Monday, July 3, 2023

भूत, भविष्य और वर्तमान की जानकारी देती है आपकी हस्तरेखा, जानें 15 विशेष बातें...


 



भूत, भविष्य और वर्तमान की जानकारी देती है आपकी हस्तरेखा, जानें 15 विशेष बातें...


हस्तरेखा में अंगुलियों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। किसी भी व्यक्ति के हाथ के गहन अध्ययन द्वारा उस व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों के बारे में आसानी से बताया जा सकता है।  


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हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार अंगुलियों के द्वारा व्यक्ति का पूरी तरह एक्स-रे किया जा सकता है। अंगुलियां छोटी-बड़ी, मोटी-पतली, टेढ़ी-मेढ़ी, गांठ वाली तथा बिना गांठ वाली कई प्रकार की होती हैं। 


आइए जानें कुछ विशेष बातें... 

 

* प्रत्येक अंगुली तीन भागों में बंटी होती है, जिन्हें पोर कहते हैं। 

 

* पहली अंगुली को तर्जनी, दूसरी अंगुली को मध्यमा, तीसरी अंगुली को अनामिका तथा चौथी अंगुली को कनिष्ठा कहा जाता है। 

 

* ये अंगुलियां क्रमशः बृहस्पति, शनि, सूर्य तथा बुध के पर्वतों पर आधारित होती हैं।

 

* प्रत्येक अंगुली की अलग-अलग परीक्षा की जाती है। 

 

* यदि अंगुलियों के अग्र भाग नुकीले हों और अंगुलियों में गांठ दिखाई न दे तो व्यक्ति कला और साहित्य का प्रेमी तथा धार्मिक विचारों वाला होता है। काम करने की क्षमता इनमें कम होती है। सांसारिक दृष्टि से ये निकम्मे होते हैं। 

 

* लम्बाई के हिसाब से अधिक लम्बी अंगुलियों वाला व्यक्ति दूसरे के काम में हस्तक्षेप अधिक करता है। 

 

* लम्बी और पतली अंगुलियों वाला व्यक्ति चतुर तथा नीतिज्ञ होता है। 

 

* छोटी अंगुलियों वाला व्यक्ति अधिक समझदार होता है। 

 

* बहुत छोटी अंगुलियों वाला व्यक्ति सुस्त, स्वार्थी तथा क्रूर प्रवृति का होता है। 

 

* जिस व्यक्ति की पहली अंगुली यानी अंगूठे के पास वाली अंगुली बहुत बड़ी होती है वह व्यक्ति तानाशाही अर्थात् लोगों पर अपनी बातें थोपने वाला होता है। 

 

* यदि अंगुलियों मिलाने पर तर्जनी और मध्यमा के बीच छेद हो तो व्यक्ति को 35 वर्ष की उम्र तक धन की कमी रहती है। 

 

* यदि मध्यमा और अनामिका के बीच छिद्र हो तो व्यक्ति को जीवन के मध्य भाग में धन की कमी रहती है। 

 

* अनामिका और कनिष्का के बीच छिद्र बुढ़ापे में निर्धनता का सूचक है। 

 

* जिस व्यक्ति की कनिष्ठा अंगुली छोटी तथा टेड़ी-मेड़ी हो तो वह व्यक्ति जल्दबाज तथा बेईमान होता है। 


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Saturday, July 1, 2023

हम भैरवी साधना करना चाहते है;


 


हम भैरवी साधना करना चाहते है; 


करवाने से होता है; उसी प्रकार तंत्र और भैरवी मार्ग की साधनायें भी बताने का विषय नहीं है।


भैरवी-साधना के 9 चरण होते है। इनको एक-एक कर करना होता है। पांच सिद्ध करने के बाद साधक वीर कहलाता है, नौ सिद्ध करने के बाद दिव्य। ‘वीर’ को ही अलौकिक शक्तियाँ और ज्ञान पारपत होता है।


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इसमें सबसे पहली साधना, जो सामान्य क्रियात्मक प्रयोग होते है, संस्कारों को नष्ट करने की होती है। मनुष्य अपने ही बनाये हुए नियमों से पाशबद्ध होकर उस पशु की तरह विवश हो गया है, जो बंधन में है।


