Monday, February 8, 2016



सेक्स एक शक्ति है और भैरवी विद्या उससे परम शक्ति को पाने का मार्ग









हमारा समाज दिखावे का समाज है |अन्दर कुछ और बाहर कुछ शुरू से रखता आया है और भ्रम पाले रहा है की इससे वह समाज का भला कर रहा है |यही हाल सेक्स का रहा है | हमने सेक्स को सिवाय गाली के आज तक दूसरा कोई सम्मान नहीं दिया। हम तो बात करने में भयभीत होते हैं। हमने तो सेक्स को इस भांति छिपा कर रख दिया है जैसे वह है ही नहीं, जैसे उसका जीवन में कोई स्थान नहीं है। जब कि सच्चाई यह है कि उससे ज्यादा महत्वपूर्ण मनुष्य के जीवन में और कुछ भी नहीं है। लेकिन उसको छिपाया है, उसको दबाया है। दबाने और छिपाने से मनुष्य सेक्स से मुक्त नहीं हो गया, बल्कि मनुष्य और भी बुरी तरह से सेक्स से ग्रसित हो गया। दमन उलटे परिणाम लाया है। शायद आपमें से किसी ने एक फ्रेंच वैज्ञानिक कुए के एक नियम के संबंध में सुना होगा। वह नियम है: लॉ ऑफ रिवर्स इफेक्ट। कुए ने एक नियम ईजाद किया है, विपरीत परिणाम का नियम। हम जो करना चाहते हैं, हम इस ढंग से कर सकते हैं कि जो हम परिणाम चाहते थे, उससे उलटा परिणाम हो जाए। कुए कहता है, हमारी चेतना का एक नियम है—लॉ ऑफ रिवर्स इफेक्ट। हम जिस चीज से बचना चाहते हैं, चेतना उसी पर केंद्रित हो जाती है और परिणाम में हम उसी से टकरा जाते हैं।
पांच हजार वर्षों से आदमी सेक्स से बचना चाह रहा है और परिणाम इतना हुआ है कि गली-कूचे, हर जगह, जहां भी आदमी जाता है, वहीं सेक्स से टकरा जाता है। वह लॉ ऑफ रिवर्स इफेक्ट मनुष्य की आत्मा को पकड़े हुए है। क्या कभी आपने यह सोचा कि आप चित्त को जहां से बचाना चाहते हैं, चित्त वहीं आकर्षित हो जाता है, वहीं निमंत्रित हो जाता है! जिन लोगों ने मनुष्य को सेक्स के विरोध में समझाया, उन लोगों ने ही मनुष्य को कामुक बनाने का जिम्मा भी अपने ऊपर ले लिया है। मनुष्य की अति कामुकता गलत शिक्षाओं का परिणाम है। और आज भी हम भयभीत होते हैं कि सेक्स की बात न की जाए! क्यों भयभीत होते हैं? भयभीत इसलिए होते हैं कि हमें डर है कि सेक्स के संबंध में बात करने से लोग और कामुक हो जाएंगे। मैं आपको कहना चाहता हूं, यह बिलकुल ही गलत भ्रम है। यह शत प्रतिशत गलत है। पृथ्वी उसी दिन सेक्स से मुक्त होगी, जब हम सेक्स के संबंध में सामान्य, स्वस्थ बातचीत करने में समर्थ हो जाएंगे। जब हम सेक्स को पूरी तरह से समझ सकेंगे, तो ही हम सेक्स का अतिक्रमण कर सकेंगे।
जगत में ब्रह्मचर्य का जन्म हो सकता है, मनुष्य सेक्स के ऊपर उठ सकता है, लेकिन सेक्स को समझ कर, सेक्स को पूरी तरह पहचान कर। उस ऊर्जा के पूरे अर्थ, मार्ग, व्यवस्था को जान कर उससे मुक्त हो सकता है। आंखें बंद कर लेने से कोई कभी मुक्त नहीं हो सकता। आंखें बंद कर लेने वाले सोचते हों कि आंख बंद कर लेने से शत्रु समाप्त हो गया है, तो वे पागल हैं। सेक्स के संबंध में आदमी ने शुतुरमुर्ग का व्यवहार किया है आज तक। वह सोचता है, आंख बंद कर लो सेक्स के प्रति तो सेक्स मिट गया। अगर आंख बंद कर लेने से चीजें मिटती होतीं, तो बहुत आसान थी जिंदगी, बहुत आसान होती दुनिया। आंखें बंद करने से कुछ मिटता नहीं, बल्कि जिस चीज के संबंध में हम आंखें बंद करते हैं, हम प्रमाण देते हैं कि हम उससे भयभीत हो गए हैं, हम डर गए हैं। वह हमसे ज्यादा मजबूत है, उससे हम जीत नहीं सकते हैं, इसलिए हम आंख बंद करते हैं। आंख बंद करना कमजोरी का लक्षण है।
