Saturday, December 10, 2016

चमत्कारिक अष्ट यक्षिणियों की साधना, तुरंत मिलेगा फल

यक्ष का शाब्दिक अर्थ होता है 'जादू की शक्ति'। आदिकाल में प्रमुख रूप से ये रहस्यमय जातियां थीं:- देव, दैत्य, दानव, राक्षस, यक्ष, गंधर्व, अप्सराएं, पिशाच, किन्नर, वानर, रीझ, भल्ल, किरात, नाग आदि। ये सभी मानवों से कुछ अलग थे। इन सभी के पास रहस्यमय ताकत होती थी और ये सभी मानवों की किसी न किसी रूप में मदद करते थे। देवताओं के बाद देवीय शक्तियों के मामले में यक्ष का ही नंबर आता है।

यक्षिणियां सकारात्मक शक्तियां हैं तो पिशाचिनियां नकारात्मक। बहुत से लोग यक्षिणियों को भी किसी भूत-प्रेतनी की तरह मानते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। रावण के सौतेला भाई कुबेर एक यक्ष थे, जबकि रावण एक राक्षस।  महर्षि पुलस्त्य के पुत्र विश्रवा की दो पत्नियां थीं- इलविला और कैकसी। इलविला से कुबेर और कैकसी से रावण, विभीषण, कुंभकर्ण का जन्म हुआ। इलविला यक्ष जाति से थीं तो कैकसी राक्षस।

जिस तरह प्रमुख 33 देवता होते हैं, उसी तरह प्रमुख 8 यक्ष और यक्षिणियां भी होते हैं। गंधर्व और यक्ष जातियां देवताओं की ओर थीं तो राक्षस, दानव आदि जातियां दैत्यों की ओर। यदि आप देवताओं की साधना करने की तरह किसी यक्ष या यक्षिणियों की साधना करते हैं तो यह भी देवताओं की तरह प्रसन्न होकर आपको उचित मार्गदर्शन या फल देते हैं।

उत्लेखनीय है कि जब पाण्डव दूसरे वनवास के समय वन-वन भटक रहे थे तब एक यक्ष से उनकी भेंट हुई जिसने युधिष्ठिर से विख्यात 'यक्ष प्रश्न' किए थे। उपनिषद की एक कथा अनुसार एक यक्ष ने ही अग्नि, इंद्र, वरुण और वायु का घमंड चूर-चूर कर दिया था।

यक्षिणी साधक के समक्ष एक बहुत ही सौम्य और सुन्दर स्त्री के रूप में प्रस्तुत होती है। किसी योग्य गुरु या जानकार से पूछकर ही यक्षिणी साधना करनी चाहिए। यहां प्रस्तुत है यक्षिणियों की चमत्कारिक जानकारी। यह जानकारी मात्र है साधक अपने विवेक से काम लें। शास्त्रों में 'अष्ट यक्षिणी साधना' के नाम से वर्णित यह साधना प्रमुख रूप से यक्ष की श्रेष्ठ रमणियों की है।

ये प्रमुख यक्षिणियां है -

1. सुर सुन्दरी यक्षिणी, 2. मनोहारिणी यक्षिणी, 3. कनकावती यक्षिणी, 4. कामेश्वरी यक्षिणी, 5. रतिप्रिया यक्षिणी, 6. पद्मिनी यक्षिणी, 7. नटी यक्षिणी और 8. अनुरागिणी यक्षिणी।

प्रत्येक यक्षिणी साधक को अलग-अलग प्रकार से सहयोगिनी होकर सहायता करती है, अतः साधक को चाहिए कि वह आठों  यक्षिणियों को ही सिद्ध करने के लिए किसी योग्य गुरु या जानकार से इसके बारे में जानें।

सुर सुन्दरी यक्षिणी :

इस यक्षिणी की विशेषता है कि साधक उन्हें जिस रूप में पाना चाहता हैं, वह प्राप्त होती ही है- चाहे वह मां का स्वरूप हो, चाहे वह बहन या प्रेमिका का। जैसी रही भावना जिसकी वैसे ही रूप में वह उपस्थित होती है या स्वप्न  में आकर बताती है। यदि साधना नियमपूर्वक अच्छे उद्देश्य के लिए की गई  है तो वह दिखाई भी देती है। यह यक्षिणी सिद्ध होने के पश्चात साधक को ऐश्वर्य, धन, संपत्ति आदि प्रदान करती है। देव योनी के समान सुन्दर सुडौल होने से कारण इसे सुर सुन्दरी यक्षिणी कहा गया है।

