Thursday, July 25, 2019

साबर भैरवी साधना





साबर भैरवी साधना


बहोत से लोगो ने यह पहली बार सुना होगा ,क्यू के यह साधना लुप्त हो रही है परन्तु मेरे पास यह साधना हो और आपको ना मिले ऐसा संभव नही। 

इस साधना से भाग्योदय होता है ,शत्रुबंधा सम्पात समाप्त होती है,रोग खत्म होते है,आकर्षण शक्ति निर्मित होती है, चहरे पर सम्मोहन आ जाता है,शरीर मे विशेष ताकत आती है .

जीवन मे होने वाले  नुकसान की खबर देवी पाहिले ही स्वप्न  मे बता देती है मनोकामनाए भी पूर्ण होती है ,अभिचार कर्म समाप्त होते है, जहा जाओगे वाहा सिर्फ तारीफ सुनाने मिलेगी।

तो अब आप समज गऐ होगे साधना कितना महत्वपूर्ण है ,करिये यह साधना क्यू  के यह साधना करने के बाद साबर शिव मंत्र शीघ्र सफलता मिलता है, मंत्र तो बहोत मील जायेगा लेकिन साबर शिव मंत्र बहोत मुश्किल से प्राप्त होता है।

साधना ७ दिन का है, रोज दक्षिण दिशा मे मुख करके १०८ बार मंत्र का जाप करना है तो मंत्र सिद्ध होता है,घी का दीपक जलाये और धुप जलाये माला रुद्राक्ष का हो रात्रि मे ९ स्नान बजे  करके साधना मे बैठे तो उचित है।

जिन्हे मंत्र चाहिए उन्हे ही मंत्र देगे क्यू के मेरे लिए मंत्र का गोपनीयता सर्वप्रथम है। मंत्र प्रभावशाली है। इसलिए आप भी गोपनीयता रखे और हो सके तो गुरु आज्ञा से मंत्र का जाप करे श्रेष्ठ है .

  सिद्ध सामग्री     :-     सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , हकिक  .

  

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : - 09958417249

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Wednesday, July 24, 2019

लीलावती अप्सरा






लीलावती अप्सरा 


यह एक विशेष साधना है,जिसको सिर्फ चंद्रग्रहण पर ही शुरू किया जा सकता है,अन्य समय पर शुरुआत करने से लाभ प्राप्त करना कठिन है। यहा दिया जाने वाला लीलावती अप्सरा मंत्र पुर्ण और प्रामाणिक है,

साधना के लाभ:

जो व्यक्ति पूर्ण रूप से हष्ट पुष्ट होते हुए भी आकर्षक व्यक्तित्व न होने के कारण अन्य लोगों को अपनी और आकर्षित नहीं कर पाते हैं तथा हीनभावना से ग्रस्त होते हैं , 

इस साधना के प्रभाव से उनका व्यक्तित्व अत्यंत आकर्षक व चुम्बकीय हो जाता है तथा उनके संपर्क में आने वाले सभी लोग उनकी और आकर्षित होने लगते हैं ।

 जो मन के अनुकूल सुंदर जीवन साथी पाना चाहते हैं किन्तु किसी कारणवश यह संभव न हो रहा हो, इस साधना के प्रभाव से उनको मन के अनुकूल सुंदर जीवन साथी प्राप्त होने की स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिल जाता है ।

जिस व्यक्ति के वैवाहिक, पारिवारिक, सामाजिक जीवन में क्लेश व तनाव की स्थिति उत्पन्न हो, इस साधना के प्रभाव से उनके वैवाहिक, पारिवारिक व सामाजिक जीवन में प्रेम सौहार्द की स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं !

जो व्यक्ति अभिनय के क्षेत्र में सफल होने की इच्छा रखते हैं किन्तु सफल नहीं हो पाते हैं, इस साधना के प्रभाव से उनके अंदर उत्तम अभिनय की क्षमता की वृद्धि होने के साथ-साथ अभिनय के क्षेत्र में सफल होने की स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं । 

जो व्यक्ति युवावस्था में होने पर भी पूर्ण यौवन से युक्त नहीं होते हैं, इस साधना से उनके अंदर उत्तम यौवन व व्यक्तित्व निखर आता है ।

जो व्यक्ति सुन्दर रूप सौन्दर्य की इच्छा रखते हैं किन्तु प्रकृति द्वारा कुरूपता से दण्डित हैं, इस साधना के प्रभाव से उनके अंदर आकर्षक रूप सौन्दर्य निखर आता है ।

 जो व्यक्ति कार्यक्षेत्र में मन के अनुकूल अधिकारी या सहकर्मी न होने के कारण असहज परिस्थियों में नौकरी करते हैं, या नौकरी चले जाने का भय रहता है, इस साधना के प्रभाव से उनके अधिकारी व सहकर्मी उनके साथ मित्रवत हो जाते हैं तथा नौकरी चले जाने का भय भी समाप्त हो जाता है ।

जो व्यक्ति ऐसा मानते हैं कि वह अन्य लोगों को अपनी बात या कार्य से प्रभावित नहीं कर पाते हैं, इस साधना के प्रभाव से उनका व्यक्तित्व अत्यंत आकर्षक व चुम्बकीय हो जाता है तथा उनके संपर्क में आने वाले सभी लोग उनकी और आकर्षित होकर उनकी बातों या कार्य से प्रभावित होने लगते हैं ।

उपरोक्त विषयों में अत्यंत कम समय में ही अपेक्षित परिणाम देकर आनंदमय जीवन को प्रशस्त करने वाली यह लीलावती अप्सरा साधना अवश्य ही संपन्न कर लेनी चाहिए, जिससे निश्चित ही आप अपनी इच्छा की पूर्णता को प्राप्त कर सकते हैं व आनंदमय भौतिक जीवन व्यतीत कर सकते हैं ।

all क्योंकि अप्सराएं सौन्दर्य, यौवन, प्रेम, अभिनय, रस व रंग का ही प्रतिरूप होती हैं, अतः इनका प्रभाव जहाँ भी होता है वहां पर सौन्दर्य, यौवन, प्रेम, अभिनय, रस व रंग ही व्याप्त होता है ।

लीलावती अप्सरा की साधना अनेक रूपों में की जाती है, जैसे माँ, बहन, पुत्री, पत्नी अथवा प्रेमिका के रूप में इनकी साधना की जाती है ओर साधक जिस रूप में इनको साधता है.

