Monday, April 8, 2019

गणेश के कल्याणकारी मंत्र





गणेश के कल्याणकारी मंत्र


गणेश मंत्र कि प्रति दिन एक माला मंत्रजाप अवश्य करे।
दिये गये मंत्रो मे से कोई भी एक मंत्रका जाप करे।

(०१) गं ।

(०२) ग्लं ।

(०३) ग्लौं ।

(०४) श्री गणेशाय नमः ।

(०५) ॐ वरदाय नमः ।

(०६) ॐ सुमंगलाय नमः ।

(०७) ॐ चिंतामणये नमः ।

(०८) ॐ वक्रतुंडाय हुम् ।

(०९) ॐ नमो भगवते गजाननाय ।

(१०) ॐ गं गणपतये नमः ।

(११) ॐ ॐ श्री गणेशाय नमः ।

यह मंत्र के जप से व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं रेहता है।

• आर्थिक स्थिति मे सुधार होता है।
• एवं सर्व प्रकारकी रिद्धि-सिद्धि प्राप्त होती है।

भगवान गणपति के अन्य मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः ।

एसा शास्त्रोक्त वचन हैं कि गणेश जी का यह मंत्र चमत्कारिक और तत्काल फल देने वाला मंत्र हैं। इस मंत्र का पूर्ण भक्तिपूर्वक जाप करने से समस्त बाधाएं दूर होती हैं। षडाक्षर का जप आर्थिक प्रगति व समृध्दिदायक है ।

ॐ वक्रतुंडाय हुम्‌ ।

किसी के द्वारा कि गई तांत्रिक क्रिया को नष्ट करने के लिए, विविध कामनाओं कि शीघ्र पूर्ति के लिए उच्छिष्ट गणपति कि साधना किजाती हैं। उच्छिष्ट गणपति के मंत्र का जाप अक्षय भंडार प्रदान करने वाला हैं।

ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।

आलस्य, निराशा, कलह, विघ्न दूर करने के लिए विघ्नराज रूप की आराधना का यह मंत्र जपे ।

ॐ गं क्षिप्रप्रसादनाय नम:।

मंत्र जाप से कर्म बंधन, रोगनिवारण, कुबुद्धि, कुसंगत्ति, दूर्भाग्य, से मुक्ति होती हैं। समस्त विघ्न दूर होकर धन, आध्यात्मिक चेतना के विकास एवं आत्मबल की प्राप्ति के लिए हेरम्बं गणपति का मंत्र जपे ।

ॐ गूं नम:।

रोजगार की प्राप्ति व आर्थिक समृध्दि प्राप्त होकर सुख सौभाग्य प्राप्त होता हैं।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गण्पत्ये वर वरदे नमः ॐ
 तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात।

लक्ष्मी प्राप्ति एवं व्यवसाय बाधाएं दूर करने हेतु उत्तम मानगया हैं।

ॐ गीः गूं गणपतये नमः स्वाहा।

इस मंत्र के जाप से समस्त प्रकार के विघ्नो एवं संकटो का का नाश होता हैं।

ॐ श्री गं सौभाग्य गणपत्ये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

विवाह में आने वाले दोषो को दूर करने वालों को त्रैलोक्य मोहन गणेश मंत्र का जप करने से शीघ्र विवाह व अनुकूल जीवनसाथी की प्राप्ति होती है ।

ॐ वक्रतुण्डेक द्रष्टाय क्लींहीं श्रीं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मं दशमानय स्वाहा ।

इस मंत्रों के अतिरिक्त गणपति अथर्वशीर्ष, संकटनाशक, गणेश स्त्रोत, गणेशकवच, संतान गणपति स्त्रोत, ऋणहर्ता गणपति स्त्रोत मयूरेश स्त्रोत, गणेश चालीसा का पाठ करने से गणेश जी की शीघ्र कृपा प्राप्त होती है ।

ॐ वर वरदाय विजय गणपतये नमः।

इस मंत्र के जाप से मुकदमे में सफलता प्राप्त होती हैं।

ॐ गं गणपतये सर्वविघ्न हराय सर्वाय सर्वगुरवे लम्बोदराय ह्रीं गं नमः।

वाद-विवाद, कोर्ट कचहरी में विजय प्राप्ति, शत्रु भय से छुटकारा पाने हेतु उत्तम।

ॐ नमः सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्न प्रशमनाय सर्व राज्य वश्य कारनाय सर्वजन सर्व स्त्री पुरुषाकर्षणाय श्री ॐ स्वाहा।

