Thursday, July 9, 2020

जानिए कैसे मिलती है भविष्य को देख पाने की शक्ति






जानिए कैसे मिलती है भविष्य को देख पाने की शक्ति


आपने देखा होगा कि कई लोग ऐसे होते हैं जिनके भीतर भांपने की शक्ति बहुत ज्यादा होती है। ऐसे व्यक्ति किसी भी खतरे या अवसर की पहचान बेहद शीघ्रता से कर लेते हैं। इन्हें बहुत पहले ही आने वाले भविष्य का अंदाज़ा हो जाता है।

 ऐसे इंसान कभी भी धोखा नहीं खाते और जो भी इन्हें धोखा देने की चेष्टा करता है, उसे बहुत नुकसान झेलना पड़ता है।



ये तो रही तथ्य की बात। अब जानते हैं कि ऐसा क्यों और कैसे होता है कि एक इंसान के भीतर भांपने की शक्ति पैदा हो जाती है। यानि ऐसी अतिंद्रिय शक्ति जिसके आधार पर वह आने वाले भविष्य का अंदाज़ा बहुत पहले से लगा लेता है।



वस्तुतः अतिंद्रिय शक्ति के लिए कुण्डली के कुछ खास भाव बेहद जिम्मेदार होते हैं। इसमें राहु व मंगल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। किंतु केवल राहु व मंगल ही नहीं वरन् इनकी कुण्डली के किन भावों में मौज़ूदगी है, ये ज्यादा महत्वपूर्ण है।



ध्यान रहे कि कुण्डली में यदि मंगल पांचवें भाव में मौज़ूद है तथा राहु लग्न में है तो ऐसा इंसान दूरद्रष्टा होता है।

 इसका अर्थ है कि ऐसे व्यक्ति को भविष्य का अंदाज़ा काफी पहले से हो जाता है और आने वाले खतरे और लाभ को भी भांप जाता है। इसके अलावा ये भी ध्यान रहे कि ऐसा व्यक्ति किसी के भी चरित्र का सटीक अनुमान लगा पाने में सक्षम होता है।

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राजगुरु जी

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माँ बगलामुखी की साधना करने के लिए सबसे पहले एकाक्षरी मंत्र ह्ल्रीं की दीक्षा अपने गुरुदेव के मुख से प्राप्त करें।






माँ बगलामुखी की साधना करने के  लिए सबसे पहले एकाक्षरी मंत्र ह्ल्रीं की दीक्षा अपने गुरुदेव के मुख से प्राप्त करें।


 एकाक्षरी मंत्र के एक लाख दस हजार जप करने के पश्चात क्रमशः चतुराक्षरी, अष्टाक्षरी , उन्नीसाक्षरी, छत्तीसाक्षरी (मूल मंत्र ) आदि मंत्रो की दीक्षा अपने गुरुदेव से प्राप्त करें एवं गुरु आदेशानुसार मंत्रो का जाप संपूर्ण करें।

यदि एक बार आपने  यह साधना पूर्ण कर ली तो इस संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जिसे आप प्राप्त नहीं कर सकते। 

यदि आप भोग विलास के  पीछे दौड़ेंगे तो आपकी यह दौड़ कभी भी समाप्त नहीं होगी। लेकिन यदि आपका लक्ष्य प्रभु प्राप्ति होगा तो भोग विलास स्वयं ही आपके दास बनकर आपकी सेवा करेंगे।

  मानव जन्म बड़ी  मुश्किल से प्राप्त होता है। इसे व्यर्थ ना गँवाये। हम सभी जानते है कि हम इस संसार से कुछ भी साथ लेकर नहीं जायेगे।

 यदि आपने यहाँ करोड़ो रुपये भी जोड़ लिए तो भी वो व्यर्थ ही हैं जब तक आप उस परमपिता को प्राप्त नहीं कर लेते। उस परमात्मा कि शरण में जो सुख है वह सुख इस संसार के किसी भी भोग विलास में नहीं है  

कौन है बगलामुखी मां..???

मां बगलामुखी जी आठवी महाविद्या हैं। इनका प्रकाट्य स्थल गुजरात के सौरापट क्षेत्र में माना जाता है। हल्दी रंग के जल से इनका प्रकट होना बताया जाता है। इसलिए, हल्दी का रंग पीला होने से इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहते हैं। इनके कई स्वरूप हैं।

 इस महाविद्या की उपासना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि की प्राप्ति होती है। इनके भैरव महाकाल हैं।माँ बगलामुखी स्तंभव शक्ति की अधिष्ठात्री हैं अर्थात यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं. 

माँ बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है. देवी बगलामुखी का रंग स्वर्ण के समान पीला होता है अत: साधक को माता बगलामुखी की आराधना करते समय पीले वस्त्र ही धारण करना चाहिए !

देवी बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं यह स्तम्भन की देवी हैं. संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश हैं माता बगलामुखी शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है. इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है.

 बगला शब्द संस्कृत भाषा के वल्गा का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ होता है दुलहन है अत: मां के अलौकिक सौंदर्य और स्तंभन शक्ति के कारण ही इन्हें यह नाम प्राप्त है.

