Saturday, October 31, 2020

नौवी महाविद्या मातंगी


 





नौवी महाविद्या मातंगी


सांसारिक रूप में महाविद्या कमला का आराधना से धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति के बाद किसी भी आदमी को जरूरत होती है, अपने आभामंडल और प्रभाव को बढ़ाने की। इंसान चाहता है कि लोग उसके धन व ऐश्वर्य को समझें और उसे सम्मान दें। 


दूसरी ओर आध्यात्मिक क्षेत्र का साधक कमला की साधना से खुद को अंदर से परिपूर्ण करने के बाद प्रकृति को मोहित कर अपने साधना के स्तर को उठाना चाहता है। इसके लिए आवश्यकता पड़ती है नौवीं महाविद्या मातंगी की। इनमें पूरे ब्रह्मांड को मोहित करने की शक्ति है। जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि सभी महाविद्या में सब कुछ प्रदान करने की शक्ति है लेकिन उनके विशेषज्ञता के खास क्षेत्र हैं। 


तंत्र के क्षेत्र में मातंगी की साधना का काफी महत्व है। यह ममता की मूर्ति हैं और सामन्यतया साधकों पर प्रसन्न होने में अधिक देर नहीं लगाती हैं। इनकी प्रसन्नता से ज्ञान वृद्धि, शास्त्राज्ञाता, कवित्व शक्ति एवं संगीत विद्या की भी प्राप्ति संभव है।


 यह सम्मोहन और वशीकरण की अधिष्ठात्री हैं। इनके प्रयोग से भंडार की अक्षयवृद्धि होती है। आवश्यकता सिर्फ श्रद्धा का नियमपूर्वक साधना करने की है। मातंगी की साधना के बारे में संक्षिप्त जानकारी नीचे दी जा रही है। विस्तृत जानकारी के लिए अपने आसपास के किसी योग्य व्यक्ति से या मेल से मुझसे जानकारी ली जा सकती है।


मातंगी के कई नाम हैं। इनमें प्रमुख हैं-सुमुखी, लघुश्यामा या श्यामला, उच्छिष्टचांडालिनी, उच्छिष्टमातंगी, राजमातंगी, कर्णमातंगी, चंडमातंगी, वश्यमातंगी, मातंगेश्वरी, ज्येष्ठमातंगी, सारिकांबा, रत्नांबा मातंगी एवं वर्ताली मातंगी।


1-अष्टाक्षर मातंगी मंत्र- कामिनी रंजनी स्वाहा


विनियोग— अस्य मंत्रस्य सम्मोहन ऋषिः, निवृत् छंदः, सर्व सम्मोहिनी देवता सम्मोहनार्थे जपे विनियोकगः।


ध्यान--- श्यामंगी वल्लकीं दौर्भ्यां वादयंतीं सुभूषणाम्। चंद्रावतंसां विविधैर्गायनैर्मोहतीं जगत्।


फल व विधि------ विनियोग से ही मंत्र का फल स्पष्ट 20 हजार जप कर मधुयुक्त मधूक पूष्पों से हवन करने पर अभीष्ट की सिद्धि होती है।

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2-दशाक्षर मंत्र------ ऊं ह्री क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा।


विनियोग— अस्य मंत्रस्य दक्षिणामूर्ति ऋषिःर्विराट् छंदः, मातंगी देवता, ह्रीं बीजं, हूं शक्तिः, क्लीं कीलकं, सर्वेष्टसिद्धये जपे विनियोगः।


अंगन्यास--- ह्रां, ह्रीं, ह्रूं, ह्रैं, ह्रौं, ह्रः से हृदयादि न्यास करें।


फल व विधि------ साधक छह हजार जप नित्य करते हुए 21 दिन प्रयोग करें। फिर दशांस हवन करें। चतुष्पद श्मसान या कलामध्य में मछली, मांस, खीर व गुगल का धूप दे तो कवित्व शक्ति की प्राप्ति होती है। इससे जल, अग्नि एवं वाणी का स्तंभन भी संभव है।


