Monday, July 31, 2023

* संपूर्ण भारत में हमारी सेवाएं*


 



* संपूर्ण भारत में हमारी सेवाएं*


हमारे द्वारा अगले महीने से *पूरे भारत देश में अपनी सेवाएं शुरू की जा रही है* जिसके अंतर्गत *🕊️यदि आपके घर में कोई नेगेटिव एनर्जी है


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 या 🕊️आपके परिवार के किसी सदस्य के शरीर में कोई नेगेटिव एनर्जी है या 🕊️आपके घर या दुकान पर किसी ने कोई नेगेटिव एनर्जी छोड़ रखी है जिसके कारण आपका पारिवारिक और व्यापारिक जीवन तहस नहस हो गया है 


🕊️ या आप अपने घर में पितृ शांति🕊️,वस्तु दोष निवारण,🕊️लक्ष्मी हवन🕊️,दस महाविद्या हवन🕊️,बगलामुखी हवन,🕊️कुल देवी स्थापना,🕊️अपने देवताओं को मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा,🕊️लक्ष्मी हवन* और आप चाहते हैं कि हम खुद आपके शहर ,आपके घर आकर उसका निवारण करें तो यह सेवा अगले महीने से शुरू की जा रही है


पूरे भारत में किसी भी शहर किसी भी राज्य किसी भी गांव में आप रहते हैं *हम वहां आकर आपकी सभी समस्याओं का निवारण करेंगे* 


कई ऐसी समस्या होती है जो दूर बैठकर हल नहीं हो पाती इसके लिए हमें आपके घर आकर ही उसका निवारण करना होगा 


9958417249 पर whatsapp करें 


*🪴शुल्क👇* 


*आने जाने का किराया ( /निजी वाहन /ट्रेन /फ्लाइट  )+ शुल्क समस्या के अनुसार + सामग्री का शुल्क* ( जो सामग्री लगेगी वो आपको बता दी जाएगी आप खुद भी ला सकते हैं कुछ विशेष तांत्रिक सामग्री होगी वो हमारी होगी उसका शुल्क आपको आपकी समस्या के अनुसार बता दिया जाएगा )


*हमारे द्वारा दी जाने वाली सेवा निम्न राज्यों में दी जाएगी👇*


राजस्थान, महाराष्ट्र ,गुजरात ,मध्य प्रदेश ,उत्तर प्रदेश ,दिल्ली ,गाजियाबाद ,हिमाचल प्रदेश ,पंजाब ,तमिलनाडु कर्नाटक,

हैदराबाद ,केरल ,गोवा ,कलकत्ता, नेपाल ,जम्मू कश्मीर ,हरियाणा,

दमन दीप ,आंध्र प्रदेश ,बिहार,

झारखंड, उड़ीसा ,उत्तराखंड


साधना समाग्री दक्षिणा === 


पेटियम नम्बर ==9958417249


गूगल पे नम्बर ==== 9958417249


फोन पे =======6306762688


 चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


(रजि.)


किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :


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शाबर धूमावती साधना :


 


शाबर धूमावती साधना :


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दस महाविद्याओं में माँ धूमावती का स्थान सातवां है और माँ के इस स्वरुप को बहुत ही उग्र माना जाता है ! माँ का यह स्वरुप अलक्ष्मी स्वरूपा कहलाता है किन्तु माँ अलक्ष्मी होते हुए भी लक्ष्मी है ! एक मान्यता के अनुसार जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया तो उस यज्ञ में शिव जी को आमंत्रित नहीं किया !


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 माँ सती ने इसे शिव जी का अपमान समझा और अपने शरीर को अग्नि में जला कर स्वाहा कर लिया और उस अग्नि से जो धुआं उठा )उसने माँ धूमावती का रूप ले लिया ! इसी प्रकार माँ धूमावती की उत्पत्ति की अनेकों कथाएँ प्रचलित है जिनमे से कुछ पौराणिक है और कुछ लोक मान्यताओं पर आधारित है !


नाथ सम्प्रदाय के प्रसिद्ध योगी सिद्ध चर्पटनाथ जी माँ धूमावती के उपासक थे ! उन्होंने माँ धूमावती पर अनेकों ग्रन्थ रचे और अनेकों शाबर मन्त्रों की रचना भी की !