बगलामुखी देवी रत्नजडित सिहासन पर विराजती होती हैं रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो शत्रुओं का नाश करती हैं. देवी के भक्त को तीनो लोकों में कोई नहीं हरा पाता, वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाता है पीले फूल और नारियल चढाने से देवी प्रसन्न होतीं हैं.

 देवी को पीली हल्दी के ढेर पर दीप-दान करें, देवी की मूर्ति पर पीला वस्त्र चढाने से बड़ी से बड़ी बाधा भी नष्ट होती है, बगलामुखी देवी के मन्त्रों से दुखों का नाश होता है.पीताम्बरा की उपासना से मुकदमा में विजयी प्राप्त होती है।

 शत्रु पराजित होते हैं। रोगों का नाश होता है। साधकों को वाकसिद्धि हो जाती है। इन्हें पीले रंग का फूल, बेसन एवं घी का प्रसाद, केला, रात रानी फूल विशेष प्रिय है। पीताम्बरा का प्रसिद्ध मंदिर मध्यप्रदेश के दतिया और नलखेडा(जिला-शाजापुर) और आसाम के कामाख्या में है।

सामान्य बगलामुखी मंत्र —–

ऊँ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।

माँ बगलामुखी की साधना करने वाला साधक सर्वशक्ति सम्पन्न हो जाता है. यह मंत्र विधा अपना कार्य करने में सक्षम हैं. मंत्र का सही विधि द्वारा जाप किया जाए तो निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होती है.

 बगलामुखी मंत्र के जाप से पूर्व बगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए. देवी बगलामुखी पूजा अर्चना सर्वशक्ति सम्पन्न बनाने वाली सभी शत्रुओं का शमन करने वाली तथा मुकदमों में विजय दिलाने वाली होती है.

जानिए श्री सिद्ध बगलामुखी देवी महामंत्र को—–

ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम:

इस मंत्र से काम्य प्रयोग भी संपन्न किये जाते हैं जैसे —-
1. मधु. शर्करा युक्त तिलों से होम करने पर मनुष्य वश में होते है।

2. मधु. घृत तथा शर्करा युक्त लवण से होम करने पर आकर्षण होता है।

3. तेल युक्त नीम के पत्तों से होम करने पर विद्वेषण होता है।

4. हरिताल, नमक तथा हल्दी से होम करने पर शत्रुओं का स्तम्भन होता है।

केसे करें मां बगलामुखी पूजन…??

माँ बगलामुखी की पूजा हेतु इस दिन प्रात: काल उठकर नित्य कर्मों में निवृत्त होकर, पीले वस्त्र धारण करने चाहिए.

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

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Wednesday, July 8, 2020

खजाना या गड़ा धन मिलने से पहले कुछ ऐसा होने लगता है : ध्यान रखें






खजाना या गड़ा धन मिलने से पहले कुछ ऐसा होने लगता है   :  ध्यान रखें 


ऐसा माना जाता है कि खजाना हर किसी व्यक्ति को नहीं मिल सकता। जिसकी किस्मत में अचानक अपार धन प्राप्त करने के योग हैं वहीं गुप्त खजाना प्राप्त कर सकता है। अचानक धन लाभ होने से पहले आपको किस्मत के इशारे मिलते हैं।

ये इशारे सपने में और खुली आखों से या आसपास होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं के रूप में महसुस होते हैं। धन लाभ के लिए कई तरह के संकेत होते हैं। रावण संहिता के अनुसार सपने, शगुन और स्वर विज्ञान उनमें से एक है।

खास तौर से किन लोगों को महसुस होता है गड़ा धन-
सपने में कुआं देखना भी गड़ा खजाना मिलने का एक संकेत हैं। अगर जमीन में छुपा खजाना आपको मिलने वाला है तो अक्सर आपको सपने में कोई गड्डा, छोटा कुआं या खाई दिखने लगेगी। जमीन में छुपा खजाना अक्सर साफ दिल वाले लोगों को ही मिलता है या उन लोगों को मिलता है जिनके मन में कोई छल, कपट नहीं होता।

कुछ लोगों को पितृ देवता का इष्ट होता है ऐसे लोगों को सपने में अक्सर सफेद सांप या दीपक जलते हुए दिखाई देते हैं और उन लोगों को गड़ा धन या खजाना अचानक मिल जाता है या महसुस होता है।

कुछ खास लोग होते हैं जिन्हे गड़ा धन या खजाना महसुस हो जाता है, ये वो लोग होते हैं जो पैर की तरफ से जन्म लेते हैं यानी जिनके जन्म के समय पहले सिर बाहर न आते हुए पैर बाहर आते हैं।

कैसे निकालें खजाना या गड़ा धन :
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गड़ा धन निकानले के लिए सबसे पहले निश्चित करें कि किस जगह धन है। उस जगह को पहले पवित्र करें और उस स्थान की पूजा करें। पुराणों के अनुसार ऐसी जगहों पर विशेष शक्तियों का पहरा होता है। गड़े धन या खजाने की रक्षा नाग लोक करता है। नाग योनी पितृ देवताओं की होती है। पितृ ही गड़े धन की रक्षा नाग के रूप में करते हैं। इस खजानें को बिना पितृ की आज्ञा से नहीं निकालना चाहिए। पहले पितृ देवताओं को खुश करना चाहिए। इसके लिए उनके निमित्त हवन और दान कर के धन
सही उपयोग का संकल्प लेना चाहिए। गड़े धन का बड़ा हिस्सा धर्म-कर्म, दान और पितृ पूजा में लगाने का संकल्प लेना चाहिए।

