Saturday, November 18, 2017

तंत्र बाधा निवारक : छिन्नमस्ता साधना

तंत्र बाधा निवारक : छिन्नमस्ता साधना








 संपन्न करें

॥ श्रीं ह्रीं क्लीं ऎं व ज्र वै रो च नी यै हुं हुं फ़ट स्वाहा ॥

नोट:-

यह साधना गुरुदीक्षा लेकर गुरु अनुमति से ही करें....

यह साधना एक प्रचंड साधना है.
इस साधना में मार्गदर्शक गुरु का होना जरूरी है.
दीक्षा लेने के बाद ही इस साधना को करें.
कमजोर मानसिक स्थिति वाले बच्चे तथा महिलायें इसे ना करें क्योंकि इस साधना के दौरान डरावने अनुभव हो सकते हैं.

प्रबल से प्रबल तंत्र बाधा की यह अचूक काट है.
हर प्रकार के तांत्रिक प्रयोग को, प्रयोग करने वाले सहित ध्वस्त करने में इस साधना का कोई जवाब नहीं है.

राज गुरु जी

महाविद्या आश्रम

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मोबाइल नं. : - 09958417249

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Wednesday, November 15, 2017

नवनाथ-शाबर-मन्त्र

नवनाथ-शाबर-मन्त्र









“ॐ नमो आदेश गुरु की। ॐकारे आदि-नाथ, उदय-नाथ पार्वती। सत्य-नाथ ब्रह्मा। सन्तोष-नाथ विष्णुः, अचल अचम्भे-नाथ। गज-बेली गज-कन्थडि-नाथ, ज्ञान-पारखी चौरङ्गी-नाथ। माया-रुपी मच्छेन्द्र-नाथ, जति-गुरु है गोरख-नाथ। घट-घट पिण्डे व्यापी, नाथ सदा रहें सहाई। नवनाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई। ॐ नमो आदेश गुरु की।।”

विधिः-

 पूर्णमासी से जप प्रारम्भ करे। जप के पूर्व चावल की नौ ढेरियाँ बनाकर उन पर ९ सुपारियाँ मौली बाँधकर नवनाथों के प्रतीक-रुप में रखकर उनका षोडशोपचार-पूजन करे। तब गुरु, गणेश और इष्ट का स्मरण कर आह्वान करे। फिर मन्त्र-जप करे।

प्रतिदिन नियत समय और निश्चित संख्या में जप करे। ब्रह्मचर्य से रहे, अन्य के हाथों का भोजन या अन्य खाद्य-वस्तुएँ ग्रहण न करे। स्वपाकी रहे। इस साधना से नवनाथों की कृपा से साधक धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है।

उनकी कृपा से ऐहिक और पारलौकिक-सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

विशेषः-’

शाबर-पद्धति’ से इस मन्त्र को यदि ‘उज्जैन’ की ‘भर्तृहरि-गुफा’ में बैठकर ९ हजार या ९ लाख की संख्या में जप लें, तो परम-सिद्धि मिलती है और नौ-नाथ प्रत्यक्ष दर्शन देकर अभीष्ट वरदान देते हैं।

राज गुरु जी

महाविद्या आश्रम

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Tuesday, November 14, 2017

हरिद्रा माला

प्राण प्रतिष्ठित हरिद्रा माला

हरिद्रा माला










मित्रों आज के सुचना युग में वैसे तो लोग काफी जानकारी रखते हैं पर हरिद्रा यानि हल्दी का सर्वाधिक उपयोग खाने में ही करते हैं। इसी हल्दी के कुछ अन्य उपयोग आज आपको बता रहा हूँ

 1. माँ पीताम्बरा यानि माँ बगुलामुखी की  साधना में जप हेतु हल्दी माला का प्रयोग होता है। इसके साथ ही माँ के शत्रुनाश या बाधानाश और कामनापूर्ति अनुष्ठान में भी इसका प्रयोग होता है।

 2. जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो या शुभफल न दे रहा हो उन्हें हल्दी माला धारण करनी चाहिए।

बृहस्पति देव गुरु हैं बुद्धि शिक्षा पुत्र और धन के दाता हैं। 3. धनु और मीन लग्न एवं राशी वालों को ये माला धारण करनी चाहिए।

4. जो बच्चे बेहद चंचल या गुस्सैल हों और पढाई में बिलकुल मन न लगाते हों उन्हें ये माला पहनानी चाहिए।

