Tuesday, January 8, 2019

श्रीऋद्धि-सिद्धि सहित श्रीगणेश-साधना







श्रीऋद्धि-सिद्धि सहित श्रीगणेश-साधना


‘कलौ चण्डी-विनायकौ’- कलियुग में ‘चण्डी’ और ‘गणेश’ की साधना ही श्रेयस्कर है। सच पूछा जाए, तो विघ्न-विनाशक गणेश और सर्व-शक्ति-रुपा माँ भगवती चण्डी के बिना कोई उपासना पूर्ण हो ही नहीं सकती।

 ‘भगवान् गणेश’ सभी साधनाओं के मूल हैं, तो ‘चण्डी’ साधना को प्रवहमान करने वाली मूल शक्ति है। यहाँ भगवान् गणेश की साधना की एक सरल विधि प्रस्तुत है।

वैदिक-साधनाः

यह साधना ‘श्रीगणेश चतुर्थी’ से प्रारम्भ कर ‘चतुर्दशी’ तक (१० दिन) की जाती है। ‘साधना’ हेतु “ऋद्धि-सिद्धि” को गोद में बैठाए हुए भगवान् गणेश की मूर्ति या चित्र आवश्यक है।

विधिः पहले ‘भगवान् गणेश’ की मूर्ति या चित्र की पूजा करें। फिर अपने हाथ में एक नारियल लें और उसकी भी पूजा करें। तब अपनी मनो-कामना या समस्या को स्मरण करते हुए नारियल को भगवान् गणेश के सामने रखें।

 इसके बाद, निम्न-लिखित स्तोत्र का १०० बार ‘पाठ‘ करें। १० दिनों में स्तोत्र का कुल १००० ‘पाठ‘ होना चाहिए। यथा-

स्वानन्देश गणेशान्, विघ्न-राज विनायक ! ऋद्धि-सिद्धि-पते नाथ, संकटान्मां विमोचय।।१

पूर्ण योग-मय स्वामिन्, संयोगातोग-शान्तिद। ज्येष्ठ-राज गणाधीश, संकटान्मां विमोचय।।२

वैनायकी महा-मायायते ढुंढि गजानन ! लम्बोदर भाल-चन्द्र, संकटान्मां विमोचय।।३

मयूरेश एक-दन्त, भूमि-सवानन्द-दायक। पञ्चमेश वरद-श्रेष्ठ, संकटान्मां विमोचय।।४

संकट-हर विघ्नेश, शमी-मन्दार-सेवित ! दूर्वापराध-शमन, संकटान्मां विमोचय।।५

उक्त स्तोत्र का पाठ करने से पूर्व अच्छा होगा, यदि निम्न-लिखित मन्त्र का १०८ बार ‘जप’ किया जाए। यथा- “ॐ श्री वर-वरद-मूर्त्तये वीर-विघ्नेशाय नमः ॐ”

साधना-काल में (१० दिन) साधना करने के बाद दिन भर उक्त मन्त्र का मन-ही-मन स्मरण करते रहें। ११ वें दिन, पहले दिन जो नारियल रखा था, उसे पधारे (फोड़कर) ‘प्रसाद’ स्वरुप अपने परिवार में बाँटे। ‘प्रसाद’ किसी दूसरे को न दें।

इस साधना से सभी प्रकार की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। सभी समस्याएँ, बाधाएँ दूर होती है।

साधना काल के दौरान आपको कुछ आश्चर्य जनक अनुभव हो सकते हैं, पर इनसे न परेशान या बिचलित न हो , ये तो साधना सफलता के लक्षण हैं .

चेतावनी - 

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

चेतावनी - 

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ । बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है 

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

राजगुरु जी

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

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मोबाइल नं. : - 09958417249

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प्राण प्रतिष्ठित हरिद्रा माला





प्राण प्रतिष्ठित हरिद्रा माला


तंत्र में अतिप्रचलित कुछ वस्तुएं

हरिद्रा माला

मित्रों आज के सुचना युग में वैसे तो लोग काफी जानकारी रखते हैं पर हरिद्रा यानि हल्दी का सर्वाधिक उपयोग खाने में ही करते हैं। इसी हल्दी के कुछ अन्य उपयोग आज आपको बता रहा हूँ

1. माँ पीताम्बरा यानि माँ बगुलामुखी की  साधना में जप हेतु हल्दी माला का प्रयोग होता है। इसके साथ ही माँ के शत्रुनाश या बाधानाश और कामनापूर्ति अनुष्ठान में भी इसका प्रयोग होता है।

2. जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो या शुभफल न दे रहा हो उन्हें हल्दी माला धारण करनी चाहिए।
बृहस्पति देव गुरु हैं बुद्धि शिक्षा पुत्र और धन के दाता हैं।

3. धनु और मीन लग्न एवं राशी वालों को ये माला धारण करनी चाहिए।

4. जो बच्चे बेहद चंचल या गुस्सैल हों और पढाई में बिलकुल मन न लगाते हों उन्हें ये माला पहनानी चाहिए।

5. भगवान श्री गणेश जी की साधना में भी हरिद्रा माला अतिफल्दायी है।

6. क़र्ज़ नाश हेतु हरिद्रा गणपति साधना में ये माला सर्वोपयुक्त है। जो ये साधना करने में सक्षम न हो उन्हें भगवन गणेश को ये माला पहना कर कर्जमुक्ति हेतु ऋण नाशन गणपति स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

7. जिन लोगों का लीवर कमजोर हो या बार बार पीलिया हो जाता हो अथवा पीलिया लगातार रिपोर्ट में आता हो उन्हें पुनर्नवा की माला के साथ हरिद्रा की माला पहननी चाहिए।

8. धन सम्बन्धी समस्याओं के लिए हरिद्रा माला पर ताम्बे का श्रीयंत्र स्थापित कर पूजन करें।

9. त्वचा रोगों से ग्रसित व्यक्ति नहाने से आधा घंटा पूर्व ये माला पानी की बाल्टी में डाल दें फिर उस पानी से नहा लें और माला धारण कर लें।

10. ऊपरी बाधा से ग्रसित या बार बार पीड़ित होने वाले व्यक्ति को माँ बगुलामुखी के मन्त्र से अभिमंत्रित माला धारण करनी चाहिए।

11. घर में सुख शांति व् धार्मिक वातावरण बनाने के लिए ईशान यानि उत्तर पूर्व कोण पर श्रीकृष्ण की प्रतिमा या फोटो स्थापित कर पर हरिद्रा माला पहनानी चाहिए।

मूल्य  :  - 550   रूपये  

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सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

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कन्फ्यूज बनाता है चन्द्रमाँ-बुध का योग




कन्फ्यूज बनाता है चन्द्रमाँ-बुध का योग 


ज्योतिष में बुध को बुद्धि, सोचने समझने की क्षमता, निर्णय शक्ति, तर्क शक्ति, मष्तिष्क, बुद्धिपरक कार्य और पढ़ने की क्षमता आदि का कारक माना गया है अर्थात हमारे मष्तिष्क और बौद्धिक गातिविधियों को बुध ही नियंत्रित करता है .

कुंडली में बुध की सबल या निर्बल स्थिति ही हमारी बौद्धिक क्षमता और निर्णय शक्ति का स्तर निश्चित करती है. 

चन्द्रमाँ को ज्योतिष में मूवमेंट या चलायमानता का कारक माना गया है क्योंकि नौ ग्रहों में चन्द्रमाँ की गति सबसे तेज है जो एक राशि में केवल दो से सवा दो दिन तक हो रहता है .

इसलिए चन्द्रमाँ को परिवर्तन, मूवमेंट और चलायमानता का कारक माना गया है इसी लिए कुंडली में बुध और चन्द्रमाँ का योग होने पर व्यक्ति को कुछ विशेष समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

यदि कुंडली में चन्द्रमाँ और बुध का योग हो अर्थात चन्द्रमाँ और बुध एक साथ हों तो ऐसे में व्यक्ति की बुद्धि अस्थिर होती है और व्यक्ति के निर्णय कभी स्थिर नहीं रहते, चन्द्रमाँ बुध का योग होने पर व्यक्ति के मस्तिष्क में योजनाएं तो बहुत बनती है परंतु उसके निर्णय हमेसा बदलते रहते हैं .

किसी भी एक कार्य का निश्चय करने के कुछ साम्य बाद ही मन में उस कार्य को ना करके दूसरे कार्य को करने का विचार आने लगता है,

कुंडली में चन्द्रमाँ बुध का योग होने पर व्यक्ति की बुद्धि चलायमान होती है जिसका व्यक्ति की निर्णय शक्ति या डिसीजन पावर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है,.

 चन्द्रमाँ बुध का योग होने पर व्यक्ति को किसी भी बात का निर्णय करने में बड़ा संशय होता है और व्यक्ति हमेसा कन्फ्यूजन की स्थिति में रहता है .