इन संस्कारों से मुक्ति सबसे कठिन काम है। इनमें उत्तीर्ण होने के बाद ही भैरवी चक्र की दीक्षा दी जाती है। मुझे स्वयं भी 10  वर्ष पहले इसमें प्रवेश के लिए कठोर परिक्षण से गुजरना पड़ा था। मुझे ज्ञान और बौद्धिक क्षमता के लिए शिव और सरस्वती का वरदान चाहिए था, जो प्राप्त हुआ।


तीसरी समस्या भैरवी की होती है। हृदय से उत्साह के साथ कोई 18 से 30 वर्ष की युवती भैरवी बनकर साधना की पार्टनर बनना चाहे; तभी इस मार्ग की साधनाएं सफल होती है।


 युवती को ज्ञात होना चाहिए कि यह काम आधारित साधनायें है। दूसरे उसमें अपने पार्टनर से शिव और गुरु से सदाशिव के समान भक्ति और श्रद्धा होना चाहिए।


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अगर कुंडली में है पितृदोष तो बुरे फंसेंगे आप,


 


अगर कुंडली में है पितृदोष तो बुरे फंसेंगे आप,  


ज्योतिष से जानें इसकी पहचान और उपाय


अगर आपकी कुंडली में पितृदोष है तो फिर आपको सफेद चीज का दान करना चाहिए. इसके अलावा सूर्य और चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए. इतना ही नहीं, आपको प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा-आराधना विधि विधान से करनी चाहिए. विष्णु सहस्त्रनाम का जप करना चाहिए.


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ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का बड़ा महत्त्व है. कई बार कुंडली में कुछ ऐसे ग्रह दोष बन जाते हैं जिसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में हमेशा मुश्किलें बनी रहती हैं. घर में किसी न किसी का बीमार रहना, मान-सम्मान में हानि, मेहनत करने के बाद भी असफल होना- ये सब लक्षण ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक कुंडली में सूर्य ग्रह के कमजोर होने का संकेत देते हैं. ये हालात इस तरफ इशारा करते हैं कि आपकी कुंडली में कहीं पितृदोष है.


 कुंडली में ग्रहों की स्थिति गलत होने की वजह से पितृदोष होता है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, कुंडली में तीन ग्रह की वजह से पितृदोष बनता है. इतना ही नहीं, पितृदोष एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक भी पहुंच जाता है और स्वास्थ्य व पारिवारिक समस्याएं पैदा करता है.


पितृदोष की पहचान


ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि सूर्य ग्रह को पिता का ग्रह माना जाता है. कुंडली में सूर्य ग्रह कमजोर या पीड़ित होने की वजह से पितृदोष के संकेत मिलते हैं. अगर कुंडली में सूर्य कमजोर है तो व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह की मुश्किलें पैदा होती हैं. दूसरी तरफ, कुंडली में चंद्रमा ग्रह को मां का ग्रह माना जाता है. कुंडली में चंद्रमा ग्रह के कमजोर होने से भी पितृदोष लगता है. दूसरी तरफ राहु ग्रह अगर कुंडली में 9वें स्थान पर स्थित है तो यह पितृदोष का संकेत देता है. ऐसी स्थिति में जब व्यक्ति कोई नया कार्य शुरू करता है तो उसे असफलता का सामना करना पड़ता है.


ऐसे दूर करें पितृदोष


अगर आपकी कुंडली में पितृदोष है तो फिर आपको सफेद चीज का दान करना चाहिए. इसके अलावा सूर्य और चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए. इतना ही नहीं, आपको प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा-आराधना विधि विधान से करनी चाहिए. विष्णु सहस्त्रनाम का जप करना चाहिए. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, गायत्री मंत्र, गायत्री सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए.


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बदनामी और राहु


 


बदनामी और राहु


बदनामी, कलंक और राहु का चोली दामन का साथ है


अगर आप बिल्कुल ईमानदार हैं, ईमानदारी के साथ काम कर रहे हैं, और उसके बावजूद आपको एक ऐसा कलंक लगे जिसमें आपकी कोई हिस्सेदारी नहीं हो तो राहु का कुप्रभाव समझे


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आपके खिलाफ गहरी साजिश हो रही हो जिसका आपको भनक तक ना हो चारों तरफ आपके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा हो समझ ले यह राहु का कुप्रभाव है


जब कुंडली में राहु खराब हो, और खासकर राहु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा और चंद्रमा की अंतर्दशा हो तो ऐसे परिणाम देखने को मिलते हैं