 ये उसी प्रकार का व्यवहार व परिणाम भी साधक को प्रदान करती हैं, अप्सराओं को पत्नी या प्रेमिका के रूप में साधने पर साधक को कोई कठिनाई या हानी नहीं होती है, क्योंकि यह तो साधक के व्यक्तित्व को इतना अधिक प्रभावशाली बना देती हैं कि साधक के संपर्क में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति अप्सरा साधक के मन के अनुकूल आचरण करने लगता है ।

 अप्सरा को प्रत्यक्ष सिद्ध कर लिए जाने पर वह अपने गुण, धर्म, प्रभाव व सीमा के अधीन बिना किसी बाध्यता के अपनी सीमाओं के अधीन साधक की सभी इच्छाओं की पूर्ति करती है । 

माँ के रूप में साधने पर वह ममतामय होकर साधक का सभी प्रकार से पुत्रवत पालन करती हैं तो बहन व पुत्री के रूप में साधने पर वह भावनामय होकर सहयोगात्मक होती हैं ओर पत्नी या प्रेमिका के रूप में साधने पर उस साधक को उनसे अनेक सुख प्राप्त हो सकते हैं ।

साधना विधी:-

यह साधना ग्रहण शुरुआत होने के कुछ ही समय पहिले  ही शुरू करना है,जैसे 5-10 मिनट पुर्व शुरु कर सकते है और ग्रहण के समाप्ति के बाद भी 5-10 मिनट तक मंत्र जाप करते रहना है। मंत्र जाप बिना किसी माला के जाप करना भी सम्भव है।

 साधना करने हेतु किसी बाजोट पर पिला वस्त्र बिछाये और उसके उपर एक चमेली के फुलो का माला रखे,किसी प्लेट मे कुछ मिठाइयाँ रखे,एक छोटे ग्लास मे पानी रखें। बडा सा दिपक जलाये जो ग्रहण काल तक चलता रहे और दिपक मे शुद्ध देसी गाय के घी का ही उपयोग करें। 

धूप कोई भी चलेगा और साधना काल मे बुझ जाये तो कोई चिंता का बात नही है। मंत्र जाप उत्तर दिशा के तरफ ही मुख करके करना है,आसन वस्त्र का कोई बंधन नही है,किसी भी रंग के ले सकते हो ।

 यह एक दिवसीय साधना है परंतु साधक चाहे तो चंद्रग्रहण के बाद भी नित्य जब तक चाहे तब तक मंत्र जाप कर सकता है।

मंत्र:-

।। ॐ हूं हूं लीलावती कामेश्वरी अप्सरा प्रत्यक्षं सिद्धि हूं हूं फट् ।।

om hoom hoom lilaawati kaameshwari apsaraa pratyaksham siddhi hoom hoom phat

साधना समाप्ति के बाद रखा हुआ मिठाइयों का भोग स्वयं ग्रहण करले और ग्लास मे रखा हुआ जल पिपल के पेड़ के जड पर चढा दे,जल चढाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण जी से मन ही मन साधना सफलता हेतु प्रार्थना करें। 

साधना से आपको अपने जिवन मे परिवर्तन नजर आयेगा,इस साधना से किसी प्रकार का कोई नुकसान नही होता है सिर्फ अप्सरा प्रति स्वयं का भावना शुद्ध रखें। जब भी जिवन मे किसी विशेष मनोकामना को पुर्ण करवाना हो तो शुक्रवार या सोमवार के रात्री मे 9 बजे के बाद अप्सरा से प्रार्थना करते हुए मंत्र का 1 घण्टे तक जाप करने से आपका कोई भी मनोकामना शिघ्र ही पुर्ण हो सकता है।

 मंत्र जाप से पहिले वही विधी करना है जैसे हमने चंद्रग्रहण के समय किया था। जो साधक अप्सरा को प्रत्यक्ष सिद्ध करना चाहते है उन्हे यह साधना कम से कम नित्य रात्रिकाल मे 2-3 घण्टे तक करते रहना चाहिए।

 येसा कम से कम 21 दिनो तक करने से लीलावती अप्सरा का प्रत्यक्षीकरण होना सा सम्भव है। यह विशेष साधना करने से आपको बहोत सारी अनुभुतिया हो सकती है,जिसमे आपको सुगंध का एहसास हो सकता है और पायल/घुंगरु के बजने का आवाज भी आसकता है।

आप सभी को साधना मे अवश्य ही सफलता प्राप्त हो,यही मातारानी से प्रार्थना है।

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

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Monday, July 22, 2019

रावण सहिंता के ये उपाय चमका देंगे आपकी किस्मत को





महालक्ष्मी की कृपा तुरंत प्राप्त करने के लिए

रावण सहिंता के ये उपाय चमका देंगे आपकी किस्मत

को 

बहुत कम लोग जानते हैं। रावण
सभी शास्त्रों का जानकार और श्रेष्ठ विद्वान था।
रावण ने भी ज्योतिष और तंत्र शास्त्र
की रचना की है। दशानन ने ऐसे कई
उपाय बताए हैं जिनसे
किसी भी व्यक्ति की किस्मत
रातोंरात बदल सकती है।
यहां जानिए रावण संहिता के अनुसार कुछ ऐसे तांत्रिक उपाय

जिनसे
किसी भी व्यक्ति की किस्मत
चमक सकती है...
महाज्ञानी रावण कई चीजों में पारंगत
था। ज्योतिष शास्त्र में भी उसे महारत हासिल
थी। तंत्र शास्त्र का भी वह
महाज्ञाता था। इसी वजह से
जो भी दशानन के संपर्क में आता था वह
सहसा ही उससे मोहित हो जाता था।
बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि रावण का प्रभाव
उसकी तांत्रिक साधना के बल पर था। रावण कई ऐसे
उपाय भी करता था जिससे जो भी सामान्य
इंसान उसे देखता था वह आकर्षित हो जाता था।
रावण संहिता में कुछ ऐसे ही खास प्रकार के तांत्रिक
तिलक की चर्चा की गई है।
जो भी व्यक्ति यह तिलक लगाता है सहज
ही लोग उसकी तरफ खिंचे चले आते
हैं। यहां जानिए कि कौन-कौन से हैं वह तांत्रिक तिलक......

