Monday, July 29, 2019

बगलामुखी कवच






बगलामुखी कवच


यदि बगलामुखी कवच आपतक पहुँच जाए तो यह मत समझियेगा- कि यह आपके भाग्य पर मिला है

.यह तो माँ का आशीर्वाद है- कि आप भाग्यशाली हैं. कि इस कवच को आप धारण करते हैं.

 मैं ऐसा विश्वास करता हूँ- कि माँ के दिशा निर्देश से पूर्ण शास्त्रीय ढंग से निर्माण करता हूँ. कवच का निर्माण तांत्रिक क्रिया है.

जिसमे एक दिव्य शक्ति का समावेश होता है. इसका निर्माण माँ के इच्छा अनुसार होता है मानव तो मात्र एक कठपुतली के समान है. 

इससे मुझे यकीन है- कि रक्षा कवच सिर्फ काम ही नहीं करता बल्कि यह प्रमाणित होता है. 

                    »» यदि कोई मनुष्य अपने शरीर और कुल का कल्याण चाहता है तो इस कवच को आवश्य धारण करना चाहिए.

                    »»सुरक्षा कवच कि सहायता से मनुष्य अपने मनोकामना को पूर्ण करता है और एक सफल जीवन जीता है.

                    »»सुरक्षा कवच के धारण से मनुष्य निर्भीक साहसी हो जाता है, वह हर क्षेत्र में उन्नति करता है और खुशहाल जीवन जीता है.

                    »»जो मनुष्य सुरक्षा कवच धारण किए हुए हैं उसके उपस्थिति मात्र से सभी बुरे तांत्रिक क्रिया काला जादू आदि बुरी शक्ति नष्ट हो जाती है.

                     »»बगलामुखी सुरक्षा कवच धारण किए हुए व्यक्ति से जो न आँखों से दिखाई देता है और जो मनुष्य के जीवन पर गलत प्रभाव देतें हैं इससे दूर रहते हैं. सरल भाषा   में यदि कहा जाए तो किसी भी प्रकार की नकारात्मक उर्जा से यह कवच उसका बचाव करता है.

                    »»इसे धारण किए हुए व्यक्ति अपने से बड़े अधिकारियों से सम्मान प्राप्त करता है. यह कवच बुद्धि को स्थिर करके उनके कार्य करने कि शक्ति को बढ़ाता है.

                    »»इस कवच के धारणकर्ता के व्यक्तित्व मे निखार आता है. वह समाज मे सम्मान प्राप्त करता है, उसका नाम और प्रसिद्धि चारों दिशाओं में फैलता है.

 चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

.
किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

                     08601454449

व्हाट्सप्प न०;- 9958417249


ये_सावधानी_है_ना_कि_अंध_विश्वास






ये_सावधानी_है_ना_कि_अंध_विश्वास


👉तंत्र-मंत्र तथा काले जादू की प्रक्रिया देखने में जितनी जटिल होती है, करने में उतनी ही सरल होती है। अक्सर लोग जिस पर भी तांत्रिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं, उसे फंसाने के लिए खाने की वस्तुओं का प्रयोग करते हैं।

 ऐसे लोग जिससे भी अपना काम निकलवाना चाहते हैं तो खाने की मिठाई पर अपने मंत्रों का प्रयोग कर सामने वाले व्यक्ति को खिला देते हैं। कुछ लोग दूध के जरिए भी इस प्रयोग को करते हैं।

👉इस तरह के तांत्रिक प्रयोगों से बचने का सबसे अच्छी तरीका यही है कि आप किसी अन्य की दी गई मिठाई को कभी भूलकर भी न खाएं। यदि सामने वाला व्यक्ति ऐसा है जिसे आप मना नहीं कर सकते तो बेहतर होगा कि मिठाई का एक छोटा-सा पीस तोड़ कर पहले उसी व्यक्ति को खिला दें। 