यहाँ मैं माँ धूमावती का एक प्रचलित शाबर मंत्र दे रहा हूँ जो बहुत ही शीघ्र प्रभाव देता है !


कोर्ट कचहरी आदि के पचड़े में फस जाने पर अथवा शत्रुओं से परेशान होने पर इस मंत्र का प्रयोग करे !


माँ धूमावती की उपासना से व्यक्ति अजय हो जाता है और उसके शत्रु उसे मूक होकर देखते रह जाते है !


|| मंत्र ||


ॐ पाताल निरंजन निराकार


आकाश मंडल धुन्धुकार


आकाश दिशा से कौन आई


कौन रथ कौन असवार


थरै धरत्री थरै आकाश


विधवा रूप लम्बे हाथ


लम्बी नाक कुटिल नेत्र दुष्टा स्वभाव


डमरू बाजे भद्रकाली


क्लेश कलह कालरात्रि


डंका डंकिनी काल किट किटा हास्य करी


जीव रक्षन्ते जीव भक्षन्ते


जाया जीया आकाश तेरा होये


धुमावंतीपुरी में वास


ना होती देवी ना देव


तहाँ ना होती पूजा ना पाती


तहाँ ना होती जात न जाती


तब आये श्री शम्भु यती गुरु गोरक्षनाथ


आप भई अतीत


ॐ धूं: धूं: धूमावती फट स्वाहा !


|| विधि ||


41 दिन तक इस मंत्र की रोज रात को एक माला जाप करे ! तेल का दीपक जलाये और माँ को हलवा अर्पित करे ! इस मंत्र को भूल कर भी घर में ना जपे, जप केवल घर से बाहर करे ! मंत्र सिद्ध हो जायेगा !


|| प्रयोग विधि १ ||


जब कोई शत्रु परेशान करे तो इस मंत्र का उजाड़ स्थान में 11 दिन इसी विधि से जप करे और प्रतिदिन जप के अंत में माता से प्रार्थना करे –


“ हे माँ ! मेरे (अमुक) शत्रु के घर में निवास करो ! “


ऐसा करने से शत्रु के घर में बात बात पर कलह होना शुरू हो जाएगी और वह शत्रु उस कलह से परेशान होकर घर छोड़कर बहुत दुर चला जायेगा !


|| प्रयोग विधि २ ||


शमशान में उगे हुए किसी आक के पेड़ के साबुत हरे पत्ते पर उसी आक के दूध से शत्रु का नाम लिखे और किसी दुसरे शमशान में बबूल का पेड़ ढूंढे और उसका एक कांटा तोड़ लायें ! फिर इस मंत्र को 108 बार बोल कर शत्रु के नाम पर चुभो दे !


ऐसा 5 दिन तक करे , आपका शत्रु तेज ज्वर से पीड़ित हो जायेगा और दो महीने तक इसी प्रकार दुखी रहेगा !


नोट – इस मंत्र के और भी घातक प्रयोग है जिनसे शत्रु के परिवार का नाश तक हो जाये ! किसी भी प्रकार के दुरूपयोग के डर से मैं यहाँ नहीं लिखना चाहता ! इस मंत्र का दुरूपयोग करने वाला स्वयं ही पाप का भागी होगा !कोई भी जप-अनुष्ठान करने से पूर्व मंत्र की शुद्धि जांचा लें ,विधि की जानकारी प्राप्त कर लें तभी प्रयास करें |


गुरु की अनुमति बिना और सुरक्षा कवच बिना तो कदापि कोई साधना न करें |उग्र महाशक्तियां गलतियों को क्षमा नहीं करती कितना भी आप सोचें की यह तो माँ है |उलट परिणाम तुरत प्राप्त हो सकते हैं |


अतः बिना सोचे समझे कोई कार्य न करें |पोस्ट का उद्देश्य मात्र जानकारी उपलब्ध करना है ,अनुष्ठान या प्रयोग करना नहीं |अतः कोई समस्या होने पर हम जिम्मेदार नहीं होंगे


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Sunday, July 30, 2023

पन्द्रिया यंत्र साधना -- साबर विधि से


 