1. धन प्राप्ति का उपाय: किसी भी शुभ
मुहूर्त में या किसी शुभ दिन में सुबह
जल्दी उठें। इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत्त होकर
किसी पवित्र नदी या जलाशय के किनारे
जाएं। किसी शांत एवं एकांत स्थान पर वट वृक्ष के
नीचे चमड़े का आसन बिछाएं। आसन पर बैठकर धन
प्राप्ति मंत्र का जप करें।

धन प्राप्ति का मंत्र: 

ऊँ
ह्रीं श्रीं क्लीं नम: ध्व:
ध्व: स्वाहा।

इस मंत्र का जप आपको 21 दिनों तक करना चाहिए। मंत्र जप
के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें। 21 दिनों में
अधिक से अधिक संख्या में मंत्र जप करें।
जैसे ही यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा आपको अचानक
धन प्राप्ति अवश्य कराएगा।

2.यदि किसी व्यक्ति को धन प्राप्त करने में बार-बार
रुकावटें आ रही हों तो उसे यह उपाय
करना चाहिए।
यह उपाय 40 दिनों तक किया जाना चाहिए। इसे अपने घर पर
ही किया जा सकता है। उपाय के अनुसार धन
प्राप्ति मंत्र का जप करना है। प्रतिदिन 108 बार।
मंत्र: 

ऊँ
सरस्वती ईश्वरी भगवती माता क्रां क्लीं,
श्रीं श्रीं मम धनं देहि फट् स्वाहा।

इस मंत्र का जप नियमित रूप से करने पर कुछ
ही दिनों महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त
हो जाएगी और आपके धन में आ
रही रुकावटें दूर होने लगेंगी।

3. यदि आप दसों दिशाओं से यानी चारों तरफ से
पैसा प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें। यह उपाय
दीपावली के दिन किया जाना चाहिए।
दीपावली की रात में विधि-

विधान से महालक्ष्मी का पूजन करें। पूजन के
सो जाएं और सुबह जल्दी उठें। नींद से
जागने के बाद पलंग से उतरे नहीं बल्कि यहां दिए
गए मंत्र का जप 108 बार करें।
मंत्र:

 ऊँ नमो भगवती पद्म पदमावी ऊँ
ह्रीं ऊँ ऊँ पूर्वाय दक्षिणाय उत्तराय आष पूरय
सर्वजन वश्य कुरु कुरु स्वाहा।

शय्या पर मंत्र जप करने के बाद दसों दिशाओं में दस-दस बार
फूंक मारें। इस उपाय से साधक को चारों तरफ से पैसा प्राप्त
होता है

4.सफेद आंकड़े को छाया में सुखा लें। इसके बाद कपिला गाय
यानी सफेद गाय के दूध में मिलाकर इसे
पीस लें और इसका तिलक लगाएं। ऐसा करने पर
व्यक्ति का समाज में वर्चस्व हो जाता है।

5.यदि आपको ऐसा लगता है कि किसी स्थान पर धन
गढ़ा हुआ है और आप वह धन प्राप्त करना चाहते हैं
तो यह उपाय करें।

गड़ा धन प्राप्त करने के लिए यहां दिए गए मंत्र का जप दस
हजार बार करना होगा।

मंत्र: 

ऊँ नमो विघ्नविनाशाय निधि दर्शन कुरु कुरु स्वाहा।

गड़े हुए धन के दर्शन करने के लिए विधि इस प्रकार है।
किसी शुभ दिवस में यहां दिए गए मंत्र का जप
हजारों की संख्या करें। मंत्र सिद्धि हो जाने के बाद
जिस स्थान पर धन गड़ा हुआ है वहां धतुरे के
बीज, हलाहल, सफेद घुघुंची, गंधक,
मैनसिल, उल्लू की विष्ठा, शिरीष वृक्ष
का पंचांग बराबर मात्रा में लें और सरसों के तेल में पका लें। इसके
बाद इस सामग्री से गड़े धन
की शंका वाले स्थान पर धूप-दीप ध्यान
करें। यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या में
करें।

ऐसा करने पर उस स्थान से सभी प्रकार
की नकारात्मक शक्तियों का साया हट जाएगा। भूत-
प्रेत का भय समाप्त हो जाएगा। साधक को भूमि में गड़ा हुआ धन
दिखाई देने लगेगा।

ध्यान रखें तांत्रिक उपाय करते समय किसी विशेषज्ञ
ज्योतिषी का परामर्श अवश्य लें।

6.शास्त्रों के अनुसार दूर्वा घास
चमत्कारी होती है। इसका प्रयोग कई
प्रकार के उपायों में भी किया जाता है। यदि कोई
व्यक्ति सफेद दूर्वा को कपिला गाय यानी सफेद गाय के
दूध के साथ पीस लें और इसका तिलक लगाएं तो वह
किसी भी काम में असफल
नहीं होता है।

7.महालक्ष्मी की कृपा तुरंत प्राप्त
करने के लिए यह तांत्रिक उपाय करें।
किसी शुभ मुहूर्त जैसे
दीपावली, अक्षय तृतीया,
होली आदि की रात यह उपाय
किया जाना चाहिए।
दीपावली की रात में यह
उपाय श्रेष्ठ फल देता है। इस उपाय के अनुसार
आपको दीपावली की रात
कुमकुम या अष्टगंध से थाली पर यहां दिया गया मंत्र
लिखें।

मंत्र: 

ऊँ
ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी,
महासरस्वती ममगृहे आगच्छ-आगच्छ
ह्रीं नम:।

