक नित्य किया जाता है.

५. गुरु पूजन और गुरु मंत्र तो किसी भी साधना का प्राथमिक और अनिवार्य अंग है जो अन्य साधना में सफलता के लिए हमारा आधार बनता है.

६. कुमकुम, तेल के दीपक, जवा पुष्प, गूगल धुप और अदरक के रस में डूबा हुआ गुड़ माँ के पूजन में प्रयुक्त होता है. रुद्राक्ष माला से इनका मंत्र जप किया जाता है.

ॐ क्रीं क्लीं महा घोररावयै पूर्ण घोरातिघोरा क्लीं क्रीं फट् ||

OM KREEM KLEEM MAHA GHOR RAAVYAI POORN GHORAATIGHORA KLEEM KREEM PHAT ||

साधना के दौरान थोड़ी भयावह स्थिति बन सकती है, पदचाप सुनाई दे सकती है, साधना से उच्चाटन हो सकता है, तीव्र ज्वर और तीव्र दर्द का अनुभव हो सकता है परन्तु साधक यदि इन् स्थितियों को पार कर लेता है तो उसे स्वयं ही धीरे धीरे उपरोक्त लाभ प्राप्त होने लगते हैं.

साधना काल के दौरान आपको कुछ आश्चर्य जनक अनुभव हो सकते हैं, पर इनसे न परेशान या बिचलित न हो , ये तो साधना सफलता के लक्षण हैं .

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ । बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है

विशेष -

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राजगुरु जी

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

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Wednesday, January 1, 2020

सरकारी नौकरी किस को मिल सकती है






सरकारी नौकरी किस को मिल सकती है :-


१. यदि १० भाव में मंगल हो, या १० भाव पर मंगल की दृष्टी हो,

२. यदि मंगल ८ वे भाव के अतिरिक्त कही पर भी उच्च राशी मकर (१०) का होतो।

३. मंगल केंद्र १, ४, ७, १०, या त्रिकोण ५, ९ में हो तो.

४. यदि लग्न से १० वे भाव में सूर्य (मेष) , या गुरू (४) उच्च राशी का हो तो। अथवा स्व राशी या मित्र राशी के हो।

५. लग्नेश (१) भाव के स्वामी की लग्न पर दृष्टी हो।

६. लग्नेश (१) +दशमेश (१०) की युति हो।

७. दशमेश (१०) केंद्र १, ४, ७, ७ , १० या त्रिकोण ५, ९ वे भाव में हो तो। उपरोक्त योग होने पर जातक को सरकारी नौकरी मिलती है। जितने ज्यादा योग होगे , उतना बड़ा पद प्राप्त होगा।

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...