यदि वह सहज ही इसे खा लेता है तो इसका अर्थ है कि वह तांत्रिक प्रयोग नहीं कर रहा है। परन्तु यदि सामने वाला व्यक्ति खाने में हिचकिचाएं या ना नुकूर करें तो समझ जाएं कि दाल में कुछ काला है।*

👉खाने की मिठाई के अतिरिक्त लोग अन्य चीजों के माध्यम से भी टोटके करते हैं। इन चीजों में फूल, इत्र, पान, इलायची, लौंग, उड़द, लोबान आदि के जरिए किया जाता है। कुछ लोग पहनने के कपड़ों पर भी इसका प्रयोग करते हैं।

 अगर कोई व्यक्ति अचानक ही ऐसी कोई भी चीज आपको दें तो आपको उससे बचना चाहिए। ये सभी चीजें ऐसी हैं जो प्रचंड वशीकरण करने में काम ली जाती है।

 इसके अतिरिक्त भी अगर किसी भी दिन आपको अपने घर में ऐसी कोई भी चीज मिले जो आप या आपके परिवार में किसी ने नहीं रखी हो तो भी यह तंत्र प्रयोग होने का संकेत हो सकता है।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

                     08601454449

व्हाट्सप्प न०;- 09958417249

Sunday, July 28, 2019

हनुमत् कवच व हनुमान चालीसा से ग्रह दोष व ऊपरी बाधा या छाया ग्रहों का निवारण कैसे करें ।






हनुमत् कवच व हनुमान  चालीसा से ग्रह दोष व ऊपरी बाधा या छाया ग्रहों का निवारण कैसे करें ।






हनुमत् कवच के पाठ के द्वारा या पंचमुख हनुमत् कवच के पाठ के द्वारा हम अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव को दूर करता सकते हैं ।

पंचमुख हनुमत् कवच द्वारा तंत्र के कुप्रभाव को शून्य किया जा सकता है हनुमत कवच के पाठ में विनियोग करन्यास हृदयादिन्यास आवश्यक है तदोपरांत मंत्र का जाप शुद्ध उच्चारण के द्वारा किया जाए तो निश्चित सफलता मिलेगी .


सर्वप्रथम कवच का पाठ करने के उपरांत मंत्र का जाप किया जाए क्योंकि यह मंत्र तांत्रिक मंत्र हैं इन के मंत्रों के उच्चारण में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए अन्यथा प्रभाव के बजाय कुप्रभाव मिलने की आशंका रहती है कार्य के अनुरूप कई मंत्र हैं.

 जैसे मान लीजिए किसी के ऊपर किसी ने तंत्र प्रयोग किया है तो उसके निवारण के लिए एक मंत्र


 ओम नमो हनुमते परकृतयंत्रमंत्रपराहंकारभूतप्रेत पिशाच परदृष्टि सर्वविघ्नदुर्जनचेटकविद्या सर्वग्रहान्निवारय निवारय बध बध पच पच  दल दल किल किल सर्बकुयंत्राणि दुष्टवाचं फट् स्वाहा ।।




दूसरा मंत्र इसी प्रकार



 ओम नमो हनुमते सर्व ग्रहानभूतभविष्यद्वर्त वर्तमानान्दूरस्थान समीपस्थान सर्बकाल दुष्टदुर्बुद्धीनुच्चाटयोच्चाटय पर बलानि क्षोभय क्षोभय मम् सर्वकार्याणि साधय साधय हनुमते ओम् ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रौं फट् देहि देहि स्वाहा। ओम शिवं सिद्धं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रौं स्वाहा।





इसी प्रकार अनेकानेक मंत्र हैं जिनके द्वारा किया कराया संतान बाधादि का निवारण किया जा सकता है ठीक इसी प्रकार हनुमान चालीसा के अनुष्ठान द्वारा भी निवारण किया जा सकता है ।


हनुमान चालीसा में स्पष्ट रूप से लिखा गया है 


अष्ट सिद्ध नव निधि के दाता और जो सत् बार पाठ कर कोई ।


यदि अनुष्ठान रूपसे हनुमान चालीसा का पाठ करवाया जाय तो निश्चित रूप से तंत्र के कुप्रभाव को दूर किया जा सकता है ।इसमें तनिक भी संदेह नहीं ।