शुभ तिथि और वार को या किसी खास पर्व, ग्रहों के शुभ संयोग या अपनी कुंडली के अनुसार शुभ दिन निकलवाकर उस दिन गड़ा धन निकालना चाहिए। धन निकालन के पहले होने वाली पूजा भी शुभ तिथि या पितृ की तिथि यानी पंचमी, अमावस्या या पूर्णिमा पर पूजा पाठ करवाना चाहिए। पूजा करवाने के बाद पितृ आपको सपने में दर्शन देते हैं अगर सपने में पितृ देव आपको धन निकालने की आज्ञा दें तो ही धन निकालना चाहिए ।

कहां मिलता है खजाना:

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रावण संहिता और वाराह संहिता के अनुसार गुप्त खजाना कहां छिपा होता है? यह मालूम करने के कई उपाय बताए गए हैं। जिस भी स्थान पर अपार धन, सोना-चांदी, हीरे-मोती छिपे या दबे होते हैं वहां सफेद नाग या कोई बहुत पुराना नाग अवश्य दिखाई देता है। इसके अलावा कहीं-कहीं नागों के झूंड भी ऐसे गुप्त खजानों की रक्षा करते हैं। ऐसे नागों का दिखाई देना ही इस बात की ओर इशारा करता है कि उस क्षेत्र में कहीं खजाना दबा हो सकता है।

कईं साल पुराने घरों में खजाना छुपा हो सकता है। ऐसे घरों में जो पितृ के समय से ज्यों के त्यों पड़ें हों या जिन घरो में सालों से कोई खुदाई या नव निर्माण नहीं किया गया हो ऐसी जगहों पर खजाना या गड़ा धन होता है।
पूराने किलें जहां कभी राजा-महाराजा रहा करते थे। खंडहरों में भी खजाना छुपा होता है क्योंकि वहां पर शक्तियों को परेशान करने वाला कोई नहीं होता और इंसानो से दुर इनकी अपनी अलग दुनिया होती है।

जंगलों में भी ऐसे खजाने मिलते हैं क्योंकि पहले के लोग ज्यादातर समय युद्ध में और जंगलों में बीताते थे। धन की रक्षा के लिए वो उसे जमीन में छुपा दिया करते थें और मौत के बाद सांप के रूप में वो उसी जगह बस जाते हैं और धन की रक्ष करते हैं।

कैसे सपने बताते हैं खजाने के बारे में

सांप या नाग :

- अगर आपको सपने में सफेद सांप दिखाई दे तों समझिए आपको अचानक धन लाभ होने वाला है। नाग पितृ देवता के रूप में विचरण करते हैं और योग्य व्यक्ति को सपने में आकर दर्शन देते हैं।

- सपने में सफेद नाग-नागिन का जोड़ा जिस घर में या जिस स्थान पर दिखें उस जगह पर आपके पूर्वजों द्वारा रखा गया गड़ा धन होता है।

फूल-

- अगर सपने में फूल दिखाई दे तो आपको अचानक धन लाभ, खजाना या कहीं से गड़ा धन मिलने का संकेत होता है।

- रावण संहिता के अनुसार आपको सपने में दिखने वाला फूल अगर कमल हो तो ये अचानक कहीं से आपको बड़ा फायदा होने का संकेत है।

- अगर आप सपने में में इन्द्र धनुष के साथ कमल को देखते हैं यानी इन्द्र धनुष दिखे और कमल का फूल आपके हाथ हो तो आने वाले 45 दिनों में ही आपको इस सपने का फल देखने को मिल जाता है। अगर आप सपने में कमल के पत्ते पर भोजन करते हुए खुद को देखते हैं तो आपको आने वाले कुछ ही दिनों में छुपा हुआ धन लाभ होने वाला है।

आभूषण और मंगल चिन्ह

अगर सपने में कलश, शंख और सोने के गहने दिखे तो आपको अचानक धन लाभ होगा। रावण संहिता के अनुसार कलश, शंख और गहने आदि मंगल चीजे सपने तभी आती है जब आप पर लक्ष्मी जी खुश होती है।

पौराणिक ग्रंथों और संहिताओं के अनुसार कुछ सपने ऐसे होते हैं जो जैसे के तैसे सच हो जाते हैं।

- अगर आपको सपने में कोई कन्या जो खुद सोने के आभूषण पहने हुए हो और वो आपको सोने का सिक्का दे तो आने वाले कुछ ही दिनों में आपको इस सपने का फल मिल जाएगा।

- कलश सिर पर रखे हुए अगर कोई कन्या सपने में आपको सिक्का दे या किसी दिशा में इशारा करें तो उस दिशा में आपको गड़ा धन मिलेगा।

हरे पेड़ या पीपल-

- अगर आप सपने में पिपल पर कच्च दुध चढ़ा रहे हैं तो आपको पुर्वजों का धन मिलेगा अगर आपके निवार स्थान वाला पिपल हो तो आपको वहीं धन लाभ होगा लेकिन पिपल नहीं कटवाना चाहिए इससे परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