ऐसे में व्यक्ति को किन्ही दो चीजों या बातों में से एक का चयन करने में बड़ी समस्या आती है और किसी एक बात का चयन करने के बाद अधिकांशतः व्यक्ति को लगता है के उसका यह निर्णय गलत था कहने का तात्पर्य यही है के चन्द्रमाँ बुध के योग से व्यक्ति के मस्तिष्क में संशय या भ्रम की स्थिति बनी रहती है, .

चन्द्रमाँ बुध के योग से व्यक्ति ओवर थिंकिंग अर्थात बहुत अधिक सोचने की आदत भी होती है चन्द्रमाँ बुध के योग में यदि चन्द्रमाँ की डिग्री बुध से अधिक हो तो इस योग की प्रबलता बढ़ जाती है .

यदि कुंडली में चन्द्रमाँ बुध का योग हो ऐसे व्यक्ति को किसी भी बड़े या महत्वपूर्ण निर्णय से पहले किसी अन्य योग्य व्यक्ति से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

बुध या चंद्र का कमजोर या अशुभ होना भी कुछ कन्फ़्यूज़न जैसी ही स्थिति पैदा करते है

यदि कुंडली में चन्द्रमाँ बुध का योग होने पर अधिक कन्फ्यूजन रहती हो निर्णय लेने में समस्याएं आती हों या बुद्धि हमेशा अस्थिर रहती हो तो निम्नलिखित उपाय करें -

1. ॐ बुम बुधाय नमः का नियमित जाप करें।

2. प्रत्येक बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाएं।

3. सोमवार को मन्दिर में या गरीब व्यक्ति को दूध दान करें।

4. गणेश जी की उपासना करें।

5. किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद पन्ना रत्न भी धारण कर सकते हैं।  

।। श्री हनुमते नमः।

सम्पूर्ण जन्म कुंडली विश्लेषण हेतु आप सम्पर्क कर सकते हो

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जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की

दक्षिणा  -  201 मात्र .

विशेष

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Monday, January 7, 2019

काली






काली


देवी कालिका काम रुपणि है इनकी कम से कम 9,11,21 माला का जप काले हकीक की माला से किया जाना चाहिए। इनकी साधना को बीमारी नाश, दुष्ट आत्मा दुष्ट ग्रह से बचने के लिए, अकाल मृत्यु के भय से बचने के लिए, वाक सिद्धि के लिए, कवित्व के लिए किया जाता है।

 षटकर्म तो हर महाविद्या की देवी कर सकती है। षट कर्म मे मारण मोहन वशीकरण सम्मोहन उच्चाटन विदष्ण आदि आते है। परन्तु बुरे कार्य का अंजाम बुरा ही होता है। बुरे कार्य का परिणाम या तो समाज देता है या प्रकृति या प्रराब्ध या कानून देता ही है। इसलिए अपनी शक्ति से शुभ कार्य करने चाहिए। 

मंत्र “ॐ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहाः” 

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कृपा बिना यंत्र, माला और ज्ञान आदि के बिना किसी भी देवी की उपासना ना करे। जब भी किसी देवी की पुजा करें सदैव यही सोचे कि यह छोटी सी बच्ची या कोई मासूम सा मेहमान मानना चहिए, लेकिन यह बात भी  कदापि ना भूले कि यह छोटी से बच्ची अनेको अमोघ शक्ति से युक्त है।

 जिस प्रकार बच्चे के सेवा करी जाती है उसी प्रकार हर चीज का समय से ध्यान रखे तो 7-10 दिनों मे ही देवी की कृपा अवश्य मिल जाती है और हर कार्य पूर्ण होता है। दस महाविद्या मे कई ऐसी देवीयाँ है जोकि तीसरे दिन ही साधना का परिणाम दे देती है। 

मेरा अनुभव किया हुआ प्रयोग है

साधना काल के दौरान आपको कुछ आश्चर्य जनक अनुभव हो सकते हैं, पर इनसे न परेशान या बिचलित न हो , ये तो साधना सफलता के लक्षण हैं .

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किसी कुत्ते को तेल चुपड़ी हुई रोटी खिलाना। अधिकतर लोग प्रतिदिन कुत्ते को रोटी तो खिलाते ही हैं




किसी कुत्ते को तेल चुपड़ी हुई रोटी खिलाना। अधिकतर लोग प्रतिदिन कुत्ते को रोटी तो खिलाते ही हैं


 ऐसे में यदि रोटी पर तेल लगाकर कुत्ते को खिलाई जाए तो शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है।

 ऐसा माना जाता है कि कुत्ता शनिदेव का वाहन है और जो लोग कुत्ते को खाना खिलाते हैं उनसे शनि अति प्रसन्न होते हैं।