सेक्स के बाबत सारी मनुष्य-जाति आंख बंद करके बैठ गई है। न केवल आंख बंद करके बैठ गई है, बल्कि उसने सब तरह की लड़ाई भी सेक्स से ली है। और उसके परिणाम, उसके दुष्परिणाम सारे जगत में ज्ञात हैं।
अगर सौ आदमी पागल होते हैं, तो उसमें से अट्ठानबे आदमी सेक्स को दबाने की वजह से पागल होते हैं। अगर हजारों स्त्रियां हिस्टीरिया से परेशान हैं, तो उसमें सौ में से निन्यानबे स्त्रियों के हिस्टीरिया के, मिरगी के, बेहोशी के पीछे सेक्स की मौजूदगी है, सेक्स का दमन मौजूद है। अगर आदमी इतना बेचैन, अशांत, इतना दुखी और पीड़ित है, तो इस पीड़ित होने के पीछे उसने जीवन की एक बड़ी शक्ति को बिना समझे उसकी तरफ पीठ खड़ी कर ली है, उसका कारण है। और परिणाम उलटे आते हैं।
अगर हम मनुष्य का साहित्य उठा कर देखें, अगर किसी देवलोक से कभी कोई देवता आए या चंद्रलोक से या मंगल ग्रह से कभी कोई यात्री आए और हमारी किताबें पढ़े, हमारा साहित्य देखे, हमारी कविताएं पढ़े, हमारे चित्र देखे, तो बहुत हैरान हो जाएगा। वह हैरान हो जाएगा यह जान कर कि आदमी का सारा साहित्य सेक्स ही सेक्स पर क्यों केंद्रित है? आदमी की सारी कविताएं सेक्सुअल क्यों हैं? आदमी की सारी कहानियां, सारे उपन्यास सेक्स पर क्यों खड़े हैं? आदमी की हर किताब के ऊपर नंगी औरत की तस्वीर क्यों है? आदमी की हर फिल्म नंगे आदमी की फिल्म क्यों है? वह आदमी बहुत हैरान होगा; अगर कोई मंगल से आकर हमें इस हालत में देखेगा तो बहुत हैरान होगा। वह सोचेगा, आदमी सेक्स के सिवाय क्या कुछ भी नहीं सोचता? और आदमी से अगर पूछेगा, बातचीत करेगा, तो बहुत हैरान हो जाएगा। आदमी बातचीत करेगा आत्मा की, परमात्मा की, स्वर्ग की, मोक्ष की। सेक्स की कभी कोई बात नहीं करेगा! और उसका सारा व्यक्तित्व चारों तरफ से सेक्स से भरा हुआ है! वह मंगल ग्रह का वासी तो बहुत हैरान होगा। वह कहेगा, बातचीत कभी नहीं की जाती जिस चीज की, उसको चारों तरफ से तृप्त करने की हजार-हजार पागल कोशिशें क्यों की जा रही हैं?
आदमी को हमने परवर्ट किया है, विकृत किया है और अच्छे नामों के आधार पर विकृत किया है। ब्रह्मचर्य की बात हम करते हैं। लेकिन कभी इस बात की चेष्टा नहीं करते कि पहले मनुष्य की काम की ऊर्जा को समझा जाए, फिर उसे रूपांतरित करने के प्रयोग भी किए जा सकते हैं। बिना उस ऊर्जा को समझे दमन की, संयम की सारी शिक्षा, मनुष्य को पागल, विक्षिप्त और रुग्ण करेगी। इस संबंध में हमें कोई भी ध्यान नहीं है! यह मनुष्य इतना रुग्ण, इतना दीन-हीन कभी भी न था; इतना विषाक्त भी न था, इतना पायज़नस भी न था, इतना दुखी भी न था| मनुष्य के भीतर जो शक्ति है, उस शक्ति को रूपांतरित करने की, ऊंचा ले जाने की, आकाशगामी बनाने का हमने कोई प्रयास नहीं किया। उस शक्ति के ऊपर हम जबरदस्ती कब्जा करके बैठ गए हैं। वह शक्ति नीचे से ज्वालामुखी की तरह उबल रही है और धक्के दे रही है। वह आदमी को किसी भी क्षण उलटा देने की चेष्टा कर रही है।
हमारे भीतर मन में कहीं सेक्स बहुत अतिशय होकर बैठा है। वह चौबीस घंटे उबल रहा है। हम सतत सचेष्ट हैं। यह पृथ्वी तब तक स्वस्थ नहीं हो सकेगी, जब तक आदमी और स्त्रियों के बीच यह दीवार और यह फासला खड़ा हुआ है। यह पृथ्वी तब तक कभी भी शांत नहीं हो सकेगी, जब तक भीतर उबलती हुई आग है और उसके ऊपर हम जबरदस्ती बैठे हुए हैं। उस आग को रोज दबाना पड़ता है। उस आग को प्रतिक्षण दबाए रखना पड़ता है। वह आग हमको भी जला डालती है, सारा जीवन राख कर देती है। लेकिन फिर भी हम विचार करने को राजी नहीं होते—यह आग क्या थी?