- अगर आपको सपने में पिपल का पेड़ या उस पेड़ पर कोई सफेद कपड़ें में बैठकर आपको किसी दिशा की तरफ इशारा करे तो आपको वहां से धन लाभ होगा।

पानी-

जिस घर, किले या खंडहर में धन छुपा होता है सपने में उसी जगह पर पानी भरा हुआ दिखाई देता है।

उस पानी में खुद को बहते हुए देखना या उस जगह सिर्फ पानी को बहते देखना खजाना या गड़ा धन मिलने का संकेत हैं।

सपने में जिस जगह पर पानी में कमल, शंख और कलश बहते दिखाई दें तो समझें आपको उस जगह से गड़ा धन प्राप्त होने वाला है।

पूराने मंदिर-

अगर आपको खजाना मिलने वाला है तो आपको ऐसे पूराने मंदिरो के सपने आएंगे जो

कई साल पूराने हों। ऐसे मन्दिरों में आपको घंटीयां बजती हुई सुनाई देंगी। ऐसे मन्दिर शिव या नाग देवता के हों तो आपको धन लाभ होने के योग बनते हैं।

- आपको पूरानी भगवान की मुर्तियां या नाग की मुर्तियां जब दिखने लगे तो समझना चाहिए कि धन लाभ होने वाला है।

- ऐसे सपने खास तौर पर पंचमी, अमावस्या या पूर्णिमा को दिखाई दे तो समझना चाहिए सपने का फल जल्दी ही मिलने वाला है।

सफेद हाथी-

अगर आपको सपने में ऐरावत या सफेद हाथी का दर्शन हो तो आपको अचानक धन लाभ होगा। सफेद हाथी आपको जिस जगह दिखे उस जगह ही गड़ा धन होना जानना चाहिए।

सपने में हाथी दांत से बनी चिजें धारण करना भी शुभ स्वपन होता है। ऐसा सपना तभी आता है जब आपको गड़ा धन या अचानक कहीं से धन लाभ के योग होते हैं।

मल और गाली गलौज युक्त झगड़ा-

अगर सपने में आप मल देखें या खुद को शरीर पर मल लगाते देखें तो आपको अचानक धन लाभ होगा।

सपने में खुद को ऐसी जगह देखना जहां मल ही मल हो, ये भी धन लाभ का सपना है।

अगर आप सपने में खुद को गाली-गलौज युक्त लड़ाई में देख रहे हैं, लेकिन सुबह तक गाली-गलौज आपको याद न रहें तो ये भी आपका रूका पैसा आने का संकेत होता है।

नेवला-

रावण संहिता के अनुसार नेवला धन संकेत देने वाला जीव है। अगर आप किसी सुनसान जगह हों या ऐसे जंगल में हो जहां नेवेले अधिक हो तो आपको उस जगह से गड़ा धन जरूर मिलेगा।

अगर किसी पूराने मंदिर, खंडहर या पुराने घर में हो और वहां पर नेवला आपके आसपास रहे तो वहां आस-पास धन गड़ा हुआ समझना चाहिए।

उल्लु-

पक्षी तंत्र के अनुसार उल्लू धन के संकेत देने वाला होता है। जिन जगहों पर गड़ा धन या खजाना होता है। वहां उल्लूूू पाए जाते हैं। तंत्र शास्त्रों में उल्लू को धन की रक्षा करने वाला माना जाता है। उल्लू जिस घर या मंदिर में रहने लग जाए तो समझे उस जगह गड़ा धन या खजाना होगा और जहां उल्लू रहने लग जाते हैं ऐसी जगह जल्दी ही सुनसान हो जाती है

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अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच









अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच


चेहरे पर निखार, आकर्षक शरीर और एक सेहतमंद शरीर की कामना भला आज कौन नहीं करता है। हर कोई आकर्षक नज़र आना चाहता है। तो इस मनोकामना को पूरा  करने के लिए व्यक्ति आमतौर पर अप्सरा वशीकरण मंत्र  और साधना का इस्तेमाल करता है, जिसे काफी कारगर व असरदार भी माना गया है। 

इसके बारे मे ये भी कहां गया है कि अप्सरा साधना की मदद से अप्सरा के जैसा  सौंदर्य व समृद्धि प्राप्त किया जा सकता है और ऐसा नहीं है की सिर्फ इसका इस्तेमाल स्त्रिया ही कर सकती है, क्यूकी सुंदर शरीर और खूबसूरत चेहरे की लालसा पुरुष भी रखता है।

तो अब हम आपको बताते है अप्सरा साधना के बारे मे की किस प्रकार आप इसे कर सकते है। जैसा की हमेशा से यह मान्यता रही है कि अप्सराओ को गुलाब, चमेली, रजनीगंधा और रातरानी जैसे फूलों की सुगंध काफी पसंद आती है। 

अप्सरा साधना करने के दौरान उस व्यक्ति को खास तौर पर अपनी यौन भावनाओं पर संयम रखना पड़ता है। ऐसा न कर पाने से साधना सिद्ध नहीं हो पाती है। 

साधक पूरे विश्वास और संकल्प व मंत्र की सहायता से अगर इस साधना को करता है, तो माना गया है कि अप्सरा प्रकट होती है और उस समय वो साधक उसे गुलाब के साथ इत्र भेंट करता है। साथ ही उसे दूध से बनी मिठाई व पान आदि भेंट देता है और उससे  जीवन भर साथ रहने का वचन लेता है।

 इन अप्सराओ मे चमत्कारिक शक्तिया होती है जो साधक की जिंदगी को सुंदर बनाने की योग्यता रखती है।
अब हम आपको रंभा अप्सरा साधना के बारे मे जानकारी देते हुए बताएँगे की इस साधना को करने के लिए आपको इस मंत्र का जप करना होता है, जोकि इस प्रकार है, 

मंत्र:

ऊँ दिव्यायै नमः! ऊँ वागीश्वरायै नमः!

