Sunday, September 6, 2020

 स्फटिक की माला के चमत्कार 


स्फटिक जिसे बिल्लौर भी कहते हैं। ये कई रंगों में मिलता है व पारदर्शी होता है, अतः पारदर्शी माला भी कहते हैं। यह स्मृद्धि, धन, लक्ष्मी आगमन हेतु सर्वश्रेष्ठ होती है। 


इसे सौम्य व शुभ सात्विक कार्यो में प्रयोग करते है। यह देवी, शिव व चन्द्र को प्रिय है। अतः वशीकरण, शान्ति, कर्म व समृद्धि हेतु इसे धारण करना सर्वश्रेष्ठ होता है।



· स्फटिक की माला को विधिवत पूजन करके गले में धारण करने से धीरे-धीरे धन में वृद्धि होने लगती है।


· जिस व्यक्ति के उपर लगातार ऋण का बोझ बढ़ रहा हो वह व्यक्ति घर के ईशान कोण में जल का कलश रखकर स्फटिक माला जल में रखें व शुक्रवार को लक्ष्मी जी की आराधना करने से लाभ अवश्य मिलेगा।


· मानसिक तनाव दूर करने व शीतलता प्रदान करने के लिए स्फटिक की माला से कम से 1008 मन्त्रों का जाप करके इस माला को गले में पहने से चमत्कारिक लाभ मिलता है।


· स्फटिक की माला शुक्र ग्रह से सम्बन्धित होती है। यदि आपका शुक्र ग्रह कमजोर है या फिर पीड़ित तो शुक्रवार के दिन स्फटिक की माला से


 ''ऊॅ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः'' 


मन्त्र की कम से कम एक माला जाप जरूर करें। ऐसा करने से धीमे-धीमे आपका शुक्र मजबूत होकर अच्छा फल देने लगेगा।


· घर में क्लेश मिटाने के लिए स्फटिक की माला से पार्वती जी के इस मन्त्र ''ऊॅ गौरये नमः'' का जाप करें और इसी माला को गले में धारण करें। यह उपाय श्रद्धापूर्वक करने से अवश्य लाभ मिलता है।


· विद्या प्राप्ति के लिए सरस्वती जी के इस ''ऊॅ ऐं'' मन्त्र का स्फटिक की माला से जाप करने से विद्या के क्षेत्र में अपार सफलता मिलती है।


· जिन लोगों को उच्च रक्त या अधिक क्रोध आता है उन लोगों को स्फटिक की माला पहनने से अत्यन्त लाभ मिलता है।


· जिन पति-पत्नियों में आपसी झगड़ा अधिक होता है और प्रेम न के बराबर है। ऐसे में पति-पत्नी दोनों लोगों को एक-एक स्फटिक की माला पहनने से आपसी पे्रम में वृद्धि होती है।  शुद्ध अभिमन्त्रित लक्ष्मी प्रिय माला कि शक्ति घर मे कभी धन कि कमी और नुकसान नही होने देती !!


माला का उचित दक्षिना  : -    750  रूपया 


आप अगर माला को प्राप्त करना चाहते है तो फोन पर सम्पर्क करें .


राजगुरु जी


तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान


महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट


 (रजि.)


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मोबाइल नं. : - 09958417249


                     


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Sunday, August 23, 2020

नजर आदि दूर करने हेतु - हनुमान प्रयोग

 नजर आदि दूर करने हेतु - हनुमान प्रयोग


यंहा मैं ऐसे मंत्र का प्रयोग बताने जा रहा हूॅ, जो किसी भी व्यक्ति पर

किये गये पर-प्रयोग, बाधा, बुरी नजर आदि को हटाने में पूर्ण सक्षम है।


 मेरा

अनुभव है कि यदि किसी व्यक्ति की बुरी नजर किसी भी व्यक्ति के रोजगार

पर, उसकी सम्पत्ति पर, अथवा उसके सुख पर लग जाए तो अच्छा-खासा

परिवार तबाह हो जाता है। प्रभावित व्यक्ति कर्ज, बीमारी, मुकदमों आदि में घिर

जाता है, उसका सुख सम्पूर्णतः दुख में बदल जाता है।


यदि आप ऐसे ही प्रयोगों, बुरी नजर आदि से स्वयं को प्रभावित महसूस

करते हैं तो इस निम्नांकित मंत्र का प्रयोग कीजिए और परिणाम मुझे बताईए।


मेरा पूर्ण विष्वास है कि आपको निष्चित रूप से इन समस्त व्याधियों से मुक्ति

प्राप्त हो जाएगी। लेकिन इस मंत्र को गुरू से प्राप्त करना आवष्यक है, अन्यथा

परिणाम संदेहात्मक ही रहेगा।


मंत्रः-  


ओम ह्रीं ब्रीम बिकट , वीर हनुमंत वीर मन्त्र  को मारो ! उलट दो  पाताल , काल जाल संघारो ! जो धन जहा से आये वाही को जाए !टोनहिन का टोना ओझा का दंड ,द्रोही शत्रु को मारो ! ना मारो तो माता अंजनी के बत्तीस धार का दूध हराम करो ! सीता के सर चोट पड़े हुम फट स्वाहा !


