Thursday, August 31, 2017

महर्षि कालाग्नि रूद्र प्रणीत "महाकाल बटुक भैरव" साधना

महर्षि कालाग्नि रूद्र प्रणीत  "महाकाल बटुक भैरव" साधना








भगवान भैरव को शब्दमय रूप में वर्णित करने का कारण सिर्फ इतना है कि अन्य देव कि अपेक्षा पूरे ब्रहांड में सर्वत्र विद्दमान हैं, जिस प्रकार शब्द को किसी भी प्रकार के बंधन में नहीं बाँधा जा सकता उसी प्रकार भैरव भी किसी भी विघ्न या बाधा को सहन नहीं कर पाते और उसे विध्वंश कर साधक को पूर्ण अभय प्रदान करते हैं,

उनकी इसी शक्ति को साधक अनेक रूपों वर्णित कर साधनाओं के द्वारा प्राप्त कर अपने जीवन के दुःख और कष्टों से मुक्ति प्राप्त करते हैं,

वस्तुतः भैरव साधना भगवान शिव कि ही साधना है क्योंकि भैरव तो शिव का ही स्वरुप है उनका ही एक नर्तनशील स्वरुप. भैरव भी शिव की ही तरह अत्यन्त भोले हैं, एक तरफ अत्यधिक प्रचंड स्वरूप जो पल भर में प्रलय ला दे और एक तरफ इतने दयालु की आपने भक्त को सब कुछ दे डाले,

इसके बाद भी समाज में भैरव के नाम का इतना भय कि नाम सुनकर ही लोग काँप जाते हैं, उससे तंत्र मन्त्र या जादू टोने से जोड़ने लगते हैं,

भैरव की उन अनेक साधनाओं में एक साधना है महर्षि कालाग्नि रूद्र प्रणीत "महाकाल बटुक भैरव" साधना. इस साधना की विशेषता है की ये भगवान् महाकाल भैरव के तीक्ष्ण स्वरुप के बटुक रूप की साधना है जो तीव्रता के साथ साधक को सौम्यता का भी अनुभव कराती है और जीवन के सभी अभाव,प्रकट वा गुप्त शत्रुओं का समूल निवारण करती है.

विपन्नता,गुप्त शत्रु,ऋण,मनोकामना पूर्ती और भगवान् भैरव की कृपा प्राप्ति,इस 11 दिवसीय साधना प्रयोग से संभव है. बहुधा हम प्रयोग की तीव्रता को तब तक नहीं समझ पाते हैं जब तक की स्वयं उसे संपन्न ना कर लें,इस प्रयोग को आप करिए और परिणाम बताइयेगा.

   ये प्रयोग रविवार की मध्य रात्रि को संपन्न करना होता है.स्नान आदि कृत्य से निवृत्त्य होकर पीले वस्त्र धारण कर दक्षिण मुख होकर बैठ जाएँ.

सदगुरुदेव और भगवान् गणपति का पंचोपचार पूजन और मंत्र का सामर्थ्यानुसार जप कर लें तत्पश्चात सामने बाजोट पर पीला वस्त्र बिछा लें,जिस के ऊपर काजल और कुमकुम मिश्रित कर ऊपर चित्र में दिया यन्त्र बनाना है और यन्त्र के मध्य में काले तिलों की ढेरी बनाकर चौमुहा दीपक प्रज्वलित कर उसका पंचोपचार पूजन करना है,पूजन में नैवेद्य उड़द के बड़े और दही का अर्पित करना है .

पुष्प गेंदे के या रक्त वर्णीय हो तो बेहतर है.अब अपनी मनोकामना पूर्ती का संकल्प लें.और उसके बाद विनियोग करें.

अस्य महाकाल वटुक भैरव मंत्रस्य कालाग्नि रूद्र ऋषिः अनुष्टुप छंद आपदुद्धारक देव बटुकेश्वर देवता ह्रीं बीजं भैरवी वल्लभ शक्तिः दण्डपाणि कीलक सर्वाभीष्ट प्राप्तयर्थे समस्तापन्निवाराणार्थे जपे विनियोगः
इसके बाद न्यास क्रम को संपन्न करें.