आप गर्दन काट के तश्तरी पर भी रख दे तब भी लोग आपको लोभी और स्वार्थी ही समझेंगे


यह कुंडली में राहु का  कुप्रभाव होने का कारक है


जब आपके हक का भी छीन लिया जाए, आपकी अपनी चीज भी आपसे छीन ली जाए तो समझ ले कुंडली में राहु का कुप्रभाव है


बसा बसाया जीवन अचानक से बिल्कुल उजर जाए, आपका सुख चैन छीन लिया जाए, और आपका बसा बसाया परिवार उजर जाए तो समझ ले यह कुंडली में राहु का कुप्रभाव है


एक समय ऐसा लगे कि जब आपके साथ देने वाला कोई नहीं धरती तो धरती आसमान भी आपके खिलाफ हो जाए तो समझ ले कुंडली में आपका राहु का कुप्रभाव है


एक समय आपके कपड़े भी आपके खिलाफ हो जाए यानी जो आपने वस्त्र पहन के रखा है वह भी आपके खिलाफ हो जाए तो समझ ले कुंडली में राहु कुप्रभाव है


चारों तरफ अंधेरा छा जाए यहां तक कि सांस लेने का भी जगह न हो समझ ले राहु का कुप्रभाव है


इज्जत तार-तार हो जाए, तो समझ ले राहु कुप्रभाव है


आप वाचाल हो जाए चाहे जितना भी हो आप चुप ना रहे


बोलते ही जाएं बोलते ही जाए तो समझ ले राहु का कुप्रभाव है


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Friday, June 30, 2023

जन्मकुंडली के ये 10 घातक योग, तुरंत करें ये उपाय


 



जन्मकुंडली के ये 10 घातक योग, तुरंत करें ये उपाय

 


जन्म कुंडली में 2 या उससे ज्यादा ग्रहों की युति, दृष्टि, भाव आदि के मेल से योग का निर्माण होता है। ग्रहों के योगों को ज्योतिष फलादेश का आधार माना गया है।


 अशुभ योग के कारण व्यक्ति को जिंदगीभर दु:ख झेलना पड़ता है। आओ जानते हैं कि कौन-कौन से अशुभ योग होते हैं और क्या है उनका निवारण?


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1. चांडाल योग


* कुंडली के किसी भी भाव में बृहस्पति के साथ राहु या केतु का होना या दृष्टि आदि होना चांडाल योग बनाता है।


* इस योग का बुरा असर शिक्षा, धन और चरित्र पर होता है। जातक बड़े-बुजुर्गों का निरादर करता है और उसे पेट एवं श्वास के रोग हो सकते हैं।


* इस योग के निवारण हेतु उत्तम चरित्र रखकर पीली वस्तुओं का दान करें। माथे पर केसर, हल्दी या चंदन का तिलक लगाएं।


* संभव हो तो एक समय ही भोजन करें और भोजन में बेसन का उपयोग करें। अन्यथश प्रति गुरुवार को कठिन व्रत रखें।

 

 

2. अल्पायु योग


* जब जातक की कुंडली में चन्द्र ग्रह पाप ग्रहों से युक्त होकर त्रिक स्थानों में बैठा हो या लग्नेश पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो और वह शक्तिहीन हो तो अल्पायु योग का निर्माण होता है। 


* अल्पायु योग में जातक के जीवन पर हमेशा हमेशा संकट मंडराता रहता है, ऐसे में खानपान और व्यवहार में सावधानी रखनी चाहिए।


* अल्पायु योग के निदान के लिए प्रतिदिन हनुमान चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र पढ़ना चाहिए और जातक को हर तरह के बुरे कार्यों से दूर रहना चाहिए।

 

 

3. ग्रहण योग


* ग्रहण योग मुख्यत: 2 प्रकार के होते हैं- सूर्य और चन्द्र ग्रहण। यदि चन्द्रमा पाप ग्रह राहु या केतु के साथ बैठे हों तो चन्द्रग्रहण और सूर्य के साथ राहु हो तो सुर्यग्रहण होता है।


* चन्द्रग्रहण से मानसिक पीड़ा और माता को हानि पहुंचती है। सूर्यग्रहण से व्यक्ति कभी भी जीवन में स्टेबल नहीं हो पाता है, हड्डियां कमजोर हो जाती है, पिता से सुख भी नहीं मिलता।


