Tuesday, October 23, 2018

इच्छाशक्ति जागरण कमला प्रयोग





इच्छाशक्ति जागरण कमला प्रयोग       

क्रिया ज्ञान और इच्छा इन तीनों को हमारी आतंरिक मुख्य शक्तिया कहा गया है. वास्तव मे हमारे सभी प्रकार के क्रिया कलाप इन तिन शक्तियो पर ही आधारित रहते है. ज्ञान शक्ति इच्छा तथा इच्छा से क्रिया और उस क्रिया से निहित नूतन ज्ञान इस प्रकार से यह आतंरिक शक्ति चक्र नित्य चलता ही रहता है.

 इन शक्तियो को सामान्य द्रष्टि से देखना हमारी न्यूनता ही कही जा सकती है. क्यों की हमारे ग्रन्थ यह कहते है की यह हमारी तिन आतंरिक मुख्य शक्तिया है तब इसके पीछे गुढ़ चिंतन तथा अनगिनत रहस्य होने स्वाभाविक है. इन शक्तियो के त्रिभाव ज्ञान का सत्, इच्छा का राजस् तथा क्रिया का तामस है. यहाँ हम बात करेंगे इच्छा शक्ति की.

अगर मनुष्य मे इच्छा शक्ति ही ना रहे तो किसी भी प्रकार की कोई भी इच्छा व्यक्ति मे उत्तपन होगी ही नहीं. कई बार कहा जाता है की इछाओ का शमन उत्तम है. लेकिन ऐसा नहीं है, अगर ऐसा ही होता तो हमारे ऋषि मुनियो ने इसे हमारी मुख्य शक्ति क्यों कहा. वास्तव मे इच्छा शक्ति ही नूतन क्रिया को जन्म देती है. जेसे की हमें भूख लगी है तो हम खाना ढूंढे या बनाने की प्रक्रिया मे संलग्न होंगे.

 इसी क्रिया मे हमें जो तृप्ति का जो ज्ञान मिला वह हमारी ज्ञान शक्ति है. और इस प्रकार हर एक कार्य मे यह क्रिया सलग्न रहती ही है. लेकिन वास्तव मे हमारी यह शक्तिया अपने आप मे सुषुप्त अवस्था मे है. इस लिए इन शक्तियो का जितना हमें फायदा भौतिक तथा आध्यात्मिक स्तर पर मिलना चाहिए वह नहीं मिल पता.

हमारे पास जितना भी ज्ञान है; ज्ञान शक्ति है, उस ज्ञान को हम इच्छा शक्ति के रूप मे परावर्तित नहीं कर सकते है परिणाम स्वरुप हमें उससे सबंधित क्रिया को नहीं कर सकते और इसका परिणाम हमारे ज्ञान के विकास मे अवरोध होता है.

 जेसे हर व्यक्ति को पता है की एक न एक दिन मृत्यु अवश्यम्भी है तथा जीवन मे पूर्णता प्राप्त करना ज़रुरी है ताके क्षणिक सुख को आनंद मे बदल सके. लेकिन इस तथ्य का ज्ञान और ज्ञान शक्ति होते हुए भी वह पूर्णता की इच्छा शक्ति का विकास नहीं कर पता है. पूर्णता की क्रिया के लिए जिस प्रकार की इच्छा शक्ति चाहिए वह नहीं
विकसित हो पाती. और पूरा जीवन यु ही निकल जाता है. यह एक उदहारण था. इस शक्तियो को जीवन के गृहस्थ तथा आध्यात्मिक दोनों पक्षों मे समान रूप से जोड़ कर मंथन करने पर अवश्य ही इनकी महत्ता स्पष्ट हो जाती है.