ऋष्यादिन्यास –

कालाग्नि रूद्र ऋषये नमः शिरसि
अनुष्टुप छन्दसे नमः मुखे
आपदुद्धारक देव बटुकेश्वर देवताये नमः हृदये
ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये
भैरवी वल्लभ शक्तये नमः पादयो
सर्वाभीष्ट प्राप्तयर्थे समस्तापन्निवाराणार्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे

करन्यास -

 ह्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
 ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः
 ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः
 ह्रैं  अनामिकाभ्यां नमः
 ह्रौं  कनिष्टकाभ्यां नमः
 ह्रः करतल करपृष्ठाभ्यां नमः

अङ्गन्यास-

ह्रां हृदयाय नमः
ह्रीं शिरसे स्वाहा
ह्रूं शिखायै वषट्
ह्रैं कवचाय हूम
ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट्
ह्रः अस्त्राय फट्

अब हाथ में कुमकुम मिश्रित अक्षत लेकर निम्न मंत्र का ११ बार उच्चारण करते हुए ध्यान करें और उन अक्षतों को दीप के समक्ष अर्पित कर दें.

नील जीमूत संकाशो जटिलो रक्त लोचनः
दंष्ट्रा कराल वदन: सर्प यज्ञोपवीतवान |
दंष्ट्रायुधालंकृतश्च कपाल स्रग विभूषितः
हस्त न्यस्त किरीटीको भस्म भूषित विग्रह: ||

इसके बाद निम्न मूल मंत्र की रुद्राक्ष,मूंगा या काले हकीक माला से ११ माला जप करें

ॐ ह्रीं वटुकाय क्ष्रौं क्ष्रौं आपदुद्धारणाय कुरु कुरु वटुकाय ह्रीं वटुकाय स्वाहा ||

Om hreeng vatukaay kshroum kshroum aapduddhaarnaay kuru kuru vatukaay hreeng vatukaay swaha ||

प्रयोग समाप्त होने पर दूसरे  दिन आप नैवेद्य,पीला कपडा और दीपक को किसी सुनसान जगह पर रख दें और उसके चारो और लोटे से पानी का गोल घेरा बनाकर और प्रणाम कर वापस लौट जाएँ तथा मुड़कर ना देखें.

 ये प्रयोग अनुभूत है,आपको क्या अनुभव होंगे ये आप खुद बताइयेगा,मैंने उसे यहाँ नहीं लिखा है. तत्व विशेष के कारण हर व्यक्ति का नुभव दूसरे  से प्रथक होता है.

गुरु आपको सफलता दें और आप इन प्रयोगों की महत्ता समझ कर गिडगिडाहट भरा जीवन छोड़कर अपना सर्वस्व पायें यही कामना मैं करत हूँ.

राज गुरु जी

महाविद्या आश्रम
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Wednesday, August 30, 2017

धन प्रकोष्ठ (विघ्नेश ) बीसा यंत्र

धन प्रकोष्ठ (विघ्नेश ) बीसा यंत्र




प्रभाव :-

1 - इस यंत्र को दाहिनी भुजा पर धरण करने के बाद जातक जिस कार्य के लिए जाता है । वो निर्विघ्न रूप से सफल होता है ।

2 - जिस मकान की नीव में ये यंत्र विधिवत रूप से दवाया जाता है उस मकान में अकाल मृत्यु नहीं होती । धन की कमी नहीं होती और सदा मकान में रहने वाले परिवार की पूर्ण रूप से रक्षा होती है ।

3 - इस यंत्र को खेत में गाड़ दिया जाये उस खेत में फसल का कभी नुकसान नहीं होता । बगीचे मीन गाड़ देने से बग़ीचा फल फूल से भरा रहता है ।

राज गुरु जी

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Tuesday, August 29, 2017

चामुंडा स्वप्न सिद्धि मंत्र साधना :-

चामुंडा स्वप्न सिद्धि मंत्र साधना :-






ॐ ह्रीम आगच्छा गच्छ चामुंडे श्रीं स्वाहा ।।

विधि :-

सबसे पहले मिट्टी ओर गोबर से जमीन को लीप ले ओर वो जगह पर कोई बिछोना बिछाले । फिर पंचोपचार से मटा का पूजन करके देवी मटा को नेवेध्य अर्पण करे ।