* ऐसी स्थिति में 6 नारियल अपने सिर पर से वार कर जल में प्रवाहित करें। आदित्यहृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करें। सूर्य को जल चढ़ाएं। एकादशी और रविवार का व्रत रखें। दाढ़ी और चोटी न रखें।


4. वैधव्य योग


*वैधव्य योग बनने की कई स्थितियां हैं। वैधव्य योग का अर्थ है विधवा हो जाना। सप्तम भाव का स्वामी मंगल होने व शनि की तृतीय, सप्तम या दशम दृष्टि पड़ने से भी वैधव्य योग बनता है। सप्तमेश का संबंध शनि, मंगल से बनता हो व सप्तमेश निर्बल हो तो वैधव्य का योग बनता है।


*जातिका को विवाह के 5 साल तक मंगला गौरी का पूजन करना चाहिए, विवाह पूर्व कुंभ विवाह करना चाहिए और यदि विवाह होने के बाद इस योग का पता चलता है तो दोनों को मंगल और शनि के उपाय करना चाहिए।


5. दारिद्रय योग


*यदि किसी जन्म कुंडली में 11वें घर का स्वामी ग्रह कुंडली के 6, 8 अथवा 12वें घर में स्थित हो जाए तो ऐसी कुंडली में दारिद्रय योग बन जाता है।


*दारिद्रय योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों की आर्थिक स्थिति जीवनभर खराब ही रहती है तथा ऐसे जातकों को अपने जीवन में अनेक बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।

 

6. षड्यंत्र योग


*यदि लग्नेश 8वें घर में बैठा हो और उसके साथ कोई शुभ ग्रह न हो तो षड्यंत्र योग का निर्माण होता है।


*जिस स्त्री-पुरुष की कुंडली में यह योग होता है वह अपने किसी करीबी के षड्यंत्र का शिकार होता है। इससे उसे धन-संपत्ति व मान-सम्मान आदि का नुकसान उठाना पड़ सकता है।


*इस दोष को शांत करने के लिए प्रत्येक सोमवार भगवान शिव और शिव परिवार की पूजा करनी चाहिए। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करते रहना चाहिए।

 


 

7. कुज योग


*यदि किसी कुंडली में मंगल लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो तो कुज योग बनता है। इसे मांगलिक दोष भी कहते हैं।


*जिस स्त्री या पुरुष की कुंडली में कुज दोष हो, उनका वैवाहिक जीवन कष्टप्रद रहता है इसीलिए विवाह से पूर्व भावी वर-वधू की कुंडली मिलाना आवश्यक है। यदि दोनों की कुंडली में मांगलिक दोष है तो ही विवाह किया जाना चाहिए।


*विवाह होने के बाद इस योग का पता चला है तो पीपल और वटवृक्ष में नियमित जल अर्पित करें। मंगल के जाप या पूजा करवाएं। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।


8. केमद्रुम योग


*यदि किसी कुंडली में चन्द्रमा के अगले और पिछले दोनों ही घरों में कोई ग्रह न हो तो या कुंडली में जब चन्द्रमा द्वितीय या द्वादश भाव में हो और चन्द्र के आगे और पीछे के भावों में कोई अपयश ग्रह न हो तो केमद्रुम योग का निर्माण होता है।


*इस योग के चलते जातक जीवनभर धन की कमी, रोग, संकट, वैवाहिक जीवन में भीषण कठिनाई आदि समस्याओं से जूझता रहता है।


*इस योग के निदान हेतु प्रति शुक्रवार को लाल गुलाब के पुष्प से गणेश और महालक्ष्मी का पूजन करें। मिश्री का भोग लगाएं। चन्द्र से संबंधित वस्तुओं का दान करें।

 

 

9. अंगारक योग


*यदि किसी कुंडली में मंगल का राहु या केतु में से किसी के साथ स्थान अथवा दृष्टि से संबंध स्थापित हो जाए तो अंगारक योग का निर्माण हो जाता है।


*इस योग के कारण जातक का स्वभाव आक्रामक, हिंसक तथा नकारात्मक हो जाता है तथा ऐसा जातक अपने भाई, मित्रों तथा अन्य रिश्तेदारों के साथ कभी भी अच्छे संबंध नहीं रखता। उसका कोई कार्य शांतिपूर्वक नहीं निपटता।