ऊँ सौंदर्या प्रियायै नमः! ऊँ यौवन प्रियायै नमः!

ऊँ सौभाग्दायै नमः! ऊँ आरोग्यप्रदायै नमः!

 ऊँ प्राणप्रियायै नमः! ऊँ उजाश्वलायै नमः! ऊँ देवाप्रियायै  नमः!

 ऊँ ऐश्वर्याप्रदायै नमः! ऊँ धनदायै रम्भायै नमः!

बाकी साधना के जैसे इसमे भी साधक को पूजा-अर्चना के बाद  रम्भेत्किलन यंत्र के सामने बताए मंत्र का जप करना होता है। 

साधना हो जाने के बाद साधक की इक्छा पूर्ण होने के साथ उसके जीवन मे खुशियों आ जाती है।

अप्सरा साधना विधि को करने के लिए साधक के लिए जरूरी होता है कि वो कोई एक शांत जगह चुन ले। फिर उस जगह पर सफ़ेद रंग का एक कपड़ा बिछाकर, पीले चावल के इस्तेमाल से एक यंत्र का निर्माण करे। 

इसके बाद साधक के लिए जरूरी है कि वो अपने वस्त्र पर इत्र लगा ले जिससे वो  सुगन्धित हो जाये और मखमल को अपना आसन बनाए। 

केवल शुक्रवार के दिन, आधी रात को आप इस साधना करे। ध्यान जरूर रखे की साधना करते वक़्त आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो और फिर बनाए हुए यंत्र का पंचोपकर पूजन करे।

 जिस एकांत जगह या कमरे मे साधक बैठा है वो वहाँ गुलाब के इत्र का प्रयोग करे। आस-पास एक सुगन्धित माहोल बना ले।

 इन सबके बाद आप गुरु गणपति का ध्यान करके स्फटिक मणिमाला का मंत्र के साथ 51 जप करे। 

मंत्र:

 “ऊँ उर्वशी प्रियं वशं करी हुं! ऊँ ह्रीं उर्वशी अप्सराय आगच्छागच्छ स्वाहा!!” 

इस अनुष्ठान को आप कुल 7, 11 या 21 दिनों तक करे और आखिरी दिन 10 माल का जाप करे। बताए मंत्र के नीचे अपना नाम लिखकर उर्वशी माला की मदद से बताए मंत्र का 101 बार जप करे,

 मंत्र:  

“ऊँ ह्रीं उर्वशी मम प्रिय मम चित्तानुरंजन करि करि फट”।

अप्सरा वशीकरण साधना से जुड़े एक शाबर मंत्र के बारे मे भी हम आपको बताते है। जिसको करने के लिए जरूरी है की आप एक बाजोट पर लाल रंग का कपड़ा बिछा ले और उस पर एक चावल से ढेरी बना ले, जो कुम्कुम से रंगे हो।

 आप जिस आसान पर बैठे वो भी लाल रंग का ही हो। इसके बाद उन चावल पर “पुष्पदेहा आकर्षण सिद्धि यंत्र” स्‍थापित कर दे और स्फटिक की माला से मंत्र जाप करे।

 मंत्र: 

“ॐ आवे आवे शरमाती पुष्पदेहा प्रिया रुप आवे आवे हिली हिली मेरो कह्यौ करै,मनचिंतावे,कारज करे वेग से  आवे आवे,हर क्षण साथ रहे हिली हिली पुष्पदेहा अप्सरा फट् ॐ ”।

 शुक्रवार के दिन इस साधना को शुरू करे जो 7 दिनों तक चलती है। आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो इसका खास ध्यान रखे और मंत्र का रोज 11 माला जप करना होगा। बनाए हुए यंत्र पर रोज गुलाब का इत्र चढाये और 5 गुलाब भी चढा दे।

 घी का दीपक जला दे, जो साधना विधि के समय जलता रहे। आप जो धूप इस्तेमाल करे वो गुलाब का ही हो। जब मंत्र का जप किया जा रहा हो उस समय नजर  यंत्र की ओर होनी चाहिए। इसी यंत्र के माध्यम से साधक को अप्सरा से वचन प्राप्त करने का मंत्र प्राप्त होता है।

तो यकीन है की रूप-रंग व यौवन की चाहत रखने वाले लोगों के लिए ऊपर बताई गई बाते मददगार होंगी, जिनके उपयोग से साधक अपनी मनोकामना को पूर्ण कर सकता है।

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Tuesday, July 7, 2020

उर्वशी अप्सरा साधना





उर्वशी अप्सरा साधना


प्राचीन काल से ही भारतीय साधना पद्धति में सौन्दर्य की साधना करना भी एक आवश्यक गुण माना गया है।