 इसकी साधना करने वाला वाद-विवाद में अजेय बन जाता है। उसके घर में स्वयं कुबेर आकर धन देते हैं।


3-लघुश्यामा मातंगी का विंशाक्षर मंत्र--------- ऐं नमः उच्छिष्ट चांडालि मांतगि सर्ववशंकरि स्वाहा।


विधि--- 


विनियोग व न्यास आदि के साथ देवी की पूजा कर 11, 21, 41 दिन या पूर्णिमा/आमावास्या से पूर्णिमा/आमावास्या तक एक लाख जप पूर्ण करें। मंत्र से ऐसा प्रतीत होता है कि इसका जप उच्छिष्ट मुंह किया जाना चाहिए। ऐसा किया भी जा सकता है लेकिन विभिन्न ग्रंथों में इसे पवित्र होकर करने का भी विधान है।


 अतः साधक सुविधानुसार जप करें। जप पू्र्ण होने के बाद महुए के फूल व लकड़ी के दशांस होम कर तर्पन व मार्जन करें।


फल-------


 इसके प्रयोग से डाकिनी, शाकिनी एवं भूत-प्रेत बाधा नहीं पहुंचा सकते हैं। इसकी साधना से प्रसन्न होकर देवी साधक को देवतुल्य बना देती है। उसकी समस्त अभिलाषाएं  पूरी होती हैं। 


चूंकि मातंगी वशीकरण विद्या की देवी हैं, इसलिए इसके साधक की वह शक्ति भी अद्भुत बढ़ती है। राजा-प्रजा सभी उसके वश में रहते हैं।


4-एकोन विंशाक्षर उच्छिष्ट मातंगी तथा द्वात्रिंशदक्षरों मातंगी मंत्र


मंत्र (एक)--- नमः उच्छिष्ट चांडालि मातंगी सर्ववशंकरि स्वाहा।


मंत्र (दो)---- ऊं ह्रीं ऐं श्रीं नमो भगवति उच्छिष्टचांडालि श्रीमातंगेश्वरि सर्वजन वशंकरि स्वाहा।


विधि-----


 विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे।


फल----- 


मधुयुक्त महुए के फूल व लकड़ी से हवन करने पर वशीकरण का प्रयोग सिद्ध होता है। मल्लिका फूल के होम से योग सिद्धि, बेल फूल के हवन से राज्य प्राप्ति, पलास के पत्ते व फूल के हवन में जन वशीकरण, गिलोय के हवन से रोगनाश, थोड़े से नीम के टुकड़ों व चावल के हवन से धन प्राप्ति, नीम के तेल से भीगे नमक से होम करने पर शत्रुनाश, केले के फल के हवन से समस्त कामनाओं की सिद्धि होती है।


 खैर की लकड़ी से हवन कर मधु से भीगे नमक के पुतले के दाहिने पैर की ओर हवन की अग्नि में तपाने से शत्रु वश में होता है।


5-सुमुखी मातंगी प्रयोग


इसमें दो मंत्र हैं जिसमें सिर्फ ई की मात्रा का अंतर है पर ऋषि दोनों के अलग-अलग हैं। इसमें फल समान है।


पहला मंत्र---- उच्छिष्ट चांडालिनी सुमुखी देवी महापिशाचिनी ह्रीं ठः ठः ठः।


इसके ऋषि अज, छंद गायत्री और देवता सुमुखी मातंगी हैं।


विधि---- 


देवी के विधिपूर्वक पूजन के बाद जूठे मुंह आठ हजार जप करने से ही इसका पुरश्चरण होता है। साधक को धन की प्राप्ति होती है और उसका आभामंडल बढ़ता है। हवन की विधि नीचे है।


