Tuesday, August 6, 2019

शत्रु उच्चाटन के दुर्गा प्रयोग






शत्रु उच्चाटन के दुर्गा प्रयोग


देवी दुर्गा की आराधना कर भी शत्रु उच्चाटन साधना कर संघर्ष को खत्म किया जा सकता है। यह प्रयोग किसी भी माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शुरू किया जाता है। वैसे इसे किसी भी शनिवार को किया जा सकता है।

 इसका समय रात्रि के 11 बजे के बाद है। साधना की शुरूआत से पहले लाल वस्त्र में लाल आसन पर दक्षिण की ओर मुंह कर बैठें। अपने सामने देवी दुर्गा की तस्वीर रखें और शत्रु का नाम लेकर उससे बचाव की मन्नत मांगते हुए उच्चाटन मंत्र का 51 माला जाप करें। मंत्र मंे दिए गए अमुक के स्थान पर शत्रु का नाम लें। इसका मंत्र हैः-

ऊँ दुँ दुर्गायै अमुकं उच्चाटय उच्चाटय शीघ्रं सर्व शत्रु बाधा नाशय नाशय फट!

इस साधना के लिए किया जाने वाला अनुष्ठान तीन दिनों का होता है। उसके बाद यंत्र, माला और दूसरी पूजन सामग्रियों को जमीन में दबा दिया जाता है।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

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भैरवी साधना आज के परिपेक्ष्य में








भैरवी साधना आज के परिपेक्ष्य में 








क्या महिला का कौल मे स्थान केवल शोषण मात्र का है, जबकि वो शक्ति का स्वरुप है। वही आपको पुर्ण करती है फिर‌ भी। क्या जो मन आये भैरवी बन सकती है। 


सटिक राय देकर जो विद्या लुप्त हो रही है, उसको अपने आने वाली पीढी मे समुचित विकास दे। यह भारत देश का दुर्भाग्य है जो विद्या हमारे यहा पनपी और सृष्टि रचना मे सहायक होते हुए हमे शक्ति प्रदान करता है।


इसी के विपरीत आज किसी अश्लील साईट पर पत्नी प्रदर्शन होगा तो मुखौटा लगाकर दिखायेगे। यही संस्कृति की विडंबना है।



इत्येवं देव देवस्य मह्कालासय भैरवी कीर्तितम पूजनं सम्यक सधाकानाम सुखावहम…        


                                            



चेतावनी -

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महाकाल स्तोत्रं







महाकाल स्तोत्रं   :-






इस स्तोत्र को भगवान् महाकाल ने खुदभैरवी को बताया था.इसकी महिमा का जितना वर्णन किया जाये कम है.इसमें भगवान् महाकाल के विभिन्न नामों का वर्णनकरते हुए उनकी स्तुति की गयी है .


शिव भक्तों के लिएयह स्तोत्र वरदान स्वरुप है . नित्य एक बार जपभी साधक के अन्दर शक्ति तत्त्व और वीर तत्त्वजाग्रतकर देता है . 

मन में प्रफुल्लता आ जाती है . भगवान्शिव की साधना में यदि इसका एक बार जप करलिया जाये तो सफलता की सम्भावना बड जाती है .


ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पते
महाकाल महायोगिन महाकाल नमोस्तुते
महाकाल महादेव महाकाल महा प्रभो
महाकाल महारुद्र महाकाल नमोस्तुते
महाकाल महाज्ञान महाकाल तमोपहन
महाकाल महाकाल महाकाल नमोस्तुते
भवाय च नमस्तुभ्यं शर्वाय च नमो नमः
रुद्राय च नमस्तुभ्यं पशुना पतये नमः
उग्राय च नमस्तुभ्यं महादेवाय वै नमः
भीमाय च नमस्तुभ्यं मिशानाया नमो नमः
ईश्वराय नमस्तुभ्यं तत्पुरुषाय वै नमः
सघोजात नमस्तुभ्यं शुक्ल वर्ण नमो नमः
अधः काल अग्नि रुद्राय रूद्र रूप आय वै नमः
स्थितुपति लयानाम च हेतु रूपआय वै नमः
परमेश्वर रूप स्तवं नील कंठ नमोस्तुते
पवनाय नमतुभ्यम हुताशन नमोस्तुते
सोम रूप नमस्तुभ्यं सूर्य रूप नमोस्तुते
यजमान नमस्तुभ्यं अकाशाया नमो नमः
सर्व रूप नमस्तुभ्यं विश्व रूप नमोस्तुते
ब्रहम रूप नमस्तुभ्यं विष्णु रूप नमोस्तुते
रूद्र रूप नमस्तुभ्यं महाकाल नमोस्तुते
स्थावराय नमस्तुभ्यं जंघमाय नमो नमः
नमः उभय रूपा भ्याम शाश्वताय नमो नमः
हुं हुंकार नमस्तुभ्यं निष्कलाय नमो नमः
सचिदानंद रूपआय महाकालाय ते नमः
प्रसीद में नमो नित्यं मेघ वर्ण नमोस्तुते
प्रसीद में महेशान दिग्वासाया नमो नमः
ॐ ह्रीं माया - स्वरूपाय सच्चिदानंद तेजसे
स्वः सम्पूर्ण मन्त्राय सोऽहं हंसाय ते नमः
फल श्रुति
इत्येवं देव देवस्य मह्कालासय भैरवी कीर्तितम पूजनं सम्यक सधाकानाम सुखावहम…        


                         🌹🌹जय श्री महाकाल बाबा की🌹🌹                       



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Monday, August 5, 2019

तँत्र का पलट वार





तँत्र का पलट वार







*एक ठो सरसो सोला राई  मारो पटवल को रोजाई  खाये खाये पड़े भार जै करे ते मरे उल्टाविद्या ताहि पर पड़े शब्द साँचा पिंड कांचा फुरो मंत्र गुरूवाचा,*

एक मुठी सरसो ओर 16 राई के दाने लेके 7 बार उतार कर आग में जला देना है  जिसने आपको उप्पर तंत्र किया है उसके उप्पर ही पलट जाएगा सब, ये स्वयं सिद्ध है ,



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Tuesday, July 30, 2019

पन्द्रिया यंत्र साधना -- साबर विधि से





पन्द्रिया यंत्र साधना -- साबर विधि से


जरुरी है| अतः इस साधना को उसी साधक को शुरू करना चाहिए जो इस साधना के नियम का पूर्ण शुद्धि से पालन करऔर जन कल्याण किया है | यह बहुत ही तीव्र  साधना है | इस में शुद्धि का 

खास ध्यान ख़ास तौर पर  रखा जाता है।। अन्यथा तकलीफ हो सकती है ..| 

हर  उस व्यक्ति का बहुत ही सौभाग्य उदय होता है जब ऐसी साधना प्राप्त होती है | मेरी नजर में ऐसा कोई काम  ही नहीं है।। जो इस साधना से पूरा ना हो | हिन्दू और इस्लामिक दोनों मतो में यह साधना की जाती
है|

मैंने कई मुसलमानी मौलवियों को भी इस यंत्र का प्रयोग करते हुए देखा है |

यह मैं स्वयं भी इस साधना का प्रयोग बहुत बार करके इसे परख चुका हूँ| और कई संतो ने भी इसे समय-समय पर सिद्ध किया है

यह साधना अगर शारदीय,चैत्र अथवा गुप्त नवरात्री में की जाये तो और भी फल मिलता है | 
इसे सिद्ध करने के

लिए समय तो अवश्य ही लगेगा लेकिन अगर आप इसे सिद्ध कर ले तो किसी सिद्धि के
पीछे
भागने की आवश्कता नहीं है | इस में धैर्य बहुत जरुरी है और ब्रह्मचर्य  का
पालन भी
सके |

नियम  --- 

१. एक समय शुद्ध भोजन करे, फलाहार कभी भी ले सकते हैं |

२.ब्रह्मचर्य अनिवार्य है |

३.सत्य बोलने की
कोशिश करे |

४.किसी से व्यर्थ
में ना उलझें |

५.बड़ों का हमेशा सम्मान करें !