मनोहारिणी यक्षिणी :

मनोहारिणी यक्षिणी सिद्ध होने के बाद यह यक्षिणी साधक के व्यक्तित्व को ऐसा सम्मोहक बना देती है कि वह दुनिया को अपने सम्मोहन पाश में बांधने की क्षमता हासिल कर लेता है। वह साधक को धन आदि प्रदान कर उसे संतुष्ट करती है।  मनोहारिणी यक्षिणी का चेहरा अण्डाकार, नेत्र हरिण के समान और रंग गौरा है। उनके शरीर से निरंतर चंदन की सुगंध निकलती रहती है।

कनकावती यक्षिणी :

कनकावती यक्षिणी को सिद्ध करने के पश्चात साधक में तेजस्विता तथा प्रखरता आ जाती है, फिर वह विरोधी को भी मोहित करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है। यह यक्षिणी साधक की प्रत्येक मनोकामना को पूर्ण करने मे सहायक होती है। माना जाता है कि यह यक्षिणी यह लाल रंग के वस्त्र धारण करने वाली षोडश वर्षीया, बाला स्वरूपा है।

कामेश्वरी यक्षिणी :

यह साधक को पौरुष प्रदान करती है तथा पत्नी सुख की कामना करने पर पूर्ण पत्निवत रूप में उपस्थित होकर साधक की इच्छापूर्ण करती है। साधक को जब भी किसी चीज की आवश्यकता होती है तो वह तत्क्षण उपलब्ध कराने में सहायक होती है। यह यक्षिणी सदैव चंचल रहने वाली मानी गई है। इसकी यौवन युक्त देह मादकता छलकती हुई बिम्बित होती है।

रति प्रिया यक्षिणी :

 इस यक्षि़णी को प्रफुल्लता प्रदान करने वाली माना गया है। रति प्रिया यक्षिणी साधक को हर क्षण प्रफुल्लित रखती है तथा उसे दृढ़ता भी प्रदान करती है। साधक-साधिका को यह कामदेव और रति के समान सौन्दर्य की उपलब्धि कराती है। इस यक्षिणी की देह स्वर्ण के समान है जो सभी तरह के मंगल आभूषणों से सुसज्जित है।

पदमिनी यक्षिणी : पद्मिनी यक्षिणी अपने साधक में आत्मविश्वास व स्थिरता प्रदान करती है तथा सदैव उसे मानसिक बल प्रदान करती हुई उन्नति की ओर अग्रसर करती है। यह हमेशा साधक के साथ रहकर हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाती है। श्यामवर्णा, सुंदर नेत्र और सदा प्रसन्नचित्र करने वाली यह यक्षिणी अत्यक्षिक सुंदर देह वाली मानी गई है।

नटी यक्षिणी :

यह यक्षिणी अपने साधक की पूर्ण रूप से सुरक्षा करती है तथा किसी भी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों में साधक को सरलता पूर्वक निष्कलंक बचाती है। यह सभी तरह की घटना-दुर्घटना से भी साधक को सुरक्षित बचा ले आती है। उल्लेखनीय है कि नटी यक्षिणी को विश्वामित्र ने भी सिद्ध किया था।

अनुरागिणी यक्षिणी :

यह यक्षिणी यदि साधक पर प्रसंन्न हो जाए तो वह उसे नित्य धन, मान, यश आदि से परिपूर्ण तृप्त कर देती है। अनुरागिणी यक्षिणी शुभ्रवर्णा है और यह साधक की इच्छा होने पर उसके साथ रास-उल्लास भी करती है।

0.मूल अष्ट यक्षिणी मंत्र :

॥ ॐ ऐं श्रीं अष्ट यक्षिणी सिद्धिं सिद्धिं देहि नमः॥

1.सुर सुन्दरी मंत्र : ॥ ॐ ऐं ह्रीं आगच्छ सुर सुन्दरी स्वाहा ॥
2.मनोहारिणी मंत्र :॥ ॐ ह्रीं आगच्छ मनोहारी स्वाहा ॥