अगर हम इस आग को समझ लें तो यह आग दुश्मन नहीं है, दोस्त है। अगर हम इस आग को समझ लें तो यह हमें जलाएगी नहीं, हमारे घर को गरम भी कर सकती है सर्दियों में, और हमारी रोटियां भी पका सकती है, और हमारी जिंदगी के लिए सहयोगी और मित्र भी हो सकती है। लाखों साल तक आकाश में बिजली चमकती थी। कभी किसी के ऊपर गिरती थी और जान ले लेती थी। कभी किसी ने सोचा भी न था कि एक दिन घर में पंखा चलाएगी यह बिजली। कभी यह रोशनी करेगी अंधेरे में, यह किसी ने सोचा नहीं था। आज? आज वही बिजली हमारी साथी हो गई है। क्यों? बिजली की तरफ हम आंख मूंद कर खड़े हो जाते तो हम कभी बिजली के राज को न समझ पाते और न कभी उसका उपयोग कर पाते। वह हमारी दुश्मन ही बनी रहती। लेकिन नहीं, आदमी ने बिजली के प्रति दोस्ताना भाव बरता। उसने बिजली को समझने की कोशिश की, उसने प्रयास किए जानने के। और धीरे-धीरे बिजली उसकी साथी हो गई। आज बिना बिजली के क्षण भर जमीन पर रहना मुश्किल मालूम होगा।
मनुष्य के भीतर बिजली से भी बड़ी ताकत है सेक्स की। मनुष्य के भीतर अणु की शक्ति से भी बड़ी शक्ति है सेक्स की। कभी आपने सोचा लेकिन, यह शक्ति क्या है और कैसे हम इसे रूपांतरित करें? एक छोटे से अणु में इतनी शक्ति है कि हिरोशिमा का पूरा का पूरा एक लाख का नगर भस्म हो सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि मनुष्य के काम की ऊर्जा का एक अणु एक नये व्यक्ति को जन्म देता है? उस व्यक्ति में गांधी पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में महावीर पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में बुद्ध पैदा हो सकते हैं, क्राइस्ट पैदा हो सकता है। उससे आइंस्टीन पैदा हो सकता है और न्यूटन पैदा हो सकता है। एक छोटा सा अणु एक मनुष्य की काम-ऊर्जा का, एक गांधी को छिपाए हुए है। गांधी जैसा विराट व्यक्तित्व जन्म पा सकता है।
सेक्स है फैक्ट, सेक्स जो है वह तथ्य है मनुष्य के जीवन का। और परमात्मा? परमात्मा अभी दूर है। सेक्स हमारे जीवन का तथ्य है। इस तथ्य को समझ कर हम परमात्मा के सत्य तक यात्रा कर भी सकते हैं। लेकिन इसे बिना समझे एक इंच आगे नहीं जा सकते |हमने कभी यह भी नहीं पूछा कि मनुष्य का इतना आकर्षण क्यों है? कौन सिखाता है सेक्स आपको? सारी दुनिया तो सिखाने के विरोध में सारे उपाय करती है। मां-बाप चेष्टा करते हैं कि बच्चे को पता न चल जाए। शिक्षक चेष्टा करते हैं। धर्म-शास्त्र चेष्टा करते हैं। कहीं कोई स्कूल नहीं, कहीं कोई यूनिवर्सिटी नहीं। लेकिन आदमी अचानक एक दिन पाता है कि सारे प्राण काम की आतुरता से भर गए हैं! यह कैसे हो जाता है? बिना सिखाए यह कैसे हो जाता है? सत्य की शिक्षा दी जाती है, प्रेम की शिक्षा दी जाती है, उसका तो कोई पता नहीं चलता। इस सेक्स का इतना प्रबल आकर्षण, इतना नैसर्गिक केंद्र क्या है? जरूर इसमें कोई रहस्य है और इसे समझना जरूरी है। तो शायद हम इससे मुक्त भी हो सकते हैं।
भारतीय तंत्र जगत इस रहस्य को हजारों वर्ष पूर्व जान गया था |tantra जगत जानता है की सृष्टि की शक्ति सेक्स से ही सृष्टि कर्ता को पाया जा सकता है |इससे ही कुंडलिनी का जागरण हो सकता है |कुंडलिनी यहीं स्थित रहती है |इसलिए तंत्र महर्षियों ने भैरवी विद्या की खोज की और प्राप्त किया वह मार्ग जो मोक्ष दे सकता है ,कुंडलिनी जगा सकता है |सैकड़ों वर्षों की साधना के परिणाम कुछ समय में दे सकता है |परमात्मा से मिला सकता है |क्योकि यह ऊर्जा को अतिशय बढ़ाकर शार्ट सर्किट करा अनंत ऊर्जा प्राप्ति का माध्यम है और ज़रा सी चूक पतन कर देती है ,नष्ट कर देती है ,इसलिए इसे अति गोपनीय रखा गया |अगर सोच समझ और बुद्धि विवेक से इसका उपयोग किया जाए तो यह परम पड़ दिला देती है
राजगुरु जी
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Saturday, February 6, 2016

पाताल क्रिया साधना









इस साधना कि कई अनुभूतिया है,और साधना भि एक दिन कि है.कई येसे रोग या बीमारिया है जिनका निवारण नहीं हो पाता ,और दवाईया भि काम नहीं करती ,येसे समय मे यह प्रयोग अति आवश्यक है.यह प्रयोग आज तक अपनी कसौटी पर हमेशा से ही खरा उतरा है .