*इसके निदान हेतु प्रतिदिन हनुमानजी की उपासना करें। मंगलवार के दिन लाल गाय को गुड़ और प्रतिदिन पक्षियों को गेहूं या दाना आदि डालें। अंगारक दोष निवारण यंत्री भी स्थापित कर सकते हैं।

 

 

10.विष योग :


*शनि और चंद्र की युति या शनि की चंद्र पर दृष्टि से विष योग बनता है। कर्क राशि में शनि पुष्य नक्षत्र में हो और चंद्रमा मकर राशि में श्रवण नक्षत्र में हो अथवा चन्द्र और शनि विपरीत स्थिति में हों और दोनों अपने-अपने स्थान से एक दूसरे को देख रहे हों तो तब भी विष योग बनता है।


 यदि 8वें स्थान पर राहु मौजूद हो और शनि मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक लग्न में हो तो भी यह योग बनता है।


*इस योग से जातक को जिंदगीभर कई प्रकार की विष के समान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पूर्ण विष योग माता को भी पीड़ित करता है।


*इस योग के निदान हेतु संकटमोचक हनुमानजी की उपासना करें और प्रति शनिवार को छाया दान करते रहें। सोमवार को शिव की आराधना करें या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।


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"माँ तारा":-(ममतामयी माँ सबको तारने वाली)


 


"माँ तारा":-(ममतामयी माँ सबको तारने वाली)


क्या आप भी साधना करना चाहते हैं? तो आज ही अपने गुरु से सम्पर्क कर किसी साधना की शुरुवात करें। Tara MahaVidya - करोडपति बनना है आसान 


यह विद्या साधकों को बुद्धि, ज्ञान, शक्ति, जय एवं श्री देने वाली तथा भय, मोह एवं अपमृत्यु का निवारण करने वाली मानी गयी हैं।  


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ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्ववस्थां गतोऽपि वा | य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि: || 

इस पानी को अपने उपर छिड्क ले


अचमन, स्थान शुद्धि, आदि करने के बाद गणपति और गुरु की पुजा शुरु करे। 


गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः । गुरु साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः ॥ 


प्रत्यालीढ पदार्पितांगघ्रिशवहृद घोराट्टहासा परा,खडगेन्दीवरकर्तृं खर्परभुजा हूंकार-बीजोद-भवा खर्वानील विशालपिंगल जटा जूटैकनागैर्युता,जाड्य न्यस्य कपालिके त्रिजगतां हन्त्युग्रतारास्वयम


सीधे हाथ मे जल लेकर कहे  - ‘ॐ अस्य श्रीतारांमन्त्रस्य अक्षोभ्यऋषिः बृहतीछन्दः तारादेवता ह्रीं बीजं हुं शक्तिः आत्मनोऽभीष्टसिद्धयर्थ तारामन्त्रजपे विनियोगः । जल छोड दे 


फिर करन्यास और अन्य न्यास को करने के बाद मे नीचे लिखा प्रक्रिया करे।


ऋष्यादिन्यास - 


‘ॐ अक्षोभ्यऋषये नमः शिरसि        

ॐ बृहतीछन्दसे नमः मुखे,

ॐ तारादेवतायै नमः हृदि,        

ॐ ह्रीं (हूँ) बीजाय नमः गुह्ये,

ॐ हूँ (फट्) शक्तये नमः पादयोः    

ॐ स्त्रीं कीलकाय नमः सर्वाङ्गे


कराङ्गन्यास -    


ॐ ह्रां अङ्‌गुष्ठाभ्यां नमः,        

ॐ ह्रीं तर्जनीभ्या नमः,

ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः,        

ॐ ह्रैं अनकामिकाभ्यां नमः,

ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः        

ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः, 


मुल मंत्र 


“ॐ ह्रीं स्त्री हुं फट” 


की 39 माला रोज करें।  घी के दीपक से आरती करें जो भी कर सकते हैं चाहे अम्बे की करें फिर नमस्कार करें और कहे। 


ॐ गुह्यातिगुह्या गोप्ती त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम,सिद्धिर्भवतु मे महादेवी त्वत प्रसादान्देवी 

