यदि आप मुझसे कुछ सीखना चाहते है तो परिश्रम तो करना ही होगा। किसी को दो दिन में तारा चाहिए,तो किसी को ९ दिन में छिन्नमस्ता,किसी को ५ दिन में मातंगी सिद्ध करना है तो,किसी को ११ दिन में भुवनेश्वरी। कितनी बचकानी बात है. मेरा उद्देश्य किसी के ह्रदय को पीड़ित करना नहीं है.अगर किसी को दुःख हुआ हो तो हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थी हु.परन्तु कभी कभी व्यर्थ का रोग मिटाने के लिए कड़वे वचनो कि औषधि आवश्यक हो जाती है.
Saturday, June 30, 2018
जब भी किसी को प्रेम करें तो याद रखें कि संयम और प्रतीक्षा सबसे उत्तम उपाय है
जब भी किसी को प्रेम करें तो याद रखें कि संयम और प्रतीक्षा सबसे उत्तम उपाय है
(1)
लड़के को प्रेम में सफलता के लिए पन्ना (एमरल्ड) की अंगूठी धारण करना चाहिए इससे प्रेयसी के मन में प्रबल आकर्षण बना रहता है ।
(2)
प्रेमी युगल को शनिवार और अमावस्या के दिन नहीं मिलना चाहिए। इन दिनों में मिलने से आपस में किसी भी बात पर विवाद हो सकता है …एक दूसरे की कोई भी बात बुरी लग सकती है तथा प्रेम संबंधो में सफलता मिलने में संदेह हो सकता है।
(3)
प्रेमी युगल को यह प्रयास करना चाहिए कि शुक्रवार और पूर्णिमा के दिन अवश्य मिलें। जिस शुक्रवार को पूर्णिमा हो वह दिन अत्यंत शुभ रहता है इस दिन मिलने से परस्पर प्रेम व आकर्षण बढ़ता है।
(4)
सफ़ेद वस्त्र धारण करके किसी भी धार्मिक स्थान पर लाल गुलाब व चमेली का इत्र अर्पित करके अपने प्रेम की सफलता के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें निश्चय ही लाभ होगा।
वशीकरण मन्त्र –
काम व आकर्षण बीज मंत्र का जाप करें।
मंत्र-
ऊँ क्लीं नम:।
आकर्षण शक्ति बड़ाने के लिए इस मंत्र का जाप करें ।
ॐ क्लीं कृष्णाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा:
राजगुरु जी
महाविद्या आश्रम ( राज योग पीठ ) ट्रस्ट
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Friday, June 29, 2018
ऋण हर्ता गणेश मंत्र प्रयोग
ऋण हर्ता गणेश मंत्र प्रयोग
कर्ज से मुक्ति हेतु गणेश मंत्र, मन्त्र जप से ऋण मुक्ति, रिण मुक्ति हेतु मन्त्र, गणपति मन्त्र से कर्ज मुक्ति, गणेश जी का कर्ज मुक्ति मन्त्र,
ऋण हर्ता गणेश मंत्र प्रयोग
यह ऋण हर्ता मंत्र हैं। इस मंत्र का नियमित जाप करना चाहिए। इससे गणेश जी प्रसन्न होते है और साधक का ऋण चुकता होता है। कहा जाता है कि जिसके घर में एक बार भी इस मंत्र का उच्चारण हो जाता है है उसके घर में कभी भी ऋण या दरिद्रता नहीं आ सकती।
मंत्र:
ॐ श्री गणेश ऋण छिन्धि वरेण्य हुं नमः फट ।
विधि:
किसी योग्य ब्राह्मण से गणेश प्राण-प्रतिष्ठित करवाले। (विशेष नोट : कर्ज मुक्ति हेतु मंगल गणेश (मूंगा गणेश) प्रतिमा उत्तम फलदायी होती हैं।)
यदि कर्ज से हैं परेशान तो मास की किसी भी चतुर्थी या मंगलवार के दिन प्रातःकाल स्नानआदि नित्यकर्म से शीघ्र निवृत्त होकर। भगवान गणेश की प्राण-प्रतिष्ठित मंत्र सिद्ध गणेश प्रतिमा स्थापित करें। उस मूर्ति का पंचोपचार या षोड़शोपचार पूजन-आरती आदि से विधि-वत पूजन करें।
· गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं।
· यदि संभव हो तो गणेशजी का मंत्र बोलते हुए 21 दुर्वा दल चढ़ाएं।