दूसरा मंत्र-----


 उच्छिष्ट चांडालिनि सुमुखि देवि महापिशाचिनि ह्रीं ठः ठः ठः।


इसके ऋषि भैरव, छंद गायत्री और देवता सुमुखी मातंगी हैं।


विधि---- 


इसकी कई विधियां हैं। एक में एक लाख मंत्र जप का भी विधान वर्णित है। लेकिन मेरा मानना है कि देवी के विधिपूर्वक पूजन के बाद जूठे मुंह दस हजार जप करने से ही इसका पुरश्चरण होता है और साधक को धन की प्राप्ति होती है तथा उसका आभामंडल बढ़ता है।


हवन विधि------ 


दही से सिक्त पीली सरसो व चावल से हवन करने पर राजा-मंत्री सभी वश में हो जाते हैं। बिल्ली के मांस से हवन करने पर शस्त्र का वसीकरण होता है। बकरे के मांस के हवन से धन-समृद्धि मिलती है। 


खीर के हवन से विद्या प्राप्ति तथा मधु व घी युक्त पान के पत्तों के हवन से महासमृद्धि की प्राप्ति होती है।


 कौवे व उल्लू के पंख के हवन से शत्रुओं का विद्वेषण होता है।


चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


राजगुरु जी


महाविद्या आश्रम


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Wednesday, October 28, 2020

सर्वजन वशीकरण प्रयोग एक अनुभूति साधना








सर्वजन वशीकरण प्रयोग एक अनुभूति साधना

लोहट मंत्र :-

"" नमो भगवते कामदेवाय सर्वजन प्रियाय सर्वजन सम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल हन हन वद वद तप तप सम्मोहाय सम्मोहाय सर्वजन मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ""

मंत्र जाप संख्या : - इक्कीश हजार

दिशा :- उत्तर

स्थान :- घर का एकांत कक्ष

समय :- मध्य रात्रि

दिन ;- शुक्रवार / या मोहनी एकादशी

आसन :- सफ़ेद

वस्त्र :- सफ़ेद धोती

हवन :- ( दशांश ) देशी घी , पंचमेवा ( काजू , बादाम , किशमिश , पिश्ता , मखाना )

विधि :-

मोहनी एकादशी या किसी भी शुक्रवार को स्नान आदि से निवित्र होकर कांशे की थाली में समस्त तांत्रिक पूजन सामग्री स्थापित करके पंचोपचार पूजन करना चाहिए व्यक्ति विशेष को वश में करने का अथवा सिद्धि का संकल्प लेते हुए , 

विधि - 

विधान पूर्वक गुरु - गणेश वंदना करके , मूल मंत्र का जाप करे , . जाप की पूर्णता पर दशांश हवन करके ब्राह्मण , एवं पांच कुवारी कन्यायो को भोजन सहित उपयुक्त दान - दक्षिणा देकर साधना को पूरा करे .

इस महत्व पूर्ण सम्मोहनी साधना से साधक का व्यक्तित्व अत्यंत सम्मोहक और आकर्षक हो जाता हैं .उसके संपर्क में आने वाला कोई भी व्यक्ति प्रभावित हुए बिना नहीं रहता . 

यदि कोई साधना करने में असमर्थ हो , तो योग्य विद्द्वान द्वारा या साधना सम्पन्न करा के करवाकर सम्मोहनी कवच धारण करके उक्त लाभ प्राप्त कर सकता हैं .

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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राज गुरु जी

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

 (रजि.)

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Tuesday, October 27, 2020

बटुक भैरव तंत्र साधना कवच व प्रयोग,


 





बटुक भैरव तंत्र साधना कवच व प्रयोग,..


कलियुग में हनुमानजी के अलावा भैरव ही एकमात्र ऐसे देव हैं जिनकी पूजा तुरंत फल देती है। अगर सच्चे मन से उनकी पूजा की जाए तो वो अपने भक्तों की इच्छा पूरी करने में क्षण भर भी देर नहीं करते हैं। विशेष तौर पर यदि भैरवाष्टमी या अष्टमी के दिन तंत्र प्रयोग किए जाए या भगवान कालभैरव के मंत्रों का प्रयोग किया जाए तो निश्चित ही हर इच्छा पूरी होती है।


पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच विवाद छिड़ गया कि उनमे से श्रेष्ठ कौन है?