5. भगवान श्री गणेश जी की साधना में भी हरिद्रा माला अतिफल्दायी है।

 6. क़र्ज़ नाश हेतु हरिद्रा गणपति साधना में ये माला सर्वोपयुक्त है। जो ये साधना करने में सक्षम न हो उन्हें भगवन गणेश को ये माला पहना कर कर्जमुक्ति हेतु ऋण नाशन गणपति स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

7. जिन लोगों का लीवर कमजोर हो या बार बार पीलिया हो जाता हो अथवा पीलिया लगातार रिपोर्ट में आता हो उन्हें पुनर्नवा की माला के साथ हरिद्रा की माला पहननी चाहिए।

8. धन सम्बन्धी समस्याओं के लिए हरिद्रा माला पर ताम्बे का श्रीयंत्र स्थापित कर पूजन करें।

 9. त्वचा रोगों से ग्रसित व्यक्ति नहाने से आधा घंटा पूर्व ये माला पानी की बाल्टी में डाल दें फिर उस पानी से नहा लें और माला धारण कर लें।

 10. ऊपरी बाधा से ग्रसित या बार बार पीड़ित होने वाले व्यक्ति को माँ बगुलामुखी के मन्त्र से अभिमंत्रित माला धारण करनी चाहिए।

11. घर में सुख शांति व् धार्मिक वातावरण बनाने के लिए ईशान यानि उत्तर पूर्व कोण पर श्रीकृष्ण की प्रतिमा या फोटो स्थापित कर पर हरिद्रा माला पहनानी चाहिए।

माला  दाक्षिना मूल्य   500 रूपये  मात्र

राजगुरु जी

महाविद्या आश्रम

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Sunday, November 12, 2017

शत्रु बाधा निवारक बगलामुखी प्रयोग

शत्रु बाधा निवारक बगलामुखी प्रयोग








वर्तमान समय में हर व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई शत्रु है.जिसके कारण जीवन में परेशानी बढती ही जाती है.और कभी कभी तो ये शत्रु हम पर इतने हावी हो जाते है की जीवन में म्रत्यु तुल्य कष्ट होने लगता है.

प्रस्तुत प्रयोग इसी विषय पर है जिसके करने मात्र से आपको निम्न समस्याओ से स्वतः मुक्ति मिल जाएगी। १. कोई न्यायालय में आपके खिलाफ मुकदमा चल रहा हो तो .

२. कोई शत्रु लगातार षड़यंत्र रच रहा हो तो.

 ३ . घर तथा परिवार का कोई अनिष्ट करना चाह रहा हो तो.

४. कार्य क्षेत्र में अधिकारी या सह कर्मी कोई कष्ट दे रहे हो तो.

५. निरंतर जीवन में बाधाए आ रही हो तो.

६ . आप पर या परिवार पर कोई तंत्र प्रयोग किया गया हो तो. उपरोक्त सभी समस्याओ से मुक्ति दिलाता है  ये,बगलामुखी प्रयोग।

आप ये प्रयोग किसी भी रविवार की रात्रि ११ बजे के बाद करे.आपके आसन वस्त्र पीले होंगे।तथा दिशा होगी दक्षिण।

अपने सामने बाजोट पर पिला वस्त्र बिछा दे,और उस पर एक पिली सरसों की ढेरी बना दे. अब एक सुपारी लीजिये और उसे हल्दी से
रंजित कर दीजिये और उस पर कच्चे सूत का धागा लपेटे जो की पहले से ही हल्दी से रंग लिया गया हो.सुपरि को पूरा लपेट देना है धागे से, अब उस सुपारी को,सरसों की ढेरी पर स्थापित करे.तथा सुपारी का सामान्य पूजन करे.

भोग में कोई पिली मिठाई अर्पण करे. सरसों के तेल का दीपक लगाये जो की मिटटी का हो,और उसकी बत्ती भी हल्दी से रंगी हुई हो.अब संकल्प ले की किस कार्य के लिये आप ये प्रयोग कर रहे है.

इसके बाद निम्न मंत्र को पड़ते हुए एक एक चुटकी हल्दी सुपारी पर अर्पण करे,ऐसा आपको ३६ बार करना है. ह्लीं बगलामुखी ह्लीं फट  HLEEM BAGLAMUKHI HLEEM PHAT

इसके बाद सुपारी की और देखते हुए स्थिर भाव से, निम्न मंत्र का बिना किसी माला के एक घंटे तक जाप करे. हूं हूं ह्लीं ह्लीं हूं हूं फट  HOOM HOOM HLEEM HLEEM HOOM HOOM PHAT

इसमें जप वाचिक होंगे।जब जाप पूर्ण हो जाये तब पुनः माँ से प्रार्थना करे.अगले दिन सरसों ,सुपारी,दीपक भोग भी उसी पीले वस्त्र में बांध कर,किसी निर्जन स्थान पर रख आये,और एक दीपक वहा जलाकर रख आये.