· श्री गणेशजी को लड्डुओं का भोग लगाएं।
· स्थापना वाले दिन ब्राह्मण भोजन कराएं और ब्राह्मणों को दक्षिणा प्रदान करने के पश्चात् संध्या के समय स्वयं भोजन ग्रहण करें, यदि ब्राह्मणों को भोजन करवाना संभव न हो तो उसके निमित्त दान किसी भी मंदिर मे कर सकते हैं।
·
स्थापना के पश्चयात प्रतिदिन गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं और ऋण मुक्ति हेतु मूंगे की माला से गणेश मंत्र की 1, 3, 5, 7, 11 जप करें।
· इस तरह पूजन करने से भगवान श्रीगणेश अति प्रसन्न होते हैं और जल्द ही कर्ज मुक्ति के मार्ग प्रसस्थ होने लेगते हैं।
राजगुरु जी
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Thursday, June 28, 2018
श्री कुबेर यंत्र
श्री कुबेर यंत्र
यह धन अधिपति धनेश कुबेर का यंत्र है,इस यंत्र के प्रभाव से यक्षराज कुबेर प्रसन्न होकर अतुल सम्पत्ति की रक्षा करते हैं।
यह यंत्र स्वर्ण और रजत पत्रों से भी निर्मित होता है,जहां लक्ष्मी प्राप्ति की अन्य साधनायें असफ़ल हो जाती हैं,वहां इस यंत्र की उपासना से शीघ्र लाभ होता है।
कुबेर यंत्र विजय दसमीं धनतेरस दीपावली तथा रविपुष्य नक्षत्र और गुरुवार या रविवार को बनाया जाता है।
कुबेर यंत्र की स्थापना गल्ले तिजोरियों सेफ़ व बन्द अलमारियों में की जाती है।
लक्ष्मी प्राप्ति की साधनाओं में कुबेर यंत्र अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आपकी कुंडली से आपको कौन सा यंत्र फ़ायदा देगा
आप हमसे पूछ सकते है
राज गुरु जी
महाविद्या आश्रम ( राज योग पीठ ) ट्रस्ट
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Tuesday, June 26, 2018
ज्वाला शत्रु स्तम्भन ”साधना
ज्वाला शत्रु स्तम्भन ”साधना
जीवन मे निरंतर पग पग पर समस्या तथा बाधाए आना स्वाभाविक है. आज के युग मे जब चारो तरफ अविश्वास और ढोंग का माहोल छाया हुआ है तब ज्यादातर व्यक्तियो का समस्या से ग्रस्त रहना स्वाभाविक है.
और व्यक्ति कई प्रकार के षड्यंत्रो का भोग बनता है. यु एक हस्ते खेलते परिवार का जीवन अत्यधिक दुखी हो जाता है. कई बार व्यक्ति के परिचित ही उसके सबसे बड़े शत्रु बन जाते है और यही कोशिश मे रहते है की किसी न किसी रूप मे इस व्यक्ति का जीवन बर्बाद करना ही है. चाहे इसके लिए स्वयं का भी नुक्सान कितना भी हो जाए.
आज के इस अंधे युग मे मानवता जैसे शब्दों को माना नहीं जाता है. और व्यक्ति इसे अपना भाग्य मान कर चुप हो जाता है. अपने सामने ही खुद की तथा परिवार की बर्बादी को देखता ही रहता है और आखिर मे अत्यधिक दारुण परिणाम सामने आते है जो की किसी के भी जीवन को हिलाकर रख देते है.
एसी परिस्थिति मे गिडगिडाने के अलावा और कोई उपाय व्यक्ति के पास नहीं रह जाता है. लेकिन हमारे ग्रंथो मे जहा एक और नम्रता को महत्व दिया है तो दूसरी और व्यक्ति की कायरता को बहोत बड़ा बाधक भी माना है. एसी परिस्थितियो मे शत्रु को सबक सिखाना कोई मर्यादाविरुद्ध नहीं है.
यह ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार व्यक्ति अपनी और परिवार की आत्मरक्षा के लिए हमलावर को हावी ना होने दे और उस पर खुद ही हावी हो जाए. हमारे तंत्र ग्रंथो मे इस प्रकार के कई महत्वपूर्ण प्रयोग है जिसे योग्य समय पर उपयोग करना हितकारी है.