इस मंत्र का जप भी करना चाहिए।
किसी साफ एवं स्वच्छ आसन पर बैठकर रुद्राक्ष
की माला या कमल गट्टे की माला के साथ
मंत्र जप करें। मंत्र जप की संख्या कम से कम
108 होनी चाहिए। अधिक से अधिक इस मंत्र
की आपकी श्रद्धानुसार बढ़ा सकते हैं।
इस उपाय से आपके घर में
महालक्ष्मी की कृपा बरसने
लगेगी।

8.अपामार्ग के बीज को बकरी के दूध में
मिलाकर पीस लें, लेप बना लें। इस लेप को लगाने से
व्यक्ति का समाज में आकर्षण काफी बढ़ जाता है।
सभी लोग इनके कहे को मानते हैं।

9.यदि आप देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की कृपा से
अकूत धन संपत्ति चाहते हैं तो यह उपाय करें।
उपाय के अनुसार आपको यहां दिए जा रहे मंत्र का जप
तीन माह तक करना है। प्रतिदिन मंत्र का जप
केवल 108 बार करें।

मंत्र:

 ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य
समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।

मंत्र जप करते समय अपने पास
धनलक्ष्मी कौड़ी रखें। जब
तीन माह हो जाएं तो यह
कौड़ी अपनी तिजोरी में
या जहां आप पैसा रखते हैं वहां रखें। इस उपाय से
जीवनभर
आपको पैसों की कमी नहीं होगी।

10.यदि आप घर या समाज या ऑफिस में लोगों को आकर्षित
करना चाहते हैं तो बिल्वपत्र तथा बिजौरा नींबू लेकर
उसे बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें।
इसके बाद इससे तिलक लगाएं। ऐसा करने पर
व्यक्ति का आकर्षण बढ़ता है।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

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महायोगी  राजगुरु जी  《  अघोरी  रामजी  》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

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Sunday, July 21, 2019

नौवी महाविद्या मातंगी




नौवी महाविद्या मातंगी

सांसारिक रूप में महाविद्या कमला का आराधना से धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति के बाद किसी भी आदमी को जरूरत होती है, अपने आभामंडल और प्रभाव को बढ़ाने की। इंसान चाहता है कि लोग उसके धन व ऐश्वर्य को समझें और उसे सम्मान दें। 

दूसरी ओर आध्यात्मिक क्षेत्र का साधक कमला की साधना से खुद को अंदर से परिपूर्ण करने के बाद प्रकृति को मोहित कर अपने साधना के स्तर को उठाना चाहता है। 

इसके लिए आवश्यकता पड़ती है नौवीं महाविद्या मातंगी की। इनमें पूरे ब्रह्मांड को मोहित करने की शक्ति है। जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि सभी महाविद्या में सब कुछ प्रदान करने की शक्ति है लेकिन उनके विशेषज्ञता के खास क्षेत्र हैं। 

तंत्र के क्षेत्र में मातंगी की साधना का काफी महत्व है। यह ममता की मूर्ति हैं और सामन्यतया साधकों पर प्रसन्न होने में अधिक देर नहीं लगाती हैं। इनकी प्रसन्नता से ज्ञान वृद्धि, शास्त्राज्ञाता, कवित्व शक्ति एवं संगीत विद्या की भी प्राप्ति संभव है। यह सम्मोहन और वशीकरण की अधिष्ठात्री हैं।

 इनके प्रयोग से भंडार की अक्षयवृद्धि होती है। आवश्यकता सिर्फ श्रद्धा का नियमपूर्वक साधना करने की है। मातंगी की साधना के बारे में संक्षिप्त जानकारी नीचे दी जा रही है। विस्तृत जानकारी के लिए अपने आसपास के किसी योग्य व्यक्ति से या मेल से मुझसे जानकारी ली जा सकती है।

मातंगी के कई नाम हैं। इनमें प्रमुख हैं-

सुमुखी, लघुश्यामा या श्यामला, उच्छिष्टचांडालिनी, उच्छिष्टमातंगी, राजमातंगी, कर्णमातंगी, चंडमातंगी, वश्यमातंगी, मातंगेश्वरी, ज्येष्ठमातंगी, सारिकांबा, रत्नांबा मातंगी एवं वर्ताली मातंगी।

1-अष्टाक्षर मातंगी मंत्र- कामिनी रंजनी स्वाहा

विनियोग—

 अस्य मंत्रस्य सम्मोहन ऋषिः, निवृत् छंदः, सर्व सम्मोहिनी देवता सम्मोहनार्थे जपे विनियोकगः।

ध्यान--- 

श्यामंगी वल्लकीं दौर्भ्यां वादयंतीं सुभूषणाम्। चंद्रावतंसां विविधैर्गायनैर्मोहतीं जगत्।

फल व विधि------ 

विनियोग से ही मंत्र का फल स्पष्ट 20 हजार जप कर मधुयुक्त मधूक पूष्पों से हवन करने पर अभीष्ट की सिद्धि होती है।
-------------------------------------------------------

2-दशाक्षर मंत्र------

 ऊं ह्री क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा।

विनियोग— 

अस्य मंत्रस्य दक्षिणामूर्ति ऋषिःर्विराट् छंदः, मातंगी देवता, ह्रीं बीजं, हूं शक्तिः, क्लीं कीलकं, सर्वेष्टसिद्धये जपे विनियोगः।

अंगन्यास--- 

ह्रां, ह्रीं, ह्रूं, ह्रैं, ह्रौं, ह्रः से हृदयादि न्यास करें।

फल व विधि------

 साधक छह हजार जप नित्य करते हुए 21 दिन प्रयोग करें। फिर दशांस हवन करें। चतुष्पद श्मसान या कलामध्य में मछली, मांस, खीर व गुगल का धूप दे तो कवित्व शक्ति की प्राप्ति होती है। इससे जल, अग्नि एवं वाणी का स्तंभन भी संभव है। इसकी साधना करने वाला वाद-विवाद में अजेय बन जाता है। उसके घर में स्वयं कुबेर आकर धन देते हैं।