प्रयोग सामग्री :-
एक मट्टी कि कुल्हड़ (मटका) छोटासा,सरसों का तेल ,काले तिल,सिंदूर,काला कपडा .
प्रयोग विधि :-
शनिवार के दिन श्याम को ४ या ४:३० बजे स्नान करके साधना मे प्रयुक्त हो जाये,सामने गुरुचित्र हो ,गुरुपूजन संपन्न कीजिये और गुरुमंत्र कि कम से कम ५ माला अनिवार्य है.गुरूजी के समक्ष अपनी रोग बाधा कि मुक्ति कि लिए प्रार्थना कीजिये.मट्टी कि कुल्हड़ मे सरसों कि तेल को भर दीजिये,उसी तेल मे ८ काले तिल डाल दीजिये.और काले कपडे से कुल्हड़ कि मुह को बंद कर दीजिये.अब ३६ अक्षर वाली बगलामुखी मंत्र कि १ माला जाप कीजिये.और कुल्हड़ के उप्पर थोडा सा सिंदूर डाल दीजिये.और माँ बगलामुखी से भि रोग बाधा मुक्ति कि प्रार्थना कीजिये.और एक माला बगलामुखी रोग बाधा मुक्ति मंत्र कीजिये.
मंत्र :-
|| ओम ह्लीम् श्रीं ह्लीम् रोग बाधा नाशय नाशय फट ||
मंत्र जाप समाप्ति के बाद कुल्हड़ को जमींन गाड दीजिये,गड्डा प्रयोग से पहिले ही खोद के रख दीजिये.और ये प्रयोग किसी और के लिए कर रहे है तो उस बीमार व्यक्ति से कुल्हड़ को स्पर्श करवाते हुये कुल्हड़ को जमींन मे गाड दीजिये.और प्रार्थना भि बीमार व्यक्ति के लिए ही करनी है.चाहे व्यक्ति कोमा मे भि क्यों न हो ७ घंटे के अंदर ही उसे राहत मिलनी शुरू हो जाती है.कुछ परिस्थितियों मे एक शनिवार मे अनुभूतिया कम हो तो यह प्रयोग आगे भि किसी शनिवार कर सकते है.
राजगुरु जी
महाविद्या आश्रम
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लक्षमी यक्षणी साधना







लक्ष्मी यक्षणी कुबेर ने धन पूर्ति के लिए जेबी महा लक्ष्मी की साधना की तो महा लक्ष्मी ने पर्सन हो कर वर मांगने को कहा तो श्री कुबेर जी ने उन्हे अपने लोक अल्का पूरी में निवास करने को कहा तो लक्ष्मी जी ने व्हा यक्षणी रूप में निवास किया और तभी से वहाँ धन की स्दह पूर्ति होती रहती है ! हर एक चाहता है उस के पास सभी सुख हो और उसे कभी किसी का मोहताज न होना पड़े जीवन में हर क्षेत्र में उच्ता मिले शरीर भी सोन्द्र्यवान हो और धन की भी प्रचुर अवस्ता में प्राप्ति हो ! इस के लिए यक्षणी साधनाए काफी महत्व पूर्ण मानी जाती है ! और उनसे भी उत्म यह है के ऐसी यक्षणी साधना हो जो जल्द सीध हो और जो सभी मनोरथ पूरे करे ! यह लक्ष्मी यक्षणी की साधना है इस एक साधना को करने से 108 यक्षणिए सिद्ध हो जाती ! और साधक की हर ईछा पूर्ण करती है !
इस साधना का विधान जटिल है फिर भी उसे आसान तरीके से दे रहा हु ! एक कटोरी में चावल संदूर चन्दन और कपूर मिश्रत कर ले और लक्ष्मी के 108 नाम से नमा लगा कर पूजन करे और लक्ष्मी के 108 नाम आप किसी भी लक्ष्मी पूजन की बूक में देख सकते है ! सुंगधित तेल का दिया लगा दे एक पात्र में कुश उपले जला के उस में गूगल और लोहवान धुखा दे सुगधित अगरवाती भी लगाई जा सकती है ! लाल कनेर से पूजन करे ! और गुरु मंत्र का एक माला जप कर के लक्ष्मी यक्षणी मंत्र का 101 माला जप करे यह कर्म 14 दिन करना है !
और साधना पूरी होने पे कनेर के फूल और घी से हवन करना है 10000 मंत्रो से ! इस प्रकार यह साधना सिद्ध हो जाती है और साधक को रसयान सिधी प्रदान करती है ! इस से साधक के जीवन में कभी धन की कमी नहीं आती जैसे चाहे जितना भी खर्चे धन घर में आता ही रेहता है इस के लिए कुबेर यंत्र और श्री यंत्र का पूजन करे और कमल गट्टे की माला जा लाल चन्दन की माला का उपयोग करे ! दिशा उतर और वस्त्र पीले धारण करे ! हवन के बाद घर में बनी खीर जा मिष्ठान का भोग लगाए ! यह साधना सोमवार स्वाति नक्षत्र से शुरू करे !