पन्द्रिया यंत्र साधना -- साबर विधि से


जरुरी है| अतः इस साधना को उसी साधक को शुरू करना चाहिए जो इस साधना के नियम का पूर्ण शुद्धि से पालन करऔर जन कल्याण किया है | यह बहुत ही तीव्र  साधना है | इस में शुद्धि का 


खास ध्यान ख़ास तौर पर  रखा जाता है।। अन्यथा तकलीफ हो सकती है ..| 


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हर  उस व्यक्ति का बहुत ही सौभाग्य उदय होता है जब ऐसी साधना प्राप्त होती है | मेरी नजर में ऐसा कोई काम  ही नहीं है।। जो इस साधना से पूरा ना हो | हिन्दू और इस्लामिक दोनों मतो में यह साधना की जाती

है|


मैंने कई मुसलमानी मौलवियों को भी इस यंत्र का प्रयोग करते हुए देखा है |


यह मैं स्वयं भी इस साधना का प्रयोग बहुत बार करके इसे परख चुका हूँ| और कई संतो ने भी इसे समय-समय पर सिद्ध किया है


यह साधना अगर शारदीय,चैत्र अथवा गुप्त नवरात्री में की जाये तो और भी फल मिलता है | 

इसे सिद्ध करने के


लिए समय तो अवश्य ही लगेगा लेकिन अगर आप इसे सिद्ध कर ले तो किसी सिद्धि के

पीछे

भागने की आवश्कता नहीं है | इस में धैर्य बहुत जरुरी है और ब्रह्मचर्य  का

पालन भी

सके |


नियम  --- 


१. एक समय शुद्ध भोजन करे, फलाहार कभी भी ले सकते हैं |


२.ब्रह्मचर्य अनिवार्य है |


३.सत्य बोलने की

कोशिश करे |


४.किसी से व्यर्थ

में ना उलझें |


५.बड़ों का हमेशा सम्मान करें !


विधि


-- शुद्ध धुले हुये वस्त्र  पहने सिले हुए ना हो तो जयादा बेहतर है (जैसे 

धोती, चादर) | पीले लाल या सफ़ेद रंग के कपडे ज्यादा बेहतर है | लाल रंग

विशेष फल दाई  है !


२.शुद्ध घी का दीपक लगाये और एक बेजोट पर लाल वस्त्र बिछा कर  माता जगदम्बा का 

सुन्दर चित्र स्थापत करें हर रोज पूजन करे और गुरु पूजन करे

और पूर्ण समर्पित भाव से साधना शुरू करे !


३.मन को विचलित ना


होने दे माता का दर्शन होने के बाद कन्या पूजन करे जा साधना पूर्ण होने के बाद

कन्या पूजन जरुरी है |


५.माता की हलवे का भोग लगा कर कन्या पूजन किया जा सकता है !


६. इस यंत्र को


निम्न मन्त्र पड़ते हए सवा लाख बार लिखना है और जितने रोज लिखो आटे में मिक्स कर के

गोलिया बना ले और मछलियों को डाल दे किसी तालाब या नदी पर जाकर |


इस यंत्र को जैसे नीचे दिया है बना ले |


साबर मंत्र ---


ॐ  सात पूनम काल का बारह  बरस क्वार ,एको देवी जानिए चौदह भुवन द्वार द्वि पक्षे निर्मलिये तेरह देवन देव अष्ट भुजी परमेशवरी ग्यारह रूद्र सेव ,सोलह कला समपुरनी तिन नयन भरपूर दसो द्वारी तुही माँ , पांचो बाजे नूर ,नव निधि षट दर्शनी पन्द्रह तिथि जान चारो युग में कालका कर काली कल्याण ......!


ये मन्त्र थोडा उग्र  का है ..इसलिए सात्विकता बरतिए ..और इसे प्रयोग में  लाइए 


 इस मन्त्र का जप करते हुए उपर वाला यन्त्र लिखे और जब  साधना पूरी हो जाती है साधक के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता |


प्रयोग  --


जिस किसी व्यक्ति पर कैसी भी प्रेत बाधा या किसी का किया तंत्र प्रयोग 


(जैसे-मूठ) हो, तो इस यन्त्र को अष्ट गंध से लिख कर उस व्यक्ति को पहना 

दिया जाये तो बाधा शांत हो जाती है | 


कार्य सिद्धि के लिए इस यन्त्र को अपने साथ ले कर कार्य के लिए जा सकते है | मुक़दमे में विजय पाने के लिए  है और घर छोड़  कर