जय श्री राम । ॐरामदुताय नमः





चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

                     08601454449

व्हाट्सप्प न०;- 09958417249


अपने ऊपर तान्त्रिक प्रयोग का कैसे पता करें :




अपने ऊपर तान्त्रिक प्रयोग का कैसे पता करें :


अक्सर लोग सोचते हैं की किसी ने उनपर कोई जादू टोना या तांत्रिक प्रयोग कर दी है तो आईये जानते हैं –

1) रात को सिरहाने एक लोटे मैं पानी भर कर रखे और इस पानी को गमले मैं लगे या बगीचे मैं लगे किसी छोटे पौधे मैं सुबह डाले । 3 दिन से एक सप्ताह मे वो पौधा सूख जायेगा है ।

2) रात्रि को सोते समय एक हरा नीम्बू तकिये के नीचे रखे और प्रार्थना करे कि जो भी नेगेटिव क्रिया हूई इस नीम्बू मैं समाहित हो जाये । सुबह उठने पर यदि नीम्बू मुरझाया या रंग काला पाया जाता है तो आप पर तांत्रिक क्रिया हुई है।

3) यदि बार बार घबराहट होने लगती है, पसीना सा आने लगता हैं, हाथ पैर शून्य से हो जाते है । डाक्टर के जांच मैं सभी रिपोर्ट नार्मल आती हैं।लेकिन अक्सर ऐसा होता रहता तो समझ लीजिये आप किसी तान्त्रिक क्रिया के शिकार हो गए है ।

4) आपके घर मैं अचानक अधिकतर बिल्ली,सांप, उल्लू, चमगादड़, भंवरा आदि घूमते दिखने लगे ,तो समझिये घर पर तांत्रिक क्रिया हो रही है।

5) आपको अचानक भूख लगती लेकिन खाते वक्त मन नही करता ।

6) भोजन मैं अक्सर बाल, या कंकड़ आने लगते है ।

7) घर मे सुबह या शाम मन्दिर का दीपक जलाते समय विवाद होने लगे या बच्चा रोने लगे ।

8) घर के मन्दिर मैं अचानक आग लग जाये ।

9) घर के किसी सदस्य की अचानक मौत ।

10) घर के सदस्यों की एक के बाद एक बीमार पढ़ना ।

11) घर के जानवर जैसे गाय, भैंस, कुत्ता अचानक मर जाना।

12) शरीर पर अचानक नीले रंग के निशान बन जाना ।

13) घर मे अचानक गन्दी बदबू आना ।

14) घर मैं ऐसा महसूस होना की कोई आसपास है ।

15) आपके चेहरे का रंग पीला पड़ना ये भी एक कारण हैं की जितना प्रबल तन्त्र प्रयोग होगा आपके मुह का रंग उतना ही पिला पड़ता जायेगा आप दिन प्रतिदिन अपने आपको कमज़ोर महसूस करेंगे।

16) आपके पहने नए कपड़े अचानक फट जाए, उस पर स्याही या अन्य कोई दाग लगने लग जाए, या जल जाए।

17) घर के अंदर या बाहर नीम्बू, सिंदूर, राई , हड्डी आदि सामग्री बार बार मिलने लगे।

18) चतुर्दशी या अमावस्या को घर के किसी भी सदस्य या आप अचानक बीमार हो जाये या चिड़चिड़ापन आने लग जाये ।

19) घर मैं रुकने का मन नही करे, घर मे आते ही भारीपन लगे,जब आप बाहर रहो तब ठीक लगे****** दशमहाविद्द्या माँ

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

                     08601454449

व्हाट्सप्प न०;- 09958417249




Saturday, July 27, 2019

दंतेश्वरी मंदिर-






दंतेश्वरी मंदिर- 


एक शक्ति पीठ यहां गिरा था सती का दांत

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की हसीन वादियों में स्थित है, दन्तेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर। देवी पुराण में शक्ति पीठों की संख्या 51 बताई गई है जबकि तन्त्रचूडामणि में 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं। जबकि कई अन्य ग्रंथों में यह संख्या 108 तक बताई गई है।