 सौन्दर्य शब्द को लेकर के समाज में आज जो भी धारणा हो, उसके विषय में तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता, किंतु प्राचीन काल में ऋषियों के मन में सौन्दर्य को लेकर के न तो कोई द्वन्द्व था, न उनके मन में कोई ऐसी धारणा थी कि सौन्दर्य की उपासना अपने आपमें कोई अश्लील धारणा है ।

यही कारण है, कि प्राचीन ग्रंथों में सौन्दर्य का मूर्त रूप अप्सरा को
मान कर प्रकारान्तर से सौन्दर्य की ही उपासना करने का प्रयास किया है, क्योंकि सौन्दर्य नारी के माध्यम से अपने सर्वोतकृष्ट रूप में स्पष्ट हो सकता है ... और संसार की तीन अद्वितीय सुंदरियां मानी गई हैं, जिनके नाम उर्वशी, रम्भा, और मेनका हैं, इनमें भी उर्वशी का नाम सर्वोपरि है

 । ये सुंदर स्त्रियां देवताओं के राजा इन्द्र की सभा में अद्वितीय नृत्य और सुर्य के समान प्रखर सौन्दर्य रश्मियों से सबको अभिभूत करती रहती हैं।

उर्वशी के बारे में ग्रंथों में कहा गया है, कि वह चिरयौवना है, हजारों वर्ष बीतने पर भी वह 18 वर्ष की उम्र की युबती के समान अन्नहड़ मदमस्ति और यौवन रस से परिपूर्ण रहती है।

सारा शरीर एक अद्वितीय सुन्दरता से परिपूर्ण रहता है, जिसको देखकर व्यक्ति तो क्या, देवता भी ठगे रह जाते हैं।

विश्वामित्र संहिता के अनुसार गोरा अण्डाकार चेहरा, लम्बे और एडियों को छूते हुए घने श्यामल केश, जैसे कोई बादलों को घटा उमड़ आई हो, गौरा रंग ऐसा, कि जैसे स्वच्छ दुध में केसर मिला दी हो, बड़ी-बड़ी खजन पक्षी की तरह आखें जो हर क्षण
गहन जिज्ञासा लिए हुए इधर उधर देखती है, छोटी चुम्बक, सुंदर और गुलाबी होठ, आकर्षक चेहरा और अद्वितीय आाभा मे युक्त शरीर सब मिल कर एक ऐसा सौन्दर्य जो उंगली लगने पर मैला हो जाए ।

 ऐसी ही सौन्दर्य की सम्राजी उर्वशी संसार की अद्वितीय सौन्दर्य सम्राजञी है, जो अपने यौवन व सौन्दर्य के माध्यम मे पूरे संसार को मोहित किए हुए है ।

विश्वामित्र ने जब यह सुना कि उर्वशी इन्द्र के दरबार की उज्जवल सौन्दर्यमयी नृल्यांगना है जिसके नृत्य से मनुष्य तो क्या बहुता हुआ पानी भी ठिठक कर रुक जाता है, तो उन्होंने आज्ञा दी कि उर्वशी मेरे आश्रम में भी नृत्य करे।

 विश्वामित्र ने अपना संदेश इन्द्र तक पहुंचा दिया और इन्द्र ने हाथो - हाथ मना कर कहला दिया कि यह किसी भी प्रकार से सम्भव नहीं है। विश्वामित्र तो हठी योगी रहे हैं, उन्होंने मंत्र बल से उर्वशी को अपने आश्रम तुम्हें ठीक वैसा ही नृत्य मेरे शिष्यों के सामने इस आश्रम में करना है, जैसा इन्द्र की सभा में तुम करती हो।

"उर्वशी ने यौवन के नशे में चूर दम्भ से मना कर दिया और इठलाती हुई पुनः
इन्द्रलोक चली गई ।       
   
विश्वामित्र तिलमिला कर रह गए । उन्होंने उसी क्षण प्रतिज्ञा की कि मैं सर्वथा नये तंत्र की रचना करूंगा और तंत्र बल से इसे अपने आश्रम में बुलाऊंगा, एक बार नहीं जब भी चाहे नृत्य करवाऊंगा और इसी जिद्द और क्रोध का परिणाम हुआ 'उर्वशी तंत्र'।

किसी भी अप्सरा की साधना चार रूपी में की जा सकती है। मां, बहन, पत्नी और प्रेमिका के रूप में साधना सम्पन्न करना श्रेष्ठ माना गया है।

विश्वामित्र ने प्रेमिका रूप से तंत्र रचना की और इसी तंत्र के माध्यम से उ्वशी को अपने आश्रम में आने के लिए बाध्य किया और उसे अद्वितीय नृत्य करना पड़ा।

 गौरखनाथ ने भी इस साधना के माध्यम से चिरयौवन प्राप्त किया और गोरक्षपुर में उन्होंने हजारों शिष्यो के सामने सदेह उवशी को बुलाकर अद्वितीय नृत्य सम्पन्न करवाया।