 उसके बाद रुद्राक्ष की माला से उपरोक्त मंत्र का जाप 10,000 बार करे ओर देवी का द्यान करे इस तरह मंत्र सिद्धि कारले फिर उसके बाद जब कभी भी कोई प्रश्न मन मे हो तो मंत्र का 1 माला यानि 108 बार मंत्र का जाप करके सो जाए तो देवी अर्धरात्रि को स्वप्न मे आकार प्रश्न का उत्तर प्रदान करती हे …

राज गुरु जी

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Saturday, August 26, 2017

यदि आप मुझसे कुछ सीखना चाहते है

यदि आप मुझसे कुछ सीखना चाहते है






तो परिश्रम तो करना ही होगा। किसी को दो दिन में तारा चाहिए,तो किसी को ९ दिन में छिन्नमस्ता,किसी को ५ दिन में मातंगी सिद्ध करना है तो,किसी को ११ दिन में भुवनेश्वरी। कितनी बचकानी बात है.

हर साधना कि एक विशेष प्रक्रिया होती है जिससे होकर प्रत्येक साधक को गुजरना ही पड़ता है. और अगर बात महाविद्या कि हो तो ये कार्य और भी कठिन हो जाता है.

 इसमें तो और भी अधिक परिश्रम करना होता है. कई कई मंत्रो को क्रमशः सिद्ध करना होता है,कई कई अनुष्ठान करने होते है.जब हम आपको ये प्रक्रिया बताते है तो आपको लगता है कि हम टाल रहे है.

इस बात पर में कोई सफाई नहीं दूंगा।यदि महाविद्या सिद्धि कि और बढ़ना है तो परिश्रम करना सीखे।अन्यथा जो दो या तीन दिन में सिद्ध करवा दे आलसी लोग उनके पास जा सकते है.

कम से कम मेरा कार्य भार कम होगा। और मुझे भी पता चल जायेगा कि तारा २ दिन में और काली ११ दिन में कैसे सिद्ध होती है.

मेरा उद्देश्य किसी के ह्रदय को पीड़ित करना नहीं है.अगर किसी को दुःख हुआ हो तो हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थी हु.परन्तु कभी कभी व्यर्थ का रोग मिटाने के लिए कड़वे वचनो कि औषधि आवश्यक हो जाती है.

राजगुरु जी

महाविद्या आश्रम

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नजर आदि दूर करने हेतु -

नजर आदि दूर करने हेतु -






यंहा मैं ऐसे मंत्र का प्रयोग बताने जा रहा हूॅ, जो किसी भी व्यक्ति पर
किये गये पर-प्रयोग, बाधा, बुरी नजर आदि को हटाने में पूर्ण सक्षम है। मेरा
अनुभव है कि यदि किसी व्यक्ति की बुरी नजर किसी भी व्यक्ति के रोजगार
पर, उसकी सम्पत्ति पर, अथवा उसके सुख पर लग जाए तो अच्छा-खासा
परिवार तबाह हो जाता है। प्रभावित व्यक्ति कर्ज, बीमारी, मुकदमों आदि में घिर
जाता है, उसका सुख सम्पूर्णतः दुख में बदल जाता है।

यदि आप ऐसे ही प्रयोगों, बुरी नजर आदि से स्वयं को प्रभावित महसूस
करते हैं तो इस निम्नांकित मंत्र का प्रयोग कीजिए और परिणाम मुझे बताईए।
मेरा पूर्ण विष्वास है कि आपको निष्चित रूप से इन समस्त व्याधियों से मुक्ति
प्राप्त हो जाएगी। लेकिन इस मंत्र को गुरू से प्राप्त करना आवष्यक है, अन्यथा
परिणाम संदेहात्मक ही रहेगा।

मंत्रः-

ओम ह्रीं ब्रीम बिकट , वीर हनुमंत वीर मन्त्र  को मारो ! उलट दो  पाताल , काल जाल संघारो ! जो धन जहा से आये वाही को जाए !टोनहिन का टोना ओझा का दंड ,द्रोही शत्रु को मारो ! ना मारो तो माता अंजनी के बत्तीस धार का दूध हराम करो ! सीता के सर चोट पड़े हुम फट स्वाहा !