इस मंत्र के जाप को यात्रा में सफलता प्राप्ति हेतु प्रयोग किया जाता हैं।

ॐ हुं गं ग्लौं हरिद्रा गणपत्ये वरद वरद सर्वजन हृदये स्तम्भय स्वाहा।

यह हरिद्रा गणेश साधना का चमत्कारी मंत्र हैं।

ॐ ग्लौं गं गणपतये नमः।

गृह कलेश निवारण एवं घर में सुखशान्ति कि प्राप्ति हेतु।

ॐ गं लक्ष्म्यौ आगच्छ आगच्छ फट्।

इस मंत्र के जाप से दरिद्रता का नाश होकर, धन प्राप्ति के प्रबल योग बनने लगते हैं।

ॐ गणेश महालक्ष्म्यै नमः।

व्यापार से सम्बन्धित बाधाएं एवं परेशानियां निवारण एवं व्यापर में निरंतर उन्नति हेतु।

ॐ गं रोग मुक्तये फट्।

भयानक असाध्य रोगों से परेशानी होने पर, उचित ईलाज कराने पर भी लाभ प्राप्त नहीं होरहा हो, तो पूर्ण विश्वास सें मंत्र का जाप करने से या जानकार व्यक्ति से जाप करवाने से धीरे-धीरे रोगी को रोग से छुटकारा मिलता हैं।

ॐ अन्तरिक्षाय स्वाहा।

इस मंत्र के जाप से मनोकामना पूर्ति के अवसर प्राप्त होने लगते हैं।

गं गणपत्ये पुत्र वरदाय नमः।

इस मंत्र के जाप से उत्तम संतान कि प्राप्ति होती हैं।

ॐ वर वरदाय विजय गणपतये नमः।

इस मंत्र के जाप से मुकदमे में सफलता प्राप्त होती हैं।

ॐ श्री गणेश ऋण छिन्धि वरेण्य हुं नमः फट ।

यह ऋण हर्ता मंत्र हैं। इस मंत्र का नियमित जाप करना चाहिए। इससे गणेश जी प्रसन्न होते है और साधक का ऋण चुकता होता है। कहा जाता है कि जिसके घर में एक बार भी इस मंत्र का उच्चारण हो जाता है है उसके घर में कभी भी ऋण या दरिद्रता नहीं आ सकती।

जप विधि

प्रात: स्नानादि शुद्ध होकर कुश या ऊन के आसन पर पूर्व कि और मुख होकर बैठें। सामने गणॆश‌जी का चित्र, यंत्र या मूर्ति स्थाप्ति करें फिर षोडशोपचार या पंचोपचार से भगवान गजानन का पूजन कर प्रथम दिन संकल्प करें। इसके बाद भगवान ग्णेश‌का एकाग्रचित्त से ध्यान करें।

 नैवेद्य में यदि संभव होतो बूंदि या बेसन के लड्डू का भोग लगाये नहीं तो गुड का भोग लगाये । साधक को गणेश‌जी के चित्र या मूर्ति के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक जलाए। 

रोज १०८ माला का जाप कर ने से शीघ्र फल कि प्राप्ति होती हैं। यदि एक दिन में १०८ माला संभव न हो तो ५४, २७,१८ या ९ मालाओं का भी जाप किया जा सकता हैं। मंत्र जाप करने में यदि आप असमर्थ हो, तो किसी ब्राह्मण को उचित दक्षिणा देकर उनसे जाप करवाया जा सकता हैं।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

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Sunday, April 7, 2019

पितृ दोष बाधा नाश हेतु हनुमान मन्त्र






पितृ दोष बाधा नाश हेतु हनुमान मन्त्र


इस मन्त्र के नियमित 21 बार श्री हनुमान जी के विग्रह के सामने मदार की वर्तिका से चमेली की तेल का दीपक जलाकर 21 बार पाठ करने से सभी समस्याओ का निवारण होता हैं, पितृ दोष, ग्रह दोष दूर होते हैं तथा रुके काम बनने लगते हैं।