 दन्तेवाड़ा को हालांकि देवी पुराण के 51 शक्ति पीठों में शामिल नहीं किया गया है लेकिन इसे देवी का 52 वा शक्ति पीठ माना जाता है। मान्यता है की यहाँ पर सती का दांत गिरा था इसलिए इस जगह का नाम दंतेवाड़ा और माता क़ा नाम दंतेश्वरी देवी पड़ा। 51 शक्ति पीठों की जानकारी और शक्ति पीठों के निर्माण कि कहानी आप हमारे पिछले लेख 51 शक्ति पीठ में पढ़ सकते है।

 दंतेश्वरी मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदीयों के संगम पर स्थित हैं।

दंतेश्वरी देवी को बस्तर क्षेत्र की कुलदेवी का दजऱ्ा प्राप्त है। इस मंदिर की एक खासियत यह है की माता के दर्शन करने के लिए आपको लुंगी या धोति पहनकर ही मंदीर में जाना होगा। मंदिर में सिले हुए वस्त्र पहन कर जानें की मनाही है।

मंदिर के निर्माण की कथा-

दन्तेवाड़ा शक्ति पीठ में माँ दन्तेश्वरी के मंदीर का निर्माण कब व कैसे हूआ इसकि क़हानी कुछ इस तरह है। ऐसा माना जाता है कि बस्तर के पहले काकातिया राजा अन्नम देव वारंगल से यहां आए थे। उन्हें दंतेवश्वरी मैय्या का वरदान मिला था। 

कहा जाता है कि अन्नम देव को माता ने वर दिया था कि जहां तक वे जाएंगे, उनका राज वहां तक फैलेगा। शर्त ये थी कि राजा को पीछे मुड़कर नहीं देखना था और मैय्या उनके पीछे-पीछे जहां तक जाती, वहां तक की ज़मीन पर उनका राज हो जाता। अन्नम देव के रूकते ही मैय्या भी रूक जाने वाली थी।

अन्नम देव ने चलना शुरू किया और वे कई दिन और रात चलते रहे। वे चलते-चलते शंखिनी और डंकिनी नंदियों के संगम पर पहुंचे। यहां उन्होंने नदी पार करने के बाद माता के पीछे आते समय उनकी पायल की आवाज़ महसूस नहीं की। सो वे वहीं रूक गए और माता के रूक जाने की आशंका से उन्?होंने पीछे पलटकर देखा। माता तब नदी पार कर रही थी। राजा के रूकते ही मैय्या भी रूक गई और उन्?होंने आगे जाने से इनकार कर दिया।

 दरअसल नदी के जल में डूबे पैरों में बंधी पायल की आवाज़ पानी के कारण नहीं आ रही थी और राजा इस भ्रम में कि पायल की आवाज़ नहीं आ रही है, शायद मैय्या नहीं आ रही है सोचकर पीछे पलट गए।

वचन के अनुसार मैय्या के लिए राजा ने शंखिनी-डंकिनी नदी के संगम पर एक सुंदर घर यानि मंदिर बनवा दिया। तब से मैय्या वहीं स्थापित है। दंतेश्वरी मंदिर के पास ही शंखिनी और डंकिन नदी के संगम पर माँ दंतेश्वरी के चरणों के चिन्ह मौजूद है और यहां सच्चे मन से की गई मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है।

अदभुत है मंदिर-

दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी की षट्भुजी वाले काले ग्रेनाइट की मूर्ति अद्वितीय है। छह भुजाओं में दाएं हाथ में शंख, खड्ग, त्रिशुल और बाएं हाथ में घंटी, पद्य और राक्षस के बाल मांई धारण किए हुए है।