इच्छा शक्ति के विकास के लिए यहाँ पर भगवती कमला से सबंधित प्रयोग दिया जा रहा है. महाविद्या कमला अपने आप मे इच्छा तत्व पर अपना प्रभुत्व रखती है. इस प्रयोग को करने के बाद साधक की इच्छा शक्ति मे विकास होता है तथा ज्ञान तथा क्रिया के बिच मे जो फासला है, या यु कहा जाए की जिस चीज़ की आकांशा है तथा उससे सबंधित जो प्रक्रिया की भावभूमि है उन दोनों के बिच का अंतर कम करता है.

 साधक को इस महत्वपूर्ण प्रयोग करने पर सभी क्षेत्र मे विजय प्राप्ति करने की सामर्थ्य प्राप्त कर सकता है. इस प्रयोग को साधक शुक्र वार से करे. वस्त्र और आसान लाल या सफ़ेद हो.

दिशा उत्तर हो. समय रात्री काल मे १० बजे के बाद का रहे. अपने सामने देवी कमला का चित्र या यंत्र स्थापित करे तो उत्तम है. उसके बाद घी का दीपक लगाए तथा सदगुरुदेव और देवी कमला को इच्छाशक्ति मे विकास तथा साधना मे सफलता के लिए प्रार्थना करे. इसके बाद साधक निम्न मंत्र की २१ माला जाप कमलगट्टे की माला या मूंगा माला से करे. यह साधना ११ दिन की है

ॐ क्लीं जगत्प्रसूत्यै नमः

आखरी दिन साधना समाप्ति पर माला को पहन ले. एक महीने बाद माला को किसी मंदिर मे चडा दे.

राजगुरु जी

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

 (रजि.)

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Sunday, October 21, 2018

यकीन नहीं होता कि रावण के इतने मंदिर हैं भारत में, आप भी देखिए





यकीन नहीं होता कि रावण के इतने मंदिर हैं भारत में, आप भी देखिए

देवी सीता हरण और भगवान राम से युद्ध करने के कारण रावण को रामायाण का खलनायक माना जाता है और दशहरे के दिन इसके पुतले को जलाकर अधर्म पर धर्म के विजय का उत्सव मनाया जाता है। लेकिन भारत में कई जगह ऐसे हैं जहां रावण के पुतले को जलाया नहीं जाता है बल्कि रावण की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं रामायण के इस खलनायक का देश के कई भागों में मंदिर भी है। आइये देखें कहां कैसा है रावण का मंदिर।

मध्य प्रदेश के विदिशा का रावणगांव के इस मंदिर को देखिए। यहां रावण की पूजा और उसके नाम की आरती भी होती है। मान्यता है रावण कान्यकुब्ज ब्राह्मण था और गांववासी मानते हैं कि वह रावण के वंशज हैं इसलिए रावण बाबा की पूजा करते हैं।

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में स्थित यह है दशानन मंदिर। इस मंदिर में दशानन रावण की पूजा होती है। मंदिर की खूबी है कि इसका द्वार सिर्फ नवरात्र में खुलता है इसके बाद पूरे एक साल के लिए इसका द्वार बंद हो जाता है। इसलिए नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में एक मंदिर है। इस मंदिर में कई देवी-देवताओं के साथ महाभारत और रामयाण काल के असुरों की भी मूर्तियां है। इनमें रावण की भी मूर्ति है मंदिर में आने वाले श्रद्धालु यहां रावण की भी पूजा करते हैं।

आंध्रप्रदेश के काकिनाडा का यह है रावण मंदिर। मंदिर के द्वार पर ही आपको दस सिरों वाला रावण खड़ा दिखेगा। इस मंदिर रावण के अराध्य भगवान शिव भी विराजमान हैं

हिमाचल प्रदेश एक मंदिर है जिसे बैजनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा होती है। माना जाता है कि यहीं पर रावण ने भगवान शिव को अपने दस सिर अर्पित करके प्रसन्न किया था। रावण को शिव का परम भक्त मानकर यहां रावण दहन नहीं किया जाता है बल्कि उसकी पूजा की जाती है।

राज गुरु जी

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महाविद्या आश्रम: दारिद्र्य नाशक धूमावती साधना





महाविद्या आश्रम: दारिद्र्य नाशक धूमावती साधना



जीवन में कई बार ऐसे पल आ जाते है की हम निराश हो जाते है,अपनी गरीबी से अपनी तकलीफों से,और इस बात को नहीं नाक...