3-

लघुश्यामा मातंगी का विंशाक्षर मंत्र--------- 

ऐं नमः उच्छिष्ट चांडालि मांतगि सर्ववशंकरि स्वाहा।

विधि---

 विनियोग व न्यास आदि के साथ देवी की पूजा कर 11, 21, 41 दिन या पूर्णिमा/आमावास्या से पूर्णिमा/आमावास्या तक एक लाख जप पूर्ण करें। 

मंत्र से ऐसा प्रतीत होता है कि इसका जप उच्छिष्ट मुंह किया जाना चाहिए।

 ऐसा किया भी जा सकता है लेकिन विभिन्न ग्रंथों में इसे पवित्र होकर करने का भी विधान है। 

अतः साधक सुविधानुसार जप करें। जप पू्र्ण होने के !बाद बाद महुए के फूल व लकड़ी के दशांस होम कर तर्पन व मार्जन करें।

फल------- 

इसके प्रयोग से डाकिनी, शाकिनी एवं भूत-प्रेत बाधा नहीं पहुंचा सकते हैं। इसकी साधना से प्रसन्न होकर देवी साधक को देवतुल्य बना देती है। उसकी समस्त अभिलाषाएं  पूरी होती हैं। 

चूंकि मातंगी वशीकरण विद्या की देवी हैं, इसलिए इसके साधक की वह शक्ति भी अद्भुत बढ़ती है। राजा-प्रजा सभी उसके वश में रहते हैं।

4-

एकोन विंशाक्षर उच्छिष्ट मातंगी तथा द्वात्रिंशदक्षरों मातंगी मंत्र

मंत्र (एक)---

 नमः उच्छिष्ट चांडालि मातंगी सर्ववशंकरि स्वाहा।

मंत्र (दो)----

 ऊं ह्रीं ऐं श्रीं नमो भगवति उच्छिष्टचांडालि श्रीमातंगेश्वरि सर्वजन वशंकरि स्वाहा।

विधि-----

 विधिपूर्वक दैनिक पूजन के बाद निश्चित (जो साधक जप से पूर्व तय करे) समयावधि (घंटे या दिन) में दस हजार जप कर पुरश्चरण करे। उसके बाद दशांस हवन करे।

फल----- 

मधुयुक्त महुए के फूल व लकड़ी से हवन करने पर वशीकरण का प्रयोग सिद्ध होता है। 

मल्लिका फूल के होम से योग सिद्धि, बेल फूल के हवन से राज्य प्राप्ति, पलास के पत्ते व फूल के हवन में जन वशीकरण, गिलोय के हवन से रोगनाश, थोड़े से नीम के टुकड़ों व चावल के हवन से धन प्राप्ति, नीम के तेल से भीगे नमक से होम करने पर शत्रुनाश, केले के फल के हवन से समस्त कामनाओं की सिद्धि होती है। 

खैर की लकड़ी से हवन कर मधु से भीगे नमक के पुतले के दाहिने पैर की ओर हवन की अग्नि में तपाने से शत्रु वश में होता है।

5-

सुमुखी मातंगी प्रयोग

इसमें दो मंत्र हैं जिसमें सिर्फ ई की मात्रा का अंतर है पर ऋषि दोनों के अलग-अलग हैं। इसमें फल समान है।

पहला मंत्र---- 

उच्छिष्ट चांडालिनी सुमुखी देवी महापिशाचिनी ह्रीं ठः ठः ठः।

इसके ऋषि अज, छंद गायत्री और देवता सुमुखी मातंगी हैं।

विधि----

 देवी के विधिपूर्वक पूजन के बाद जूठे मुंह आठ हजार जप करने से ही इसका पुरश्चरण होता है। साधक को धन की प्राप्ति होती है और उसका आभामंडल बढ़ता है। हवन की विधि नीचे है।

दूसरा मंत्र-----

 उच्छिष्ट चांडालिनि सुमुखि देवि महापिशाचिनि ह्रीं ठः ठः ठः।

इसके ऋषि भैरव, छंद गायत्री और देवता सुमुखी मातंगी हैं।

विधि---- 

इसकी कई विधियां हैं। एक में एक लाख मंत्र जप का भी विधान वर्णित है। लेकिन मेरा मानना है कि देवी के विधिपूर्वक पूजन के बाद जूठे मुंह दस हजार जप करने से ही इसका पुरश्चरण होता है और साधक को धन की प्राप्ति होती है तथा उसका आभामंडल बढ़ता है।

हवन विधि------ 

दही से सिक्त पीली सरसो व चावल से हवन करने पर राजा-मंत्री सभी वश में हो जाते हैं। बिल्ली के मांस से हवन करने पर शस्त्र का वसीकरण होता है।

 बकरे के मांस के हवन से धन-समृद्धि मिलती है। खीर के हवन से विद्या प्राप्ति तथा मधु व घी युक्त पान के पत्तों के हवन से महासमृद्धि की प्राप्ति होती है। कौवे व उल्लू के पंख के हवन से शत्रुओं का विद्वेषण होता है।

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

विशेष -

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तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान  अनुसंधान संस्थान

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Thursday, July 18, 2019

हाथ की लकीर से जानें अपने हर सवाल का जवाब ..







हाथ की लकीर से जानें अपने हर सवाल का जवाब ...


ये नहीं देखा तो क्या देखा जीवन रेखा ही हथेली में एक ऐसी रेखा है, जो प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में पाई जाती है। यदि किसी के हाथ में यह रेखा न देखने को मिले तो यह समझना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति का व्यक्तित्व शून्यवत् है 

और उस व्यक्ति की जीवन शक्ति का सर्वथा लोप हो गया है। ऐसे व्यक्ति का जीवन किसी भी समय समाप्त हो सकता है। कई बार मंगल रेखा चल कर इस रेखा को बल देती है, 

कभी-कभी शनि रेखा भी इस रेखा को बल देती हुई दिखाई देती है फिर भी जो जीवन रेखा अपने आप में निर्दोष और स्पष्ट होती है, वास्तव में वही रेखा मानव के लिए कल्याणकारी मानी जाती है।