गये व्यक्ति  को


वापिस लाने के लिए इसका अचूक असर होता है वशीकरण  के लिए भी इसका प्रयोग  किया 


जाता है आप पहले इसे सिद्ध कर ले इसके प्रयोग  तो सैकड़ो है उसे फिर

कभी दे दूंगा | यंत्र सिद्ध करते करते माँ का दर्शन हो जाता है ऐसा मेरा और

कई लोगो का अनुभव है |


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क्या आपके हाथ में है अधिक शत्रु षड्यंत्र दुश्मन आपको परेशान करने वाला तथा बर्बाद करने का योग जाने ..


 



क्या आपके हाथ में है अधिक शत्रु षड्यंत्र दुश्मन आपको परेशान करने वाला तथा बर्बाद करने का योग जाने ...


हस्तरेखा शास्त्र ज्योतिष शास्त्र की ही एक शाखा है। इसमें हथेलियों में बनी रेखाओं और चिन्हों का आकलन करके व्यक्ति जीवन के विषय में जानकारी दी जाती है।


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 हस्तरेखा शास्त्र में रेखाओं और हाथों में बने चिन्हों को देखकर उसके भविष्य या जीवन के बारे में केवल मूल्यांकन किया जा सकता है, भविष्य को लेकर इसकी सटीकता प्रमाणित नहीं होती है 


क्योंकि हाथ की रेखाएं समय-समय पर बदलती रहती हैं। जीवन में कोई भी लक्ष्य हासिल करने के लिए कर्मों का प्रभाव सबसे अधिक मायने रखता है।  हस्तरेखा शास्त्र में हमारे हाथों में बनी रेखाएं देखकर जीवन में आने वाले शुभ और अशुभ प्रभावों के बारे में बताया जाता है।


 ज्योतिष शास्त्र में कुछ बहुत शुभ रेखाओं के बारे में बताया गया है तो वहीं कुछ रेखाएं ऐसी भी होती हैं जिनकी वजह से आपके जीवन में एक के बाद एक परेशानियां बनी रहती हैं। 


हस्तरेखा शास्त्र में ऐसी कुछ रेखाएं और चिन्हों के बारे में बताया गया है, जिन्हें दुर्भाग्य का कारण माना जाता है। तो चलिए जानते हैं कौन सी हैं वे रेखाएं और चिन्ह।


जीवन  रेखा को काटती हुई रेखाएं

अगर किसी की हथेली में कई छोटी-छोटी रेखाएं जीवन रेखा को काटती हैं, तो इन्हें शुभ नहीं माना जाता है। इन रेखाओं के संबंध में कहा जाता है 


कि जिस स्थान पर ये रेखाएं जीवन रेखा को काटती हैं, उसी आयु में व्यक्ति को रोग-व्याधि और दुर्घटना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन्हें दुर्भाग्य का सूचक माना जाता है।


द्वीप का निशान होना


यदि किसी व्यक्ति की हथेली में पर्वत या फिर रेखा पर द्वीप का निशान बना हुआ है तो यह शुभ नहीं माना जाता है लेकिन प्रत्येक रेखा और पर्वत पर बने हुए द्वीप का अलग-अलग अर्थ होता है।


 जिस रेखा या पर्वत पर द्वीप का चिन्ह बनता है यह उसके प्रभाव को कमजोर करता है। जिसके कारण आपको अपने जीवन में धन, स्वास्थ, मान-प्रतिष्ठा आदि से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।


अनामिका उंगली पर क्षैतिज रेखाएं


यदि किसी व्यक्ति की अनामिका उंगली पर बहुत सारी क्षैतिज रेखाएं बनी हुई हैं तो इन्हें दुर्भाग्य का संकेत माना जाता है।


 इससे व्यक्ति के मान-सम्मान की हानि का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति के हाथ में काले धब्बे हो तो यही भी शुभ संकेत नहीं माना जाता है।


और अधिक जानकारी हस्तरेखा से जुड़ा हुआ परामर्श उपाय विधि प्रयोग या किसी तरह के विशेष परेशानियों में फंसे हुए हैं तो संपर्क करें और हस्तरेखा दिखाकर जानकारी प्राप्त करें संपर्क करें कॉल करें 


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


दक्षिणा  -  351  मात्र .