साथ में हनुमान जी के १२ नामो का भी जाप करे ! मंदिर में भोग में रोठ लगाये ! घी से यथा सभव हवन करे

राज गुरु जी

महाविद्या आश्रम
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Wednesday, August 23, 2017

श्री नवनाथ प्रत्यक्षिकरण साधना

श्री नवनाथ प्रत्यक्षिकरण साधना









श्रीनवनाथ भगवान ने ज्ञान का प्रचार किया था भगवान दत्तात्रेय के आशीर्वाद से वे साधना क्षेत्र में नए मंत्रो की रचना करने में समर्थ थे और इसी तरह उन्होंने करोडो साबर मंत्रो की रचना की जो की संस्कृत भाषा में न होते हुए सामान्यजन भाषा में थे.

जिससे सामान्य व्यक्ति भी सफलता को प्राप्त करने लगा जो की उन्हें पहले उच्चारण दोष की वजह से नहीं मिल पाई
थी.

 इस तरह ९ नाथ ने अपना कार्य पूर्ण किया, चूँकि वे मनुष्य योनिज नहीं थे, वे आज भी उनके मूल शरीर में विद्यमान है और आज भी कई साधको को सशरीर आशीर्वाद देते है. ८४ सिद्धो के लिए भी
यही मान्य है.

 ८४ सिद्ध आज, जगत के आध्यात्म में भारतीय सिद्ध प्रणाली की एक महत्वपूर्ण भूमिका है. साधना जगत में इसे आश्चर्य ही कहा जाएगा अगर कोई साधक ९ नाथ व् ८४ सिद्धो के बारे में नहीं
जनता हो. ९ नाथ वह प्रारंभिक व्यक्तित्व है

जिन्होंने साधना की उच्चतम स्थिति को प्राप्त किया था और अघोर वाम कौल साबर और योग के विशेष साधनात्मक जिसमे कई सिद्ध नाथ का भी समावेश होता हे वह वो मंडली हे जो की सबसे
उच्चतम साधनात्मक स्थिति को प्राप्त साधको की मंडली मानी जाती है जो की तांत्रिक व् योग्य तान्त्रिक साधनाओ में निष्णांत है, उनमेसे कुछ रसायन में भी सिद्धहस्त है.

 इन महान सिद्धयोगियो
का आशीर्वाद लेना व् उनसे साधना के क्षेत्र में मार्गदर्शन लेना किसीभी साधक का सर्वोच्च भाग्योदय व् एक मधुर स्वप्न सामान है.

इस विषय में एसी कई साधना हे जो साधक की इस इच्छा को पूर्ण करे. लेकिन यह करिये बहोत ही कठोर और समय लेने वाली होती हे फिरभी साधको की मन की छह होती हे एसी साधनाए करना. फिर
भी इन कठोर साधनाओ के मध्य भी एक ऐसी साधना हे जो सहज हे अगर इसे दूसरी साधनाओ के साथ देखा जाए तो और यह साधना साधक उन महान व्यक्तित्व के आशीर्वाद प्राप्त करने की
अपनी महेच्छा को पूर्ण करा सकती है.

साधना के लिए साधक के पास एक अलग कमरा हो जिसमे दूसरा कोई भी व्यक्ति प्रवेश न करे इस साधना में कठोर नियमोंका पालन करना पड़ता है.
ब्रम्हचर्य पालन अनिवार्य है

भोजन में एक समाज फलाहार लिया जा सकता है, दूध कभीभी ले सकते है. साधक को और कुछ भी ग्रहण नहीं करना चाहिए

साधना काल में साधक कोई भाई व्यसन जैसे की मदिरा या तम्बाकू का युअग कर दे

साधना काल में क्षोरकर्म न करवाए साधना कक्ष का फर्श गोबर से लिपा हुआ हो आसान और वस्त्र पीले रंग के हो. दिशा उत्तर हो. अपने सामने पूजास्थान पर एक सुपारी रखे, यह सिद्ध का प्रतिक है. इसका नियमित पूजन करे. भोग में मिठाई का उपयोग कर सकते है. ताजे फूल ही उपयोग में लाए.

अखंड दीप प्रज्वलित करना है जो की पुरे साधना काल दरमियाँ जलता रहे.

रात्रि में ९ बजे के बाद रुद्राक्ष माला से निम्न मंत्र का जाप करे !