य़े दीपक भी मिटटी का होगा और,तेल सरसों का होगा। हो सके तो समस्त सामग्री को जमीन में गाड देना चाहिए।और दीपक गाडी हुयी जगह के ऊपर जलाकर आना चाहिए।अन्यथा रख कर भी आ सकते है.प्रयोग के पहले गुरु गणपति पूजन अवश्य करे.

माँ आपकी समस्त समस्याओका अंत करे

महाविद्या आश्रम

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Saturday, November 11, 2017

केसे करें मां बगलामुखी पूजन…??

केसे करें मां बगलामुखी पूजन…??









माँ बगलामुखी की पूजा हेतु इस दिन प्रात: काल उठकर नित्य कर्मों में निवृत्त होकर, पीले वस्त्र धारण करने चाहिए. साधना अकेले में, मंदिर में या किसी सिद्ध पुरुष के साथ बैठकर की जानी चाहिए.

 पूजा करने के लुए पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने के लिए आसन पर बैठें चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवती बगलामुखी का चित्र स्थापित करें.

इसके बाद आचमन कर हाथ धोएं। आसन पवित्रीकरण, स्वस्तिवाचन, दीप प्रज्जवलन के बाद हाथ में पीले चावल, हरिद्रा, पीले फूल और दक्षिणा लेकर संकल्प करें.

 इस पूजा में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवशयक होता है मंत्र- सिद्ध करने की साधना में माँ बगलामुखी का पूजन यंत्र चने की दाल से बनाया जाता है और यदि हो सके तो ताम्रपत्र या चाँदी के पत्र पर इसे अंकित करें.

इस अवसर पर मां बगलामुखी को प्रसन्न करने के लिए इस प्रकार पूजन करें-

साधक को माता बगलामुखी की पूजा में पीले वस्त्र धारण करना चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों में निवृत्त होकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवती बगलामुखी का चित्र स्थापित करें। इसके बाद आचमन कर हाथ धोएं। आसन पवित्रीकरण, स्वस्तिवाचन, दीप प्रज्जवलन के बाद हाथ में पीले चावल, हरिद्रा, पीले फूल और दक्षिणा लेकर इस प्रकार संकल्प करें-

  संकल्प--------

ऊँ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु: अद्य……(अपने गोत्र का नाम) गोत्रोत्पन्नोहं ……(नाम) मम सर्व शत्रु स्तम्भनाय बगलामुखी जप पूजनमहं करिष्ये। तदगंत्वेन अभीष्टनिर्वध्नतया सिद्ध्यर्थं आदौ: गणेशादयानां पूजनं करिष्ये।

यह हें माँ बगलामुखी मंत्र —-विनियोग -

श्री ब्रह्मास्त्र-विद्या बगलामुख्या नारद ऋषये नम: शिरसि।
त्रिष्टुप् छन्दसे नमो मुखे। श्री बगलामुखी दैवतायै नमो ह्रदये।
ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये। स्वाहा शक्तये नम: पाद्यो:।
ऊँ नम: सर्वांगं श्री बगलामुखी देवता प्रसाद सिद्धयर्थ न्यासे विनियोग:।

इसके पश्चात आवाहन करना चाहिए….

ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं स्तम्भिनि सकल मनोहारिणी अम्बिके इहागच्छ सन्निधि कुरू सर्वार्थ साधय साधय स्वाहा।

अब देवी का ध्यान करें इस प्रकार…..

सौवर्णामनसंस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लसिनीम्
हेमावांगरूचि शशांक मुकुटां सच्चम्पकस्रग्युताम्
हस्तैर्मुद़गर पाशवज्ररसना सम्बि भ्रति भूषणै
व्याप्तांगी बगलामुखी त्रिजगतां सस्तम्भिनौ चिन्तयेत्।

इसके बाद भगवान श्रीगणेश का पूजन करें। नीचे लिखे मंत्रों से गौरी आदि षोडशमातृकाओं का पूजन करें-

गौरी पद्मा शचीमेधा सावित्री विजया जया।
देवसेना स्वधा स्वाहा मातरो लोक मातर:।।
धृति: पुष्टिस्तथातुष्टिरात्मन: कुलदेवता।
गणेशेनाधिकाह्योता वृद्धौ पूज्याश्च षोडश।।