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अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच


 



अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच


चेहरे पर निखार, आकर्षक शरीर और एक सेहतमंद शरीर की कामना भला आज कौन नहीं करता है। हर कोई आकर्षक नज़र आना चाहता है। तो इस मनोकामना को पूरा  करने के लिए व्यक्ति आमतौर पर अप्सरा वशीकरण मंत्र  और साधना का इस्तेमाल करता है, जिसे काफी कारगर व असरदार भी माना गया है। 


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इसके बारे मे ये भी कहां गया है कि अप्सरा साधना की मदद से अप्सरा के जैसा  सौंदर्य व समृद्धि प्राप्त किया जा सकता है और ऐसा नहीं है की सिर्फ इसका इस्तेमाल स्त्रिया ही कर सकती है, क्यूकी सुंदर शरीर और खूबसूरत चेहरे की लालसा पुरुष भी रखता है।


तो अब हम आपको बताते है अप्सरा साधना के बारे मे की किस प्रकार आप इसे कर सकते है। जैसा की हमेशा से यह मान्यता रही है कि अप्सराओ को गुलाब, चमेली, रजनीगंधा और रातरानी जैसे फूलों की सुगंध काफी पसंद आती है। 


अप्सरा साधना करने के दौरान उस व्यक्ति को खास तौर पर अपनी यौन भावनाओं पर संयम रखना पड़ता है। ऐसा न कर पाने से साधना सिद्ध नहीं हो पाती है। 


साधक पूरे विश्वास और संकल्प व मंत्र की सहायता से अगर इस साधना को करता है, तो माना गया है कि अप्सरा प्रकट होती है और उस समय वो साधक उसे गुलाब के साथ इत्र भेंट करता है। साथ ही उसे दूध से बनी मिठाई व पान आदि भेंट देता है और उससे  जीवन भर साथ रहने का वचन लेता है।


 इन अप्सराओ मे चमत्कारिक शक्तिया होती है जो साधक की जिंदगी को सुंदर बनाने की योग्यता रखती है।

अब हम आपको रंभा अप्सरा साधना के बारे मे जानकारी देते हुए बताएँगे की इस साधना को करने के लिए आपको इस मंत्र का जप करना होता है, जोकि इस प्रकार है, 


मंत्र:


ऊँ दिव्यायै नमः! ऊँ वागीश्वरायै नमः!


ऊँ सौंदर्या प्रियायै नमः! ऊँ यौवन प्रियायै नमः!


ऊँ सौभाग्दायै नमः! ऊँ आरोग्यप्रदायै नमः!


 ऊँ प्राणप्रियायै नमः! ऊँ उजाश्वलायै नमः! ऊँ देवाप्रियायै  नमः!


 ऊँ ऐश्वर्याप्रदायै नमः! ऊँ धनदायै रम्भायै नमः!


बाकी साधना के जैसे इसमे भी साधक को पूजा-अर्चना के बाद  रम्भेत्किलन यंत्र के सामने बताए मंत्र का जप करना होता है। 


साधना हो जाने के बाद साधक की इक्छा पूर्ण होने के साथ उसके जीवन मे खुशियों आ जाती है।


अप्सरा साधना विधि को करने के लिए साधक के लिए जरूरी होता है कि वो कोई एक शांत जगह चुन ले। फिर उस जगह पर सफ़ेद रंग का एक कपड़ा बिछाकर, पीले चावल के इस्तेमाल से एक यंत्र का निर्माण करे। 


इसके बाद साधक के लिए जरूरी है कि वो अपने वस्त्र पर इत्र लगा ले जिससे वो  सुगन्धित हो जाये और मखमल को अपना आसन बनाए। 


केवल शुक्रवार के दिन, आधी रात को आप इस साधना करे। ध्यान जरूर रखे की साधना करते वक़्त आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो और फिर बनाए हुए यंत्र का पंचोपकर पूजन करे।


 जिस एकांत जगह या कमरे मे साधक बैठा है वो वहाँ गुलाब के इत्र का प्रयोग करे। आस-पास एक सुगन्धित माहोल बना ले।


 इन सबके बाद आप गुरु गणपति का ध्यान करके स्फटिक मणिमाला का मंत्र के साथ 51 जप करे। 


मंत्र:


 “ऊँ उर्वशी प्रियं वशं करी हुं! ऊँ ह्रीं उर्वशी अप्सराय आगच्छागच्छ स्वाहा!!” 