पाठ करने का उपयुक्त समय प्रातः 7-9 बजे अथवा रात्रि 10 बजे ।

ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय वायु सुताय अञ्जनी गर्भ सम्भुताय अखण्ड ब्रह्मचर्य व्रत पालन तत्पराय धवली कृत जगत् त्रितयाया ज्वलदग्नि सूर्यकोटी समप्रभाय प्रकट पराक्रमाय आक्रान्त दिग् मण्डलाय यशोवितानाय यशोऽलंकृताय शोभिताननाय महा सामर्थ्याय महा तेज पुञ्ज:विराजमानाय श्रीराम भक्ति तत्पराय श्रिराम लक्ष्मणानन्द कारकाय कपिसैन्य प्राकाराय सुग्रीव सौख्य कारणाय सुग्रीव साहाय्य कारणाय ब्रह्मास्त्र ब्रह्म शक्ति ग्रसनाय लक्ष्मण शक्ति भेद निबारणाय शल्य लिशल्यौषधि समानयनाय बालोदित भानु मण्डल ग्रसनाय अक्षयकुमार छेदनाय वन रक्षाकर समूह विभञ्जनाय द्रोण पर्वतोत्पाटनाय स्वामि वचन सम्पादितार्जुन संयुग संग्रामाय गम्भिर शव्दोदयाय दक्षिणाशा मार्तण्डाय मेरूपर्वत पीठिकार्चनाय दावानल कालाग्नी रूद्राय समुद्र लङ्घनाय सीताऽऽश्वासनाय सीता रक्षकाय राक्षसी सङ्घ विदारणाय अशोकबन विदारणाय लङ्कापुरी दहनाय दश ग्रीव शिर:कृन्त्तकाय कुम्भकर्णादि वधकारणाय बालि निबर्हण कारणाय मेघनादहोम विध्वंसनाय इन्द्रजीत वध कारणाय सर्व शास्त्र पारङ्गताय सर्व ग्रह विनाशकाय सर्व ज्वर हराय सर्व भय निवारणाय सर्व कष्ट निवारणाय सर्वापत्ती निवारणाय सर्व दुष्टादि निबर्हणाय सर्व शत्रुच्छेदनाय भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनी ध्वंसकाय सर्वकार्य साधकाय प्राणीमात्र रक्षकाय रामदुताय स्वाहा॥

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

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Wednesday, April 3, 2019

शुक्र ग्रह का हमारे जीवन पर प्रभाव ।



शुक्र ग्रह का हमारे जीवन पर प्रभाव ।


- शुक्र मुख्य रूप से हमारे जीवन के सुख से संबंध रखता है.

- वैभव, ऐश्वर्य, सम्पदा और ग्लैमर, शुक्र की कृपा से ही मिलते हैं.

- जीवन में प्रेम, करुणा और सौंदर्य शुक्र के कारण ही आता है.

- पुरुषों के जीवन में स्त्री सुख भी शुक्र के कारण मिलता है.

- कोई भी वैवाहिक जीवन शुक्र की कृपा से ही चलता है.

विभिन्न राशियो के लिये शुक्र का प्रभाव।

मेष

मेष राशियों के लिये शुक्र दूसरे व सातवें घर का स्वामी होता है।

- इनको शुक्र से वाणी, धन और पारिवारिक सुख मिलता है

- यहाँ पर वैवाहिक जीवन पूरी तरह से शुक्र पर निर्भर करता है   

वृष

वृष राशियों के लिये शुक्र लग्नेश व षष्टेश होता है।

- इनको शुक्र से अच्छा स्वास्थ्य और शानदार व्यक्तित्व मिलता है

- इनकी नौकरी तभी अच्छी रह सकती है, जब शुक्र अच्छा हो

मिथुन

मिथुन राशियों के लिये शुक्र 12 वें व 5 वें घर का स्वामी होता है।

- इनको शुक्र से संतान, विद्या और बुद्धि का वरदान मिलता है

- शुक्र से ही इनको जीवनसाथी का प्रेम और ऐश्वर्य मिल पाता है

कर्क

कर्क राशियों के लिये शुक्र 11 वें व 4 थे घर का स्वामी होता है।

- शुक्र से इनको भावनाएं, करुणा, प्रेम और अच्छा ह्रदय मिलता है

- शुक्र ही इनको अच्छी आय और अच्छी नौकरी दे सकता है

सिंह

सिंह राशियों के लिये शुक्र 10 वें व 3 रे घर का स्वामी होता है।

- शुक्र से इनको साहस, भाई बहन और यात्राओं का सुख मिलता है

- शुक्र के कारण ही इनको उच्च पद और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है