मंत्र जप समाप्ति पर साधक साधना कक्ष में ही सोयें।  


सभी सामन को पुजा वाले कपडे मे लपेट कर कलवा से बांध कर नदी में प्रवाहित कर दें। । कुछ सिक्के भी पानी मे डाल दे। हाथ जोडकर घर आये किसी से बात ना करें और पीछे मुडकर ना देखे तो ज्यादा अच्छा हैं। वरना प्रभाव कम हो जाता हैं। घर पहुँचते ही साधना सिद्धि हो चुकी होगी। धन पाने के नये मार्ग स्वयं माँ खोलती जायेगी इसके अलावा आपके स्वास्थ, बुद्धि, वाणी का ध्यान रखेगी


साधना समाग्री दक्षिणा === 1500


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Wednesday, June 28, 2023

चारों तरफ से नाम मान सम्मान और पद प्रतिष्ठा प्राप्त होते हैं यदि आपके हाथों में मछली का निशान हो तो जाने अपने हाथों से क्या आप भी हैं भाग्यशाली ....


 


चारों तरफ से नाम मान सम्मान और पद प्रतिष्ठा प्राप्त होते हैं यदि आपके हाथों में मछली का निशान हो तो जाने अपने हाथों से क्या आप भी हैं भाग्यशाली ....


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हथेली में कई तरह की रेखाएं होती हैं। इनमें मुख्य रूप से जीवन, भाग्य, स्वास्थ्य, हृदय और धन संबंधी रेखाएं है। हथेली पर मौजूद धन रेखा से आपकी आर्थिक स्थिति कैसी रहेगी। 


क्या आप अपनी कमाई से धनवान बनेंगे या कहीं से आपको अचानक धन की प्राप्ति होगी। आइए जानते हैं आपकी हथेली में धन की रेखा क्या कहती है।


हस्तरेखा


हथेली में धन रेखा जीवन रेखा की तरह हर व्यक्ति की हथेली में एक स्थान से शुरू नहीं होती है। हर व्यक्ति की हथेली में धन की रेखा अलग-अलग स्थानों से और अलग-अलग रेखाओं और पर्वतों से मिलकर बनी होती है। 


आपकी हथेली में सूर्य पर्वत, शुक्र पर्वत और गुरु पर्वत उठा हुआ है तो यह संकेत है कि आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी होगी और आप सुखी जीवन का आनंद लेंगे।


 हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार शुक्र पर्वत भौतिक सुख को दर्शाता है, गुरु पर्वत नेतृत्व क्षमता और सूर्य पर्वत मान-सम्मान और प्रसिद्धि को दर्शाता है।


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अगर हथेली में जीवन रेखा, भाग्य रेखा और मस्तिष्क रेखा से मिलकर Mआकृति बन रही है तो यह संकेत है कि आप 35 से 55 साल के बीच खूब धन कमाएंगे।


कुछ लोगों की हथेली में उनकी भाग्य रेखा ही धन की रेखा का काम करती है यानी यह धन का हाल बताती है। जिनकी हथेली में मणिबंध से निकलकर सीधी रेखा शनि पर्वत पर पहुंचती है उन्हें धन का लाभ अपने आप अचानक ही मिलता रहता है। 


हस्तरेखा


अगर आपकी हथेली में त्रिकोण का चिन्ह बन रहा है तो यह धन रेखा होती है। ऐसी रेखा होने का मतलब है कि आप एक नहीं कई स्रोतों से धन कमाएंगे।


अंगूठे के पास से निकलकर कोई रेखा बुध पर्वत यानी छोटी उंगली की जड़ तक पहुंचे तो इसका मतलब है कि आप अपने परिवार के सदस्यों से पैतृक संपत्ति से या किसी स्त्री के सहयोग से धन प्राप्त कर सकते हैं।


आपकी हथेली में भाग्य रेखा से निकलकर एक रेखा सूर्य पर्वत पर पहुंच रही है तो आप आर्थिक मामलों में भाग्यशाली होंगे। ऐसे लोग सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठित होते हैं।


अंगूठे से नीचे से रेखा निकलकर शनि पर्वत तक पहुंच रही है तो आपको व्यवसाय के बारे में सोचना चाहिए। ऐसे व्यक्ति व्यवसाय में खूब सफल होते हैं और इनकी हथेली में यह रेखा धन रेखा का काम करती है।


 और भी बहुत कुछ कहती है आपकी हस्तरेखा आप भी अपने जीवन से जुड़ा हुआ किसी भी प्रकार की जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या हस्तरेखा का पूर्ण विश्लेषण प्राप्त करना चाहते हैं तो संपर्क करें 


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