 यह मूर्ति नक्काशीयुक्त है और ऊपरी भाग में नरसिंह अवतार का स्वरुप है। माई के सिर के ऊपर छत्र है, जो चांदी से निर्मित है। वस्त्र आभूषण से अलंकृत है। द्वार पर दो द्वारपाल दाएं-बाएं खड़े हैं जो चार हाथ युक्त हैं। बाएं हाथ सर्प और दाएं हाथ गदा लिए द्वारपाल वरद मुद्रा में है। 

इक्कीस स्तम्भों से युक्त सिंह द्वार के पूर्व दिशा में दो सिंह विराजमान जो काले पत्थर के हैं। यहां भगवान गणेश, विष्णु, शिव आदि की प्रतिमाएं विभिन्न स्थानों में प्रस्थापित है। मंदिर के गर्भ गृह में सिले हुए वस्त्र पहनकर प्रवेश प्रतिबंधित है। मंदिर के मुख्य द्वार के सामने पर्वतीयकालीन गरुड़ स्तम्भ से अड्ढवस्थित है। 

बत्तीस काष्ठड्ढ स्तम्भों और खपरैल की छत वाले महामण्डप मंदिर के प्रवेश के सिंह द्वार का यह मंदिर वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। मांई जी का प्रतिदिन श्रृंगार के साथ ही मंगल आरती की जाती है।

माँ भुनेश्वरी देवी-

माँ दंतेश्वरी मंदिर के पास ही उनकी छोटी बहन माँ भुनेश्वरी का मंदिर है। माँ भुनेश्वरी को मावली माता, माणिकेश्वरी देवी के नाम से भी जाना जाता है। माँ भुनेश्वरी देवी आंध्रप्रदेश में माँ पेदाम्मा के नाम से विख्यात है और लाखो श्रद्धालु उनके भक्त हैं।

 छोटी माता भुवनेश्वरी देवी और मांई दंतेश्वरी की आरती एक साथ की जाती है और एक ही समय पर भोग लगाया जाता है। लगभग चार फीट ऊंची माँ भुवनेश्वरी की अष्टड्ढभुजी प्रतिमा अद्वितीय है। मंदिर के गर्भगृह में नौ ग्रहों की प्रतिमाएं है। 

वहीं भगवान विष्णु अवतार नरसिंह, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं प्रस्थापित हैं। कहा जाता है कि माणिकेश्वरी मंदिर का निर्माण दसवीं शताब्दी में हुआ।

फाल्गुन में होता है मड़ई उत्सव का आयोजऩ-
होली से दस दिन पूर्व यहां फाल्गुन मड़ई का आयोजन होता है, जिसमें आदिवासी संस्कृति की विश्वास और परंपरा की झलक दिखाई पड़ती है। 

नौ दिनों तक चलने वाले फाल्गुन मड़ई में आदिवासी संस्कृति की अलग-अलग रस्मों की अदायगी होती है। मड़ई में ग्राम देवी-देवताओं की ध्वजा, छत्तर और ध्वजा दण्ड पुजारियों के साथ शामिल होते हैं। 

करीब 250 से भी ज्यादा देवी-देवताओं के साथ मांई की डोली प्रतिदिन नगर भ्रमण कर नारायण मंदिर तक जाती है और लौटकर पुनरू मंदिर आती है। इस दौरान नाच मंडली की रस्म होती है, जिसमें बंजारा समुदाय द्वारा किए जाने वाला लमान नाचा के साथ ही भतरी नाच और फाग गीत गाया जाता है। 

मांई जी की डोली के साथ ही फाल्गुन नवमीं, दशमी, एकादशी और द्वादशी को लमहा मार, कोड़ही मार, चीतल मार और गौर मार की रस्म होती है। मड़ई के अंतिम दिन सामूहिक नृत्य में सैकड़ों युवक-युवती शामिल होते हैं और रात भर इसका आनंद लेते हैं।

 फाल्गुन मड़ई में दंतेश्वरी मंदिर में बस्तर अंचल के लाखों लोगों की भागीदारी होती है।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

                     08601454449

व्हाट्सप्प न०;- 9958417249


Friday, July 26, 2019

कई बार ऐसा होता है कि शत्रु आपकी सफलता व तरक्की से चिढ़कर तांत्रिकों द्वारा अभिचार कर्म करा देता है। इससे व्यवसाय बाधा एवं गृह क्लेश होता है .