कन्या

कन्या राशियों के लिये शुक्र 9 वें व 2 रे घर का स्वामी होता है।

- शुक्र ही इनके भाग्य, धर्म और विदेश यात्राओं को नियंत्रित करता है

- शुक्र के कारण ही इनको अच्छी वाणी, धन और पारिवारिक सुख मिलता है

तुला

तुला राशियों के लिये शुक्र पहले व 8 वें घर का स्वामी होता है।

- इनका स्वास्थ्य और उम्र शुक्र के हाथों में होता है

- इनको पूरा व्यक्तित्व और आकर्षण शुक्र से ही प्राप्त होता है

वृश्चिक

वृश्चिक राशियों के लिये शुक्र 7 वें व 12 वें घर का स्वामी होता है।

- इनका विवाह, कारोबार और रिश्ते शुक्र पर निर्भर करते हैं

- इनका मान सम्मान, यश और ग्लैमर शुक्र पर ही निर्भर करता है

धनु

धनु राशियों के लिये शुक्र छठे व 11 वें घर का स्वामी होता है।

- इनकी नौकरी और रोजगार पूरी तरह से शुक्र के हाथों में होता है

- इनकी बीमारियां, कर्जे और शत्रु, शुक्र से ही सम्बन्ध रखते हैं

मकर

मकर राशियों के लिये शुक्र 5 वें व 10 वें घर का स्वामी होता है।

- इनको उच्च पद, प्रतिष्ठा और मान सम्मान शुक्र से मिलता है

- इनको संतान और विद्या-बुद्धि भी शुक्र की कृपा से ही मिलती है

कुम्भ

कुम्भ राशियों के लिये शुक्र चोथे व 9 वें घर का स्वामी होता है।

- इनका मन, ह्रदय, भावनाएं और सोच शुक्र से नियंत्रित होता है

- शुक्र ही इन्हे भाग्यवान भी बनाता है और आध्यात्मिक भी

मीन

मीन राशियों के लिये शुक्र 3 रे  व 8 वें घर का स्वामी होता है।

- इनकी आयु और आकस्मिक सफलता शुक्र से प्राप्त होती है

- लेखन, कला, संगीत और अभिव्यक्ति की क्षमता भी इन्हे शुक्र ही देता है

शुक्र को मजबूत करने के उपाय।

- नित्य प्रातः और सायं शुक्र के मन्त्र का जप करें

- एक स्फटिक की माला गले में धारण करें

- शुक्रवार को देवी को सफ़ेद मिठाई का भोग अर्पित करें

- महिलाओं की यथाशक्ति सहायता करें

 फीस पेटेम के माध्यम से पहले ली जायेगी.

दक्षिना  : - 301

पेटेम नंबर : - 9958417249

कैसे? 

 ये जानने के लिए birth details और समस्या बताए .

dear all kindly check the post ye sirf unhi ke liye upay hai jinki samasya upar likhi hai
problem bhi sath mein likhe

 हम के  पी के होररी नंम्बर के आधार पर हां ना या देरी  का तत्काल उत्तर  देगे और अधिक विश्लेष्ण करवा ना हो तो फीस पेटेम के माध्यम से पहले ली जायेगी.

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राजगुरु जी

महाविद्या आश्रम

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कुंडलाहारिणी अप्सरा सबसे शीघ्र आती है।






कुंडलाहारिणी अप्सरा सबसे शीघ्र आती है।


इसे बुलाने की विधी इस प्रकार है, ऐक चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाऐं उस अष्ट दल कमल सफेद चावल से बनाकर अप्सरा का चित्र रखें।

सफेद वस्त्र पहने रात में 11 बजे से मंत्र जप करे 31 माला जप करें,

उससे पहले न्यास और ध्यान करके अप्सरा का पूजन कर लें।

इस अप्सरा की साधना में तिथि, वार, नक्षत्र कुछ भी नही देखना,

ये अप्सरा बहुत शीघ्र आती है, जिस कमरे आप साधना करे उसमें कोई और प्रवेश ना करे,

मंत्र इस प्रकार है▪▪ 

"ऊॅ श्रीं ह्रीं कुण्डलहारिणी आगच्छ स्वाहा"

मोगरे का इत्र कमरे में छिड़क लें, स्फटिक की माला से जप करें।

अप्सरा परीक्षा लेगी आपको डरा सकती है परीक्षा सफल होने के बाद वो सामने आऐगी उस से वचन ले जो भी चाहो