इसी रेखा से व्यक्ति की आयु का पता चलता है तथा इस रेखा के माध्यम से यह जाना जा सकता है कि जीवन में कौन-कौन सी दुर्घटनाएं किस-किस समय घटित होंगी तथा मृत्यु का कारण और मृत्यु का समय भी इसी रेखा से ज्ञात होता है।

यह रेखा बृहस्पति पर्वत के नीचे से निकलती है पर कई बार यह रेखा बृहस्पति पर्वत के ऊपर से भी निकलती हुई दिखाई दी है। इस रेखा के बारे में यह ध्यान रखना अत्यंत जरूरी है 

कि यह रेखा शुक्र पर्वत को जितने ही बड़े रूप में घेरती है, उतनी ही यह रेखा ज्यादा श्रेष्ठ मानी जाती है। यद्यपि कई बार यह रेखा शुक्र पर्वत को अत्यंत संकीर्ण बना देती है,

 जब ऐसा तथ्य हथेली में दिखाई दे तब यह समझ लेना चाहिए कि इस व्यक्ति की प्रगति जीवन में कठिन ही होगी, साथ ही साथ इस व्यक्ति को जीवन में प्रेम, भोग, सुख आदि सांसारिक गुणों की न्यूनता ही रहेगी। 

अंगूठे के पास में से होकर यह रेखा निकले तो उस व्यक्ति की आयु बहुत कम होती है।

जीवन रेखा जितनी ज्यादा गहरी स्पष्ट और बिना टूटी हुई होती है उतनी ही ज्यादा अच्छी कहलाती है। ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य उन्नत होगा।

 उसके हृदय में प्रेम और सौंदर्य की भावना विकसित रहेगी परंतु जिसके हाथ में यह रेखा कटी-फटी या टूटी हुई अथवा अस्पष्ट दिखाई दे तो उसका जीवन दुखमय, भावना शून्य एवं दुर्घटनाओं से युक्त रहता है। ऐसे व्यक्ति तुनक मिजाज, चिड़चिड़े तथा बात-बात पर क्रोधित होने वाले होते हैं।

यदि गुरु पर्वत के नीचे, जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा का पूर्ण मिलन होता है तो यह शुभ माना जाता है। ऐसा व्यक्ति परिश्रमी, सतर्क और योजनाबद्ध तरीके से काम करने वाला होता है परंतु यदि इन दोनों रेखाओं का उद्गम अलग-अलग होता है ...

 तो व्यक्ति उन्मुक्त विचारों वाला तथा अपनी ही धुन में कार्य करने वाला होता है परंतु यदि किसी के हाथ में जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा तीनों एक ही स्थान से निकलें तो यह एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रतीक होता है। ऐसे व्यक्ति की नि:संदेह हत्या हो जाती है।

जीवन रेखा पर यदि आड़ी-तिरछी लकीरें दिखाई दें तो उस व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर समझना चाहिए यदि हृदय रेखा और जीवन रेखा के बीच में त्रिभुज बन जाए तो ऐसा व्यक्ति दमे का रोगी होता है।

यदि जीवन रेखा से कोई पतली रेखा निकल कर गुरु पर्वत की ओर जाती दिखाई दे तो उस व्यक्ति में इच्छाएं, भावनाएं और महत्वाकांक्षाएं जरूरत से ज्यादा होती हैं और वह उन इच्छाओं को पूरा करने का भागीरथ प्रयत्न करता है। 

यदि इस रेखा पर कई रेखाएं उठती हुई दिखाई दें तो वह परिश्रमी और कर्मठ होता है तथा अपने प्रयत्नों से भाग्य का निर्माण करता है।

यदि जीवन रेखा के प्रारंभ से ही उसके साथ-साथ सहायक रेखा चल रही हो तो ऐसा व्यक्ति सोच-समझ कर कार्य करने वाला, विवेकपूर्वक योजनाएं बनाने वाला, चतुर तथा महत्वाकांक्षी होता है।

 इसके जीवन में कुछ भी असंभव नहीं होता। यदि जीवन रेखा चलती-चलती अचानक बीच में समाप्त हो जाती है तो यह आकस्मिक मृत्यु की ओर संकेत करती है।

यदि जीवन रेखा से कोई सहायक रेखा निकल कर चंद्र पर्वत की ओर जाती हुई दिखाई दे तो यह व्यक्ति वृद्धावस्था में पागल होता है। यदि इस रेखा में शनि रेखा आकर मिल जाए तो वह प्रतिभावान और तेजस्वी होता है।

जीवन रेखा के अंत में यदि किसी प्रकार का कोई बिंदू या क्रास दिखाई दे तो उस व्यक्ति की मृत्यु अचानक होती है। यदि जीवन रेखा अंत में जाकर कई भागों में बंट जाए तो ऐसे व्यक्ति को बुढ़ापे में निश्चय ही क्षय रोग होगा।

कुछ अन्य तथ्य-
छोटी रेखा-कम आयु। 

पीली और चौड़ी रेखा-बीमारी और विवादास्पद चरित्र।

लाल रेखा - हिंसा की भावना।

पतली रेखा - आकस्मिक मृत्यु।

जंजीरदार रेखा- शारीरिक कोमलता।

टूटी हुई रेखा- बीमारी। 

सीढ़ी के समान रेखा- जीवन भर रुग्णता।

बृहस्पति पर्वत के नीचे प्रारंभ- उच्च सफलता। 

मस्तिष्क रेखा से मिली हुई- विवेकपूर्ण जीवन।

जीवन मस्तिष्क तथा हृदय रेखा का मिलन- दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्ति।