इसके बाद गंध, चावल व फूल अर्पित करें तथा कलश तथा नवग्रह का पंचोपचार पूजन करें।
तत्पश्चात इस मंत्र का जप करते हुए देवी बगलामुखी का आवाह्न करें-

नमस्ते बगलादेवी जिह्वा स्तम्भनकारिणीम्।
भजेहं शत्रुनाशार्थं मदिरा सक्त मानसम्।।

आवाह्न के बाद उन्हें एक फूल अर्पित कर आसन प्रदान करें और जल के छींटे देकर स्नान करवाएं व इस प्रकार पूजन करें-

गंध-

 ऊँ बगलादेव्यै नम: गंधाक्षत समर्पयामि। का उच्चारण करते हुए बगलामुखी देवी को पीला चंदन लगाएं और पीले फूल चड़ाएं।

पुष्प-

ऊँ बगलादेव्यै नम: पुष्पाणि समर्पयामि। मंत्र का उच्चारण करते हुए बगलामुखी देवी को पीले फूल चढ़ाएं।

धूप-

ऊँ बगलादेव्यै नम: धूपंआघ्रापयामि। मंत्र का उच्चारण करते हुए बगलामुखी देवी को धूप दिखाएं।

दीप-

 ऊँ बगलादेव्यै नम: दीपं दर्शयामि। मंत्र का उच्चारण करते हुए बगलामुखी देवी को दीपक दिखाएं।

नैवेद्य-

ऊँ बगलादेव्यै नम: नैवेद्य निवेदयामि। मंत्र का उच्चारण करते हुए बगलामुखी देवी को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।

अब इस प्रकार प्रार्थना करें-

जिह्वाग्रमादाय करणे देवीं, वामेन शत्रून परिपीडयन्ताम्।
गदाभिघातेन च दक्षिणेन पीताम्बराढ्यां द्विभुजां नमामि।।

अब क्षमा प्रार्थना करें-

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि।।
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे।।

अंत में माता बगलामुखी से ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं से मुक्ति की प्रार्थना करें।

बगलामुखी साधना की सावधानियां :-

1. बगलामुखी साधना के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यधिक आवश्यक है।

2. इस क्रम में स्त्री का स्पर्श, उसके साथ किसी भी प्रकार की चर्चा या सपने में भी उसका आना पूर्णत: निषेध है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपकी साधना खण्डित हो जाती है।

3. किसी डरपोक व्यक्ति या बच्चे के साथ यह साधना नहीं करनी चाहिए। बगलामुखी साधना के दौरान साधक को डराती भी है। साधना के समय विचित्र आवाजें और खौफनाक आभास भी हो सकते हैं इसीलिए जिन्हें काले अंधेरों और पारलौकिक ताकतों से डर लगता है, उन्हें यह साधना नहीं करनी चाहिए।

4. साधना से पहले आपको अपने गुरू का ध्यान जरूर करना चाहिए।

5. मंत्रों का जाप शुक्ल पक्ष में ही करें। बगलामुखी साधना के लिए नवरात्रि सबसे उपयुक्त है।

6. उत्तर की ओर देखते हुए ही साधना आरंभ करें।

7. मंत्र जाप करते समय अगर आपकी आवाज अपने आप तेज हो जाए तो चिंता ना करें।

8. जब तक आप साधना कर रहे हैं तब तक इस बात की चर्चा किसी से भी ना करें।

9. साधना करते समय अपने आसपास घी और तेल के दिये जलाएं।

10. साधना करते समय आपके वस्त्र और आसन पीले रंग का होना चाहिए।

जय मां पीताम्बरा ।।।

राजगुरु जी

महाविद्या आश्रम

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Tuesday, November 7, 2017

आकर्षण हेतु हनुमद्-मन्त्र-तन्त्र`

आकर्षण हेतु हनुमद्-मन्त्र-तन्त्र











ॐ अमुक-नाम्ना ॐ नमो वायु-सूनवे झटिति आकर्षय-आकर्षय स्वाहा।”

विधि-

 केसर, कस्तुरी, गोरोचन, रक्त-चन्दन, श्वेत-चन्दन, अम्बर, कर्पूर और तुलसी की जड़ को घिस या पीसकर स्याही बनाए। उससे द्वादश-दल-कलम जैसा ‘यन्त्र’ लिखकर उसके मध्य में, जहाँ पराग रहता है, उक्त मन्त्र को लिखे। ‘अमुक’ के स्थान पर ‘साध्य’ का नाम लिखे।