मंत्र —
ॐ लक्ष्मी वं श्रीं कमलधारणी हंसह सवाहा !!
राजगुरु जी
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विकटमुखी वशिकरण मंत्र






यह मंत्र अद्भुत है स्वयं सिद्ध है आप सिद्ध करने कि जरुरत नही सिधे प्रयग मे लाय। प्रतिदिन इस मत्र से अन्न के सात ग्रास अभिमत्रित कर साध्य के रुप. नाम चिँनता कर भजन करे वो साध्य आपके वश मेँ होगा। इसमे सदेह करने का कई कारण नही है।लेकिन आप कुछ दिन तक आगर पाँच माल जाप कर यह प्रयग करे तो लाभ दोगुना होगा
मंत्र-
ॐ नमः कट् विकट घोररुपिणी स्वाहा
राजगुरु जी
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Friday, February 5, 2016

यक्षिणी साधना







यक्षिणी के कई रूप हैं। इनकी साधना अलग-अलग रूपों में भी की जाती है और एक ही महा यक्षिणी के रूप में भी। प्राचीन विवरणों के अनुसार यक्षों के अधिपति कुबेर ने इनकी साधना करके ही ऐश्वर्य और भोग की प्राप्ति की थी।
पात्रता – कोई भी स्वस्थ स्त्री-पुरुष महाकाल रात्रि में इनकी साधना कर सकता है। यह तामसी भाव की देवी है; इसलिए इनकी साधना में उपवास और आचरण सम्बन्धी अन्य कोई नियम नहीं है।
समयकाल – महाकाल रात्रि (9 से 1) दोनों पक्ष के पंचमी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी या अमावस्या या पूर्णिमा को इनके यंत्र का पूजन करके उसे स्थापित किया जाता है। फिर प्रतिदिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार ध्यान करके के से पांच माला यानी 108 से 540 मन्त्रों का जप किया जाता है।
वस्त्र एवं आसाम आदि – सूती लाल रंग के बिना सिले एक वस्त्र और सूती लाल आसन पर इनकी साधना करनी चाहिए। असली रुद्राक्ष, कमलगट्टे, लाल पत्थर, हल्दी, मूंगे आदि माला प्रशस्त है। बिना माला के भी यह सम्पन्न होती है।
ध्यान रूप – एक अतिसुन्दर दिव्य प्रभा से युक्त चांदी के रंग की युवती राजारनी, जो लाल वस्त्र पर सुनहले काशिदाकारी से युक्त राजसी वेश में मुस्कुराती वरद और अभय की मुद्रा में है। इनके सिर पर लाल मणियों से युक्त मुकुट है और सोने के रत्न जडित राजरानी के योग्य सभी आभूषणों से युक्त है। ये स्वर्ण के लाल मखमल और रत्नों के जडित सिंघासन पर हैं। इनका दाहिना पैर स्वर्ण कमल पर है और इनके सामने सोने के फर्श पर वायु से सोने एवं रत्नों की बारिश हो रही है।
भाव – इस देवी को भाव बदलकर तरह-तरह के भाव में साधना की जाती है। प्रेमिका, पत्नी, बहन, माता , सहेली, मालकिन आदि के रूप में । इन भावों के अनुरूप केवल इनके चेहरे और आखों का भाव बदलता है। रूप ध्यान यद्यपि कई है, पर गृहस्थों को उपर्युक्त रूप का ही ध्यान करना चाहिए।
मंत्र – ॐ हं हं हं ह्रीं ह्रों हैं फट स्वाहा
(यह यक्षिणी यंत्र का गुप्त और शक्तिशाली मंत्र है)
यंत्र – कागज़ पर अष्टदल कमल के मध्य भैरवी चक्र और उसके मध्य बिंदु कमल की कर्णिका में दो वृता कर्णिका में हल्दी-केसर, वृत्त में कुमकुम, अष्टदल में कुमकुम सिन्दूर, भैरवी चक्र हरित, बिंदु में हल्दी से यन्त्र बनाया जाता है। इसे हल्दी कुमकुम , केसर, घृत, मधु, से अभिमंत्रित करके 1100 मन्त्रों से महाकाल रात्रि में सिद्ध किया जाता है। इस यंत्र के चारों ओर सामने से प्रारंभ करके क्लॉक वाईज मूल मंत्र को हल्दी या केशर से लिखा जाता है।
(जो स्वयं नहीं कर सके, वे सिद्ध यन्त्र को हमारे यहाँ से मंगवा सकते है)