इस अनुष्ठान को आप कुल 7, 11 या 21 दिनों तक करे और आखिरी दिन 10 माल का जाप करे। बताए मंत्र के नीचे अपना नाम लिखकर उर्वशी माला की मदद से बताए मंत्र का 101 बार जप करे,


 मंत्र:  


“ऊँ ह्रीं उर्वशी मम प्रिय मम चित्तानुरंजन करि करि फट”।


अप्सरा वशीकरण साधना से जुड़े एक शाबर मंत्र के बारे मे भी हम आपको बताते है। जिसको करने के लिए जरूरी है की आप एक बाजोट पर लाल रंग का कपड़ा बिछा ले और उस पर एक चावल से ढेरी बना ले, जो कुम्कुम से रंगे हो।


 आप जिस आसान पर बैठे वो भी लाल रंग का ही हो। इसके बाद उन चावल पर “पुष्पदेहा आकर्षण सिद्धि यंत्र” स्‍थापित कर दे और स्फटिक की माला से मंत्र जाप करे।


 मंत्र: 


“ॐ आवे आवे शरमाती पुष्पदेहा प्रिया रुप आवे आवे हिली हिली मेरो कह्यौ करै,मनचिंतावे,कारज करे वेग से  आवे आवे,हर क्षण साथ रहे हिली हिली पुष्पदेहा अप्सरा फट् ॐ ”।


 शुक्रवार के दिन इस साधना को शुरू करे जो 7 दिनों तक चलती है। आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो इसका खास ध्यान रखे और मंत्र का रोज 11 माला जप करना होगा। बनाए हुए यंत्र पर रोज गुलाब का इत्र चढाये और 5 गुलाब भी चढा दे।


 घी का दीपक जला दे, जो साधना विधि के समय जलता रहे। आप जो धूप इस्तेमाल करे वो गुलाब का ही हो। जब मंत्र का जप किया जा रहा हो उस समय नजर  यंत्र की ओर होनी चाहिए। इसी यंत्र के माध्यम से साधक को अप्सरा से वचन प्राप्त करने का मंत्र प्राप्त होता है।


तो यकीन है की रूप-रंग व यौवन की चाहत रखने वाले लोगों के लिए ऊपर बताई गई बाते मददगार होंगी, जिनके उपयोग से साधक अपनी मनोकामना को पूर्ण कर सकता है।


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Friday, July 28, 2023

महाकाली साधना


 



महाकाली साधना


काल की गति सूक्ष्म से अति सूक्ष्म हैं . काल केबल कोई समय मात्र नहीं हैं , काल सजीव व् निर्जीव की गतिशीलता की पृष्ठभूमि हैं . काल गति के हरेक बिंदु में असंख्य घटनाए समाहित हैं . 


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इन्ही को हम काल योग या काल खंड कहते हैं . काल खंड में एक साथ हजारो प्रक्रियाए चलती रहती हैं , पर जिस भी प्रक्रिया का प्रभुत्व ज्यादा होता हे उसका असर हम पर प्रभाव ज्यादा रहता हे.


 इसी तरह अगर हम घटनाओ का अनावरण करे तो हरेक प्रक्रिया के लिए हमारे शास्त्रों में देवी एवं देवता निर्धारित हैं . 


आप ब्रम्हा, विष्णु, महेश, वरुण, इन्द्र, लक्ष्मी, सरस्वती, महाविद्या या किसी भी देवी देवता को देख लीजिए, प्रकृति में उनके कार्य निश्चित रूप से होते ही हैं .


अगर हम इसी बात को आगे लेकर बढे तो यह एक निष्कर्ष हैं कि पृथ्वी में जो भी गतिशीलता हैं या, काल खंड में समाहित जो भी घटनाए हैं उन हरएक घटना के स्वामी देव या देवी होते ही हैं.


हर एक क्षण में हमारे जीवन पर कोई न कई देवी देवता का प्रभाव पड़ता ही हैं . इसी को कहा गया हैं कि हरेक क्षण में कोई न कोई देवी या देवता शरीर में चैतन्य होते ही हैं . 