कई बार ऐसा होता है कि शत्रु आपकी सफलता व तरक्की से चिढ़कर तांत्रिकों द्वारा अभिचार कर्म करा देता है। इससे व्यवसाय बाधा एवं गृह क्लेश होता है .


अतः इसके दुष्प्रभाव से बचने हेतु सवा 1 किलो काले उड़द, सवा 1 किलो कोयला को सवा 1 मीटर काले कपड़े में बांधकर अपने ऊपर से २१ बार घुमाकर शनिवार के दिन बहते जल में विसर्जित करें व मन में हनुमान जी का ध्यान करें। ऐसा लगातार ७ शनिवार करें।

 तांत्रिक अभिकर्म पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

                     08601454449

व्हाट्सप्प न०;- 9958417249


विष्णु के श्वसुर महर्षि भृगु और उनके वंश को जानिए...

विष्णु के श्वसुर महर्षि भृगु और उनके वंश को जानिए...






यदि हम ब्रह्मा के मानस पुत्र भृगु की बात करें तो वे आज से लगभग 9,400 वर्ष पूर्व हुए थे। इनके बड़े भाई का नाम अंगिरा था। अत्रि, मरीचि, दक्ष, वशिष्ठ, पुलस्त्य, नारद, कर्दम, स्वायंभुव मनु, कृतु, पुलह, सनकादि ऋषि इनके भाई हैं। ये विष्णु के श्वसुर और शिव के साढू थे। महर्षि भृगु को भी सप्तर्षि मंडल में स्थान मिला है।

पिता : ब्रह्मा

पत्नी : ख्याति

भृगु के पुत्र : धाता और विधाता

पुत्री : लक्ष्मी (भार्गवी)

रचना :

भृगु संहिता, ऋग्वेद के मंत्र रचयिता।
महर्षि भृगु की पहली पत्नी का नाम ख्याति था, जो उनके भाई दक्ष की कन्या थी। इसका मतलब ख्याति उनकी भतीजी थी। दक्ष की दूसरी कन्या सती से भगवान शंकर ने विवाह किया था। ख्याति से भृगु को दो पुत्र दाता और विधाता मिले और एक बेटी लक्ष्मी का जन्म हुआ। लक्ष्मी का विवाह उन्होंने भगवान विष्णु से कर दिया था।

भृगु पुत्र धाता के आयती नाम की स्त्री से प्राण, प्राण के धोतिमान और धोतिमान के वर्तमान नामक पुत्र हुए। विधाता के नीति नाम की स्त्री से मृकंड, मृकंड के मार्कण्डेय और उनसे वेद श्री नाम के पुत्र हुए। पुराणों में कहा गया है कि इनसे भृगु वंश बढ़ा। भृगु की पुत्री लक्ष्मी का विवाह भगवान विष्णु से हुआ।

भृगु ने ही भृगु संहिता की रचना की। उसी काल में उनके भाई स्वायंभुव मनु ने मनु स्मृति की रचना की थी। भृगु के और भी पुत्र थे जैसे उशना, च्यवन आदि। ऋग्वेद में भृगुवंशी ऋषियों द्वारा रचित अनेक मंत्रों का वर्णन मिलता है जिसमें वेन, सोमाहुति, स्यूमरश्मि, भार्गव, आर्वि आदि का नाम आता है। भार्गवों को अग्निपूजक माना गया है। दाशराज्ञ युद्ध के समय भृगु मौजूद थे।