पूजन एवं साधना – गृहस्थ स्त्री-पुरुष को प्रतिदिन फूल-दीप से पूजा करके एक सौ आठ मंत्र या एक घंटे जप करना चाहिए। जो सिद्ध हेतु जप करना चाहे उन्हें अपनी सामर्थ्य के अनुसार जप संख्या निर्धारित करके जप करना चाहिए। इस देवी की सिद्धि शास्त्रीय वर्णन के अनुसार 60,000 मंत्र जप करने से होती है; पर एक लाख जप करना चाहिए। सिद्धि का ज्ञान देवी के प्रकट प्रत्यक्ष होने पर होता है। जिस रूप में देवी को सिद्ध किया हो, उस रूप में सदा कृपा बनाये रखने का वर मांगना चहिये।
सिद्धि के बाद दसवां अंश चमेली, कमल, घृत, जौ, कुमुद, कामिनी आदि फूलों से गूलर या आम की लकड़ी की समिधा में हवन करना चाहिए।
लाभ- इनके मंत्र का ध्यान करके प्रतिदिन मंत्र जपने से स्वयं के और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है; सभी प्रकार के इच्छित भोगों की प्राप्ति होती है।
इनकी सिद्धि प्राप्त होने पर देवी अदृश्य रूप में साधक की सहायता करती है। मानसिक भाव एकाग्र करके बुलाने पर आती है और मार्ग-दर्शन करती हैं। इनको जिस रूप में सिद्ध किया हो, अपने भौतिक जीवन में उस पात्रता को उसी रूप में श्रद्धा पूर्वक समझने का प्राबधान है। अर्थात पत्नी रूप में सिद्ध किया है, तो पत्नी को उस देवी का रूप ही मानना होगा। यही भाव प्रेमिका, नायिका , बहन, माता, मालकिन अदि में भी रखना होगा, यदि इन्हें उस रूप में सिद्ध किया है। यदि पत्नी या प्रेमिका नहीं है और उस रूप में इन्हें सिद्ध किया है , तो सिद्धि प्राप्त होने के तीन महीने के अंदर देवी की कृपा से वह प्राप्त हो जाती है।
शास्त्रीय तौर पर कहा गया है कि वह सदा साधक को धन-स्वर्ण-भोगों की सामग्री – वस्त्र आदि देती है; पर इसे भाव रूप ही समझना चाहिए यानी यह सब प्राप्त होगा, पर माध्यम से।
सत्यासत्य का मूल्यांकन और वैज्ञानिक सूत्र
भाव फलित होता है।जिस भाव में हम मानसिक केंद्रीय करण करते अहि; वह हमारे अंदर नेगेटिव ऊर्जा का संघनन करता है और प्रतिक्रिया में वातावरण में उसका पॉजिटिव संघनित होकर हमारे शरीर को प्राप्त होने लगता है। यह क्रिया प्रकृति प्रद्दत गुण के रूप में प्रत्येक जीव में चलती है। इसी के अनुसार हमारी दैनिक जीवन क्रियाएं चलती है। सामान्य रूप और साधना रूप में पोटेंशि का अंतर होता है।
राजगुरु जी
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दस महाविद्या और इनके प्रभाव ।









साधक के जीवन में गुरु पूजन . .ईस्ट पूजन .जपमालिका पूजन..नित्य करना चाहिए..व् देवी से गुरु से बारम्बार छमा मांगनी चाहिए। ...
बिना दीक्षा व् निर्देशन इनकी साधना नहीं करनी चाहिए..इंनके मन्त्रो के कई प्रकार है.जी क्रम से ही गुरु से प्राप्त कानी चाहिए या काम्य भेद के मन्त्र प्राप्त कर योग्य निर्देशन में साधना करे.पुस्तक के अनुसार देख कर साधना सम्भवतःकभी कभी अत्यधिक हानि पंहुचा सकता है.
जप बिना दीक्षा बिना निर्देशन नहीं करनी चाहिए प्रत्येक देवी को उनके आवरण देवता के साथ पूजन करने से शीघ्र सिद्धिया प्रत्यछ होती है..

1-काली :-
देवी कालिका कामकलादक्षण रूपिणी है यह भक्त वत्सला है इनकी साधना विशेष इनके प्रीती में करनी चाहिए इससे स्वतः अभी प्रकार के भोग मोक्षस्वत प्रदान होते है यह अद्भुत है प्रसन्न होते ही साधक को उसके परिवार को अपने संरक्षण में ले लेती है
सुहृद पोषिणी उनका पोषण करती है.व् उसके शत्रु संहारणीयम् को स्वतः नस्ट कर देती है.
.और इनकी साधना से बीमारी नाश, दुष्ट आत्मा दुष्ट ग्रह से बचने के लिए, अकाल मृत्यु के भय से बचने के लिए, वाक सिद्धि के लिए, कवित्व के लिए भी किया जाता है। .कम से कम 9 या11 माला जप इनका अनिवार्य है.