3.कनकावती मंत्र : ॐ ह्रीं हूं रक्ष कर्मणि आगच्छ कनकावती स्वाहा ॥

4.कामेश्वरी मंत्र : ॐ क्रीं कामेश्वरी वश्य प्रियाय क्रीं ॐ ॥

5.रति प्रिया मंत्र : ॐ ह्रीं आगच्छ आगच्छ रति प्रिया स्वाहा ॥

6.पद्मिनी मंत्र : ॐ ह्रीं आगच्छ आगच्छ पद्मिनी स्वाहा ॥

7.नटी मंत्र : ॐ ह्रीं आगच्छ आगच्छ नटी स्वाहा ॥

8.अनुरागिणी मंत्र : ॐ ह्रीं अनुरागिणी आगच्छ स्वाहा ॥

अंत में उक्त मंत्रों के साथ अष्ट यक्षिणी की साधना कैसे करें-

यह किसी योग्य जानकार से पूछकर करें।

राज गुरु जी

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वाणी सिद्धि साधना

वाणी सिद्धि एक द्रुलोभ साधना है।लाभ हि लाभ ईस साधना से साधक उठाता है।जो भी सत्य करना सिर्फ एक वार वोल दो कुछ पल मेँ वो सत्य हो जाता है।

पल भार मेँ सत्रु कि नाश हो या किसि वश्तु कि कामना हो वो तुरन्त पुरा हो जाता है।साधक के मुख से जो वोली निकला वो सत्य हो के रहता है,चाहे दुनिया ईधार के उधार हो जाय।

भारत मेँ ईस तरहा व्यक्ती को काली जुवान से संमधित किया जाता है, जाव कि साधक के मुख कि जिभा काली नहि होति वालकि उसका वोली सत्य होने करण ईस तरहा काहा जाता है।

देखा जाय तो आसुर या देवता को जानम से हि य सिद्धि प्राप्त रहता तव तो वारदान देने का लाईक रहेते है।हमरे पुरणओँ मेँ ईस विद्या के विषय मे जानकारी है, किस तरहा रुषिमुनि ईसि विद्या के वल पर किसि को भी अभिशाप देते थे,खुश होने पर वरदान भी दिया करते थे जो फलता भी था।

महाभारत मे कुन्ती ने आनजाने मे ईस विद्या का प्रयोग किया जिसका फलसरुप पाँच पाडव को एक स्त्री से विवाह करना पडा जो आज भी कायम है।नेपाल, भारत के अरुणाचलप्रदेश मे ए प्रथा है और एक प्रथा हर धर्म मे प्रचलन हुआ वाडा भाई के मौत किसि करण हो जाय तो, छोटे भाई वाडे भाई के विवि से विवाह राचाना।कलयुग मेँ भी वाणी सिद्धि जागुत साधना है।

जो किलित नहि है, किसि भी साधक चाहे तो आसानी से ईस विद्या को हासिल कर साकता है। शव साधना के माधय्म से करे तो ए एक रात का साधना है। शव साधना मेँ वह शव चाहिय जो प्राकुतिक हो। आगर हत्या किया हुआ शव लिया जाय तो साधक के लेने के देने पड साकते है।ए तो था शव साधना का जानकारी। वाणी सिद्धि साधना किस भी दिन से आरंभ किया जा साकता है।

दिन या रात किस एक समय का चयन करना पडता है। साफ कपडा परिधान कर ले माथे पर सिँदुर का टिका लाग ले और माला रुद्राक्ष होना चाहिए।दिप धुप प्रजलित कर के हनुमान जि का ध्यान कर के मंत्र जाप आरंभ करना चाहिय।

 कुछ दिनोँ तक 1100 जाप करना है।

साधना पेहेले दिन 1100 घि से होम कर ले सिर्फ पेहेले दिन, आगर आप चाहे तो प्रतिदिन

॥ मंत्र-ॐ नमः हनुमते रुद्रवतारय पंन्च मुखाय वाच मुख सिद्धि साधय साधय रामदुताय स्वाहा॥

 सावधान-

कभी कभी हनुमान स्वयं आजाते है, आगर आय तो वैठने के लिय आसान और खाने के लिय कुछ फल मुल प्रदान करे।

राज गुरु जी

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मारण प्रयोग-

कितने शत्रु है?????????कितनी तकलीफ देते है???????????येसा लगता है एक दिन तो इन्हे मार ही डालु???????परंतु क्या ये सही होगा????????मुजे पाप तो नहीं लगेगा ना???????????मैंने अभी कुछ नहीं किया तो क्या ओ मुजे मार तो नहीं देगा?????????

हे प्रभु,कितने सवाल है मन मे..............