आपको स्वर्ग का भी दर्शन कराऐगी जो वस्तु मांगोगे वो लाकर देगी, प्रेमिका बनकर रहेगी।

चेतावनी -

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भूत प्रेत साधना





भूत प्रेत साधना


अक्सर भूत प्रेत का नाम सुनकर लोगो में भय व्याप्त हो जाता है । उन्हें सिद्ध करने की कौन कहे । वैसे भी उन्हें सिद्ध करने की जो क्रियाएँ वर्णित होती हैं वो कम से कम सामान्य साधको और कमजोर मनोमष्तिष्क वालों के लिए तो नहीं है । ऊपर से ये भ्रान्ति की जो इन्हें सिद्ध करता है उसे ये तकलीफ दते हैं ।

 साधक का बचा खुचा मनोबल भी समाप्त कर देते हैं । परन्तु ये सभी तथ्य वास्तविकता से कोसो दूर है । भूत प्रेत तो अपनी मुक्ति के लिए बैचेन ऐसी आत्माएं होती हैं । जो किसी भी प्रकार अपनी मुक्ति चाहती हैं और परोक्ष अपरोक्ष रूप से सहयोग के लिए तत्पर होती हैं । वे सही और गलत कार्य दोनों कर सकती हैं । 

परन्तु जब साधक उनका दुरूपयोग करता है तो उन आत्माओं की तो मुक्ति हो जाती है । पर साधक का जीवन दूभर हो जाता है । लेकिन उनका सदुपयोग करने पर आप जहाँ उन आत्माओं को मुक्त होने में माध्यम की भूमिका निभाते हो वहाँ किसी भी प्रकार हानि से भी सुरक्षित रहते हो । 

प्रस्तुत पद्धति किसी भी प्रकार से हानि रहित और प्रभावकारी है । इसे कोई भी साधक कर सकता है । इस साधना की वजह से सिर्फ उच्च संस्कारों वाले प्रेत या भूत ही आपके वश में होते हैं । जो एक सच्चे मित्र की भांति बिना नुक्सान पहुचाए

हमेशा आपकी मदद को तत्पर रहते हैं 
। 

भूत प्रेत साधना

अमावस्या के दिन स्नान कर पूर्ण पवित्रता के साथ व्रत रखे । फलाहार करे और लाल वस्त्र धारण करें । सात्विक रूप से प्रेत का चिंतन करे । वो पूर्ण रूप से सहयोगी बन कर मेरे साथ मित्रवत रहे ।

 यही चिंतन आपके मन में होना चाहिए । रात्रि में पीपल वृक्ष के नीचे जाकर पीपल के पांच हरे पत्तों पर पूजा की पांच सुपारी रख कर उनमे प्रेत शक्ति का ध्यान किया जाना चाहिए । फिर लोहबान अगरबत्ती, काले तिल और फूल अर्पित करें और पीपल के पत्तों पर ही दही चावल का भोग गुलाब जल छिड़क कर लगादे और काली हकीक माला से वही खड़े खड़े 11 माला निम्न मन्त्र की करें ।

मन्त्र :-

क्रीं क्रीं सदात्मने भूताय मम मित्र रूपेण
सिद्धिम कुरु कुरु क्रीं क्रीं फट् ॥

और मन्त्र जप के बाद प्रार्थना करे की आप मेरी रक्षा करे और मेरी मित्र रूप में सहायता करे । ये क्रम मात्र 3 अमावस्या तक आप को करना है ।

 अर्थात प्रत्येक अमावस्या को को मात्र 3 बार ऐसा करना है । 3 अमावस्या को सद् रूप में भूत आपके सामने आकार आपकी सहायता का वचन देता है । और 3 वर्ष तक साधक के वश में रहता है ।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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महाबली हनुमान के 5 छोटे मंत्र करें बड़ी से बड़ी मुश्किलों का अंत





महाबली हनुमान के 5 छोटे मंत्र करें बड़ी से बड़ी मुश्किलों का अंत


रुद्रावतार श्री हनुमान को महाबली भी पुकारा जाता है। उनका यह नाम मात्र उनके वज्र के समान बलवान शरीर या अनेक शक्तियों के स्वामी होने के कारण ही नहीं बल्कि युग-युगान्तर से जारी हनुमान भक्ति और उनके प्रति आस्था का वह प्रभाव भी है, जो भक्तों को तन, मन और धन से सबल बनाती आ रही है।