 यह विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि सभी देवता घबरा गए. उन्हें डर था कि दोनों देवताओं के बीच युद्ध ना छिड़ जाए और प्रलय ना आ जाए.


 सभी देवता घबराकर भगवन शिव के पास चल गए और उनसे समाधान ढूंढऩे का निवेदन किया. जिसके बाद भगवान शंकर ने एक सभा का आयोजन किया जिसमें भगवान शिव ने सभी ज्ञानी, ऋषि-मुनि, सिद्ध संत आदि और साथ में विष्णु और ब्रह्मा जी को भी आमंत्रित किया.

इस सभा में निर्णय लिया गया कि सभी देवताओं में भगवान शिव श्रेष्ठ है.


 इस निर्णय को सभी देवताओं समेत भगवान विष्णु ने भी स्वीकार कर लिया. ब्रह्मा ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया.


 वे भरी सभा में भगवान शिव का अपमान करने लगे. भगवान शंकर इस तरह से अपना अपमान सह ना सके और उन्होंने रौद्र रूप धारण कर लिया.


भगवान शंकर प्रलय के रूप में नजर आने लगे और उनका रौद्र रूप देखकर तीनों लोक भयभीत हो गए. भगवान शिव के इसी रूद्र रूप से भगवान भैरव प्रकट हुए. 


वह श्वान (कुत्ते) पर सवार थे, उनके हाथ में एक दंड था और इसी कारण से भगवान शंकर को ‘दंडाधिपति भी कहा गया है. पुराणों के अनुसार भैरव जी का रूप अत्यंत भयंकर था. उन्होंने ब्रह्म देव के पांचवें सिर को काट दिया तब ब्रह्म देव को अपनी गलती का एहसास हुआ.


 भैरव की पूजा से मिलते हैं ये लाभ नारदपुराण के अनुसार भैरव की पूजा करने से मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण होती है। यदि मनुष्य किसी पुराने रोग से पीडि़त है तो वह रोग, दुख और तकलीफ भी दूर हो जाएगी।


यही नहीं यदि जीवन में शनि और राहु की बाधाएं आ रही हैं तो वह भी इनकी कृपा से दूर होगी। इनकी पूजा करने से डर से लडऩे की हिम्मत भी मिलती है। भैरवाष्टमी या कालाष्टमी के दिन पूजा उपासना द्वारा सभी शत्रुओं और पापी शक्तियों का नाश होता है और सभी प्रकार के पाप, ताप एवं कष्ट दूर हो जाते हैं.  


भैरव देव जी के राजस, तामस एवं सात्विक तीनों प्रकार के साधना तंत्र प्राप्त होते हैं. 


भैरव साधना स्तंभन, वशीकरण, उच्चाटन और सम्मोहन जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने के लिए कि जाती है. इनकी साधना करने से सभी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं भैरव आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होती है, व्यक्ति में साहस का संचार होता है.


 इनकी आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है, रविवार और मंगलवार के दिन इनकी पूजा बहुत फलदायी है. भैरव साधना और आराधना से पूर्व अनैतिक कृत्य आदि से दूर रहना चाहिए पवित्र होकर ही सात्विक आराधना की जाती है तभी फलदायक होती है.


 भैरव तंत्र में भैरव पद या भैरवी पद प्राप्त करने के लिए भगवान शिव ने देवी के समक्ष अनेक विधियों का उल्लेख किया जिनके माध्यम से उक्त अवस्था को प्राप्त हुआ जा सकता है. 


भैरव जी शिव और दुर्गा के भक्त हैं व इनका चरित्र बहुत ही सौम्य, सात्विक और साहसिक माना गया है न की डर उत्पन्न करने वाला इनका कार्य है सुरक्षा करना और कमजोरों को साहस देना व समाज को सही मार्ग देना. 