दारिद्र्य नाशक धूमावती साधना जीवन में कई बार ऐसे पल आ जाते है की हम निराश हो जाते है,अपनी गरीबी से अपनी तकलीफों से,और इस बात को नहीं नाकारा जा सकता की हर इन्सान को धन की आवश्यकता होती है.

 जीवन के ९९ % काम धन के आभाव में अधूरे है यहाँ तक की साधना करने के लिए भी धन लगता है,तो क्यों और कब तक बैठे रहोगे इस गरीबी का रोना लेकर क्यों ना इसे उठा कर फेक दिया जाये जीवन से.मेरे सभी प्यारे भाइयो और बहनों के लिए एक विशेष साधना दे रहा हु जिससे उनके आर्थिक कष्ट माँ की कृपा से समाप्त हो जायेंगे.ये मेरी अनुभूत साधना है आप संपन्न करे और माँ की कृपा के पात्र बने.

 साधना सामग्री. 

एक   धूमावती यन्त्र  सूपड़ा,स्फटिक या तुलसी माला. 

विधि: 

यह साधना धूमावती जयंती से आरम्भ करे,समय रात्रि १० बजे का होगा,आप सफ़ेद वस्त्र धारण कर सफ़ेद आसन पर पूर्व मुख कर बैठ जाये.

सामने बजोट पर सूपड़ा रख कर उसमे सफ़ेद वस्त्र बिछा दे फिर उसमे धूमावती यन्त्र स्थापित करे,इसके बाद गाय के कंडे से बनी भस्म यन्त्र पर अर्पण करे घी का दीपक जलाये,पेठे का भोग अर्पण करे,माँ से प्रार्थना करे की में यह साधना अपनी दरिद्रता से मुक्ति के लिए कर रहा हु आप मेरी साधना को सफलता प्रदान करे तथा मेरे सभी कष्टों को दूर कर दे.

इसके बाद निम्न मंत्र की एक माला करे 

ॐ धूम्र शिवाय नमः इसके बाद धूं धूं धूमावती ठह ठह

 की २१ माला करे.फिर पुनः एक माला पहले वाले मंत्र की करे.जप के बाद दिल से माँ से प्रार्थना करे और इस साधना को २१ दिन तक करे.

साधना पूरी होने के बाद सुपडे को यन्त्र सहित उठाकर माँ से प्रार्थना करे की माँ आप हमारी सभी पापो को क्षमा करे और आज आप हमारे जीवन के सारे दुःख सारी दरिद्रता को आपके इस पवित्र सुपडे में भर के ले जाये है माँ हमारे जीवन में कभी दरिद्रता ना लोटे ऐसी दया करे.

इसके बाद.सुपडे और यन्त्र को जल में प्रवाहित कर दे या किसी निर्जन स्थान में रख दे.निश्चित माँ की आप पर कृपा बरसेगी और जीवन की दरिद्रता कोसो दूर चली जाएगी.साधना के पहले गुरुदेव पूजन तथा गणपति पूजन करे ये हर बार बताना आवश्यक नहीं है.

राज गुरु जी

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

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Saturday, October 20, 2018

वशीकरण चमत्कारी प्रयोग






वशीकरण  चमत्कारी प्रयोग 

सामग्री   : -  

मँत्रसिद्धि प्राण प्रतिष्ठा युक्त वशीकरण यंत्र  . श्रीयंत्र . कनक धारा यंत्र . कुबेर यंत्र  सभी यंत्र भोजपत्र पर निर्मित हो . केशर . धूप . देशी घी का . अगरबत्ती . गुलाब का इत्र .