साधनाओ के द्वारा किसीभी देवी एवं देवताओ को सिद्ध कर के उनके द्वारा हमारी मनोकामना पूर्ति ,कार्य पूर्ति व इच्छा पूर्ति करवा सकते हैं . 


मगर हम ये नहीं जानते की किस क्षण में कौन देव / देवी चैतन्य हैं , और अगर हैं भी तो हम ये नहीं जानते कि प्रकृति आखिर कौन सा कार्य उस क्षण में करेगी और उसका हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा.


अत्यंत उच्चकोटि के योगी, इस प्रकार का कालज्ञान रखते हैं , उन्हें मालूम रहता हैं कि कौन से क्षण में क्या होगा और उसका परिणाम किसके ऊपर क्या असर करेगा.


 कौनसे देवी या देवता उस क्षण में जागृत होंगे और कौन से देवी देवता उस क्षण अलग अलग मनुष्य में चैतन्य रहते हैं . 


इसी के आधार पर वे भविष्य में कौन से क्षण में किसके साथ क्या होगा और उसे अलग अलग व्यक्तियों के लिए कैसे अनुकूल या प्रतिकूल बनाना हैं इस प्रकार से अति सूक्ष्म ज्ञान रहता हैं .


जैसे कि पहले कहा गया हैं , कि काल खंड में घटित असंख्य घटनाओ में से किसी एक घटना का प्रभाव सब से ज्यादा रहता हैं हर एक व्यक्ति के लिए वो अलग अलग हो सकता हैं . और हम उसी को एक डोर में बांधते हुए "जीवन" नाम देते हैं . 


दरअसल हमारे साथ एक ही वक़्त में सेकड़ो घटनाए घटित होती हैं पर उनके न्यून प्रभाव के कारण हम उसे समझ नहीं पाते. अब जिस घटनाका प्रभाव सबसे ज्यादा होगा उसके देवता को अगर हम साधना के माध्यम से अनुकूल करले तो उस समय में होने वाले किसी भी घटना क्रम को हम आसानी से हमारे अनुकूल बना सकते हैं .


 पर हम इतने कम समय में कैसे समझ ले की क्या घटना हैं देवता कौन हैं प्रभाव कैसा रहेगा आदि आदि ...उच्चकोटि के योगियों के लिए ये भले ही संभव हो लेकिन सामान्य मनुष्यों के लिए ये किसी भी हिसाब से संभव नहीं हैं . 


और इसी को ध्यान में रखते हुए , एक ऐसी साधना का निर्माण हुआ जिससे अपने आप ही हर एक क्षण में रहा देव योग अपने आप में सिद्ध हो जाता हैं और देव योग का ज्ञान होता रहता हे जिससे कि ये पता चलेगा कि कौन से क्षण में क्या कार्य करना चाहिए. 


अपने आपही क्षमता आ जाती हैं की उसे कार्य के अनुकूल या प्रतिकूल होने का आभाष पहले से ही मिल जाता हैं और देवता उसके वश में रहते हैं


काल की देवी महाकाली को कहा गया हैं और काल उनके नियंत्रण में रहता हैं . इस साधना के इच्छुक लोगो को साधना के साथ साथ शक्ति चक्र पर त्राटक का भी अभ्यास करना चाहिए.


ये साधना रविवार या फिर किसी भी दिन शुरू की जा सकती हैं इस साधना में साधक को काले वस्त्र ही धारण करने चाहिए.


इस साधना में महाकाली यन्त्र व काले हकीक माला की जरुरत रहती हैं साधना काल के के सभी नियम इस साधना में पालन करने चाहिए .


रात्रि में ११ बजे के बाद साधक स्नान कर के, काले वस्त्र धारण कर के काले उनी आसन पर बेठे. अपने सामने महाकाली का चित्र स्थापित हो. यन्त्र की सामान्य पूजा करे. दीपक और लोबान धूप जरुर लगाए.


फिर निम्न लिखित ध्यान करे


मुंड माला धारिणी दिगम्बरा

शत्रुसम्हारिणी विचित्ररूपा

महादेवी कालमुख स्तंभिनी

नमामितुभ्यम मात्रुस्वरूपा


इसके बाद साधना में सफलता के लिए महाकाली से प्राथना करे एवं निम्न लिखित मन्त्र का २१ माला जाप करे.