1)-लोहबान, गूगल, कपूर, तुलसी, नीम, सरसों के पत्ते मिक्स करके सुबह-शाम घर में धूनी दें।


2)-भैरू जी के मंदिर में इमरती व मदिरा का भोग लगाएं।


3)-भैरू मंदिर में उड़द व सिद्ध एकाक्षी श्रीफल भैरू बाबा के समक्ष मन्नत मांग कर चढ़ाएं।


4)-काले कुत्ते को इमरती खिलाएं व कच्चा दूध पिलाएं।


5)-शुभ कामों में बार-बार बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार के दिन भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ाएं और बटुक भैरव स्तोत्र का एक पाठ करें।


6)-महाकाल भैरव मंदिर में चढ़ाए गए काले धागे को गले या बाजू में बांधने से भूत-प्रेत और जादू-टोने का असर नहीं होता।वो मत्रित्र होना चाहिये


7)-रोली, सिन्दूर, रक्तचन्दन का चूर्ण, लाल फूल, गुड़, उड़द का बड़ा, धान का लावा, ईख का रस, तिल का तेल, लोहबान, लाल वस्त्र, भुना केला, सरसों का तेल भैरव जी की प्रिय वस्तुएं हैं। इन्हें भैरव जी पर अर्पित करने से मुंह मांगा फल प्राप्त किया जा सकता है।


8)-प्रतिदिन भैरव मंदिर की आठ बार प्रदक्षिणा करने से पापों का नाश होता है।


9)-भगवान भैरव का वाहन कुत्ता है इसलिए कुत्ते की भी पूजा की जाती है। कहते हैं कि अगर कुत्ता काले रंग का हो तो पूजा का माहात्म्य और बढ़ जाता है। कुछ भक्त तो उसे प्रसन्न करने के लिए दूध पिलाते हैं और मिठाई खिलाते हैं।


सभी प्रकार की तंत्र बाधाओं के लिए ये प्रयोग है,.


अमावस्या, कृष्ण पक्ष मे अष्टमी/ त्रयोदशी/चतुर्दशी  या सावन माह की किसी भी रात्रि करें|


अपने सामने एक सूखा नारियल , एक कपूर की डली , 11 लौंग 11 इलायची, 1 डली लोबान या धुप रखें |

सरसों के तेल का दीपक जलाएं |


हाथ में नारियल लेकर अपनी मनोकामना बोलें | नारियल सामने रखें |


दक्षिण दिशा कीओर देखकर इस मन्त्र का 108 बार जाप करें |


श्री बटुक भैरव मंत्र,...


 ""ऊं ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं""


बटुक भैरव कवच || 


ॐ सहस्त्रारे महाचक्रे कर्पूरधवले गुरुः ।


पातु मां बटुको देवो भैरवः सर्वकर्मसु ॥


पूर्वस्यामसितांगो मां दिशि रक्षतु सर्वदा ।


आग्नेयां च रुरुः पातु दक्षिणे चण्ड भैरवः ॥


नैॠत्यां क्रोधनः पातु उन्मत्तः पातु पश्चिमे ।


वायव्यां मां कपाली च नित्यं पायात् सुरेश्वरः ॥


भीषणो भैरवः पातु उत्तरास्यां तु सर्वदा ।


संहार भैरवः पायादीशान्यां च महेश्वरः ॥


ऊर्ध्वं पातु विधाता च पाताले नन्दको विभुः ।


सद्योजातस्तु मां पायात् सर्वतो देवसेवितः ॥


रामदेवो वनान्ते च वने घोरस्तथावतु ।


जले तत्पुरुषः पातु स्थले ईशान एव च ॥


डाकिनी पुत्रकः पातु पुत्रान् में सर्वतः प्रभुः ।


हाकिनी पुत्रकः पातु दारास्तु लाकिनी सुतः ॥


पातु शाकिनिका पुत्रः सैन्यं वै कालभैरवः ।


मालिनी पुत्रकः पातु पशूनश्वान् गंजास्तथा ॥


महाकालोऽवतु क्षेत्रं श्रियं मे सर्वतो गिरा ।


वाद्यम् वाद्यप्रियः पातु भैरवो नित्यसम्पदा


..जय श्री महाकाल.