श्री हनुमान भक्ति में विश्वास और आस्था को बल देने वाले ही ऐसे 5 मंत्र यहां बताए जा रहे हैं। चूंकि मानव जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा है, जिसमें दु:ख और सुख आते जाते हैं। इसलिए हर इंसान सुखों की चाहत और दु:खों से बचने के लिए देव उपासना करता है। ऐसे संकट, मुसीबतों और दु:खों से बचने के लिए ही श्री हनुमान के ये मंत्र अचूक माने गए हैं।

शनिवार के दिन श्री हनुमान की उपासना में इन मंत्रों का जप और भी असरदार होता है। क्योंकि शास्त्रों में हनुमान भक्ति ग्रहदोष शांति खासतौर पर शनि दशा के बुरे प्रभाव से बचने के लिए बहुत ही शुभ मानी गई है। इसलिए जानें महाबली हनुमान के इन मंत्रों और श्री हनुमान पूजा की सरल विधि -

- शनिवार के दिन सुबह स्नान करें। इस दिन शरीर, बोल और आचरण की पवित्रता का खास ध्यान रखें।

- देवालय या हनुमान मंदिर में श्री हनुमान की प्रतिमा पर चमेली का तेल और सिंदूर चढ़ाकर गंध, अक्षत, लाल फूल, श्रीफल यानी नारियल अर्पित करें।

- गुग्गल धूप लगाकर लाल आसन पर बैठकर इन हनुमान मंत्रो का जप करें-

- ॐ बलसिद्धिकराय नम:

- ॐ वज्रकायाय नम:

- ॐ महावीराय नम:

- ॐ रक्षोविध्वंसकाराय नम:

- ॐ सर्वरोगहराय नम: 

- मंत्र जप के बाद यथासंभव श्री हनुमान चालीसा पाठ का पाठ करें। श्री हनुमान की दीप आरती करें।

- पूजा, मंत्र जप और आरती के दौरान हुए जाने-अनजाने दोषों के लिए क्षमा प्रार्थना कर सारी परेशानियों और चिंतामुक्ति के लिए कामना करें।

धार्मिक मान्यता है कि श्री हनुमान के इन पांच मंत्रों के असर से रोग, शोक, दोष का अंत हो जाता है। 

चेतावनी -

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 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

विशेष -

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Tuesday, April 2, 2019

मनो वांछित व्यक्ति आकर्षण यन्त्र साधना)




मनो वांछित व्यक्ति आकर्षण यन्त्र साधना)


तंत्र   मे    षट्कर्म   को  एक    उच्च स्थान    मिला हैं  दुर्भाग्य   वश  कतिपय   अनाधिकारियों केइस क्षेत्र मे प्रवेश   के कारण   यह  पूरी   विधा  अनेको    के  द्वारा   गलत  उपयोग  किये जाने  के   कारण  लांछित   सी    हो  गयी  हैं .

पर  अब समय हैं की  एक बार पुनः  इस  विधा का   स्थान  वापिस  इसे  दिलाया   जाए .

  “मारण  मोहन  जो जाने  वो  सारा   ब्रम्हांड  पिछाड़े “  अपने आप  मे   एक मिसाल  हैं .पर यह भी सच हैं की अकारण किसी का  जीवन नष्ट  या  कठिन  कर देने  के  लिए   इन प्रयोगों की अनुमति  नही हैं .

तंत्र  इसका  स्पस्ट   रूप से निषेध करता हैं    क्योंकि  बिना उचित   और सही कारण पर  करने  पर    सफलता   मानलो  कभी मिल  भी जाए   पर उनके  परिणाम  साधक के लिए  .भयंकर   हो सकते हैं  .क्योंकि कार्मिक   परिणाम  तो  साधक  को  भी सहन  करने  ही होंगे .

तंत्र  एक     हजारो  वोल्ट  की  बिजली   जिसमे प्रवाहित  हो रही हैं  उस   बिजली के  खुले   तार की तरह हैं  अगर आपने  अपनी  सीमा का  उलघ्घन   किया  तो  फिर आप   परिणाम आप सहन करने को बाध्य  हो जाए ..फिर  आप  चाहे  तंत्र  ज्ञाता  हो  या न  हो इससे कोई  फर्क नही पड़ता   हैं

पर दूसरी  ओर तंत्र   आपको  गिडगिडाने  वाला   या  सब कुछ सहन करने  वाला   भी   नही  बनने  को कहता हैं जीवन  के  हर क्षण   को कैसे अपनी   मस्ती मे , अपनी शर्तों पर  और  अपने  मे  समर्पित  करा  जाए  यह   भी     तंत्र  कहीं  और किसी भी  विधा के  तुलना  मे कहीं  ज्यादा   स्पस्ट ता  से सामने   रखता हैं .