कोई बात नहीं,इस कार्य मै आपके साथ हु,कुछ भी ज्यादा सोचो मत,बात जान पे बीतने वाली है तो अब पीछे मत हटो,शत्रु की तो येसी की तैसी...................,खत्म ही कर देगे इनको,ताकि दूसरा कोई मुह उठाके हमसे शत्रुत्व ना करे.......
परंतु किसी भी शत्रु पे प्रयोग करना हो तो 100 बार तो सोच लेना क्या यह कार्य करना उचित होगा या नहीं॰

मुजे आप सभी पे विश्वास है,आप गलत कदम नहीं उठाओगे इसलिये यह दुर्लभ प्रयोग दे रहा हु......सदगुरुजी मुजे क्षमा करे,यही प्रार्थना करता हु........

सामाग्री:-

शमशान गुटिका-

जिसे आसन के नीचे स्थापित करना है ताकि शमशान मे जाकर प्रयोग करने का काम न पड़े,सियार सिंगी-जिसे यमपाश मंत्रो से सिद्ध किया जाता है,जैसे यमराज अपना यमपाश फेकते है और प्राणी का जान ले लेते है उसी तरहा इसको भी कार्यान्वित किया जाता है,महाकाली यंत्र-इसे जागरण क्रिया से ही जगाया जाता है,ताकि माँ शत्रु को समर्पित करने के बाद स्वीकार कर सके,काली हकीक माला-ज्यो शीघ्र कार्य सिद्धि मंत्रो से चैतन्य होती है,शमशान पत्थर-ज्यो इतर योनि मंत्रो से जागरण हो॰

साधना विधि-

साधक सर्वप्रथम गणपति और गुरु पूजन करे,सदगुरुजी से आज्ञा ले और कार्यसिद्धि हेतु प्रार्थना करे

काले रंग के वस्त्र धारण करके काले रंग के आसन पर बैठे,आसन के नीचे शमशान गुटिका रखे,सामने किसी बाजोट पर काला वस्त्र बिछाये,फिर यंत्र को उसपे स्थापित करे और यंत्र पे कुंकुम डाले,अब यंत्र पर सियार सिंगी स्थापित कर दीजिये,और यंत्र के साथ एक चावल का ढेरी बनाए उसापे भी कुंकुम डालकर शमशान पत्थर स्थापित करे,

आपको जिस शत्रु का काम करना है उसके नाम से एक निंबू का बली देकर नींबू का रस शमशान पत्थर पे निचोड़ दे,और मारन मंत्र का २१ माला जाप रोज 10 बजे रात्रि मे ९ दिन तक करे,९ वे दिन रात्रि मे हवन करे और हवन मे सियार सिंगी डाल दे,

शमशान पत्थर को शत्रु के घर के आस-पास गाड़ दे या फिर पीपल के वृक्ष के नीचे गाड़ दे,साधना मे शत्रु का फोटो हो तो कार्य जल्दी संपन्न हो जाएगा या फिर जाप करते समय शत्रु का तीव्र स्मरण करो,यंत्र-माला १० वे दिन जल मे समर्पित करदे जब के आपका कार्य तो ९ दिन ही पूरा हो जायेगा॰

रक्षा मंत्र

इस मंत्र को मुख्य मंत्र से पूर्व २१ बार मंत्र बोलकर काली सरसो दसो दिशाओ मे फेखों,ताकि आपकी भूत-प्रेतो से रक्षा हो सके॰

॥ हुं हुं ह्रीं ह्रीं कालीके घोर दंष्ट्रे प्रचंड चंडनायिके दानवान दारय हन हन शरीरे महाविघ्न छेदय छेदय स्वाहा हु फट ॥

मारण मंत्र-

॥ ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं अमुक शत्रु मारय मारय ह्रीं ह्रीं क्रीं क्रीं क्रीं फट ॥

ll om kreem kreem kreem hreem hreem amuk shatru maarary maaray hreem hreem kreem kreem kreem phat ll

अमुक के स्थान पर शत्रु का नाम उच्चारण करे॰

राज गुरु जी

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Friday, December 9, 2016

भैरवी साधना:-

भैरवी साधना एक उचकोटी का साधना है।सस्त्र मे 64 भैरवी का उलेख मिलता है।हर भैरवी आलग आलग सक्ति का आधिकारी है।साधक आगर भैरवी का साधना करता है तो जिवन मेँ वह हर तारफ सफलता का डंका वाजाता है।मेरा मानोँ तो भैरवी साधना से बाढकार कोई और साधना नही है।