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किसी भी प्रकार की कोई भी बाधा आ रही हूं तो करें यह उपाय तुरंत समाधान होगा

 






किसी भी प्रकार की कोई भी बाधा आ रही हूं तो करें यह उपाय तुरंत समाधान होगा 


सर्व बाधा नाशक मंत्र:---


राम नाम लेकर हनुमान चले,कहा चले चौकी बिठाने चले,

चौकी बिठाके रात की विद्या दिन की विद्या चारो प्रहर की विद्या काटे हनुमान जती,

मंत्र बाँध तंत्र बाँध जन्त्र बाँध रगड के बाँध,

मेरी आण मेरे गुरू की आण,छु वाचापुरी ll

 


मंत्र का रोज मंगलवार से 108 बार जाप 21 दिन करना है |


.मंत्र सिद्ध  हो जाएगा |  विधि पूर्ण होने के पश्चात  हनुमान जी को रोट या लड्डू का भोग लगाएं  गाय को चारा खिलाएं | फिर किसी  बभुत पर मंत्र को 11 बार पढकर 3 फुंक लगाये |


अब बभुत को जिसपर तंत्र बाधा हो उसके माथे पर लगा दे तो पीडित के कष्ट दुर हो जायेगा |


इस मंत्र से चौकी भी लगती है,बाधा भी कटती है और बंधन भी लगाया जाता है |


यह हनुमान जी का मंत्र बहुत ही चमत्कारिक मंत्र है |


इस मंत्र से झाडा़ भी लगा सकते है और पानी मे पढकर भी दिया जा सकता है |


 यह उपाय परम वीर हनुमान जी का बहुत ही सिद्ध और तांत्रिक उपाय हैं अतः इसे करने से पूर्व एक बार


 

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जन्म  कुंडली  देखने और समाधान बताने  की


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Sunday, October 25, 2020

दुर्लभ बगला-प्रत्यंगिरा कवच


 




दुर्लभ बगला-प्रत्यंगिरा कवच


मन्त्राभ्यासेन योगेन ज्ञानं ज्ञानाय कल्पते।

न योगेन बिना मंत्रो न मन्त्रेण बिना ही सः।।

द्वायोर्भ्यास संयोगो ब्रह्मसंसिद्धि कारणं ।।


अर्थात मंत्र और उसके अभ्यासरूपी योग से ज्ञान की प्राप्ति होती है। मंत्र के बिना योग के बिना मंत्र नहीं सधते। दोनों के अभ्यास में निपुर्णता से ही सभी सिद्धि मिलती है।


खैर अब बगलामुखी साधना से पूर्व की जाने वाली दिग्बन्धन सब को ज्ञात हो इसके लिए वो विधि दे रहा हूँ

सभी और अक्षत फेकते हुवे और निम्न देवियों की कल्पना अपनी चारो और करे की यह रक्षा कर रहे हैं