तंत्र   आपको  पौरुषवान बनाता  हैं . पर यह   दिए  जला कर ,आरती  गा कर , कुछ  देर  भजन मे  लीन  हो कर तो नही हो सकता  न .इसके लिए  साधक बनना   ही पड़ेगा .निश्चय  ही साधक  बनना   कहीं जायदा   कठिन  हैं .पर  जो  उपलब्धियाँ  होती  हैं वह  ठोस  आधार  लिए  होती  हैं   और आपकी   असली पूंजी  होती  हैं .

यह  कोई जरुरी नही हैं कि आप  किसी अनुष्ठान  मे  हैं तो अन्य  प्रयोग नही कर सकते  हैं किसी भी अनुष्ठान के मध्य मे   यदि  उस अनुष्ठान के  मंत्रो के क्रम  मे कोई भी  परिवर्तम किये  बिना ,मंत्र   जप  पूरा  होने के  बाद   एक या  11   दिवसीय   कोई प्रयोग  आप करना  चाहते   हैं तो  आप  तो कर सकते हैं इससे    मूल अनुष्ठान मे  कोई भी वाधा नही  आती है. साथ ही साथ   छोटे छोटे   प्रयोगों मे  सफलता   मिलने  पर   आप  का  आत्म  विश्वास भी कई कई   गुणा  बढाता  जाता  हैं .

किसी  रूठे को मनाने के लिए

ऑफिस  मे  उच्चाधिकारी   को अनुकूल  करने  के  लिए
या  आपकी  परिस्थिति अनुसार    किसी  भी व्यक्ति  को आकर्षण क्रिया  मे कर   अपने कार्य  मे   जो  सामाजिक और मर्यादित  नियमों के अनुकुल  हो इस प्रयोग को कर सकते  हैं .

नियम इस प्रकार     हैं .

किसी  भी  शुभ  दिन  ,प्रातः काल   एक साफ़   सुथरा भोज  पत्र ले ले.

स्याही के लिए  आपको   गोरोचन  मे  थोडा सा जल मिला कर  स्याही जैसा  बना  ले  इसका   ही प्रयोग करना हैं .

इस  यंत्र का  निर्माण करे और  यंत्र के मध्य  जहाँ  नाम लिखा हैं वह  जिस व्यक्ति का  आकर्षण करना हैं उसका  नाम लिखे .

इस  यंत्र को बनाने के  बाद इसका   पूजन  धूप  दीप से करना   हैं .

इस  यन्त्र  को किसी भी  पात्र मे   थोडा सा   घी  रख ले  और उस  घी   ऊपर  रख देना हैं और इस पात्र  को पूजा  स्थान मे  ही  रहने  देना हैं

इसके बाद   आपको   इस मंत्र का   जप  १०८ बार  करना हैं .सात   दिन  तक आपको मंत्र   जप करना   हैं .कोई माला  की आवश्यकता   नही  हैं .

मंत्र :

आकर्षय   महादेवि ............मम प्रियं |
ऐं    त्रिपुरे  देव देवेशि  तुभ्यम   दास्यामि   याचितं ||

AAKARSHAY  MAHADEVI ……. MAM  PRIYAM |
AIM  TRIPURE   DEV DEVESHI  TUBHYAM  DAASYAAMI   YACHITAM ||

मंत्र मे  जहां   रिक्त स्थान  हैं वहां पर   उस  व्यक्ति का  नाम या पूरा नाम   जो भी आप  चाहे  उच्चारित करें .

लगभग  ७  या  ११  दिन मे   आपको  मनो वांछित  परिणाम  प्राप्त  हो जाना   चहिये .कार्य पूरा  होने के बाद   आप इस पात्र को यन्त्र सहित को किसी भी  स्वच्छ  जल मे प्रवाहित  कर सकते हैं .

यह एक सरल   प्रयोग  हैं इसको  जब आवश्यकता    हो  करके  लाभ उठाना   ही  चाहिये .

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

 बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

विशेष -

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

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महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

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