 इतिहास साक्षी है कि स्वामी शंकराचार्य ने इसी साधना को सम्पन्न कर अपने शिष्य पदमपाद को अंतुलनीय वैभव का स्वामी बना दिया, यहाँ नहीं अपितु भंडन मिश्र से शास्त्रार्थ के दिनों में शंकराचार्य ने उर्वशी को तंत्र के माध्यम से उसे अपने सामने बुलाकर उससे काम कला की वे बारीकिया समझी जो सन्यासी होने की वजह से उनके लिए असंभव थी,

इसी साधना के बल पर आज से सौ साल पहले म्वामी विशुद्धानंद जी ने बनारस में नवमुण्डी आश्रम में अभिनव नृत्य कराकर अंग्रेजों को आश्चर्वचकित कर दिया था, और उस समय के तत्कालीन कलेक्टर ब्लासिम ने तो कहा था, कि मैंने अपनी जिन्दगी में ऐसी सुंदरी नहीं देखी, वह अचानक आई और जो नृत्य उसने किया वह आश्चर्यचकित करने वाला था।

उर्वशी साधना कोई भी साधक सम्पन्न कर सकता है। साश्त्र के अनुसार भी उर्वशी की साधना पत्नी का प्रेमिका के रूप में ही सम्पन्न करनी चाहिए।

साधना विधि

यह साधना 49 दिनों की है, किसी भी पूर्णमासी की रात्रि से यह साधना प्रारम्भ की जाती है, धर के किसी कोने में सफेद आसन बिछाकर उत्तर की तरक मुह कर बैठ जांए, सानने घी का अखण्ड दीपक प्रज्ज्वलित करें और स्वयं पानी में गुलाब का थोड़ा सा इत्र मिलाकर स्नान कर स्वच्छ सफ़ेद वर्त्र धारण कर आसन पर बेठ जाए, और सामने उ्वशी यंत्र और चित्र रखकर मोती की माला से मंत्र जप करे।

।। ॐ श्री क्ली आगच्छागच्छस्वाहा ।।

मंत्र जप समाप्ति के बाद उसी स्थान पर सो जाएं। इन 49 दिनों में वह न तो किसी से बात कर, और न कमरे से बाहर जा केवल शौच आदि क्रिया करने के लिए बाहर जा सकता है। सातवे दिन पक्का ही घुंगरुओ को मधुर आवाज सुनाई देती है,

 मगर साधक को चाहिए कि वह अविचलित भाव से मंत्र जप करता रहे। इक्कीसवे दिन बिल्कुल ऐसा लगेगा कि जैसे अपूर्व सी
सुगंध फैल गई है, इसके बाद नित्य ऐसी सुगन्ध और ऐसा आभास होगा। 36 वें दिन बिल्कुल ऐसा लगेगा कि जैसे कोई अद्वितीय सुन्दरी आसन के पास आकर बैठ गई है,

 मगर साधक अविचलित न हो और मंत्र जप करता रहे, 47 वें दिन साधक की परीक्षा आरम्भ होती है, और वह सशरीर उपस्थित होकर साधक की गोदी में बैठ जाती है, फिर भी साधक को चाहिए कि वह न तो विचलितहो और न कामोत्तेजक हो।

 49 वें दिन वह अपूर्व श्रृंगार कर साधक से सट कर बैठ
जाएगी और पूछेगी कि मेरे लिए क्या आज्ञा है, तब साधक कहे कि मेरी पत्नी बन प्रेमिका की तरह प्रसन्न करो, तब वह सिद्ध हो जाती है, और जीवन भर सुख, काम, द्रव्य प्रदान करती रहती है।यह आजमाया हुआ तंत्र है, और अपने आप में प्रामाणिक सिद्ध प्रयोग है, एक बार सिद्ध करने पर फिर जीवन में बार-बार प्रयोग करने की जरूरत नहीं रहती,

इस साधना में तीन बातें आवश्यक हैं

1.साधनाकाल में 49 दिन तक किसी से भी कुछ भी न बोले।

2.साधना के बाद उशी सिद्ध होने पर परस्त्रीगमन न करे I
3.उर्वशी तंत्र सिद्ध होने पर उसके साथ रमण करे, जो कुछ भी चाहे प्राप्त करें, पर द्रव्य का दुरुयोपयोग न करे।

यह साधना आज भी जीवित है, और वर्तमान में भी कई तांत्रिकों ने इसे सिद्ध कर रखा है। वस्तुत: यह जीवन की एक अद्भुत और पूर्ण सुखोपभोग देने वाली सौन्दर्यमयी साधना है, जिसे सिद्ध करने में शास्त्रीय दृष्टि से भी किसी प्रकार का बन्धन या दोष नहीं है।

प्रत्येक्ष रूप से देखने पर यह साधना लम्बी प्रतीत होती है कितु इसके मंत्र पर ध्यान दें तो यह अन्य साधना की अपेक्षा सरल की कही जा सकती है। साथ ही महार्षि विश्वामित्र के द्वारा प्रणीत होने के कारण इसकी प्रामाणिकता स्वयं सिद्ध है ।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

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इस तरह पूजा करने से होते हैं हनुमानजी के दर्शन




इस तरह पूजा करने से होते हैं हनुमानजी के दर्शन


       