ॐ ऐं ह्लीं श्रीं श्यामा माम् पूर्वतः पातु,

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं आग्नेयां पातु तारिणी।।

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं महाविद्या दक्षिणे पातु,

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं नैऋत्यां षोडशी तथा।।

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं भुवनेशी पश्चिमायाम,

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं वायव्यां बगलामुखी।।

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं उत्तरे छिन्नमस्ता च,

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं ऐश्यान्याम धूमावती तथा।।

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं उर्ध्व तु, कमला पातु

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं अन्तरिक्षं सर्वदेवताः।।

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं अधस्ताच्चैव मातंगी,

ॐ ऐं ह्लीं श्रीं सर्वदिङ्गबगलामुखी।।

।।इति दिग बंधन।।


दुर्लभ बगला-प्रत्यंगिरा कवच


कई भाइयो के मन मे इश दुर्लभ प्रयोग को सिद्ध करने की लालशा भी जागृत हुवी होगी....यहाँ पर छिन्नमस्ता की उस प्रत्यंगिरा कवच तो नही दे रहा हूँ (अत्यंत ही विनाशक होने के कारण और इसका Misuse होने की chances बहुत हैं ) पर वैसा ही प्रयोग बगला-प्रत्यंगिरा दे रहा हूँ जिससे की हर व्यक्ति इस दुर्लभ की अगर कही व्यापार हो तो पूर्ण प्रतिकार कर सके...पर यह प्रयोग भी अत्यंत ही उग्र है...तसर्थ सभी साधकों को निवेदन करता हूँ की अपनी सूझ-बूझ और विवेक से इस प्रयोग को संपन्न करें और करने से पूर्व अपने  गुरुदेव को सूचित करें। उनसे आज्ञा ले , 


इस प्रयोग को करने से पूर्व भगवान् शिव की इस वाणी को अपने मनमे अवश्य गाढ़लें ...


“मूर्खेण तु कृते तंत्रे स्वस्मिन्नेव समापतेत् ।


तस्माद्रक्ष्यः सदात्मा वै प्रत्यङ्गिरा नक्वचिच्चरेत ।।


न देयं तस्य मुर्खाणां यः संपूर्ण कुल विनाश कारणं


कथनम् मम नान्यथा ।।“


अर्थात मूर्खो द्वारा प्रत्यंगिरा का प्रयोग करने से उस पर ही उलटा प्रभाव होता है और यह पूर्णतः निश्चित होता है। अतः स्वार्थ और लोभादी से ग्रसित मुर्ख को कभी भी इन प्रयोगों से मजाक नही करना चाहिए। इससे ना केवल अपना


बल्कि पुरे कुल का समूल विनाश होता है और मेरे इस कथन में संसय न करो।


1) विनियोग


अस्य श्री बगलाप्रत्यंगिरामन्त्रस्य नारद ऋषिस्त्रिष्टुप छन्दः प्रत्यंगिरा देवता ह्लीं बीजं, हूं शक्तिः ह्रीं कीलकम् ह्लीं ह्लीं ह्लीं प्रत्यंगिरा मम शत्रुविनाशे विनियोगः ।


2) ||ॐ प्रत्यंगिरायै नमः प्रत्यांगिरे सकलकामान् साधय मम रक्षा कुरू कुरू सर्वान् शत्रुन् खादय खादय मारय मारय घातय घातय ॐ ह्रीं फट् स्वाहा ||