विधि

-- शुद्ध धुले हुये वस्त्र  पहने सिले हुए ना हो तो जयादा बेहतर है (जैसे 
धोती, चादर) | पीले लाल या सफ़ेद रंग के कपडे ज्यादा बेहतर है | लाल रंग
विशेष फल दाई  है !

२.शुद्ध घी का दीपक लगाये और एक बेजोट पर लाल वस्त्र बिछा कर  माता जगदम्बा का 
सुन्दर चित्र स्थापत करें हर रोज पूजन करे और गुरु पूजन करे
और पूर्ण समर्पित भाव से साधना शुरू करे !

३.मन को विचलित ना

होने दे माता का दर्शन होने के बाद कन्या पूजन करे जा साधना पूर्ण होने के बाद
कन्या पूजन जरुरी है |

५.माता की हलवे का भोग लगा कर कन्या पूजन किया जा सकता है !

६. इस यंत्र को

निम्न मन्त्र पड़ते हए सवा लाख बार लिखना है और जितने रोज लिखो आटे में मिक्स कर के
गोलिया बना ले और मछलियों को डाल दे किसी तालाब या नदी पर जाकर |

इस यंत्र को जैसे नीचे दिया है बना ले |

साबर मंत्र ---

ॐ  सात पूनम काल का बारह  बरस क्वार ,एको देवी जानिए चौदह भुवन द्वार द्वि पक्षे निर्मलिये तेरह देवन देव अष्ट भुजी परमेशवरी ग्यारह रूद्र सेव ,सोलह कला समपुरनी तिन नयन भरपूर दसो द्वारी तुही माँ , पांचो बाजे नूर ,नव निधि षट दर्शनी पन्द्रह तिथि जान चारो युग में कालका कर काली कल्याण ......!

ये मन्त्र थोडा उग्र  का है ..इसलिए सात्विकता बरतिए ..और इसे प्रयोग में  लाइए 

 इस मन्त्र का जप करते हुए उपर वाला यन्त्र लिखे और जब  साधना पूरी हो जाती है साधक के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता |

प्रयोग  --

जिस किसी व्यक्ति पर कैसी भी प्रेत बाधा या किसी का किया तंत्र प्रयोग 

(जैसे-मूठ) हो, तो इस यन्त्र को अष्ट गंध से लिख कर उस व्यक्ति को पहना 
दिया जाये तो बाधा शांत हो जाती है | 

कार्य सिद्धि के लिए इस यन्त्र को अपने साथ ले कर कार्य के लिए जा सकते है | मुक़दमे में विजय पाने के लिए  है और घर छोड़  कर
गये व्यक्ति  को

वापिस लाने के लिए इसका अचूक असर होता है वशीकरण  के लिए भी इसका प्रयोग  किया 

जाता है आप पहले इसे सिद्ध कर ले इसके प्रयोग  तो सैकड़ो है उसे फिर
कभी दे दूंगा | यंत्र सिद्ध करते करते माँ का दर्शन हो जाता है ऐसा मेरा और
कई लोगो का अनुभव है |

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Monday, July 29, 2019

अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच




अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच


चेहरे पर निखार, आकर्षक शरीर और एक सेहतमंद शरीर की कामना भला आज कौन नहीं करता है। हर कोई आकर्षक नज़र आना चाहता है। तो इस मनोकामना को पूरा  करने के लिए व्यक्ति आमतौर पर अप्सरा वशीकरण मंत्र  और साधना का इस्तेमाल करता है, जिसे काफी कारगर व असरदार भी माना गया है। 

इसके बारे मे ये भी कहां गया है कि अप्सरा साधना की मदद से अप्सरा के जैसा  सौंदर्य व समृद्धि प्राप्त किया जा सकता है और ऐसा नहीं है की सिर्फ इसका इस्तेमाल स्त्रिया ही कर सकती है, क्यूकी सुंदर शरीर और खूबसूरत चेहरे की लालसा पुरुष भी रखता है।