धंसी हुई गहरी रेखा- अशिष्टतापूर्ण व्यवहार।

स्वास्थ्य तथा मस्तिष्क रेखाओं के पास नक्षत्र-संतानहीनता।

स्पष्ट रेखा : न्यायपूर्ण जीवन।

प्रारंभ स्थल पर शाखा पुंज : अस्थिर जीवन।

रेखा के मध्य से शाखाएं : क्षयपूर्ण जीवन।

अंतिम सिरे पर शाखाएं : दुखदायी बुढ़ापा।

अंत में दो भागों में विभक्त : निर्धनतापूर्ण मृत्यु।

अंत में जाल- धनहानि के बाद मृत्यु।

रेखा के ऊपर की ओर उठती हुई सहायक रेखा : आकस्मिक धन प्राप्ति।

रेखा पर काला धब्बा : रोग का प्रारंभ।

नीचे की ओर जाती सहायक रेखाएं- स्वास्थ्य तथा धन की हानि 

मार्ग में रेखा का टूटना-आर्थिक हानि।

कई जगह पर कटती हुई रेखाएं- स्थायी रोग।

रेखा पर वृत्त का निशान - हत्या।

प्रारंभ में क्रास-दुर्घटना से अंग-भंग।

रेखा के अंत में क्रास : असफल बुढ़ापा।

क्रास से काटती हुई जीवन रेखा : मानसिक कमजोरी।

रेखा के प्रारंभ में द्वीप : तंत्र विद्या में रुचि।

रेखा के मध्य में द्वीप : शारीरिक कमजोरी।

लहरदार जीवन रेखा और उस पर द्वीप रोगी- जीवन।

जीवन रेखा के हाथ से पार जाती हुई रेखाएं- चिंताएं और कष्ट।

जीवन रेखा से गुरु पर्वत को जाती हुई रेखाएं- कदम-कदम पर सफलता।

शनि पर्वत पर जाती हुई रेखाएं- पशु से दुर्घटना एवं मृत्यु।

सूर्य पर्वत की ओर जाती हुई रेखाएं- प्रसिद्धि और सम्मान।

बुध पर्वत की ओर जाती हुई रेखाएं- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सफलता।

चंद्र पर्वत की ओर जाती हुई रेखाएं- जरूरत से ज्यादा निर्धनता तथा रोगमय जीवन।

निम्र मंगल की ओर जाती हुई रेखाएं- क्रोध में आत्महत्या।

मंगल पर्वत की ओर जाती हुई रेखाएं- प्रेम के कारण युवावस्था में बदनामी।

शुक्र पर्वत की ओर जाती हुई 
रेखाएं- प्रेम भंग।

जीवन रेखा को कई स्थानों पर काटती हुई रेखाएं : पारिवारिक जीवन में असफलता।

जीवन रेखा को काट कर भाग्य रेखा तक जाने वाली रेखा- व्यापार में पूर्ण असफलता।

जीवन रेखा को काट कर मस्तिष्क रेखा की ओर जाती हुई रेखा- पागलपन।

जीवन रेखा को काट कर हृदय रेखा की ओर जाती हुई रेखा- हृदय रोग।

जीवन रेखा तथा हृदय रेखा को काटती हुई रेखा- प्रेम कार्यों में असफलता।

हृदय रेखा की ओर जाने वाली रेखा के अंत में द्वीप- दुखपूर्ण वैवाहिक जीवन।

जीवन रेखा और सूर्य रेखा को काटती हुई रेखा- सामाजिक पतन।

शुक्र पर्वत तथा जीवन रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह- घरेलू झगड़े।

सूर्य रेखा तथा जीवन रेखा पर नक्षत्र - दुखमय घरेलू जीवन।

मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा तथा जीवन रेखा पर चिन्ह- रोगपूर्ण जीवन।

भाग्य रेखा तथा जीवन रेखा पर त्रिकोण- आर्थिक हानि।

सूर्य रेखा तथा जीवन रेखा पर त्रिकोण- अपराधपूर्ण जीवन

और भी बहुत कुछ कहता है आप की हाथ की रेखाएं आप भी अपने जीवन से जुड़ा हुआ किसी भी प्रकार की जानकारी चाहते हैं तो हमें संपर्क करें और संपर्क करके हर  समस्या का समाधान प्राप्त करें ...


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विशेष

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राजगुरु जी

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श्री हनुमान बालाजी सरकार का सूर्य अस्त के बाद करे इस प्रकार पूजन दूर होगा आर्थिक संकट !!





श्री हनुमान बालाजी सरकार का सूर्य अस्त के बाद करे इस प्रकार पूजन दूर होगा आर्थिक संकट !!


कलियुग में हनुमानजी की पूजा सबसे जल्दी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली मानी गई है। जो भी व्यक्ति सही विधि से बजरंगबली को मनाने के लिए पूजन करता है, उसे जल्दी ही शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। 

यदि आप भी हनुमानजी के भक्त हैं और धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति पाना चाहते हैं तो यहां दीपक का एक पूजन बताया जा रहा है। यह पूजन सूर्यास्त के बाद करना है।

पूजन करने से पहले ध्यान रखें ये सामान्य

 सावधानियां :=

हनुमानजी के पूजन में साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की अपवित्रता नहीं होनी चाहिए। जब भी पूजा करें, तब हमें मन से और तन से पवित्र हो जाना चाहिए।

 पूजन के दौरान गलत विचारों की ओर मन को भटकने न दें। यह कुछ सामान्य सावधानियां हैं, जो कि हनुमानजी का पूजन करते समय ध्यान रखनी चाहिए।

पूजन के लिए जरूरी हैं ये सामान := 

मिट्टी का दीपक, सरसो का तेल, रूई की बत्ती, सिंदूर, चमेली का तेल, अगरबत्ती, पुष्प-हार और बैठने के लिए साफ आसन।

पूजन की विधि:=

शाम को सूर्यास्त के बाद किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाएं। इसके पूर्व पवित्र हो जाना चाहिए। मंदिर पहुंचकर हनुमानजी के सामने साफ आसन पर बैठें और सरसो के तेल का दीपक लगाएं। 

दीपक चौमुखा होना चाहिए यानी बत्ती इस प्रकार लगाएं कि दीपक को चारों ओर से जलाया जा सके। इस प्रकार दीपक लगाने के साथ ही अगरबत्ती, पुष्प आदि अर्पित करें। सिंदूर, चमेली का तेल चढ़ाएं। दीपक लगाते समय हनुमानजी के मंत्रों का जप करना चाहिए। 