 दुनिया मेँ जिधार भी देखोँ भैरव के साथ एक भैरवी होति है।आपनी माता पिता को देखो।भैरव का जिवन तब तक पुर्ण नही है जब तक एक भैरवी उसकि साथ ना हो। एक बार मेँ चाय के दुकान मेँ मेरे मित्र के साथ चाय पि राहा था।बात करते करते मिरा मित्र मुझकोँ बोला तंत्रकिक आज हम फलना के घर चालते है, मेने बोल कियु बो बोला यार चाल तो हम दोनो मेरे दोस्त का दोस्त के घर कुछ समय बाद चाले गाये।

कुछ दिन बाद मे फिर से बह चाय के दिकान मे चाय पिने गया तो एक आंजान लडका मिला बह मुझ से बात करते करते बोला किया आपके पास दस मिनिँट है कुछ बात करना था।मेने बोला है ,किया बात है बोलो ,बो बोला मांदिर चालते है बाहा बात करते है .मेने हा बोला चालो।मिरा और उसका चाय का पैसा वो लडका चाय बाला को चुकुता किया।

मांदिर मेँ एक पेड के नेचे दोनो बेठ गाये और मेने बोला आब बोलो किया बात है।बह बोला मे उसदिन आप दोनो का बाते सुन राहा था किया आप जादु जानते है।मेने बोला लागभाग थडा बहुत।उसके बाद उसने आपना दु:ख भारे दास्तान सुनाया और बोला किया आप मुझको ईससे मुक्ति दे साकते है, मेने बोला ना फिर भी तुम चाह तो एक तारिका मेरे पास है, किया तुम कर साकते हो ।वो बोला कुछ भी करुगा आप बाताए किया करना है।

मेने सिद्ध भैरबी का मंत्र दिया और बोला केसे करना है। कुछ दिन के बाद बो लडका को नौकरी मिल गया ईसके साथ छोटि वाहेन और छोटा भाई को भी नौकरी बैँक मेँ मिला।आज उनके पास एक आलिशान घर है कार दोलोत सब है। जाब वो लडका मुझसे मिलता है बो रो पाडता है और बोलता है आप मेरे जिंदेगी बादल दिया, मे बोलता हु ए तुमहरा मेहनत का नातिजा है।आज वो तिनो बिवाह कर चुके हे और तोनो के दो दो बाच्चे भी है। सिद्ध भैरवी साधना ए आसान साधना है।

कोई भी आराम से कर साकता है।

विधि-

सिद्ध भैरवी यंत्र।सिद्ध भैरवी मुद्रिका।सिद्ध भैरवी माला।गाले मे रुद्राक्ष माला धारण करना है।शुक्रवार से साधना आरंभ करना है।साफेद कपडा परिधान कर के यंत्र को धुप, दिप, फुल,संदुर और अक्षत से पुजा करना है।

 सफेद आसान मे वैठ कर दक्षिण दिशा मे मुख कर मंत्र को 21 माला जाप करे।

 मंत्र-

ॐ हुं फट वज्र सिद्ध भैरवी आलकिक आलकिक सक्ति सक्ति सिद्धि सिद्धि प्रविश प्रविश हु फट।

यह मंत्र कुछ ही समय मे आसार दिखाना सुरु कर देता है।माथे मे दर्द होता है।यह ईसलिय होता है, आज्ञाचक्र जागुत होना प्रथम दिन से आरंभ हो जाता है।

 आप पायगे कुछ दिन मे आपका हर काम ठिक होता जाएगा। जो पाने का कामना हो वह सपना शाच होने लागगे। माला को कामना पुरी होने पर नदि पर विर्शजित कर दे या फिर देवि भैरवी के दर्शन देने तक रख ले।

जाप प्रतिदिन करते राहे।य मेरा रचना मंत्र है ईस मंत्र का गुरु मे हु।ए सिद्ध मंत्र है।

दुसरा विधि-

विना माला के सिर्फ एक घंटा जाप करते राहे और ईसका दिव्यता देखे।

राज गुरु जी

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व्यवसाय बाधा से मुक्ति हेतु :

यदि कारोबार में हानि हो रही हो अथवा ग्राहकों का आना कम हो गया हो, तो समझें कि किसी ने आपके कारोबार को बांध दिया है। इस बाधा से मुक्ति के लिए दुकान या कारखाने के पूजन स्थल में शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को अमृत सिद्ध या सिद्ध योग में श्री धनदा यंत्र स्थापित करें। फिर नियमित रूप से केवल धूप देकर उनके दर्शन करें कारोबार में लाभ होने लगेगा।

राज गुरु जी

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ज्वाला शत्रु स्तम्भय  साधना

जीवन मे निरंतर पग पग पर समस्या तथा बाधाए आना स्वाभाविक है। आज के युग मे जब चारो तरफ अविश्वास और ढोंग का माहोल छाया हुआ है तब ज्यादातर व्यक्तियो का समस्या से ग्रस्त रहना स्वाभाविक है।