 बारह दलों में क्रमशः निम्न मन्त्र लिखे- १॰ हनुमते नमः, २॰ अञ्जनी-सूनवे नमः, ३॰ वायु-पुत्राय नमः, ४॰ महा-बलाय नमः, ५॰ श्रीरामेष्टाय नमः, ६॰ फाल्गुन-सखाय नमः, ७॰ पिङ्गाक्षाय नमः, ८॰ अमित-विक्रमाय नमः, ९॰ उदधि-क्रमणाय नमः, १०॰ सीता-शोक-विनाशकाय नमः, ११॰ लक्ष्मण-प्राण-दाय नमः और १२॰ दश-मुख-दर्प-हराय नमः।

यन्त्र की प्राण-प्रतिष्ठा करके षोडशोपचार पूजन करते हुए उक्त मन्त्र का ११००० जप करें। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए लाल चन्दन या तुलसी की माला से जप करें। आकर्षण हेतु अति प्रभावकारी है।

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Thursday, November 2, 2017

शाबर रक्षा नारियल

शाबर रक्षा नारियल

















आपने देखा होगा की लगभग सभी दुकानों में लाल कपडे में नारियल बांधकर लटकाया जाता है, कई घरों में भी ऐसा किया जाता है. यह स्थान देवता की पूजा और गृह रक्षा के लिए किया जाता है.

नवरात्रि पर अपने घर मे गृह शांति और रक्षा के लिए एक विधि प्रस्तुत है जिसके द्वारा आप अपने घर पर पूजन करके नारियल बाँध सकते हैं.

आवश्यक सामग्री :-

लाल कपडा सवा मीटर
नारियल
सामान्य पूजन सामग्री
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यदि आर्थिक रूप से सक्षम हों तो इसके साथ रुद्राक्ष/ गोरोचन/केसर भी डाल सकते हैं.
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वस्त्र/आसन लाल रंग का हो तो पहन लें यदि न हो तो जो हो उसे पहन लें.

सबसे पहले शुद्ध होकर आसन पर बैठ जाएँ. हाथ में जल लेकर कहें " मै [अपना नाम ] अपने घर की रक्षा और शांति के लिए यह पूजन कर रहा हूँ मुझपर कृपा करें और मेरा मनोरथ सिद्ध करें."

इतना बोलकर हाथ में रखा जल जमीन पर छोड़ दें. इसे संकल्प कहते हैं.

नारियल पर मौली धागा [अपने हाथ से नापकर तीन हाथ लम्बा तोड़ लें.] लपेट लें.

लपेटते समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करें." ॐ श्री विष्णवे नमः"
अब अपने सामने लाल कपडे पर नारियल रख दें. पूजन करें.

नारियल के सामने निम्नलिखित मंत्र का 1008 बार जाप करें ऐसा कम से कम तीन दिन तक करें. पूरी नवरात्रि कर सकें तो और भी बेहतर है.

"ॐ नमो आदेश गुरून को इश्वर वाचा अजरी बजरी बाडा बज्जरी मैं बज्जरी को बाँधा, दशो दुवार छवा और के ढालों तो पलट हनुमंत वीर उसी को मारे, पहली चौकी गणपति दूजी चौकी में भैरों, तीजी चौकी में हनुमंत,चौथी चौकी देत रक्षा करन को आवे श्री नरसिंह देव जी शब्द सांचा पिंड कांचा फुरो मंत्र इश्वरी वाचा"

अब इस नारियल को लाल कपडे में लपेट ले. आपका रक्षा नारियल तय्यार है. इसे आप दशहरा, दीपावली, पूर्णिमा, अमावस्या या अपनी सुविधानुसार किसी भी दिन घर की छत में हुक हो तो उसपर बांधकर लटका दें.

यदि न हो तो पूजा स्थान में रख लें. नित्य पूजन के समय इसे भी अगरबत्ती दिखाएँ.

महाविद्या आश्रम में इस depawali के shubh मुहूर्त  में इस शाबर रक्षा नारियल का nirman किया जा रहा हैं जिस  किसी को भी शाबर रक्षा नारियल मांगना  हैं तो आप सब मेरे   व्हाट्सप्प न०;- 9958417249. पर संपर्क  कर सकते हैं .

दक्षिणा  न्यौच्छावर.   550 .रुपये

राजगुरु जी

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...