..षटकर्म तो हर महाविद्या की देवी कर सकती है। षट कर्म मे मारण मोहन वशीकरण सम्मोहन उच्चाटन विदष्ण आदि आते है।परन्तु बुरे कार्य का अंजाम बुरा ही होता है। बुरे कार्य का परिणाम या तो समाज देता है या प्रकृति या प्रराब्ध या कानून देता ही है। इसलिए अपनी शक्ति से शुभ कार्य करने चाहिए।
2-तारा :-
तारा को तारिणी भी कहा गया है। जिस पर देवी तारा की कृपा हो जाये उसे भला और क्या चाहिए। फिर तो वो साधका एक दूध पीते बच्चे की तरह माँ की गोद मे रहता है। इनकी साधना से वाक सिद्धि तो अतिशीघ्र प्राप्त होती है साथ ही साथ तीब्र बुद्धि रचनात्मकता डाक्टर इनजियर बनाने के लिए, काव्य गुण के लिए, शत्रु को तो जड से खत्म कर देती है। इसके लिए आपको लाल मूगाँ या स्फाटिक या काला हकीक की माला का इस्तेमाल कर सकते है। हमारे हिसाब से कम से कम बारह माला का जप किया जाना चाहिए। कृपा करके इस देवी के मंत्रो मे स्त्रीं बीज का ही प्रयोग करे क्योकि त्रीं एक ऋषि द्वारा शापित है। इस शाप का निदान केवल त्रीं को स्त्रीं बनाने पर स्वयँ हो जाता है।
3-त्रिपुर सुंदरी :-
इस दुनिया मे ऐसा कोई काम नही है जिसे त्रिपुर सुन्दरी ना कर सके। जिस काम मे देवता का चयन करने मे कोई दिक्कत हो तो देवी त्रिपुर सुन्दरी की उपासना कर सकते है। यह भोग और मोक्ष दोनो ही साथ-साथ प्रदान करती है। ऐसी इस दुनिया मे कोई साधना नही है जो भोग और मोक्ष एक साथ प्रदान करे। इस मंत्र के जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का इस्तेमाल किया जा सकता है। कम से कम दस माला जप करें।
4-भुवनेश्वरी :-
यह साधना हर प्रकार के सुख मे वृद्धि करने वाली है। देवी भुवनेश्वरी की खास बात यह है कि यह बहुत ही कम समय मे प्रसन्न हो जाती है परंतु एक बार रुठ गई तो मनाना भी थोडा मुश्किल ही होता है। देवी माँ से कभी भी झुठे वचनो नही कहने चाहिए। इनके जप के लिए स्फटिक की माला का प्रयोग करें और कम से कम ग्यारह या इक्कीस माला का मंत्र जप करें।
5-”छिन्नमस्ता :-
यह विद्या बहुत ही तीव्र है। यह देवी शत्रु का तुरंत नाश करने वाली, वाक देने वाली, रोजगार में सफलता, नौकरी पद्दोंन्ति के लिए, कोर्ट के कैस से मुक्ति दिलाने मे सक्षम है और सरकार को आपके पक्ष मे करने वाली, कुंडिली जागरण मे सहायक, पति-पत्नी को तुरंत वश मे करने वाली चमत्कारी देवी है। इसकी साधना सावधान होकर करनी चाहिए क्योकि तीव्र होने के कारण रिजल्ट जल्दी ही मिल जाता है। इसके लिए आप रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से कम से कम ग्यारह माला या बीस माला मंत्र जप करना चाहिए============ ॥
6-त्रिपुर भैरवी :-
यह देवी प्रेत आत्मा के लिए बहुत ही खतरनाक है, बुरे तंत्रिक प्रयोगो के लिए, सुन्दर पति या पत्नी की प्राप्ति के लिए, प्रेम विवाह, शीघ्र विवाह, प्रेम में सफलता के लिए श्री त्रिपुर भैरवी देवी की साधना करनी चाहिए। इनकी साधना तुरंत प्रभावी है। जिस किसी तांत्रिक समस्या का समाधान नही हो रहा है, यह देवी उस समस्या का यह जड से विनाश करती है। इस देवी का मंत्र जप आप मूंगे की माला से कर सकते है और कम से कम पंद्रह माला मंत्र जप करनी चाहिए।
7-धूमावती :-
हर प्रकार की द्ररिद्रता के नाश के लिए, तंत्र – मंत्र के लिए, जादू – टोना, बुरी नजर और भूत – प्रेत आदि समस्त भयों से मुक्ति के लिए, सभी रोगो के लिए, अभय प्रप्ति के लिए, साधना मे रक्षा के लिए, जीवन मे आने वाले हर प्रकार के दुखो को प्रदान करने वाली देवी है इसे अलक्ष्मी भी कहा जाता है तो इसके निवारण के लिए धूमावती देवी की साधना करनी चाहिए मोती की माला या काले हकीक की माल का प्रयोग मंत्र जप में करें और कम से कम नौ माला मंत्र जप करें!