लेकिन मजाक मस्ती मे या फिर किसी को गलत इरादे से व्यर्थ ही परेशान करने के लिए इस प्रकार की साधनाओ का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए वरना इसका भयंकर विपरीत परिणाम भी आ सकता है.
शत्रुओ के द्वारा निर्मित षड्यंत्रो का किसीभी प्रकार से कोई असर हम पर ना हो और भविष्य मे वह हमारे विरुद्ध परेशान या नुकसान के इरादे से कोई भी योजना ना बना पाए इस प्रकार से साधक का चिंतन हो तो वह यथायोग्य है.
तन्त्र के कई रहस्यपूर्ण और गुप्त विधानों मे से एक विधान है “ ज्वाला शत्रु स्तम्भन ”. यह अत्यधिक महत्वपूर्ण विधान है जिसे पूर्ण सात्विक तरीके से सम्प्पन किया जाता है लेकिन इसका प्रभाव अत्यधिक तीक्ष्ण है.
देवी ज्वाला अपने आप मे पूर्ण अग्नि रूप है, और शत्रुओ की गति मति स्तंभित कर के साधक का कल्याण करती है. साधक को इस प्रयोग के लिए कोई विशेष सामग्री की ज़रूरत नहीं है.
इस विधान को साधक किसी भी दिन से शुरू कर सकता है तथा इसे ८ दिन तक करना है, इन ८ दिनों मे साधक को शुद्ध सात्विक भोजन ही करना चाहिए, लहसुन तथा प्याज भी नहीं खाना चाहिए.
यह जैन तंत्र साधना है इस लिए इन बातो का ध्यान रखा जाए. इस प्रयोग मे वस्त्र तथा आसान सफ़ेद रहे. दिशा उत्तर रहे. साधक रात्री काल मे १० बजे के देवी ज्वाला को मन ही मन शत्रुओ से मुक्ति के लिए प्रार्थना करे. इसके बाद निम्न मंत्र की १००८ आहुतिय शुद्ध घी से अग्नि मे प्रदान करे.
औम झ्राम् ज्वालामालिनि शत्रु स्तम्भय उच्चाटय फट्
आहुति के बाद साधक फिर से देवी को प्रार्थना करे तथा भूमि पर सो जाए. इस प्रकार ८ दिन नियमित रूप से करने पर साधक के समस्त शत्रु स्तंभित हो जाते है और साधक को किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी नहीं होती. शत्रु के समस्त षडयंत्र उन पर ही भारी पड जाते है.
राजगुरु जी
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Monday, June 25, 2018
मुकदमे मे विजय प्राप्ति यन्त्र प्रयोग
मुकदमे मे विजय प्राप्ति यन्त्र प्रयोग)
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इस गुप्त शत्रुता वाले युग मे कौन सा शत्रु कब घात प्रतिघात कर दे कहा नही जा सकता हैं एक बार सामने के आघात तो सहन किये जा सकते हैं पर छुप कर या विभिन्न षडयंत्र बनाकर किये गए आघात के बारे मे क्या कहा जाए ...
यह सब तो आज के युग की निशानी हैं इन्ही मे एक तरीका जो सर्वाधिक उपयोग होता हैं वह हैं सामने वाले को किसी भीझूठे मुकदमो मे फसवा दो , अब व्यक्ति कितना भी निर्दोष हो इस चक्कर से निकलते निकलते उसका बहुत संमय उर्जा और धन नष्ट हो जाता हैं मानसिक प्रताडना जो झेलनी पड़ती हैं वह तो बिलकुल ही अलग होती हैं.
यूँ तो गुप्तशत्रुओं और समस्त प्रकार के षड्यंत्रो को निष्फल करने मे भगवती बल्गामुखी और अन्य महाविद्याओ का नाम आता हैं पर इनकी साधनाए इतनी सरल भी तो नही हैं ,
इनसे सबंधित प्रयोग अवश्य किये जा सकते हैं पर व्यक्ति भी कुछ संशय की अवस्था मे रहता हैं की कहीं कुछ गलत न हो जाए या उसे पूरा विधान ठीक से मालुम भी नही होता , इस समय यंत्र विज्ञान के सरलतम तरीके जिन पर भले ही एक पल विस्वास न हो पर बहुत लाभदायक सिद्ध हुये हैं .