तो अब हम आपको बताते है अप्सरा साधना के बारे मे की किस प्रकार आप इसे कर सकते है। जैसा की हमेशा से यह मान्यता रही है कि अप्सराओ को गुलाब, चमेली, रजनीगंधा और रातरानी जैसे फूलों की सुगंध काफी पसंद आती है। 

अप्सरा साधना करने के दौरान उस व्यक्ति को खास तौर पर अपनी यौन भावनाओं पर संयम रखना पड़ता है। ऐसा न कर पाने से साधना सिद्ध नहीं हो पाती है। 

साधक पूरे विश्वास और संकल्प व मंत्र की सहायता से अगर इस साधना को करता है, तो माना गया है कि अप्सरा प्रकट होती है और उस समय वो साधक उसे गुलाब के साथ इत्र भेंट करता है। साथ ही उसे दूध से बनी मिठाई व पान आदि भेंट देता है और उससे  जीवन भर साथ रहने का वचन लेता है।

 इन अप्सराओ मे चमत्कारिक शक्तिया होती है जो साधक की जिंदगी को सुंदर बनाने की योग्यता रखती है।
अब हम आपको रंभा अप्सरा साधना के बारे मे जानकारी देते हुए बताएँगे की इस साधना को करने के लिए आपको इस मंत्र का जप करना होता है, जोकि इस प्रकार है, 

मंत्र:

ऊँ दिव्यायै नमः! ऊँ वागीश्वरायै नमः!

ऊँ सौंदर्या प्रियायै नमः! ऊँ यौवन प्रियायै नमः!

ऊँ सौभाग्दायै नमः! ऊँ आरोग्यप्रदायै नमः!

 ऊँ प्राणप्रियायै नमः! ऊँ उजाश्वलायै नमः! ऊँ देवाप्रियायै  नमः!

 ऊँ ऐश्वर्याप्रदायै नमः! ऊँ धनदायै रम्भायै नमः!

बाकी साधना के जैसे इसमे भी साधक को पूजा-अर्चना के बाद  रम्भेत्किलन यंत्र के सामने बताए मंत्र का जप करना होता है। 

साधना हो जाने के बाद साधक की इक्छा पूर्ण होने के साथ उसके जीवन मे खुशियों आ जाती है।

अप्सरा साधना विधि को करने के लिए साधक के लिए जरूरी होता है कि वो कोई एक शांत जगह चुन ले। फिर उस जगह पर सफ़ेद रंग का एक कपड़ा बिछाकर, पीले चावल के इस्तेमाल से एक यंत्र का निर्माण करे। 

इसके बाद साधक के लिए जरूरी है कि वो अपने वस्त्र पर इत्र लगा ले जिससे वो  सुगन्धित हो जाये और मखमल को अपना आसन बनाए। 

केवल शुक्रवार के दिन, आधी रात को आप इस साधना करे। ध्यान जरूर रखे की साधना करते वक़्त आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो और फिर बनाए हुए यंत्र का पंचोपकर पूजन करे।

 जिस एकांत जगह या कमरे मे साधक बैठा है वो वहाँ गुलाब के इत्र का प्रयोग करे। आस-पास एक सुगन्धित माहोल बना ले।

 इन सबके बाद आप गुरु गणपति का ध्यान करके स्फटिक मणिमाला का मंत्र के साथ 51 जप करे। 

मंत्र:

 “ऊँ उर्वशी प्रियं वशं करी हुं! ऊँ ह्रीं उर्वशी अप्सराय आगच्छागच्छ स्वाहा!!” 