और व्यक्ति कई प्रकार के षड्यंत्रो का भोग बनता है। यु एक हस्ते खेलते परिवार का जीवन जाता है अत्यधिक दुखी हो। कई बार व्यक्ति के परिचित ही उसके सबसे बड़े शत्रु बन जाते है और यही कोशिश मे रहते है की किसी न किसी रूप मे इस व्यक्ति का जीवन बर्बाद करना ही है। चाहे इसके लिए स्वयं का भी नुक्सान कितना भी हो जाए। आज के इस अंधे युग मे मानवता जैसे शब्दों को माना नहीं जाता है।

 और व्यक्ति इसे अपना भाग्य मान कर चुप हो जाता है। अपने सामने ही खुद की तथा परिवार की बर्बादी को देखता ही रहता है और आखिर मे अत्यधिक दारुण परिणाम सामने आते है जो की किसी के भी जीवन को हिलाकर रख देते है। एसी परिस्थिति मे गिडगिडाने के अलावा और कोई उपाय व्यक्ति के पास नहीं रह जाता है। लेकिन हमारे ग्रंथो मे जहा एक और नम्रता को महत्व दिया है तो दूसरी और व्यक्ति की कायरता को बहोत बड़ा बाधक भी माना है।

एसी परिस्थितियो मे शत्रु को सबक सिखाना कोई मर्यादाविरुद्ध नहीं है। यह ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार व्यक्ति अपनी और परिवार की आत्मरक्षा के लिए हमलावर को हावी ना होने दे और उस पर खुद ही हावी हो जाए। हमारे तंत्र ग्रंथो मे इस प्रकार के कई महत्वपूर्ण प्रयोग है जिसे योग्य समय पर उपयोग करना हितकारी है।

 लेकिन मजाक मस्ती मे या फिर किसी को गलत इरादे से व्यर्थ ही परेशान करने के लिए इस प्रकार की साधनाओ का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए वरना इसका भयंकर विपरीत परिणाम भी आ सकता है। शत्रुओ के द्वारा निर्मित षड्यंत्रो का किसीभी प्रकार से कोई असर हम पर ना हो और भविष्य मे वह हमारे विरुद्ध परेशान या नुकसान के इरादे से कोई भी योजना ना बना पाए इस प्रकार से साधक का चिंतन हो तो वह यथायोग्य है।

 तन्त्र के कई रहस्यपूर्ण और गुप्त विधानों मे से एक विधान है "ज्वाला शत्रु स्तम्भन"। यह अत्यधिक महत्वपूर्ण विधान है जिसे पूर्ण सात्विक तरीके से सम्प्पन किया जाता है लेकिन इसका प्रभाव अत्यधिक तीक्ष्ण है। देवी ज्वाला अपने आप मे पूर्ण अग्नि रूप है, और शत्रुओ की गति मति स्तंभित कर के साधक का कल्याण करती है। साधक को इस प्रयोग के लिए कोई विशेष सामग्री की ज़रूरत नहीं है।

इस विधान को साधक किसी भी दिन से शुरू कर सकता है तथा इसे आठ दिन तक करना है, इन आठ दिनों मे साधक को शुद्ध सात्विक भोजन ही करना चाहिए, लहसुन तथा प्याज भी नहीं खाना चाहिए। यह जैन तंत्र साधना है इस लिए इन बातो का ध्यान रखा जाए।

इस प्रयोग मे वस्त्र तथा आसान सफ़ेद रहे। दिशा उत्तर रहे। साधक रात्री काल मे 10 बजे के देवी ज्वाला को मन ही मन शत्रुओ से मुक्ति के लिए प्रार्थना करे। इसके बाद निम्न मंत्र की 1008 आहुतिय शुद्ध घी से अग्नि मे प्रदान करे।

औम झ्राम् ज्वालामालिनि शत्रु स्तम्भय उच्चाटय फट्

आहुति के बाद साधक फिर से देवी को प्रार्थना करे तथा भूमि पर सो जाए। इस प्रकार आठ दिन नियमित रूप से करने पर साधक के समस्त शत्रु स्तंभित हो जाते है और साधक को किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी नहीं होती। शत्रु के समस्त षडयंत्र उन पर ही भारी पड जाते है।

राज गुरु जी

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Thursday, December 8, 2016

उपयोगी टोने-टोटके

परीक्षा में सफलता हेतु :