मंत्र- 

ऊँ रामदूताय नम:, ऊँ पवन पुत्राय नम: आदि। इसके बाद हनुमान चालीसा का जप करें।

विशेष:==

यदि आप पूरी हनुमान चालीसा पढऩे में समर्थ न हों तो कुछ पंक्तियों का जप भी कर सकते हैं। इस उपाय से बहुत जल्द व्यक्ति का बुरा समय दूर हो सकता है। धन संबंधी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

हर मंगलवार या शनिवार के दिन बजरंगबली को बना हुआ बनारसी पान चढ़ाना चाहिए। बनारसी पत्ते का बना हुआ पान चढ़ाने से भी हनुमानजी की कृपा प्राप्त होती है।जो भक्त रामायण या श्रीरामचरित मानस का पाठ करते हैं या इनके दोहे प्रतिदिन पढ़ते हैं, उन्हें हनुमानजी का विशेष स्नेह प्राप्त होता है।

किसी भी खास मुहूर्त में या त्यौहार या विशेष तिथि पर हनुमानजी का पूरा श्रृंगार अपनी श्रद्धा अनुसार करवाना चाहिए। इसे चोला चढ़ाना कहा जाता है। हनुमानजी का चोला चढ़वाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और पाप का प्रभाव कम होता है।.

चेतावनी -

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

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Saturday, July 13, 2019

नील सरस्वती साधना




नील सरस्वती साधना


देवी तारा दस महाविद्याओं में से एक है इन्हे नील सरस्वती भी कहा जाता है ! ये सरस्वती का तांत्रिक स्वरुप है

अब आप एक एक अनार निम्न मंत्र के उच्चारण के साथ गणेश जी व् अक्षोभ पुरुष को काट कर बली दे ..

ॐ गं उच्छिस्ट गणेशाय नमः भो भो देव प्रसिद प्रसिद मया दत्तं इयं बलिं गृहान हूँ फट .

.ॐ भं क्षं फ्रें नमो अक्षोभ्य काल पुरुष सकाय प्रसिद प्रसिद मया दत्तं इयं बलिं गृहान हूँ फट ..

अब आप इस मंत्र की एक माल जाप करे ..

॥क्षं अक्षोभ्य काल पुरुषाय नमः स्वाहा॥

फिर आप निम्न मंत्र की एक माला जाप करे ..

॥ह्रीं गं हस्तिपिशाची लिखे स्वाहा॥

इन मंत्रो की एक एक माला जाप शरू में व् अंत में करना अनिवार्य है क्यों नील तारा देवी के बीज मंत्र की जाप से अत्यंत भयंकर उर्जा का विस्फोट होता है शरीर के अंदर .. 

ऐसा लगता है जैसे की आप हवा में उड़ रहे हो .. एक हि क्षण में सातो आसमान के ऊपर विचरण की अनुभति तोह दुसरे ही क्षण अथाह समुद्र में गोता लगाने की .. इतना उर्जा का विस्फोट होगा की आप कमजोर पड़ने लग जायेंगे आप के शारीर उस उर्जा का प्रभाव व् तेज को सहन नहीं कर सकते इस के लिए ही यह दोनों मात्र शुरू व् अंत में एक एक माला आप लोग अवस्य करना .. नहीं तोह आप को विक्षिप्त होने से स्वं माँ भी नहीं बचा सकती ..

इस साधना से आप के पांच चक्र जाग्रत हो जाते है तोह आप स्वं ही समझ सकते हो इस मंत्र में कितनी उर्जा निर्माण करने की क्षमता है .. 

एक एक चक्र को उर्जाओ के तेज धक्के मार मार के जागते है ..अरे परमाणु बम क्या चीज़ है भगवती की इस बीज मंत्र के सामने ?
सब के सब धरे रह जायेंगे ..

मूल मंत्र-

॥स्त्रीं ॥ ॥ STREENG ॥

जप के उपरांत रोज देवी के दाहिने हात में समर्पण व् क्षमा पार्थना करना ना भूले ..

साधना समाप्त करने की उपरांत यथा साध्य हवन करना .. व् एक कुमारी कन्या को भोजन करा देना ..अगर किसी कन्या को भोजन करने में कोई असुविधा हो तोह आप एक वक्त में खाने की जितना मुल्य हो वोह आप किसी जरुरत मंद व्यक्ति को दान कर देना ...

भगवती आप सबका कल्याण करे ..

जब भगवती का बीजमंत्र का एक लाख से ऊपर जप पूर्ण हो जाये तब उनके अन्य मंत्रो का जाप लाभदायी होता है

कुछ लॊग अपने आपको वयक्त नहीं कर पाते, उनमे बोलने की छमता नहीं होती ,उनमे वाक् शक्ति का विकास नहीं होता ऐसे जातको को बुधवार के दिन तारा यन्त्र की स्थापना करनी चाहिए ! उसका पंचोपचार पूजन करने के पश्चात स्फटिक माला से इस मंत्र का २१ माला जप करना चाहिए -

मंत्र - ॐ नमः पद्मासने शब्दरुपे ऐं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा

२१ वे दिन हवन सामग्री मे जौ-घी मिलाकर उपरोक्त मंत्र का १०८ आहुति दे और पूर्ण आहुति प्रदान करे !

इस साधना से वाक् शक्ति का विकास होता है , आवाज़ का कम्पन जाता रहता है ! यह मोहिनी विद्या है एवं बहुत से प्रवचनकार,कथापुराण वाचक इसी मंत्र को सिद्ध कर जन समूह को अपने शब्द जालो से मोहते है ! 

अपने पास कुछ भी गोपनीय नहीं रख रहा सब आप लोगो से शेयर कर रहा हु !! 

प्रतिदिन साधना से पूर्व माँ तारा का पूजन कर एक -एक माला (स्त्रीम ह्रीं हुं ) तारा कुल्लुका एवं ( अं मं अक्षोभ्य श्री ) की अवश्य करे I

राजगुरुजी

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महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि

  ।। महा प्रचंड काल भैरव साधना विधि ।। इस साधना से पूर्व गुरु दिक्षा, शरीर कीलन और आसन जाप अवश्य जपे और किसी भी हालत में जप पूर्ण होने से पह...