क्लीं क्लीं क्रीं महाकाली काल सिद्धिं क्लीं क्लीं क्रीं फट .


११ दिन तक प्रति दिन साधना निर्देशित जप करे . इसके बाद माला को १ महीने तक धारण करे फिर इसे नदी में विसर्जित करदे. यन्त्र को पूजा स्थान में रखा

जा सकता हैं.


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


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सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


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अपने ऊपर तान्त्रिक प्रयोग का कैसे पता करें


 


अपने ऊपर तान्त्रिक प्रयोग का कैसे पता करें :


अक्सर लोग सोचते हैं की किसी ने उनपर कोई जादू टोना या तांत्रिक प्रयोग कर दी है तो आईये जानते हैं –


1) रात को सिरहाने एक लोटे मैं पानी भर कर रखे और इस पानी को गमले मैं लगे या बगीचे मैं लगे किसी छोटे पौधे मैं सुबह डाले । 3 दिन से एक सप्ताह मे वो पौधा सूख जायेगा है ।


https://youtube.com/channel/UCWF8VKQJ_vL4K0-WKrGk-BA


2) रात्रि को सोते समय एक हरा नीम्बू तकिये के नीचे रखे और प्रार्थना करे कि जो भी नेगेटिव क्रिया हूई इस नीम्बू मैं समाहित हो जाये । सुबह उठने पर यदि नीम्बू मुरझाया या रंग काला पाया जाता है तो आप पर तांत्रिक क्रिया हुई है।


3) यदि बार बार घबराहट होने लगती है, पसीना सा आने लगता हैं, हाथ पैर शून्य से हो जाते है । डाक्टर के जांच मैं सभी रिपोर्ट नार्मल आती हैं।लेकिन अक्सर ऐसा होता रहता तो समझ लीजिये आप किसी तान्त्रिक क्रिया के शिकार हो गए है ।


4) आपके घर मैं अचानक अधिकतर बिल्ली,सांप, उल्लू, चमगादड़, भंवरा आदि घूमते दिखने लगे ,तो समझिये घर पर तांत्रिक क्रिया हो रही है।


5) आपको अचानक भूख लगती लेकिन खाते वक्त मन नही करता ।


6) भोजन मैं अक्सर बाल, या कंकड़ आने लगते है ।


7) घर मे सुबह या शाम मन्दिर का दीपक जलाते समय विवाद होने लगे या बच्चा रोने लगे ।


8) घर के मन्दिर मैं अचानक आग लग जाये ।


9) घर के किसी सदस्य की अचानक मौत ।


10) घर के सदस्यों की एक के बाद एक बीमार पढ़ना ।


11) घर के जानवर जैसे गाय, भैंस, कुत्ता अचानक मर जाना।


12) शरीर पर अचानक नीले रंग के निशान बन जाना ।


13) घर मे अचानक गन्दी बदबू आना ।


14) घर मैं ऐसा महसूस होना की कोई आसपास है ।


15) आपके चेहरे का रंग पीला पड़ना ये भी एक कारण हैं की जितना प्रबल तन्त्र प्रयोग होगा आपके मुह का रंग उतना ही पिला पड़ता जायेगा आप दिन प्रतिदिन अपने आपको कमज़ोर महसूस करेंगे।


16) आपके पहने नए कपड़े अचानक फट जाए, उस पर स्याही या अन्य कोई दाग लगने लग जाए, या जल जाए।


17) घर के अंदर या बाहर नीम्बू, सिंदूर, राई , हड्डी आदि सामग्री बार बार मिलने लगे।


18) चतुर्दशी या अमावस्या को घर के किसी भी सदस्य या आप अचानक बीमार हो जाये या चिड़चिड़ापन आने लग जाये ।


19) घर मैं रुकने का मन नही करे, घर मे आते ही भारीपन लगे,जब आप बाहर रहो तब ठीक लगे****** दशमहाविद्द्या माँ


और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या ओरिजिनल रत्न की जानकारी या रत्न प्राप्ति के लिए या कुंडली विश्लेषण कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें 


जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की 


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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...