परीक्षा में सफलता हेतु गणेश रुद्राक्ष धारण करें। बुधवार को गणेश जी के मंदिर में जाकर दर्शन करें और मूंग के लड्डुओं का भोग लगाकर सफलता की प्रार्थना करें।

बिक्री बढ़ाने हेतु :

 ग्यारह गोमती चक्र और तीन लघु नारियलों की यथाविधि पूजा कर उन्हें पीले वस्त्र में बांधकर बुधवार या शुक्रवार को अपने दरवाजे पर लटकाएं तथा हर पूर्णिमा को धूप दीप जलाएं। यह क्रिया निष्ठापूर्वक नियमित रूप से करें, ग्राहकों की संख्या में वृद्धि होगी और बिक्री बढ़ेगी।

पदोन्नति हेतु :

 शुक्ल पक्ष के सोमवार को सिद्ध योग में तीन गोमती चक्र चांदी के तार में एक साथ बांधें और उन्हें हर समय अपने साथ रखें, पदोन्नति के साथ-साथ व्यवसाय में भी लाभ होगा।

मुकदमे में विजय हेतु :

 पांच गोमती चक्र जेब में रखकर कोर्ट में जाया करें, मुकदमे में निर्णय आपके पक्ष में होगा।

पढ़ाई में एकाग्रता हेतु :

 शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को इमली के २२ पत्ते ले आएं और उनमें से ११ पत्ते सूर्य देव को ¬ सूर्याय नमः कहते हुए अर्पित करें। शेष ११ पत्तों को अपनी किताबों में रख लें पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी।

कार्य में सफलता के लिए :

 अमावस्या के दिन पीले कपड़े का त्रिकोना झंडा बना कर विष्णु भगवान के मंदिर के ऊपर लगवा दें कार्य सिद्ध होगा।

व्यवसाय बाधा से मुक्ति हेतु :

यदि कारोबार में हानि हो रही हो अथवा ग्राहकों का आना कम हो गया हो, तो समझें कि किसी ने आपके कारोबार को बांध दिया है। इस बाधा से मुक्ति के लिए दुकान या कारखाने के पूजन स्थल में शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को अमृत सिद्ध या सिद्ध योग में श्री धनदा यंत्र स्थापित करें। फिर नियमित रूप से केवल धूप देकर उनके दर्शन करें कारोबार में लाभ होने लगेगा।

गृह कलह से मुक्ति हेतु :

 परिवार में पैसे की वजह से कलह रहता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख में पांच कौड़ियां रखकर उसे चावल से भरी चांदी की कटोरी पर घर में स्थापित करें। यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को या दीपावली के अवसर पर करें, लाभ अवश्य होगा।

क्रोध पर नियंत्रण हेतु :

 यदि घर के किसी व्यक्ति को बात-बात पर गुस्सा आता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख को साफ कर उसमें जल भरकर उसे पिला दें। यदि परिवार में पुरुष सदस्यों के कारण आपस में तनाव रहता हो तो पूर्णिमा के दिन कदंब वृक्ष की सात अखंड पत्तों वाली डाली लाकर घर में रखें। अगली पूर्णिमा को पुरानी डाली कदंब वृक्ष के पास छोड़ आएं और नई डाली लाकर रखें। यह क्रिया इसी तरह करते रहें तनाव कम होगा।

मकान खाली कराने हेतु

: शनिवार की शाम को भोजपत्र पर लाल चंदन से किरायेदार का नाम लिखकर शहद में डुबो दें। संभव हो, तो यह क्रिया शनिश्चरी अमावस्या को करें। कुछ ही दिनों में किरायेदार घर खाली कर देगा। ध्यान रहे, यह क्रिया करते समय कोई टोके नहीं।

      आर्थिक समस्या के छुटकारे के लिए

यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए आप 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें !

       घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए

इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें !

या

एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें ! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें ! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें !

      परेशानी से मुक्ति के लिए

आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है ! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें ! उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय ! प्रातः उस जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें ! धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी !

      कुंवारी कन्या के विवाह हेतु

१.       यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी !

२.      प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी

       व्यापार बढाने के लिए

१.       शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें ! ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही !

२.      पूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें !

३.      शुक्र्वार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें ! दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें ! उसके तीन हिस्से कर लें ! उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें ! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें ! यह प्रयोग 40 दिन तक करें ! कारोबार में लाभ होगा !

    लगातार बुखार आने पर

१.       यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें ! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें ! बुखार उतर जायगा !