वेसे भी कानूनी जब लड़ाई प्रारंभ होती हैं तो एक व्यक्ति ,कानूनी दाव पेंच से उसका कोई वास्ता नही होता और वह परेशां होता जाता हैं और किसी तरह मुकदमो मे विजय भी चाहता हैं की फिर से व ह आरामदायक जीवन व्यतीत कर सके .
यह कहा भी गया हैं की कमजोरी ही पाप हैं और बलयुक्त होना ही पुण्य हैं और जीवन ऐसे रो रो कर घिसट घिसट कर तो काटा नही जा सकता हैं
यह तो आप हम सभी जानते हैं की आज के युग मेसाधना के लिए समय न मिल पाना एक बहुत बड़ी समस्या हैं ,हलाकि सदगुरुदेव जी ने यह भी कहा हैं की अगर ध्यान से देखें तो स्वयं ही पता चल जाएगा की दिन का कितना समय यूँ ही बेकार के कामो मे जा ता हैं अगर वहां समय बचाया जा सके तो.
अगर भौतिक जीवन मे उच्चता प्राप्त कर ली हैं तो इस तंत्र जगत मे भी कुछ उपलब्धिया भी प्राप्त करें यही तो जीवन की उच्चता हैं .तो इसके लिए समय निकालना ही पड़ेगा .
ठीक इसी तरह अगर समस्या बहुत गंभीर न हुयी हो तो आप इस प्रयोग को करें और पुरे मनो योग से करने मे सफलता आपको प्राप्त होगी बशर्ते आपका पक्ष सही होना चहिये .इतना तो व्यक्ति का स्वयं के लिए निष्पक्ष आकलन होना ही चाहिये.
यन्त्र विज्ञानं का यह बहुत ही सरल सा प्रयोग हैं अनेको द्वारा प्रशंशित भी हैं .
आप सभी को यंत्र विधान के सामन्य नियम ज्ञात हैं ही , अनेको बार लिखे जा चुके हैं तो बार बार उन्ही का उल्लेख उचित नही हैं , इस यंत्र को भोजपत्र पर कुकुम से बना ले .
जिस व्यक्ति के विरुद्ध आपका मुकदमा हो उसका नाम यंत्र के मध्य मे पहले से लिखना न भूले ,यंत्र का पूजन और अन्य सामान्य विधान जो की यन्त्र सबंधित विगत कई पोस्ट मे दिए जा चुके हैं .
आप उन्हें करे और जिस दिन आपका मुकदमा हो कोर्ट मे जाना हो इस यन्त्र को त्रिलोह धातु के तावीज़ मे बंद करके दूध मे डा ल दे .. बस इतना विधान हैं .
राजगुरु जी
महाविद्या आश्रम ( राजयोग ) ट्रस्ट
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नायिका साधना
नायिका साधना :
यक्षिणियां तथा अप्सराओं की उपजाति में नायिकाएं आती हैं।
यह भी यक्षिणियों और अप्सराओं की तरह मन मुग्ध करने वाले सौन्दर्य से परिपूर्ण होती है। इनकी साधना वशीकरण तथा सुंदरता प्राप्ति हेतु की जाती हैं।
माना जाता है कि नारियों को आकर्षित करने का हर उपाय इनके पास हैं।
ये मुख्यतः 8 हैं-
1. जया 2. विजया 3. रतिप्रिया 4. कंचन कुंडली 5. स्वर्ण माला 6. जयवती 7. सुरंगिनी 8. विद्यावती।
इन नायिकाओं का भी इस्तेमाल देवता लोग ऋषि-मुनियों की तपस्या भंग करने के लिए किया करते थे।
राजगुरु जी
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Sunday, June 24, 2018
इच्छित व्यक्ति स्तम्भनं प्रयोग
इच्छित व्यक्ति स्तम्भनं प्रयोग
घात प्रतिघात तो जीवन का खासकर आज के , तो एक अंग वह भी आवश्यक बन गयी हैं वह समय कहीं कोसों दूर चला गया जब लोग सामने चुनौती दे कर लड़ना पसंद करते थे .
अब तो गुप्त रूप से आपको नुक्सान पहुचना ही एक मात्र मकसद रह गया हैं, यूँ तो शास्त्रों मे लोगों की अनेक प्रकार की श्रेणियाँ उल्लेखित हैं . उनमे से कुछ ये भी हैं की अकारण ही दूसरे को परेशां करने वाले ...