मंत्र:-

ll ओम प्रकट सिद्ध अमुकं प्रत्यक्ष,मेरी आण,मेरे गुरू की आण,महादेव की आण ll

अमुकं की जगह इच्छित सिद्ध के नाम का उच्चारण करे,कुल १,२५,००० मंत्र जाप होने चाहिए जिसे २१ या कम दिनों में पूरा करना है.मंत्रजाप की संख्या रोज
एक ही रहे.

साधना के अंतिम दिन सिद्ध सशरीर प्रत्यक्ष होते है और इच्छापूर्ति का आशीर्वाद देते है साथ मे ही मनचाही सिद्धी प्रदान करते है,सिर्फ यहा पर जो मंत्र मैने दिया है वही प्रामानिक मंत्र है.

मै हमेशा पूर्ण मंत्र देता हू,अन्य लोगो के तराहा आधा-अधूरा मंत्र देना मेरे लिये महापाप है.विश्वास के साथ मंत्र जाप करे तो अवश्य ही आपको दर्शन होगे!

राज गुरु जी

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Monday, August 21, 2017

निच्छित श्री अप्सरा सिद्धी

निच्छित श्री अप्सरा सिद्धी






सुंदर और बेहद आकर्षक.... सही मायनों में शायद यही है अप्सराओं की परिभाषा। हिन्दू पौराणिक ग्रंथों एवं कुछ बौद्ध शास्त्रों द्वारा भी अप्सराओं का ज़िक्र किया गया है। जिसके अनुसार ये काल्पनिक, परंतु नितांत रूपवती स्त्री के रूप मे चित्रित की गई हैं। यूनानी ग्रंथों मे अप्सराओं को सामान्यत: 'निफ' नाम दिया गया है।

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इन अप्सराओं का कार्य स्वर्ग लोक में रहनी वाली आत्माओं एवं देवों का मनोरंजन करना था। वे उनके लिए नृत्य करती थीं, अपनी खूबसूरती से उन्हें प्रसन्न रखती थीं और जरूरत पड़ने पर वासना की पूर्ति भी करती थीं।

 लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है यह कोई नहीं जानता, क्योंकि इनका उल्लेख अमूमन ऐतिहासिक दस्तावेजों में ही प्राप्त हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अलावा अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी अप्सराओं का उल्लेख पाया गया है। लेकिन इनके नाम काफी भिन्न हैं। चीनी धार्मिक दस्तावेजों में भी अप्सराओं का ज़िक्र किया गया है, लेकिन शुरुआत हम हिन्दू इतिहास से करेंगे।

हिन्दू इतिहास की बात करें ऋग्वेद के साथ-साथ महाभारत ग्रंथ में भी कई अप्सराओं का उल्लेख पाया गया है।

अप्सराएँ निच्छित सिद्ध हो सकती है परंतु इसके लिये साधक को सय्यम रखना आवश्यक है। जो साधक सय्यम खो देते है,उनको तो कई जन्मो तक अप्सराएँ सिद्ध नही हो सकती है। यहा आजकल कुछ लोग अप्सरा को प्रत्यक्ष करने का दावा करते,जिसे हम एक अफवा मानतें हैं।

 क्योंकि आजकल के दुनिया में चाहे कोई कितना भी प्रेम करता हो या सुंदर लड़का हो,उसको किसी गलि की लड़की को अपनी ओर आकर्षित करनें  मे 3-4 महिने लग जाते है और यहा लोग बात करते है एक देवकन्या जो अत्यंत सुंदर है उस अप्सरा को प्रत्यक्ष करने की ।

 सोचो ऎसे में सुंदर अप्सरा को प्रत्यक्ष करने मे कितना समय लगेगा ? तंत्र शास्त्र मे 108 अप्सराओं का वर्णन मिलता है,जिनका आज के समय मे किसीको नाम तक पता नही चला और एक प्राचीन किताब मे लिखा हुआ है "जब तक 108 अप्सराओं की रजामंदी ना मिल जाए तब कोई भी एक विशेष अप्सरा किसी भी साधक के सामने प्रत्यक्ष नही हो सकती है" और इस बात का प्रमाण भी हमे देखने को मिलता है।

आप सभी जानते है,श्री हनुमानजी जी के माताजी  का नाम "अंजनी" था,माता अंजना देवी स्वयं एक अप्सरा थी ।