२.      इतवार या गुरूवार को चीनी, दूध, चावल और पेठा (कद्दू-पेठा, सब्जी बनाने वाला) अपनी इच्छा अनुसार लें और उसको रोगी के सिर पर से वार कर किसी भी धार्मिक स्थान पर, जहां पर लंगर बनता हो, दान कर दें !
३.      यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें ! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा !

       नौकरी जाने का खतरा हो या ट्रांसफर रूकवाने के लिएपांच ग्राम डली वाला सुरमा लें ! उसे किसी वीरान जगह पर गाड दें ! ख्याल रहे कि जिस औजार से आपने जमीन खोदी है उस औजार को वापिस न लायें ! उसे वहीं फेंक दें दूसरी बात जो ध्यान रखने वाली है वो यह है कि सुरमा डली वाला हो और एक ही डली लगभग 5 ग्राम की हो ! एक से ज्यादा डलियां नहीं होनी चाहिए !

      कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो
 यदि उपरोक्त स्थिति का सामना हो तो आप अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल प्रवाह कर दें ! अवश्य लाभ होगा !

       मुकदमें में विजय पाने के लिए

यदि आपका किसी के साथ मुकदमा चल रहा हो और आप उसमें विजय पाना चाहते हैं तो थोडे से चावल लेकर कोर्ट/कचहरी में जांय और उन चावलों को कचहरी में कहीं पर फेंक दें ! जिस कमरे में आपका मुकदमा चल रहा हो उसके बाहर फेंकें तो ज्यादा अच्छा है ! परंतु याद रहे आपको चावल ले जाते या कोर्ट में फेंकते समय कोई देखे नहीं वरना लाभ नहीं होगा ! यह उपाय आपको बिना किसी को पता लगे करना होगा !

     धन के ठहराव के लिए

आप जो भी धन मेहनत से कमाते हैं उससे ज्यादा खर्च हो रहा हो अर्थात घर में धन का ठहराव न हो तो ध्यान रखें को आपके घर में कोई नल लीक न करता हो ! अर्थात पानी टप–टप टपकता न हो ! और आग पर रखा दूध या चाय उबलनी नहीं चाहिये ! वरना आमदनी से ज्यादा खर्च होने की सम्भावना रह्ती है

      मानसिक परेशानी दूर करने के लिए

रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें ! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें ! अपनी पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी गरीब को एक बार दान करें !

    बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए

१.       एक काला रेशमी डोरा लें ! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें ! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें !

२.      प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें ! बच्चा दीर्घायु होगा !
      किसी रोग से ग्रसित होने पर

सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें ! अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें ! सेहत ठीक रहेगी !

       प्रेम विवाह में सफल होने के लिए

यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो :

शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें ! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें ! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें !
    नौकर न टिके या परेशान करे

हर मंगलवार को बदाना (मीठी बूंदी) का प्रशाद लेकर मंदिर में चढा कर लडकियों में बांट दें ! ऐसा आप चार मंगलवार करें !
      बनता काम बिगडता हो, लाभ न हो रहा हो या कोई भी परेशानी हो
हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें !

      यदि आपको सही नौकरी मिलने में दिक्कत आ रही हो

१.       कुएं में दूध डालें! उस कुएं में पानी होना चहिए !
२.      काला कम्बल किसी गरीब को दान दें !
३.      6 मुखी रूद्राक्ष की माला 108 मनकों वाली माला धारण करें जिसमें हर मनके के बाद चांदी के टुकडे पिरोये हों !

       अगर आपका प्रमोशन नहीं हो रहi

१.       गुरूवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुये जैसे खाद्य पदार्थ, फल, कपडे इत्यादि का दान करें !

२.      हर सुबह नंगे पैर घास पर चलें !

      पति को वश में करने के लिए यह प्रयोग शुक्ल  पक्ष में करना चाहिए ! एक पान का पत्ता लें ! उस पर चंदन और केसर का पाऊडर मिला कर रखें ! फिर दुर्गा माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुर्गा स्तुति में से चँडी स्त्रोत का पाठ 45 दिन तक करें ! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पत्ते पर रखा था, का तिलक अपने माथे पर लगायें ! और फिर तिलक लगा कर पति के सामने जांय ! यदि पति वहां पर न हों तो उनकी फोटो के सामने जांय ! पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो ! रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें ! 45 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें ! शीघ्र समस्या का समाधान होगा

राज गुरु जी

महाविद्या आश्रम
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