इस अनुष्ठान को आप कुल 7, 11 या 21 दिनों तक करे और आखिरी दिन 10 माल का जाप करे। बताए मंत्र के नीचे अपना नाम लिखकर उर्वशी माला की मदद से बताए मंत्र का 101 बार जप करे,

 मंत्र:  

“ऊँ ह्रीं उर्वशी मम प्रिय मम चित्तानुरंजन करि करि फट”।

अप्सरा वशीकरण साधना से जुड़े एक शाबर मंत्र के बारे मे भी हम आपको बताते है। जिसको करने के लिए जरूरी है की आप एक बाजोट पर लाल रंग का कपड़ा बिछा ले और उस पर एक चावल से ढेरी बना ले, जो कुम्कुम से रंगे हो।

 आप जिस आसान पर बैठे वो भी लाल रंग का ही हो। इसके बाद उन चावल पर “पुष्पदेहा आकर्षण सिद्धि यंत्र” स्‍थापित कर दे और स्फटिक की माला से मंत्र जाप करे।

 मंत्र: 

“ॐ आवे आवे शरमाती पुष्पदेहा प्रिया रुप आवे आवे हिली हिली मेरो कह्यौ करै,मनचिंतावे,कारज करे वेग से  आवे आवे,हर क्षण साथ रहे हिली हिली पुष्पदेहा अप्सरा फट् ॐ ”।

 शुक्रवार के दिन इस साधना को शुरू करे जो 7 दिनों तक चलती है। आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो इसका खास ध्यान रखे और मंत्र का रोज 11 माला जप करना होगा। बनाए हुए यंत्र पर रोज गुलाब का इत्र चढाये और 5 गुलाब भी चढा दे।

 घी का दीपक जला दे, जो साधना विधि के समय जलता रहे। आप जो धूप इस्तेमाल करे वो गुलाब का ही हो। जब मंत्र का जप किया जा रहा हो उस समय नजर  यंत्र की ओर होनी चाहिए। इसी यंत्र के माध्यम से साधक को अप्सरा से वचन प्राप्त करने का मंत्र प्राप्त होता है।

तो यकीन है की रूप-रंग व यौवन की चाहत रखने वाले लोगों के लिए ऊपर बताई गई बाते मददगार होंगी, जिनके उपयोग से साधक अपनी मनोकामना को पूर्ण कर सकता है।

चेतावनी -

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महाकाली साधना





महाकाली साधना


काल की गति सूक्ष्म से अति सूक्ष्म हैं . काल केबल कोई समय मात्र नहीं हैं , काल सजीव व् निर्जीव की गतिशीलता की पृष्ठभूमि हैं . काल गति के हरेक बिंदु में असंख्य घटनाए समाहित हैं . 

इन्ही को हम काल योग या काल खंड कहते हैं . काल खंड में एक साथ हजारो प्रक्रियाए चलती रहती हैं , पर जिस भी प्रक्रिया का प्रभुत्व ज्यादा होता हे उसका असर हम पर प्रभाव ज्यादा रहता हे.

 इसी तरह अगर हम घटनाओ का अनावरण करे तो हरेक प्रक्रिया के लिए हमारे शास्त्रों में देवी एवं देवता निर्धारित हैं . 

आप ब्रम्हा, विष्णु, महेश, वरुण, इन्द्र, लक्ष्मी, सरस्वती, महाविद्या या किसी भी देवी देवता को देख लीजिए, प्रकृति में उनके कार्य निश्चित रूप से होते ही हैं .

अगर हम इसी बात को आगे लेकर बढे तो यह एक निष्कर्ष हैं कि पृथ्वी में जो भी गतिशीलता हैं या, काल खंड में समाहित जो भी घटनाए हैं उन हरएक घटना के स्वामी देव या देवी होते ही हैं.

हर एक क्षण में हमारे जीवन पर कोई न कई देवी देवता का प्रभाव पड़ता ही हैं . इसी को कहा गया हैं कि हरेक क्षण में कोई न कोई देवी या देवता शरीर में चैतन्य होते ही हैं . 

साधनाओ के द्वारा किसीभी देवी एवं देवताओ को सिद्ध कर के उनके द्वारा हमारी मनोकामना पूर्ति ,कार्य पूर्ति व इच्छा पूर्ति करवा सकते हैं . 

मगर हम ये नहीं जानते की किस क्षण में कौन देव / देवी चैतन्य हैं , और अगर हैं भी तो हम ये नहीं जानते कि प्रकृति आखिर कौन सा कार्य उस क्षण में करेगी और उसका हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

अत्यंत उच्चकोटि के योगी, इस प्रकार का कालज्ञान रखते हैं , उन्हें मालूम रहता हैं कि कौन से क्षण में क्या होगा और उसका परिणाम किसके ऊपर क्या असर करेगा.