शनि महाराज की प्रसन्नता के बाद व्यक्ति को परेशानियों के कष्ट से मुक्ति मिल जाती है। 

साढ़ेसाती हो या ढय्या या कुंडली का अन्य कोई दोष इस उपाय से निश्चित ही लाभ होता है। 

कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाने से शनि के साथ ही राहु-केतु से संबंधित दोषों का भी निवारण हो जाता है।

 राहु-केतु के योग कालसर्प योग से पीडि़त व्यक्तियों को यह उपाय लाभ पहुंचाता है

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Sunday, January 6, 2019

तांत्रिक अभिकर्म से प्रतिरक्षण हेतु उपाय





तांत्रिक अभिकर्म से प्रतिरक्षण हेतु उपाय


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१. पीली सरसों, गुग्गल, लोबान व गौघृत इन सबको मिलाकर इनकी धूप बना लें व सूर्यास्त के 1 घंटे भीतर उपले जलाकर उसमें डाल दें । ऐसा २१ दिन तक करें व इसका धुआं पूरे घर में करें । इससे नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं ।

२. जावित्री, गायत्री व केसर लाकर उनको कूटकर गुग्गल मिलाकर धूप बनाकर सुबह शाम २१ दिन तक घर में जलाएं। धीरे-धीरे तांत्रिक अभिकर्म समाप्त होगा ।

३. गऊ, लोचन व तगर थोड़ी सी मात्रा में लाकर लाल कपड़े में बांधकर अपने घर में पूजा स्थान में रख दें । शिव कृपा से तमाम टोने-टोटके का असर समाप्त हो जाएगा ।

४. घर में साफ सफाई रखें व पीपल के पत्ते से ७ दिन तक घर में गौमूत्र के छींटे मारें व तत्पश्चात् शुद्ध गुग्गल का धूप जला दें ।

५. कई बार ऐसा होता है कि शत्रु आपकी सफलता व तरक्की से चिढ़कर तांत्रिकों द्वारा अभिचार कर्म करा देता है। इससे व्यवसाय बाधा एवं गृह क्लेश होता है

 अतः इसके दुष्प्रभाव से बचने हेतु सवा 1 किलो काले उड़द, सवा 1 किलो कोयला को सवा 1 मीटर काले कपड़े में बांधकर अपने ऊपर से २१ बार घुमाकर शनिवार के दिन बहते जल में विसर्जित करें व मन में हनुमान जी का ध्यान करें। ऐसा लगातार ७ शनिवार करें । तांत्रिक अभिकर्म पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा ।

६. यदि आपको ऐसा लग रहा हो कि कोई आपको मारना चाहता है तो पपीते के २१ बीज लेकर शिव मंदिर जाएं व शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाकर धूप बत्ती करें तथा शिवलिंग के निकट बैठकर पपीते के बीज अपने सामने रखें । अपना नाम, गौत्र उच्चारित करके भगवान् शिव से अपनी रक्षा की गुहार करें व एक माला महामृत्युंजय मंत्र की जपें तथा बीजों को एकत्रित कर तांबे के ताबीज में भरकर गले में धारण कर लें ।

७. शत्रु अनावश्यक परेशान कर रहा हो तो नींबू को ४ भागों में काटकर चौराहे पर खड़े होकर अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए चारों दिशाओं में एक-एक भाग को फेंक दें व घर आकर अपने हाथ-पांव धो लें । तांत्रिक अभिकर्म से छुटकारा मिलेगा ।

८. शुक्ल पक्ष के बुधवार को ४ गोमती चक्र अपने सिर से घुमाकर चारों दिशाओं में फेंक दें तो व्यक्ति पर किए गए तांत्रिक अभिकर्म का प्रभाव खत्म हो जाता है।

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Saturday, January 5, 2019

विपरीत प्रत्यंगिरा मोहनी प्रयोग






विपरीत प्रत्यंगिरा मोहनी प्रयोग


मंत्र : 

ऊँ हूँ मोहिनी स्प्रे स्प्रे मम ( शत्रुन ) मोहय मोहय फें हूँ फट्

 स्वाहा

विधि : 

मंगलवार के दिन कम से कम 10 हजार जप कर लें

 "शत्रुन " की 

जगह साध्य का नाम और स्मरण करें

हवन : 

हवन के लिए देशी गाय के दुध में पकायी हुई खीर में शहद 

मिलाकर 108 बार उपरोक्त मंत्र से हवन करने से साध्य व्यक्ति का 

आप से आकर्षण हो जाता है

मेरा अनुभव किया हुआ प्रयोग है

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...