ॐ भ्रामरी स्तंभिनि देवी क्षोभिणि मोहिनी तथा ।

संहारिणी द्राविणि च जृम्भिणी रौद्ररूपिणि ।।

इत्यष्टौ शक्तयो देवी शत्रु पक्षे नियोजिताः ।

धारयेत् कण्ठदेशे च सर्वशत्रु विनाशिनीः ।।


ॐ ह्लीं भ्रामरी मम शत्रुन् भ्रामय भ्रामय ॐ ह्लीं स्वाहा।।

ॐ ह्लीं स्तंभिनि मम शत्रुन् स्तम्भय स्तम्भय ॐ ह्लीं स्वाहा।।

ॐ ह्लीं क्षोभिणि मम शत्रुन् क्षोभय क्षोभय ॐ ह्लीं स्वाहा।।

ॐ ह्लीं मोहिनी मम शत्रुन् मोहय मोहय ॐ ह्लीं स्वाहा।।

ॐ ह्लीं संहारिणी मम शत्रुन् संहारय संहारय ॐ ह्लीं स्वाहा।।

ॐ ह्लीं द्राविणि मम शत्रुन् द्रावय द्रावय ॐ ह्लीं स्वाहा।।

ॐ ह्लीं जृम्भिणी मम शत्रुन् जृम्भय जृम्भय ॐ ह्लीं स्वाहा।।

ॐ ह्लीं रौद्रि मम शत्रुन् संतापय संतापय ॐ ह्लीं स्वाहा।।


इयं विद्या महाविद्या सर्वशत्रु निवारिणी ।

धारिता साधकेन्द्रस्य सर्वान दुष्टान् विनाशयेत् ।।

त्रिसन्ध्यामेकसंध्यं वा यः पठेत्स्थिर मानसः ।

न तस्य दुर्लभं लोके कल्पवृक्ष इव स्थितः ।।

यं यं स्पृशति हस्तेन यं यं पश्यति चक्षुषाः ।

स एव दासतां याति सारात्सारमिमं मनुं ।।


चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


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बात शुक्र ग़ह और बहुत खूबसूरत दिखने वाली स्फटिक की माला की


 






बात शुक्र ग़ह और बहुत खूबसूरत दिखने वाली स्फटिक की माला की 


मित्रो शुक्र ग़ह जिस इंसान का अछा होता है उसे जीवन में धन,वैभव,सुख साधन की अनेक वस्तुओ का सुख , प्रेमी प्रेमिका पति पत्नी का सुख , चेहरे पर बहुत खूबसूरत चमक ये सब सुख उसको प्राप्त होते है 


जो इंसान शुक्र ग़ह को मजबूत करले उसे ऊपर लिखे सब सुख प्राप्त होते है शुक्र को मजबूत करने के लिए सबसे सरल उपाय है हाथ में शुक्र वार को ब्रेसलेट की तरहा जहा कंगन पहने जाते है वहा स्फटिक की माला पहन ले आपको जीवन बहुत जल्दी ऊपर लिखे सुख प्राप्त होंगे 


स्फटिक की माला धारण करने के लाभ 


(1) शुक्र ग़ह मजबूत होता है 


(2) जीवन में धन ,वैभव ,समृद्धि प्राप्त होती है 


(3) प्रेमी प्रेमिका पति पत्नी को वश में करके प्यार को बहुत तेज़ गति से बढ़ाता है


(4) वीर्य को बढ़के चेहरे पर खूबसूरती , आकर्षण पैदा करके वशीकरण करता है


(5) सुब्हे से रात तक काम करके न थकने वाली चुस्ती फुर्ती देता है 


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Saturday, October 24, 2020

महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि


 





।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।।


इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पहले सुरक्षा घेरे से बाहर न आये । इस मंत्र को प्रतिदिन 11 माला जाप करे । माला कोई भी ले सकते है ।


चौमुखा तेल का दीपक जलाए और अंत में 11 आहुतियाँ बकरे की कलेजी की और गुग्गल की अग्नि में दे । अग्नि गोबर के कंडे की होनी चाहिए । यह क्रिया आपको 41 दिन तक करनी है । इस साधना में भैरव जी प्रत्यक्ष दर्शन देते है । साधना के दौरान ब्रह्मचारी रहे, ब्रह्मचर्य खंडित हो जाने पर व्यक्ति साधना का फल कम हो जाता है ।


।। प्रयोग विधि ।।


जब भी कोई कार्य करवाना हो तो इस मंत्र की 1 माला जप करे और अग्नि में 11 आहुतियाँ देकर भैरव जी से प्रार्थना करे , कार्य सिद्ध हो जायेगा अथवा कपूर का काजल अपनी हथेली पर लगाये और हथेली को देखते हुए मंत्र का जाप करे , भैरव जी हथेली में दर्शन देंगे और जो भी कार्य कहा जायेगा , वह कर देंगे ।


।। मंत्र ।।


।। काला भैरो काला बाण

खप्पर खाए चढ़े समान ,

जिन्दे को मारे , मुए की खबर ले आये

कढ कलेजा मुख विच पाए

चोटी मार तली ते आये

ता काला भैरो कहलाये ।।


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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...