माला   : -    बैजन्ती माला .

समय   : -    दिन  या रात्रि  का कोई भी शुभ समय .

आसन  :  -   सफेद रंग का सूती आसन .

दिशा    :  -    पूर्व दिशा .

अवधि  : -     ग्यारह या 18 दन 

मंत्र      : -     ॐ  नमो कुबेराय वैश्रवणाय

                अक्षय    समृद्धि  देहि  देहि कनक धारायें नम : 

प्रयोग   : -   

यह उत्तम और अक अनुभूत प्रयोग  हैं . साधक को चाहिए कि वह किसी भी रविवार से यह प्रयोग करें . सामने  सफेद वस्त्र  बिछाकर  बीच मॆ कुबेर यंत्र और वशीकरण यँत्र . बायीं  तरफ़ श्री यंत्र  तथा दाहिनी तरफ़ कनक धारा यंत्र रख दे . 

सभी यंत्रों पर  इत्र का लेप करें और उनपर केशर आदि से तिलक कर पुष्प चढ़ाये और विधिवत रूप से पूजा आदि करके फिर जाप शुरू कर दें .

    जब मंत्र जाप पूरा हो जाऐं  तो तीनो यंत्रों को इसी क्रम  से पूजा घर मैं रख दें . और वशीकरण यन्त्र को लाल कपड़े मॆ रख कर जेब मॆ रख  ले . 

तो जीवन मैं किसी प्रकार की  कोई कमी नही रहती और सभी दृष्टियों से सुख -  समृद्धि  का अटूट बना रहता हैं . और जिसका भी वशीकरण करना होता होता हैं वह सदैव आप का अपना बनकर रहता हैं . जब भी अपने प्रेमी - प्रेमिका के  पास मिलने जाना हो तो वह  वशीकरण यंत्रणा और इत्र लगाकर जाऐँ  . तो गोली की तरह असर होगा  .

यह अक अनुभूत और परीक्षित प्रयोग हैं .

नोट    : -  

कोई भी साधना करने से पहले अपने गुरु जी या किसी योग्य साधक के मार्गदर्शन मॆ ही साधना सम्पन्न करें .साधना मॆ किसी भी प्रकार से गलत दुरपयोग करने पर साधक  खुद जिम्मेदार होगा 

 राज गुरु जी

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 (रजि.)

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Friday, October 19, 2018

महाविद्या आश्रम: सिद्ध जप माला

महाविद्या आश्रम: सिद्ध जप माला: सिद्ध जप माला मित्रो आप सब जनते हे कोई भी मन्त्र करने के लिए एक जप माला की आवश्कता होती हे । परन्तु क्या आप ये जानते हे की...

सिद्ध जप माला






सिद्ध जप माला

मित्रो आप सब जनते हे कोई भी मन्त्र करने के लिए एक जप माला की आवश्कता होती हे । परन्तु क्या आप ये जानते हे की यह माला शास्त्र के अनुसार सम्पूर्ण रूप से प्राण प्रतिष्टित और मंत्र से सिद्ध होनी आवश्यक हे अन्यथा किये गए जप का फल साधक को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं होता और साधक की महेनत व्यर्थ जाती हे ।।

परन्तु आप चिंता मत करे हमने आपके लिए वैदिक ब्रह्मिनो के द्वारा प्राण प्रतिष्टित और सम्पूर्ण रूप से मन्त्र शक्ति से चैतन्य युक्त कर तैयार की हे और इस माला का मुल्य भी बहोत सामान्य रक्खा गया हे । कोई भी व्यक्ति यह माला को घर बैठे ही प्राप्त कर शकता हे ।।

विशेष नोध । आपके नाम से प्राण प्रतिष्टित माला का उपयोग आप स्वयं ही करे किसी और को मत करने दे अन्यथा जप का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा ।।

सिर्फ आपको अपना ऑर्डर निचे दिए नंबर पर sms कर या कोल कर बुक करका शकते हे । sms करने वाले अपना पूरा पता एवं पिन कोड अवश्य लिखे ।।

सिद्ध जप माला की तस्वीर यहाँ निचे दी गई हे ....