साथ में हनुमान जी के १२ नामो का भी जाप करे ! मंदिर में भोग में रोठ लगाये ! घी से यथा सभव हवन करे 


चेतावनी - 


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।


विशेष -


किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें


राजगुरु जी


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Thursday, August 20, 2020

माँ धूमावती सत्रु विनासक प्रयोग

 माँ धूमावती सत्रु विनासक प्रयोग


यह प्रयोग अत्यंत भय कारक है। विचार पूर्वक इस मंत्र का जप करना चाईए।। बिना गुरु के इस प्रयोग को करना अत्यंत नुकसान पहुचा सकता है।।।


मंत्र:::---


धूम धूम धूमावती। मसान में रहती मरघट जगाती। सूप छानती जोगनियो के संग नाचती। डाकनियो के संग मास खाती। मेरी बैरी -------का भी तू मास खाये।कलेजा खाये,लहू पिये प्यास भुजाएँ। मेरी बैरी तड़पा तड़पा मार।ना मारे तो तोहू को माता पारवती के सिंदूर की दुहाई। कनिपा औघड़ की आन।


विधि विधान::::---


एक छोटा सुप ले। थोड़ा सा  शराब और बकरे का कच्चा मास ले। अमावस्या की रात्रि में समशान जाए। वही एक कफन का टुकड़ा ले तथा जलती चिता के समक्ष बैठे । सुरक्षा घेरा लागये।।।


इस मंत्र की 11 माला करे। जप के बाद मंत्र को पढ़ते हुए चिता की राख को मुठी मे ले।


राख में थोड़ी शराब मिलाए तथा उसका एक लेप बना ले उसके बाद कफन के टुकड़े पे अपनी तर्जनी उंगली से मंत्र लिखे । 


रिक्त स्थान पे सत्रु का नाम लिखना है। फिर उसपर बकरे के मास का टुकड़ा रखें। चार तह बना ले फिर सूप मे मास रख कर उसमे बाकी शराब डाल दे। 


और मंत्र बोल कर सूप को चिता पे रख दे और कफन का टुकड़ा लेकर सत्रु के यह डाल दे या घर के बाहर डाल दे छोटी सी टुकड़ा बना कर। सत्रु नाश उसी दिन से हो जाएगा।।


चेतावनी -


सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।


विशेष -


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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》


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Sunday, August 16, 2020

व्यापार वृद्धि प्रयोग -

 व्यापार वृद्धि प्रयोग -


-: मंत्र :-


॥ धां धीं धूं धूर्जटे पत्नीं वां वीं वुं वागधीश्वरी

क्रां क्रीं क्रूं कालिका देव्ये शां शीं शुं में शुभम कुरु ॥


विधी :-


उपरोक्त मन्त्र सिद्ध कुंजिका स्तोत्र में से हैं । कुछ शुद्ध गुलाब में से बनी अगरबत्ती लेकर उपरोक्त मन्त्र 108 बार जप

कर अगरबत्ती अभिमंत्रित कर लीजिए । उसके बाद उन अगरबत्ती में से 5 अगरबत्ती लेकर प्रज्वलित करे । उसके बाद अपने पुरे व्यवसाय स्थल में एंटी क्लोक वाइस (घडी की उलटी दिशा में) घुमाले और एक जगह लगादे और फिर देखे आपका व्यापार कैसे नहीं चलता । 


यह प्रयोग पूर्ण प्रामाणिक एवं कई बार परिक्षीत हैं । 


माँ भगवती ने चाहा तो आप व्यापार को लेकर जल्द ही चिंता मुक्त हो जायेंगे ॥


चेतावनी -


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Saturday, August 1, 2020




















चंद्रहासिनी ---  साधना 

भगवान महादेव ने रावण को उसके तप से प्रसन्न होकर एक अमोघ अस्त्र प्रदान किया थें। 

★चंद्रह्रास खड़ग★

इसकी विशेषता यह था कि यह सामने वाले शत्रु वर्ग का चंद्र बल नष्ट कर देता था । चंद्र का प्रभुत्व पृथ्वी वासियों में इतना अधिक है कि उसके हटते ही सामने वाला यूं ही अधमरा हैं।

जिनके चंद्र क्षीण हों , या कुंडली में चंद्र के आगे और पीछे के घर खाली हों, या पाप ग्रह युक्त (दरिद्र) हो, या केमद्रुम हो या निम्न/नीच राशी का हो, अथवा 10 डिग्री से कम / 22 से अधिक हो

ये सभी स्थितियों का परिणाम दरिद्रता और दुर्भाग्य के रूप में दृष्टिगत होता है जीवन में...

वो सभी चाहे चंद्र उनका त्रिकोणेश हो या नहीं हो वो इस प्रकार का चंद्र कवच चांदी में सुनार से बनवाकर उस पर प्राणप्रतिष्ठा करके, चंद्रमौलीश्वर की एवं चंद्र बीज मंत्र की यथा गुरु निर्दिष्ट जप करें (न्यूनतम 51-51 माला) और धारण करें ।

 जिन्हें ज्यादा बैठने के अभ्यास नहीं हो वो 21दिनों तक कर लें।

【 चंद्र मौलीश्वर -

ॐ शं चं चंद्र मौलिश्वराय नमः

चंद्र बीज -

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः 】

और तंत्र एवं पाखंड में वास्तव में कितना अंतर है उसको प्रत्यक्ष देख सकते हैं। 100% प्रायोगिक प्रयोग हैं।

आरम्भ सोमवार से, माला कोई भी, दिशा आग्नेय (दक्षिण पूर्व का कोण) रहेगा बाकी कोई नियम विशेष की आवश्यकता नहीं।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...