इनके रचित कुछ ग्रंथ हैं- 'भृगु स्मृति' (आधुनिक मनुस्मृति), 'भृगु संहिता' (ज्योतिष), 'भृगु संहिता' (शिल्प), 'भृगु सूत्र', 'भृगु उपनिषद', 'भृगु गीता' आदि। 'भृगु संहिता' आज भी उपलब्ध है जिसकी मूल प्रति नेपाल के पुस्तकालय में ताम्रपत्र पर सुरक्षित रखी है। इस विशालकाय ग्रंथ को कई बैलगाड़ियों पर लादकर ले जाया गया था। भारतवर्ष में भी कई हस्तलिखित प्रतियां पंडितों के पास उपलब्ध हैं किंतु वे अपूर्ण हैं।

देवी भागवत के चतुर्थ स्कंध विष्णु पुराण, अग्नि पुराण, श्रीमद् भागवत में खंडों में बिखरे वर्ण के अनुसार महर्षि भृगु प्रचेता-ब्रह्मा के पुत्र हैं, इनका विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री ख्याति से हुआ था जिनसे इनके दो पुत्र काव्य शुक्र और त्वष्टा तथा एक पुत्री श्रीलक्ष्मी का जन्म हुआ। इनकी पुत्री श्रीलक्ष्मी का विवाह श्रीहरि विष्णु से हुआ।

दैत्यों के साथ हो रहे देवासुर संग्राम में महर्षि भृगु की पत्नी ख्याति, जो योगशक्ति संपन्न तेजस्वी महिला थीं, दैत्यों की सेना के मृतक सैनिकों को जीवित कर देती थीं जिससे नाराज होकर श्रीहरि विष्णु ने शुक्राचार्य की माता व भृगुजी की पत्नी ख्याति का सिर अपने सुदर्शन चक्र से काट दिया।

अपनी पत्नी की हत्या होने की जानकारी होने पर महर्षि भृगु भगवान विष्णु को शाप देते हैं कि तुम्हें स्त्री के पेट से बार-बार जन्म लेना पड़ेगा। उसके बाद महर्षि अपनी पत्नी ख्याति को अपने योगबल से जीवित कर गंगा तट पर आ जाते हैं, तमसा नदी की सृष्टि करते हैं।

धरती पर पहली बार महर्षि भृगु ने ही अग्नि का उत्पादन करना सिखाया था। उन्होंने ही बताया था कि किस तरह अग्नि प्रज्वलित किया जा सकता है और किस तरह हम अग्नि का उपयोग कर सकते हैं। इसीलिए उन्हें अग्नि से उत्पन्न ऋषि मान लिया गया। जबकि वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने पृथ्वी पर अग्नि को प्रदीप्त किया था।

ऋग्वेद में वर्णन है कि उन्होंने मातरिश्वन् से अग्नि ली और उसको पृथ्वी पर लाए। इसी कारण सर्वप्रथम भृगु कुल के लोगों ने ही अग्नि की आराधना करना शुरू किया था। आज भी पारसी लोग ऋषि भृगु की अथवन् के रूप में पूजा करते हैं। पारसी धर्म के लोग भी अग्निपूजक हैं।

भृगु ने संजीवनी विद्या की भी खोज की थी। उन्होंने संजीवनी-बूटी खोजी थी अर्थात मृत प्राणी को जिन्दा करने का उन्होंने ही उपाय खोजा था। परम्परागत रूप से यह विद्या उनके पुत्र शुक्राचार्य को प्राप्त हुई।

महर्षि भृगु का आयुर्वेद से भी घनिष्ठ संबंध था। अथर्ववेद एवं आयुर्वेद संबंधी प्राचीन ग्रंथों में स्थल-स्थल पर इनको प्रामाणिक आचार्य की भांति उल्लेखित किया गया है। आयुर्वेद में प्राकृतिक चिकित्सा का भी महत्व है।

भृगु ऋषि ने सूर्य की किरणों द्वारा रोगों के उपशमन की चर्चा की है। वर्षा रूपी जल सूर्य की किरणों से प्रेरित होकर आता है। वह शल्य के समान पीड़ा देने वाले रोगों को दूर करने में समर्थ है।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

                     08601454449

व्हाट्सप्प न०;- 9958417249

महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...