 कौनसे देवी या देवता उस क्षण में जागृत होंगे और कौन से देवी देवता उस क्षण अलग अलग मनुष्य में चैतन्य रहते हैं . 

इसी के आधार पर वे भविष्य में कौन से क्षण में किसके साथ क्या होगा और उसे अलग अलग व्यक्तियों के लिए कैसे अनुकूल या प्रतिकूल बनाना हैं इस प्रकार से अति सूक्ष्म ज्ञान रहता हैं .

जैसे कि पहले कहा गया हैं , कि काल खंड में घटित असंख्य घटनाओ में से किसी एक घटना का प्रभाव सब से ज्यादा रहता हैं हर एक व्यक्ति के लिए वो अलग अलग हो सकता हैं . और हम उसी को एक डोर में बांधते हुए "जीवन" नाम देते हैं . 

दरअसल हमारे साथ एक ही वक़्त में सेकड़ो घटनाए घटित होती हैं पर उनके न्यून प्रभाव के कारण हम उसे समझ नहीं पाते. अब जिस घटनाका प्रभाव सबसे ज्यादा होगा उसके देवता को अगर हम साधना के माध्यम से अनुकूल करले तो उस समय में होने वाले किसी भी घटना क्रम को हम आसानी से हमारे अनुकूल बना सकते हैं .

 पर हम इतने कम समय में कैसे समझ ले की क्या घटना हैं देवता कौन हैं प्रभाव कैसा रहेगा आदि आदि ...उच्चकोटि के योगियों के लिए ये भले ही संभव हो लेकिन सामान्य मनुष्यों के लिए ये किसी भी हिसाब से संभव नहीं हैं . 

और इसी को ध्यान में रखते हुए , एक ऐसी साधना का निर्माण हुआ जिससे अपने आप ही हर एक क्षण में रहा देव योग अपने आप में सिद्ध हो जाता हैं और देव योग का ज्ञान होता रहता हे जिससे कि ये पता चलेगा कि कौन से क्षण में क्या कार्य करना चाहिए. 

अपने आपही क्षमता आ जाती हैं की उसे कार्य के अनुकूल या प्रतिकूल होने का आभाष पहले से ही मिल जाता हैं और देवता उसके वश में रहते हैं

काल की देवी महाकाली को कहा गया हैं और काल उनके नियंत्रण में रहता हैं . इस साधना के इच्छुक लोगो को साधना के साथ साथ शक्ति चक्र पर त्राटक का भी अभ्यास करना चाहिए.

ये साधना रविवार या फिर किसी भी दिन शुरू की जा सकती हैं इस साधना में साधक को काले वस्त्र ही धारण करने चाहिए.

इस साधना में महाकाली यन्त्र व काले हकीक माला की जरुरत रहती हैं साधना काल के के सभी नियम इस साधना में पालन करने चाहिए .

रात्रि में ११ बजे के बाद साधक स्नान कर के, काले वस्त्र धारण कर के काले उनी आसन पर बेठे. अपने सामने महाकाली का चित्र स्थापित हो. यन्त्र की सामान्य पूजा करे. दीपक और लोबान धूप जरुर लगाए.

फिर निम्न लिखित ध्यान करे

मुंड माला धारिणी दिगम्बरा
शत्रुसम्हारिणी विचित्ररूपा
महादेवी कालमुख स्तंभिनी
नमामितुभ्यम मात्रुस्वरूपा

इसके बाद साधना में सफलता के लिए महाकाली से प्राथना करे एवं निम्न लिखित मन्त्र का २१ माला जाप करे.

क्लीं क्लीं क्रीं महाकाली काल सिद्धिं क्लीं क्लीं क्रीं फट .

११ दिन तक प्रति दिन साधना निर्देशित जप करे . इसके बाद माला को १ महीने तक धारण करे फिर इसे नदी में विसर्जित करदे. यन्त्र को पूजा स्थान में रखा
जा सकता हैं.

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...