किसी की जमीन पर या किसी को सिर्फ कुछ धन के लिए नुक्सान पहुचने वाले . या आपकी उन्नति से जल कर आपके लिए तरह तरह के षड्यंत्र का निर्माण करने वाले .
तंत्र क्षेत्र का साधक इन सभी समस्यायों को कैसे निपटा जाये यह भली भांति जानता हैं पर जानने और करने मे कोसो की दुरी होती हैं ,षट्कर्म मे से एक कर्म स्तम्भंन्न भी हैं और स्तम्भनं की प्रमुख देवी भगवती बल्गामुखी के स्वरुप से कौन नही परिचित होगा , जिसे कोई भी उपाय ना सूझे तो विधिवत ज्ञान ले कर इस विद्या का प्रयोग अपने रक्षार्थ करें निश्चय ही उसे लाभ होगा .
पर न तो इस विद्या का ज्ञान देने वाले और न ही उचित प्रकार से प्रयोग करने वाले आज प्राप्त हैं .और् सबसे बड़ी समस्या यह हैं की इन प्रयोगों को करने के लिए कैसे समय निकाला जाए .आज समय की कितनी कमी हैं यह तो हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं ही .
साधना क्षेत्र मे दोनों तरह के विधान हैं लंबे समय वाले और कम समय वाले भी ..साधारणतः यह कहा जाता हैं की सबसे पहले कम समय वाले विधानों की तरफ गंभीरता से देखा जाना चाहिये और जब परिणाम उतने अनुकूल ना हो जितनी आवशयकता हैं तब बृहद साधना पर ध्यान दे यह उचित भी है क्योंकि जहाँ सुई का काम हो वहां तलवार की क्या उपयोगिता ..
और तंत्र मंत्र के आधारमे एक महत्वपूर्ण अंग या विज्ञानं हैं यन्त्र विज्ञानं ..अभी भी इसका एक अंश मात्र भी सामने नही आया हैं . एक से एक अद्भुत गोपनीय और दाँतों तले अंगुली दवा लेने वाले रहस्यों से ओत प्रोत रहा हैं यह विज्ञानं.
हमारे द्वारा अनेक प्रयोग जो दिए जाते रहे हैं वह अनेको मनिशियों ,तंत्र आचार्यों और उच्च तांत्रिक ग्रंथो मे बहुत प्रशंषित रहे हैं और सैकडो ने उनके प्रयोग किये हैं और लाभ भी उठाया हैं , आवश्यकता बस इस बात की हैं की यदि समय हो तो क्यों न इन प्रयोगों की करके भी देखा जाये जो अनुभूत और सटीक रहे हैं .
इन सरलतम विधानों का अपना एक महत्त्व हैं.इस यन्त्र का निर्माण करें .
· किसी भी शुभ दिन प्रातः काल मे कर सकते हैं .
· यन्त्र निर्माण के लिए अनार या जो भी उचित लकड़ी प्राप्त हो उसका उपयोग कर सकते हैं .
· यन्त्र लेखन मे स्याही सिर्फ कुकुम और गोरोचन को मिलाकर बना ना हैं .
· वस्त्र पीले और आसन का रंग पीला हो तो कहीं जयादा उचित होगा .
· प्रयोग के शुरुआत मे संकल्प ले .
· यह ध्यान रखे की यन्त्र के बीच मे उस व्यक्ति का नाम लिखे जिसने आपको परेशां कर् रखा हो
· यन्त्र निर्माण मतलब उस व्यक्ति का नाम लिखने के बाद पुरे एक दिन इस यंत्र को एक मिटटी के वर्तन मे रखना हैं और धूप दीप और नैवेद्य अर्पित करना हैं .
· बाद मे मतलब दूसरे दिन इसके ऊपर (मिटटी के वर्तन) जिसमे यह यन्त्र निर्माण के बाद रखा हैं किसी अन्य मिटटी की प्लेट उसके ऊपर रख दे और अच्छी तरह से इस पात्र कोकिसी कपडे से बाँध कर .किसी दूर निर्जन स्थान पर रख दे .
ऐसा करने से वह व्यक्ति फिर आपके लिए कोई हानि का रक योजना नही बना पाता हैं .
इसके बाद गुरुजी का पूजन और गुरू मंत्र का जप यथाशक्ति करे औरसफलता के लिए प्रार्थना करें ...
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