हनुमानजी को रूद्रावतार भी कहा जाता है। वह भगवान शिव की तरह ही जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्त की हर इच्छा पूरी करते हैं। यूं तो हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए कई तरीके हैं फिर भी कुछ विशेष तांत्रिक प्रयोगों के द्वारा उनके न केवल दर्शन किए जा सकते हैं वरन उनसे मनचाहा वरदान भी पाया जा सकता है।

हनुमान प्रत्यक्ष दर्शन साधना भी ऎसी ही एक तांत्रिक विधि है जिसके द्वारा हनुमानजी के दर्शन होते हैं। इस साधना को किसी मंदिर या गुप्त स्थान पर ही किया जाता है। यदि किसी नदी के कि नारे एकांत स्थान या पर्वत पर स्थित मंदिर में किया जाए तो ज्यादा बेहतर होता है। कुल मिलाकर साधना का स्थान पूर्णतया पवित्र, शांत और शुद्ध होना चाहिए।

पूजा के पहले करें ये तैयारियां

इस पूजा के लिए आपको सबसे पहले सफेद या लाल वस्त्र ले लेने चाहिए। बिना सिले वस्त्र जैसे धोती अधिक उपयुक्त है परन्तु अनिवार्य नहीं है। साथ ही आसन भी सफेद या लाल ही होना चाहिए। पूजा के लिए लड्डू, सिंदूर, केले, दीपक, धूप, गंगाजल, जल का लोटा दूध, माचिस तथा लाल या सफेद फूल ले लें।

मंगलवार को उपवास रखें। इसके साथ ही जल के लोटे में दूध मिला दें और उसे जाप करने के बाद पीपल के पेड़ में चढ़ा दे और हनुमानजी के मंदिर में घी का दीपक जला कर साधना के लिए आज्ञा दें। आपको जल्दी ही स्वप्न में या अन्य किसी संकेत द्वारा हनुमानजी की पूजा की आज्ञा मिल जाएगी। यदि नहीं मिलती है तो इस पूजा को न करें।

ऎसे करें पूजा

ऊपर बताए अनुसार किसी शांत, शुद्ध और एकान्त स्थान पर जाकर गंगा जल छिड़क कर जगह को पवित्र कर लें। वहां गाय के गोबर लीप कर एक चौका बनालें। उस पर स्वास्तिक का चिन्ह बना कर फूल बिछाएं और उस पर हनुमानजी की मूर्ति, चित्र या यंत्र रखें। इसके बाद आसन पर विराजमान होकर मन ही मन भगवान गणेश और अपने गुरू से पूजा आरंभ करने की आज्ञा लें। इसके बाद आप अपनी साधना आरंभ करें।

दीपक जलाकर, पुष्प अर्पण कर भगवान राम के नाम की एक माला का जाप कर भलीभांति हनुमानजी की पूजा-अर्चना कर नीचे दिए मंत्र का मूंगे की माला से 11 माला जाप करें और हनुमानजी को भोग अर्पण करें। भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य होना चाहिए। ध्यान रहें प्रतिदिन फल और पुष्प ताजा ही लाने चाहिए। इसके साथ ही अपने आसन और हनुमानजी के चारों तरफ राम नाम का जाप करते हुए एक गोल घेरा बना लें। यह घेरा आपकी सभी विध्नों से रक्षा करेगा। जाप के लिए मंत्र इस प्रकार है

ओम नमो हनुमान बाराह वर्ष के जवान हाथ में लड्डू मुख में पान,
हो के मारू आवन मेरे बाबा हनुमान ये नम:।

पूजा में इन नियमों का पालन अवश्य करें

मंत्र प्रतिदिन शाम को 7 से 11 बजे के बीच ही करना है। भोग लगाकर प्रसाद स्वयं खाएं या छोटे लड़कों को बांट दें।

साधना 41 दिन चलती है और इसे मंगलवार या गुरूवार को ही शुरू करें।

पूरे 41 दिनों के दौरान किसी महिला के संपर्क में न आएं। स्वयं का खाना भी खुद ही बना कर खाएं।

मन-मस्तिष्क में किसी भी तरह का कोई विकार न आने दें और अपने आपको पूरी तरह से भगवान के चरणों में समर्पित कर दें।

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सिर्फ 14 दिन में ही हो सकते हैं आपको दर्शन

साधना का असर 14 दिन के अंदर ही दिखने लगता है। आपको शुरू में धरती हिलती हुई अनुभव होगी। आपको बड़े ही डरावने और भयावह अनुभव होने लगेंगे परन्तु किसी बात से डरना नहीं है। आप चुपचाप हनुमानजी में ध्यान एकाग्र कर अपने मंत्र जाप करते हैं। भगवान रोजाना आकर अपना प्रसाद लेंगे और खा लेंगे। 41वें दिन भगवान साक्षात प्रकट होकर आपको दर्शन देंगे और मनचाहा वरदान मांगने को कहेंगे। आप उस दौरान उनसे कुछ भी मांग कर अपनी इच्छा पूरी कर सकते हैं।

सावधानियां

यह एक अत्यन्त प्रचंड और विलक्षण सिद्धी है। इसे करते समय व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत होना चाहिए। जरा सा भी डर या कमजोरी आदमी को पागल कर सकती है या उसे मार सकती है। इसीलिए यह प्रयोग हर किसी को नहीं करना चाहिए वरन अपने गुरू की आज्ञा और आर्शीवाद लेकर ही करना चाहिए।

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