देवताओ के कार्यपुर्ति हेतु उन्होंने धरती पर जन्म लिया था। उनका उद्देश्य सिर्फ हनुमानजी को जन्म देना ही नही बल्कि उनका पालन-पोषण करने के साथ साथ उन्हे अच्छे सन्स्कार से पुर्ण करना था। उनको धरती पर जन्म लेने हेतु समस्त अप्सराओं की रजामंदी लेनी पडी थी और एक समय ऎसा भी आया था के "उन्हे बाल हनुमानजी को छोड़कर अप्सरा लोक वापिस जाना पड़ा था क्योंकि समय काल के हिसाब से उनका धरती पर कार्यकाल पुर्ण हो गया था" ।

उस समय अचानक अपने माता से दुर हो जाने के वजह बाल हनुमानजी का व्यथा बहुत खराब हो चुका था और ममता स्वरुप समस्त अप्सराओं ने देवराज इंद्र से पुनः निवेदन करके माता अंजना देवि को धरती पर भेजने का प्रस्ताव रखा था । देवराज इन्द्र ने उस समय यह गोपनियता स्पष्ट की थी,जिसमें उन्होंने कहा था "अगर आप समस्त अप्सराओं की रजामंदी (अनुमति) है,तो अंजना

​देवी को पुनः धरती लोक पर भेज सकते है"। तो इस तरह से ​देवी अंजना माता को पुनः धरती लोक पर आकर हनुमानजी को एक महाबली बनाने मे समस्त अप्सराओं की मदत प्राप्त हुई।

यह सिर्फ एक कहानी नही है अपितु अप्सरा साधक के

​लिए ​गोपनिय रहस्य है। जब अप्सरा साधक 21 दिनो तक "सर्व अप्सरा सिद्धी यंत्र" के सामने बैठकर "सर्व अप्सरा सिद्धी शाबर मंत्र" का जाप करता है तो उसके ​लिए स्वयं समस्त अप्सराएँ किसी भी एक विशेष अप्सरा को सिद्ध करने हेतु सहायता करती है।

जब कोई भी अप्सरा साधक यह सर्व अप्सरा सिद्धी शाबर मंत्र का 21 दिनो तक जाप कर लेता है तो कोई भी एक अप्सरा उसका इच्छित कार्य पुर्ण कर देती है।

सर्व अप्सरा सिद्धी यंत्र को भोजपत्र पर विशेष मुहुर्त मे बनाया जाता है,जिसपर सुर्य के रोशनी के साथ शुक्र ग्रह के होरा का ध्यान रखकर निर्मित किया जाता है।

भोजपत्र पर यंत्र निर्मित हो जाने के उपरांत कुछ विशेष ​जड़ी ​​बुटियो के माध्यम से सर्व अप्सरा सिद्धी यंत्र का निर्माण होता है। जैसे चंद्रनाग, मनमोहीनी, मायाजाल, लज्जावती, केसर, जटाशंकर......इत्यादि

11 प्रकार की ​जड़ी ​बुटिया इस ताबीज स्वरुप यंत्र मे स्थापित करना आवश्यक है।

 साथ मे सर्व अप्सरा सिद्धी माला जो डबल झिरो साईज का हो,जिससे जाप करते समय आसानी हो और वह माला भी "क्लीम्" बीज मंत्र के साथ क्रोध भैरव के मुल मंत्र से सिद्ध करना आवश्यक है।

इस साधना को करने के बाद ही विशेष अप्सरा साधना को सम्पन्न करने से प्रत्यक्ष अप्सरा साधना सिद्धी सम्भव है,जो इस साधना को सम्पन्न करने मे तत्पर ना हो,उन्हे अप्सरा साधना सिद्धी मे सफलता प्राप्त करना  एक मुश्किल कार्य हो सकता है।

सर्व अप्सरा सिद्धी दीक्षा के माध्यम से साधक को अप्सरा साधना मे विशेष अनुभूतियाँ हो सकती है,जिसके माध्यम से साधक अपने

​जीवन ​​मे सभी प्रकार के सुख प्राप्त कर सकता है। अप्सरा साधना से पुरे ​जीवन बदला जा सकता है ।

राज गुरु जी

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...