सिद्ध जप माला । प्रसादी मुल्य । Rs 550 /-
पोस्टल चार्जिस एक्स्ट्रा । Rs 50/-

राजगुरु जी

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शाबर रक्षा नारियल





शाबर रक्षा नारियल

आपने देखा होगा की लगभग सभी दुकानों में लाल कपडे में नारियल बांधकर लटकाया जाता है, कई घरों में भी ऐसा किया जाता है. यह स्थान देवता की पूजा और गृह रक्षा के लिए किया जाता है.

नवरात्रि पर अपने घर मे गृह शांति और रक्षा के लिए एक विधि प्रस्तुत है जिसके द्वारा आप अपने घर पर पूजन करके नारियल बाँध सकते हैं.

आवश्यक सामग्री :-

लाल कपडा सवा मीटर
नारियल
सामान्य पूजन सामग्री
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यदि आर्थिक रूप से सक्षम हों तो इसके साथ रुद्राक्ष/ गोरोचन/केसर भी डाल सकते हैं.
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वस्त्र/आसन लाल रंग का हो तो पहन लें यदि न हो तो जो हो उसे पहन लें.

सबसे पहले शुद्ध होकर आसन पर बैठ जाएँ. हाथ में जल लेकर कहें " मै [अपना नाम ] अपने घर की रक्षा और शांति के लिए यह पूजन कर रहा हूँ मुझपर कृपा करें और मेरा मनोरथ सिद्ध करें."

इतना बोलकर हाथ में रखा जल जमीन पर छोड़ दें. इसे संकल्प कहते हैं.

नारियल पर मौली धागा [अपने हाथ से नापकर तीन हाथ लम्बा तोड़ लें.] लपेट लें.

लपेटते समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करें." ॐ श्री विष्णवे नमः"
अब अपने सामने लाल कपडे पर नारियल रख दें. पूजन करें.

नारियल के सामने निम्नलिखित मंत्र का 1008 बार जाप करें ऐसा कम से कम तीन दिन तक करें. पूरी नवरात्रि कर सकें तो और भी बेहतर है.

"ॐ नमो आदेश गुरून को इश्वर वाचा अजरी बजरी बाडा बज्जरी मैं बज्जरी को बाँधा, दशो दुवार छवा और के ढालों तो पलट हनुमंत वीर उसी को मारे, पहली चौकी गणपति दूजी चौकी में भैरों, तीजी चौकी में हनुमंत,चौथी चौकी देत रक्षा करन को आवे श्री नरसिंह देव जी शब्द सांचा पिंड कांचा फुरो मंत्र इश्वरी वाचा"

अब इस नारियल को लाल कपडे में लपेट ले. आपका रक्षा नारियल तय्यार है. इसे आप दशहरा, दीपावली, पूर्णिमा, अमावस्या या अपनी सुविधानुसार किसी भी दिन घर की छत में हुक हो तो उसपर बांधकर लटका दें. 

यदि न हो तो पूजा स्थान में रख लें. नित्य पूजन के समय इसे भी अगरबत्ती दिखाएँ.

महाविद्या आश्रम में इस depawali के shubh मुहूर्त  में इस शाबर रक्षा नारियल का nirman किया जा रहा हैं जिस  किसी को भी शाबर रक्षा नारियल मांगना  हैं तो आप सब मेरे   व्हाट्सप्प न०;- 9958417249. पर संपर्क  कर सकते हैं .

दक्षिणा  न्यौच्छावर.   550 .रुपये 

राजगुरु जी

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 (रजि.)

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...