8-बगलामुखी :-
वाक शक्ति से तुरंत परिपूर्ण करने वाली, अपने साधक को खाने कि लिए दोडने वाली, शत्रुनाश, कोर्ट कचहरी में विजय, हर प्रकार की प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता के लिए, सरकारी कृपा के लिए माँ बगलामुखी की साधना करें। इस विद्या का उपयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब कोई रास्ता ना बचा हो। हल्दी की माला से कम से कम 8, 16, 21 माला का जप करें। इस विद्या को ब्रह्मास्त्र भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु की संहारक शक्ति है।
-9-”मातंगी :-यह देवी घर ग्रहस्थी मे आने वाले सभी विघ्नो को हरने वाली है, जिसकी शादी ना हो रही, संतान प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति के लिए या किसी भी प्रकार का ग्रहस्थ जीवन की समस्या के दुख हरने के लिए देवी मातंगी की साधना उत्तम है। इनकी कृपा से स्त्रीयो का सहयोग सहज ही मिलने लगता है। चाहे वो स्त्री किसी भी वर्ग की स्त्री क्यो ना हो। इसके लिए आप स्फटिक की माला से मंत्र जप करें और बारह माला कम से कम मंत्र जप करना चहिए। ॥
-----10-”कमला :-
यह देवी धूमावती की ठीक विपरीत है। जब देवी कमला की कृपा नही होगी तब देवी धूमावती तो जमी रहेगी। इसलिए दीपावली पर भी इनका पुजन किया जाता है। इस संसार मे जितनी भी सुन्दर लडकीयाँ है, सुन्दर वस्तु, पुष्प आदि है यह सब इनका ही तो सौन्दर्य है। हर प्रकार की साधना मे रिद्धि सिद्धि दिलाने वाली, अखंड धन धान्य प्राप्ति, ऋण का नाश और महालक्ष्मी जी की कृपा के लिए कमल पर विराजमान देवी की साधना करें। इन्ही साधना करके इन्द्र ने स्वर्ग को आज तक समभाले रखा है। इनकी उपासना के लिए कमलगट्टे की माला से कम से कम दस या इक्कीस माला मंत्र जप करना चाहिए।
कृपया बिना गुरू दीक्षा यंत्र, माला और ज्ञान आदि के बिना किसी भी देवी की साधना ' उपासना ना करे
राजगुरु जी
महाविद्या आश्रम
.किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :
मोबाइल नं. : - 09958417249'
व्हाट्सप्प न०;- 9958417249
देवी अनंग माला साधना






शिव में ही तो हु परम शक्ति भद्र काली ,जो तुम्हारे ह्रदय में अनंग माला रूप से निवास करती हु. मेरा यही स्वरुप तुम्हे आकर्षण प्रदान करता है।इस आकर्षण के आगे संसार का सारा आकर्षण व्यर्थ है,आकर्षण की सारी साधनाए व्यर्थ है. संसार का परम आकर्षण में हु। में ही हु वो अनंग माला जो कामदेव को भी आकर्षित कर लेती है. ये मेरा ही आकर्षण है जिसके फल स्वरूप,संसार की हर
अप्सरा,यक्षिणी,डाकिनी,शाकिनी,तथा सामान्य स्त्री शिव पर मोहित होती है.यदि में नहीं तो संसार में आकर्षण नहि. शिव तू कह तो सही संसार की ऐसी कोनसी वस्तु है जो तुझसे दूर है।में क्षण भर में उसका आकर्षण तेरे ऊपर कर दूंगी
ये है भगवती अनंग माला जो की महाकाली का ही एक स्वरूप है.तन्त्र में आकर्षण की इससे श्रेष्ट साधना कोई और नहीं है.और न ही होगि. जो शिव को भी आकर्षण प्रदान करने वाली है,जरा सोचे वो अपने भक्त के लिये क्या कुछ नहीं कर सकती है
अनंग माला साधना मंत्र :
॥ॐ ऐं आं ह्रीं हूं क्रों क्षों क्रीं क्रौं फ्रें अनंगमाले स्त्रीयमाकर्षय त्रुट त्रुट छेदय छेदय हूं हूं फट फट स्वाहा॥
विधि:
साधना किसी भी शुभ दिन से शुरू कर सकते है. आसन वस्त्र लाल,दिशा उत्तर होगि. समय रात्रि दस के बाद का हो.सामने बजोट पर लाल वस्त्र बिछा कर उसपर शक्ति रुद्राक्ष स्थापित करे. गुरु पूजन तथा गणेश पूजन करे. अब रुद्राक्ष पूजन करे सामान्य,कोई भी मिठाई का भोग अर्पण करे।तील के तेल का दीपक लगाये।और रुद्राक्ष माला से मंत्र की ५ माला जाप करे. साधना दस दिनों तक करे आखरी दिन यथा संभव हवन करे,घी में पञ्च मेवा मिलाकर। इस तरह देवी अनंग माला की ये लघु साधना पूर्ण होती है जो साधक में पूर्ण आकर्षण भर देती है.
जिससे संसार की हर स्त्री साधक की और आकर्षित होती है,यहाँ तक की जब आप यक्षिणी या अप्सरा की साधना करे तब एक माला मंत्र की करके शक्ति रुद्राक्ष को अपने बाजु पर बांध ले लाल धागे से।तो ये मंत्र अप्सरा तथा यक्षिणी का भी आकर्षण करता है.साधना के बाद पुनः रुद्राक्ष को स्नान कराके सुरक्षित रख ले.यदि पत्नी रात दिन कलह करती है तो उसके नाम से संकल्प लेकर मात्र एक माला करे और भगवती काली को एक नारियल अर्पण कर दे. पत्नी आपकी और आकर्षित होकर आपके अनुकूल हो जयेगि. निसंदेह ये साधना अद्भूत है अतः आप सभी इससे लाभ ले.
जय माँ .
राजगुरु जी
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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...